Pasandida Aurat Season 3 – 60
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , मुंबई
मिस्टर देसाई और प्राची सुबह सुबह ऑफिस चले आये क्योकि आज मिस्टर देसाई ने शेयर होल्डर्स और बोर्ड मेम्बर्स के साथ एक जरुरी मीटिंग रखी थी। पृथ्वी भी ऑफिस आ चुका था और बस इस इन्तजार में था कि मीटिंग खत्म होने के बाद आज वह भरत की सच्चाई सबके सामने ला देगा। सबूत उसे नीलेश से पहले ही मिल चुके थे अब बस इंतजार था उस पल का जब सच सामने आना था। वही अपने केबिन में बैठा भरत आज बहुत ही खुश और विश्वास से भरा हुआ था।
मिस्टर देसाई अपने केबिन में थे और प्राची भी उनके केबिन में बैठी कुछ काम कर रही थी
“प्राची ! क्या तुम तैयार हो ?”,मिस्टर देसाई ने गंभीर स्वर में पूछा
प्राची ने मिस्टर देसाई की तरफ देखा और विश्वास से भरकर कहा,”हाँ डेड ! मैं तैयार हूँ”
“एक बार फिर सोच लो बेटा ! तुम जो करने जा रही हो उसमे बोर्ड मीटिंग में मौजूद सभी लोगो की नजरो में तुम्हारी इमेज खराब हो जाएगी”,मिस्टर देसाई ने कहा
प्राची कुछ देर खामोश रही और फिर उसी विश्वास से कहा,”आपकी रेपुटेशन और इस कम्पनी को बचाने के लिए मैं उन सबका गुस्सा और नफरत झेलने के लिए तैयार हूँ डेड,,,,,,,,,,,!!!”
“हम्म्म ठीक है,,,,,,,,,,तो मीटिंग रूम में चले ?”,मिस्टर देसाई ने उठते हुए कहा
प्राची भी उठ खड़ी हुई और कहा,”आप चलिए डेड , मैं आती हूँ”
मिस्टर देसाई ने प्राची के कंधे पर हाथ रखकर उसे हिम्मत दी और वहा से चले गए। प्राची केबिन में बने वाशरूम में आयी और शीशे में खुद को देखकर मन ही मन कहा,”आज तुम्हे सच बोलना ही पडेगा प्राची फिर चाहे इसके लिए तुम्हे हमेशा हमेशा के लिए ये कम्पनी छोड़नी ही क्यों न पड़े”प्राची की आँखों में हलकी नमी उभर आयी उसने अपना मुँह धोया और टिश्यू से पोछकर बाहर चली आयी। सोफे पर रखे अपने बैग से उसने एक लिफाफा निकाला और लेकर केबिन से बाहर निकल गयी। प्राची मीटिंग रूम में ना जाकर पृथ्वी के केबिन की तरफ चली आयी। उसने दरवाजा नॉक किया।
“प्लीज कम इन”,अंदर से पृथ्वी की आवाज आयी
प्राची ने दरवाजा खोला और अंदर चली आयी। पृथ्वी फाइल में पेपर्स लगा रहा था उसने प्राची की तरफ देखा तो प्राची ने हाथ में पकड़ा लिफाफा पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया ! पृथ्वी ने लिफाफा लिया और कहा,”ये क्या है ?”
“इसमें मेरे खिलाफ कुछ सबूत है , तुम्हारे काम आएंगे”,प्राची ने शांत स्वर में कहा
पृथ्वी ख़ामोशी से प्राची की तरफ देखता रहा और उसके जहन में पहला सवाल ये आया कि क्या प्राची उसके देसाई ग्रुप ज्वाइन करने का मकसद जान चुकी है ? पृथ्वी को खामोश देखकर प्राची ने कहा,”मैंने सिर्फ तुम्हारे साथ ही नहीं बल्कि डेड के साथ भी बहुत गलत किया है पृथ्वी,,,,,,,,,,,,और नीलेश उसके साथ तो मैं सबसे बुरा पेश आयी हूँ,,,,,,,,,,नीलेश मिस्टर भरत का बेटा है पृथ्वी ये बात मुझे कल पता चली , खुद भरत ने मुझे बताया,,,,,,,!!!”
प्राची के मुँह से भरत और नीलेश का नाम सुनकर तो पृथ्वी और ज्यादा हैरान हो गया। प्राची ये सच कैसे जानती है ?
“तुम्हे ये सब कैसे पता ?”,पृथ्वी ने पूछा
प्राची कुछ देर खामोश रही और फिर पृथ्वी को भरत की सारी सच्चाई बता दी , साथ ही उसने ये भी बता दिया कि पृथ्वी को मौर्या ग्रुप से रिजाइन करने का दबाव भी भरत ने प्राची के कहने पर ही डाला था। प्राची की बाते सुनकर भी पृथ्वी शांत रहा क्योकि भरत की सच्चाई तो वह खुद भी बहुत पहले से जानता था बस सही वक्त का इन्तजार कर रहा था और आज वह सही वक्त था।
पृथ्वी को खामोश देखकर प्राची ने बुझे स्वर में कहा,”मुझे माफ कर दो पृथ्वी , मैंने अपनी जिद के चलते सबको मुसीबत में डाल दिया। डेड को , उनकी इस कम्पनी को , तुम्हे और नीलेश को भी,,,,,मैंने सबके साथ बहुत गलत किया है , मुझे इसकी सजा मिलनी चाहिए , इसमें मेरे और भरत के बीच हुई बातचीत और डील के सारे सबूत है,,,,,,,,,हो सके तो मुझे माफ़ कर देना”
इतना कहकर प्राची वापस जाने के लिए पलट गयी , उसने पृथ्वी के जवाब का इन्तजार भी नहीं किया।
“प्राची,,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने आवाज दी तो प्राची केबिन के दरवाजे पर रुक गयी
प्राची ने पलटकर मायूसी से पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी धीरे से मुस्कुराया और कहा,”थैंक्यू ! तुम अगर मुझे मुसीबत में नहीं डालती तो मैं इन सबका सच सामने कैसे लाता ?”
प्राची ने सुना और शांत स्वर में कहा,”डेड मीटिंग रूम में तुम्हारा इन्तजार कर रहे है,,,,,,,कम”
पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिलाई और टेबल पर रखी फाइल उठाकर प्राची के पीछे पीछे केबिन से बाहर निकल गया जबकि जाते जाते पृथ्वी ने प्राची का दिया लिफाफा केबिन के ड्रॉवर में ही छोड़ दिया। उसके दिमाग में क्या चल रहा था ये तो बस वही जानता था।
मीटिंग रूम में मिस्टर देसाई बैठे थे और उसी कमरे में एक तरफ हाथ बांधे चेतन खड़ा था जो कि भरत के लिए काम करता था। प्राची और पृथ्वी भी मीटिंग रूम में चले आये और अपनी अपनी कुर्सियों पर आ बैठे। कुछ देर बाद भरत कमरे में आया उसने देखा मीटिंग रूम में सिर्फ चार लोग जमा है उसमे से 3 तो वही है जिनसे भरत बेइंतहा नफरत करता है ! ना कमरे में बोर्ड मेम्बर्स थे ना ही शेयर होल्डर्स ना ही मिस्टर देसाई का कोई बिजनेस क्लाइंट तो फिर मिस्टर देसाई ने आखिर ये मीटिंग रखी किसके लिए थी ?
हैरान परेशान सा भरत आकर अपनी जगह पर खड़ा हो गया। उसने एक नजर प्राची की देखा तो प्राची ने नफरत से अपना चेहरा घुमा लिया , भरत ने पृथ्वी की तरफ देखा लेकिन पृथ्वी ने ना चेहरा घुमाया ना ही नजरे नीची की वह तो बेखौफ भरत को घूर रहा था लेकिन भरत डरा नहीं क्योकि आज वह भी पूरी तैयारी के साथ आया था।
“सर बाकि सब लोग कहा है ?”,भरत ने मिस्टर देसाई से पूछा
“बाकि सब लोग नहीं आएंगे”,मिस्टर देसाई ने अपनी कुर्सी से उठकर भरत की तरफ आते हुए कहा
“क्यों सर ?”,भरत ने पूछा
मिस्टर देसाई भरत के सामने आ खड़ी हुए और उसकी आँखों में देखकर कठोर स्वर में कहा,”बाकि सबके सामने मैं थप्पड़ नहीं मार पाऊंगा ना”
भरत कुछ समझता इस से पहले ही मिस्टर देसाई ने खींचकर एक थप्पड़ भरत के गाल पर रसीद कर दिया। भरत का कान सुन्न हो गया , वह समझ ही नहीं पाया ये एकदम से क्या हुआ
प्राची हैरान थी लेकिन पृथ्वी शांत जैसे उसे पता हो कि आज की मीटिंग में ये तो होना ही था। भरत बदहवास सा मिस्टर देसाई को देखता रहा और मिस्टर देसाई गुस्से से उसे घूरते रहे। केबिन में खड़े चेतन के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे वह बस ख़ामोशी से हाथ बाँधे खड़ा था। भरत को बौखलाया देखकर मिस्टर देसाई ने पीछे हटकर कहा,”यहाँ मौजूद लोग शायद तुम्हे कम लग रहे है मैं कुछ और लोगो को भी बुला देता हूँ”
कहकर मिस्टर देसाई ने आवाज लगाई,”प्रवीण , नीलेश , मिस्टर राव बाहर आओ”
उसी मीटिंग रूम में बने वेटिंग एरिया में बैठा प्रवीण नीलेश और लीगल टीम के हेड मीटिंग रूम में चले आये। उन्हें देखते ही भरत के चेहरे का रंग उड़ गया। प्रवीण और मिस्टर राव तो कम्पनी के ही एम्प्लॉय थे लेकिन नीलेश को वहा देखकर प्राची काफी हैरान हुई। पृथ्वी यहाँ भी खामोश रहा , उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे।
उन सबको देखकर भरत घबरा गया और मिस्टर देसाई से कहा,”सर सर , ये सब लोग मिलकर मुझे फ़साना चाहते है सर”
मिस्टर देसाई ने भरत की तरफ देखा और कहा,”पर मैंने तो अभी तुम से कुछ पूछा ही नहीं भरत”
मिस्टर देसाई की बात सुनकर भरत को समझ आया कि उसने खुद को मुसीबत में डाल दिया है , वह इधर उधर देखने लगा। मिस्टर देसाई ने भरत की तरफ देखा और गुस्से से कहा,”तुम्हे क्या लगता है भरत तुम मेरी पीठ पीछे अपनी मनमानी करोगे और मुझे कुछ पता चलेगा ?”
मिस्टर देसाई की बात सुनकर भरत का दिल धड़कने लगा , कहा वह आज मिस्टर देसाई से इस कम्पनी को हड़पने वाला था और कहा मिस्टर देसाई ने ही उसकी पोल खोल दी।
भरत सकपका गया तो मिस्टर देसाई वही केबिन में घूमते हुए कहने लगे,”हाँ भरत ! मैं तुम्हारे बारे में सब जान गया हूँ , तुम्हारे इस शरीफ चेहरे के पीछे जो बेईमानी और धोखेबाजी वाला चेहरा छुपा है वो मैं देख चुका हूँ। तुम पर शक तो मुझे उसी दिन हो गया था जब तुमने प्राची के ऑफिस छोड़ने पर कोई आपत्ति नहीं जताई और ख़ुशी ख़ुशी MD की पोजीशन एक्सेप्ट कर ली पर तुम्हे क्या लगता है ? प्राची ने ऑफिस अपनी मर्जी से छोड़ा था ?”
कहते हुए मिस्टर देसाई ने प्राची की तरफ देखा और प्राची हल्का सा मुस्कुराई
प्राची को मुस्कुराते देखकर भरत और घबरा गया उसने मिस्टर देसाई की तरफ देखा तो मिस्टर देसाई ने कहा,”MD की पोजीशन तुम्हे तुम्हारे काम की वजह से नहीं मिली बल्कि मैंने खुद जान बूझकर दी ताकि मैं तुम्हारा असली प्लान जान सकू,,,,,,,,,,,!!!”
भरत ने सुना तो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गयी , पृथ्वी और नीलेश ने भी हैरानी से एक दूसरे को देखा क्योकि अब तक उन्हें भी यही लगता था कि मिस्टर देसाई ने भरत को MD के लिए चुना है जबकि सच तो कुछ और था। अब तो मिस्टर देसाई पृथ्वी और नीलेश पर भी भारी पड़ रहे थे। दोनों ख़ामोशी से मिस्टर देसाई को देखने लगे
मिस्टर देसाई ने भरत को देखा और फिर चेतन की तरफ देखकर कहा,”तुम्हारा सबसे ख़ास आदमी चेतन , जो तुम्हारे लिए काम करता है और तुम्हे ऑफिस की हर खबर देता है , तुम्हारे लिए कम्पनी के बाहर क्लाइंट्स से डील करता है”
भरत ने सुना तो उसके चेहरे का रंग फिर उड़ गया , उसने पलटकर चेतन की तरफ देखा तो पाया चेतन के चेहरे पर परेशानी के भाव है। चेतन भरत के कुछ राज जानता था इसलिए भरत मन ही मन और घबरा गया लेकिन चेतन अगले ही पल मुस्कुराया और मिस्टर देसाई की तरफ आते हुए कहा,”अरे सर ये भी तो बताईये कि मैंने ये आपके लिए किया था”
चेतन की बात सुनकर भरत को इस बार और बड़ा झटका लगा। उसने सोचा भी नहीं था चेतन मिस्टर देसाई का आदमी है।
“चेतन ! प्लीज सिट”,मिस्टर देसाई ने चेतन से कहा और फिर भरत की तरफ पलटकर कहने लगे,”प्रवीण तुम्हारी सारी गड़बड़ियों के बारे में जानता था और जब उसने तुम्हे ये सब करने से रोका तो तुमने उसे ही फंसाकर इस कम्पनी से बाहर कर दिया , लीगल हेड से मिस्टर राव को भी अपने प्लान में शामिल कर लिया ताकि वो तुम्हारी मदद कर सके। प्रवीण को मैंने जॉब से नहीं निकाला था बल्कि कुछ दिनों के लिए तुम्हारी नजरो से दूर किया था और मिस्टर राव ने भी तुम्हारा साथ मेरे कहने पर दिया ताकि तुम्हारा सच सबके सामने आ सके,,,,,,
मिस्टर शर्मा से तुमने पर्सनल डील करके 10 लाख लिया और उसका कम्पनी अकाउंट्स में कोई हिसाब नहीं जानते हो क्यों ? क्योकि शर्मा को वो डील करने के लिए भी मैंने ही कहा था तुम्हारा सच उसी वक्त सामने आ जाता लेकिन मेरी बेटी ने एक बेवकूफी कर दी,,,,,,,,,,उसने तुम्हारे साथ मिलकर पृथ्वी को मौर्या ग्रुप से बाहर करवा दिया”
कहते हुए मिस्टर देसाई ने एक बार फिर प्राची की तरफ देखा तो प्राची ने शर्मिंदा होकर नजारे नीची कर ली।
मिस्टर देसाई की बाते सुनकर भरत का तो सर चकराने लगा , उसकी आँखों के सामने ये सब हुआ और उसे पता ही नहीं चला आखिर वह इतना बेवकूफ कैसे हो सकता है ?
मिस्टर देसाई ने आगे कहना शुरू किया,”नीलेश तुम्हारा बेटा है ये बात मैं पहले दिन से जानता था लेकिन साथ ही वो एक ईमानदार , होनहार और मेहनती लड़का है ये बात भी मुझे पता थी। मैंने उसे प्राची का मैनेजर रखा क्योकि मैं हमेशा हमेशा के लिए नीलेश को देसाई ग्रुप में रखना चाहता था,,,,,,,,,,,,,,!!!”
कहते हुए मिस्टर देसाई ने नीलेश की तरफ देखा जो कि ख़ामोशी से मिस्टर देसाई को ही देख रहा था। मिस्टर देसाई मुस्कुराये और कहा,”मैं नीलेश को अपने घर का दामाद बनाना चाहता था , उसे प्राची के बेटरहॉफ के रूप में देखना चाहता था लेकिन उस से पहले ही उसने ऑफिस छोड़ दिया,,,,,तुम्हारे गलत इरादों का सच मुझे इसी से पता चला,,,,,,,,,,,,आगे अब सब तुम्हे नीलेश बताएगा”
कहकर मिस्टर देसाई अपनी कुर्सी पर आ बैठे। नीलेश उठा और भरत की तरफ देखा , आज उसके सामने एक बाप नहीं बल्कि एक धोखेबाज इंसान खड़ा था जिसने यहाँ मौजूद कितने ही लोगो की जिंदगी में परेशानिया खड़ी कर दी थी
नीलेश ने भरत को एक नजर देखा और बोलना शुरू किया,”आप हमेशा से इस कम्पनी को अपना बनाना चाहते थे लेकिन अपनी मेहनत से नहीं बल्कि धोखे से , मिस्टर देसाई का भरोसा जीतकर आप उनके मैनेजर बन गए और वही से आपने अपना असली काम शुरू कर दिया ,, आपने धीरे धीरे कम्पनी के मेहनती और ईमानदार स्टाफ को निकालना शुरू कर दिया और अपने जैसे लोगो को इसमें शामिल किया लेकिन आप अकेले इस कम्पनी को हासिल नहीं कर सकते थे इसलिए आपने मुझे भी इस कम्पनी में ज्वाइन करवा दिया और प्राची का मैनेजर बना दिया
जिस से कम्पनी की सभी इम्पोर्टेन्ट बाते जान सके। शुरू शुरू में मुझे नहीं समझ आया लेकिन जब आपके इरादे पता चले तो मुझे खुद से ही नफरत होने लगी। मैं ये कम्पनी छोड़ देना चाहता था लेकिन फिर मुझे ये अहसास हुआ कि मैं प्राची को पसंद करता हूँ”
कहते कहते नीलेश रुक गया , प्राची ने सुना तो उसका दिल धड़क उठा क्योकि आज से पहले नीलेश ने प्राची के सामने अपनी भावनाये कभी जाहिर नहीं की थी। प्राची नजारे झुकाये बैठी रही , नीलेश कुछ देर रुका और आगे कहने लगा,”जब मैंने आपसे ये सब रोक देने को कहा तो आपने मुझे ही बेइज्जत करके घर से निकल जाने को कहा। मैं कभी नहीं चाहता था आप मिस्टर देसाई को बर्बाद करके खुद को मुसीबत में डाले इसलिए आपको समझाने और इन सब से बाहर निकालने की बहुत कोशिश की लेकिन आपने नहीं सुना।
कुछ दिन बाद मुझे पता चला प्राची के साथ मिलकर आपने पृथ्वी को मौर्या ग्रुप से बाहर निकलवा दिया है , उस वक्त लगा जैसे आप में दिल नाम की चीज ही नहीं है , अपने फायदे के लिए आप दुसरो की जिंदगी से खेल रहे थे। इन सब में पृथ्वी का कोई कसूर नहीं था फिर भी आपने उसके रिजाइन की मांग की और इसे अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
आखरी शब्द नीलेश ने गुस्से से कहे।
पृथ्वी जो अब तक खामोश बैठा था उसने शांत स्वर में कहा,”मैंने मौर्या ग्रुप से रिजाइन नहीं दिया है , मैं आज भी जयदीप मौर्या के लिए ही काम कर रहा हूँ”
( क्या भरत झेल पायेगा एक के बाद एक झटके या चलेगा कोई नयी चाल ? क्या मिस्टर देसाई थे इस खेल के असली मास्टरमाइंड ? पृथ्वी की बात सुनकर क्या भरत के साथ साथ लगने वाला है मिस्टर देसाई को भी झटका ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
