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Pasandida Aurat Season 3 – 54

Pasandida Aurat Season 3 – 54

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

अवनि पृथ्वी के साथ हॉल में चली आयी। उसने पृथ्वी से बैठने को कहा और खुद उसके और अपने लिए खाना ले आयी। अवनि ने दोनों प्लेट टेबल पर रखी तो पृथ्वी ने दोनों प्लेट का खाना एक प्लेट में किया और कहा,”हम दोनों एक प्लेट से भी खा सकते है”
“उस से क्या होगा ?”,अवनि ने पूछा
“तुम्हे एक प्लेट कम धोनी पड़ेगी”,पृथ्वी ने चावल में दाल मिक्स करके एक निवाला बनाते हुए कहा

“लेकिन आज के बर्तन तो आप धोने वाले है”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी मुस्कुरा उठा और निवाला अवनि की तरफ बढ़ा दिया। खाने का पहला निवाला वह हमेशा अवनि को खिलाता था उसके बाद खुद खाता। अवनि ने खाया और फिर पृथ्वी खुद खाने लगा। दोनों बातें करते हुए खाना खाने लगे और पृथ्वी ने अवनि को जयदीप का ऑफिस छोड़ने से लेकर देसाई ग्रुप ज्वाइन करने तक की सारी बाते अवनि को बताई जिस से अवनि के मन में उसे लेकर कोई उलझन ना रहे।

खाना खाकर आज के बर्तन पृथ्वी ने धोये और फिर अवनि के साथ वाक पर निकल गया। उसे अवनि के साथ थोडा वक्त बिताना था।

विक्रम का फार्म हाउस , मुंबई  
नीलेश ने सही वक्त पर पहुंचकर प्राची की इज्जत बचा ली , प्राची ने कभी सोचा नहीं था कि विक्रम इतना घटिया इंसान निकलेगा और इस हद तक गिर जाएगा। नीलेश के साथ चलते हुए प्राची ने पहली बार उसे ध्यान से देखा। उसे नीलेश के साथ किये बर्ताव का बहुत पछतावा हो रहा था। नीलेश प्राची को लेकर गाड़ी के पास पहुंचा और प्राची के लिए दरवाजा खोल दिया।

“मेरी गाडी यही है,,,,,,,,,,,!!”,प्राची ने नीलेश और अपने बीच फैली ख़ामोशी को तोड़कर कहा
“कोई बात नहीं मैं कल सुबह आकर उसे ले जाऊंगा”,नीलेश ने नजरे झुकाकर कहा
“मैं अब ठीक हूँ , मैं घर चली जाउंगी”,प्राची ने कहा
नीलेश ने नजरे उठाकर प्राची को देखा और कहा,”लेकिन इस वक्त मैं आपको अकेला नहीं छोड़ सकता , एक बार छोड़ के देख चुका हूँ”


आखरी कुछ शब्द नीलेश ने धीरे से कहे जिन्हे प्राची ने सुन लिया लेकिन फिर भी अनजान बनकर कहा,”तुमने कुछ कहा ?”
“क्या मैं आपको घर तक छोड़ दू ? प्लीज”,नीलेश ने बिना किसी भाव के कहा
प्राची आज नीलेश को मना नहीं कर पायी और अपने कंधो से कोट उतारकर नीलेश की तरफ बढ़ाकर हामी में गर्दन हिला दी। नीलेश ने कोट लेकर पिछली सीट पर रख दिया और प्राची के अंदर बैठने के बाद गाडी का दरवाजा बंद करके खुद ड्राइवर सीट पर आ बैठा।

प्राची खामोश थी , विक्रम ने जो किया उसका असर उसके चेहरे पर अब भी साफ नजर आ रहा था। नीलेश सब समझ रहा था लेकिन इस वक्त प्राची से इस बारे में बात करके वह उसे और असहज करना नहीं चाहता था इसलिए चुपचाप सीट बेल्ट लगाया , गाडी स्टार्ट की और फार्म हॉउस से निकल गया।

रास्तेभर प्राची उदास सी खिड़की से बाहर देखती रही , उसकी आँखों के सामने विक्रम का घिनौना चेहरा आता रहा। उसे खुद पर ही गुस्सा आ रहा था कि पृथ्वी को हासिल करने के लिए उसने विक्रम जैसे घटिया इंसान पर भरोसा कैसे कर लिया ? नीलेश गाडी चलाते हुए बीच बीच में प्राची को देख लेता लेकिन प्राची से बात करने या कुछ भी कहने की हिम्मत उस में नहीं थी। नीलेश मन ही मन पृथ्वी का शुक्रिया अदा कर रहा था जिसने उसे फार्म हॉउस भेजा , शायद पृथ्वी जानता था कि वहा जरूर ऐसा कुछ होने वाला है।

गाड़ी देसाई मेंशन्स के बाहर आकर रुकी , प्राची अपने ही ख्यालो में कही खोयी हुई थी। उसे पता ही नहीं चला कि गाड़ी पिछले 5 मिनिट से घर के बाहर खड़ी है। नीलेश ख़ामोशी से प्राची को देखता रहा , प्राची के चेहरे की उदासी ना जाने क्यों उसे बैचैन कर रही थी ?
“मैडम,,,,,,,!!!”,नीलेश ने धीरे से कहा तो प्राची की तन्द्रा टूटी , उसने नीलेश की तरफ देखा तो नीलेश ने आगे कहा,”घर आ गया है”

प्राची ने बाहर देखा तो उसे अहसास हुआ कि गाड़ी घर के बाहर रुकी है। उसने नीलेश की तरफ देखा और धीरे से कहा,”थैंक्यू,,,,,,,,,आज अगर तुम वक्त पर नहीं आते तो,,,,,,,,,,,,,,,,हाह,,,,,,,,,,,,,,,मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया है नीलेश , उस दिन मैं तुम्हारे साथ बहुत बुरा पेश आयी मुझे माफ़ कर देना प्लीज”
“जो हुआ उसे भूल जाईये , मैं भी भूल चुका,,,,,,,,,आप घर जाईये”, नीलेश ने कहा , वह प्राची से बहुत कुछ कहना चाहता था लेकिन इस वक्त उसे शब्द नहीं मिल रहे थे।

प्राची ने हामी में गर्दन हिलायी और गाड़ी का दरवाजा खोलकर नीचे उतर गयी। वह अंदर जाने लगी तो नीलेश गाड़ी से बाहर आया और प्राची से कहा,”मैडम,,,,,,,,,!!!”
प्राची रुकी और पलटकर नीलेश की तरफ देखा तो नीलेश प्राची के सामने आया और गाड़ी की चाबी उसकी तरफ बढाकर कहा,”ये चाबी मिस्टर देसाई की गाड़ी की है आप उन्हें दे दीजियेगा एंड बी स्ट्रांग , अपना ख्याल रखना”
प्राची ने सुना तो ख़ामोशी से एकटक नीलेश को देखने लगी और फिर हामी में गर्दन हिलाकर वहा से चली गयी।
नीलेश भी पैदल ही वहा से निकल गया। सड़क किनारे आकर उसने टेक्सी ली और वहा से निकल गया।  

प्राची घर के अंदर चली आयी। मिस्टर देसाई हॉल में बैठे प्राची का ही इन्तजार कर रहे थे। उन्होंने प्राची को देखा तो उठकर जल्दी से उसके पास आये लेकिन प्राची की हालत देख किसी अनहोनी के डर से मिस्टर देसाई का दिल धड़क उठा और उन्होंने कहा,”प्राची ! क्या हुआ है तुम्हे , तुम ठीक हो न बेटा ? तुम विक्रम के फार्म हॉउस गयी थी मैंने तुम्हे और विक्रम को कितने फोन किये लेकिन तुम दोनों का ही फोन नहीं लग रहा था।

मैंने फार्म हॉउस के लेडलाइन पर भी फोन किया लेकिन वहा भी फोन नहीं लगा। मौसम खराब था और यहाँ जोरो की बारिश थी इसलिए मैंने पृथ्वी को तुम्हे लेने भेजा,,,,,,,,,,,,पृथ्वी बाहर से ही वापस चला गया क्या ?”
कहते हुए मिस्टर देसाई ने दरवाजे की तरफ झांका। प्राची ने मिस्टर देसाई के मुँह से पृथ्वी का नाम सुना तो उसे थोड़ी हैरानी हुई क्योकि विक्रम के फार्म हॉउस उसे लेने पृथ्वी नहीं बल्कि नीलेश आया था।

प्राची इस वक्त मिस्टर देसाई से बात करने की हालत में बिल्कुल नहीं थी इसलिए उसने कहा,”डेड ! मैं बहुत थक गयी हूँ , मुझे अपने कमरे में जाना है”
प्राची जाने लगी तो मिस्टर देसाई की नजर उसके शर्ट के फ़टे हुए हिस्से पर पड़ी और उन्होंने,”प्राची ! तुम्हारे कपडे कैसे फट गए ? प्राची तुम मुझसे कुछ छुपा रही ?  देखो जो भी बात है बताओ मुझे , मैं जानना चाहता हूँ तुम्हारे साथ क्या हुआ ?”

प्राची मिस्टर देसाई को सब बताकर इस वक्त परेशान करना नहीं चाहती थी इसलिए कहा,”मैं ठीक हूँ डेड , अंदर आते वक्त फिसलकर गिरने से ये शर्ट फट गया,,,,,,,,,,,मैं जाकर चेंज कर लेती हूँ”
“हम्म्म ठीक है ! तुम चेंज करके आओ मैं खाना लगवाता हूँ”,मिस्टर देसाई ने कहा ताकि साथ खाने के बहाने के बहाने से ही सही वे प्राची से बात कर सके।
“नहीं डेड ! आप खा लीजिये , मुझे भूख नहीं है,,,,,,,,,,,,गुड नाईट डेड”,प्राची ने मायूसी भरे स्वर में कहा और ऊपर जाने वाली सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी।

प्राची का बर्ताव मिस्टर देसाई को आज बहुत अजीब लगा और मन ही मन परेशान भी कर गया। वे हॉल में चले आये और सोफे पर आ बैठे। उन्होंने घर के नौकर से एक ब्लैक कॉफी देने को कहा और खुद प्राची के बारे में सोचने लगे।
“प्राची इतना डिस्टर्ब क्यों है ? वो शाम में विक्रम के फार्म हॉउस गयी थी क्या वहा कुछ हुआ होगा ? कही पृथ्वी और प्राची के बीच तो फिर से कोई बहस नहीं हो गयी ?

प्राची इतना डरी हुई क्यों है , क्या उसके साथ कोई हादसा हुआ है ? उसने मुझे भी कुछ नहीं बताया , कैसे पता करू ? पृथ्वी , हाँ मुझे पृथ्वी से बात करनी चाहिए,,,,,,,,,,,,,नहीं नहीं इस वक्त मुझे उसे फोन नहीं करना चाहिए , कल ऑफिस आने के बाद मैं उस से बात करूंगा , हाँ यही सही रहेगा। उम्मीद करता हूँ प्राची ठीक हो,,,,,,,,,,,,!!!”
“सर आपकी कॉफी”,नौकर की आवाज मिस्टर देसाई के कानो में पड़ी तो उनकी तंद्रा टूटी। उन्होंने कॉफी ली और नौकर वहा से चला गया।

प्राची अपने कमरे में आयी और कमरे का दरवाजा बंद कर उसने कमरे की खिड़कियों के परदे गिरा दिए , कबर्ड के पास आयी कपडे लिए और बाथरूम में चली आयी। प्राची ने कपडे रेंक पर रखे और शावर के नीचे आ खड़ी हुई। उसने पानी चालू किया और आँखे बंद करके सर उठा दिया। पानी उसके चेहरे पर गिरने लगा और गर्दन से होकर बहने लगा। गुस्से और नफरत की आग में उसका शरीर जल रहा था।

प्राची की आँखों के सामने एक बार फिर विक्रम का घिनोना चेहरा आने लगा और इसी के साथ प्राची रो पड़ी। कभी किसी के सामने कमजोर ना पड़ने वाली , हमेशा मजबूत रहने वाली प्राची आज कमजोर पड़ गयी। शावर के नीचे खड़ी प्राची देर तक आँसू बहाती रही ,  विक्रम पर भरोसा करने की आज वह बहुत बड़ी कीमत चुकाने वाली थी लेकिन बच गयी।

नहाकर प्राची ने कपडे बदले और बाहर चली आयी। उसने अपने बाल भी नहीं पोछे और सीधा आकर बिस्तर पर बैठ गयी। बालों से टपकता पानी फर्श पर फैलने लगा। पृथ्वी को समझ नहीं आ रहा था कि वह कैसे रिएक्ट करे ?

प्राची घंटो बिस्तर पर बैठी रही और बीते दिनों के बारे में सोचती रही। उसे अहसास हुआ कि पृथ्वी को हासिल करने के लिए उसने खुद को कितनी बड़ी मुसीबत में डाल दिया था। सबसे पहले वह उसी इंसान की नजरो में गिर गयी जिसे वह चाहती थी , फिर वह मिस्टर देसाई की नजरो में गिरी और उनसे दूर होती चली गयी , जिस कम्पनी को सक्सेसफुल बनाने के लिए प्राची ने दिन रात मेहनत की उसी कम्पनी में आज उसके लिए कोई इज्जत नहीं थी और तो और उसने भरत भरोसा करके उसके दिए पेपर्स पर साईन कर दिया।

प्राची को धीरे धीरे सब समझ आ रहा था। एक पृथ्वी का प्यार पाने के लिए उसने खुद को पूरी तरह बर्बाद कर लिया। वह अपने आस पास की दुनिया भुला बैठी थी। प्राची ने अपना चेहरा अपने हाथो में छुपा लिया और फूट फूट कर रोने लगी।
सहसा ही प्राची की आँखों के सामने वो सारे पल आये जब जब वह पृथ्वी से मिली या उस से सामना हुआ।

प्राची को नजर आया पहली मुलाकात से लेकर अब तक जितनी बार भी पृथ्वी से मिली पृथ्वी के चेहरे पर कोई ख़ुशी नहीं थी , ना आँखों में चमक , यहाँ तक कि पृथ्वी ने कभी प्राची को नजर भर देखा तक नहीं। वह जब जब प्राची से मिला उसकी नजरे साइड में देख रही होती थी। प्राची ने महसूस किया कि पृथ्वी ने कभी उसे कभी इस बात का कोई इशारा तक नहीं दिया कि उसे प्राची में दिलचस्पी है बल्कि वह हमेशा प्राची के सामने काम की बात करता था।

प्राची को याद आया वो पल जब प्राची की ऑफिस प्रेजेंटशन पर पृथ्वी ने उसके लिए तालिया बजायी थी क्योकि पृथ्वी प्राची के काम से बहुत इम्प्रेस था और सहसा ही उसे याद आये पृथ्वी के कहे शब्द “आप एक बहुत अच्छी बिजनेस वुमन है काश इंसान भी अच्छी होती”
पृथ्वी के कहे शब्द याद आते ही प्राची की आँखों में फिर आँसू भर आये।

उसने अपने आँसू पोछे और एक बार फिर पृथ्वी के बारे में सोचने लगी लेकिन इस बार प्राची के ख्यालों में अकेला पृथ्वी नहीं था बल्कि उसके साथ अवनि भी थी , और इन्ही ख्यालों के साथ प्राची की आँखों के सामने आये वो पल जब उसने पृथ्वी को अवनि के साथ देखा था। अवनि के साथ पृथ्वी के होंठो पर बड़ी सी मुस्कुराहट और आँखों में चमक थी और ऐसा सिर्फ एक बार नहीं बल्कि हर बार हुआ जब जब उसने पृथ्वी को अवनि के साथ देखा। प्राची को अब समझ आया कि पृथ्वी की असली ख़ुशी हमेशा से अवनि है ,

पृथ्वी ने सिर्फ अवनि को चाहा प्राची का ख्याल तो उसके दिमाग में कभी आया ही नहीं,,,,,,,,,,,आज पहली बार प्राची को अवनि के बारे में सोचकर जलन नहीं हुई बल्कि उसे अवनि की किस्मत पर नाज होने लगा क्योकि उसके पास पृथ्वी था। एक हादसे ने जैसे आज प्राची के सारे ख़यालात ही बदल दिए। प्राची ने पृथ्वी को पाने का ख्याल जैसे ही अपने मन से निकाला उसे सब हल्का लगने लगा , उसे लगने लगा जैसे उसके सर से कोई बोझ उतर गया हो। उसने अपने आँसू पोछे और बिस्तर पर लेट गयी , उसने अपनी आँखे मूँद ली और कुछ देर बाद उसे गहरी नींद आ गयी।

पृथ्वी का फ्लैट , पनवेल
सुबह सुबह पृथ्वी ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहा था और किचन में खड़ी अवनि उसके लिए नाश्ता बना रही थी। अवनि ने आज पृथ्वी के लिए मूंग दाल चीला बनाया और साथ में धनिये पुदीने की चटनी , उसने प्लेट में नाश्ता परोसा और बाहर चली आयी। पृथ्वी भी तैयार होकर आ चुका था आज उसके पास बहुत सारे काम थे और सबसे पहले उसे नीलेश से मिलकर ये जानना था कि विक्रम के फार्म हॉउस पर क्या हुआ ? उसने प्राची को सही सलामत घर पहुंचाया या नही

अवनि ने प्लेट लाकर टेबल पर रखा और जाने लगी तो पृथ्वी ने अवनि का हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और कहा,”अवनि ! अपने हाथ से खिलाओ ना”
अवनि ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखा और कहा,”आप खुद क्यों नहीं खा रहे ?”
“क्योकि मुझे तुम्हारे हाथ से खाना है , खिलाओ ना मुझे देर हो रही है”,पृथ्वी ने मचलकर कहा
अवनि पृथ्वी के पास आयी तो पृथ्वी सोफे के हत्थे पर आ बैठा और अपनी बाँहे सामने खड़ी अवनि की कमर से लपेट दी।

अवनि ने टेबल पर रखा प्लेट उठाया और निवाला तोड़कर पृथ्वी को खिलाते हुए कहा,”तो इसलिए आप अपने हाथ से नहीं खा रहे थे ताकि मुझे परेशान कर सके ?”
पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए हामी में गर्दन हिलाई तो अवनि ने भी झूठ मुठ का मुँह बनाते हुए पृथ्वी को दुसरा निवाला खिला दिया। पृथ्वी ने अवनि को थोड़ा अपने करीब किया और कहा,”अगर तुम रोज सुबह मुझे ऐसे ही प्यार से अपने हाथो से खिलाओ तो मैं तुम्हे परेशान नहीं करूंगा और तुम्हारी हर बात मानूंगा”

“हाह ! मैं आपके लिए इतनी ख़ास भी नहीं जो आप मेरी सब बाते माने”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी ने अवनि को घुमाकर अपनी गोद में बैठाया और कहा,”तुम बहुत खास हो समझी”
“अच्छा कितनी ख़ास ?”,अवनि ने पृथ्वी की गोद में बैठे बैठे ही उसे एक निवाला खिलाते हुए पूछा
पृथ्वी ने सुना तो प्यार से अवनि को देखने लगा और कहा,”तुम मेरी जिंदगी के 7 मिनिट हो”

अवनि ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखा और कहा,”हाह ! कुछ भी कहते है आप , मेरे लिए सिर्फ 7 मिनिट,,,,,,,,,,,ये तो बहुत गलत बात है”
पृथ्वी समझ गया कि उसने जो कहा वो अवनि को समझ नहीं आया इसलिए उसके गाल को अपने होंठो से छूकर कहा,”कभी कभी तुम सच में बच्ची लगती हो”
पृथ्वी को शरारत करते देखकर अवनि जल्दी से उसकी गोद से उठी और कहा,”मैं बच्ची नहीं हूँ मेरी शादी हो चुकी है”

पृथ्वी भी नाश्ता कर चुका था इसलिए उठा और अवनि के करीब आकर कहा,”हा ना ! अब तो हमारे बच्चे करने की उम्र है,,,,,,,,,,!!!”
कहते हुए पृथ्वी जैसे ही अवनि के करीब आया अवनि ने उसे पीछे करके कहा,”ऑफिस जाईये”
पृथ्वी ने मुँह बनाया और बैग उठाकर दरवाजे की तरफ बढ़ गया तो अवनि टिफिन लेकर दरवाजे तक आयी और कहा,”आपका टिफिन”
“थैंक्यू मिसेज उपाध्याय”,पृथ्वी ने अदा के साथ कहा
“मेंशन नॉट”,अवनि ने भी इतरा कर कहा तो पृथ्वी हँसते हुए वहा से चला गया।

 ( क्या मिस्टर देसाई जान पाएंगे प्राची के साथ हुए हादसे की सच्चाई ? क्या पृथ्वी को लेकर बदलने लगी है प्राची की भावनाये ? पृथ्वी के कहे 7 मिनिट का क्या है राज ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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