Pasandida Aurat Season 3 – 55
सुरभि का घर , उदयपुर
सुबह सुबह सुरभि का घर शोर शराबे से गूंज रहा था। आज सिद्धार्थ अपने मम्मी पापा के साथ सुरभि के घर आने वाला था और उसी की तैयारी चल रही थी। सुरभि के कुछ रिश्तेदार भी आये थे और कुछ नाराज होकर अपने घर में बैठे थे। सुबह से सब किसी ना किसी काम में लगे थे और सुरभि उदास सी अपने कमरे में बिस्तर पर बैठी थी। अवनि सुरभि की इकलौती दोस्त थी और आज वही उसके साथ नहीं थी। सुरभि ने अवनि को सच बताया लेकिन बहुत देर से बताया और यही बात अवनि का दिल दुखाने के लिए काफी थी।
सुरभि अच्छे से समझती थी कि अवनि की नाराजगी जायज है , बेस्ट फ्रेंड होकर अवनि ने सुरभि से इतनी बड़ी बात छुपाई जबकि सुरभि के सामने अवनि एक खुली किताब थी। अवनि के साथ बिठाये पल सुरभि की आँखों के सामने आने लगे। अवनि के साथ कॉलेज जाना , अवनि का हाथ थामकर घूमना , उसे परेशान करना , अवनि के कमजोर पलों में उसके साथ मजबूती से खड़े रहना , साथ मिलकर हँसना मुस्कुराना ,
सब सुरभि की आँखों के सामने किसी फिल्म की तरह चलने लगा। सुरभि की आँखों में आँसू भर आये , इस वक्त उसे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा। सुरभि ने अपना सर झुका लिया और आँखों में भरे आँसू आँखों से बहकर फर्श पर जा गिरे।
सुरभि सर झुकाये बैठी थी , सुरभि की मामी अंदर आयी देखा सुरभि सर झुकाये बैठी है तो उसकी तरफ आते हुए कहा,”लो ! नीचे सब लोग जमा है और लड़के वालों के आने की राह देख रहे है और तुम यहाँ ये पजामा टीशर्ट में बैठी हो , चलो उठो ! जाकर नहा लो और तैयार हो जाओ , लड़के वाले आते ही होंगे”
सुरभि ने सुना तो अपना सर उठाया और मामी की तरफ देखा लेकिन उदासी उसके चेहरे पर जैसे जम सी गयी। मामी ने बिस्तर पर पड़ी कम्बल समेटते हुए सुरभि की तरफ देखा तो उसे उदास देखकर उसके पास चली आयी।
“क्या हुआ सुरभि , तुम इतनी उदास क्यों हो ? आज तो ख़ुशी का दिन है ,, तुमने जिस लड़के को पसंद किया है घरवाले उसके लिए ख़ुशी ख़ुशी मान गए है फिर तुम्हारी आँखों में ये आँसू किसलिए ?”,सुरभि की मामी ने प्यार से पूछा
सुरभि ने नम आँखों से उन्हें देखा और कहा,”कुछ नहीं मामी बस मुझे मेरी दोस्त अवनि की याद आ गयी”
मामी अवनि को जानती थी इसलिए कहा,”पगली ! वो इस वक्त तुम से बहुत है , यहाँ उदयपुर में होती तो सबसे पहले आती पर देखना तुम्हारी सगाई में वो जरूर आएगी और जब उसे पता चलेगा तुम अपनी पसंद के लड़के से शादी कर रही हो तो वो बहुत खुश होगी”
सुरभि ने सुना तो उसके दिल में एक चुभन का अहसास हुआ फिर भी उसने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए हामी में गर्दन हिला दी।
मामी ने प्यार से अवनि के गाल को छुआ और उसे छेड़ते हुए कहा,”अब तुम जल्दी से तैयार हो जाओ , तुम्हारे वो आते ही होंगे”
सुरभि ने सुना तो उठी और शरमा कर कबर्ड के सामने चली आयी और कपडे लेकर नहाने चली गयी। मामी भी मुस्कुराई और वहा से चली गयी।
सिद्धार्थ की गाडी सुरभि के घर के बाहर आकर रुकी। गाडी से जगदीश जी , सिद्धार्थ , सिद्धार्थ का चाचा , सिद्धार्थ की भुआ और फूफा नीचे उतरे। गिरिजा जी के पैर में प्लास्टर था इसलिए वे साथ नहीं आयी और घर पर ही रुक गयी। उनकी देखभाल के लिए भुआ की लड़की उनके पास रुक गयी। सुरभि के पापा और सभी घरवाले उनके स्वागत के लिए दरवाजे पर चले आये और सबसे नमस्ते कर अंदर ले आये।
सभी अंदर हॉल में आ बैठे , सिद्धार्थ की नजरे तो बस सुरभि को ढूंढ रही थी। सिद्धार्थ ने सुरभि के पापा से अपने सभी घरवालों का परिचय करवाया , सुरभि के पापा सबसे मिले , हाल चाल पूछा और देखा सिद्धार्थ की मम्मी नहीं आयी है तो पूछ लिया,”बेटा आपकी माताजी नहीं आयी ?”
सिद्धार्थ से पहले जगदीश जी ने जवाब दिया,”जी वो नहीं आ सकी , गिरने की वजह से उनके पैर में चोट लग गयी इसलिए 15 दिन का प्लास्टर करवाना पड़ा। अभी रेस्ट पर है,,,,,,,,,,,,,!!!”
“ओह्ह्ह अच्छा ! कोई बात नहीं आप लोगो से मिलकर भी ख़ुशी हुई”,सुरभि के पापा ने कहा और फिर सभी चाय नाश्ता करने लगे। चाय नाश्ते के बाद सुरभि और सिद्धार्थ की शादी को लेकर कुछ बाते हुई , जगदीश जी ने सुरभि के पापा से कुछ भी लेने से साफ़ इंकार कर दिया और यहाँ सुरभि के पापा सिद्धार्थ से भी ज्यादा जगदीश जी से प्रभावित हुए।
सिद्धार्थ को बार बार बेचैनी से इधर उधर देखते पाकर सुरभि के पापा ने अपनी पत्नी से कहा,”ज़रा सुरभि को बुला दो”
“हाँ मैं अभी बुलाऊ”,वही हॉल में पास ही खड़ी सुरभि की मम्मी ने कहा और वहा से चली गयी। कुछ देर बाद लाल बॉर्डर से बनी पीले रंग की साड़ी पहने सुरभि हॉल में सबके बीच चली आयी। सिद्धार्थ आज पहली बार सुरभि को साड़ी में देख रहा था और उस पर आज पहली बार सुरभि के चेहरे पर शर्म की लाली भी थी। सुरभि ने अपनी पलकें झुका रखी थी ! वह आकर सिद्धार्थ के ठीक सामने अपने पापा के बगल में बैठ गयी।
सिद्धार्थ एकटक सुरभि को देखता रहा लेकिन सुरभि ने अपनी पलकें नहीं उठायी और अपने हाथो की उंगलियों को आपसे में तोड़ती मरोड़ती रही ये देखकर सिद्धार्थ समझ गया कि सुरभि थोड़ा नर्वस है। वह सबके बीच बैठा था इसलिए सुरभि से बात भी नहीं कर सकता था। दोनों परिवार वाले आपसे में बाते करने लगे। जगदीश जी तो सुरभि से पहले ही मिल चुके थे इसलिए उन्होंने सुरभि से कुछ नहीं पूछा , सिद्धार्थ के चाचा और भुआ ने सुरभि से कुछ बाते की और फिर इस रिश्ते के लिए मान गए।
सुरभि के घरवाले तो बहुत खुश थे और सिद्धार्थ के घरवाले भी इस रिश्ते से खुश थे। सुरभि के पापा ने देखा सभी इस रिश्ते से खुश है तो उन्होंने जगदीश जी से कहा,”भाईसाहब ! अब जब बच्चे एक दूसरे को पसंद करते है और हमे भी इस रिश्ते से कोई ऐतराज नहीं तो क्यों ना अंगूठी की एक छोटी सी रस्म कर ली जाए”
जगदीश जी ने सुना तो सिद्धार्थ की तरफ देखा और कहा,”क्यों सिद्धू , तुम क्या कहते हो ?”
“जैसा आपको ठीक लगे पापा”,सिद्धार्थ ने शरमा कर कहा
सिद्धार्थ को शर्माते देखकर सुरभि के घरवाले हंस पड़े और उनके साथ ही सिद्धार्थ के घरवाले भी , जगदीश जी ने अपनी सहमति दे दी तो सुरभि के पापा ने पंडित जी को बुला लिया जो उनके घर के पास ही रहते थे। अंगूठियों का इंतजाम भी सुरभि के पापा ने ही किया क्योकि ऐसे अचानक जगदीश जी तो अंगूठी लेने कहा जाते।
हॉल में ही सभी जमा हो गए और वही अंगूठी पहनाने और शगुन देने की तैयारी होने लगी , इस बीच सुरभि और सिद्धार्थ को एक दूसरे से बात करने का मौका तक नहीं मिला। सिद्धार्थ खुश था लेकिन सुरभि के चेहरे पर ना जाने क्यों परेशानी के भाव थे लेकिन वह खामोश रही। पंडित जी के कहने पर सिद्धार्थ और सुरभि सबके बीच आ बैठे और दोनों के घरवालो में दोनों को तिलक देकर शगुन किया।
पंडित जी ने दोनों को खड़े होकर एक दूसरे को अंगूठी पहनाने को कहा। सुरभि और सिद्धार्थ आमने सामने खड़े थे , सिद्धार्थ ने प्लेट से अंगूठी उठायी और जैसे ही सुरभि को पहनाने लगा सुरभि ने एकदम से सिद्धार्थ की कलाई पकड़ी और सबकी बीच से उसे ले गयी ! सब हैरानी से सुरभि को देखते रह गए खुद सिद्धार्थ भी,,,,,,,,,,,,,,,!!!
पृथ्वी घर से निकल गया और अवनि भी अंदर आकर अपना काम करने लगी। पृथ्वी स्टेशन चला आया और नीलेश को फोन लगाया , ऑफिस जाने से पहले वह नीलेश से मिलना चाहता था ताकि जान सके बीती रात क्या हुआ ? रिंग जाती रही लेकिन नीलेश ने फोन नहीं उठाया , पृथ्वी ने एक बार फिर ट्राय किया लेकिन नीलेश ने इस बार भी फोन नहीं उठाया। ट्रेन आ चुकी थी इसलिए पृथ्वी ने फोन जेब में रखा और ट्रेन में चढ़ गया।
पृथ्वी देसाई ग्रुप पहुंचा और चलते चलते सामने से आते भरत से टकरा गया। भरत को अपने सामने देखकर पृथ्वी के चेहरे पर कोई भाव नहीं आये वह शांत था लेकिन पृथ्वी को देखते ही भरत की भँवे तन गयी और उन्होंने दबे स्वर में कहा,”जिस स्पीड में तुम जा रहे हो याद रखना बहुत जल्दी बिखरने वाले हो”
पृथ्वी से कोई उलटी बात करे और वह जवाब ना दे ऐसा भला कैसे हो सकता था , उसने भरत की आँखों में देखा और कड़क स्वर में कहा,”बिखरने का डर उन्हें होता है जो पत्थर से बने होते है , जो मेहनत की आग में तराशे गए है उन्हें नहीं,,,,,!!!”
पृथ्वी का जवाब सुनकर भरत के सीने पर जैसे सांप लौट गए उसने पृथ्वी को घुरा और वहा से चला गया। पृथ्वी भी सीधा मिस्टर देसाई के केबिन में चला आया और अपनी कुर्सी पर बैठे मिस्टर देसाई को देखकर कहा,”गुड मॉर्निंग सर,,,,,,,,,,,!!!”
मिस्टर देसाई प्राची को लेकर किसी गहरी सोच में डूबे थे , उन्होंने पृथ्वी के गुड मॉर्निंग का कोई जवाब नहीं दिया ये देखकर पृथ्वी उनके सामने आया और कहा,”सर , सर , क्या आप ठीक है ?”
पृथ्वी की आवाज से मिस्टर देसाई की तंद्रा टूटी , उन्होंने देखा सामने पृथ्वी खड़ा है तो उन्होंने कहा,”ओह्ह पृथ्वी ! अच्छा हुआ तुम आ गए , कल शाम तुम प्राची को लेने फार्म हॉउस गए थे फिर रात में प्राची को घर छोड़कर मुझसे मिले बिना ही वापस चले गए , इज एवरीथिंग ओके ? क्या प्राची ने तुम से फिर से कोई बदतमीजी की थी ? देखो वो लड़की थोड़ी पागल है और जिद्दी भी है अगर उसने ऐसा कुछ किया है तो मैं तुमसे माफ़ी मांगता हूँ”
पृथ्वी ने सुना तो मन ही मन उसे राहत मिली कि नीलेश ने सही सलामत प्राची को घर पहुंचा दिया लेकिन साथ ही मिस्टर देसाई की बातो ने उसे उलझन में भी डाल दिया और उसने कहा,”नहीं सर ! आपको मुझसे माफ़ी मांगने की जरूरत नहीं है,,,,,,,,,मैं बाहर से ही चला गया क्योकि मुझे एक जरुरी फोन आ गया था , प्राची ने आपसे कुछ कहा क्या ?”
“नहीं उसने कुछ नहीं कहा लेकिन कल उसका बर्ताव कुछ अजीब सा था , वह थोड़ी डरी हुई थी और परेशान भी थी,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने सोचते हुए कहा और फिर पृथ्वी की तरफ देखकर एकदम से पूछा,”पृथ्वी ! क्या विक्रम के फार्म हॉउस पर कुछ हुआ था ?”
पृथ्वी मिस्टर देसाई के इस सवाल का भला क्या जवाब देता ? वह तो कल फार्म हॉउस गया ही नहीं था ना ये जानता था कि असल में वहा हुआ क्या ?
मिस्टर देसाई पृथ्वी के जवाब के इंतजार कर रहे थे , पृथ्वी ने उनकी तरफ देखा और जैसे ही कुछ कहने को हुआ केबिन का दरवाजा खुला और प्राची अंदर चली आयी। प्राची को देखकर मिस्टर देसाई ने पृथ्वी से कुछ ना बोलने का इशारा किया।
“गुड मॉर्निंग डेड”,प्राची ने कुर्सी खिसकाकर उस पर बैठते हुए कहा और फिर पृथ्वी की तरफ देखकर कहा,”गुड मॉर्निंग मिस्टर उपाध्याय”
“गुड मॉर्निंग मेम”,पृथ्वी ने सहजता से कहा
“अह्ह्ह पृथ्वी ! क्या तुम मुझे मिस्टर शर्मा के नए प्रोजेक्ट की फाइल दे सकते हो ? एक्चुली कल शाम उनके साथ हमारी फाइनल मीटिंग है उस से पहले मैं एक बारे सारे पेपर्स देखना चाहती हूँ”,प्राची ने अपने सामने पड़े लेपटॉप को चालू करते हुए कहा
प्राची को इतना शांत देखकर और मिस्टर देसाई की बाते सुनकर पृथ्वी उलझन में पड़ गया , अब तो उसके लिए नीलेश से मिलना और भी ज्यादा जरुरी हो गया था।
उसने प्राची से कहा,”वो फाइल लीगल डिपार्टमेंट के पास है मैं आपको भिजवा दूंगा”
“हम्म्म थैंक्यू”,प्राची ने पृथ्वी से कहा और अपने लेपटॉप को मिस्टर देसाई की तरफ घुमाकर कहा,”डेड ! ये कल की मीटिंग की प्रेजेंटेशन है , आप एक बार चेक कर लीजिये मैं तब तक मिस्टर भरत से मिलकर आती हूँ”
प्राची उठी और वहा से चली गयी। पृथ्वी भी फाइल लेने लीगल डिपार्टमेंट चला गया। पृथ्वी ने वहा से फाइल ली और अपने केबिन में चला आया , पृथ्वी को आज अचानक से प्राची का बर्ताव काफी बदला बदला सा लगा। फार्म हॉउस पर क्या हुआ था जानने के लिए पृथ्वी ने नीलेश को फोन लगाया , इस बार पृथ्वी की किस्मत अच्छी थी इसलिए नीलेश ने फोन उठा लिया।
“हेलो ! नीलेश कहा हो तुम और मेरा फोन क्यों नहीं उठा रहे ?”,पृथ्वी ने कहा
“मैं विक्रम के फार्म हॉउस पर हूँ”,नीलेश ने कहा
“फार्म हॉउस ? तुम वहा क्या कर रहे हो ?”,पृथ्वी ने चौंककर कहा
“जिसने गलती की है उसे सजा दिलवाना भी तो जरुरी है”,नीलेश ने कहा
“नीलेश ये पहेलियाँ बुझाना बंद करो और बताओ तुम वहा क्या कर रहे हो ? मैंने तुम्हे कल प्राची को लेने फार्म हॉउस भेजा था , वहा कुछ हुआ था क्या ?”,पृथ्वी ने इस बार थोड़ा गुस्से से कहा
नीलेश ने एक गहरी साँस ली और पृथ्वी को सारी बातें बता दी जिन्हे सुनकर पृथ्वी के चेहरे पर गुस्से के भाव झिलमिलाने लगे। विक्रम की बदनीयत पृथ्वी पहले से ही जानता था इसलिए उसने नीलेश को वहा भेजा ,
नीलेश की बात सुनकर उसने गुस्से से कहा,”मैं जानता था वो कमीना एक दिन अपना असली रंग जरूर दिखायेगा लेकिन प्राची , प्राची इतनी डम्ब कैसे हो सकती है ? वो उस पर भरोसा करके अकेले वहा कैसे जा सकती है ? कल अगर उसके साथ कुछ हो जाता तो,,,,!!!”
“तुम्हे प्राची के लिए बुरा लग रहा है ?”,नीलेश ने शांत स्वर में कहा
“नीलेश ! उसकी हरकतों की वजह से मैं उसे बिल्कुल पसंद नहीं करता लेकिन वो एक अच्छी लड़की है , मैं कभी नहीं चाहूंगा उसके साथ कुछ गलत हो,,,,,,,,,,,थैंक्स ! तुमने वक्त पर पहुंचकर उसे बचा लिया”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में कहा
“तुम विक्रम की असलियत जानते थे ना ? तुमने जान बुझकर मुझे वहा भेजा,,,,,,,,,,,,,,,क्यों ?”,नीलेश ने पूछा
पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और फिर कहा,”क्योकि मैं चाहता था प्राची तुम्हारी आँखों में अपने लिए वो प्यार देखे जो मैंने तुम्हारी आँखों में देखा था,,,,,,मर्द सिर्फ अपनी पसंदीदा औरत के लिए खुद को बदलता है,,,,,,,,और तुम्हारे लिए वो प्राची है”
पृथ्वी के मुँह से सच सुनकर नीलेश खामोश हो गया और कहा,”हमे जल्दी ही इन सब का सच मिस्टर देसाई के सामने लाना होगा”
“कल का दिन इस कम्पनी में मिस्टर भरत का आखरी दिन होगा”,पृथ्वी ने कठोर स्वर में कहा
“हम्म्म , मैं रखता हूँ”,कहकर नीलेश ने फोन काट दिया और पृथ्वी ने भी अपना फोन सामने टेबल पर रखकर सर सीट से लगा लिया।
पृथ्वी कल के बारे में सोच ही रहा था कि तभी किसी ने उसके केबिन का दरवाजा खटखटाया
“यस कम इन”,पृथ्वी ने सीधे बैठते हुए कहा
केबिन का दरवाजा खुला और प्राची अंदर आयी , उसके हाथ में एक फाइल थी उसने वह पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”मुझे इस फाइल की रिपोर्ट चाहिए , डेड ने कल ऑफिस के सभी शेयर्स होल्डर्स और स्टाफ को लेकर एक बड़ी मीटिंग रखी है,,,,,,ये उसी से जुडी है”
पृथ्वी ने देखा ये सब कहते हुए प्राची के चेहरे पर उदासी के भाव है और उसकी नजरे झुकी हुई है ! आज ना उसके चेहरे पर कोई रौनक थी ना ही आँखों में पृथ्वी के लिए चमक , बाकी दिनों के बजाय वह आज काफी सुस्त और मायूस लग रही थी। पृथ्वी ने फाइल लेकर टेबल पर रखी और कहा,”मैं कर दूंगा”
“थैंक्यू,,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने कहा और दरवाजे की तरफ बढ़ गयी
“प्राची,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने प्राची को आवाज दी
प्राची रुकी और पलटकर पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी ने कहा,”क्या तुम ठीक हो ?”
प्राची फीका सा मुस्कुराई और हामी में गर्दन हिलाकर वहा से चली गयी पर पृथ्वी जानता था कि वह ठीक नहीं है,,,,,,,,,,,,,,,,उस हादसे के बाद वह ठीक हो ही नहीं सकती।
( क्या सुरभि कर देगी सिद्धार्थ और अपनी सगाई से इंकार ? क्या कल की मीटिंग में सबके सामने आने वाला है भरत का असली चेहरा ? क्या प्राची के लिए जाग रहे है पृथ्वी के मन में हमदर्दी के भाव ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55
Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55Pasandida Aurat Season 3 – 55
Continue With Pasandida Aurat Season 3 – 56
Read pasandida aurat sanjana kirodiwal
Follow Me On https://www.instagram.com/sanjanakirodiwal/
संजना किरोड़ीवाल
