Pasandida Aurat Season 3 – 8
पृथ्वी के सीने से लगे अवनि को थोड़ा सुकून था लेकिन उस सुकून को छोड़कर वह धीरे से पृथ्वी से दूर हटी। रोने की वजह से उसकी आँखे लाल हो चुकी थी और काजल भी हल्का फ़ैल चुका था। पृथ्वी को फिर भी अवनि उतनी ही खूबसूरत नजर आ रही थी जितना हमेशा आती थी। वह प्यार भरी नजरो से उसे वैसे ही देखता रहा। अवनि बिस्तर से उतरी और कहा,”मैं मुँह धोकर आती हूँ”
“हम्म्म ठीक है,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा और अवनि के सामने से हटकर साइड में चला आया। अवनि मुँह धोने बाथरूम में चली गयी और पृथ्वी बिस्तर पर आ बैठा ! उसके होंठो पर मुस्कान थी। उसने अपनी पीठ बिस्तर से लगा ली और बगल में पड़े चार लिफाफों को देखने लगा जिनमे रखे खतों को पढ़ना अभी बाकी था। उसने अपना हाथ उठाया और कलाई में बंधे उस धागे को देखा जो अवनि ने बहुत विश्वास और प्यार के साथ बांधा था।
पृथ्वी ने दसवा लिफाफा उठाया और उस पर लिखी तारीख देखकर मुस्कुराया तब तक अवनि भी बाथरूम से बाहर आ चुकी थी। उसके हाथ में छोटा टॉवल था जिस से अपना चेहरा पोछते हुए वह बिस्तर की तरफ चली आयी और पृथ्वी के ठीक सामने दूसरे किनारे पर आ बैठी। पृथ्वी उठा उसने साइड टेबल पर रखे पानी के गिलास को उठाया और लेकर अवनि के पास चला आया। उसने पानी का गिलास अवनि को दिया और कहा,”तुम ठीक हो न अवनि ?”
अवनि ने हामी में गर्दन हिलायी और पानी का गिलास लेकर जैसे ही एक घुठ भरा उसे हिचकी आयी और पानी गले में उलझ गया। पृथ्वी वही खड़ा था इसलिए जल्दी से अवनि के हाथ से पानी का गिलास लिया और दूसरे हाथ से उसका सर थपथपाकर कहा,”आराम से बेटा , ऐसा कभी हुआ है कुछ पिया हो और वो गले में ना अटका हो,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
अवनि ने देखा पृथ्वी बिल्कुल उसी तरह से उसकी परवाह कर रहा था जैसे कभी विश्वास जी किया करते थे। अवनि ने पृथ्वी का हाथ थामा और उसे अपने सामने बैठाकर कहा,”मैं ठीक हूँ पृथ्वी”
पृथ्वी ने सुना तो हामी में गर्दन हिला दी। उसने पीछे झुककर दसवा खत उठाया और फिर अवनि के बगल में ही बैठकर उसे पढ़ना शुरू किया
“प्रिय पृथ्वी !
हर हर महादेव ! आज मैं बहुत खुश हूँ और इसलिए मैं तुम्हे ये खत लिख रही हूँ ! पृथ्वी तुमने एक रोज कहा था ना कि पापा मुझे माफ़ कर देंगे और मुझसे बात करेंगे। तुम्हारी बात सच हो गयी पृथ्वी , पापा ने मुझे फोन किया , हाँ पृथ्वी उन्होंने मुझे फोन किया। मुझसे बात की और जानते हो उन्होंने मुझे घर आने के लिए भी कहा। ओह्ह्ह्ह पृथ्वी ! मैं बता नहीं सकती आज मैं कितना खुश हूँ और सच कहू तो इस ख़ुशी की वजह तुम हो। पापा मुझसे बात करेंगे इसकी उम्मीद तो मैंने कब की छोड़ दी थी लेकिन तुमने कहा वो मुझसे बात करेंगे,,,,,,,,,,,,
यहाँ जीत तुम्हारे भरोसे की हुई है पृथ्वी इसलिए thankyou so much कुछ दिन बाद दिवाली है और पापा ने मुझे घर बुलाया है पृथ्वी ! उस घर जिस घर के दरवाजे उन्होंने मेरे लिए बंद कर दिए थे। मैं बहुत खुश हूँ पृथ्वी लेकिन ये ख़ुशी बाँटने के लिए तुम मेरे साथ नहीं हो। काश तुमसे बात होती तो मैं तुम्हे बताती और ये सुनकर तुम्हे भी उतनी ही ख़ुशी होती जितनी इस वक्त मुझे हो रही है। अब तक मैं किस दर्द और घुटन में जी रही थी ये सिर्फ मैं ही जानती हूँ पृथ्वी लेकिन आज आज वो सब पापा के एक कॉल से दूर हो गया।
मैं नहीं जानती हमारी किस्मत में क्या लिखा है लेकिन मुझे यकीन है एक रोज हम जरूर मिलेंगे और उस दिन मैं उन सब अच्छे पलों के लिए तुम्हारा शुक्रिया अदा करुँगी जो तुम्हारी वजह से मेरी जिंदगी में आये।
तुमसे बात करने का बहुत मन है , तुम्हे देखने का , तुम्हारे मुँह से वो ‘मैडम जी’ सुनने का और तुम्हारी शरारतों पर तुम्हे डाटने का बहुत मन है पृथ्वी लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकती। कभी कभी सोचती हूँ अगर किस्मत को हमे एक दूसरे के लिए फिर से अनजान ही बनाना था तो फिर महादेव ने हमे एक दूसरे से मिलाया ही क्यों ?
शायद इसलिए क्योकि वो मुझे टूटते हुए देख रहे थे और फिर तुम्हे मेरी जिंदगी में भेज दिया ताकि तुम मुझे बिखरने से बचा सको। हाँ पृथ्वी कुछ लोग हमारी जिंदगी में तब आते है जब हम पूरी तरह से टूट चुके होते है या फिर सही गलत में उलझ जाते है और जब उन लोगो का हमारे जीवन में आने का मकसद पूरा हो जाता है तब वे अचानक हमारी जिंदगी से चले जाते है और यही सच है लेकिन फिर भी मुझे हर रोज तुम्हारा जाना खलता है और मैं खुद से सवाल करती हूँ कि क्या सबकी तरह तुम्हारा अचानक जाना जरुरी था ?
खैर ये सब मेरे अनकहे ख्याल है जिन्हे मैं तुम से कभी कह नहीं पाऊँगी ,, सुरभि कहती है मुझे तुम से प्यार हो गया है , क्या तुम्हे भी ऐसा लगता है पृथ्वी ?”
खत पढ़कर पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”अवनि ! तुमने शायद कभी गौर से अपनी आँखे नहीं देखी ! इनमे साफ़ नजर आता है कि तुम्हे मुझसे प्यार है और ये प्यार मैंने उसी दिन देख लिया था जब मुझे दर्द में देखकर तुम्हारी आँखों में आँसू भर आये थे। तुम्हे भी मुझसे प्यार है ये समझने में तुम्हे बस थोड़ा वक्त लग गया”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखने लगी पृथ्वी पीठ के बल बिस्तर पर गिर गया और अपने दोनों हाथो को अपने सर के पीछे लगाकर कहा,”और मैंने कहा था न मैडम जी ! एक दिन आपको मुझसे प्यार हो ही जाएगा,,,,,,,,,क्या करू अब मैं हूँ ही इतना अच्छा”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और पृथ्वी के हाथ से खत लेकर उसे देखते हुए कहा,”वो दिन मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिनों में से एक था जब पापा ने मुझे फोन किया। उस दिन मैं बहुत खुश थी पृथ्वी और उस से भी ज्यादा ख़ुशी मुझे तब हुई जब सुरभि ने मुझे बताया कि ये सब आपने किया ! आपने उदयपुर जाकर पापा को समझाया , उनसे बात की , उन्हें ये अहसास दिलाया कि उनसे दूर होकर मैं खुश नहीं हूँ,,,,,,,,,,,ये जानते हुए भी कि हम एक दूसरे से दूर है और शायद इस जिंदगी में कभी मिल पाएंगे भी या नहीं
आपने फिर भी निस्वार्थ , बिना मुझसे कुछ चाहे ये किया,,,,,,,,,,पृथ्वी आपने मेरे लिए जो किया है वो आज तक किसी ने नहीं किया,,,,,,,,,,,,,और ना कोई कर पायेगा। बहुत हैरानी होती है जब देखती हूँ कोई इंसान एक लड़की से इतनी मोहब्बत कैसे कर सकता है ?”
पृथ्वी मुस्कुराया और उठकर बैठ गया उसने अवनि की तरफ देखा और कहा,”वो एक लड़की मेरी पूरी दुनिया है अवनि या यू समझ लो मेरी पूरी दुनिया उस लड़की के इर्द गिर्द है,,,,,,,,,,,,,,मैंने तुमसे वादा किया था तुम्हे तुम्हारे दुखो से बाहर निकालकर रहूंगा और जिस वक्त मैंने ये सब किया उस वक्त तो मुझे ये उम्मीद भी नहीं थी कि हम कभी मिलेंगे ,, मुझे कोई ख़ुशी नहीं मिली पर तुम तुम वो हर ख़ुशी डिजर्व करती थी अवनि बस इसलिए मैंने ये सब किया”
अवनि ने पृथ्वी के दोनों हाथो को थामा और उसके चेहरे की तरफ देखकर प्यार से कहा,”अगर कोई मुझसे पूछे प्यार की कोई सूरत होती है तो मैं उन्हें आपसे मिलवाउंगी पृथ्वी,,,,,,,,,,हर उस मर्द को आपसे मोहब्बत सीखने की जरूरत है जो औरत को बस मन बहलाने की चीज समझता है,,,,,,,,,आप बहुत अच्छे है पृथ्वी , बहुत अच्छे है”
पृथ्वी ने सुना तो शर्माने लगा और अपना नाख़ून चबाते हुए कहा,”अब बस भी करो अवनि मुझे शरम आ रही है”
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा उठी , शरमाते हुए पृथ्वी कुछ ज्यादा ही प्यारा लग रहा था और इस बार अवनि ने सामने से पहल की। उसने आगे बढ़कर पृथ्वी के गाल को छुआ और पीछे हट गयी। अब तो पृथ्वी का चेहरा शर्म से लाल हो उठा वह थोड़ा साइड में खिसका और सर झुकाकर मासूमियत भरे स्वर में कहा,”देखो तुम मुझे डिस्ट्रैक्ट कर रही हो अवनि , अभी तीन खत बाकी है,,,,,,,,,,,,!!!!”
अवनि ने सुना तो अपने हाथो को आपस में बांधकर पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”ठीक है पढ़िए फिर”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और फिर ग्याहरवा लिफाफा उठाया। पृथ्वी ने लिफाफा खोलकर खत बाहर निकाला और पढ़ने लगा
“प्रिय पृथ्वी !
हर हर महादेव ! सबसे पहले तो तुम्हे दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये। तुम जहा भी रहो खुश रहो और महादेव तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करे। आज मैं बहुत खुश हूँ पृथ्वी , मैं उदयपुर में हूँ अपने घरवालों के साथ ,, मैंने कभी सोचा नहीं था पृथ्वी कि सब मुझे इतनी मोहब्बत के साथ अपनाएंगे। कौशल चाचा खुद मुझे लेने स्टेशन आये थे , अपनी गलतियों के लिए उन्होंने मुझसे माफ़ी भी मांगी। मैंने भी उन्हें माफ़ कर दिया पृथ्वी और ये मैंने तुम से सीखा है। मयंक चाचा जो कभी सीधे मुँह मुझसे बात नहीं करते थे
मेरे लिए बाहर से मेरी पसंद की मिठाईया और खाना ला रहे थे , मुझसे बाते कर रहे थे। सीमा चाची और मीनाक्षी चाची जिनके अंदर मैंने हमेशा अपनी माँ का प्यार तलाश किया वो मुझे अब मिल रहा था , दीपिका , सलोनी , कार्तिक , नितिन और अंशु तो मुझे एक पल के लिए अकेला नहीं छोड़ रहे और पापा इतने सालो में पहली बार उनका एक नया ही रूप देख रही हूँ पृथ्वी , यहाँ सब है बस तुम नहीं हो ,
यहाँ किसी चीज की कमी नहीं है फिर भी तुम्हारी कमी खल रही है पृथ्वी,,,,,,,,,,सबसे मिलकर जब अपने कमरे में आयी तो बहुत अच्छा लगा , कुछ नहीं बदला था सब वैसा ही था जैसा मैं छोड़कर गयी थी लेकिन मैंने देखा कि उस कमरे की दिवार से मेरी बचपन की तस्वीर गायब थी ! घर में सबसे पूछा लेकिन किसी को कुछ नहीं पता था वो तस्वीर कहा गयी।
मेरे पास बचपन की सिर्फ वो एक ही तस्वीर थी,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”इतना पढ़कर पृथ्वी रुका और अवनि की तरफ देखा तो अवनि ने उदासी भरे स्वर में कहा,”मैंने उसे बहुत ढूँढा लेकिन वो मुझे कही नहीं मिली,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने अपने निचले होंठ को दबाया और फिर एकदम से कहा,”अह्ह्ह्हह ! अवनि , एक्चुली तुम्हारी वो तस्वीर मैंने चुराई थी,,,,,,,,,,,,,!
पृथ्वी की बात सुनकर अवनि ने हैरानी से उसे देखा तो पृथ्वी ने अपना ललाट खुजाया और कहा,”मैं तुम्हारे पापा से मिलने उदयपुर गया था तब मैं तुम्हारे कमरे में ही रुका था और मुझे वो तस्वीर दिखी , तुम उसमे बहुत ज्यादा प्यारी लग रही थी इसलिए मैंने उसे चुरा लिया”
अवनि ने सुना तो धीरे से हंसी क्योकि वह आज पहली बार इतने प्यारे चोर से जो मिल रही थी।
“अब वो तस्वीर कहा है ?”,अवनि ने पूछा
“मैंने उसे बहुत सम्हालकर रखा है , अपने कबर्ड में”,पृथ्वी ने भी मुस्कुराकर कहा
अवनि ने पृथ्वी से खत आगे पढ़ने का इशारा किया तो पृथ्वी उठा और कमरे में टहलते हुए आगे पढ़ने लगा
“आज शाम पूजा के बाद पापा ने घर में छोटा सा फंक्शन रखा था। घरवाले , कुछ मेहमान और सोसायटी के लोग घर के लॉन में जमा थे। सब खुश थे और फंक्शन पापा वापस आने की ख़ुशी में रखा था। सबके होते हुए भी मैं ना जाने क्यों अकेला महसूस कर रही थी शायद इसलिए क्योकि तुम मेरे पास नहीं थे। हसते मुस्कुराते उन खुश चेहरों के बीच मैं चाहकर भी अपनी उदासी को छुपा नहीं पा रही थी। तुम्हारी कमी का अहसास मुझे हर पल महसूस हो रहा था। दीपिका ने मुझसे डांस करने की जिद की ,
जब लगा कि अपनी भावनाओ को नहीं रोक पाऊँगी तो उन्हें डांस के साथ जाहिर करने लगी और वो अहसास आँसू बनकर मेरी आँखों में उभर आये। कोई तुम्हे मेरे उन आँसुओ में देख ना ले ये सोचकर मैं वहा से भागकर अंदर चली आयी। मैं नहीं समझ पा रही पृथ्वी ये सब मेरे साथ क्यों हो रहा है ? कमरे की बालकनी में खड़े होकर आख़िरकार मैंने उन आँसुओ को बह जाने दिया। उस वक्त मेरे जहन में सिर्फ तुम्हारा ख्याल था पृथ्वी,,,,,,,,तुम लौटकर वापस नहीं आये पृथ्वी , लगा जैसे तुमने मुझे भुला दिया है।
तुमने एक बार भी मुझसे मिलने या बात करने की कोशिश क्यों नहीं की ? यही सब ख्याल मुझे उलझा रहे थे। उस वक्त दिल किया काश तुम मेरे साथ होते , मेरे सामने होते , अचानक लाइट चली गयी और जैसे ही मैं जलती हुई केंडल लेकर पलटी तो देखा तुम मेरे सामने खड़े हो ,, उस वक्त मेरे दिल ने कुछ पल के लिए जैसे धड़कना बंद कर दिया हो , मेरी पलकों ने झपकने से इंकार कर दिया , लगा जैसे मैं कोई सपना देख रही हूँ,,,,,,,,,,,,मैंने तुम्हे याद किया और उस पल तुम मेरे सामने थे। हाह ! बाद में खुद को ये सोचकर तसल्ली दी कि तुम यहाँ क्यों आओगे ? शायद ये मेरा वहम हो”
पृथ्वी इतना पढ़कर रुक गया और अवनि की तरफ देखा। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे बस आँखों में हलकी नमी थी और होंठ सुख रहे थे। अवनि ख़ामोशी से बिस्तर पर नजरे गड़ाए बैठी थी और फिर धीरे से कहा,”वो बस मेरा वहम था पृथ्वी ! आप भला वहा कैसे हो सकते थे ?”
पृथ्वी ने सुना तो सर्द आवाज में कहा,”मैं आया था अवनि”
अवनि ने जैसे ही सुना उसका दिल धक् से रह गया। उसने पृथ्वी की तरफ देखा तो पाया पृथ्वी खत हाथ में थामे अवनि की तरफ ही देख रहा है।
पृथ्वी ने अभी अभी जो कहा अवनि को अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ। वह खाली आँखों से पृथ्वी की तरफ देखती रही और देखते ही देखते उसकी आँखों में आँसू भर आये। पृथ्वी ने खत को समेटा और अवनि की तरफ आते हुए कहा,”उस रात मैं तुम्हारे घर आया था अवनि ! तुम्हारे साथ मेरी पहली दिवाली थी , उस रात मैं अपने घर की लक्ष्मी को देखने आया था। देखने आया था कि उस रात तुम कैसी लग रही होगी ?”
अवनि ने सुना तो नम आँखों के साथ उठकर पृथ्वी के सामने आ खड़ी हुई और तड़पकर कहा,”अगर आप सच में मेरे सामने थे तो फिर आपने मुझे बताया क्यों नहीं ? क्यों उस सच को मेरा भरम बना दिया। मुझे , मुझे अब तक यही लगता रहा कि वो बस मेरे मन का वहम था जबकि आप वहा थे , सच में थे और मेरे सामने थे,,,,,,,क्यों किया ऐसा ?”
कहते हुए अवनि ने रोते हुए अपना ललाट पृथ्वी के सीने पर रख दिया , उसकी आँखों के सामने उस रात वाले वो सारे पल आ गए जो उसने पृथ्वी को महसूस करते हुए जिए थे।
अवनि के आँसू पृथ्वी के सीने में किसी गरम लावे की तरह गिरते थे। उसने अपने हाथ को अवनि के सर से लगाया और धीरे से कहा,”क्योकि मैं तुम्हे और तकलीफ देना नहीं चाहता था अवनि ! मैंने तुमसे कितने ही वादे किये , कितनी ही बाते कही और आखिर में क्या हुआ ? मैं एकदम से तुम्हे छोड़कर चला गया ,, तुम से दूर रहकर मैं तुम्हारी जिंदगी में सब ठीक कर देना चाहता था लेकिन तुम्हारे सामने वापस आकर मैं तुम्हारी तकलीफ की वजह बनना नहीं चाहता था।
तुम से दूर रहना क्या था ये सिर्फ मैं जानता हूँ लेकिन जब तुम्हे घरवालों के साथ देखा तो सोचा तुम खुद को सम्हाल रही हो। उस वक्त तक मैं तुमसे किये अपने वादे नहीं निभा पाया था इसलिए मै तुम्हारे सामने नहीं आया,,,,,,,,,,,,,,,,मैं वहा सिर्फ तुम्हे देखने आया था। तुम्हे देखा और चला गया,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
“नहीं जाना था पृथ्वी,,,,,,,,,,नहीं जाना था , उस रात तुम नहीं जाते तो शायद मैं खुद को तुमसे इतना दूर करने से खुद को रोक लेती”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने अवनि को अपनी बाँहो में समेटा और कहा,”मैं तुम से कभी दूर गया ही नहीं था अवनि , मेरा दिल और दिमाग हमेशा तुम्हारे आस पास ही थे मैं बस सब सही करने में उलझ गया”
अवनि ने अपना गाल पृथ्वी के सीने से लगा दिया और आँखे मूंदकर कहा,”मुझे माफ़ कर दो पृथ्वी ! मैं , मैं तुम्हे समझ ही नहीं पायी,,,,,,,,,,,,,हमेशा तुमसे दूर भागती रही , मैंने सबकी ख़ुशी देखी और तुम्हे दुःख दिया जबकि तुमने , तुमने सिर्फ मेरी ख़ुशी के बारे में सोचा,,,,,,,,,,,,मुझे माफ़ कर दो”
“श्श्श्श ! शांत हो जाओ अवनि,,,,,,,,,,कितने पागल है न ना हम लोग , जो बीत चुका उसके लिए रो रहे है,,,,,,,,,,,,हमारे सामने हमारी पूरी जिंदगी पड़ी है अवनि और मैं वादा करता हूँ मैं हमेशा तुम्हे खुश रखूंगा , तुम्हारी ख़ुशी के लिए वो सब करूँगा जो मैं कर सकता हूँ,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने अपने आँसू पोछे और पृथ्वी के सामने खड़ी होकर उसकी तरफ देखकर कहा,”मैं बीती बातो के लिए नहीं रो रही पृथ्वी मेरी आँखों में ये आँसू बस इसलिए है कि यहाँ तक पहुंचने के लिए आपको कितना कुछ देखना पड़ा , कितना सहना पड़ा ,, और आपका दिल दुखाने वाले लोगो में सबसे आगे मैं थी,,,,,,,,,,,,,,,,,मुझे बस इस बात पर रोना आ रहा है कि मैं तुम्हारा दिल दुखाया , वो दिल जिसमे मेरे लिए असीम प्यार है”
पृथ्वी ने देखा कहते कहते अवनि की आँखों से फिर आँसू छलक आये है तो उसने अवनि के सर के पीछे हाथ लगाया और उसे अपने सीने से लगाकर कहा,”बस एक अब कुछ मत कहो,,,,,,,,,,,,तुम मेरे पास हो मेरे लिए काफी है। जो हुआ उसे भूल जाओ अवनि , तुम्हारा होना ही मेरे लिए सबकुछ है”
अवनि कुछ नहीं बोल पायी उसे बस पृथ्वी के साथ किया बर्ताव याद आता रहा और वह आँसू बहाती रही।
( क्या आपको भी लगा था कि दीपावली रात पृथ्वी अवनि के सामने सच में आया है या फिर अवनि की तरह आपको भी हुआ था वहम ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
