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Pasandida Aurat Season 3 – 23

Pasandida Aurat Season 3 – 23

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

जगदीश जी ने मार्किट में सिद्धार्थ और सुरभि को साथ साथ देखा और गिरिजा के साथ घर चले आये। जगदीश जी को गुस्से में देखकर गिरिजा भी रास्तेभर खामोश रही। जगदीश घर के हॉल में पड़े सोफे पर आ बैठे , गिरिजा उनके लिए पानी लेकर आयी और गिलास उनकी तरफ बढाकर कहा,”गुस्सा मत होईये , हमारा सिद्धू ऐसा नहीं है , वो लड़की बस उसकी अच्छी दोस्त है”

“कौन लड़का अपनी दोस्त को अपने हाथो से चाय बिस्किट खिलाता है गिरिजा ? तुमने देखा नहीं कैसे बीच सड़क पर सिद्धार्थ उस लड़की के साथ हमारी इजजत की धज्जिया उड़ा रहा था। पड़ोस वाली मीना ने उस दिन सही कहा था , सिद्धार्थ और उस लड़की के बीच कुछ तो पक रहा है जिसकी भनक हमे नहीं है,,,,,,,,!!!”,जगदीश जी ने कहा
“ऐसा भी तो सकता है कि सिद्धू और वह लड़की एक दूसरे को पसंद करते हो,,,,,,,,आप खामखा इतने परेशान हो रहे है”,गिरिजा ने बात सम्हालने की कोशिश करते हुए कहा

“आज से पहले भी उसने कई लड़कियों को पसंद किया है गिरिजा। उसके ऑफिस की वो लड़की जिसने यहाँ घर आकर तमाशा किया था , उसे भी तो ये पसंद करता था ना ? उसके बाद अवनि , जिसका हाथ तुम्हारे महान बेटे ने अपने ही हाथो किसी और के हाथो में सौंप दिया था और अब ये लड़की ,, मैं पूछता हूँ आखिर ये लड़का चाहता क्या है ? घर , बाहर , खानदान में हर जगह ये हमारी इजजत मिटटी में मिला चुका है।

शहर के बीचों बीच ये किसी लड़की के साथ बैठकर उस से हंसी ठिठोली कर रहा है तुम कह रही हो मैं परेशान क्यों हूँ ? मैं इसलिए परेशान हूँ कि जैसे उसने बाकी लड़कियों के साथ किया कही वो इस लड़की के साथ ना कर गुजरे”,जगदीश जी ने कहा
“आप अपने ही बेटे के लिए ऐसी बात कैसे कह सकते है ?”,गिरिजा ने हैरानी भरे स्वर में कहा

“क्योकि मैं उसका बाप हूँ और उसकी रग रग से वाकिफ हूँ और मैंने फैसला कर लिया है , मैं आज ही भाईसाहब से बात करके उनसे कह देता हूँ कि उन्होंने जो लड़की सिद्धार्थ के लिए देखी है उसके घरवालों से हाँ कह दे और इस हफ्ते उन्हें घर बुला ले। बस बहुत हो गया उसका नाटक अब मैं और बर्दास्त नहीं कर सकता। वो इस घर में इकलौता कमाने वाला है इसका मतलब ये नहीं वो अपनी मनमानियां करे”,जगदीश जी ने कहा और अपनी जगह से उठकर चले गए

गिरिजा जी ने सुना तो उनके चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे। सुरभि के बारे में घरवालों को ना बताकर सिद्धार्थ ने गलत तो किया था और उस पर पहले ही वह दो बार अपने माँ-बाप को शर्मिन्दा कर चुका था।
गिरिजा जी को अवनि बहुत पसंद थी लेकिन अवनि की शादी सिद्धार्थ से हो ही नहीं पायी और उदयपुर में सबके सामने जगदीश जी और गिरिजा जी को सिद्धार्थ  की वजह से शर्मिन्दा होना पड़ा था।

जगदीश जी का गुस्सा जायज था लेकिन अपने गुस्से के चलते वे सिद्धार्थ के लिए एक बार फिर गलत फैसला करने जा रहे जा रहे थे। गिरिजा जी ने टेबल पर पड़ा जूठा गिलास उठाया और उदास होकर वहा से चली गयी !

सुरभि के अपार्टमेंट से अपनी कार लेकर सिद्धार्थ अपने ऑफिस चला गया। कल शाम से उसका मूड बहुत खराब था और कुछ देर पहले तक सुरभि ने लगभग उसे अपने बाल नोचने पर मजबूर कर दिया था लेकिन अब सिद्धार्थ के होंठो पर मुस्कान थी और वहा काफी खुश था। सिद्धार्थ गुनगुनाते , गाडी चलाते हुए सुरभि के ख्यालो खोया ऑफिस पहुँचा। बाकि दिनों के बजाय आज सिद्धार्थ ज्यादा खुश था। वह अपने केबिन में चला आया और ऑफिस आकर काम में ऐसा बिजी हुआ कि उसे सुरभि को फोन या मैसेज करने का टाइम ही नहीं मिला।

सिद्धार्थ से लड़ झगड़ कर उसे सॉरी बोलकर सुरभि भी पोस्ट ऑफिस चली आयी लेकिन पोस्ट ऑफिस के बाहर आकर उसने अपना सर पीट लिया क्योकि पोस्ट ऑफिस तो आज बंद था और कल से खुलने वाला था। सुरभि ने अपने बाल नोच लिए और वही बैठकर अपना सर पकड़ लिया क्योकि सिद्धार्थ को इग्नोर करने के चक्कर में वह सुबह सुबह तैयार होकर वह घर से निकली और दोपहर होते होते वह पोस्ट ऑफिस पहुंची तो उसे पता चला कि आज तो उसकी छुट्टी है। सुरभि उठी और पैदल ही ऑटो स्टेण्ड की तरफ चल पड़ी।

चलते चलते वह खुद में ही बड़बड़ाने लगी,”हाह ! मैं इतनी स्टुपिड कैसे हो सकती हूँ ? छुट्टी के दिन ऑफिस चली आयी हद है , ये सब उस चिलगोजे सिद्धार्थ की वजह से हुआ है। ना वो सुबह सुबह फ्लेट पर टपकता और ना ही मैं तैयार होकर छुट्टी के दिन ऑफिस आती,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह ये सब मेरे साथ ही क्यों होता है ? वहा अवनि और पृथ्वी गोआ में अपना हनीमून मना रहे होंगे और यहाँ मैं पागलों की तरह सडको पर भटक रही हूँ,,,,,,,,,,,,और एक ये आदमी जबसे गया है तब से ना कोई मैसेज और ना कोई कॉल”

कहते हुए सुरभि ने अपना फोन देखा जिसपर सिद्धार्थ का कोई मैसेज और कॉल नोटिफिकेशन नहीं था। उसने अपना हाथ झटका और मायूस होकर फिर खुद से कहने लगी,”हाह ! लेकिन वो मुझे फोन क्यों करेगा , मैं कौनसा उसकी गर्लफ्रेंड हूँ और अब तक उसने मुझे प्रपोज भी तो नहीं किया,,,,,,,,,,,,,,,वो सच में मुझे पसंद करता भी है या जैसे अवनि के साथ किया वैसे नाटक कर रहा है ? तू भी क्या सोच रही है सुरभि वो नाटक क्यों करेगा ? वो अब बदल चुका है और क्या पता उसमे ये बदलाव तुम्हारी वजह से ही आया हो,,,,,,,,,,,,,!!!”

बड़बड़ाते हुए सुरभि सामने खड़े ऑटो में आ बैठी और उसे अपने अपार्टमेंट का पता बताकर चलने को कहा। ऑटो आगे बढ़ गया और सुरभि बाहर देखते हुए एक बार फिर मन ही मन खुद से कहने लगी,”लेकिन उसने आज तक मुझसे ये भी तो नहीं कहा कि वो मुझसे प्यार करता है,,,,,,,,,ये तो बहुत अजीब सिचुएशन हो गयी है सुरभि ! ना प्यार का इजहार किया ना इकरार किया और तुम उसके लिए ऐसे मरी जा रही हो जैसे वो कल ही तुम से शादी करने वाला हो। उसके दिल में तुम्हारे लिए क्या है ये जाने बिना तुम उसके साथ इतना आगे कैसे बढ़ सकती हो ?

उसके हाथ से चाय बिस्किट खा रही हो , उससे चिपककर बैठ रही हो , उस पर हक़ जता रही हो और तो और गर्लफ्रेंड की तरह उस पर चिल्ला रही हो,,,,,,,,,,,,पर उसके हाथ से बिस्किट खाकर कितना अच्छा लग रहा था,,,,,,,,,,मैं तो रोज उसके हाथो से ये सब खाने के लिए तैयार हूँ,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि शरमाते हुए मुस्कुराई और अपने नाख़ून चबाने लगी।

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
भरत विक्रम के बड़े भाई मिस्टर कपूर के मीटिंग रूम से बाहर आया। मिस्टर कपूर के चेहरे पर आज ख़ुशी और चमक के बजाय उलझन के भाव थे शायद भरत के साथ उनकी ये मीटिंग अच्छी नहीं थी।
“सो मिस्टर कपूर क्या सोचा आपने ? आप अगर अपना जवाब बता दे तो मैं आज शाम ही आपका प्रोजेक्ट आगे भेज दूंगा और जल्दी ही उसे बाकी शेयर होल्डर्स से भी अप्रूवल मिल जाएगा”,भरत ने कपूर की तरफ पलटकर कहा

“इतनी भी क्या जल्दी है मिस्टर भरत ! इस प्रोजेक्ट का बजट बहुत ज्यादा है फायनेंस करने के लिए मुझे पहले कोई मिल तो जाए उसके बाद मैं आपको बताता हूँ,,,,,,,,,,,वैसे भी आप कहा जा रहे है , मैं जरा मिस्टर देसाई से मिल लू”,कहकर मिस्टर कपूर जैसे ही जाने लगे भरत ने कहा,”सर अभी बिजी होंगे आप उनसे नहीं मिल सकते”

मिस्टर कपूर मुस्कुराते हुए पलटे और भरत की तरफ देखकर कहा,”मिस्टर भरत ! आप भूल रहे है कि आप अब इस कम्पनी में MD है , मिस्टर देसाई के मैनेजर नहीं,,,,,,,आपको अपनी पोजीशन का ख्याल रखना चाहिए,,,,,,,,वैसे आप डर क्यों रहे है ? डोंट वरी मैं उनसे आज की मीटिंग को लेकर नहीं बल्कि निजी कारण से मिलना चाहता हूँ”
भरत ने सुना तो झेंप गया और मुस्कुराकर कहा,”नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है आप मिल सकते है,,,,,,,,,प्लीज”
कहकर भरत ने मिस्टर कपूर से मिस्टर देसाई के केबिन की तरफ इशारा कर दिया। मिस्टर कपूर ने एक नजर भरत को देखा और वहा से चले गए।

“क्या मैं अंदर आ सकता हूँ ?”,मिस्टर कपूर ने केबिन का दरवाजा खटखटा कर कहा
“ओह्ह्ह मिस्टर भरत ! यस कम इन”,मिस्टर देसाई ने मुस्कुराकर अपनी कुर्सी से उठते हुए कहा
कपूर अंदर आया और मिस्टर देसाई उसके साथ सोफे पर आ बैठे और फोन करके ऑफिस बॉय से दो कॉफी लेकर आने को कहा  

“सो कैसी रही आज की मीटिंग ? आई हॉप भरत ने आपको हमारी कम्पनी के इन्वेस्टमेंट सिस्टम के बारे में अच्छे से समझा दिया होगा”,मिस्टर देसाई ने पूछा
“मीटिंग ठीक ठाक थी सर ! भरत वाज गुड बट जो बात प्राची की प्रेजेंटेशन में है वो किसी और में नहीं,,,,,,,,,शी इज सो इंटेलिजेंट”,कपूर ने कहा

मिस्टर देसाई मुस्कुराये और कहा,”अह्ह्ह ! शी इज सच अ डार्लिंग यू नो , वो तो बस आजकल वो एक बेकार जिद के चलते ऑफिस से दूर है। खैर आप बताईये मुझसे मिलने की कोई ख़ास वजह ?”
“वजह तो ख़ास ही है सर ! अब आपसे क्या छुपाना सर , आप मेरे छोटे भाई को तो जानते ही होंगे “फिल्म प्रोड्यूसर विक्रम कपूर” कई बार आपके ऑफिस भी आया है”,मिस्टर कपूर ने कहा
“ओह्ह हाँ ! आई रिमेम्बर,,,,,,,मैं उस से मिल चुका हूँ”,मिस्टर देसाई ने कहा

“दरअसल मम्मी पापा के जाने के बाद मैंने और मेरी पत्नी ने ही पाल पोसकर विक्रम को बड़ा किया है। आज वो एक सक्सेसफुल डायरेक्टर है और उसका  अपना बिजनेस भी है। विक्रम की शादी की उम्र हो चुकी है और बड़ा भाई होने के नाते मैं उसके लिए लड़की देख रहा हूँ। आपकी कम्पनी और हमारी कम्पनी के बीच अच्छे रिलेशन है तो मैं सोच रहा था क्यों ना इस बिजनेस रिलेशन को फॅमिली रिलेशन में बदल लिया जाए,,”,मिस्टर कपूर ने कहा और रुके

देसाई सर बड़े ध्यान से कपूर की बात सुन रहे थे , उन्हें अपनी तरफ देखते पाकर कपूर ने उनकी आँखों में देखा और उनके हाथो को थामकर कहा,”मैं अपने छोटे भाई के लिए आपकी बेटी का हाथ मांग रहा हूँ। अगर आपको कोई ऐतराज ना हो तो मैं प्राची को अपने घर की बहू बनाना चाहता हूँ”
देसाई सर ने जैसे ही सुना ख़ुशी से उनकी आँखे चमक उठी और होंठो पर प्यारी सी मुस्कान तैर गयी जैसे कपूर ने उनके सामने उनके दिल की बात कह दी हो।

उन्होंने मिस्टर कपूर के हाथो को थामा और खुश होकर कहा,”आपने तो मेरे दिल की बात कह दी”
कपूर ने सुना तो मुस्कुराया और उसकी  आँखे भी चमक उठी। मिस्टर देसाई ने उनके हाथो को  छोड़ा और ख़ुशी भरे स्वर में कहा,”मैं पिछले कुछ वक्त से नोटिस कर रहा हूँ , जबसे प्राची विक्रम से मिली है खुश रहने लगी है। हो सकता है दोनों एक दूसरे को पसंद भी करते होंगे। मुझे इस रिश्ते से कोई ऐतराज नहीं है मिस्टर कपूर,,,,,,,,!!!”

मिस्टर कपूर ने सुना तो खुश हो गए और कहा,”मैं आज ही विक्रम से इस बारे में बात करता हूँ और जल्दी ही इन दोनों की एंगेजमेंट की अनाउंसमेंट भी कर देंगे , क्या कहते है ?”
“बिल्कुल ! अच्छे काम में देरी क्यों ?”,मिस्टर देसाई ने कहा

“बस एक बार आप प्राची से और पूछ लीजिये”,मिस्टर कपूर ने कहा
“प्राची से पूछने की क्या जरूरत है मिस्टर कपूर ? मैं उसे बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ वो मेरी पसंद को ना कह ही नहीं पायेगी,,,,,,,,,,,,और वैसे भी मैंने उसके और विक्रम के बीच जो बॉन्डिंग देखी है वो आपने नहीं देखी इसलिए आप ऐसा कह रहे है। प्राची ना नहीं कहेगी”,मिस्टर देसाई ने विश्वास से भरकर कहा

“अगर ऐसी बात है तो फिर मेरी तरफ से ये रिश्ता पक्का समझिये”,मिस्टर कपूर ने खुश होकर कहा
“लीजिये कॉफी आ गयी”,मिस्टर देसाई ने सामने से आते ऑफिस बॉय के हाथो में ट्रे देखकर कहा
“कॉफी नहीं मिस्टर देसाई अब तो मुँह मीठा करवाना पडेगा आपको आखिर इतनी बड़ी ख़ुशी की बात जो है”,मिस्टर कपूर ने हँसते हुए कहा

“अरे बिल्कुल ! एक काम क्यों नहीं करते , इस वीकेंड आप और आपकी धर्मपत्नी विक्रम के साथ डिनर के लिए घर आ जाईये,,,,,,,,वही सब बातें भी हो जाएगी और आपकी पत्नी भी प्राची से मिल लेंगी”,देसाई सर ने कहा
“बहुत अच्छा ख्याल है ! मैं आज ही जाकर विक्रम और अपनी पत्नी से इस बारे में बात करता हूँ”,मिस्टर कपूर ने कहा और फिर मिस्टर देसाई के साथ बैठकर बाते करने लगा।
प्राची और विक्रम के रिश्ते की बात चल रही थी और दोनों को ही इसकी खबर नहीं थी।

गोआ रिसोर्ट
एंथनी के बुलाने पर पृथ्वी अवनि को कमरे में छोड़कर वहा से चला गया लेकिन एंथनी के पास जाकर उसे पता चला कि क्रिकेट मैच यहाँ नहीं बल्कि रिसोर्ट से 10 किलोमीटर दूर किसी प्लेग्राउंड में है। पृथ्वी ने सुना तो ख्याल आया कि मना कर दे लेकिन वह एंथनी से खेलने का वादा कर चुका था इसलिए उसने अवनि को बाहर जाकर जल्दी आने का मैसेज किया और एंथनी के साथ रिसोर्ट से निकल गया।

अवनि कमरे में फैले सामान को उठा ही रही थी कि तभी उसका फोन बजा। अवनि ने फोन उठाया देखा पृथ्वी का मैसेज है तो वह मुस्कुराई क्योकि पृथ्वी को बाहर भेजने का प्लान सक्सेस जो हो चुका था। अवनि ने फोन रखा और जल्दी जल्दी कमरे का सामान व्यवस्तिथ करने लगी। वह बिस्तर की तरफ आयी और बेडशीट सही करने के लिए जैसे ही उसने तकिये उठाये एक तकिये के नीचे उसे अपनी ड्रेस मिली जो काव्या ने उसे गिफ्ट की थी। अवनि ने उस ड्रेस को उठाया और देखकर मुस्कुराई। उसने ड्रेस को साइड में रखा और अपना काम करने लगी।

कुछ देर बाद बेल बजी अवनि ने जाकर दरवाजा खोला सामने रिसोर्ट का एक लड़का हाथो में कुछ सामान लेकर खड़ा था। अवनि ने उस से सामान लिया और थैंक्यू बोलकर दरवाजा बंद कर दिया। अवनि ने सब सामान लाकर टेबल पर रखा और फिर कमरे को सजाने लगी। एक बैग में गुलाब के रंग बिरंगे फूल थे। एक बैग में कुछ फेंसी केंडल्स और सजावट का सामान था। एक बैग में एक बड़ा सा खूबसूरत बुके भी था जिसे अवनि ने मंगवाया था।

ये सब अवनि पृथ्वी के लिए कर रही थी शायद उसे मनाने के लिए या फिर उसकी भावनाओ को समझते हुए उसके साथ अपनी शादीशुदा जिंदगी शुरू करने के लिए ,, अवनि ने पुरे कमरे को फूलों और चमचमाती लाइट्स से सजा दिया। फर्श पर दिवार के किनारो पर उसने फूलो के साथ आर्टिफिशियल केंडल्स जलाकर रखी जिस से कमरा और भी खूबसूरत नजर आने लगा। ये सब करते करते कब दो घंटे बीत गए पता ही नहीं चला। अवनि ने घडी में समय देखा पृथ्वी किसी भी वक्त आने वाला था। उसने काव्या की दी ड्रेस को उठाया और नहाने के लिए बाथरूम में चली आयी।

अवनि बाथरूम से बाहर आयी बाल गीले थे जिन्हे अवनि ने जैसे तैसे करके सुखाने की कोशिश की लेकिन थोड़ी नमी रह गयी। उसने चेहरे पर हल्का सा मेकअप किया और शीशे में खुद को देखा , शर्माकर उसने अपनी पलकें झुका ली। उसने जो ड्रेस पहना था वह छोटा था लेकिन उस से तो कम ही छोटा था जो बीती रात अवनि ने पहना था लेकिन तब अवनि नशे में थी और आज वह पुरे होशो हवास में थी इसलिए उसे थोड़ी शर्म आ रही थी। उसका दिल धड़क रहा था और एक अजीब सी सुकून देने वाली बेचैनी उसे घेरे हुए थी।

अवनि ने कमरे की सभी बड़ी लाइट्स बंद कर दी और हलकी लाइट जलने दी जिसमे कमरा बहुत सुंदर लग रहा था। उसने जान बूझकर दरवाजे को लॉक नहीं किया जिसे पृथ्वी खुद ही सीधा अंदर आये और ये सब देखकर अपना गुस्सा , अपनी नाराजगी भूल जाए।

कुछ देर बाद पृथ्वी लौट आया उसके चेहरे पर निराशा के भाव थे और वह थोड़ा चिढ़ा हुआ भी था क्योकि एंथनी उसे क्रिकेट खेलने लेकर गया और क्रिकेट खेला ही नहीं बल्कि बस उसे यहाँ वहा घुमाता रहा और लाकर वापस रिसोर्ट पर छोड़ दिया। पृथ्वी को इस बात का मलाल नहीं था कि वह क्रिकेट नहीं खेल पाया बल्कि इस बात का ज्यादा मलाल था कि वह अवनि को अकेले छोड़कर चला गया। पृथ्वी अपने कमरे के सामने आया और बेल बजायी लेकिन अवनि ने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया।

पृथ्वी ने एक दो बार और बेल बजायी लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं आया तो पृथ्वी ने दरवाजा खटखटाने के लिए जैसे ही हाथ बढ़ाया दरवाजा अपने आप हल्का सा आगे हुआ। दरवाजा खुला है ये देखकर पृथ्वी को हैरानी हुई और जैसे ही वह अंदर आया और ज्यादा हैरान हो गया। कमरे के बीचोंबीच सामने ही अवनि खड़ी थी और इस वक्त इतनी खूबसूरत लग रही थी कि पृथ्वी अपनी नजरे नहीं हटा पाया। अवनि उसे ऐसा कोई सरप्राइज देगी उसने सपने में भी नहीं सोचा था। वह अवनि की तरफ बढ़ा , जैसे जैसे पृथ्वी अवनि के करीब आया अवनि का दिल धड़कने लगा।

पृथ्वी अवनि के सामने आ रुका और ख़ामोशी से उसे देखने लगा। पृथ्वी ने हमेशा अपनी भावनाओ को रोका लेकिन आज वह ऐसा नहीं चाहता था उसने जैसे ही अपने होंठो को अवनि के होंठो की तरफ बढ़ाया अवनि ने शर्म से गर्दन घुमा ली। पृथ्वी पीछे हटा और अवनि के बगल से निकलकर खिड़की की तरफ कदम बढ़ाये तो अवनि ने उसकी कलाई पकड़कर उसे रोक लिया। दोनों एक दूसरे की तरफ पीठ किये खड़े थे। अवनि ने पृथ्वी को रोककर ये अहसास दिला दिया कि आज वह उसके लिए पूरी तरह से समर्पित है लेकिन पृथ्वी खामोश था।

जब तक अवनि खुलकर उस से अपने प्यार का इजहार नहीं करती वह कैसे मान लेता अवनि को भी उस से उतनी ही मोहब्बत है जितनी उसे अवनि से
पृथ्वी को खामोश पाकर अवनि ने गाना शुरू किया

“छू लो रूह मेरी मुझे तन्हा कर दो , आज मेरे नाम ये लम्हा कर दो
ये दूरिया मुझको अब गवारा नहीं , आज तुम खुशियों को दामन में भर दो
क्यों आँखों मेरी बस तेरा इंतजार है , दिल में हाँ है पर होंठो पे क्यों इंकार है
अब तक खामोश थी दुनिया के डर से , मैं आज कहती हूँ
मुझे तुमसे प्यार है , मुझे तुम से प्यार है , मुझे तुम से प्यार है,,,,,,,,,,,,,,,,,,हाआआ”

पृथ्वी ने सुना तो उसका दिल धड़क उठा और होंठो पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर गयी  

( क्या सिद्धार्थ लड़ पायेगा सुरभि के लिए अपने पापा से या मान लेगा उनकी बात ? क्या सुरभि करेगी सिद्धार्थ के प्रपोजल का इंतजार या खुद ही कर देगी अपने प्यार का इजहार ? क्या होगा प्राची का रिएक्शन जब वो सुनेगी अपने और विक्रम के रिश्ते की खबर ? अवनि के इस इजहार के बाद क्या पृथ्वी रोक पायेगा खुद को ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal
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