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Pasandida Aurat Season 3 – 25

Pasandida Aurat Season 3 – 25

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी ने देखा अवनि ने उसकी टीशर्ट पहनी है और उस पर वह उसे खींच रही है ताकि अवनि के घुटने ढक जाए ये देखकर पृथ्वी की भँवे चढ़ गयी और उसने कहा,”ये तुम क्या कर रही हो ? सीधी खड़ी हो जाओ”
अवनि ने सुना तो टीशर्ट छोड़कर सीधी खड़ी हो गयी लेकिन पृथ्वी से नजर ना मिलाते हुए इधर उधर देखते हुए अपने नाख़ून चबाने लगी।

“हाथ हटाओ”, पृथ्वी ने फिर कठोरता से कहा तो अवनि ने अपना हाथ नीचे कर लिया लेकिन पृथ्वी से नजरे वह अभी भी नहीं मिला रही थी दरअसल उसे शर्म आ रही थी। बीती रात जो कुछ हुआ उसके बाद पृथ्वी से नजरे मिलाना भी उसे मुश्किल लग रहा था जैसे उसके सामने खड़ा शख्स अनजान हो। अवनि को इधर उधर देखते पाकर पृथ्वी ने बड़े प्यार से कहा,”बेटा ! तुमने मेरा टीशर्ट पहना वो ठीक है लेकिन इसे उल्टा क्यों पहना है ?”

अवनि ने सुना तो जल्दी से टीशर्ट को देखा जो कि सच में उलटा था उसने जल्दबाजी में पृथ्वी के सामने ही उसे निकालने को हाथ बढ़ाये तो पृथ्वी ने अपनी आँखों पर हाथ रखकर कहा,”ए ! मेरे सामने नहीं साइड में जाकर”
“हाह ! बोल तो ऐसे रहे है जैसे बहुत शरीफ हो”,अवनि धीरे से बड़बड़ायी और परदे के पीछे चली गयी।
“सब सुन रहा है मुझे”,पृथ्वी ने पलटकर शीशे के सामने आते हुए कहा और अपने बालों में हाथ घुमाते हुए खुद को ही निहारने लगा।

उसकी गर्दन या सीने पर अवनि के जैसे कोई निशान नहीं थे बल्कि कंधे पर नाखुनो के निशान जरूर थे ये देखकर पृथ्वी को बीती रात का ख्याल आया और वह मुस्कुरा उठा। वह मुस्कुराते हुए शीशे में देख ही रहा था कि अवनि चुपचाप उसके पीछे से दरवाजे की तरफ बढ़ गयी लेकिन पृथ्वी ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और अपने आगे खड़े करके उसका मुँह शीशे की तरफ घुमाकर अपना कंधा दिखाकर कहा,”घर जाकर सबसे पहले तुम्हारे नाख़ून काटूंगा”

अवनि ने पृथ्वी के कंधे पर जब नाख़ून के निशान देखे तो शरमाकर अपनी नजरे झुका ली। पृथ्वी को अवनि हर हाल में पसंद थी लेकिन जब वह ऐसे शर्माते देखता था तो उसे अवनि से और प्यार होने लगता।

उसने अपनी बाँहो को अवनि की कमर से लपेटा और अपनी ठुड्डी अवनि के कंधे पर टिकाकर शरारत से कहा,”अगर तुम रोज मुझे वैसे ही प्यार करो जैसे कल रात किया तो मैं तुम्हारे नाख़ून खाने को तैयार हूँ”
पृथ्वी की बात सुनकर तो अवनि शर्म से और ज्यादा सिकुड़ गयी। उसने अपनी नजरे नहीं उठायी उलटा आँखे ही बंद कर ली और ये देखकर पृथ्वी के अपने होंठो को अवनि की गर्दन से छू दिया।

वह अवनि की गर्दन को छूते ही चला जा रहा था कि एकदम से अवनि की आह निकली और पृथ्वी अवनि से दूर हटा। अवनि पृथ्वी की तरफ पलटी और अपना हाथ अपनी गर्दन पर रख लिया ये देखकर पृथ्वी ने उसका हाथ हटाते हुए कहा,”क्या हुआ ? दिखाओ मुझे”
पृथ्वी ने अवनि का हाथ हटाकर देखा तो नजर अवनि की गर्दन पर बने निशानों पर गयी जिन्हे मॉर्डन लेंग्वेज में “Love Bites” कहा जाता है। ये देखकर पृथ्वी पहले तो मुस्कुराया और फिर अपना कान पकड़कर अवनि से कहा,”सॉरी ! मैं कुछ ज्यादा ही वाइल्ड हो गया”

अवनि पृथ्वी को साइड कर जाने लगी तो पृथ्वी ने उसे फिर रोक लिया और कहा,”मैंने सॉरी कहा”
“पहले काटो फिर सॉरी बोल दो”,अवनि ने मुँह बनाकर कहा हालाँकि ये गुस्सा झूठा था
“अच्छा ठीक है तो फिर तुम भी काट लो”,पृथ्वी ने कहा
“पक्का ?”,अवनि ने पूछा
“अरे हाँ बाबा,,,,,,,,,,,ऐसी चीजों के लिए भला ना कौन कहता है ?”,कहते हुए पृथ्वी ने अवनि को अपनी बाँहो में भरा और जैसे ही अपने होंठो अवनि की तरफ बढ़ाये अवनि ने उसके होंठो पर अपना हाथ रखा और मुस्कुरा कर कहा,”मेरा तरीका थोड़ा अलग है , अपनी आँखे बंद कीजिये”

“अह्ह्ह ठीक है”,पृथ्वी ने कहा और ख़ुशी ख़ुशी अपनी आँखे बंद कर ली। अवनि ने पृथ्वी की आँखों के सामने हाथ हिलाकर ये चेक किया कि सच में पृथ्वी की आँखे बंद है या नहीं और फिर एकदम से उसकी बाँह पर जोर से काट लिया। पृथ्वी जो चिल्लाया है उसकी चीख़ पुरे बाथरूम में गूँज उठी और अवनि मुँह बनाकर वहा से चली गयी।
पृथ्वी ने अपने हाथ को देखा जहा अवनि के छोटे छोटे दाँतो के निशान पड़ चुके थे वह बेचारा फूँक मारते हुए शीशे के सामने आया और नल चालू कर अपना हाथ उसके नीचे कर दिया।

पृथ्वी को अवनि पर बिल्कुल गुस्सा नहीं आया क्योकि उसने अवनि को जितना परेशान किया था उसके सामने तो ये कुछ भी नहीं था। पृथ्वी ने मुँह धोया ब्रश किया और नहाकर बाहर चला आया। उसने देखा कुर्सी पर बैठी अवनि सो रही है तो वह उसके पास आया और जान बुझकर अपने गीले बालों को उस पर झड़का दिया।

पानी गिरने से अवनि हड़बड़ा कर उठी और जब उसने देखा ये शरारत पृथ्वी ने की तो उसे मारने उसकी तरफ आयी लेकिन फर्श पर गिरे पानी की वजह से अवनि का पैर फिसला और वह गिरती उस से पहले पृथ्वी ने अपनी मजबूत बाँह में उसे थाम लिया। बिखरे बालो के साथ पृथ्वी अवनि को देखने लगा और अवनि पलकें झपकाते हुए पृथ्वी को , कहने को दोनों पति पत्नी थे लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे पहली बार मिले हो।

अवनि को होश आया तो वह सीधी खड़ी हुई और पृथ्वी से दूर हटकर सूटकेस की तरफ चली आयी।  

अवनि सिर्फ सूट और साड़ी लेकर आयी थी ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”अवनि एक काम करो तुम कोई सूट पहन लो ! सबसे पहले हम तुम्हारे लिए कुछ कपडे खरीदने चलेंगे”
“कपड़े क्यों ? ये इतने सारे कपडे है ना पृथ्वी”,अवनि ने कहा
“कोई बात नहीं थोड़े और ले लेंगे,,,,,,,,,,,जाओ जल्दी नहाकर आओ मैं तब तक तैयार हो जाता हूँ और ब्रेकफास्ट बाहर ही करेंगे”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी पर कपडे लेकर नहाने चली गयी। पृथ्वी ने भी अपने कपडे उठाये और पहनकर शीशे के सामने चला आया। पृथ्वी अपने बालों को अवनि के ड्रायर से सुखा ही रहा था कि तभी उसका फोन बजा ! पृथ्वी ने अपना फ़ोन देखा स्क्रीन पर लता का नंबर देखकर पृथ्वी मुस्कुराया और फोन कान से लगाकर कहा,”हेलो आई”

“हेलो के बच्चे 2 दिन हो गए तुझे यहाँ से गए हुए ना कोई फोन ना कोई खबर , तुम लोग ठीक तो हो ना और अवनि कहा है ?”,लता ने पृथ्वी को फटकार लगाकर कहा तो पृथ्वी चिढ़ने के बजाय मुस्कुराया
“अवनि नहाने गयी है और मैंने आपको फोन करने ही वाला था लेकिन यहाँ आकर ऐसा बिजी हुआ न कि टाइम ही नहीं मिला”,पृथ्वी ने कहा

“वापस कब आ रहे हो तुम लोग ? तुम दोनों के बिना यहाँ कुछ अच्छा नहीं लग रहा ,, आई भी तुझे बहुत मिस कर रही है”,लता ने कहा
“जल्दी आ जायेंगे ज़रा दादी से बात करवाना”,पृथ्वी ने कहा
लता ने फोन दादी को दे दिया तो दूसरी तरफ से पृथ्वी ने कहा,”का बूढ़ी ! पोता हनीमून पर आया है तो मन नहीं लग रहा,,,,,,,,,,,ये अपनी मण्डली के साथ मिलकर मुझे और मेरी बायको को डिस्टर्ब करना बंद करो आप लोग,,,,,,,,,!!!”

दादी को छेड़ने में पृथ्वी को बड़ा मजा आता था और दादी भी उसकी बात सुनकर चिढ जाया करती थी इसलिए कहा,”हाँ हाँ तुमहू तो ऐसे कह रहे हो जैसे हम लोग डिस्टर्ब ना करि तो आते ही एक ठो बबुआ हमारी गोद में डाल दोगे,,,,,,,,,,,बेशर्म कही का,,,,,,!!”
पृथ्वी ने सुना तो हसने लगा और कहा,”अरे महादेव ने चाहा तो पोता पोती का मुँह भी दिखा दूंगा,,,,,,,,,,,,अभी आप मुझे जानती नहीं है”

“चल चल बड़ा आया मुझसे जान पहचान बढ़ाने वाला , बहू कहा है ? वो वहा ठीक से है कि नहीं और तू उसका ख्याल रख रहा है ना,,,,,,,,,,,,,,,,अच्छे से घूमना फिरना और अच्छा अच्छा खाना”,दादी ने कहा
“हाँ आई ! जब से आया हूँ ख्याल ही रख रहा हूँ ,, अभी अवनि बाथरूम में है वो जैसे ही आती है बात करवाता हूँ”,पृथ्वी ने कहा  

“ठीक है ख्याल रखो अपना और बहू का , मैं रखती हूँ”,कहकर दादी ने फोन काट दिया और पृथ्वी ने फोन रखा और पीठ के बल बिस्तर पर आ गिरा। अवनि के साथ बिताया वो खूबसूरत वक्त उसकी आँखों के सामने चल रहा था और पृथ्वी बस मुस्कुरा रहा था।

सिद्धार्थ का घर , सिरोही
जगदीश जी से हुई बहस के बाद सिद्धार्थ देर रात तक जागता रहा और सोचता रहा कि वह जगदीश जी को सुरभि से मिलने के लिए कैसे मनाये ? गिरिजा सिद्धार्थ के फैसले के साथ थी लेकिन जगदीश जी अभी भी अपनी जिद पर अड़े थे कि वे इस शादी के लिए हाँ नहीं कहेंगे। रातभर सिद्धार्थ परेशान सा कमरे में यहाँ वहा चक्कर काटता रहा लेकिन उसे कोई हल नहीं मिला। सुबह खिड़की से आती धूप सिद्धार्थ के चेहरे पर पड़ी वह उठ बैठा और अपनी आँखे मसलते हुए अपने बगल में पड़े फोन को उठाकर देखा।

ना सुरभि का कोई मैसेज था ना ही कोई फोन , सिद्धार्थ ने फोन में आये कुछ नोटिफिकेशन चेक किये और फिर कमरे से बाहर चला आया। जगदीश जी हॉल में बैठकर चाय पीते हुए सुबह का अखबार पढ़ रहे थे सिद्धार्थ उनके पास आया और कहा,”पापा , कल रात के लिए मैं आपसे माफ़ी चाहता हूँ,,,,,,,,,,,,,,मुझे आपसे इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी”

सिद्धार्थ की बात सुनकर जगदीश जी ने उसकी तरफ देखा तो सिद्धार्थ ने धीरे से कहा,”पापा ! बस एक बार आप सुरभि से मिल लीजिये,,,,,,,,,,,,वो वैसी नहीं है जैसा आप लोग पिछली बार उस से मिले थे। वो अच्छी लड़की है,,,,,,,,,,,,,प्लीज पापा”

सिद्धार्थ की बात सुनकर जगदीश जी ने नजरे घुमा तो सिद्धार्थ एक कोशिश और करते हुए कहा,”अच्छा मिलिए मत एक बार उस से बात तो कर लीजिये”
“ठीक है ! लगाओ उसे फोन”,जगदीश जी ने कहा
सिद्धार्थ ने कहा तो ख़ुशी से उसकी आँखे चमक उठी , वह अपना फोन लेने कमरे की तरफ चला गया। जगदीश जी में आया बदलाव देखकर गिरिजा का मन भी हल्का हो गया और वे भी हॉल में चली आयी।

सिद्धार्थ अपना फोन लेकर आया और काँपते हाथो से सुरभि का नंबर डायल किया। सिद्धार्थ के हाथ ख़ुशी के मारे कांप रहे थे। रिंग जाती रही लेकिन सुरभि ने फोन नहीं उठाया। सिद्धार्थ ने झेंपकर जगदीश जी को देखा और एक बार फिर सुरभि का नंबर डायल किया। इस बार भी रिंग जाती रही लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। सिद्धार्थ ने गिरिजा की तरफ देखा और कहा,”फोन नहीं उठाया ! शायद सो रही होगी”

जगदीश जी ने सुना तो अपना सर झटका और एक बार फिर अख़बार उठाकर अपने चेहरे के सामने कर लिया। ये देखकर सिद्धार्थ ने मायूसी से गिरिजा जी की तरफ देखा और गिरिजा ने कहा,”अरे फोन क्यों करना ? जाकर उसे घर ही ले आ ना ,, आमने सामने बैठकर बाते हो जाएगी”

 गिरिजा की बात सुनकर सिद्धार्थ मुस्कुराया क्योकि फोन पर तो हो सकता है जगदीश जी सुरभि को ठीक से समझ ना पाए लेकिन सामने होगी तो उन्हें उसकी और सिद्धार्थ की बात सुननी भी पड़ेगी और समझनी भी पड़ेगी साथ ही उसे सुरभि को ये समझाने का मौका भी मिल जाएगा कि उसे जगदीश जी के सामने क्या बोलना है और क्या नहीं ?
सिद्धार्थ ने गाड़ी की चाबी उठाई और ख़ुशी ख़ुशी वहा से निकल गया। जगदीश जी ने हैरानी से गिरिजा को देखा तो वे भी आँखे मटकाकर मुस्कुराते हुए वहा से चली गयी।

सुरभि का अपार्टमेंट , सिरोही
सिद्धार्थ ने जब फोन किया तब सुरभि बाथरूम में थी वह बाहर आयी और अपना फोन देखा तो स्क्रीन पर सिद्धार्थ के दो मिस्ड कॉल देखकर खुद में ही बड़बड़ाई,”इसने इतनी सुबह मुझे फोन क्यों किया है ? ओह्ह्ह गॉड मुझे नहीं करेगा तो फिर किसे करेगा आखिर इसकी जिंदगी मेरे अलावा कोई है ही कौन ?
इसे वापस फोन लगाती हूँ और पूछती हूँ फ़ोन क्यों किया था ?”
सुरभि सिद्धार्थ का नंबर डॉयल करने जा ही रही थी कि तभी डोरबेल बजी और सुरभि फिर बड़बड़ायी,”अजीब आदमी है ! फोन नहीं उठाया तो सीधा घर ही चला आया,,,,,,,,,,,,,,,अभी जाकर देखती हूँ”

कहते हुए सुरभि ने फोन बिस्तर पर फेंका और कमरे से बाहर आकर दरवाजा खोला लेकिन जैसे ही उसने सामने खड़े शख्स को देखा उसके चेहरे का रंग उड़  गया और आवाज गले में अटक गयी। सुरभि के सामने अनिकेत खड़ा था। जी हाँ ! वही अनिकेत जिस से सुरभि प्यार करती थी और वह सुरभि को छोड़कर  किसी और से शादी करने जा रहा था। अनिकेत को देखकर सुरभि हक्की बक्की रह गयी। वह बोलना तो बहुत कुछ चाहती थी लेकिन सिर्फ इतना ही बोल पायी,”तुम,,,,,,,,,,,,,!!!”

अनिकेत ने सुरभि को अंदर किया और खुद अंदर आते हुए कहा,”अंदर चलो मुझे तुम से कुछ जरुरी बात करनी है”
अनिकेत ने फ्लेट का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया उसके चेहरे पर परेशानी और उदासी के भाव थे जिन्हे सुरभि नहीं देख पायी बल्कि उसे तो अनिकेत को यहाँ देखकर ही जैसे सदमा लग गया हो।

सुरभि को हक्का बक्का देखकर अनिकेत ने इधर उधर देखा तो उसे अपने पीछे किचन नजर आया। वह किचन में आया और एक गिलास पानी लेकर सुरभि की तरफ बढ़ाते हुए कहा,”लो पानी पीओ”
सुरभि ने पानी का गिलास लिया , पानी पीने से पहले ही उसे हिचकी शुरू हो गयी उसने थोड़ा पानी पीया , खुद को शांत किया और अनिकेत पर बिफर पड़ी,”तुम यहाँ क्या कर रहे हो और क्यों आये हो ?”

अनिकेत ने मायूसी से सुरभि की तरफ देखा और कहा,”मैं यहाँ तुम से माफ़ी मांगने आया हूँ। मैंने तुम्हारे साथ जो किया वो बहुत गलत था सुरभि , मैं गलत था ,, मैंने अपनी जिद और अपने ईगो के चलते अपना चार साल पुराना प्यार ठुकरा दिया और किसी और से शादी करने चला था लेकिन अब मुझे अहसास हुआ सुरभि कि मैं तुम्हारे बिना खुश नहीं रह सकता। मुझे तुम्हारी जरूरत है सुरभि , मैं मैं तुम्हे लेने आया हूँ चलो वापस उदयपुर चलते है। तुम जो कहोगी जैसा कहोगी मैं वैसा बनने के लिए तैयार हूँ बस मुझे खुद से दूर मत करो”

अनिकेत की बातें सुनकर सुरभि का सर चकरा गया , अचानक उसकी जिंदगी ने ये कैसा मोड़ लिया सुरभि खुद ही नहीं समझ पायी। ये सच था कि वह अनिकेत से बहुत प्यार करती थी और उसके छोड़ जाने के बाद भी वह हमेशा उसके लौट आने की राह भी देखती रही लेकिन अनिकेत नहीं आया और जब उसने होली पर अनिकेत की सगाई के बारे में सुना और उसे किसी और लड़की के साथ खुश देखा तो उसके बाद सुरभि ने उसके वापस लौट आने की उम्मीद छोड़ दी और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गयी लेकिन आज अचानक अनिकेत को अपने सामने देखकर सुरभि को समझ नहीं आ रहा था वह क्या कहे और क्या करे ?

सुरभि को खामोश देखकर अनिकेत उसके पास आया और कहा,”सुरभि , सुरभि मैं जानता हूँ मैंने बहुत बड़ी गलती की है। अरे मैं गधा हूँ , कुत्ता हूँ , नीच हूँ लेकिन मैं जानता हूँ तुम मुझे माफ़ कर दोगी क्योकि मैं ये भी जानता हूँ कि तुम्हारे दिल में मेरे लिए आज भी उतना ही प्यार है ! तुम आज भी मुझे भूल नहीं पायी हो,,,,,,,,,,,,,,सुरभि मैं तुम से बहुत प्यार करता हूँ,,,,,,,,,,,,मुझे सिर्फ तुम चाहिए और कुछ नहीं”

बेचारी सुरभि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था वह क्या कहे ? कुछ वक्त पहले ही अनिकेत की शादी हुई थी और वह सुरभि से कह रहा था कि वह उस से प्यार करता है। सुरभि को अनिकेत की बातो पर यकीन तो नहीं हो रहा था लेकिन फिर भी वह जानना चाहती थी कि आखिर अनिकेत के साथ हुआ क्या ? सुरभि ने जैसे ही बोलने के लिए मुँह खोला अनिकेत ने बिना  सुरभि के रिएक्शन की परवाह किये आगे बढकर उसे गले लगाया और कहा,”मैं जानता हूँ सुरभि तुम आज भी मुझसे उतना ही प्यार करती हो,,,,,,,,,,,,,,,थैंक्यू सुरभि थैंक्यू”

उसी पल सुरभि को लेने सिद्धार्थ उसके फ्लेट पर आया। दरवाजा खुला देखकर सिद्धार्थ सीधा अंदर चला आया लेकिन जैसे ही उसकी नजर अनिकेत और सुरभि पर पड़ी उसका दिल टूट गया और चेहरे पर दुःख के भाव झिलमिलाने लगे।

सिद्धार्थ ने जो देखा वो देखने के बाद उसके मुँह से बोल ही नहीं फूटे और जैसे ही सुरभि ने सिद्धार्थ को वहा देखा उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया और वह घबरा गयी लेकिन अनिकेत ने उसे इतना मजबूती से गले लगाया हुआ था कि सुरभि चाहकर भी उस से दूर नहीं हो पायी ये देखकर सिद्धार्थ ने तीन बार धीरे से ताली  बजायी और सुरभि को थम्स अप का साइन दिखाकर वहा से चला गया।

( क्या पृथ्वी यू ही करता रहेगा इस हनीमून पर अवनि को तंग ? क्या सुरभि से बात करके जगदीश जी बदल देंगे अपना फैसला ? आखिर क्यों आया है अनिकेत  सुरभि की जिंदगी में वापस ? सुरभि को अनिकेत की बांहो में देखकर क्या होगा का अगला रिएक्शन ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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