Pasandida Aurat Season 3 – 6
खत खत्म होते ही पृथ्वी उठा और ख़ुशी से अपने बालों में हाथ घुमाकर कहा,”हाह ! दोस्त और मैं ,, मैं तुम्हारी जिंदगी में आया ही तुम्हारा पति बनने के लिए था,,,,,,,इसलिए तो महादेव ने मुझे तुम्हारी जिंदगी में भेजा”
“अच्छा ! और आपको कैसे पता महादेव ने आपको मेरी जिंदगी में इसी लिए भेजा है ?”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने अपने शर्ट का एक बटन खोला और कोलर पकड़कर पीछे किया और इतराकर कहा,”वो क्या है ना महादेव ने देखा ये लड़की थोड़ी मासूम है इसको सही गलत की परख नहीं है इसकी जिंदगी किसी ऐसे इंसान को भेजना होगा जो इसे सम्हाल सके और इसका ख्याल रख सके,,,,,,,,,,,बस इसलिए उन्होंने मुझसे कहा “तथास्तु”
पृथ्वी की बात सुनकर अवनि हसने लगी तो पृथ्वी फिर उसकी गोद में सर रखकर लेट गया और खत को समेटते हुए कहा,”अवनि ! दुःख के उन पलों में भी तुमने मुझे याद रखा ये भी तो तुम्हारा प्यार ही था। लोग ख़ुशी में सबको याद रख सकते है लेकिन दुःख में उन्हें सबसे पहले सिर्फ वही शख्स याद आता है जो उनके दिल के बेहद करीब हो,,,,,,,,,,,मुझे माफ़ कर दो अवनि”
“माफ़ी किसलिए पृथ्वी ?”,अवनि ने पूछा
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”तुम्हारी जिंदगी में इतनी देर से आने के लिए,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“इसमें आपका क्या दोष है पृथ्वी वो सब मेरी किस्मत में पहले से तय था , वो सब नहीं होता तो आप मेरी जिंदगी में नहीं आते और मुझे आपकी अहमियत समझ नहीं आती,,,,,,,,,,,,,,,,इसलिए कहते है कि कब , किसको , कहा , किस से मिलना है ये ईश्वर के घर में तय होता है। आपसे मेरा मिलना महादेव ने लिखा था और तय समय पर हम एक दूसरे से मिले भी बस कुछ वक्त के लिए भटक गए थे,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने पृथ्वी के बालों में अपनी उंगलिया घुमाते हुए कहा
“मैं नहीं भटका था अवनि जो शब्द मैंने तुम्हे पहले दिन कहे आखरी दिन तक मैं उन्ही पर टिका था”,पृथ्वी ने उठकर बैठते हुए कहा
अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”औरत सिर्फ बेइंतहा मोहब्बत कर सकती है पृथ्वी , उस मोहब्बत को शादी के मंडप तक मर्द की जिद पहुँचाती है”
पृथ्वी ने सुना तो एकटक अवनि को देखने लगा
और अगले ही पल उसे ये अहसास हुआ कि आज वह अगर अवनि के साथ है तो अपने प्यार और अपनी जिद की वजह से,,,,,,,,,,,वरना अवनि तो हमे उसे खुद से दूर रहने को कहा। उसने आगे बढकर अवनि को एक बार फिर सीने से लगाया और कहा,”यहाँ तक पहुंचने के लिए मैं ईश्वर तक से लड़ा हूँ अवनि तुमसे शादी करना मेरी जिद नहीं मेरा प्यार था और मुझे यकीन था अपने प्यार पर कि एक दिन हम साथ होंगे”
पृथ्वी के सीने से लगी अवनि की आँखों में आँसू भर आये क्योकि उसे अहसास था कि सीने से लगाये बैठे इस शख्स ने उसे पाने के लिए कितनी तकलीफ झेली थी , कितना रोया था , कितना लड़ा था सबसे बस कभी हार नहीं मानी। पृथ्वी ने अवनि के चेहरे को अपने हाथो में थामा और उसका ललाट चूमकर कहा,”तुम मेरी सबसे बड़ी ताकत हो अवनि और,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“और ?”,अवनि ने नम आँखों से पृथ्वी की तरफ देखकर मासूमियत से पूछा
“और मेरी सबसे बड़ी कमजोरी भी,,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर पृथ्वी ने एक बार फिर अवनि को अपने सीने से लगा लिया और इस बार अवनि के साथ साथ पृथ्वी की आँखों में भी नमी उभर आयी।
पृथ्वी अवनि को कुछ देर गले लगाए रहा और फिर उस से दूर हटकर बाकि बचे खतों की तरफ आया। उसने चौथा खत उठाया और बिस्तर से पीठ लगाकर अवनि के ठीक सामने आ बैठा। पृथ्वी ने लिफाफा खोला और उसमे रखा खत निकालकर पढ़ने लगा।
“प्रिय पृथ्वी !
हर हर महादेव ! सोचा नहीं था ये खत इस तरह से लिखना पड़ेगा। हम अचानक मिले और अचानक हालात ऐसे हो गए कि हमे ना चाहते हुए भी एक दूसरे से दूर जाना पड़ा। मैं जानती थी पृथ्वी कि यही होगा इसलिए हर बार तुम्हे खुद से दूर रहने को कहा। मेरे रूप में तुमने अपने जीवन में बस मुश्किलें चुनी है पृथ्वी और आज अंजाम तुम्हारे सामने है।
काश हम कभी मिले ना होते , काश हमारी बात ना हुई होती तो आज तुम इस हाल में ना होते। तुम्हरे जीवन में घटने वाली हर घटना के लिए सिर्फ मैं जिम्मेदार हूँ पृथ्वी !
मैंने तुम्हारी जिंदगी खतरे में डाल दी , तुम्हे खतरे में डाल दिया और तुम्हे सबकी नफरत का शिकार बना दिया। आज पहली बार तुम फ़ोन पर मेरे सामने रोये हो पृथ्वी , वो पल मेरा दिल चीर देने के लिए काफी था। जो हुआ उसके लिए मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगी पृथ्वी !
मुझे तुम्हे रुलाने का कोई हक़ नहीं है , उस पल तुम तकलीफ में थे वो भी सिर्फ मेरी वजह से , सिर्फ इसलिए क्योकि तुम्हे मैं चाहिए थी लेकिन ये मुमकिन नहीं है पृथ्वी ,, अपने घरवालों का दिल दुखाकर तुम मेरे साथ कभी खुश नहीं रह पाओगे।
मुझे भूल जाओ पृथ्वी मुझे भूल जाओ शायद यही तुम्हारे लिए अच्छा हो,,,,,,,,,,,,मैं महादेव को बहुत मानती हूँ और आज तुमने उन पर ही सवाल उठा दिया। तुमने कितने गुरुर और गुस्से में आकर कहा कि “क्या कर लिया तुम्हारे महादेव ने ?” यकीन मानो उस वक्त तुम्हारे कहे ये शब्द बहुत चुभे थे मुझे ,, मेरे महादेव ने कभी किसी का बुरा नहीं किया है। तुमने उनसे कुछ मांगा और तुम्हे वो नहीं मिला तो इसका मतलब ये नहीं है पृथ्वी कि महादेव ने तुम्हारे साथ गलत किया , हो सकता है वो तुम्हारे लिए बना ही ना हो।
महादेव हमे वो नहीं देते जो हम चाहते है , महादेव हमे वो देते है जो हमारे लिए सही होता है। महादेव से इतनी नाराजगी मत रखो पृथ्वी वो जो करते है सही करते है। मैं जानती हूँ जो हो रहा है उस से तुम्हे बहुत तकलीफ पहुंची है लेकिन मैं नहीं चाहती मुझे चुनकर तुम अपने आई बाबा का दिल दुखाओ। तुमने कहा की आज के बाद मुझसे बात नहीं कर पाओगे ,, ये शब्द कहते हुए तुम्हे कितनी तकलीफ हुई होगी पृथ्वी ,, तुम मेरी जिंदगी से जा रहे थे और मैं चाहकर भी तुम्हे रोक नहीं पायी क्योकि मैं अब तुम्हारी जिंदगी में और परेशानिया खड़ी करना नहीं चाहती।
तुमने कहा कि मैं तुम्हे भूल जाऊ लेकिन मैं जानती हूँ मैं तुम्हे कभी भूल नहीं पाऊँगी पृथ्वी,,,,,,,,,,,,तुम हमेशा मेरी यादों में रहोगे”
खत पढ़ते हुए कब पृथ्वी की आँखों में आँसू भर आये उसे पता ही नहीं चला। उसकी आँख से निकलकर आँसू की एक बूंद खत पर आ गिरी। पृथ्वी ने देखा खत में जगह जगह स्याही फैली हुई थी , लग रहा था जैसे इसे लिखते हुए अवनि भी रोई हो। पृथ्वी को गले में चुभन का अहसास हुआ क्योकि उसके पास कहने को बहुत कुछ था लेकिन वह नहीं कह पाया। ये खत पढ़ते हुए उसकी आँखों के सामने वह रात आ गयी जब उसकी अवनि से बात हुई थी और वह रो पड़ा था क्योकि कोई भी उसे समझने को तैयार नहीं था,,,,,,,,,,,,,अवनि भी नहीं,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी सर झुकाये बैठा रहा और उसकी आँखों में भरे आँसू टप टप करके खत पर गिरने लगे। पृथ्वी को खामोश पाकर अवनि ने खत को देखा तो उसे अहसास हुआ कि पृथ्वी की आँखों में आँसू थे। वह पृथ्वी के पास आयी , उसके हाथ से खत लिया और उसे समेटते हुए कहा,”वो बस एक बुरा वक्त था पृथ्वी जो अब गुजर चुका है”
पृथ्वी ने सर झुकाये रखा और सुबकते हुए कहा,”उस शाम को याद करता हूँ तो आज भी कुछ चुभता है , कोई मुझे नहीं समझ रहा था और ना मैं किसी को समझा पा रहा था।
मैं तुम्हे कभी खुद दूर नहीं करना चाहता था अवनि लेकिन उस वक्त मैं मजबूर था,,,,,,,,,,,,,उस रात के बाद सब बदल गया बस नहीं बदला तो तुम्हारे लिए मेरा प्यार,,,,,,,,,,,,हो सके तो उस रात के लिए मुझे माफ़ कर देना अवनि”
अवनि ने सुना तो उसे भी गले में चुभन का अहसास हुआ क्योकि पृथ्वी की बातों के साथ ही अवनि की आँखों के सामने वो पल आ गए जो तकलीफदेह थे।
अवनि ने पृथ्वी के चेहरे को अपने हाथो में लिया और उसके ललाट को चूमकर कहा,”आपको मुझसे माफ़ी मांगने की जरूरत नहीं है पृथ्वी , मैंने कहा ना वो बस एक बुरा वक्त था,,,,,,,,,,,,,,,गुजर गया। हम साथ है , एक घर में , एक छत के नीचे , उसी परिवार के साथ,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने सुना तो नम आँखों से अवनि को देखने लगा। उसका चेहरा हल्का लाल हो चुका था।
अवनि ने पृथ्वी के आँसू पोछे और कहा,”मुझे बच्ची कहते हो और खुद मेरे सामने बच्चो की तरह रोने लगते हो,,,,,,,,,,बुद्धू कही के”
पृथ्वी ने कुछ नहीं कहा बस अवनि को देखता रहा तो अवनि ने अपनी गर्दन उचकाई। पृथ्वी ने अपना ललाट अवनि के ललाट से लगाया और कहा,”उस वक्त मैंने तुम्हे कितना अकेला कर दिया था ना अवनि,,,,,,,,,,,,जिंदगी के जिन पलों में तुम्हे मेरी सबसे ज्यादा जरूरत थी उस वक्त मैं तुम्हारे साथ नहीं था।”
“अच्छा हुआ उस वक्त आप मेरे साथ नहीं थे,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी उस से दूर हटा और हैरानी से देखा तो अवनि ने मुस्कुराकर कहा,”उस वक्त अगर आप साथ होते तो मैं अपनी जिंदगी में आपकी अहमियत कभी जान ही नहीं पाती। कुछ दूरिया करीब आने के लिए होती है पृथ्वी”
पृथ्वी ने सुना तो हामी में गर्दन हिलायी और पांचवा खत उठा लिया।
अवनि एक बार फिर पृथ्वी के सामने आ बैठी। पृथ्वी ने लिफाफा खोला और अंदर रखा खत निकालकर पढ़ने लगा
“प्रिय पृथ्वी !
हर हर महादेव ! मैंने बहुत कोशिश की कि तुम्हे खत ना लिखू लेकिन चाहकर भी खुद को रोक नहीं पायी और आज फिर तुम्हे ये खत लिख रही हूँ। मैंने तुमसे तो कह दिया कि भूल जाओ मुझे और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाओ लेकिन क्या मैं खुद ये कर पाऊँगी ? मैं जितना तुम्हे भूलने की कोशिश कर रही हूँ तुम उतना मुझे याद आ रहे हो।
सही कहा था तुमने “देखना मैडम जी एक दिन आप मुझे बहुत याद करेगी” कोशिश करती हूँ तुम्हे याद ना करू , तुम्हारे बारे में ना सोचू लेकिन तुम से जुड़ा कुछ न कुछ मेरे सामने आ ही जाता है। कभी तुम्हारे नाम के रूप में तो कभी तुम्हारी कही बातो के रूप में,,,,,,,,,मैं जितना तुम्हारे ख्यालो से खुद को बचाने की कोशिश करती हूँ तुम्हारे ख्याल मुझे घेर लेते है। मैंने कभी सोचा नहीं था पृथ्वी कि मेरी जिंदगी में ऐसा भी एक मोड़ आएगा जब मैं ऐसे इंसान के लिए खत लिखूंगी जिन्हे मैं ये खत कभी भेज नहीं पाऊँगी।
मैं नहीं जानती ये खत तुम तक कभी पहुंचेंगे भी या नहीं लेकिन फिर भी मैं इन्हे लिख रही हूँ इस उम्मीद में कि क्या पता किसी रोज ये खत तुम्हारे हाथो में और तुम इन्हे पढ़कर मुस्कुरा रहे हो। चाहती हूँ हर रोज तुम्हारे लिए खत लिखू लेकिन फिर खुद को रोक लेती हूँ क्योकि मैं जानती हूँ ये करके मैं खुद को ही तकलीफ दे रही हूँ। इन खतों को मैंने अपने टेबल की दराज में सहेजकर रखे है। इन खतों में क्या लिखा है ? ये सिर्फ मैं और ये खत जानते है और हमारे बाद सिर्फ तुम जानोगे,,,,,,,,,,,,महादेव से प्रार्थना है कि इस मुश्किल वक्त में वो तुम्हे हिम्मत दे और तुम खुश रहो,,,,,,,,,,,,,,अपना ख्याल रखना”
इस खत को पढ़कर पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया क्योकि इस खत से उसे समझ आया कि उस वक्त उस से दूर होने का मलाल अवनि को भी था। पृथ्वी ने अवनि को देखा और मुस्कुरा दिया। जवाब में अवनि भी मुस्कुरा दी। पृथ्वी ने खत समेटकर साइड में रखा और छठा खत उठा लिया।
पृथ्वी ने लिफाफे से खत निकाला और पढ़ने लगा
“प्रिय पृथ्वी !
हर हर महादेव ! आज फिर अपने दिल के हाथो मजबूर होकर मैं तुम्हे ये खत लिख रही हूँ। आज इस खत में कोई शिकायत नहीं है ना ही तुम्हारे लिए कोई सलाह है बल्कि आज इस खत के जरिये मैं तुम्हारा शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ। शुक्रिया इसलिए कि कुछ वक्त के लिए ही सही तुम मेरी जिंदगी में आये और मुझे ये अहसास दिलाया कि मैं कौन हूँ ? हालातों की वजह से लिखना तो जैसे मैं भूल ही चुकी थी लेकिन तुमने हमेशा मुझे ये अहसास दिलाया कि मैं कर सकती हूँ , एक भरोसा जो मुझे खुद पर नहीं था लेकिन तुमने मुझ पर दिखाया।
जो कुछ भी हुआ वो सब हमारी नियति था पृथ्वी लेकिन उस वक्त ने मुझे अब और मजबूत बना दिया है। अब मैं खुद से अपनी जिंदगी के फैसले लेने लगी हूँ , खुद को अहमियत देने लगी हूँ , अपनी ख़ुशी में खुश रहने लगी हूँ , मैंने हर उस याद , हर उस शख्स को अपनी जिंदगी से दूर कर दिया है जो मेरे दुःख की वजह थे। तुम उस वक्त मेरी जिंदगी में आये जब मुझे किसी की सबसे ज्यादा जरूरत थी , जब मैं अपनी जिंदगी के सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी। मैं हमेशा तुम्हारी शुक्रगुजार रहूंगी पृथ्वी और मेरे दिल में हमेशा तुम्हारे लिए एक सम्मान रहेगा।
सच कहू तो बहुत याद करती हूँ तुम्हे , दिन में ना जाने कितनी ही बार अपना मेल चेक करती हूँ इस उम्मीद में की तुम्हारा कोई मेल होगा। जानती हूँ अब कभी हमारी बात नहीं होगी लेकिन ना जाने क्यों मेरा दिल कहता है हम मिलेंगे ? इस जिंदगी में एक बार तो हम जरूर मिलेंगे,,,,,,,,,,,इसी झूठी उम्मीद और इन चंद कभी ना भेजे जाने वाले खतों के सहारे मैं हर दिन गुजार रही हूँ।
नहीं मैं दुखी नहीं हूँ , ना ही उदास हूँ और कमजोर तो बिल्कुल नहीं पड़ी हूँ बल्कि अब मैंने खुद को पहले से मजबूत और बेहतर बनाना शुरू कर दिया है। बस बस कभी सोचती हूँ जैसे मैं तुम्हे याद करती हूँ क्या तुम भी मुझे याद करते होंगे ?”
इस खत को पढ़कर भी पृथ्वी मुस्कुराया। खत को समेटकर अवनि की तरफ देखा और विश्वाश से भरकर कहा,”अवनि ! मैं आज बेशक तुम्हारा पति हूँ लेकिन उस से पहले तुम्हारा एक फैन हूँ जिसे तुम्हारी लिखी किताबे पढ़ना बहुत पसंद है। तुम हमेशा मेरे लिए मेरी पसंदीदा रायटर रहोगी आखिर मुझे तुम तक पहुंचाने वाले तुम्हारे शब्द है , तुमसे मिलने से पहले मैं तुम्हारी सोच , तुम्हारे शब्दों से मिला हूँ। मैं तुम्हे एक बहुत बड़ी रायटर बनते देखना चाहता हूँ और मुझे यकीन है एक दिन ये जरूर होगा”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और हामी में गर्दन हिला दी। पृथ्वी ने सातवां लिफाफा उठाया जिस पर लिखा था “30 जून” तारीख देखकर पृथ्वी को याद आया कि इस दिन तो पृथ्वी का जन्मदिन होता है और हो ना हो अवनि ने ये खत जरूर उसके जन्मदिन पर लिखा है। पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए लिफाफा खोला तो नजर पास ही पड़े खतों पर चली गयी जिनमे “30 जून” की तारीख के साथ एक खत और था। पृथ्वी ने उसे भी उठाया और अवनि की तरफ देखकर कहा,”तुमने एक ही तारीख में दो खत क्यों लिखे ?”
अवनि मुस्कुराई और कहा,”एक ख़त तकलीफदेह है और दूसरे में एक उम्मीद,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी को समझ नहीं आया अवनि ने ऐसा क्यों कहा ? उसने अवनि की तरफ देखा तो अवनि ने कहा,”पहले उस खत को पढ़िए जिसे आपने खोला है”
“हम्म्म”,पृथ्वी ने कहा और दूसरे बंद खत को साइड में रखकर खुले हुए खत को पढ़ने लगा
“प्रिय पृथ्वी !
हर हर महादेव ! रात के 12:10 बज रहे है और मैं तुम्हे ये खत लिख रही हूँ………………………!!!
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संजना किरोड़ीवाल
