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Pasandida Aurat Season 3 – 9

Pasandida Aurat Season 3 – 9

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

सुबह के 4 बज रहे थे और अवनि पृथ्वी अभी तक जाग रहे थे। अवनि के लिखे 13 खतों में से पृथ्वी अब तक 11 खत पढ़ चुका था इन्हे पढ़ते हुए उसकी आँखे ना जाने कितनी ही बार नम हुई , कभी वह खुश हुआ तो कभी मुस्कुराया , कभी शरमाया तो कभी हैरान भी हुआ लेकिन इन खतों को पढ़कर पृथ्वी को ये अहसास तो हो चुका था कि अवनि को भी उस से मोहब्बत है। 11 खत पढ़ने और उसके बाद की सच्चाई जानने के बाद अवनि भावुक हो गयी और पृथ्वी के सीने से लगकर रो पड़ी। पृथ्वी ने उसे चुप करवाया और पास पड़ी कुर्सी पर बैठा दिया।

उसने बाहरवा ख़त उठाया और लेकर अवनि के पास चला आया। अवनि कुर्सी पर बैठी थी तो पृथ्वी उसके बगल में नीचे फर्श पर आ बैठा ये देखकर अवनि जैसे ही उठने को हुई पृथ्वी ने उसके घुटने पर हाथ रखकर कहा,”बैठो”
अवनि वापस बैठ गयी पृथ्वी ने एक हाथ की कोहनी अवनि के पैर पर रखी और अवनि का हाथ उठाकर अपने सर पर रख दिया जिस से अवनि उसके बालों में अपनी उंगलिया घुमा सके। पृथ्वी ने लिफाफे को खोलकर खत निकाला और पढ़ने लगा।

“प्रिय पृथ्वी !
हर हर महादेव ! अपने दिल को मजबूत करके ये खत तुम्हे लिख रही हूँ। पापा नहीं रहे पृथ्वी , वो मुझे हमेशा हमेशा के लिए छोड़कर जा चुके है। कभी सोचा नहीं था जिंदगी में ऐसा मोड़ भी आयेगा। खुशियों ने मेरी जिन्दगी में दस्तक दी ही थी कि गम के बादल फिर मंडराने लगे और पापा चले गए। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। जब हॉस्पिटल में थे तब एक पल के लिए भी उन्होंने मेरा हाथ नहीं छोड़ा था पृथ्वी और जब छोड़ा तो दुनिया को अलविदा कह दिया।

उस पल मैं पूरी तरह टूट चुकी थी , मेरे लिए खुद को सम्हालना मुश्किल हो गया था और फिर अपने आखरी वक्त में पापा ने जो कहा वो सुनकर तो मेरी हिम्मत ही टूट गयी। अब तक मैं इस इन्तजार में थी कि तुम वापस आओगे ? ये मेरा विश्वास था या मेरा प्यार मैं नहीं जानती बस जानती थी तो सिर्फ ये कि एक दिन तुम आओगे,,,,,,,,,,लेकिन उस वक्त मेरी ये आस टूट गयी जब पापा ने मेरे लिए “सिद्धार्थ” को चुना। आखरी वक्त में उन्होंने जो कहा मैंने उसे उनकी आखरी इच्छा समझकर स्वीकार कर लिया और सिद्धार्थ को शादी के लिए हाँ कह दिया।

किसी और को शादी के लिए “हाँ” कहना मेरे लिए मर जाने जैसा था लेकिन मैं अब किसी को और तकलीफ देना नहीं चाहती थी। सबने कहा सिद्धार्थ बदल गया है , मैंने भी महसूस किया कि अब वो पहले जैसा बिल्कुल नही रहा पर वो शायद ये नहीं जानता था कि मुझे उस से मोहब्बत नहीं है , मैं अपना मन और अपनी आत्मा कब का तुम्हारे नाम कर चुकी थी और ये समझने में मुझे बहुत वक्त लग गया पृथ्वी,,,,,,,,,लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है। जानती हूँ तुम आज भी मेरा इंतजार कर रहे हो ,

जब तक मैं तुम्हारी जिंदगी से हमेशा हमेशा के लिए नहीं चली जाती तुम अपनी जिंदगी में आगे नहीं बढ़ोगे , ना किसी और को अपनी जिंदगी में आने दोगे इसलिए सिद्धार्थ से शादी करने की एक वजह ये भी है कि तुम मुझे भूल जाओ और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाओ। जितना मुश्किल तुम्हारे लिए ये करना है उस से कई ज्यादा तकलीफ मुझे तुम्हे ये लिखते हुए हो रही है। मुझे किसी और का देखकर शायद तुम मुझसे नफरत हो जाए लेकिन मैं तुम्हारी जिंदगी बर्बाद करना नहीं चाहती पृथ्वी ,

मुझे अपनाकर तुम सबकी नफरत का शिकार हो जाओगे,,,,,,,,,,,और ये मैं कभी नहीं चाहती ! इस जिंदगी में एक बार तुमसे मिलना चाहती थी लेकिन लगता है अब हम कभी नहीं मिल पाएंगे।
मैं शादी करने जा रही हूँ ये बात तुम्हे बताने की हिम्मत मुझमे नहीं है पृथ्वी इसलिए ये खत लिख रही हूँ। ये खत कभी तुम तक पहुंचेंगे भी या नहीं मैं नहीं जानती और चाहती हूँ कि ये खत तुम तक ना ही पहुंचे। इस खत में लिखा हर शब्द सिवाय तकलीफ के तुम्हे कुछ नहीं देगा।

मैं चाहती हूँ कि तुम सब भूलकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाओ पर क्या मैं आगे बढ़ पाऊँगी ? जो सपने तुमने मेरे साथ देखे है वो सपने क्या मैं किसी और के साथ पुरे कर पाऊँगी ? जितनी मोहब्बत तुम मुझसे करते हो उतनी मोहब्बत क्या मैं किसी और से कर पाऊँगी ? शायद नहीं फिर भी मुझे अपने लिए ये फैसला लेना होगा पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,,,जल्दी ही घर में शादी की तैयारियां शुरू हो जाएँगी , सब इस शादी से बहुत खुश है और रही मेरी ख़ुशी की बात तो वो तुम्हारे साथ ही चली गयी,,,,,,,,,,

लिखने के लिए बहुत कुछ है लेकिन शब्द साथ नहीं दे रहे , अब कुछ भी लिखते हुए हाथ काँप रहे है और आँखे किसी भी वक्त बरसने को तैयार,,,,,,,,,,,,इस से आगे कुछ लिखूंगी तो रो दूंगी ! मुझे भूल जाओ पृथ्वी भूल जाओ,,,,,,,,,,,,,इस दुनिया में ना सही उस दुनिया में हम जरूर मिलेंगे”

पढ़ते हुए पृथ्वी का गला रुंध गया उसे वो पल याद आ गए जब अवनि ने फ़ोन करके अपनी शादी में आने को कहा था। पृथ्वी को गले में चुभन का अहसास हुआ , सीने में हल्का मीठा दर्द और आँखों में नमी ,, उस पल पृथ्वी को भी लगा था कि उसने अवनि को हमेशा हमेशा के लिए खो दिया जैसे ,, उस रात वह नकुल के सामने कितना रोया था वही जानता है। खत जैसे ही खत्म हुआ उसके बालों में घूमती अवनि कीउँगलियाँ रुक गयी। पृथ्वी ने अपना हाथ अपने सर पर रखे अवनि के हाथ पर रखा तो अवनि ने महसूस किया पृथ्वी का हाथ ठंडा पड़ चुका है।

पृथ्वी ने अवनि के हाथ को नीचे लाकर अपने होंठो के सामने किया और अवनि की हथेली को चूम लिया। पृथ्वी ने अवनि के उस हाथ को कसकर थाम लिया जैसे अवनि उसे छोड़कर जा रही हो और वह उसे रोकना चाहता हो। पृथ्वी के हाथ की उस पकड़ से अवनि को समझ आ गया कि पृथ्वी के जहन में इस वक्त क्या चल रहा है। उसने अपना ललाट पृथ्वी के सर पर टिका दिया और दूसरे हाथ से दोनों के हाथो को पकड़ लिया।

पृथ्वी खामोश था ये खत पढ़ने के बाद वह अपनी भावनाओ को कोई नाम नहीं दे पा रहा था , उसकी आँखों के सामने बस वो पल चल रहे थे जब अवनि उस से हमेशा हमेशा के लिए दूर होने वाली थी।

पृथ्वी ने गहरी साँस ली तो अवनि ने पलटकर टेबल पर रखा पानी का गिलास उठाया और पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी ने गिलास लिया और एक साँस में खाली कर दिया जैसे उसे बहुत तेज प्यास लगी हो , कुछ देर पहले तक उसका गला सुख चुका था लेकिन अब तर था।
अपनी कोहनी अवनि के पैर पर टिकाये पृथ्वी अवनि की तरफ घुमा और कहा,”उस रात जब तुमने कहा कि तुम शादी करने जा रही हो , जानती हो मुझ पर क्या बीती थी ?

मैंने अपने होशो हवास खो चुका था अवनि,,,,,,,,,,,,मैं कभी रोता नहीं हूँ अवनि , बड़ी से बड़ी तकलीफ के बाद भी नहीं लेकिन उस रात मैं नकुल के सामने बच्चो की तरह रोया था और वो भी मुझे नहीं सम्हाल पाया। अवनि मैंने तुम्हे पाया नहीं था लेकिन ना जाने क्यों पहले दिन से ही मुझे ये महूसस होता था जैसे तुम सिर्फ मेरी हो और तुम पर मेरा हक़ है। मुझे तुमसे प्यार बाद में हुआ लेकिन शादी का ख्याल पहले आया।

मैं हमेशा अपने इस फैसले को लेकर कॉन्फिडेंट था कि मुझे तुम से शादी करनी है , तुम्हारे साथ रहना है लेकिन तुमने जब अपनी शादी की बात कही तो लगा जैसे सब बिखर गया है और अब मेरे हाथ में कुछ भी नहीं,,,,,,,,,,अवनि मैं कभी शब्दों में जाहिर कर ही नहीं पाऊँगी कि मुझे तुमसे कितनी मोहब्बत है”

“आपको जाहिर करने की जरूरत नहीं है पृथ्वी , आपकी आँखों में सब नजर आ रहा है और अगर मैं आपकी आँखे नहीं पढ़ पायी तो फिर मेरा Writer होना बेकार है,,,,,,,,,,,,,मैंने बहुत सी प्रेम कहानिया लिखी है लेकिन उन सब कहानियों से बेहतरीन प्रेम कहानी मैंने आपके साथ जी है पृथ्वी। आप जैसे इंसान को अगर उसका प्यार ना मिले तो फिर ये संसार की सबसे दुःखद घटनाओ में से एक होगा”,अवनि ने कहा
“बस अब एक ख़त और बचा है”,पृथ्वी ने नम आँखों के साथ कहा

“हाँ और उस खत के साथ ही हमारी ये दुःखद कहानी भी खत्म हो जाती है”,अवनि ने उदासी भरे स्वर में कहा
“खत्म नहीं अवनि ! शुरू , यहाँ से हमारी असल कहानी शुरू होती है,,,,,,,,,,,जो खत्म हुआ वो बस इंतजार था”,कहते हुए पृथ्वी उठा और आखरी लिफाफा लेकर उसे खोलने लगा। अवनि कुर्सी से उठी और खिड़की के पास चली आयी। पृथ्वी भी खत लेकर खिड़की के पास चला आया और खिड़की के दूसरे किनारे से पीठ लगाकर खत पढ़ने लगा

“प्रिय पृथ्वी !
हर हर महादेव ! आज मैं तुम्हे ये आखरी खत लिख रही हूँ ! आखरी इसलिए क्योकि इसके बाद मैं तुम्हे कोई खत नहीं लिख पाऊँगी। कल मैं किसी और की अमानत हो जाउंगी। मेरे पास बस सिर्फ कुछ घंटे है जिनमे मैं तुम्हारे बारे में सोच सकती हूँ , तुम्हे याद कर सकती हूँ और तुम्हारे लिए ये खत लिख सकती हूँ। जानती हूँ शादी के बारे में सुनकर तुम्हे बहुत दुःख हुआ होगा , उस पल तुम्हारे लिए खुद को सम्हालना कितना मुश्किल रहा होगा। जितना मुश्किल तुम्हारे लिए ये स्वीकार करना है उस से कई गुना ज्यादा मुश्किल मेरे लिए ये फैसला करना था पृथ्वी !

आज इस आखरी खत में मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मैं तुम से प्यार करती हूँ पृथ्वी , बहुत प्यार करती हूँ लेकिन तुम्हे चाहकर भी अपनी इस जिंदगी में शामिल नहीं कर सकती क्योकि मैं मजबूर हूँ। तुम्हारे घरवाले कभी इस शादी के लिए राजी नहीं होंगे और मैं उनका दिल दुखाकर तुम्हारे साथ घर नहीं बसा सकती। मैं जानती हूँ तुम्हारे लिए मुझे भूलना मुश्किल होगा और मेरे लिए तुम्हे भूलना नामुमकिन  लेकिन फिर भी मैंने तुम से दूर जाने का फैसला किया है।

मेरे इस फैसले से आहत होकर ही सही कम से कम तुम अपनी दुनिया में आगे बढ़ जाओगे  
मैं तुम्हे कभी इतनी तकलीफ देना नहीं चाहती थी पृथ्वी , यहाँ कोई मेरी बात समझने को तैयार नहीं है,,,,,,,,सुरभि भी नहीं। मैं जानती हूँ मेरे इस फैसले से वह बहुत नाराज है लेकिन मैं उसे मना लूंगी। पृथ्वी तुम एक बहुत अच्छे इंसान हो लेकिन तुम मेरी जिंदगी में बहुत देर से आये पृथ्वी अगली जिंदगी में अगर हमारा मिलना लिखा हो तो थोड़ा जल्दी आना। कल शादी है और एक आखरी बार मै तुम्हे देखना चाहती हूँ

इसके बाद पता नहीं दोबारा तुम्हे देखना नसीब हो या न हो ,, कल तुम्हारी दी वो हरी चूडिया पहनूंगी , तुम नहीं भी आये तो कम से कम तुम्हारी दी उन चूड़ियों में तुम्हारे होने का अहसास तो होगा,,,,,,,,,,,,,देखो ना तुमसे दूर जाने का फैसला करने के बाद भी मैं , मैं तुमसे दूर नहीं जा पा रही। तुमसे दूर जाने की , तुम्हे भूल जाने की बाते करती हूँ लेकिन तुम्हारी यादो को आज भी अपने दिल से लगा रखा है। क्या मैं इन यादों को कभी अपने दिल से आजाद कर पाऊँगी पृथ्वी ? क्या मैं कभी तुम्हे भूल पाऊँगी ?

सिद्धार्थ से शादी सिर्फ एक समझौता है जिसमे वो बस एक ऐसे लड़की से शादी करने जा रहा है जिसने अपना मन और अपनी आत्मा तुम्हारे नाम कर दिए है। पृथ्वी हो सके तो मुझे माफ़ कर देना,,,,,,,,,,,मैं , मैं तुम्हारी गुनहगार हूँ पृथ्वी , तुम्हारे दिल में मोहब्बत जागकर मै तुम्हे बीच सफर में छोड़कर जा रही हूँ। मैं कल तुम्हारा इंतजार करुँगी , मेरे आखरी फेरे तक मैं तुम्हारी रहूंगी पृथ्वी उसके बाद किसी और की हो जाउंगी,,,,,,,,,,,,,,,,जानती हूँ तुम नहीं आओगे और ऐसा कुछ नहीं होगा फिर भी ना जाने क्यों ऐसा लग रहा है जैसे कल सब बदल जाएगा ,

महादेव को मुझ पर तरस आएगा और वो ये शादी रोक देंगे,,,,,,,,,,,,हाह ! महादेव ! महादेव ही तो नहीं सुन रहे पृथ्वी,,,,,,,,काश वो सुनते , काश वो ये देख पाते कि मुझे तुम्हारी जरूरत है ? काश वो ये समझ पाते कि जिस से मोहब्बत है उस से दूर जाने की तड़प क्या होती है ? काश वो एक बार मेरे मन में झांककर देख लेते , काश वो सुनते उन प्रार्थनाओ को जिनमे सिर्फ तुम्हारा जिक्र था,,,,,,,,,,,,,,,,,लेकिन मुझे महादेव से कोई नाराजगी नहीं है पृथ्वी , मुझे खुद से शिकायत है मैंने भी तुम्हारे प्यार को नहीं समझा , मैंने भी तो तुम्हारे मन में झांककर नहीं देखा ,

मैंने भी तो तुम्हे जाने से नहीं रोका,,,,,,,,,,,,,फिर क्यों मुझे तुम्हारे लौट आने का इंतज़ार है ? आज की रात बहुत तकलीफदेह है पृथ्वी क्योकि तुम्हारा ख्याल मैं अपने मन से निकाल नहीं सकती,,,,,,,,,,,,बस कुछ घंटे और तुम्हारे ख्यालों के साथ बिताने की इजाजत चाहती हूँ तुमसे,,,,,,,!!
इसी के साथ इस खत को खत्म करती हूँ पृथ्वी , जिंदगी में अब कभी किसी के लिए खत नहीं लिखूंगी,,,,,,,,,,,,,क्योकि एक औरत खत सिर्फ अपने “पसंदीदा मर्द” के लिए लिखती है और मुझे ये समझने में इतना वक्त लग गया कि वो तुम ही थे।

अलविदा पृथ्वी ! अपना ख्याल रखना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!

आखरी ख़त पढ़ने के साथ ही पृथ्वी की आँखों में आँसू और होंठो पर मुस्कान थी। इस आखरी ख़त में अवनि ने चंद लाईनो में वो सब कह दिया जो पृथ्वी अब तक सुनने के लिए तरस रहा था। अवनि पृथ्वी की “पसंदीदा औरत” है ये तो सब जानते थे लेकिन पृथ्वी अवनि का “पसंदीदा मर्द” है ये बात पृथ्वी को आज पहली बार पता चली। ये खत अवनि ने शादी से कुछ घंटे पहले लिखा था और उसके बाद क्या हुआ था ये तो सब जानते ही है। महादेव ने पृथ्वी की सुन ली और जो सिद्धार्थ अवनि से शादी करने जा रहा था उसने खुद अवनि का हाथ पृथ्वी के हाथ में सौंप दिया।

पृथ्वी ने ख़त को मोड़ा और अवनि की तरफ पलटकर कहा,”तुमने ये सब कहने में इतनी देर क्यों की अवनि ? तुम्हे मुझसे मोहब्बत है ये बात तुमने आखरी ख़त में लिखी जबकि मैं तो पहले खत में ही ये भांप गया था कि तुम्हे मुझसे मोहब्बत है फिर ये 13 ख़त क्यों ?”
अवनि पृथ्वी के सामने आयी और कहा,”ताकि इन्हे पढ़ते हुए आप उस हर अहसास से गुजरे जो आपको लेकर मैंने महसूस किया है , ख़त लिखने वाला जानता है कि लिखते वक्त उसने क्या महसूस किया लेकिन जब पढ़ने वाला भी वही महसूस करे तो समझो लिखना साकार हुआ,,,,,,,,,,,

ये ख़त महज शब्द नहीं है पृथ्वी मेरी वो भावनाये है जो मैं कभी आपसे कह ना सकी,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
पृथ्वी ने अवनि के चेहरे को अपने हाथो में थामा और उसके ललाट को अपने होंठो से छूकर कहा,”तुम्हे मुझसे कुछ कहने की जरूरत नहीं है अवनि , तुम्हारी आँखों में सब साफ दिखता है,,,,,,,,,,,,मैं ये ख़त ताउम्र सम्हालकर रखूंगा”
“नहीं पृथ्वी ! जितनी बार आप इन्हे पढ़ेंगे आपको उतनी ही तकलीफ होगी”,अवनि ने कहा

“मैं चाहता हूँ जब जब हम इन्हे पढ़े हमे तकलीफ हो ताकि हमे ये अहसास रहे कि यहाँ तक पहुंचने के लिए हमने क्या क्या देखा है”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना तो नम आँखों के साथ हामी में गर्दन हिला दी
“वैसे उस दिन एयरपोर्ट पर क्या कहा था तुमने मुझे ?”,पृथ्वी ने कहा
अवनि मुस्कुराई और कहा,”पृथ्वी ! मुझसे शादी करोगे ?”
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”हाँ ! हर जन्म में,,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने सुना तो पृथ्वी के गले आ लगी। पृथ्वी ने देखा सुबह के 6 बज रहे है और दोनों बस जाग रहे है। अवनि पृथ्वी से दूर हटी और कहा,”अब ?”
पृथ्वी ने उधर देखा और अवनि को अपनी गोद में उठाकर कहा,”अब,,,,,,,,,,,,,,,,,अब मैं अपना बदला पूरा करूंगा”
अवनि ने सुना तो शरमाकर अपनी हथेलियों से अपना चेहरा छुपा लिया और पृथ्वी उसे गोद में उठाये बिस्तर की तरफ बढ़ गया।
खिड़की के बाहर तार पर कोयल का जोड़ा आ बैठा और दोनों एक दूसरे से प्यार जताने लगे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!

( हाँ तो क्या पृथ्वी ले पायेग अवनि से अपना बदला या रंग में पड़ने वाला है भंग ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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