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Manmarjiyan Season 4 – 41

Manmarjiyan Season 4 – 41

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गोलू और गुड्डू की दिन ब दिन बढ़ती मनमानियों को देखकर मिश्रा जी ने एक बार फिर उन्हें वेडिंग प्लानर का काम बंद कर शोरूम पर आने को कहा। गुड्डू और गोलू ने सुना तो एक दूसरे की तरड़ देखा। गोलू ने गुड्डू से इशारा किया कि वह  मिश्रा जी से बात करे लेकिन गुड्डू ने ना में गर्दन हिलाकर उलटा गोलू से ही बात करने आ इशारा किया।
“गुड्डू भैया ! आपके बाप है हमाये नाही,,,,,,,,,,बात कीजिये”,गोलू ने दबी आवाज में कहा

गुड्डू ने फिर ना में गर्दन हिलायी तो गोलू ने खा जाने वाली नजरो से गुड्डू को देखा और बात करने का इशारा किया। गुड्डू हिम्मत करके दो कदम आगे बढ़ा और मरे हुए स्वर में कहा,”पि पिताजी”
“का है ?”,मिश्रा जी ने कड़कदार आवाज में कहा तो गुड्डू डरकर पीछे हट गया और ये देखकर गोलू ने पहले आसमान की तरफ देखा और फिर हिम्मत करके धीरे से कहा,”लगता है जे भी हमे ही करना पड़ेगा”

गोलू ने एक गहरी साँस ली और मिश्रा जी के सामने आकर बड़े ही प्यार से कहा,”चचा ! ओह्ह्ह चचा , अरे काहे इत्ता गुस्साय रहे है ? हो जाती है गलती हमसे और गुड्डू भैया से माफ़ कर दीजिये ना,,,,,,,,,,अच्छा कसम से आगे से नाही करेंगे कुछो गलती , सच्ची”
“जे चुना ना जाकर पनवाड़ी की दुकान पर लगाओ हमे नाही , एक बार को भगवान् भी आकर तुम दोनों की गवाही दे दे ना साला तब भी हम नाही मान सकते कि तुम दोनों कोनो काण्ड नाही करोगे,,,,,,,,!!!”,मिश्रा जी ने गोलू को घूरकर कहा

“अरे चचा अब मान भी जाओ यार”,गोलू ने कहा
“ज़रा हिय आओ”,मिश्रा जी ने बहुत ही शांत स्वर में कहा तो गोलू ने पलटकर गुड्डू से कहा दबे स्वर में कहा,”देखा ! ऐसे की जाती है बात , आपकी तरह नाही पि पिताजी”

कहकर गोलू मिश्रा जी के पास आया और मिश्रा जी ने खींचकर एक थप्पड़ गोलू के गाल पर रसीद करके कहा,”हमहू कौनसे एंगल से तुम्हाये यार लगते है बे ? कौनसी टपरी पर हम तुम्हरे साथ बैठ के चाय पिए या बरगद के पेड़ के नीचे बैठ के तीन पत्ती खेले है जो चच्चा से सीधा यार पे आ गए तुमहू,,,,,,,,,,,बड़ो से बात करने की तमीज नाही है बद्तमीज,,,,,,,,,,,जबान खींच लेंगे तुम्हायी समझे”

थप्पड़ खाकर गोलू का तो पूरा सिस्टम ही हिल गया , बेचारा गाल से हाथ लगाए उलटे पैर वापस गुड्डू के बगल में चला आया ये देखकर गुड्डू ने कहा,”और चोडाय ल्यो थोड़ा,,,,,,,,,नहीं जाओ न और कर ल्यो बात,,,,,,,,,,,!!!”
एक तो गोलू को फिर से मिश्रा जी से मार पड़ी ऊपर से गुड्डू उसे चिढ़ा रहा था ये देखकर गोलू ने मिश्रा जी से कहा,”जित्ता आप हमे मार रहे है ना उत्ता तो काण्ड भी नाही किये हम और गुड्डू भैया,,,,,,,,,,,,,,,और काहे बंद कर दे वेडिंग प्लानर का काम , इत्ती मेहनत करके एक ठो काम चालू किये है और आप कह रहे है बंद कर दो ,,

और का गलत किये गुड्डू भैया अपनी फटफटिया लेकर बाहर ही तो गए थे ना , अरे हम बुलाये थे उनको पिंकिया बेहोश हो गयी थी अकेले थे हॉस्पिटल मा घबरा गए थे इसलिए कर दिए इनको फोन और ये भी बैल बुद्धि है हमने फोन किया तो भागे चले आये , आपसे परमिशन नाही ली इन्होने,,,,,,,,,,,,और एक बात कहे चचा हमाये बाप दादा ने भले एक ठो शादी नाही करवाई होगी पर पुरे उत्तर प्रदेश मा 40 सादिया करवा चुके है हम और गुड्डू भैया और सब की सब मक्खन के जैसे चल रही है,,,,,,,,,,,,,,

अरे ठीक है हो जाती है कभी कभी गड़बड़ जे का मतलब इह थोड़े है कि काम नाही करते हम लोग,,,,,,,,और का उह्ह रंगबाज सोनुआ की साइड ले रहे है आप ?”
“गोलू सोनू भैया,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने दबी आवाज में कहा

“अरे काहे के भैया ! साले गली की हर तीसरी लड़की के सैंया बनने के चक्कर मा रहते है ,, उह्ह्ह दिन अपने ऑफिस की पार्टी मा दारू पीके खुद रिसोर्ट के मैनेजर से झगड़ा किये और ओह्ह्ह से हमाओ टेंट फड़वा दिए और हिया आपसे आकर शिकायत कर रहे है , रिसोर्ट के लॉन मा दारू पीकर कचरे के ढेर मा पड़े थे मुँह के बल , अरे सुबह हम और गुड्डू भैया जाकर नहीं ना सम्हालते उनको तो गली के कुत्ते मुँह चाट रहे होते ओह्ह्ह का,,,,,,,,,,,,

नवरत्न हमाओ टेंट सिले रहय तो बदला मा हमहू भी ओह्ह्ह की शादी करवावे की बात कर दिए रहय तो जे मा का गलत किये का कोनो डाका डाल दिए कि कोनो चोरी किये रहय,,,,,,,साला पुरे कानपूर के लोगो पर भरोसा है एक बस हमरी और गुड्डू भैया की बात को छोड़कर,,,,,,,,,,!!!”
इतना कहकर गोलू हांफने लगा , बचारा जरूरत से ज्यादा ही बोल गया लेकिन बोल सही रहा था ये सब चीजे नहीं हुई होती तो या गुड्डू और गोलू कोई कांड करते बिल्कुल नहीं।

गोलू की बात सुनकर मिश्रा जी जैसे ही उठे लवली ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें रोक लिया और कहा,”पिताजी ! जाने दीजिये ना , माफ़ कर दीजिये दोनों को दिल के बुरे नाही है दोनों बस करने सही जाते है और उलटा हो जाता है इनके साथ,,,,,,,,,,इह बार हमाये कहने पर माफ़ कर दीजिये दोनों को”

गोलू अब तक थोड़ा फ्लो में आ गया था इसलिए कहा,”देखा जे होता है भाईचारा , जे कल के आये लवली भैया को समझ आ गयी हमायी हालत पर आप 25-26 साल से हमाये साथ है आप हमे नाही समझ पा रहे”
“लवली के सामने अभी नए हो तुम लोग जिह दिन जे तुम्हरे साथ 25 महीना भी गुजार लिए ना तो गाल पे नाही सीधा मारेंगे लात तुम्हाये पिछवाड़े पर और कहेंगे भाग जाओ हिया से,,,,,,,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने कहा
“गोलू शांत हो जाओ , पिताजी आप जाईये हम इन्हे समझाते है”,लवली ने मिश्राजी से कहा और उन्हें वहा से भेज दिया।

मिश्रा जी को भेजकर लवली गुड्डू और गोलू के पास आया और गोलू के सर पर एक चपत लगाकर कहा,”का बे गोलू ! तुम्हाये मुँह का कोनो स्टॉप बटन है कि नाही , बुड़बक के जैसे कुछ भी बोलते चले जाते हो,,,,,,,,,अबे जे तो देख ल्यो सामने कौन है पर नाही एक बार मुँह खोले तो फिर सब बक के ही मानोगे ,, और जे सोनुआ को काहे घसीटे अपने मामले मा ? साला हमको तो अब डाउट हो रहा है बिंदिया के मामले मा तुम लोगन से हाथ मिलाके कोनो गलती तो नाही कर दिए रहय हम ?”

गोलू ने चपत चुपचाप खा ली , लवली ने जो ताने मारे वो चुपचाप सुन लिए लेकिन जब लवली ने हाथ मिलाने वाली बात कही तो गोलू खुद को रोक नहीं पाया और कहा,”आपको का लगता है लवली भैया , हम और गुड्डू भैया का ऐरे गैरे है ? अरे बड़े बड़े मेटर सुलटाये है हमने और गुड्डू भैया ने कानपूर मा आपकी बिंदिया का मेटर तो यू यू चुटकियो में सुलटा देंगे ,, पिंकेश गुप्ता नाम है हमाओ”
“जे कैसे नाम रखो है औरतन जैसो , कोनो ढंग का नाम नाही मिला तुमको ?”,लवली ने गोलू का मजाक उड़ाकर कहा

“का खराबी है जे नाम मा और नाम छोड़िये हमाये काम पर ध्यान दीजिये,,,,,,,,,,,,गुड्डू भैया”,लवली से कहकर गोलू ने गुड्डू का नाम थोड़ा जोर से लिया
“का है बे ?”,गुड्डू ने कहा
गोलू पलटा और चिढ़कर कहा,”चकिया जाना है कि नाही आपको , का भाभी की बिदाई के बाद पहुंचोगे ?”
“अरे यार जे पिताजी के चक्कर मा इह तो भूल ही गए हम,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा

गोलू लवली की तरफ पलटा और कहा,”और आप हिया का कर रहे है गुड्डू भैया को मनोजवा का नंबर दीजिये , चकिया पहुंचकर कैसे ढूंढेंगे बिंदिया भाभी का घर ?”
गुड्डू लवली को आदेश देकर गोलू जाने लगा तो गुड्डू ने कहा,”अब तुम कहा चले ?”
गोलू गुड्डू की तरफ पलटा और चिढ़कर कहा,”अब घर भी ना जाए , नहाये नाही , खाये नाही , आपको आ लगता है गुड्डू भैया मिश्रा जी के मार से पेट भर जाएगा,,,,,,,,,,,नहीं ना ,, उनकी मार से सिर्फ शरीर दुखेगा पेट नाही भरेगा और पेट भरने के लिए कुछो खाना पडेगा इहलीये घर जा रहे है और फिर उह्ह्ह

मंगल फूफा को भी तो साथ लेकर आना है जिनके लिए कल शाम मा बहुते हमदर्दी दिखा रहे थे आप ,, हम बताय रहे है गुड्डू भैया इह बार अगर कोनो गड़बड़ हुई ना तो मिश्रा जी आपकी दूकान बंद करे ना करे हम जरूर छोड़ देंगे,,,,,,,,,,,,,,चलते है , घंटेभर बाद नुक्कड़ पर मिलेंगे टाइम से पहुंच जाईयेगा”
गोलू वहा से चला गया , गुड्डू ने उसे कुछ कहने के लिए जैसे ही रोकना चाहा लवली ने गुड्डू को रोककर कहा,”जाने दो उसे ! बेचारा पहिले ही सुबह सुबह जबरदस्त मार खा चुका है , तुम हमाये साथ आओ”
गुड्डू लवली के साथ चला गया।

मिश्रा जी के घर से निकला गोलू पैदल ही सड़क पर चले जा रहा था। चलते चलते उसकी नजर नवरतन पर पड़ी जो मोहन हलवाई की दुकान से इमरती खरीद रहा था। नवरतन को देखते ही गोलू को मिश्रा जी की मार याद आ गयी और गुस्से से उसका चेहरा लाल हो उठा। वह नवरतन के पास आया , नवरतन जैसे ही पलटा गोलू को अपने सामने देखकर खुश हो गया और कहा हाथ में पकड़ी प्लेट गोलू की तरफ बढाकर कहा,”अरे गोलू भाई बहुत सही बख्त पर आये हो ल्यो  इमरती खाओ”

“इमरती तो हमहू खाएंगे नवरतनवा लेकिन तुम्हरी तेहरवी की”,गोलू ने गुस्से से उबलकर कहा
“शुभ शुभ बोलो गोलू जे का कह रहे हो ? अरे अभी तो हमायी शादी भी नाही हुई है”,नवरतन ने मायूस होकर कहा
“और तुम्हरी शादी होगी भी नहीं”,गोलू ने भड़ककर कहा
“अरे काहे ! काहे नाही होगी हमायी शादी ? हीरा जी रिश्ते से मना कर दी का ?”,नवरतन ने घबराहटभरे स्वर में कहा

“अरे हीरा से तो हमहू अभी तक मिले भी नाही कि तुमहू अपनी शादी के पर्चे पहिले ही बाँट दिए अब बैठ के मूंगफली खाओ उन पर्चो पर”,गोलू ने नवरतन को घुड़ककर कहा
“कौनसे पर्चे गोलू ? हमहू तुम्हायी बात का मतलब नाही समझे”,नवरतन ने असमझ की स्तिथि में कहा

गोलू जो की मिश्रा जी से मार खाकर पहले से बौखलाया हुआ था उसने नवरतन की गुद्दी पकड़ी और कहा,”जब हमहू कहे रहे कि तुम्हरी शादी की बात तुम्हरे हमरे बीच मा रहेगी तो काहे तोते की तरह जे बात हमाये ससुर के सामने बक दिए,,,,,,,,,,,!!!!”
“अरे तो का हुई गवा गोलू है तो उह्ह्ह  तुम्हाये ससुर ना”,नवरतन ने मरे हुए स्वर में कहा

गोलू ने नवरतन को छोड़ा और कहा,”अबे हमाये ससुर बाद मा है उह्ह्ह आदमी पाहिले मिश्रा जी की सहेली है , हमसे जुडी कोनो बात हो और उह्ह्ह ओह्ह्ह के पेट मा पच जाए जे पॉसिबल ही नाही है,,,,,,,,,,,,जाकर हग दिए उह्ह्ह मिश्रा जी के सामने और सुबह सुबह मिश्रा जी ने हमायी बत्ती बना दी,,,,,,,,,एक काम करो नवरतन जे शादी का ख्याल ना अब भूल ही जाओ तुमहू”

नवरतन ने सुना तो इमरती की प्लेट गोलू को देकर उस की बाँह दबाते हुए कहा,”ए गोलू ! ए हमको नाही पता था न तुम्हरे ससुर मिश्रा जी को बता देंगे , हम पिरोमिस करते है अब किसी से नाही कहेंगे ,, उह्ह्ह का है न पहली बार जीवन मा शादी होने जा रही है तो हम अपनी भावनाओ को रोक नाही पाए”

“पहली बार का ? सबकी पहली बार ही होती है और अपनी भावनाओ को ना थोड़े दिन के लिए ताला लगा दो वरना अभी तो सिर्फ मिश्रा जी को पता चला है पता चले शादी तक पुरे कानपूर को पता चल जाए और कोई और हीरा को उड़ा ले जाए ,, बाद मा बैठकर सिलते रहना ओह्ह की सादी का कोट,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने प्लेट से एक इमरती उठाकर खाते हुए कहा
“अरे नाही नाही गोलू आज के बाद हम किसी को भी नाही बताएँगे और तुम भी नाही बताना,,,,,,,,,,,!!”,नवरतन ने घबराकर कहा

“हाँ हाँ ठीक है , आज जा रहे है चंदौली बात करेंगे हीरा जी से तुम्हाये लिए बस दुआ करना मान जाए उह्ह्ह”,गोलू ने दूसरी इमरती खाते हुए कहा
“हाँ हाँ ! हम तो उह्ह्ह दिन से बस दुआ ही कर रहे है गोलू , एक बार बस हीरा जी दुल्हिन बनकर हमाये घर आ जाये बस,,,,,,,,,,!!”,नवरतन ने ख़ुशी से भरकर कहा
 गोलू ने सुना तो बची दो इमरती को भी अपने हाथ में उठाया और कहा,”अरे आ जाएगी आज सोमवार है शिवजी के मंदिर जाओ और एक लोटा दूध चढ़ाकर हमाये नाम का जप शुरू कर दयो”

“तुम्हरे नाम का जप काहे करे ? शिवजी के मंदिर जा रहे है तो ओह्ह्ह के नाम का जप नहीं ना करेंगे”,नवरतन ने कहा
 “तुम्हरी शादी शिवजी करवा रहे है कि हम करवा रहे है ?”,गोलू ने नवरतन को घूरकर कहा
“शादी तो तुम्ही करवाय रहे हो लेकिन तुम्हे मन मा जे विचार भी तो शिवजी ही दिए न”,नवरतन ने कहा
“बात तो तुम्हायी जे भी सही है , साला हम भी कहा शिव जी पंगा ले रहे थे ,, एक ठो काम करो 108 बार उनका नाम ल्यो तो 8 बार हमाओ भी लेइ लेओ का पतो जे से तुम्हरो काम जल्दी हो जाय”,गोलू ने कहा

“अरे 8 का 16 बार ले लेंगे गोलू भैया , बस तुमहू हीरा से हमायी शादी करवाय दयो”,नवरतन ने गोलू से चिपकते हुए कहा
“अबे हमहू गोलू है हीरा नाही जो इत्ता चिपक रहे हो हमसे बीच बाजार मा थोड़ा डिस्टेंस मेंटेन रखो भाई,,,,,,,,,जे पकड़ो पिलेट और हमहू चलते है पैसे देइ देना इमरती के”,कहकर गोलू वहा से चला गया
“हाँ हाँ दे देंगे बस तुमहू मन लगाकर अपना काम करना और हीरा जी के सामने हमाये अच्छी अच्छी तारीफ करना”,नवरतन ने जाते हुए गोलू को देख मुस्कुराते हुए कहा।  

( गुड्डू और गोलू पर विश्वास करके क्या पछताने वाला है लवली ? क्या गुड्डू और गोलू मंगल फूफा के साथ सही सलामत पहुँच पाएंगे चंदौली ? गोलू की बातो में आकर क्या नवरतन जपने वाला है गोलू के नाम की माला ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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गोलू ने एक गहरी साँस ली और मिश्रा जी के सामने आकर बड़े ही प्यार से कहा,”चचा ! ओह्ह्ह चचा , अरे काहे इत्ता गुस्साय रहे है ? हो जाती है गलती हमसे और गुड्डू भैया से माफ़ कर दीजिये ना,,,,,,,,,,अच्छा कसम से आगे से नाही करेंगे कुछो गलती , सच्ची”
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के सामने आकर बड़े ही प्यार से कहा,”चचा ! ओह्ह्ह चचा , अरे काहे इत्ता गुस्साय रहे है ? हो जाती है गलती हमसे और गुड्डू भैया से माफ़ कर दीजिये ना,,,,,,,,,,अच्छा कसम से आगे से नाही करेंगे कुछो गलती , सच्ची”
“जे चुना ना जाकर पनवाड़ी की दुकान पर लगाओ हमे नाही , एक बार को भगवान् भी आकर तुम दोनों की गवाही दे दे ना साला तब भी हम नाही मान सकते कि तुम दोनों कोनो काण्ड नाही करोगे,,,,,,,,!!!”,मिश्रा जी ने गोलू को घूरकर कहा

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