Pasandida Aurat Season 3 – 56
प्राची को उदास देखकर पृथ्वी समझ गया कि बीती रात हुए हादसे का प्राची पर बहुत गहरा असर पड़ा है लेकिन साथ ही वह हैरान भी था कि प्राची मिस्टर देसाई को इस बारे में क्यों नहीं बताया ? पृथ्वी अपनी कुर्सी पर आ बैठा और प्राची की लायी फाइल की रिपोर्ट तैयार करने लगा
पृथ्वी के केबिन से निकलकर प्राची भरत के केबिन में चली आयी। पृथ्वी के केबिन को उसने नॉक किया लेकिन भरत के केबिन में वह सीधा चली आयी। भरत परेशान सा अपने केबिन में यहाँ से वहा चक्कर काट रहा था। प्राची को देख रुक गया। प्राची भरत के सामने चली आयी , इस वक्त प्राची के चेहरे पर कठोर भाव थे और वह एकटक बस भरत को देखे जा रही थी। प्राची को अचानक अपने केबिन में देखकर भरत मन ही मन घबरा गया।
भरत को खामोश पाकर प्राची ने कठोर स्वर में कहा,”ये सब क्या है मिस्टर भरत ? हमारी कम्पनी ने शर्मा ग्रुप से 10 लाख में डील की है और उसका कम्पनी में कोई रिकॉर्ड तक नहीं,,,,,,,,,आखिर ये सब चल क्या रहा है ? क्या डेड को इस बारे में पता है ?”
भरत ने सुना तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा , उसे काटो तो खून नहीं ,, वह सोच में पड़ गया कि आखिर प्राची को उस डील के बारे में कैसे पता चला जबकि वह तो देसाई ग्रुप में थी ही नहीं।
“आपको इसके बारे में किसने बताया ?”,भरत ने हिम्मत करके पूछा
“किसने बताया से आपका क्या मतलब है ? क्या आप भूल गए है इस कम्पनी के बैंक डिटेल्स का एक्सेस अभी भी मेरे पास है , कम्पनी में जो जो ट्रांजेक्शन होते है वो सब जानकारी मेरे पास आती है,,,,,,,,,,,,आप भले ही MD की कुर्सी पर बैठते है लेकिन भूलिए मत फैसले अभी भी डेड के हाथ में है। बिना डेड की परमिशन के आप उनके साथ इतनी बड़ी डील कैसे कर सकते है ? और अगर डील हुई है तो उसका रिकॉर्ड कहा है ?”,प्राची ने गुस्से से कहा
भरत बुरी तरह फंस गया , मिस्टर शर्मा ने उसके साथ गेम खेला उन्हें जो डील चाहिए थी वो उन्होंने जयदीप से ले ली और बदले में भरत से 20 लाख रूपये भी और रही सही कसर उन्होंने प्राची को सच बताकर कर दी। भरत चाहता तो यहा हार मान सकता था लेकिन प्राची के सामने वह हार मान ले ऐसा भला कैसे हो
सकता था उसने बेशर्मी से मुस्कुराते हुए कहा,”वो डील पर्सनल थी”
प्राची ने सुना तो चौंककर कहा,”पर्सनल ? मिस्टर भरत भूलिए मत कि आप मेरी कम्पनी के लिए काम करते है , आप देसाई ग्रुप एंड कम्पनी के बस एक एम्प्लॉय है। आप इस कम्पनी के बिजनेस में अपना पर्सनल बिजनेस कैसे कर सकते है ? क्या डेड इस बारे में जानते है ?”
प्राची की इस बात पर भरत चिढ गया और प्राची को घूरकर कहा,”क्या तुम्हारे डेड ये जानते है कि पृथ्वी को मौर्या ग्रुप से निकालने के लिए तुमने मेरे साथ डील की है ?”
प्राची ने सुना तो गुस्से से भरत को देखा और कहा,”वो मेरी भूल थी लेकिन तुम जो कर रहे हो वो सरासर गलत है , तुम डेड को धोखा कैसे दे सकते हो ?”
“वैसे ही जैसे तुमने दिया , अपने फायदे के लिए जैसे तुमने मेरा इस्तेमाल किया ठीक वैसे ही मैंने तुम्हारा इस्तेमाल किया और अगर तुम्हे लगता है कि तुम जाकर ये सब मिस्टर देसाई ने कहोगी और वो मान लेंगे तो भूलो मत तुम्हारा साइन किया हुआ पेपर अभी भी मेरे पास है जिस पर तुमने अपने हिस्से के 60% शेयर्स मेरे नाम कर दिए है”,भरत ने प्राची के सामने अपनी सच्चाई उगलते हुए कहा
प्राची ने जैसे ही सुना उसके पैरों तले जमीन खिसक गयी , तो इसलिए भरत अब तक उसकी मदद कर रहा था ताकि वह इस कम्पनी पर कब्जा कर सके। प्राची गुस्से से भरत के पास आयी और उसकी कोलर अपने दोनों हाथो में पकड़कर गुस्से से कहा,”यू ब्लडी रास्कल ! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये सब करने की ? डेड तुम पर कितना भरोसा करते है और तुम उन्ही की पीठ में छुरा भोंकना चाहते हो,,,,,,,,मैंने उस पेपर पर ऐसा कुछ नहीं लिखा था समझे,,,,,,,,,,,,,!!!!”
भरत ने मुस्कुराते हुए प्राची के हाथो को अपनी कोलर से नीचे किया और बहुत ही शांत स्वर में कहा,”तुमने ऐसा नहीं लिखा लेकिन उस पर तुम्हारे साइन है और वो एक लीगल पेपर है , लीगल पेपर का मतलब जानती हो ना तुम,,,,,,,,,,,इस कम्पनी के 60% शेयर्स अब मेरे नाम है और बाकि 20% तो वो भी मेरी ही तरफ है , बचे 20% तुम्हारे बाप के पास तो अब उसकी मेरे सामने कोई ओकात नहीं , मैं जब चाहू तब उसे लात मारकर इस कम्पनी से बाहर कर सकता हूँ,,,,,,,,,,,बट डोंट वरी तुम चाहो तो मैं तुम्हे और तुम्हारे बाप को यहाँ नौकरी दे सकता हूँ ,
अह्ह्ह्हह तुम यहाँ रिसेप्शन की पोस्ट पर आ सकती हो और तुम्हारे बाप को मैं , उसे मैं गार्ड की जगह रख लूंगा”
भरत की बाते सुनकर प्राची का खून खौल उठा। भरत उसके साथ इतना बड़ा धोखा करेगा उसने कभी नहीं सोचा था। बीती शाम उसने विक्रम का असली चेहरा देखा था और अब भरत की असलियत जानकर प्राची जैसे टूट सी गयी। वह बदहवास सी भरत को देखती रही
भरत ने केबिन में यहाँ वहा घूमते हुए बोलना शुरू किया,”तुम शुरू से ही बेवकूफ थी प्राची ! उस पृथ्वी के चक्कर में पहले तुम अपनी जॉब से हाथ धो बैठी , फिर MD की पोजीशन से और अब अपने शेयर्स से भी ,, अफ़सोस की बात तो ये है कि ना तुम्हे ये कम्पनी मिली और ना ही पृथ्वी,,,,,,,,,,मैं जानता था उसे हासिल करने के लिए तुम कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाओगी क्योकि पृथ्वी की ना को तुमने अपने ईगो पर जो ले लिया था।
तुम्हे उस से प्यार नहीं था , अह हा ! तुम्हे बस उसे हासिल करना था क्योकि अब तक तुम्हारे बाप ने तुम्हारी हर जिद पूरी जो की थी,,,,,,,,,,,,,मौर्या ग्रुप से निकाले जाने के बाद तुम्हे लगा पृथ्वी तुम्हारे पास आ जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ,,,,,,,,,,,,,जितना बेवकूफ तुम उसे समझती हो दरअसल उतना वो है नहीं,,,,,,,,,वो उस से ज्यादा बेवकूफ है ,, मेरे बारे में सब सच जानते हुए भी वो चुप बैठा है,,,,,,,,,,,हाउ स्टुपिड ! वो सच जानकर चुप बैठा है और तुम सच जानकर भी मेरा कुछ नहीं उखाड़ सकती ,
चार दिन बाद ये कम्पनी मेरे नाम हो जाएगी और उसके बाद धक्के मारकर मैं तुम्हे , तुम्हारे बाप को और उस पृथ्वी को बाहर निकलूंगा,,,,,,,,,,,,,,,वैसे तुम चाहो तो जाकर ये सब बातें देसाई को बता सकती हो पर अफ़सोस तुम पहले ही उनसे इतना झूठ बोल चुकी हो कि वो यकीन नहीं करेगा,,,,,,,,,,,!!!”
भरत की बाते सुनकर प्राची का सर फटने लगा , उसे समझ आया कि अपनी बेवकूफी के चलते उसने कितनी बड़ी गलती कर दी है और मिस्टर देसाई को कितनी बड़ी मुसीबत में डाल दिया है। भरत ने ये भी सही कहा कि इस वक्त मिस्टर देसाई प्राची की किसी बात का भरोसा नहीं करेंगे क्योकि अगर प्राची उन्हें सच बताती है तो प्राची को अपनी सच्चाई भी बतानी पड़ेगी और उसके बाद मिस्टर देसाई का भरोसा हमेशा के लिए टूट जाएगा।
प्राची को घबराया और पसीने से लथपथ देखकर भरत ने टेबल पर रखा पानी का गिलास उठाया और प्राची की तरफ बढ़ाकर कहा,”लो पी लो , सच निगलने में आसानी होगी”
प्राची ने पानी का गिलास लिया और एक साँस में आधा गिलास खाली करके गिलास टेबल पर रखकर भरत से कहा,”तुमने ऐसा क्यों किया भरत ? इस कम्पनी को पाने के लिए तुमने इतना बड़ा गेम क्यों खेला ? अपने ही डेड के खिलाफ मेरा इस्तेमाल क्यों किया ?”
आखिरी शब्द कहते कहते प्राची चिल्ला उठी
“क्योकि मैं नफरत करता हूँ तुमसे , दीवाना हो चुका था मेरा बेटा तुम्हारे प्यार में वो भी इतना कि मुझे समझाने चला था , अपने बाप को,,,,,,,,,,,हाह ! तुम मेरे घर की बहू बनो ये मैं कभी नहीं चाहता था। बहुत कहा उसे कि तुम से दूर रहे तुम्हे भूल जाए लेकिन वो भी तुम्हारी तरह जिद पकड़ कर बैठा था ,, तुम्हारे लिए वो अपने बाप के खिलाफ चला गया और तुमने उसके साथ क्या किया ?
तुमने उसे नौकरी से निकाल दिया , उसका दिल तोड़ दिया , उसे मुझसे नफरत करने के लिए मजबूर कर दिया,,,,,,,,,,,,इसलिए तुम से भी बदला लेना चाहता था मैं , जैसे तुमने मेरे बेटे को मुझसे दूर किया वैसे ही तुम्हे भी देसाई की नजरो में गिरा देना चाहता हूँ मैं,,,,,,,,,,,उसके बाद तुम मेरा दर्द समझोगी”,भरत ने गुस्से से भरकर कहा
प्राची ने सुना तो अवाक् खड़ी भरत को देखती रही , भरत किस बेटे की बात कर रहा था प्राची अभी तक नहीं समझ पायी उसने धीरे से कहा,”तुम्हारा बेटा ?”
“हाँ हाँ मेरा बेटा , मेरा इकलौता बेटा नीलेश देशमुख , जो कभी इस कम्पनी में तुम्हारा मैनेजर हुआ करता था,,,,,,,,,!!!!”,भरत ने फिर गुस्से से कहा
अब तो प्राची का सर घूमने लगा , एक के बाद एक सच उसके सामने आ रहा था और वह बस इन सदमो को एक के बाद एक सही जा रही थी। उसे घुटन होने लगी , वह समझ नहीं पा रही थी क्या करे ? क्या कहे ? उसने भरत की तरफ देखा और अपना हाथ उसके सामने करके बदहवास हालत में कहा,”सॉरी , आई ऍम रियली सॉरी”
भरत नहीं समझ पाया प्राची ने उसे सॉरी क्यों कहा वह अभी भी गुस्से से उसे देख रहा था। प्राची धीरे धीरे कदम बढाकर दरवाजे की तरफ बढ़ी और फिर वहा से निकल गयी।
प्राची के जाने के बाद भरत को ये अहसास हुआ कि उसने गुस्से में आकर प्राची के सामने सारी सच्चाई उगल दी है तो उसने झुंझलाकर अपनी टाई ढीली की और कहा,”शिट,,,,,,,,,!!!!
सुरभि का घर , उदयपुर
सिद्धार्थ और सुरभि के घरवाले ख़ुशी ख़ुशी उन दोनों की एक छोटी सी अंगूठी की रस्म करने जा ही रहे थे कि सुरभि ने अपने सामने खड़े सिद्धार्थ का हाथ पकड़ा और उसे वहा से लेकर चली गयी। सुरभि सिद्धार्थ को लेकर ऊपर अपने कमरे में आयी और कमरे का दरवाजा बंद करके सिद्धार्थ की तरफ पलटी तो सिद्धार्थ ने हैरानी से कहा,”ये सब क्या है सुरभि , तुम मुझे सबके बीच से यहाँ क्यों ले आयी ?”
“सिद्धार्थ ! हम ये ठीक नहीं कर रहे”,सुरभि ने बेचैनी भरे स्वर में कहा
“ठीक नहीं कर रहे मतलब ?”,सिद्धार्थ ने हैरानी भरे स्वर में पूछा
“मतलब ये कि हमे ये शादी नहीं करनी चाहिए”,सुरभि ने गंभीर स्वर में कहा
सिद्धार्थ ने सुना तो उसे एक धक्का सा लगा , सब इतना सही होने के बाद सुरभि के मुँह से ये सुनना उसे बहुत अजीब लग रहा था। उसने सुरभि की तरफ देखकर कहा,”ये तुम क्या कह रही हो ? क्या तुम मुझसे शादी करना नहीं चाहती , क्या मैं तुम्हे पसंद नहीं हूँ ?”
“ऐसी कोई वजह नहीं है सिद्धार्थ”,सुरभि ने बैचैन होकर कहा
सिद्धार्थ सुरभि से पीछे हटा और गुस्से से कहा,”अरे तो फिर क्या वजह है ? क्यों नहीं करनी है तुम्हे शादी ? मुझे और मेरे घरवालों को यहाँ बुलाकर क्या अब तुम उनका मजाक बनाना चाहती हो ? अगर तुम्हे सोचने के लिए वक्त चाहिए था तो तुम मुझसे कल कह सकती थी , तुम आज सुबह तक मुझे बोल सकती थी लेकिन अब जब सब नीचे मौजूद है तो तुम कह रही हो हमे ये शादी नहीं करनी चाहिये , कोई सेन्स है इस बात का ?”
सिद्धार्थ को गुस्से में देखकर सुरभि थोड़ा सहम गयी। उसने नम आँखों से सिद्धार्थ को देखा तो सिद्धार्थ उसके उसके पास आया और उसकी बांहो को थामकर उसकी आँखों में देखते हुए कहा,”मुझे बताओ सुरभि आखिर बात क्या है ? क्यों तुमने एकदम से ये कहा कि हमे शादी नहीं करनी चाहिए”
“क्योकि मैं अवनि को धोखा देना नहीं चाहती”,सुरभि ने रोआँसा होकर कहा
सिद्धार्थ ने सुना तो सुरभि की बाँहो को छोड़कर पीछे हटा और कहा,”अवनि कहा से बीच में आ गयी ?”
सुरभि ने सिद्धार्थ की तरफ देखा और कहा,”अवनि मेरी बेस्ट फ्रेंड है और मुझसे पहले तुम उसके साथ रिश्ते में थे।अब उसके सामने मैं तुमसे शादी करुँगी तो ये उसके साथ धोखा नहीं तो और क्या है ? कल जब उसे तुम्हारे बारे में बताया तब कितना गिल्ट महसूस हो रहा था मुझे ये सोचकर कि वो मेरे बारे में क्या सोच रही होगी ? जिस लड़के से मैंने हमेशा उसे दूर रहने को कहा आज उसी लड़के से मैं प्यार करती हूँ ये बात कहते हुए अवनि से कैसे नजर मिलाऊ मैं,,,,,,,,,मुझे अंदर ही अंदर ये बात खाये जा रही है कि मैंने उसे धोखा दिया , मैंने उसे कभी तुम्हारे बारे में नहीं बताया,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
कहते कहते सुरभि रो पड़ी। सिद्धार्थ ने सुना तो उसे समझ आया कि सुरभि इस बारे में कुछ ज्यादा ही सोच रही है और इसलिए वह गिल्ट में है जबकि वह अवनि को बहुत अच्छे से जानता था ! अवनि अपनी जिंदगी में खुश है और उसे इस बात कोई फर्क नहीं पड़ेगा,,,,,,,,,!!”
सिद्धार्थ सुरभि के पास आया और कहा,”सुरभि ! ऐसा कुछ नहीं है , अवनि अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश है। उसके दिल में मेरे लिए या मेरे दिल में उसके लिए कोई फीलिंग्स नहीं है। वो मेरे साथ रिश्ते में थी मैंने उसका प्यार नहीं समझा उसे अहमियत नहीं दी इसमें तुम्हारी क्या गलती है ? तुम खुद को दोष क्यों दे रही हो ? जरुरी नहीं है सुरभि जो भावनाये आज तुम्हारे लिए है वो किसी और के लिए भी हो,.,,,,,,,,,,,,,,,मैं और अवनि एक दूसरे के लिए नहीं बने थे। और वो तुम्हे गलत क्यों समझेगी ?
सबको अपना प्यार चुनने का हक़ है , अपनी जिंदगी के फैसले लेने का हक़ है , अवनि अपनी जिंदगी में एक बेहतर फैसला ले चुकी है और अब ये तुम्हारी जिंदगी है इसका फैसला लेने का हक़ भी तुम्हे है,,,,,,,,,,!!!!”
“वो मुझे गलत समझेगी सिद्धार्थ”,सुरभि ने रोते हुए कहा
सिद्धार्थ ख़ामोशी से सुरभि को देखने लगा , वह सुरभि की भावनाये भी समझ रहा था क्योकि उसने अवनि और सुरभि को हमेशा अच्छे दोस्तों के रूप में साथ साथ देखा था।
“तुम्हारा फोन दो”,सिद्धार्थ ने कहा
सुरभि ने बिस्तर पर पड़े अपने फोन की तरफ इशारा कर दिया तो सिद्धार्थ ने फोन उठाया और अवनि का नंबर डॉयल करके फोन स्पीकर पर डाल दिया। जैसे जैसे रिंग जा रही थी सुरभि का दिल धड़क रहा था। दो चार रिंग के बाद अवनि ने फोन उठाया और उसकी खुशी भरी आवाज गुंजी,”हेलो सुरभि ! अच्छा हुआ तुमने फोन किया , मैं तुम्हे फोन करने का सोच ही रही थी”
अवनि की आवाज सुनकर ये कही से भी नहीं लग रहा था कि वह सुरभि से गुस्सा है या नाराज है।
“हेलो अवनि ! मैं बोल रहा हूँ , सिद्धार्थ”,सुरभि की जगह सिद्धार्थ ने कहा
“सिद्धार्थ , तुम , अह्ह्ह्ह सब ठीक तो है ? सुरभि कहा है ?”,अवनि ने कहा इस बार उसकी आवाज में ख़ुशी कम और हैरानी ज्यादा थी
“सुरभि मेरे सामने खड़ी है , मैं उदयपुर में हूँ सुरभि के घर , मेरी और सुरभि की पूरी फॅमिली नीचे है और वे लोग हमारे रिश्ते के लिए मान गए है लेकिन सुरभि को लगता है कि मुझसे शादी करके ये तुम्हे धोखा दे रही है”,सिद्धार्थ ने बिना लाग लपट के अपनी बात सीधा अवनि के सामने रख दी
“ये लड़की सच में पागल है,,,,,,,,,,,ज़रा उसे फोन दो”,अवनि ने कहा
सिद्धार्थ ने स्पीकर बंद किया और फोन सुरभि की तरफ बढ़ा दिया। सुरभि ने फोन कान से लगाया और रोआँसा होकर कहा,”हेल्लो,,,,,,,,,!!!”
“सुरभि ! गेल्सप्पी झालर ,, मुझसे कहती हो मैं बहुत सोचती हूँ और खुद को देखो , खुद क्या कर रही हो ? तुमने ये कैसे सोच लिया सिद्धार्थ से शादी करके तुम मुझे धोखा दे रही हो,,,,,,,,,,,,,हाँ मैं तुम से नाराज हूँ क्योकि मेरी इकलौती दोस्त होकर तुमने मुझसे ये बात छुपाई लेकिन तुमने ये कैसे सोच लिया कि तुम्हारी इतनी बड़ी ख़ुशी में मैं खुश नहीं होउंगी,,,,,,,,,देखो सुरभि ! सिद्धार्थ को चुनना मेरा एक गलत फैसला था दरअसल हम दोनों एक दूसरे के लिए बने ही नहीं थे लेकिन तुम दोनों ने एक दूसरे को चुना है इसलिए तुम मेरे या किसी के बारे में मत सोचो,,,,,,,,,,,,,,,
सिद्धार्थ बदल गया है , वो सच में तुम्हे चाहता है तुम उसके साथ खुश रहोगी सुरभि,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
अवनि की बाते सुनकर सुरभि का मन एकदम से हल्का हो गया , उसकी आँखों में ठहरे आँसू गालों पर बह गए और उसने धीरे से कहा,”थैंक्यू अवनि ! थैंक्यू सो मच,,,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि मुस्कुराई और कहा,”सुरभि ! मर्द सिर्फ अपनी पसंदीदा औरत के लिए खुद को बदलता है,,,,,,,,,,और सिद्धार्थ की पसंदीदा औरत तुम हो,,,,,,,,कॉन्ग्रैचुलेशन”
सुरभि ने सुना तो उसकी नजर सामने खड़े सिद्धार्थ पर चली गयी जो अपने हाथो को बांधे बड़े प्यार से सुरभि को देख रहा था।
( विक्रम की सच्चाई के बाद क्या प्राची सह पायेगी भरत के रूप में ये नया सदमा ? क्या कल हो जाएगा भरत का सपना पूरा या आ जाएगा उसका सच मिस्टर देसाई के सामने ? क्या अवनि ने सच में कर दिया है सुरभि और सिद्धार्थ को माफ़ ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
