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Manmarjiyan season 4 – 40

Manmarjiyan season 4 – 40

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

मिश्रा जी की एक आवाज पर गुड्डू उनके सामने आ खड़ा हुआ और कहा,”जी जी पिताजी,,,,,,,,!!!”
“हुआ काहे खड़े हो ? ज़रा अपनी लैला के बगल मा आओ”,मिश्रा जी ने कहा और गुड्डू को गोलू के बगल में आने का इशारा किया। मिश्राइन , वेदी और शगुन भी वहा चली आयी और लवली तो पहले से वही मौजूद था।
गुड्डू गोलू के बगल में चला आया और आँखों ही आँखों में गोलू को इशारा करके पूछा कि अब उसने कौनसा कांड किया है ?

गोलू बेचारा क्या बताता उसे तो खुद नहीं पता था कि उस से कोई गलती हुई भी है  या नहीं,,,,,,,,,उसने गुड्डू को देखकर ना में गर्दन हिला दी। सामने बैठे मिश्रा जी दोनों के इशारे समझ रहे थे इसलिए गुस्से से दोनों को घुड़ककर कहा,”हमको एक ठो बात बताओ तुम दोनों का हमाओ नाम डुबोवे की कसम खा लेइ हो दोनु जन,,,,,,,,,,,,अभी अम्मा के दिनों मा इत्ता तमाशा हुआ रहा का ओह्ह से पेट नाही भरा तुम दोनों का,,,,,,,,हर दिन साला तुमको अपने जीवन मा चरस बोनी है,,,,,,,,,!!!!”

“लेकिन पिताजी हमने किया का ?”,गुड्डू ने डरते डरते पूछा
“सबसे पहिले तुमहि से सुरु करते है,,,,,,!!”,कहते हुए मिश्रा जी झुके और अपने पैर से चप्पल निकालकर गुड्डू पर फेंकते हुए कहा,”जब तुमको पता था घर मा मेहमान आये रहय तो फिर तुमहू अपनी फटफटिया लेकर बाहर कौनसा गुल खिलाने गए रहय,,,,,,,,,!!”

मिश्रा जी की चप्पल आकर लगी सीधा गुड्डू के गाल पर और इस बात पर गोलू की हंसी निकल गयी उसने जल्दी से अपना हाथ अपने मुँह पर रखा और अपनी हंसी को रोका लेकिन तब तक गुड्डू उसकी पीठ पर एक मुक्का जमा चुका था।

गुड्डू को चुप देखकर मिश्रा जी और भड़क गए और कहा,”तुम्हरे बेडिंग प्लानर के काम पर हमको पहिले से सक था और सोनुआ की पार्टी बिगाड़ कर तुमहू अपना पर्चा खुद दे दिए ,,, हाँ बेटा पुरे कानपूर मा तो हमायी छीछा लेदर पहिले ही करवा चुके थे , एक जे मोहल्ला बचा था ओह्ह्ह मा भी झंडे गाड़ दिए दोनों ने मिल के,,,,,,,,,,,,नहीं हम पूछते है का जरूरत थी हुआ सोनुआ के फंक्शन मा दारू पीकर तमाशा करने की ?”

गुड्डू ने जैसे ही सुना गोलू की तरफ देखकर दबे स्वर में कहा,”जे साले सोनू भैया को तो छोड़ेंगे नाही हम,,,,,,,,,,खुद दारू पीकर तमाशा किये और हमाओ नाम खराब किये”

“हाँ हाँ गुड्डू भैया नाही छोड़ना ओह्ह्ह का,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने भी दबे स्वर में कहा
“जे चोंच से चोंच लड़ाना बंद करो तुम दोनों,,,,,,,कोनो लाज सरम बची है तुम दोनों मा,,,,,,,!!!”,मिश्रा जी ने कहा तो गुड्डू गोलू एक दूसरे से थोड़ा दूर खड़े हो गए और गुड्डू ने मिमियाते हुए कहा,”पिताजी आप जैसा सोच रहे है वैसा नाही है , अरे हमहू बताते है ना आपको सारी बात,,,,,,,,,,!!!”

“अपनी जे चिकनी चुपड़ी बाते तुम दोनों जाकर सुनाना उसको जो तुम दोनों को नाही जानता हो , साला बाप हिया इज्जत बनाने में लगे है और बेटा दोनों हाथो से मिटटी मा मिलाने मा लगे है,,,,,,,,,,,बंद करो अपना जे टेंट का काम और दोनो जन कोनो नौटंकी मा हिस्सा लेइ लयो कम से कम शाम मा घर आओगे तो हाथ माँ कुछो पइसा तो होगा,,,,,,!!!”,मिश्रा जी ने गुड्डू और गोलू को भिगोकर जूता मारा ( असली वाला नहीं ताने वाला जूता )

शगुन , मिश्राइन और वेदी चुपचाप सब सुन रही थी क्योकि मिश्रा जी गुस्से में थे और इस वक्त कुछ बोलना उनके गुस्से को और बढ़ा सकता था। लवली पहली बार मिश्रा जी को इतना गुस्से में देख रहा था इसलिए कहा,”पिताजी एक ठो बार सुन लीजिये गुड्डू का कह रहा है ? हो सकता है उह्ह्ह सच मा किसी मुसीबत मा रहा हो”

मिश्रा जी ने सुना तो लवली को देखा और फिर गुड्डू गोलू को देखकर कहा,”एक ठो बात बताये लवली जे दोनों बैल के जीवन मा कबो मुसीबत नाही आती है बल्कि जे दोनों खुद सज धज के मुसीबत के पास जाते है। रास्ता सीधा भी होगा ना तब भी जे दोनों उह्ह्ह पर उलटा चलने मा जियादा बिस्वास रखते है का है कि रंगबाजी करने का जियादा ही शोक है ना जे दोनों को,,,,,,,,,,,और जे नाटके को देख रहे हो जे का तो इन दिनों अलग ही भौकाल चल रहो है कानपूर मा”

मिश्रा जी के मुँह से अपने लिए नाटका सुनकर गोलू उछल पड़ा और कहा,”अब हमने का किया ? गुड्डू भैया को ,लपेटना है लपेटिये हमे काहे बीच मा खींच रहे है ?”
“ज़रा हिया आओ”,मिश्रा जी ने बहुत ही सहजता से गोलू से कहा
गोलू जैसे ही मिश्रा जी की तरफ बढ़ा गुड्डू ने दबी आवाज में कहा,”गोलू मत जाओ,,,,,,,,,,,,!!!”

“अरे गुड्डू भैया मिश्रा जी आप पर गुस्सा है हम पर थोड़े है देखा नाही कित्ते प्यार से बुलाये रहय हमे,,,,,,,,,हम अभी सेटलमेंट करके आते है”,कहकर गोलू मिश्रा जी की तरफ बढ़ गया और उनके सामने चला आया

मिश्रा जी ने मुस्कुराते हुए गोलू का कान पकड़ा और गोलू कुछ समझ पाता इस से पहले मिश्रा जी ने उसके दाँये गाल पर ताड़ ताड़ ताड़ चाँटे बरसा दिए
“चचा,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने हैरानी से कहा और मिश्रा जी का हाथ उसके गाल पर
“च………………..चा”,गोलू ने फिर कहा और फिर से मिश्रा जी का हाथ गोलू के गाल पर

“च,,,,,,!!”,गोलू के मुँह से इतना ही निकला और फिर मिश्रा जी का हाथ उसके गाल पर और जैसे ही चा निकला मिश्रा जी ने फिर अपना हाथ गोलू के गाल पर छाप दिया और इस बार गोलू ने बौखला कर कहा,”अरे लेकिन हमने किया का है , हम का कोई तबला है जो हमको बजाये जा रहे है आप ?”
मिश्रा जी ने सुना तो उसका कान छोड़ा और दूसरे गाल पर भी एक थप्पड़ रसीद कर दिया और गोलू लड़खड़ाकर मिश्रा जी के सीने से आ लगा। मिश्रा जी ने उसका सर थपथपाते हुए कहा,”अरे अरे अरे मेरा गोलू,,,,,,,,,,,,हमायी छाती से काहे चिपक रहे हो उधर जाकर मरो”

कहते हुए मिश्रा जी ने उसकी कोलर पकड़कर उसे पीछे किया और गुड्डू की तरफ धकिया दिया। बौखलाया हुआ सा गोलू गुड्डू में जा गिरा तो गुड्डू ने दबे स्वर में कहा,”मना किया था ना हमने कि मत जाओ , मिल गयी ना परसादी”
मिश्रा जी से मार खाकर गोलू पहले ही बौखलाया हुआ था अब मिश्रा जी से तो कुछ कह नहीं सकता था इसलिए गुड्डू को ही एक थप्पड़ मारकर कहा,”जे सब मार होने से पहिले नाही बता सकते थे,,,,,,,,,!!!”

गोलू गुड्डू को थप्पड़ मारे और गोलू चुप रह जाए ऐसा भला कैसे हो सकता था ? उसने भी खींचकर एक थप्पड़ गोलू को मारा और कहा,”साले तुम हमायी सुनते कहा हो ?”
“आपकी सुनी है तभी तो इत्ती बेंड बजी है हमायी,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने झल्लाकर कहा
“हमायी सुने बिना भी तुमहू अपना तबला बजवा ही लोगे”,गुड्डू ने भी अपना गाल सहलाते हुए कहा

शगुन को तो ये सब देखकर ही चक्कर आने लगा , बेचारी अपनी आँखों के सामने अपने पति को मार खाते कैसे देखती इसलिए वेदी को साथ लेकर वहा से चली गयी , बची मिश्राइन तो वह मिश्रा जी को समझाने के लिए जैसे ही उनकी तरफ आयी तो मिश्रा जी ने कहा,”आज तुमहू कुछो नाही कहना मिश्राइन ! आज जे दोनों की सारी रंगबाजी निकाल कर रहे है हम,,,,,,,,,!!!!”

मिश्रा जी के मुँह से बार बार रंगबाजी का नाम सुनकर गोलू भड़क गया और कहा,”अरे का रंगबाजी कर दिए हम और गुड्डू भैया ? कौनसे मोहल्ले की लड़की छेड़ दी हमने ? कौनसी भाभी के साथ होली खेल आये हम दोनो ? कौनसा गली मोहल्ला मा गुंडई की हमने बताओ जरा ,,, साला जब से सादी हुई है किसी लड़की को ठीक से आँख उठाकर तक नाही देखे है , कहा से कर लेंगे रंगबाजी ? दिनभर गुड्डू भैया और हम साथ मा रहते है , कबो घर , कबो दुकान तो कबो आपके हिया ,, बचे हुए बख्त मा हिया से वहा भागते रहते है एक रात का बख्त बचता है

उह्ह्ह मा गुड्डू भैया अपने घर और हम अपने घर , कहा से कर लेंगे रंगबाजी ? अब का हम आपस मा घर घर खेल लेंगे,,,,,,,,,साला जरा सा कुछो होता नाही है गुड्डू गोलू ने कांड किया होगा , अरे हम दोनो का मंदिर का घंटा है कि जो आया बजाकर चला गया,,,,,,,,,,,,हुआ घर मा हमाये बाप से मार खाये , फिर हिया आपसे मार खाये , उह्ह्ह भी तब जब हमे पता तक नाही है कि हमायी गलती का है,,,,,,,,,,,!!!!”
गोलू एक साँस में ही इतना सब बोल गया। गुड्डू को लगा कही गोलू मर ना जाए इसलिए उसके पास आकर कहा,”बस करो गोलू साँस लेइ ल्यो थोड़ा”

मिश्रा जी अपनी बाँयी भंव चढ़ाकर एकटक ख़ामोशी से गोलू को देखे जा रहे थे। ये देखकर गोलू थोड़ा शांत हुआ और गुड्डू से कहा,”हम कुछो जियादा बोल दिए का गुड्डू भैया ?”  
“पिताजी के एक्सप्रेशन देखकर तो जे ही लग रहा है गोलू कि जियादा नाही बहुते जियादा बोल दिए हो,,,,,,,,,,अब बाटा की चप्पल नाही नीम की संटी से सुताई होगी हमायी तुम्हायी”,गुड्डू ने रोआँसा होकर कहा
“ए गुड्डू भैया ! हमका बचाय ल्यो हमहू अब और मार नाही खाएंगे”,गोलू ने गुड्डू की गोद में चढ़कर रोते हुए कहा

“नीचे उतरो,,,,,,,,,,!!!”,मिश्रा जी की आवाज गोलू के कानों में पड़ी। गोलू तो बन्दर बनकर गुड्डू से चिपक चुका था लेकिन मिश्रा जी की आवाज सुनकर गुड्डू ने उसे नीचे गिरा दिया तो गोलू ने कहा,”माँ कसम गुड्डू भैया आप हमाये दोस्त नाही सच्चे दुश्मन है”
मिश्रा जी ने गोलू को देखा और कहा,”हमको इह बताओ तुम्हाये बाप दादा भी कबो किसी का ब्याह करवाए है जो तुमहू नवरतन को ओह्ह्ह की सादी का आश्वासन दे आये हो,,,,,,,,,,,कौन लड़की की जिंदगी खराब करने जा रहे हो ज़रा बताओ हमका ?”

गोलू ने जैसे ही सुना उसकी बत्ती जल्दी और उसने कहा,”जे आपसे किसने कहा ?”
“और कौन कहेंगे ? तुम्हाये ससुर कहे रहय हमसे जब नवरत्न से मिले थे ,, चार समोसा दुइ चाय के लिए तुमहू किसी की भी सादी करवा दोगे और साले हमको जे बताओ तुमको अपनी लड़की दे कौन रहा है ?”,मिश्रा जी ने गुस्से से उबलकर कहा  
गोलू ने जैसे ही सुना कि ये आग उसके ससुर की लगाई है तो वह गुस्से से उबल पड़ा और कहा,”जे साले शर्मा को तो हम छोड़ेंगे नाही,,,,,,,,!!!”

मिश्रा जी ने गोलू को बदतमीजी करते सुना तो अपने दूसरे पैर की चप्पल निकालकर गोलू के मुँह पर फेंककर कहा,”अपने ससुर के लिए ऐसे अपमानजनक शब्द बोलोगे तुमहू , मुँह खोंच लेंगे तुम्हरा,,,,,,,,,,,!!!
“अरे ससुर नाही असुर है उह्ह्ह हमको ना साला ओह्ह्ह की मूछ नाही ओह्ह की जबान काटनी चाहिए थी , जबान का ओह्ह का नाक , कान , हाथ ओह्ह्ह का,,,,,,,,,,,,,,!!!!”,गोलू नॉनस्टॉप बोलते ही चला गया वह कुछ उलटा सीधा ना बोल दे सोचकर गुड्डू ने उसे रोकते हुए कहा,”ए गोलू ! फॅमिली स्टोरी है भाई,,,,,,,,,,,!!!!”

हाँ हाँ मालूम है हमहू पैर बोलने जा रहे थे,,,,,,,,,,,!!!!”,गोलू ने एकदम नॉर्मल होकर कहा
लवली ख़ामोशी से ये सब तमाशा देख रहा था और अब उसे समझ आ रहा था कि मिश्रा जी अक्सर गुड्डू गोलू पर बिगड़े क्यों रहते थे ? साथ ही उसे अब चिंता होने लगी कि गुड्डू और गोलू क्या सही सलामत बिंदिया को यहाँ ला पाएंगे।  

मिश्रा जी ने जब सुना कि गोलू अपने ही ससुर को काटने की बात कर रहा है तो कहा,”हाँ हाँ सब काट दयो का है कि दामाद थोड़े हो तुमहू ओह्ह्ह के तुमहू तो कानपुर की गलियों मा बैठने वाले कसाई हो ना,,,,,,,,,एक तो गलती कर रहे हो ऊपर से अपने भले ससुर के लिए ऐसी बाते कर रहे हो , शरम नाही है तोह का ?”
“सरम,,,,,,!!!”,कहते हुए गोलू मिश्रा जी के सामने आया और कहा,”सरम तो उनको आनी चाहिए कैसे पक्की सहेली के जैसे आपके पास आकर चुगली कर दिए उह्ह्ह हमे तो सक है मिश्रा जी कही आप दोनो आपस मा मिले हुए तो नाही है”

गोलू की बात सुनकर मिश्रा जी ने एक थप्पड़ फिर उसके गाल पर रसीद किया और कहा,”मतलब अगर कोई आकर हमे तुम्हाये और गुड्डू के कारनामे बताये तो उह्ह हमसे मिला हुआ है , जे हिसाब से तो आधो कानपूर हमायी सहेली रहे,,,,,,,,हमको लगा सुधर जाओगे दोनु जन पर नाही कुत्ता गाडी के टायर पर मूतना छोड़ सकता है पर तुम दोनों नाही सुधरोगे,,,,,,,,,,,,,,इहलीये बंद करो अपने टेंट का काम और आज से दोनों हमायी नजरो के सामने रहोगे हमाये शोरूम मा”

मिश्रा जी की बात सुनकर गुड्डू और गोलू हक्के बक्के रह गए और एक दूसरे की तरफ देखा वही लवली के चेहरे पर भी परेशानी के भाव उभर आये क्योकि उस बेचारे ने गुड्डू और गोलू से मदद जो मांगी थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!

क्या गुड्डू और गोलू को मिलती रहेगी ऐसे ही मिश्रा जी से परसादी ? क्या लवली छोड़ेगा बिंदिया का मामला इन दो भोंदुओ पर या खुद जायेगा चकिया ? मिश्रा जी के कहने पर क्या बंद कर देंगे गुड्डू और गोलू अपना काम या मांगेंगे मिश्रा जी से एक और मौका ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ

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संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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मिश्रा जी ने जब सुना कि गोलू अपने ही ससुर को काटने की बात कर रहा है तो कहा,”हाँ हाँ सब काट दयो का है कि दामाद थोड़े हो तुमहू ओह्ह्ह के तुमहू तो कानपुर की गलियों मा बैठने वाले कसाई हो ना,,,,,,,,,एक तो गलती कर रहे हो ऊपर से अपने भले ससुर के लिए ऐसी बाते कर रहे हो , शरम नाही है तोह का ?”
“सरम,,,,,,!!!”,कहते हुए गोलू मिश्रा जी के सामने आया और कहा,”सरम तो उनको आनी चाहिए कैसे पक्की सहेली के जैसे आपके पास आकर चुगली कर दिए उह्ह्ह हमे तो सक है मिश्रा जी कही आप दोनो आपस मा मिले हुए तो नाही है”

मिश्रा जी ने जब सुना कि गोलू अपने ही ससुर को काटने की बात कर रहा है तो कहा,”हाँ हाँ सब काट दयो का है कि दामाद थोड़े हो तुमहू ओह्ह्ह के तुमहू तो कानपुर की गलियों मा बैठने वाले कसाई हो ना,,,,,,,,,एक तो गलती कर रहे हो ऊपर से अपने भले ससुर के लिए ऐसी बाते कर रहे हो , शरम नाही है तोह का ?”
“सरम,,,,,,!!!”,कहते हुए गोलू मिश्रा जी के सामने आया और कहा,”सरम तो उनको आनी चाहिए कैसे पक्की सहेली के जैसे आपके पास आकर चुगली कर दिए उह्ह्ह हमे तो सक है मिश्रा जी कही आप दोनो आपस मा मिले हुए तो नाही है”

मिश्रा जी ने जब सुना कि गोलू अपने ही ससुर को काटने की बात कर रहा है तो कहा,”हाँ हाँ सब काट दयो का है कि दामाद थोड़े हो तुमहू ओह्ह्ह के तुमहू तो कानपुर की गलियों मा बैठने वाले कसाई हो ना,,,,,,,,,एक तो गलती कर रहे हो ऊपर से अपने भले ससुर के लिए ऐसी बाते कर रहे हो , शरम नाही है तोह का ?”
“सरम,,,,,,!!!”,कहते हुए गोलू मिश्रा जी के सामने आया और कहा,”सरम तो उनको आनी चाहिए कैसे पक्की सहेली के जैसे आपके पास आकर चुगली कर दिए उह्ह्ह हमे तो सक है मिश्रा जी कही आप दोनो आपस मा मिले हुए तो नाही है”

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