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Manmarjiyan Season 4 – 38

Manmarjiyan Season 4 – 38

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू और लवली सबके साथ स्टेशन चले आये ट्रैन आने में अभी वक्त था इसलिए सभी प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर इधर उधर की बाते कर रहे थे। चाची बेंच पर बैठी थी। चाचा गुप्ता जी के साथ बात करने में व्यस्त थे , अमन और रोहन सबके लिए चाय लेने निकल गए , प्रीति गुड्डू से बातें कर रही थी और उसे छेड़ रही थी तो बचा लवली वह अकेला खड़ा था। उसे प्रीति से सॉरी बोलना था लेकिन मन ही मन घबरा भी रहा था। बिंदिया के अलावा आज तक उसने ना किसी लड़की से बात की ना ही कोई लड़की उसकी दोस्त रही।

लवली इसी उधेड़बुन में था कि उसे शगुन की कही बात याद आयी और वह मुस्कुरा उठा। लवली वहा से चला गया और कुछ देर बाद वापस आया तो उसके हाथो में कुछ चॉकलेट्स थे। वह गुड्डू और प्रीति के पास चला आया और गुड्डू से कहा,”गुड्डू ! हमे ज़रा इनसे कुछ बात करनी है”
“जीजू ! इनसे कह दीजिये मुझे इनसे कोई बात नहीं करनी”,प्रीति ने मुँह बनाकर कहा
“अरे सुन लो का कह रहे है , लवली भैया आप बात कीजिये हम आते है”,कहकर गुड्डू लवली और प्रीति को अकेले छोड़कर चाची के पास चला आया और उनसे बात करने लगा।

लवली प्रीति के सामने आया और हिम्मत करके कहा,”सबसे पहिले तो हम आपसे माफ़ी चाहते है , हमने आपकी माताजी को लेकर जो कुछ भी कहा उसके लिए हम शर्मिंदा है ,, हमे आपकी अम्मा के बारे में नहीं पता था प्रीति इसलिए गुस्से में हमाये मुँह से निकल गया। हमे माफ़ करना या ना करना आप पर निर्भर करता है लेकिन हम कभी नहीं चाहेंगे कि यहाँ से जाते हुए आप अपने मन में किसी भी तरह की कड़वाहट लेकर जाए,,,,,,,हो सके तो हमे माफ़ कर देना,,,,,,,,और ये कुछ चॉकलेट्स लेकर आये थे आपके लिए इन्हे रख लीजिये”

प्रीति लवली से गुस्सा थी लेकिन जब उसे सच पता चला तो उसने मन ही मन लवली को माफ़ कर दिया और चॉकलेट्स लेकर गुड्डू की तरफ बढ़ गयी।

प्रीति ने माफ़ नहीं किया है ये सोचकर लवली उदास हो गया और दूसरी तरफ जाने के लिए पलट गया तभी प्रीति ने आकर उसकी बाँह थामी और उसे साइड हग करके कहा,”अरे यार लवली जी ! आप तो गुड्डू जीजू से भी ज्यादा स्वीट है,,,,,,,,,उन्होंने तो मुझे आज तक एक चॉकलेट नहीं दी और आप मेरे लिए इतनी सारी चॉकलेट्स ले आये,,,,,,,,,,थैंक्यू ! मैंने आपको माफ़ किया और आप सॉरी मत कहिये वो क्या है ना बिना सोचे समझे मैंने भी आपको कुछ ज्यादा ही परेशान कर दिया था,,,,,,,,,!!”

लवली ने सुना तो उसकी आँखो में हलकी सी नमी तैर गयी और वह मुस्कुरा उठा। इस बार प्रीति का बाँह थामना उसे बिल्कुल बुरा नहीं लगा बल्कि उसने दूसरे हाथ से प्रीति का सर सहलाया और कहा,”सच में बच्ची हो”
“लो ये क्या बात हुई ? अरे इंसान का बचपना ही मर जाए तो फिर ख़ाक जी पायेगा वो”,प्रीति ने चहककर कहा
“बात तो तुम्हारी सही है,,,,,,,,,,!!!”,लवली ने मुस्कुरा कर कहा तो प्रीति खिलखिलाकर हंस पड़ी और फिर लवली की तरफ झुककर दबे स्वर में कहा,”वैसे आप इतना चुप चुप क्यों रहते है , कोई प्यार व्यार का चक्कर है क्या ?”

प्रीति की बात सुनकर लवली के चेहरे से ख़ुशी गायब हो गयी और उसे बिंदिया का ख्याल आया। लवली इस वक्त ऐसे धर्मसंकट में फसा हुआ था कि ना तो वह चकिया जाकर बिंदिया से मिल सकता था ना ही मिश्रा जी के खिलाफ जा सकता था। प्रीति लवली के चेहरे की तरफ देखने लगी और उसके जवाब का इंतजार करने लगी तभी गोलू वहा आ टपका और कहा,”का प्रीति जी ? हमसे मिले बिना ही वापस जा रही है आप,,,,,,,,अरे सादी हुई है हमायी कौनसा दुनिया से सन्यास ले लिए हम”

अरे गोलू जी ! धनभाग हमारे जो आप पधारे , मिश्रा अंकल से चप्पल खाने से फुर्सत मिले आपको तब ना हम आपसे मिले”,प्रीति ने गोलू को ताना मारकर कहा
गोलू ने अपना हाथ अपने सीने पर रखा और मुँह बनाकर कहा,”आपकी जे बात ना सीधा दिल पर लगी है,,,,,,,,,,!!”
“तुम हिया का कर रहे हो ?”,गुड्डू ने तीनो की तरफ आकर गोलू से कहा
“का कर रहे है मतलब ? प्रीति जी को गुड बाय बोलने आये है”,गोलू ने अकड़कर कहा

“तुमहू गुड बाय नाही बोलोगे तो का जे वापस जाएँगी नाही ?”,लवली ने गोलू को देखकर घूरते हुए कहा
लवली की बात सुनकर गोलू ने गुड्डू की बाँह पकड़ी और उसे साइड में लाकर कहा,”गुड्डू भैया ! जे लवली भैया कब से जे लाइन मा आ गए ?”
“कौनसी लाइन मा ?”,गुड्डू ने असमझ की स्तिथि में पूछा
“अरे हमाओ मतलब जे कब से प्रीति मा दिलचस्पी दिखाने लगे ?”,गोलू ने दबे स्वर में कहा

गुड्डू ने सुना तो गुस्से से गोलू को देखा और कहा,”घुसा मार के नाक फोड़ देंगे तुम्हायी समझे , साला बिना हड्डी की जबान है तो का कुछ भी बोलोगे”
“अरे मजाक कर रहे है गुड्डू भैया , मजाक नाही समझते आप”,गोलू ने झेंपते हुए कहा

“सुधर जाओ गोलू”,गुड्डू ने कहा और फिर दोनों वापस लवली की तरफ चले आये। रोहन और अमन सबके लिए चाय ले आये थे। चाय ख़त्म होते होते ट्रेन भी आ चुकी थी। गुड्डू और गोलू ने सब सामान अंदर रखा और ट्रैन से बाहर चले आये। चाचा , चाची और गुप्ता जी अपनी अपनी सीटों पर जा बैठे। अमन , प्रीति और रोहन दरवाजे पर चले आये और जैसे ही ट्रैन चली उन्होंने गुड्डू , गोलू और लवली को देखकर हाथ हिला दिया।

ट्रैन के जाने के बाद लवली ने गुड्डू को देखा और गंभीर स्वर में कहा,”गुड्डू ! बिंदिया किसी बड़ी मुसीबत मा है , कल सुबह हम भी तुम्हाये साथ चकिया चलेंगे”
“आपको कैसे पता बिंदिया भाभी मुसीबत में है ?”,गुड्डू ने हैरानी से पूछा

“हमने मनोज को फोन किया था तब उसने बताया कि उह्ह्ह साला मंगेश जबरदस्ती बिंदिया की सादी किसी और से कर रहा है ,,  हमने ओह्ह से कहा था कि एक बार बिंदिया से हमायी बात करवाए लेकिन आज सुबह से ही ओह्ह्ह का फोन नहीं लग रहा”,लवली ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“जे मनोज कौन है ?”,गोलू ने पूछा  
“हमाओ पडोसी है”,लवली ने बिना गोलू की तरफ देखे कहा

“लेकिन आपके पडोसी तो सोनू भैया और रौशनी के घरवाले है”,गोलू ने कहा
लवली ने गोलू को घुरा और कहा,”सोनू भैया और रौशनी के पिताजी गुड्डू के पडोसी है हमाये नहीं,,,,,,,!!!”
“अरे तो आप भी तो गुड्डू भैया के साथ ही रहते है ना मिश्रा जी के घर मा तो आपके भी तो पडोसी वही हुए”,गोलू ने झुंझलाकर कहा
एक तो लवली पहले ही परेशान था ऊपर से गोलू के ये उटपटांग सवाल उसने खीजकर कहा,”अबे बैलबुद्धि हमहू चकिया की बात कर रहे है”

“अब जे चकिया कौन है ? अभी तो आप मनोज बोले”,गोलू ने भी चिढ़कर कहा
लवली और गोलू दोनों एक दूसरे से इस कदर उलझ पड़े कि गुड्डू को बोलने का मौका ही नहीं मिला वह कभी लवली की तरफ देखता तो कभी गोलू की तरफ
“साले तुमहू आदमी हो कि पजामा , चकिया गांव का नाम है और मनोज आदमी का”,लवली ने कहा
“हाँ तो हमे काहे बताय रहे हो , हम कौनसा जनगणना मा बाबू लगे है ?”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा

अब तक लवली के सब्र का बाँध टूट चुका था इसलिए उसने गोलू की गर्दन को अपनी मजबूत बाँह में दबोचा और उसकी पीठ पर घुसा मारते हुए कहा,”भाड़ मा गया मनोज और भाड़ मा गयी चकिया,,,,,,,,,पहिले तुम्हायी बत्ती बनाते है”
“अरे गुड्डू भैया ! जे दानव से बचाओ हमे”,गोलू चिल्लाया
गुड्डू ने लवली को समझा बुझाकर गोलू को उस से छुड़ाया तब तक एक पुलिस वाला वहा चला आया और कहा,”ए ! का हो रहा है हिया , काहे झगड़ा कर रहे हो ?”

“झगड़ा नाही कर रहे जे बस इनको कुछ समझा रहे थे”,गुड्डू ने बात को सम्हालकर कहा
“हाँ तो जे रेलवे स्टेशन है तुम लोगन का घर नाही , जाओ घर जाकर समझाओ और दोबारा हिया नजर नाही आना,,,,,,,,,चलो भागो यहाँ से”,पुलिसवाले से कहा
“ए ! ज़रा तमीज से,,,,,,,,,,!!!”,लवली ने थोड़ा गुस्से से कहा तो गुड्डू बीच में आया और उसे ले जाते हुए कहा,”अरे चलिए ना लवली भैया ! बाहर चलकर बात करते है,,,,,,!!!”

गोलू भी गुड्डू और लवली के साथ बाहर चला आया। गुड्डू ने लवली से बाइक लेकर निकलने को कहा और नुक्कड़ वाली चाय की टपरी पर मिलने को कहा। लवली बाइक लेकर निकल गया। गुड्डू गोलू के पास आया और उसके सर पर एक चपत लगाकर कहा,”का बे ! का जरूरत थी लवली भैया से बहस करने की , अरे उह्ह्ह बेचारे पहिले से बिंदिया भाभी को लेकर परेशान है और तुमहू,,,,,,,,,,,,,और मना किये थे ना हम तो काहे चले आये स्टेशन ?

तुमसे कहे रहे घर मा रहो पिंकी का ख्याल रखो लेकिन नाही बिना रंगबाजी के तुम्हे नींद थोड़े न आएगी,,,,,,,,,,,,,,अब जे बताओ कैसे आये हो ?” “रिक्शा से आये रहय”,गोलू ने कहा
“आओ मरो हमाये साथ,,,,,,,!!”,गुड्डू ने कहा और गाड़ी की तरफ बढ़ गया। गोलू गुड्डू के बगल में आ बैठा और गुड्डू ने गाड़ी स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी। गुड्डू का ध्यान गाड़ी चलाने में था और गोलू अपने फोन से किसी को मैसेज भेजने में बिजी था।

गुड्डू ने देखा तो कहा,”जे इत्ती रात मा फोन मा काहे घुसे हो तुम और काहे छोडो किसके साथ लगे हो उह्ह्ह बताओ ?”
“अरे उह्ह्ह आपकी भुआ के साथ ग्रुप बनाये रहय ना तो उसी मा भुआ चुटकला भेजी रही हमे”,गोलू ने खुश होकर कहा
“किसकी भुआ ?”,गुड्डू ने पूछा

“अरे आपकी भुआ , राजकुमारी,,,,,,,,,,हिया से जाने के बाद भुआ व्हाट्सअप ग्रुप बनायीं रही तो हमको भी ऐड कर ली तब से बस रोज गुड मॉर्निंग गुड नाईट के फूल वाले फोटू भेज देते है हम भी ग्रुप मा”,गोलू ने गुड्डू की तरफ पलटकर कहा
गुड्डू ने जैसे ही सुना एकदम से ब्रेक लगाया और कहा,”अबे का भांग वांग खाकर बैठे हो तुमहू , भुआ के साथ ग्रुप काहे बना लिए ?”
“अरे तो का हुआ , आपकी भुआ इत्ती खराब भी नाही है। देखा नाही दादिया के दिन पुरे होने के बाद कित्ता मीठा बोल रही थी सबसे”,गोलू ने कहा

गुड्डू ने सुना तो गोलू को घुरा और कहा,”नागिन चाहे घूँघट निकाल के आ जाये रहती नागिन ही है”
“ए गुड्डू भैया ! हमायी राजकुमारी भुआ को नागिन कह रहे है आप , जे कबो बर्दास्त नाही करेंगे हमहू”,गोलू ने अकड़कर कहा
“कित्ते मा बिके ?”,गुड्डू ने सहजता से कहा जो कि गोलू की हरकतों से अच्छी तरह से वाकिफ था
“एक सेंट मा”,गोलू ने भी बेशर्मी से कहा

“साले एक सेंट मा बिक गए , हिया कानपूर मा 150-150 मा मिलता है हमहू दिला देता”,गुड्डू ने खीजकर कहा
“150 वाला नाही गुड्डू भैया ! दुबई वाला सेंट , भुआ ने बताया ओह्ह्ह का पहिचान का रहता है हुआ ओह्ह्ह से मँगवायेगी और सुनो हमाई बात दोबारा भुआ को नागिन नाही बोलना समझे”,गोलू ने खुश होकर कहा
“जिस दिन तुम्हाये पिछवाड़े पर काटेगी ना ओह्ह्ह दिन समझ आएगा तुमको , तब तक बने रहो भुआ के खास”,गुड्डू ने कहा और गाड़ी स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी

चाय की टपरी पर बैठा लवली गुड्डू और गोलू का इंतजार कर रहा था। कुछ देर बाद गाड़ी आकर रुकी और गुड्डू गोलू एक दूसरे से झगड़ते हुए लवली की तरफ चले आये। उन्हें झगड़ते देखकर लवली ने अपना सर पीट लिया और उठकर दोनों को अलग करके जोर से चिल्लाया,”का कर रहे हो तुम दोनों , साला हमायी प्रॉब्लम सॉल्व करोगे कि खुदही आपस मा लड़ते रहोगे,,,,,,,,,,और जब गधो की तरह लड़ना ही है तो फिर लैला मजनू बन के साथ मा घूमते काहे हो ?”

“गधा कह रहे है आपको ?”,गोलू ने दबे स्वर में गुड्डू से कहा
“हाँ तो तुमको भी कहा है”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा
“चुप करो तुम दोनों,,,,,,,,,,और गुड्डू तुम , तुम्हरे पास हमरी परेशानी का हल है तो बताओ वरना हम खुद चकिया चले जाते है , बाद मा जो होगा देखा जाएगा”,लवली ने गुस्से से कहा
लवली को गुस्से में देखकर गुड्डू और गोलू दोनों शांत हो गए और बेंच पर आ बैठे। हताश होकर लवली भी उनके पास चला आया और गुड्डू ने दुकान पर काम करते लड़के से 3 चाय भेजने को कहा।

चाय का आर्डर देकर गुड्डू लवली की तरफ पलटा तो लवली ने बहुत ही गंभीरता से कहा,”हमाये पास बख्त बहुत कम है गुड्डू , परसो बिंदिया की सादी किसी और के साथ है और जे होने से पहिले हमे ओह्ह्ह को हिया लेकर आना है,,,,,,,,,,,,पिताजी से कुछो कहा तो उह्ह्ह हमे जाने नाही देंगे और झूठ बोलकर गए तो हमेशा के लिए ओह्ह की नजरो मा गिर जायेंगे,,,,,,,,,,,,तुम बस हमरा एक ठो काम कर दो एक बार चकिया जाकर बिंदिया से हमायी बात करवाय दयो बस , एक बार उह्ह्ह कह दे कि उह्ह्ह हम से प्रेम करती है और आगे की जिंदगी हमाये साथ जीना चाहती है , ओह्ह्ह के बाद बाकी सब हम देख लेंगे”

“लवली भैया ! आप परेशान ना होईये कल सुबह ही हम चकिया जा रहे है और बात का अगर बिंदिया भाभी की हाँ हुई तो हम उन्हें अपने साथ ही कानपूर ले आएंगे”,गुड्डू ने कहा
गोलू पूरी बात ध्यान से सुन रहा था इन सब बातो के साथ उसकी आँखों के सामने मंगेश और लल्लन का चेहरा भी आ गया क्योकि चकिया में सिर्फ बिंदिया ही तो नहीं थी , उसे रोकने वाला मंगेश भी था।

उसने बहुत ही गंभीर होकर कहा,”लेकिन गुड्डू भैया मंगेश और ओह्ह्ह के आदमी इत्ती आसानी से बिंदिया भाभी को हिया लाने देंगे,,,,,,,,,,,पिछली बार का हुआ था भूल गए और फिर उह्ह्ह भी तो है”
“उह्ह्ह कौन बे ?”,गुड्डू ने पूछा
“अरे उह्ह्ह बब्बन,,,,,,,,,,,,,मंगेश जेल से छूटा है तो उह्ह्ह भी तो छूटा होगा न”,गोलू ने उतनी ही गंभीरता से कहा
“अब जे बब्बन कौन है ?”,गुड्डू ने झुंझलाकर कहा
लवली अब तक गोलू को समझने लगा था इसलिए गुड्डू की तरफ देखकर अफ़सोस भरे स्वर में कहा,”लल्लन की बात कर रहा है जे”

( क्या गुड्डू की तरह गोलू लवली के साथ भी आसान बना पायेगा अपना रिश्ता ? गोलू का भुआ के साथ बनाया व्हाट्सप्प ग्रुप क्या खड़ी करने वाला है गुड्डू के लिए मुसीबत ? क्या एक बार फिर से होगा गुड्डू , गोलू और लवली का सामना मंगेश और लल्लन से ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

लवली ने सुना तो उसकी आँखो में हलकी सी नमी तैर गयी और वह मुस्कुरा उठा। इस बार प्रीति का बाँह थामना उसे बिल्कुल बुरा नहीं लगा बल्कि उसने दूसरे हाथ से प्रीति का सर सहलाया और कहा,”सच में बच्ची हो”
“लो ये क्या बात हुई ? अरे इंसान का बचपना ही मर जाए तो फिर ख़ाक जी पायेगा वो”,प्रीति ने चहककर कहा
“बात तो तुम्हारी सही है,,,,,,,,,,!!!”,लवली ने मुस्कुरा कर कहा तो प्रीति खिलखिलाकर हंस पड़ी और फिर लवली की तरफ झुककर दबे स्वर में कहा,”वैसे आप इतना चुप चुप क्यों रहते है , कोई प्यार व्यार का चक्कर है क्या ?”

लवली ने सुना तो उसकी आँखो में हलकी सी नमी तैर गयी और वह मुस्कुरा उठा। इस बार प्रीति का बाँह थामना उसे बिल्कुल बुरा नहीं लगा बल्कि उसने दूसरे हाथ से प्रीति का सर सहलाया और कहा,”सच में बच्ची हो”
“लो ये क्या बात हुई ? अरे इंसान का बचपना ही मर जाए तो फिर ख़ाक जी पायेगा वो”,प्रीति ने चहककर कहा
“बात तो तुम्हारी सही है,,,,,,,,,,!!!”,लवली ने मुस्कुरा कर कहा तो प्रीति खिलखिलाकर हंस पड़ी और फिर लवली की तरफ झुककर दबे स्वर में कहा,”वैसे आप इतना चुप चुप क्यों रहते है , कोई प्यार व्यार का चक्कर है क्या ?”

लवली ने सुना तो उसकी आँखो में हलकी सी नमी तैर गयी और वह मुस्कुरा उठा। इस बार प्रीति का बाँह थामना उसे बिल्कुल बुरा नहीं लगा बल्कि उसने दूसरे हाथ से प्रीति का सर सहलाया और कहा,”सच में बच्ची हो”
“लो ये क्या बात हुई ? अरे इंसान का बचपना ही मर जाए तो फिर ख़ाक जी पायेगा वो”,प्रीति ने चहककर कहा
“बात तो तुम्हारी सही है,,,,,,,,,,!!!”,लवली ने मुस्कुरा कर कहा तो प्रीति खिलखिलाकर हंस पड़ी और फिर लवली की तरफ झुककर दबे स्वर में कहा,”वैसे आप इतना चुप चुप क्यों रहते है , कोई प्यार व्यार का चक्कर है क्या ?”

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