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Pasandida Aurat Season 3 – 68

Pasandida Aurat Season 3 – 68

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी के लिए अवनि का प्यार और समर्पण देखकर लक्षित भी प्यार से अवनि को देखने लगा। उसकी भाभी उसके भाई को कितना प्यार करती है ये जानकर लक्षित को एक अलग ही ख़ुशी का अहसास हो रहा था। उसने चाय खत्म की और फिर अवनि को बाय बोलकर घर निकल गया ! शाम हो चुकी थी , सूरज ढल चुका था और अँधेरा भी हो चुका था लेकिन दोपहर का गया पृथ्वी अभी तक घर नहीं लौटा ,

अवनि ने पृथ्वी को फोन लगाया लेकिन फोन नहीं लगा। अवनि को चिंता होने लगी हालाँकि पिछले कुछ दिनों से पृथ्वी देर रात ही घर लौट रहा था लेकिन आज तो छुट्टी का दिन था सोचकर ही अवनि का मन घबराने लगा। जैसे तैसे करके उसने खुद को समझाया और मंदिर के सामने आकर शाम की पूजा करने लगी ! पूजा करते हुए भी उसने महादेव से पृथ्वी के सही सलामत घर लौट आने की प्रार्थना की और अगले ही पल डोरबेल बजी। अवनि ने आकर दरवाजा खोला तो सामने खड़े पृथ्वी को सही सलामत देखकर उसकी जान में जान आयी।

अवनि को हैरान परेशान देखकर पृथ्वी अंदर आया और दरवाजा बंद करके कहा,”क्या हुआ अवनि ? तुम इतना परेशान क्यों हो ?”
“आपने आने में इतनी देर क्यों कर दी ? आपका फोन भी नहीं लग रहा था , मैं कितना घबरा गयी थी”,अवनि ने बेचैनी भरे स्वर में कहा

पृथ्वी ने अवनि के कंधो को थामा और कहा,”बेटा ! मैं काम से गया था न और तुम घबराई क्यों ? रोज तो मैं इस से भी लेट आता हूँ घर,,,,,,,,और फोन तो मेरा रास्ते में ही डेड हो गया था इसलिए फिर मैं सीधा घर ही चला आया,,,,,,,तुम खामखा परेशान हो जाती हो , मैं ठीक हूँ , तुम्हारे सामने हूँ देखो”
पृथ्वी की बाते सुनकर अवनि को थोड़ी तसल्ली मिली और उसने कहा,”लेकिन आप गए कहा थे ?”

“हाआआआ ! तुम बिल्कुल बीवी की तरह मुझसे सवाल कर रही हो ?”,पृथ्वी ने अपने मुँह पर हाथ रखकर कहा  
“मैं आपकी बीवी हूँ तो बीवी की तरह ही सवाल करुँगी ना , अब बताईये कहा गए थे आप ?”,अवनि ने चिढ़कर कहा
“अरे वो हिमांशु भैया ने बुलाया था , उन्होंने कोई घर देखा था हमारे लिए वही देखना था,,,,,,,देखा मैंने लेकिन डिपॉजिट बहुत ज्यादा मांग रहा है और रेडी होने में भी अभी उसे 30-40 दिन लगेंगे,,,,,,बट ठीक है मैं कर लूंगा”,पृथ्वी ने थोड़ा मायूस होकर कहा

“मेरे पास कुछ सेविंग्स है आप वो ले लीजिये,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा ताकि वह पृथ्वी की मदद करके उसकी परेशानी कुछ कम कर सके
“कोई जरूरत नहीं है , वो तुम्हारे पैसे है तुम रखो तुम्हे आगे जरूरत पड़ेगी,,,,,,,,,,ये सब मैं देख लूंगा तुम बस अपनी रायटिंग पर ध्यान दो”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने सुना तो उदास होकर कहा,”पृथ्वी ! आपका और मेरा पैसा अलग है क्या ? आप उसे ले सकते हो”
“नहीं ! जब हम दोनों एक है तो हमसे जुडी हर चीज एक ही होगी लेकिन अभी मैं तुमसे ये पैसे नहीं ले सकता अवनि , वो तुम्हारी मेहनत की कमाई है उसे मैं अपने शौक पुरे करने के लिए खर्च नहीं कर सकता ! तुम चिंता मत करो अभी बहुत टाइम है मेरे पास मैं डिपॉजिट भर दूंगा”,पृथ्वी ने प्यार से अवनि को समझाया

“आप इतनी मेहनत इसलिए कर रहे है ना क्योकि मैंने आपसे नया घर लेने को कहा,,,,,,,,!!!”,अवनि ने उदास होकर कहा
“नहीं ! मैं नया घर इसलिए ले रहा हूँ क्योकि तुमने आई बाबा के साथ रहने की बात कही,,,,,,,उसी वक्त तुम मेरी नजरो में और ऊपर उठ गयी अवनि ,, आज जहा लड़किया शादी के बाद अपने पति के साथ अलग घर में रहने की जिद करती है वही तुमने आई बाबा के साथ रहने की बात की ,, तुम बहुत अच्छी हो अवनि , बहुत बहुत बहुत ज्यादा अच्छी हो,,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा उसकी आँखों में अवनि के लिए प्यार और सम्मान साथ साथ दिखाई दे रहे थे।

अवनि ने सुना तो उसकी आँखों में आँसू भर आये वह पृथ्वी के थोड़ा करीब आयी और रोआँसा होकर कहा,”लेकिन आपको इतना परेशान होते देखना मुझे अच्छा नहीं लगता ,, आप इतनी मेहनत कर रहे है सिर्फ मेरी ख़ुशी के लिए,,,,,,,,,,,!!!!”

पृथ्वी ने अवनि के चेहरे को अपने हाथो में थामा और उसके ललाट को अपने होंठो से छूकर कहा,”तुम्हारी ख़ुशी के लिए मैं सब करूंगा अवनि,,,,,,,क्योकि तुम मेरी पसंदीदा औरत हो और मर्द अपनी अपनी पसंदीदा औरत के लिए सब कर सकता है,,,,,,,,,,!!!”
अवनि के पास कहने को शब्द नहीं थे , इसे आगे भला वह कह भी क्या पाती ? पृथ्वी का प्यार और उसके शब्द हमेशा अवनि को खामोश कर देते थे।

देखते ही देखते एक हफ्ता और गुजर गया। पृथ्वी अब पहले से भी ज्यादा बिजी हो गया और अवनि भी दिनभर अपने काम में बिजी रहती। ऑफिस में पृथ्वी दिनभर काम में व्यस्त रहता और लंच टाइम में ऑफिस से बाहर चला जाता और शाम में लौट आता और अपने वक्त की भरपाई शाम में ओवर टाइम करके पूरी करता। पृथ्वी लंच टाइम में कहा जाता था ये बात पृथ्वी के अलावा कोई नहीं जानता था ना ही ऑफिस में किसी की ये पूछने की हिम्मत होती थी। जयदीप ने कई बार उस से बात करने की कोशिश की लेकिन काम का बहाना करके पृथ्वी टाल देता।

एक दोपहर सच्चाई का पता लगाने के लिए जयदीप पृथ्वी के पीछा करने लगा। जयदीप की किस्मत अच्छी थी क्योकि आज पृथ्वी ऑफिस के पीछे बने एक कैफे में आया था। पृथ्वी कैफे के अंदर चला आया और जयदीप दो टेबल छोड़कर मेनू कार्ड से चेहरा छुपाये पृथ्वी के ठीक पीछे बैठ गया।

कुछ देर बाद एक आदमी आया जिसे जयदीप ने पहले कभी नहीं देखा था ना ही वह उसे जानता था। आदमी ने पृथ्वी से हाथ मिलाया और उसके सामने पड़ी कुर्सी पर आ बैठा। दोनों कॉफी पीते हुए बाते करने लगे जो इतनी दूर बैठे जयदीप के कानों तक पहुंच पानी मुश्किल थी। वह बस समझने की कोशिश करने लगा कि पृथ्वी यहाँ क्यों आया है और इस आदमी से क्यों मिल रहा है ?

काफी लम्बी चौड़ी डिस्कशन के बाद आदमी और पृथ्वी अपनी जगह से उठे और पृथ्वी ने एक फाइल आदमी की तरफ बढाकर मुस्कुराते हुए उस से हाथ मिलाया। आदमी ने अपने कोट से एक लिफाफा निकालकर पृथ्वी को दिया और वहा से चला गया !

पृथ्वी वापस कुर्सी पर बैठा और मुस्कुराते हुए अपने दोनों हाथो को जोड़कर ऊपर देखा जैसे भगवान् का शुक्रिया अदा कर रहा हो। वह खुश था और ख़ुशी उसके चेहरे से साफ़ झलक रही थी। अगले ही पल पृथ्वी उठा और कैफे से बाहर निकल गया

जयदीप ने भी हाथ में पकड़ा मेनू कार्ड साइड में फेंका और उठकर पृथ्वी के पीछे चला आया। लिफ़ाफ़े को हाथ में थामे पृथ्वी धीरे धीरे चला जा रहा था कि पीछे  आते हुए जयदीप ने कहा,”तो ये है तुम्हारा पार्ट टाइम जॉब ? ऑफिस के साथ साथ अब बाहर भी काम करना शुरू कर दिया तुमने”

जयदीप की आवाज सुनकर पृथ्वी ठिठककर रुका और पीछे पलटकर देखा तो जयदीप को अपने सामने देखकर थोड़ा हैरान हुआ और फिर चिढ़े हुए स्वर में कहा,”आप ये जासूसों की तरह मेरा पीछा क्यों कर रहे है ?”

“मैं देख रहा हूँ कि मेरी कम्पनी के महान मैनेजर मिस्टर पृथ्वी उपाध्याय अब ऑफिस के बाहर भी डील करने लगे है ,, पिछले दो हफ्ते से तुम लंच टाइम के बाद गायब हो जाते हो और फिर खुद को सही दिखाने के लिए देर रात तक ओवर टाइम भी करते हो,,,,,,,,,,तुम ऐसा इसलिए कर रहे हो ना क्योकि मैंने तुम्हारी सैलरी बढ़ाने से मना कर दिया था , तो क्या अब तुम ऑफिस के बाहर डील करोगे ?”,जयदीप ने पृथ्वी की तरफ आते हुए कहा और आखिरी शब्द उसने गुस्से से कहे

पृथ्वी ने कोई जवाब नहीं दिया वह ख़ामोशी से जयदीप को देखता रहा जिस से जयदीप और चिढ गया और कहा,”जवाब दो आखिर चुप क्यों हो तुम ? क्या मैंने तुम्हे कभी तकलीफ दी , कभी तुम्हे परेशान किया , क्या कभी रोकटोक की ? कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी तुम्हे उसके बाद भी मेरी पीठ पीछे तुम,,,,,,,बताओ मुझे तुमने ये सब क्यों किया ? सिर्फ चंद पैसो के लिए,,,,,,,,,,,!!!”

कहते हुए जयदीप ने पृथ्वी का हाथ झटक दिया जिस से उसके हाथ में पकड़ा लिफाफा नीचे जा गिरा और खुलने की वजह से उसमे रखे कागज बाहर आ गए। पृथ्वी अब भी खामोश रहा , जयदीप ने झुककर वो कागज उठाये और उन्हें देखा तो पाया और 20 पन्नो का एक लीगल कॉन्ट्रेक्ट था , जयदीप पहले पन्ने पर लिखे कम्पनी के नाम को पढ़ते हुए बड़बड़ाया “राज श्री प्रोडक्शन हॉउस , मुंबई”

जयदीप ने हैरानी से पृथ्वी को देखा , कुछ देर पहले उसने पृथ्वी को लेकर जो कुछ भी सोचा और कहा वो सब गलत था। पृथ्वी ने उसे कोई धोखा नहीं दिया था बल्कि वह तो यहाँ किसी और काम से आया था। प्रोडक्शन हॉउस का मौर्या ग्रुप से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं था। जयदीप को तुरंत अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने पृथ्वी के सामने आकर कहा,”पृथ्वी ये सब ? तुम तुम प्रोडक्शन हॉउस वालो से क्यों मिल रहे हो ?”

“अवनि के लिए,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,आख़िरकार पृथ्वी ने अपनी चुप्पी तोड़ी और शांत स्वर में कहा
“अवनि के लिए ? मैं कुछ समझा नहीं”,जयदीप ने कहा
पृथ्वी ने जयदीप के हाथ से कॉन्ट्रेक्ट पेपर्स लिए और नीचे गिरे लिफ़ाफ़े को उठाकर उसमे रखते हुए कहा,”अवनि एक रायटर है और हर रायटर की तरह उसका भी सपना है कि वह अपनी लिखी कहानी को बड़े परदे पर देखे ,

ये शहर उसके सपने के लिए बेस्ट चॉइस है लेकिन कुछ लोगो ने उसके सीधेपन और सादगी की वजह से हमेशा उसका फायदा उठाने की कोशिश की ,, मैं सामने से अवनि की मदद करूंगा तो वो मना कर देगी , उसे लगेगा मैं फिर उसे खुद पर डिपेंड बना रहा हूँ इसलिए पिछले दो हफ्तों से मैं कुछ ऐसे लोगो से मिल रहा था जो अवनि को एक चांस दे सकते है। मुझे उस पर पूरा भरोसा है अगर उसे एक मौका मिला तो वह सच में कुछ बेहतर करके दिखाएगी ,

वो बहुत टेलेंटेड है लेकिन यहाँ आकर उसका वो टेलेंट कही छुप गया है और कही न कही इसकी वजह मैं हूँ,,,,,,,,,,,मैंने हमारी शादी को ही उसकी दुनिया बना दिया , ये भूल गया कि उसकी अपनी भी एक दुनिया है , वो दुनिया जिसमे वो कहानिया लिखती है , जिसमे उसके कुछ सपने है। दो हफ्ते की भागदौड़ के बाद एक बड़े प्रोडक्शन हाउस को अवनि का काम पसंद आया और उन्होंने अवनि को एक चांस दिया है , ये उसी के पेपर्स है सर,,,,,,,,,!!!”

जयदीप ने सुना तो हक्का बक्का सा पृथ्वी को देखता रहा , एक मर्द अपनी पसंदीदा औरत के लिए इतना कुछ कर सकता है जयदीप ये पहली बार देख रहा था। जयदीप को हैरान देखकर पृथ्वी ने आगे कहा,”मैं जानता हूँ सर मैंने ऑफिस टाइम में ये सब करके गलत किया लेकिन लंच टाइम ही ऐसा वक्त होता है जब मै उनसे मिल सकता हूँ,,,इसलिए पिछले दो हफ्ते से मैं ओवर टाइम कर रहा हूँ ताकि मेरी वजह से आपकी कम्पनी को कोई लॉस ना हो ,

अगर मेरी वजह से आपकी भावनाओ को ठेस पहुंची हो तो आई ऍम सॉरी सर,,,,,,,,,,,मैंने बस ये सिर्फ अवनि के लिए किया,,,,,,,मैं बस उसे खुश देखना चाहता हूँ”
पृथ्वी की बाते सुनकर और अवनि के लिए उसका प्यार देखकर जयदीप का दिल भर आया , उसने रोआँसा होकर कहा,”बस कर पगले अब क्या रुलाएगा ? इतना सब कर रहे थे और मुझे बताना जरुरी तक नहीं समझा,,,,,,,,,अवनि बहुत लकी है जिसे तुम मिले हो,,,,,,,,,खुश रहो तुम दोनों”

पृथ्वी ने सुना तो उसके दिल को तसल्ली मिली कि जयदीप की गलतफहमी दूर हो गयी है उसने कहा,”मैं नहीं चाहता अवनि और उसके सपने के बीच कोई और आये , मैं भी नहीं”
“हम्म्म वो जरूर कामयाब होगी,,,,,,,,होनी ही है उसके पास तुम जो हो”,जयदीप ने कहा और ये कहते हुए उसकी आँखों में आँसू भर आये बस उसने जैसे तैसे करके उन्हें अपनी आँखों में रोक लिया।

“हाँ तो फिर ठीक है इसी बात पर एक कॉफी पीला दीजिये”,पृथ्वी ने जयदीप के कंधो पर अपनी बाँह रखते हुए कहा क्योकि उसका मानना था अवनि का भाई बनने के बाद जयदीप सिर्फ ऑफिस के अंदर उसका बॉस है और बाहर उसका साला
जयदीप ने पृथ्वी की बाँह अपने कंधे से हटाई और कहा,”कोई जरूरत नहीं है , लंच टाइम ख्रत्म हो चुका चुपचाप चलकर अपना काम करो”

“हाह ! अपनी गर्लफ्रेंड्स को कॉफी पीला सकते हो मुझे नहीं”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
जयदीप पृथ्वी की तरफ पलटा और उसकी ठुड्डी पकड़कर प्यार से कहा,”लेकिन आप मेरी गर्लफ्रेंड नहीं है ना पृथ्वी जी,,,,,,,,,,,,,,5 मिनिट में अपनी टीम के साथ मुझसे मीटिंग रूम में मिलो,,,,,,,,कॉफी पिएंगे”
जयदीप ने पहले प्यार से कहा और फिर कठोरता से और वहा से चला गया। पृथ्वी ने मुँह बनाया और जयदीप के पीछे चल पड़ा।  

मीटिंग के बाद पृथ्वी अपने केबिन में आया। कॉन्ट्रेक्ट पेपर्स को एक दूसरे लिफाफे में पैक किया उस पर अपने फ्लेट का एड्रेस लिखा और मनीष से कहा,”सुनो मनीष ! तुम डाक्यूमेंट्स सब्मिट करने बाहर जा रहे हो ना तो आते वक्त ये लिफाफा कुरियर कर देना”
मनीष ने लिफाफा लिया और उस पर लिखे एड्रेस को पढ़ते हुए कहा,”इसमें क्या है ?”

“मैंने तुमने कुरियर करने को कहा है सवाल पूछने को नहीं ? ये पैसे रखो”,कहते हुए पृथ्वी ने अपने पर्स से 100 का नोट निकालकर मनीष को थमा दिया तक तब मनीष लिफाफे पर लिखा एड्रेस पढ़ चुका था उसने हैरानी से कहा,”अरे सर ! इस पर तो आपके घर का एड्रेस है , आप इसे कुरियर क्यों करवा रहे है ? खुद ही ले जाईये ना,,,,,,,,,,!!!!”
पृथ्वी ने अपने दाँत भींचे , जबरदस्ती मुस्कुराया और मनीष की तरफ पलटकर कहा,”बेटा मनीष ! तुमसे मैंने क्या कहा ?”

“आपने कहा मैं इसे कुरियर कर दू”,मनीष ने घबराये हुए स्वर में कहा क्योकि पृथ्वी के चेहरे के भाव उसके शब्दों से मैच जो नहीं कर रहे थे
“तो कर दो,,,,,,,,,,हम्म्म”,पृथ्वी ने कहा और पलटकर लेपटॉप पर अपना काम करने लगा। मनीष को कुछ समझ नहीं आया कि पृथ्वी अपने ही घर पर कुरियर क्यों भेज रहा है ? पृथ्वी से पूछने की हिम्मत उसमे थी नहीं इसलिए वह चुपचाप वहा से चला गया।

पृथ्वी जिस काम के लिए दो हफ्ते से भाग रहा था वो हो चुका था इसलिए आज उसे ओवर टाइम नहीं करना था। वह ऑफिस खत्म कर शाम में ही घर के लिए निकल गया। पृथ्वी के जल्दी घर आने से अवनि भी खुश हो गयी और अपना सब काम बंद करके पृथ्वी के पास चली आयी। अवनि ने देखा पृथ्वी आज खुश था , ना चेहरे पर कोई थकान , ना आँखों में उदासी , अवनि उसके सामने आयी और कहा,”आज आप जल्दी आ गए ?”
“हाँ सोचा आज तुम्हे मंदिर लेकर चलू”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने सुना तो गिरते गिरते बची , पृथ्वी उसे मंदिर ले जाने की बात कर रहा था। अवनि ने अपनी ऐड़िया उठाकर पृथ्वी के ललाट को अपनी उंगलियों से छुआ और कहा,”पृथ्वी ! आपकी तबियत तो ठीक है ना ?”
“हाँ ! मेरी तबियत को क्या हुआ है ? मैं बिल्कुल ठीक हूँ”,पृथ्वी ने अवनि का हाथ अपने ललाट से हटाकर कहा
“तो फिर आज आपने अचानक मंदिर जाने की बात,,,,,,,,,!!!”,कहते कहते अवनि रुक गयी , उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि पृथ्वी खुद उस से मंदिर चलने के लिए कह रहा है !

“अरे बेटा ! तुम ही तो कहती हो जब जब हमारे जीवन में कुछ अच्छा हो तो हमे भगवान् का शुक्रिया अदा करना चाहिए”,पृथ्वी ने कहा
“तो क्या आपके साथ कुछ अच्छा हुआ ?”,अवनि ने अपनी आँखों को बड़ा करके मासूमियत से पूछा
“हुआ ना ! तुम आयी ना मेरी जिंदगी में , जबसे तुम आयी हो तब से सब अच्छा ही हो रहा है तो सोचा तुम्हारे महादेव को थैंक्यू बोल दू”,पृथ्वी ने कहा

अवनि पृथ्वी के पास आयी और उसके शर्ट की सलवट को सही करते हुए कहा,”वो आपके भी महादेव है”
“हाँ हाँ हमारे महादेव,,,,,,,,,,,,तुम तैयार हो जाओ मैं नहाकर चेंज कर लेता हूँ”,पृथ्वी ने कहा और कमरे की तरफ बढ़ गया
अवनि ने सर उठाकर ऊपर देखा और धीरे से बुदबुदाई,”कभी कभी इन्हे समझना बहुत मुश्किल हो जाता है महादेव,,,,,,,,,इनकी बात का बुरा मत मानना प्लीज ये दिल के बहुत अच्छे है”

पृथ्वी नहाकर आया तब तक अवनि भी तैयार हो चुकी थी आज उसने फिर साड़ी पहनी थी। पृथ्वी ने भी टीशर्ट और जींस पहना और फिर दोनों फ्लेट से बाहर निकल गए।

पृथ्वी अवनि को लेकर उसी शिव मंदिर चला आया जहा वह महादेव से अवनि को माँगा करता था। मंदिर के बाहर सीढ़ियों के पास कई फूलमाला वाले , प्रसाद वाले मौजूद थे , उन्ही सबके बीच एक गजरे वाला भी बैठा था ! पृथ्वी ने अवनि से सीढ़ियों के पास रुकने को कहा और खुद गजरे वाले के पास चला आया , उसने अवनि के लिए गजरा लिया साथ ही प्रशाद और कुछ फूल भी ताकि अवनि महादेव को अर्पित कर सके।

पृथ्वी अवनि के पास चला आया , उसने फूल-प्रशाद अवनि को दिए और गजरा खुद अपने हाथो से उसके बालों में लगाने लगा। आस पास खड़े लोग पृथ्वी को देखकर मुस्कुरा रहे थे लेकिन पृथ्वी को इस से कोई फर्क नहीं पड़ा।  अवनि को वो शाम याद आ गयी जब वह पहली बार पृथ्वी के साथ इस मंदिर में आयी थी और कैसे उसके बालों में गजरा लगाते हुए  पृथ्वी के हाथ काँप रहे थे।

दोनों अंदर चले आये , महादेव के दर्शन किये , उन्हें फूल प्रशाद और जल अर्पित किया और फिर थोड़ी देर के लिए वही मंदिर की सीढ़ियों पर आ बैठे। अवनि को घर जाकर खाना ना बनाना पड़े इसलिए पृथ्वी उसे चौपाटी ले आया। दोनों ने बाहर ही खाना खाया , खूब बाते की और एक दूसरे का हाथ थामे घूमते रहे। रात होते होते दोनों घर चले आये। आज कई दिनों बाद अवनि को पृथ्वी के साथ वक्त बिताने का मौका मिला वो भी इतना खूबसूरत वक्त।

अगले दिन अवनि दोपहर में हॉल में बैठी लेपटॉप पर अपना कुछ काम कर रही थी तभी डोरबेल बजी। अवनि ने लेपटॉप साइड में रखा और उठकर दरवाजा खोला तो सामने एक लड़का खड़ा था। उसने अवनि की तरफ लिफाफा बढाकर पूछा,”अवनि मलिक ?”
“जी”,अवनि ने धीरे से कहा
“आपके नाम से ये कुरियर आया है , यहाँ साइन कर दीजिये प्लीज”,लड़के ने लिफाफा अवनि की तरफ बढाकर कहा

अवनि नहीं जानती थी ये लिफाफा किसने भेजा है और क्यों भेजा है ? उसने लड़के से लिफाफा लिया और साइन करके दरवाजा बंद कर दिया। वह लिफाफा लिए हॉल में आयी और उसे खोलकर उसमे रखे कागज निकाले। कागज पढ़ते हुए अवनि का दिल ख़ुशी के मारे तेज धड़कने लगा , उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी और आँखों में आँसू भर आये,,,,,,,,,,,,,,,,,,,आखिर अपने सपने की ओर वह दूसरा कदम जो बढ़ा चुकी थी,,,,,,,,,!!!”

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संजना किरोड़ीवाल

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