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Pasandida Aurat Season 3 – 26

Pasandida Aurat Season 3 – 26

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

सुरभि अनिकेत की बाँहो में थी और सिद्धार्थ ये देखकर गुस्से में वापस चला गया। सिद्धार्थ को देखकर सुरभि घबरा गयी क्योकि सिद्धार्थ को सच नहीं पता था और कही उसे अनिकेत के साथ देखकर वह कुछ गलत ना समझ ले। सुरभि ने अनिकेत को खुद से दूर किया और गुस्से से कहा,”दूर हटो मुझसे , तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे नजदीक आने की,,,,,,,,,,,,!!!!”

“ओह्ह्ह कम ऑन सुरभि तुम तो ऐसे बात कर रही हो जैसे मैंने पहले कभी तुम्हे गले लगाया ही ना हो,,,,,,,,,,,,,,क्या हो गया है तुम्हे सुरभि ? तुम भी तो यही चाहती थी ना कि मैं तुम्हारी जिंदगी में वापस आ जाऊ तो लो मैं आ गया , मैं सब कुछ छोड़कर तुम्हारे पास आया हूँ सुरभि,,,,,,,अब जब तुम्हारे पास आया हूँ तो तुम मुझसे दूर क्यों जाना चाहती हो ?”,अनिकेत ने फिर सुरभि के करीब आकर कहा

जैसे ही अपना हाथ सुरभि के गाल की तरफ बढ़ाया सुरभि ने उसे पीछे धक्का देकर कहा,”मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं है , आज जब तुम किसी और के साथ खुश नहीं हो इसलिए तुम मेरे पास आये हो , तुम भूल गए तुम अब शादीशुदा हो,,,,,,,,,तुम्हारी वाइफ है किसी के हस्बेंड हो तुम,,,,,,,,,,और तुम यहाँ आकर मेरे सामने ये बकवास कर रहे हो,,,,,,,,,चले जाओ यहाँ से और आइंदा मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना”

सुरभि को गुस्से में देखकर अनिकेत शांत हो गया वह अवाक सा सुरभि को देखने लगा और कहा,”ये तुम मुझसे कह रही हो सुरभि , तुम मुझे यहाँ से जाने के लिए कह रही हो ? अरे ! तुम तो मुझसे प्यार करती थी ना सुरभि फिर इतनी जल्दी तुम्हारा मन कैसे बदल सकता है ? और क्या कहा तुमने मैं शादीशुदा हूँ तो ठीक है मैं शिवानी को डाइवोर्स दे दूंगा बस तुम मेरे पास वापस आ जाओ,.,,,,,,,,,,प्लीज सुरभि मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता प्लीज”

“तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है अनिकेत ! ये कैसी बहकी बहकी बाते कर रहे हो तुम ? जिस लड़की को तुमने खुद पसंद करके शादी की तुम उसी लड़की से डिवोर्स लेने की बात कर रहे हो,,,,,,,,,मैं ऐसा हरगिज नहीं होने दूंगी समझे तुम”,सुरभि ने गुस्से से कहा

अनिकेत को इस वक्त सुरभि के अलावा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था वह किसी भी हाल में उसे वापस पाना चाहता था इसलिए वह उसके पास आया और उसकी बाँहो को मजबूती से पकड़कर उसकी आँखों में देखते हुए कहा,”सुरभि ! सुरभि देखो मेरी आँखों में क्या तुम्हे इन आँखों में प्यार नजर नहीं आता,,,,,,,,,,सुरभि मैं तुम से बहुत प्यार करता हूँ मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे सिर्फ तुम्हारे साथ रहना है सुरभि ये बात तुम्हे समझ क्यों नहीं आती ?”

कहते कहते अनिकेत एकदम से चिल्ला उठा ये देखकर सुरभि सहमकर पीछे हट गयी। अब उसे अनिकेत से थोड़ा थोड़ा डर लगने लगा क्योकि गुस्से में इंसान कब क्या कर दे ये कोई नहीं जानता।
सुरभि ने अपने कदम पीछे बढ़ा लिए तो अनिकेत उसकी आँखों में देखते हुए उसकी तरफ बढ़ा हालाँकि सुरभि किसी से डरती नहीं थी लेकिन उसके सामने खड़े शख्स से सुरभि ने कभी प्यार किया था बस इसलिए वह थोड़ा नरमी से पेश आ रही थी।

सुरभि को सहमा देखकर अनिकेत को लगा सुरभि उसकी बात मान जाएगी और इसी ख्याल के साथ वह सुरभि के करीब जाने लगा और जैसे ही उसने सुरभि को चूमने के लिए अपने होंठो को आगे बढ़ाया किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे रोक लिया। सुरभि डरकर पहले ही अपनी आँखे बंद कर चुकी थी। अनिकेत ने पलटकर देखा तो उसका ही हमउम्र एक लड़का खड़ा था जिसे अनिकेत नहीं जानता था क्योकि उसने सिर्फ सिद्धार्थ का नाम सुना था उस से कभी मिला नहीं था।

“कौन है बे तू ?”,अनिकेत ने गुस्से से पूछा
सिद्धार्थ ने उसे कोई जवाब नहीं दिया और एक घुसा सीधा अनिकेत के मुँह पर दे मारा। अनिकेत लड़खड़ा कर टेबल पर जा गिरा। सुरभि ने घबराकर अपनी आँखे खोली सिद्धार्थ को वहा देखकर उसकी आँखों में आँसू भर आये साथ ही वह सिद्धार्थ और अनिकेत को आमने सामने देखकर घबरा भी गयी। वह उनमे से किसी को रोकती इस से पहले अनिकेत उठा और सिद्धार्थ की तरफ आते हुए कहा,”साले तू है कौन और तेरी इतनी हिम्मत तू मुझे मारे,,,,,,,,,,,,,!!!”

कहते हुए अनिकेत ने जैसे ही सिद्धार्थ को मारने के लिए हाथ उठाया सिद्धार्थ ने उसका हाथ रोक लिया और घुमाकर एक घुसा और दे मारा , इस बार घुसा अनिकेत की नाक पर लगा और उसकी नाक से खून बहने लगा।
अनिकेत का सिद्धार्थ पर तो कोई जोर चला नहीं वह सुरभि की तरफ पलटा और कहा,”कौन है ये सुरभि ? कही ये तुम्हारा नया यार तो नहीं जिसके लिए तुम मुझे और मेरे प्यार को ठुकरा रही हो,,,,,,,,,,,उदयपुर से यहाँ इसलिए आयी थी ना तुम ताकि इसके साथ गुलछर्रे उड़ा सको”

“अपनी बकवास बंद करो अनिकेत ये , ये सिर्फ मेरा अच्छा दोस्त है”,सुरभि ने झुंझलाकर कहा वह अनिकेत के सामने अपने और सिद्धार्थ के रिश्ते को इस से बेहतर कोई नाम नहीं दे पायी। सुरभि के मुँह से अपने लिए दोस्त सुनकर सिद्धार्थ को चुभन का अहसास जरूर हुआ लेकिन इस वक्त वह चुप रहा और गुस्से से अनिकेत को देखता रहा।

सुरभि की बात सुनकर अनिकेत और चिढ गया और कहा,”दोस्त ? लड़का लड़की कभी दोस्त नहीं होते सुरभि और अगर ये तुम्हारा दोस्त है तो फिर ये इतनी सुबह सुबह यहां क्या कर रहा है ?”
सुरभि के पास अनिकेत की इस बात का कोई जवाब नहीं था क्योकि वह भी नहीं जानती थी सिद्धार्थ यहाँ क्यों आया है ? उसने ख़ामोशी से एक नजर सिद्धार्थ को देखा तो अनिकेत सुरभि की तरफ आया और उसकी बाँह पकड़कर उसे अपनी तरफ करके कहा,”ये तुम्हारा दोस्त नहीं है , नया आशिक़ है तुम्हारा”

सुरभि ने सुना तो हैरानी से अनिकेत को देखने लगी , आज से पहले उसने अनिकेत का इतना भद्दा रूप नहीं देखा था। उसकी आँखों में दुःख और चेहरे पर निराशा के भाव थे और वह यकीन नहीं कर पा रही थी कि ये सब अनिकेत उस से कह रहा है। अनिकेत ने सिद्धार्थ को देखा और फिर सुरभि को देखकर कहा,”मेरी गैरमौजूदगी में यहाँ आता जाता रहा होगा ना ये यहाँ , खामोश क्यों हो जवाब दो ? सोई हो न इसके साथ ?”
“अनिकेत , तुम अपनी लिमिट क्रॉस कर रहे हो”,सुरभि ने चिल्लाकर कहा

अनिकेत के हाथ की पकड़ सुरभि की बाँह पर और कस गयी और उसने जलती आँखों से सुरभि को देखकर कहा,”लिमिट तो तुमने क्रॉस की है सुरभि”
“हाथ छोड़”,सुरभि के चेहरे पर दर्द के भाव देखकर सिद्धार्थ ने अनिकेत से कहा
अनिकेत ने सिद्धार्थ की बात को नजरअंदाज कर दिया और सुरभि की बांह को थामे रखा। सिद्धार्थ अनिकेत की तरफ आया और उसके हाथ से सुरभि की बाँह छुड़ाकर उसे साइड में फेंकते हुए कहा,”एक बार और इसे हाथ लगाया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा समझा”

अनिकेत नीचे जा गिरा और सिद्धार्थ सुरभि के आगे आकर खड़ा हो गया। सुरभि के दिमाग ने तो जैसा इस वक्त काम करना ही बंद कर दिया। उसे समझ नहीं आ रहा था किसे रोके और किस समझाए,,,,,,,,,,वह हक्की बक्की सी दोनों को देखती रही। दो लड़के उसके लिए आपस में लड़ रहे थे ये देखकर ही सुरभि का दिल बैठा जा रहा था।

अनिकेत उठा और सिद्धार्थ की तरफ देखकर कहा,”क्या लगता है तू इसका और क्या रिश्ता है इस से तुम्हारा ?”
“इसका मेरा क्या रिश्ता है ये मुझे तुझे बताने की जरूरत नहीं है , बहुत हो गया तेरा नाटक अब चुपचाप यहाँ से निकल वरना मार मार कर वो हालत करूंगा तेरी कि जिंदगी भर याद रखेगा”,सिद्धार्थ ने गुस्से से कहा
“साले ! मुझे धमकी देता है”,अनिकेत कहते हुए सिद्धार्थ की तरफ आया और एक घुसा सिद्धार्थ को जड़ दिया।

बस फिर क्या था दोनों कुत्तो की तरह आपस में उलझ पड़े और एक दूसरे पर लात-घुसे बरसाने लगे। उनकी इस मारपीट में सुरभि के फ्लेट का सामान तो टुटा ही साथ ही पुरे घर में सामान यहाँ वहा भी फ़ैल गया। सुरभि ने दोनों को आपस में लड़ते देखा तो दोनों के पास आकर उन्हें एक दूसरे से अलग किया और गुस्से से भरकर चिल्लाई,”बस,,,,बस करो तुम लोग”
सिद्धार्थ के होंठ से खून निकल आया था और अनिकेत के नाक , मुँह से खून निकल आया था और आँख के पास का हिस्सा नीला पड़ गया।

दोनों अभी भी गुस्से से एक दूसरे को घूर रहे थे। सुरभि अनिकेत के सामने आयी और कहा,”जब मुझे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत थी तब मुझे छोड़कर तुमने किसी और का हाथ थाम लिया और अब तुम आये हो अपना प्यार साबित करने,,,,,,,,,,,,,,नहीं चाहिए मुझे तुम्हारा प्यार और ना ही मुझे तुम्हारे साथ कोई रिश्ता रखना है समझे तुम,,,,,,,,,भूल चुकी हूँ मैं कि मैंने कभी तुम से प्यार भी किया था। निकल जाओ मेरे घर से और आइंदा अगर तुमने यहाँ आकर तमाशा करने की कोशिश भी की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,,,,,,,,,,चले जाओ यहाँ से और आइंदा मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना”

सुरभि की नफरत भरी बाते सुनकर अनिकेत को ये अहसास हो गया कि सुरभि अभी उसकी जिंदगी से बहुत दूर जा चुकी है अब वह किसी भी हाल में वापस नहीं आएगी। उसने मायूसी से अपना सर झुकाया और चुपचाप वहा से चला गया।  

अनिकेत के सामने से हटकर सुरभि सिद्धार्थ के सामने आयी और उतने ही गुस्से से कहा,”और तुम ? समझते क्या हो तुम अपने आप को ? मैंने ज़रा सा हंसकर बात क्या कर ली तुमने मुझ पर अपना अधिकार समझ लिया,,,,,,,,,,,,ऐसे लड़ रहे थे उस से जैसे गली के कोई गुंडे हो। आखिर क्या हक़ बनता है तुम्हारा मुझ पर जो तुमने अनिकेत से ये सब कहा,,,,,,,,,,,,,,,,मैं अपने तरीके से सब हेंडल कर रही थी ना फिर क्यों आये वापस ?

ओह्ह्ह्ह मुझ पर ये अहसान जताने आये होंगे ना कि फ़िक्र मत करो सुरभि तुम्हारी रक्षा करने के लिए मैं हूँ,,,,,,,,,,,,,,तो फॉर योर काइंड इन्फॉर्मेशन मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत नहीं है !  मैं अपनी रक्षा खुद कर सकती हूँ समझे तुम,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
सुरभि की बाते सिद्धार्थ के दिल पर पत्थर सी लग रही थी। आज से पहले उसे सुरभि की कही बातो से तानो से कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन अब जब वह ये मान चुका था कि उसे सुरभि से प्यार हो गया है उसके बाद सुरभि के मुँह से ये सब बाते सुनना उसे तकलीफ पहुंचा रहा था।

सिद्धार्थ ने हिम्मत करके जैसे ही कुछ कहना चाहा सुरभि ने अपना हाथ उसके सामने करके उसे बोलने से रोक दिया और कहा,”जाओ यहा से”
“सुरभि मैं,,,,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने कहना चाहा लेकिन सुरभि इस वक्त इतनी ज्यादा उलझ चुकी थी कि वह सिद्धार्थ से कोई बात नहीं करना चाहती थी इसलिए कहा,”प्लीज जाओ यहाँ से प्लीज,,,,,,,,,,!!!!”
सिद्धार्थ ने सुरभि को और तकलीफ देना नहीं चाहता था इसलिए आगे कुछ नहीं कहा और चुपचाप वहा से चला गया। सुरभि ने दरवाजा बंद किया और हॉल में चली आयी। अपना बिखरा हुआ हॉल देखकर सुरभि ने अपना सर पकड़ लिया और घुटने टेककर वही बैठ गयी और रो पड़ी।

गोआ रिसोर्ट
तैयार होकर अवनि और पृथ्वी शॉपिंग और घूमने निकल गए। पृथ्वी ने रेंट पर एक स्कूटी खरीद ली और अवनि को साथ लेकर गोआ की सड़को पर घूमने निकल पड़ा। दोपहर तक उसने अवनि के साथ अपने और अवनि के लिए कुछ कपडे और सामान खरीदा और फिर बाहर ही एक अच्छी जगह पर दोनों खाना खाकर वापस होटल चले आये।
दोनों काफी थक चुके थे इसलिए सीधा बिस्तर पर आ गिरे। पृथ्वी और अवनि का आधा शरीर बिस्तर पर था और दोनों के पैर बिस्तर से लटक रहे थे। दोनों एक दूसरे का हाथ थामे लेटे थे और खुश थे। एक सुकून था जो दोनों के चेहरों पर झिलमिला रहा था।

“अच्छा अवनि ! एक बात पुछू”,अवनि के बगल में लेटे पृथ्वी ने कहा
“पूछिए”,अवनि ने कहा
“तुमने कभी सोचा था इक रोज हमारी शादी हो जाएगी और हम ऐसे साथ होंगे ?”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ पलटकर कहा। उसने अपनी कोहनी बिस्तर पर टिकाकर सर हथेली से लगा लिया और प्यार भरी नजरो से अवनि को देखने लगा

अवनि अभी भी पीठ के बल सीधी लेटी थी और बिस्तर से लटकते अपने पैरों को हिलाकर अपनी उंगलियों से आपस में ही खेलते हुए कहा,”नहीं मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा था , मुझे तो लगता था हम कभी एक दूसरे से मिलेंगे भी नहीं लेकिन महादेव ने हमारी किस्मत में कुछ और ही लिखा था”
“लेकिन मुझे पहले दिन से ये विश्वास था कि मेरी शादी तुम से होगी”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने सुना तो अपनी उंगलियों से खेलना बंद कर पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”ऐसा क्यों ? किसी से बिना मिले , बिना उसके साथ वक्त बिताये आप ये कैसे तय कर सकते है कि आपको उस से शादी करनी है ?”
“बस कर सकते है ! उस दिन जब पहली तुमने मुझे विडिओ कॉल किया था  , उस दिन तुम्हे देखकर ना जाने क्यों दिल से एक आवाज आयी कि बस यही चाहिए और फिर तुम्हे मनाने में मुझे जो मेहनत करनी पड़ी है उफ्फ्फ,,,,,,,,,,,तुम नहीं जानती तुम्हारा साथ पाने के लिए मैंने क्या क्या सहा है अवनि”,पृथ्वी ने कहा और ये कहते कहते वह थोड़ा भावुक हो गया।

अवनि उसकी आँखों में झांक ना ले ये सोचकर वह दूसरी तरफ देखने लगा
पृथ्वी के साथ रहते रहते अवनि उसे समझने लगी थी इसलिए उसने भी आगे इस बारे में नहीं पूछा और कहा,”अच्छा अब बताओ उस दिन आपने भगवान् से क्या मांगा ?’
 अवनि की बात सुनकर पृथ्वी को वो दिन याद आ गया जब अवनि ने पहली बार उसे विडिओ कॉल करके भगवान् के दर्शन करवाए थे और उसे कुछ मांगने को कहा था।

अपने ही ख्यालो में खोया पृथ्वी मुस्कुराने लगा ये देखकर अवनि ने कहा,”बताईये ना”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और प्यार से कहा,”मैंने उस दिन महादेव से कहा कि ये जो लड़की है , मैं इस से शादी करना चाहता हूँ। इसे आप मेरी किस्मत में लिख दो , जिस दिन ये मुझे मिल जाएगी तब मैं आपके दर्शन करने जरूर आऊंगा”

अवनि ने सुना तो मुस्कुरा उठी और पृथ्वी के गाल को अपने होंठो से छू लिया। अवनि को सामने से पहल करते देखकर पृथ्वी ने उसे अपनी बाँहो में भरा और जैसे ही अपने होंठो को उसके होंठो की तरफ बढ़ाया अवनि ने एकदम से कहा,”आप मुझे कुछ बताने वाले थे”
“क्या बताने वाला था ?”,पृथ्वी ने सामने से सवाल किया क्योकि उसे कुछ याद नहीं था
“घर पर आपने मुझसे कहा था कि आपको मुझसे सुरभि के बारे में कुछ बात करनी है और आप यहाँ आकर मुझे बताएँगे,,,,,,,,,,,बताईये क्या बात है ?”,अवनि ने कहा

“अवनि तुम इतनी अनरोमांटिक कैसे हो सकती हो ? ज़रा देखो मैं तुम्हे प्यार करने के लिए मरा जा रहा हूँ और तुम मुझसे ये सब पूछ रही हो,,,,,,,,,!!”,कहते हुए पृथ्वी ने जैसे ही अवनि के करीब जाने की कोशिश की अवनि ने उसे फिर रोक दिया और कहा,”अभी क्यों नहीं बता सकते ?”
“क्योकि अभी मेरा मूड नहीं है”,ये कहते हुए पृथ्वी ने आख़िरकार अवनि के होंठो को अपने होंठो की गिरफ्त में ले ही लिया जिस से अवनि आगे कुछ ना बोल पाए

( सिद्धार्थ और अनिकेत का ये झगड़ा क्या असर डालेगा सुरभि की हंसती खेलती जिंदगी पर ? क्या सुरभि अकेले सम्हाल पाएगी ये सिचुएशन या लेगी फिर से पृथ्वी की मदद ? क्या पृथ्वी बताने वाला है अवनि को सुरभि और सिद्धार्थ के बारे में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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