Manmarjiyan Season 4 – 39
चाय की टपरी पर बैठे लवली , गुड्डू और गोलू तीनो ख़ामोशी से एक दूसरे को देख रहे थे। लड़का तीनो लिए चाय रखकर चला गया। तीनो ने अपना अपना गिलास उठाया और चाय पीने लगे। लल्लन और मंगेश का जिक्र करके गोलू ने गुड्डू और लवली दोनों को उलझन में डाल दिया। जितना आसान दोनों इसे समझ रहे थे उतना आसान ये सब था नहीं ,, गुड्डू ने चाय का एक घूंठ भरा और कहा,”तो अब का करे लवली भैया ? मंगेश पहिले से आपको लेकर बौखलाया हुआ है और उह्ह्ह लल्लन भी ओह्ह्ह के साथ है,,,,,,,,ऐसे मा बिंदिया भाभी को लेकर आना आसान नाही”
“हिम्मते मर्दा तो दर्द दे खुदा”,गोलू ने चाय का गिलास जोर से टेबल पर रखकर जोश भरे स्वर में कहा
गुड्डू और लवली ने सुना तो हैरानी से उसे देखने लगे क्योकि दोनों ही गोलू की बात का मतलब नहीं समझ पाए।
“अबे का बोल रहे हो ?”,गुड्डू ने कहा
“अरे गुड्डू भैया उह्ह्ह कहावत नाही सुनी “हिम्मते मर्दा तो दर्द दे खुदा” , अरे काहे इत्ता घबराय रहे हो , ऊपरवाला है ना अपने साथ”,गोलू ने कहा
लवली ने सुना तो अपना ललाट सहलाया और कहा,”वो हिम्मते मर्दा तो मदद-ए खुदा होता है गोलू , हमायी मानो तो तुमहू ना फिर से स्कूल मा एडमिशन लेइ ल्यो”
“का लवली भैया आप भी”,गुड्डू ने खिंसिया कर कहा
“सही कह रहे है लवली भैया ! साला तुम्हरी कहावत के चक्कर मा हिया गुड़ का गोबर हुई जाता है,,,,,,,,,,और हमे एक ठो बात बताओ हिया हम और लवली भैया उलझन मा है और तुमहू पहेली बुझा रहे हो,,,,,,,,,मुँह खोंच देंगे तुम्हरा , कोनो ढंग का आईडिया है तो दो वरना अपना मुँह बंद रखो समझे”,गुड्डू ने कहा
हाँ तो आइडिआ है न”,गोलू ने तपाक से कहा
“बताओ का आइडिआ है ? तुम्हरी भी बुद्धि आज देख ही लेते है हम”,इस बार लवली ने कहा
गोलू ने गुड्डू और गोलू को देखकर अपना गला साफ किया और कहने लगा,”बिंदिया भाभी की सादी है परसो और गुड्डू भैया चकिया जा रहे है कल , अब आपकी और गुड्डू भैया की सकल मिलती है जे के चक्कर मा उह्ह्ह लग गुड्डू भैया को आप समझ कर पेल वेल दिए तो फिर गुड्डू भैया तो जायेंगे ही जायेंगे भाभी का भी ब्याह पक्का समझो,,,,,,,,,,,,,तो हम का कह रहे है ?”
“तुम जे कह रहे हो कि परसो बिंदिया भाभी की सादी है और अगर हम वहा गए तो ओह्ह्ह के घरवाले हमे लवली समझकर पेल देंगे,,,,,,!!!”,गुड्डू बीच में बोला
गोलू ने खा जाने वाली नजरो से गुड्डू को देखा और कहा,”अभी थोड़ी देर पहिले लवली भैया गधे की उपाधी दिए थे न आपको,,,,,,,,,बिल्कुल सही दिए थे,,,,,,,,,,,,अरे हमको अपनी बात तो पूरी करने दो”
“गुड्डू बीच में ना बोलो , हाँ गोलू आगे बताओ”,लवली ने गुड्डू को चुप रहने का इशारा करके गोलू से आगे बोलने को कहा
गोलू ने गुड्डू से नजरे हटायी और कहा,”हाँ तो हम जे कह रहे है कि गुड्डू भैया का सीधे सीधे बिंदिया भाभी के घर मा जाना खतरे से खाली नाही तो क्यों ना गुड्डू भैया भाभी के घर ना जाकर आपके उह्ह पडोसी मनोज के घर चला जाए और वहा से भाभी पर नजर रखे। रात मा सभी घरवाले और मेहमान नाच गाने मा व्यस्त रहेंगे तब गुड्डू भैया मौका देखकर बिंदिया भाभी से मिलेंगे और उन्हें आपका मैसेज दे देंगे। फिर अगली सुबह सादी वाले दिन जब सब सो रहे होंगे तब गुड्डू भैया चुपचाप बिंदिया भाभी को लेकर कानपूर आ जायेंगे ,,
किसी को कानो कान खबर तक नाही होगी और कानपूर आने के बाद उह्ह मंगेश और छगन आपका का ही उखाड़ लेंगे ?”
“कौन छगन ?”,लवली ने पूछा
“अरे उह्ह्ह जो गुड्डू भैया को लवली समझकर किडनेप कर लिए थे और कुत्तो की तरह मारे थे जे का,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
गुड्डू ने सुना तो गोलू को फिर घूरने लगा और एक चपत उसके सर पर लगाकर कहा,”ओह्ह्ह का नाम लल्लन है छगन नाही”
“हां हाँ वही , देखा गुड्डू भैया आपको ओह्ह्ह का नाम अभी तक याद है लगता है मार भूले नाही अभी तक आप”,गोलू ने गुड्डू का मजाक उड़ाते हुए कहा
“ये सब छोडो और तुम्हारा जे प्लान फेल है गोलू,,,,,,,,,,तुमको लगता है इत्ती आसानी से हम लोग मंगेश की आँखों मा धुल झोंक पाएंगे”,लवली ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“अरे हमको तो पहिले ही पता था लवली भैया जे गोलुआ के पास कोनो ढंग का पिलान नाही है जे साला बस टाइम पास कर रहा है”,गुड्डू ने भी लवली की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा
दोनो भाईयो को अपने प्लान के खिलाफ देखकर गोलू ने गिलास में बची हुई चाय खत्म की और गिलास जोर से टेबल पर रखकर कहा,”आप दोनों के पास कोनो और प्लान है ?”
लवली और गुड्डू ने एक दूसरे को देखा और फिर गोलू की तरफ देखकर दोनों ने एक साथ ना में गर्दन हिला दी।
“हाँ तो फिर जे ही पिलान है और कुछो गड़बड़ हुई भी तो हम है ना वही चंदौली मा रहेंगे भागकर आ जायेंगे गुड्डू भैया के पास लेकिन परसो बिंदिया भाभी का ब्याह तो नाही होने देंगे”,गोलू ने विश्वास से भरकर कहा।
लवली और गुड्डू ने भी अपनी बची चाय खत्म की और फिर उठ खड़े हुए।
गुड्डू ने चिल्लाकर दुकानवाले को पैसे खाते में लिखने को कहा और लवली से बोला,”भैया ! आप घर चलिए हम गोलू को जे के घर छोड़कर आते है”
“अरे गुड्डू भैया इत्ती रात मा घर जायेंगे तो गुप्ता जी चप्पल से स्वागत करेंगे हमारा,,,,,,,,एक काम करते है आपके हिया चलते है सुबह फिर साथ मा ही चंदौली निकल जायेंगे , नई”,गोलू ने कहा
“हाँ ठीक है चलो,,,,,,,,,,लेकिन तुम सोओगे कहा ?”,गुड्डू ने कहा
“कहा सोयेंगे ? अरे जे है न , इनके कमरा मा सो जायेंगे,,,,,,,,अब चलो भी यार नहीं भी जगह हुई तो आँगन मा सो जायेंगे”,गोलू ने गुड्डू को धकियाते हुए कहा
लवली बाइक लेकर निकल गया और गोलू गुड्डू के साथ गाड़ी में आ बैठा। गुड्डू ने गाड़ी स्टार्ट की और आगे बढ़ा दी। घर पहुंचने में आधा घंटा लगने वाला था इसलिए गोलू ने म्यूजिक सिस्टम पर गाना चला दिया और गाते हुए खुद भी मटकने लगा। वह एक अजीब सी ख़ुशी से चहक रहा था और कुछ देर बाद उसने कहा,”गुड्डू भैया ! एक ठो बात कहे”
“हाँ कहो”,गुड्डू ने शांत स्वर में कहा
“हमको ना बहुते ख़ुशी हो रही है , ऐसा लग रहा है जैसे कल कुछो बड़ा होने वाला है,,,,,,,,,,का पता सबेरे सबेरे हो जाए”,गोलू ने ख़ुशी से चहककर कहा
“जे तुम जब जब बहुते जियादा खुश हुए हो ना गोलू तुम्हायी बत्ती बनी है और तुम्हारे चक्कर मा हमायी भी,,,,,,,,,,,,,इहलीये जियादा चहको नाही , कल सबेरे वैसे भी बिना कोनो गड़बड़ किये सांति से चंदौली पहुंचना है,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने कहा
“अरे काहे टेंशन ले रहे है गुड्डू भैया ! चिल कीजिये न”,गोलू ने गाना बदलकर कहा और अगले ही पल गाना बजा
“खबर मेरी मौत की सुनते ही देखो , वो हाथो में मेहँदी रचाने लगे है”
गाना सुनते ही गोलू का मुँह बन गया और उसने म्यूजिक सिस्टम बंद करके कहा,”जे इत्ता मनहूस गाना काहे रखे हो गुड्डू भैया ? साला पूरा मूड की गुप्ता मिश्रा कर दी”
“हमायी गाडी नाही है पिताजी की है , जे सवाल जाकर उनसे पूछना”,गुड्डू ने गाड़ी चलाते हुए कहा
गोलू ने सुना तो चुपचाप बैठ गया क्योकि मिश्रा जी से सवाल कर सके इतनी हिम्मत तो उसमे भी नहीं थी।
गुड्डू गोलू को लेकर घर पहुंचा और कुछ देर में लवली भी आ पहुंचा। घरवाले सब सो चुके थे इसलिए गुड्डू ने गोलू से चुपचाप ऊपर जाने को कहा और खुद दरवाजा बंद कर अंदर चला आया।
गुड्डू अपने कमरे में आया तो देखा शगुन अभी तक जाग रही है। अंदर आकर गुड्डू ने कमरे का दरवाजा बंद किया और शगुन की तरफ आकर कहा,”अरे ! तुमहू अभी तक जाग रही हो और का हुआ तुम्हाये चेहरे पर जे परेशानी के भाव काहे , कुछो हुआ है का ?”
गुड्डू की बात सुनकर शगुन उसके पास आयी और कहा,”ये तो मैं आपसे पूछना चाहती हूँ , कुछ हुआ है क्या गुड्डू जी ?”
“मतलब हम समझे नहीं”,गुड्डू ने कहा
“आप सबके जाने के बाद पापाजी बहुत गुस्से में थे और उन्होंने कल सुबह गोलू जी को घर बुलाया है। गुड्डू जी क्या आपने और गोलू जी ने फिर से कोई कांड किया है ?”,शगुन ने परेशानी भरे स्वर में पूछा
“कांड तो कल करने वाले थे पिताजी को पहिले कैसे पता चल गया ? कही जे साले गोलू ने पिताजी के साथ भी तो कोनो व्हाट्सप्प ग्रुप नाही बना लिया,,,,,,,,,,नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता , पर जे तो पहली बार कुछो नवा हुआ , हर बार कांड होने के बाद पिताजी को पता चलता था इह बार पहिले ही पता चल गया”,गुड्डू मन ही मन बड़बड़ाया
“गुड्डू जी ! गुड्डू जी , किस सोच में पड़ गए आप ? सच सच बताईये क्या आपने और गोलू जी ने फिर से कुछ गड़बड़ की है ?”,शगुन ने कहा
“अरे नहीं शगुन हमने कुछो नाही किया और ना ही गोलू ने,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने हड़बड़ाकर कहा
“तो फिर दोपहर में आप एकदम से कहा चले गए थे ?”,शगुन ने गुड्डू के पीछे आते हुए कहा
गुड्डू बिस्तर पर बैठा और अपने जूते उतारते हुए कहा,”अरे वो तो हमने बताया था ना तुमको अस्पताल गए थे , अचानक से पिंकी की तबियत ख़राब हो गयी थी तो गोलू और मंगल फूफा ओह्ह्ह का लेकर अस्पताल गए थे। हमे गोलू का फोन आय रहा तो हमहू सोचे लड़का अकेला है चले जाते है बस इहलीये हमहू चले गए और जे बीच मा हमाओ फोन भी बंद,,,,,,,,,,,!!!”
“फोन तो आपका अब भी बंद ही आ रहा है गुड्डू जी”,शगुन ने कहा
गुड्डू ने सुना तो उसने अपनी जेबे टटोली और फिर उसे याद आया कि उसका फोन तो गोलू के घर पर ही रह गया उसने कहा,”ल्यो पिंकी को छोड़ने गुप्ता जी के घर गए थे और हमाओ फोन भी वही रह गओ”
“कोई बात नहीं कल सुबह जब गोलू जी आये तो उनसे कह देना वो ले आएंगे”,शगुन ने बिस्तर की बेडशीट सही करते हुए कहा
“गोलू जी आएंगे नहीं बल्कि गोलू जी हमाये साथ ही आये है , ऊपर है लवली भैया के कमरे में,,,,,,,,,,,,!!!!”,गुड्डू ने मायूसी से कहा क्योकि मिश्रा जी के सामने अब उसका और गोलू का कौनसा कांड सामने आया है ये तो वह भी नहीं जानता था।
अगली सुबह घर में शांति का माहौल था। मिश्रा जी सुबह सुबह अपने सारे कामों से निपटकर , नहा-धोकर अपने तख्ते पर आ बैठे। गुड्डू उठ चुका था लेकिन मिश्रा जी के प्रकोप से बचने के लिए जानबूझकर आँखे मूंदे पड़ा था। मिश्रा जी को शांत देखकर बाकि घरवाले भी चुपचाप अपने अपने कामो में लगे थे क्योकि मिश्रा जी शांति गुस्से का दूसरा रूप जो है। लवली भी नीचे चला आया और जब मिश्रा जी को गंभीर देखा तो मिश्राइन के पास आकर कहा,”का बात है अम्मा , पिताजी इत्ता गुस्से मा काहे है ?”
“जे समझ ल्यो आज घर का मौसम खराब है लवली,,,,,,,,!!!”,मिश्राइन ने भी दबे स्वर में कहा
“तो आज जे बिजली किस पर गिरने वाली है ?”,लवली ने धीरे से पूछा
” गोलू पर,,,,,,,,,,आज उह्ह घर ना ही आये तो अच्छा है”,मिश्राइन ने कहा और वहा से चली गयी। गोलू का नाम सुनकर लवली भी उलझन में पड़ गया क्योकि गोलू तो ऊपर सो रहा था और उसका मिश्रा जी से सामना होना तय था। पहली बार लवली को गोलू की चिंता हुई इसलिए वह उसे चेताने के लिए सीढ़ियों की तरफ बढ़ा , लवली ऊपर जा पाता इस से पहले ही मिश्रा जी ने उसे आवाज देकर बुला लिया।
लवली ने अपनी आँखे मीची और निचला होंठ दाँतो तले दबा लिया अब तो वह चाहकर भी गोलू की मदद नहीं कर सकता था। लवली पलटा और मिश्रा जी के पास चला आया
“जी पिताजी,,,,,,,,!!”,लवली ने मिश्रजी के सामने आकर कहा
“बइठो और शोरूम से जो कल का हिसाब किताब आया है ओह्ह्ह का जे रजिस्टर मा लिखकर फाइनल हमे बताओ”,मिश्रा जी ने रजिस्टर और लिस्ट लवली को थमाकर कहा
लवली वही बैठकर चुपचाप अपना काम करने लगा।
लवली के कमरे में सोया गोलू अंगड़ाई लेते हुए उठा और खुद से ही कहा,”आज तो सोने का मजा ही आ गवा , का गजब नींद आयी रही हमका,,,,,,,,,,,पर का करे जियादा सो भी तो नाही सकते ना , जिम्मेदार आदमी है भाई काम धंधा भी देखना पड़ता है,,,,,,,,,,,,,और आज तो बहुत बड़ी जिम्मेदारी है हमाये कंधो पर , अकेले हमको पूरा फंक्शन अरेंज करना है , नीचे चलकर शगुन भाभी के हाथ से बनी एक ठो बढ़िया सी अदरक वाली चाय पीकर निकलते है भैया घर , हुआ से फिर फूफा को उठा के चंदौली भी तो जाना है,,,,,,,,,,!!!”
ख़ुशी ख़ुशी गुनगुनाते हुए गोलू सीढ़ियों से नीचे चला आया। गोलू को घर में देखकर मिश्राइन , शगुन और वेदी जहा हैरान थी वही मिश्रा जी के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे और गोलू , वह तो कुछ ज्यादा ही खिलखिला रहा था। लवली ने उसे देखा तो आँखों ही आँखों में वहा से भाग जाने का इशारा किया लेकिन एक बार में गोलू को कोई इशारा समझ आ जाये ये भला कैसे हो सकता था ? उसने लवली के इशारे को नजरअंदाज किया और उत्साह से भरकर मिश्रा जी की तरफ आकर उनके पैर छूते हुए कहा,”पाय लागू चचा ! गुड मॉर्निंग”
“मॉर्निंग गोलू”,मिश्रा जी ने कड़क स्वर में कहा
“अरे खाली मॉर्निंग , मॉर्निंग के पहिले गुड काहे नाही लगाए ?”,गोलू ने हैरानी से कहा
“का है कि आज कि मॉर्निंग तुम्हाये लिए गुड नाही है”,मिश्रा जी ने सधे हुए स्वर में कहा
“काहे ?”,गोलू ने कहा क्योकि अभी तक उसे कुछ नहीं पता था
“अभी पता चल जाएगा ! ए गुड्डू,,,,,,,,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने गोलू से कहा और फिर एक कड़कदार आवाज गुंजी और जैसे ही मिश्रा जी की आवाज गुड्डू के कानो में पड़ी गुड्डू चद्दर फेंक सर पर पैर रखकर कमरे से आँगन की तरफ भागा।
क्या चंदौली में गोलू का प्लान हो पायेगा सफल या फिर गुड्डू फंस जाएगा किसी मुसीबत में ? क्या धीरे धीरे लवली को समझ आने लगा है गोलू का स्वाभाव ? सुबह सुबह क्या होगा गुड्डू और गोलू का हाल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
चाय की टपरी पर बैठे लवली , गुड्डू और गोलू तीनो ख़ामोशी से एक दूसरे को देख रहे थे। लड़का तीनो लिए चाय रखकर चला गया। तीनो ने अपना अपना गिलास उठाया और चाय पीने लगे। लल्लन और मंगेश का जिक्र करके गोलू ने गुड्डू और लवली दोनों को उलझन में डाल दिया। जितना आसान दोनों इसे समझ रहे थे उतना आसान ये सब था नहीं ,, गुड्डू ने चाय का एक घूंठ भरा और कहा,”तो अब का करे लवली भैया ? मंगेश पहिले से आपको लेकर बौखलाया हुआ है और उह्ह्ह लल्लन भी ओह्ह्ह के साथ है,,,,,,,,ऐसे मा बिंदिया भाभी को लेकर आना आसान नाही”
