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Pasandida Aurat Season 3 – 66

Pasandida Aurat Season 3 – 66

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

प्राची से सच जानकर पृथ्वी ऑफिस के बाहर आया और अवनि का नंबर डॉयल किया। अवनि खाना खा रही थी टेबल पर रखा फोन बजा तो अवनि ने फोन उठाया और कान से लगाकर कहा,”हेलो”
“हेलो अवनि ! कहा हो बेटा ?”,पृथ्वी ने पूछा , आज कितने दिनों बाद उसने अवनि को इस नाम से पुकारा था
“आई के घर पर हूँ,,,,,,,आप , आप कुछ परेशान नजर आ रहे है”,अवनि ने पृथ्वी की परेशानी भांपकर कहा

अवनि की बात सुनकर पृथ्वी ने मन ही मन खुद से कहा,”इस वक्त अवनि से कुछ भी पूछकर मुझे उसे परेशान करना नहीं चाहिए”
“हेलो , हेलो”,अवनि की आवाज से पृथ्वी की तन्द्रा टूटी तो पृथ्वी ने कहा,”अह्ह्ह नहीं परेशान नहीं हूँ , वो किसी काम से बाहर आया था गर्मी बहुत ज्यादा है यहाँ , तुम बताओ तुम ठीक हो ?”

पृथ्वी का सवाल सुनकर अवनि ने मन ही मन खुद से कहा,”पृथ्वी पहले ही इतना परेशान है अगर मैंने उन्हें आज जो हुआ उस बारे में बताया तो वो और ज्यादा परेशान जाएगे , नहीं नहीं मुझे उन्हें ये सब नहीं बताना चाहिए”
“अवनि ! तुम ठीक हो ना बेटा ?”,पृथ्वी ने फिर पूछा तो अवनि की तंद्रा टूटी और उसने कहा,”हाँ मैं बिल्कुल ठीक हूँ , इंटरव्यू से सीधा घर चली आयी। आई की याद आ रही थी तो सोचा इनसे मिल लू इसलिए यहाँ चली आयी , इन्होने मेरे लिए बहुत टेस्टी खाना बनाया है”

अवनि के पास बैठी लता ने सुना तो मुस्कुरा उठी।
“बहुत सही ! यहाँ पति बेचारा धूप में घूम रहा है और मैडम जी घर बैठकर मजे से खाना खा रही है,,,,,,,,,,खाओ भाई खाओ तुम्हारे मजे है”,पृथ्वी ने कहा
“आई आपको बहुत याद कर रही है , आज ऑफिस के बाद आप सीधा यही आ जाना”,अवनि ने कहा
“ठीक है ! तुम खाना खाओ मैं शाम में सीधा वही आ जाऊंगा”,पृथ्वी ने कहा और फोन काट दिया

अवनि से बात करने के बाद पृथ्वी के दिल को थोड़ी तसल्ली मिली कि अवनि अब ठीक है घर पर है। पृथ्वी ने कलाई पर बंधी घडी में समय देखा और पार्किंग में खड़ी जयदीप की गाडी की तरफ चला आया जिसे वह जल्दी में लेकर आया था। पृथ्वी गाडी में आ बैठा और जैसे ही स्टार्ट करने के लिए चाबी की तरफ हाथ बढ़ाया | पृथ्वी को अवनि का ख्याल आया और वह मन ही मन खुद से कहने लगा,”अवनि ने कहा वो ठीक है लेकिन क्या वो सच मे ठीक होगी ?

विक्रम ने पहले भी उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की और आज फिर अवनि उसकी वजह से मुसीबत में पड़ने वाली थी। प्राची ने मुझसे ये क्यों कहा कि मेरी परवाह और ओवर लव की वजह से अवनि को ये सब देखना पड़ रहा है। क्या सच में मेरा प्यार अवनि को डिपेंडेंट बना रहा है ? आज जो कुछ हुआ उस बारे में क्या मुझे अवनि से पूछना चाहिए ? अगर मैंने पूछा तो कही अवनि इसे गलत ना समझ ले ,,

अवनि का ख्याल रखना मेरी जिम्मेदारी है लेकिन मुझे उसे खुद पर इतना डिपेंडेंट भी नहीं बनाना चाहिए ,,  प्राची ने सही कहा इस शहर में रहने के लिए अवनि को मजबूत बनना पडेगा , इतना मजबूत की वह मेरे बाद भी सर्वाइव कर सके,,,,,,,,,,,और फिर मैं हूँ ना मैं उसकी मदद करूंगा”
पीछे खड़ी गाडी का हॉर्न बजा तो पृथ्वी की तंद्रा टूटी , उसने गाडी स्टार्ट की और आगे बढ़ा दी। पृथ्वी वहा से निकल गया और सीधा अपने ऑफिस चला आया।   

मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी , नवी मुंबई
पृथ्वी के यू अचानक बिना बताये चले जाने से जयदीप परेशान हो गया। उसे चिंता सताने लगी कि वह फिर से तो किसी मुसीबत में तो नहीं पड़ गया। इन्ही ख्यालो में डूबा जयदीप अपने केबिन में यहाँ वहा चक्कर लगाने लगा। कुछ देर बाद केबिन का दरवाजा खुला और पृथ्वी अंदर आया। पृथ्वी को देखते ही जयदीप उसके सामने आया और कहा,”तुम कहा गए थे ?”

“कॉफी पीने गया था”,पृथ्वी ने गाडी की चाबी जयदीप की तरफ बढ़ाकर कहा
“क्या तुम इतनी जल्दी में कॉफी पीने गए थे ?”,जयदीप ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“हाँ गया था लेकिन मिली नहीं”,कहते हुए पृथ्वी वहा रखे सोफे पर आ बैठा और रिसीवर उठाकर केंटीन में फोन लगाकर दो कप कॉफी भेजने को कहा।

जयदीप हक्का बक्का सा पृथ्वी के बगल में आकर बैठा और उसके हाथो को थामकर डरे हुए स्वर में कहा,”पृथ्वी ! तुम ठीक हो न , तुम इतनी जल्दी में गए मुझे लगा कही फिर से तो कोई मुसीबत तुम पर नहीं आ गयी”
जयदीप का यु हाथो को थामना और ऐसे बाते करना पृथ्वी को भला कहा पसंद आता उसने जयदीप के हाथो से अपने हाथो को छुड़ाया और पीछे खिसककर कहा,”ये बीवी की तरह परवाह करना बंद कीजिये आप , मैं बिल्कुल ठीक हूँ। कुछ नहीं हुआ है मुझे”

जयदीप ने पृथ्वी को घुरा और थोड़ा गुस्से से कहा,”तो फिर ऑफिस का काम छोड़कर बाहर क्या लेने गए थे तुम ?”
“अह्ह्ह ! बताया ना कॉफी पीने गया था और वैसे भी मैं अपनी निजी जिंदगी के बारे में आपको क्यों बताऊ ?”,पृथ्वी ने जयदीप को घूरकर कहा

“हुंह ! निजी जिंदगी , अगर मै नहीं होता ना तो तुम्हारी निजी जिंदगी कभी शुरू भी नहीं होती,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने अपने दोनों हाथो को बांधकर सीधे बैठते हुए कहा और बच्चो की तरह मुँह बना लिया।
ये देखकर पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”थैंक्यू साले,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी के मुँह से एकदम से साले सुनकर जयदीप ने हैरानी से उसे देखा तो पृथ्वी ने आगे लम्बा सा जी लगाकर कहा,”साले जीईईई”

“देख रहा हूँ आजकल कुछ ज्यादा ही बद्तमीज हो गए हो तुम”,जयदीप ने कहा
“और आप कुछ ज्यादा ही खड़ूस,,,,,,,,बाय द वे मैंने आपकी नई डील फाइनल कर दी है , कल शाम क्लाइंट के साथ मीटिंग है भूलना नहीं”,कहते हुए पृथ्वी उठा और सामने से आते लड़के की ट्रे से कॉफी मग उठाया और केबिन से बाहर निकल गया !

जयदीप ने कॉफी मग लिया और एक घूंठ भरकर कहा,”खड़ूस नहीं मुझे बस तुम्हारी परवाह है”
लड़का खाली ट्रे लेकर वहा से चला गया

रवि जी का घर , पनवेल
शाम में रवि जी घर आये और जब अवनि को अपने घर में देखा तो खुश हो गए और अंदर आते हुए कहा,”अरे अवनि बेटा ! तुम यहाँ हो बताया होता तो मैं तुम्हारे लिए खाने को कुछ अच्छा ले आता”
“कोई बात नहीं बाबा ! आप बताईये आप क्या खाएंगे ? मैं बना देती हूँ”,अवनि ने लक्षित के सामने से उठते हुए कहा क्योकि दोनों कैरम खेल रहे थे।

अवनि ने आकर रवि जी के पैर छूने चाहे तो रवि जी ने रोककर कहा,”कितनी बार कहा है कि बेटियां अपने पिता के पैर नहीं छूती है लेकिन तुम मानती नहीं हो,,,,,,,,,!!!”
जवाब में अवनि मुस्कुरा दी , लता जी किचन से बाहर आयी और रवि जी को देखकर कहा,”अरे आज आप जल्दी आ गए”

“हाँ ! आज काम कम था सोचा थोड़ा वक्त अपने परिवार के साथ बिताया जाये और देखो अवनि भी यही है,,,,,!!”,रवि जी ने सोफे पर बैठते हुए कहा
“पृथ्वी भी आज ऑफिस से सीधा यही आ जाएगा”,लता ने डायनिंग पर रखे जग से गिलास में पानी डालते हुए कहा और फिर पानी का गिलास रवि जी की तरफ बढ़ा दिया।

अवनि ने किचन में जाकर चाय चढ़ा दी और साथ ही सबके लिए आलू प्याज के पकोड़े बनाने लगी। लता ने अवनि की मदद की और फिर अवनि चाय पकोड़े लेकर बाहर चली आयी। पृथ्वी भी ऑफिस से आ चुका था और सीधा रवि जी के घर ही चला आया।  वह आकर रवि जी के बगल में बैठा और टेबल पर रखी प्लेट से पकोड़ा उठाकर कहा,”वाह पकोड़े”

रवि जी ने धीरे से उसके हाथ पर मारकर पकोड़ा नीचे गिराया और कहा,”ये मेरी बहू ने स्पेशल मेरे लिए बनाये है , तुम्हे खाने है तो जाकर अपनी आई से लो”
पृथ्वी ने सामने खड़ी अवनि को देखा तो अवनि ने पलकें झपकाकर सहमति जताई और जैसे ही पृथ्वी उठने को हुआ अवनि ने कहा,”आप बैठिये मैं लेकर आती हूँ”
पृथ्वी वापस बैठ गया तभी पास ही बैठे लक्षित ने पृथ्वी को छेड़ने के लिए ऊँचे स्वर में कहा,”आप बैठिये , मैं लेकर आती हूँ”

पृथ्वी ने सुना तो चिढ गया और मचलकर रवि जी से कहा,”बाबा ! देखिये ना उसे”
रवि जी ने लक्षित की तरफ देखा और उसे डांटकर कहा,”ए मस्ती नहीं,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने जैसे ही गर्दन घुमाई रवि जी ने भी लक्षित की तरफ देखकर पृथ्वी को छेड़ते हुए कहा,”आप बैठिये,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“बाबा यार,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा और उठकर शर्माते हुए वहा से चला गया। रवि जी और लक्षित हंस पड़े।  

सिद्धार्थ का घर , सिरोही
“अरे पापा ! इतनी भी क्या जल्दी है शादी की ? अभी कल ही तो सगाई हुई है और दो महीने बाद शादी,,,,,,,,,,!!!!”,हॉल में खड़े सिद्धार्थ ने सोफे पर बैठे जगदीश जी से कहा
“जल्दी कहा है ? दो महीना है अभी इतने दिन काफी होते है एक दूसरे को समझने के लिए और तुम्हारी तो वैसे भी लव मैरिज है , अब तक तो तुम दोनों ने एक दूसरे को समझ ही लिया होगा”,जगदीश जी ने कहा

“अरे क्या ख़ाक समझ लिया , जब समझने का टाइम आया तो सगाई हो गयी और अब सीधा शादी ,, सगाई से पहले तो बस झगडे हुए है,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ  नाख़ून कुतरते हुए मन ही मन बड़बड़ाया
“ठीक तो कह रहे है तुम्हारे पापा , दो महीने बाद अच्छा मुहूर्त है उसी में शादी कर देते है,,घर में बहू आ जाएगी तो घर खिला खिला रहेगा”,गिरिजा जी ने कहा

गिरिजा जी की आवाज से सिद्धार्थ की तन्द्रा टूटी वह आकर उनके बगल में बैठा और कहा,”अरे लेकिन मम्मी अभी आपके पैर में फ्रेक्चर है इसे ठीक होने में 1 महीना लग जाएगा , शादी में इतने सारे काम होते है वो अकेले कैसे कर पायेगी आप ?”

“सब हो जाएगा ! तुम बस अपने ऑफिस में छुट्टी के लिए अप्लाय कर दो और आज से लिस्ट बनाना शुरू कर दो शादी में कौन कौन आएगा ? क्या क्या तैयारियां होगी ? क्या खरीदना है ? बाकी सब मैं अपने आप देख लूंगा”,जगदीश जी ने कहा  
“तो मतलब आप दोनों मन बना चुके है ?”,सिद्धार्थ ने हताश होकर पूछा लेकिन मन में तो उसके भी लड्डू फूट रहे थे।

“हाँ,,,,,,,,,!!!”,जगदीश और गिरिजा जी ने साथ साथ कहा और मुस्कुरा उठे। सिद्धार्थ उठा और अपने कमरे की तरफ जाते हुए कहा,”ठीक है फिर , जैसी आपकी मर्जी”

सिद्धार्थ अपने कमरे में आया , दरवाजा बंद किया और सुरभि को फोन लगा दिया। एक दो रिंग जाने के बाद सुरभि ने फोन उठाया और कहा,”बड़ी जल्दी याद आ गयी तुम्हे मेरी ? सिरोही पहुंचे नहीं कि अभी से रंग दिखाना शुरू कर दिया तुमने भूलो मत मैं तुम्हारी घरवाली हूँ”
“हो नहीं होने वाली हो”,सिद्धार्थ ने कहा
“हाह ! क्या फर्क पड़ता है ? सिर्फ माँग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र ही तो पढ़ना बाकि है”,सुरभि ने बेपरवाही भरे स्वर में कहा

“जी नहीं सुरभि मैडम ! सिर्फ मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र से काम नहीं चलेगा,,,,,,,,,,,अभी तो तुम्हारे मेरे नाम के शादी के कार्ड छपेंगे , तुम्हारे हाथो में मेरे नाम की मेहँदी लगेगी , दुल्हन के जोड़े में मेरा हाथ थामकर सबके बीच आओगी , मेरी आँखों में देखते हुए मुझे वरमाला पहनाओगी , मेरे साथ गठबंधन करके अग्नि के साथ फेरे लोगी , उसके बाद मांग में सिंदूर , गले में मंगलसूत्र और फिर विदा होकर मेरे साथ मेरे घर आओगी , कितनी सारी रस्मे होगी और उसके बाद,,,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ कहते कहते रुक गया

“उसके बाद क्या ?”,सुरभि की आवाज में कम्पन्न था
सिद्धार्थ शरारत से मुस्कुरा उठा और कहा,”अह्ह्ह्हम्म्म्म मैं नहीं बताऊंगा मुझे शर्म आ रही है”
सुरभि ने सुना तो शर्म से उसका चेहरा भी लाल हो उठा और उसने कहा,”तुम , तुम बहुत बुरे हो”
“हां लेकिन इसी बुरे इंसान से तुम प्यार भी करती हो”,सिद्धार्थ ने कहा

“हाह ! ये मैंने कब कहा ?’,सुरभि ने पूछा
“कहने की जरूरत नहीं है मैं जानता हूँ”,सिद्धार्थ ने कहा और इसके बाद दोनों के बीच शुरू हुई कभी ना खत्म होने वाली बाते।

रवि जी का घर , पनवेल
चाय पकौड़े खाने के बाद रवि जी अपने कमरे में चले गए और लता जी ताजा सब्जी लेने घर के बाहर , घर के हॉल में बैठा लक्षित अपना फोन चला रहा था और पृथ्वी फोन पर किसी क्लाइंट के साथ बिजी था। किचन में खाने की तैयारी करके अवनि हॉल में चली आयी। पृथ्वी भी फोन काटकर पलटा तो नजर सामने कुछ ही दूर खड़ी अवनि पर पड़ी।

दोनों की नजरे एक दूसरे से मिली , दिल धड़का और पृथ्वी ने मन ही मन खुद से कहा,”इतना सब सहकर भी तुम इतना नार्मल कैसे रह सकती हो अवनि ? आज क्या हुआ ये पूछकर मैं तुम्हे वो पल फिर से याद दिलाना नहीं चाहता लेकिन मैं वादा करता हूँ तुम्हारा सपना जरूर पूरा होगा , आज से तुम्हारा सपना मेरा सपना,,,,,,,,,बस तुम हार मत मानना , तुम मेहनत करना बाकि मैं हूँ ना तुम्हारे साथ,,,,,,,,,,,हमेशा के लिए”

सामने खड़ी अवनि ने पृथ्वी को ख़ामोशी से अपनी और देखते पाया
और मन ही मन खुद से कहा,”क्या मुझे पृथ्वी को सब बता देना चाहिए ? नहीं नहीं मुझे उन्हें नहीं बताना चाहिए , वो पहले ही इतना परेशान है मैं उनकी परेशानी और बढ़ाना नहीं चाहती। मुझे अब से कुछ चीजे अपने आप ही सॉल्व करनी होगी और सेल्फ डिपेंडेंट बनना होगा ! इनकी थकी हुई आँखे बता रही है इन दिनों ये कितनी मेहनत कर रहे है ऐसे में अपनी परेशानी इन्हे बताकर मैं इन्हे और परेशान नहीं कर सकती,,,,,,,,,,,

चिंता मत करो पृथ्वी मैं और मेहनत करुँगी ताकि मैं आपके कंधो से भर कम कर सकू , आखिर आप भी एक अच्छी जिंदगी डिजर्व करते है”
एक दूसरे के सामने खड़े अवनि और पृथ्वी एक दूसरे की आँखों में देखते हुए इस वक्त एक दूसरे के बारे में ही सोचे जा रहे थे , एक दूसरे की परवाह कर रहे थे। पृथ्वी ने अपने कदम अवनि की तरफ बढ़ाये , अवनि ने भी अपने कदम पृथ्वी की तरफ बढ़ाये। दोनों एक दूसरे के करीब थे , पृथ्वी ने अपना हाथ अवनि के गाल से लगाया और अपने होंठो से उसके ललाट को छूकर धीरे से कहा,”परेशान मत हो मैं हूँ”

इतना सुनते ही अवनि की आँखों में नमी उभर आयी , उसने तो पृथ्वी को बताया भी नहीं फिर पृथ्वी ने बिना कहे ये कैसे जान लिया कि वो परेशान है। अवनि की आँखों में नमी देखकर पृथ्वी ने अपना हाथ उसके गाल से हटाकर उसकी गर्दन पर रखा और उसे अपने सीने से लगा लिया।  अवनि ने महसूस किया पृथ्वी का दिल बहुत तेज धड़क रहा है।

लक्षित पानी लेने किचन की तरफ जा रहा था , जाते जाते वह अवनि और पृथ्वी के बगल से गुजरा और कहा,”आजकल के बच्चो में ज़रा भी शर्म नहीं है”
पृथ्वी ने उसके सर पर एक चपत लगा दी और लक्षित अपना सर सहलाते हुए वहा से चला गया। अवनि पृथ्वी के सीने से लगी रही और पृथ्वी उसका सर थपथपाता रहा , अवनि ने महसूस किया इस दुनिया में उसके लिए इस वक्त सबसे महफूज जगह अगर कोई है तो वो है पृथ्वी की बाहें,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!

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