Pasandida Aurat Season 3 – 53
विक्रम की गन्दी नियत के बारे में जानकर प्राची अंदर तक काँप उठी। विक्रम ने बहुत ज्यादा शराब पी ली थी और शराब के नशे में वह प्राची के करीब आने लगा। प्राची भागने के लिए दरवाजे की तरफ बढ़ी तो विक्रम ने उसकी बाँह पकड़कर उसे सोफे की तरफ फेंका। लड़खड़ा कर प्राची सोफे पर जा गिरी। विक्रम ने दरवाजा बंद किया और प्राची की तरफ बढ़ा।
डर से प्राची का चेहरा पीला पड़ चुका था , वह मदद के लिए जोर से चिल्लाने लगी लेकिन प्राची को चिल्लाते देखकर विक्रम हंसा और कहा,”चिल्लाओ जितना चिल्लाना है लेकिन तुम्हारी चीखे सुनने वाला यहाँ सिर्फ मैं हूँ,,,,,,,,,,,,मुझे छोड़कर तुमने उस दो कौड़ी के पृथ्वी को चुना , अब भुगतो इसका अंजाम”
कहकर विक्रम सोफे की तरफ चला आया और प्राची को जबरदस्ती चूमने की कोशिश करने लगा। प्राची खुद को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे थी लेकिन विक्रम ने उसकी दोनों कलाइयों को मजबूती से पकड़ रखा था।
वह धीरे धीरे विक्रम के सामने हारने लगी थी , जैसे ही विक्रम ने अपने होंठो को प्राची के होंठो की तरफ बढ़ाया प्राची ने उसे सोफे से नीचे धकेल दिया जिसे से विक्रम की पकड़ा प्राची की कलाई पर ढीली हो गयी ! मौका पाकर प्राची जल्दी से विक्रम से दूर हटी और उठकर जैसे ही जाने लगी , विक्रम ने उसका पाँव पकड़कर उसे खींचा और प्राची मुँह के बल नीचे जा गिरी। गिरने से उसका दाँत उसके होंठ पर चुभ गया और खून आने लगा।
वह दर्द में थी क्योकि एकदम से गिरी थी फिर भी उसने हिम्मत कर के अपना दूसरा पैर विक्रम के मुँह पर मारा और अपना पैर उसके हाथ से छुड़ाकर दरवाजे की तरफ बढ़ गयी। घबराई हुई प्राची ने जल्दी जल्दी दरवाजा खोला लेकिन वह बाहर भाग पाती इस से पहले विक्रम ने आकर उसकी बाँह पकड़ी और उसे उठाकर अपने कंधे पर डाल लिया। प्राची अपने हाथ पैर पटकती रही लेकिन विक्रम ने मजबूती से उसे पकडे रखा। शराब और गुस्से के नशे में अब वह पूरी तरह से जानवर बन चूका था।
उसने प्राची को लाकर बिस्तर पर पटक दिया और उस पर हावी होने की कोशिश करने लगा। प्राची खुद को उस से बचाने के लिए हाथ पैर मारती रही और उसे खुद से दूर करती रही लेकिन विक्रम एक ताकतवर मर्द था उसके सामने प्राची भला कितना बचाव कर पाती। विक्रम ने उसकी दोनों कलाईयों को मजबूती से पकड़ा और बिस्तर से लगाकर गुस्से से प्राची को देखने लगा। प्राची की आँखों में आँसू भर आये , डर से उसके होंठ काँप रहे थे
प्राची को कमजोर पड़ते देखकर विक्रम ने अपने होंठो को जैसे ही प्राची के होंठो की तरफ बढ़ाया , दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई और विक्रम रुक गया। उसने गर्दन घुमाकर देखा दरवाजे पर कोई और नहीं बल्कि नीलेश खड़ा था। नीलेश को देखकर प्राची की आँखों में ठहरे आँसू बह गए , उसने दया भरी नजरो से नीलेश को देखा !
विक्रम की ये घटिया हरकत देखकर नीलेश का खून खौल उठा , वह बारिश में भीग चुका था लेकिन गुस्से से जल रहा था। वह कमरे में आया और विक्रम की कोलर पकड़कर उसे प्राची से दूर किया और उसे एक घुसा मारकर कहा,”कमीने ! तेरी हिम्मत कैसे हुई प्राची के करीब आने की ?”
नीलेश का मजबूत घुसा खाकर विक्रम वहा पड़ी टेबल पर जा गिरा और टेबल पर रखा सामान नीचे। प्राची बिस्तर से उतरकर नीचे आयी और दिवार के पास खड़ी हो गयी , डर के मारे वह काँप रही थी। नीलेश ने धीरे से गर्दन घुमाकर प्राची को एक झलक देखा और बिस्तर पर पड़ी बेडशीट खींचकर प्राची की तरफ बढ़ा दी जिस से प्राची खुद को ढक सके क्योकि खींचातानी में प्राची के कपडे यहाँ वहा से फट चुके थे। प्राची ने नीलेश के हाथ से बेडशीट ली और जल्दी से खुद को ढक लिया।
विक्रम उठा और गुस्से से नीलेश की तरफ आया उसने नीलेश को मारने की कोशिश की लेकिन नीलेश पूरी तरह से होश में था इसलिए उसने विक्रम को बुरी तरह से मारना शुरू किया। प्राची आँखों में आँसू लिए सब ख़ामोशी से देखती रही। वह विश्वास ही नहीं कर पा रही थी कि जिस विक्रम को वह अब तक अपना दोस्त समझ रही थी वह विक्रम उसके साथ ऐसी घटिया हरकत करेगा। नीलेश से मार खाकर विक्रम अधमरा हो चुका था। नीलेश ने उसे एक आखरी घुसा मारा और विक्रम शीशे की टेबल पर जा गिरा।
गिरने से शीशा टूट गया , विक्रम टूटे हुए शीशे के साथ नीचे जा गिरा और निढाल हो गया।
नीलेश ने गुस्से से एक नजर उसे देखा और फिर प्राची की तरफ चला आया। प्राची के बाल बिखर चुके थे और उस की आँखों से आँसू बहकर गालों पर लुढ़क आये थे। नीलेश ने प्राची के आँसू पोछने के लिए अपना हाथ बढ़ाते हुए कहा,”क्या आप ठीक है , मैडम ?”
प्राची विक्रम के बर्ताव से इतना घबरा गयी थी कि जैसे ही नीलेश ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया वह घबराकर पीछे हटी। नीलेश समझ गया कि प्राची इस वक्त बहुत डरी हुई है इसलिए उसने कहा,”घबराईये मत ! मैं यहाँ आपको लेने आया हूँ,,,,,,,,चलिए”
प्राची से चलने का कहकर नीलेश आगे बढ़ गया और प्राची डरी सहमी सी उसके पीछे चल पड़ी। प्राची ने जिस बेडशीट से खुद को ढका हुआ था उसे कमरे में ही छोड़ दिया और बाहर चली आयी। बाहर बारिश अभी भी जारी थी और मिस्टर देसाई की गाडी कुछ दूर खड़ी थी।
नीलेश वहा रुकना नहीं चाहता था इसलिए बारिश में ही आगे बढ़ गया। प्राची भी भीगते हुए उसके बगल में चल पड़ी। ठण्ड की वजह से वह अपने हाथो को बांधकर चल रही थी। चलते चलते नीलेश ने अपना कोट निकाला और बिना प्राची की तरफ देखे अपना कोट उसके कंधो पर डाल दिया !
प्राची ख़ामोशी से नीलेश को देखने लगी , नीलेश के चेहरे पर इस वक्त कोई भाव नहीं थे , वह सामने देखते हुए ख़ामोशी से आगे बढ़ रहा था।
प्राची उसके साथ चलते हुए ख़ामोशी से उसे देखती रही। आज से पहले उसने नीलेश को इतना गौर से कभी नहीं देखा था शायद , छोटी आँखे , सीधी नाक , सुर्ख होंठ , हल्की दाढ़ी मुछे,,,,,,,,,,,,,प्राची ने पहली बार नीलेश को इतना ध्यान से देखा और सहसा ही उसे वो सब पल याद आ गए जो उसने नीलेश के साथ बिठाये थे। नीलेश का देसाई ग्रुप ज्वाइन करना , प्राची का मैनेजर बनना ,
प्राची की ऑफिस के काम में मदद करना , उसकी छोटी छोटी जरुरतो का ख्याल रखना , उसकी परवाह करना और फिर याद आया वो पल जब प्राची ने पृथ्वी के लिए नीलेश को बेइज्जत करके बीच सड़क पर अपनी गाड़ी से नीचे उतार दिया था। उसके बाद नीलेश ने हमेशा के लिए देसाई ग्रुप ही छोड़ दिया और उसके बाद प्राची नीलेश से आज मिल रही थी वो भी इन हालातों में,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,आज अगर नीलेश सही वक्त पर नहीं आया होता तो प्राची के साथ कोई बड़ी घटना घट जाती जिसके लिए वह खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाती,,,,,,,,,,,,,,!!!!
आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
अवनि किचन में खाना बना रही थी और वही कमरे में बैठा पृथ्वी अवनि को मनाने के लिए पिछले आधे घंटे से पन्नो पर कुछ लिख रहा था। सब लिखने के बाद पृथ्वी ने वो पन्ने दोनों हाथो में उठाये और देखकर कहा,”ये देखकर तो आप मुझे माफ़ कर ही देगी मैडम जी,,,,,,,,,,,,,वैसे ही जैसे पहले किया था,,,,,,,,,,,,,उम्म्म्म लेकिन माफ़ी माँगने के लिए क्या ये काफी होगा ? मुझे अवनि को मनाने के लिए कुछ और भी करना चाहिए”
पृथ्वी अवनि को मनाने के बारे में सोच ही रहा था कि तभी उसके दाँयी तरफ से आवाज आयी,”हाह ! पहले गलती करो और बाद में उसे सुधारने का नाटक करो”
पृथ्वी ने सुना तो चौंककर अपने दाँयी तरफ देखा , उसका दिमाग एक पैर पर अपना दुसरा पैर रखे , अपने दोनों हाथो को सर के पीछे लगाए हवा में लेटा सीटी बजा रहा था। पृथ्वी ने उसे घूरकर देखा और कहा,”हाह ! मैं कोई नाटक नहीं कर रहा मुझे सच में अपनी गलती का अहसास है”
“ये तुम उसको क्या समझा रहे हो उसमे तो बस भूसा भरा है , मुझे पूरा यकीन है अवनि तुम्हारा ये सॉरी नोट देखकर तुम्हे माफ़ कर देगी”,इस बार पृथ्वी के बायीं
तरफ से आवाज आयी , पृथ्वी ने बाँयी तरफ गर्दन घुमाई तो देखा उसका दिल अपने चेहरे पर फेसपैक लगा रहा था।
दिल की बात सुनकर दिमाग भड़क गया और अपनी गर्दन दिल की तरफ घुमाकर कहा,”तुम क्यो अपनी बातों से भूसे में आग लगा रहे हो ?”
“ओह्ह्ह तो तुम मानते हो कि इसके दिमाग में भूसा भरा है ?”,दिल ने भी तुनककर कहा
पृथ्वी कभी दाँये तो कभी बाँये देखता , दिल की बात सुनकर दिमाग ने मुँह बनाया और कहा,”ए पृथ्वी ! तुम इसकी बात मत सुनो ये 21वी सदी है , इसमें अवनि तुम्हारे इस बोरिंग सॉरी नोट से नहीं मानने वाली बल्कि तुम्हे उसे कोई बढ़िया महंगा सा गिफ्ट देना चाहिए,,,,,,,,,तुम उसे डायमंड का नेकलेस दे सकते हो या फिर कोई महंगा सा स्किन केयर,,,,,,,,,,,,,,चॉइस इज योर्स”
“अवनि ऐसी लड़की बिल्कुल नहीं है , अरे उसे तो तुम्हारे छोटे छोटे एफर्ट्स ही असली ख़ुशी देते है , पृथ्वी ये नेकलेस और स्किनकेयर का आईडिया बेकार है ,, तुम अवनि को ये सॉरी नोट ही देना”,दिल ने पृथ्वी को समझाते हुए कहा
“फिर वही सॉरी नोट फाड़कर इसके मुँह पर मार देगी वो”,दिमाग ने उठकर बैठते हुए कहा
“बिल्कुल नहीं ! इस से पहले भी तो तुमने उसके लिए सॉरी नोट लिखा है , तब भी तो उसने तुम्हे माफ़ किया था न”,दिल ने कहा
“अबे पागल दिल ! तब वो इसकी बीवी नहीं थी ,, बीवी और गर्लफ्रेंड में फर्क होता है ,, गर्लफ्रेंड को जो बाते अच्छी लगती है बीवी उन्ही बातो से चिढ जाती है”,दिमाग ने झुंझलाकर कहा
“तुम तो चुप ही रहो , इतने बकवास लॉजिंग तुम्ही दे सकते हो , पृथ्वी तुम मेरी बात सुनो”,दिल ने कहा तो पृथ्वी ने अपनी गर्दन बांयी तरफ घुमाई
“ए तुम मेरी बात सुनो”,दिमाग ने कहा तो पृथ्वी को बांयी तरफ देखना पड़ा
कभी बाँये तो कभी दाँये गर्दन घुमाकर पृथ्वी थक गया तो पृथ्वी ने खिड़की की तरफ इशारा करके दोनों से कहा,”वो मेरी बीवी है , मुझे उसे कैसे मनाना है वो मैं खुद देख लूँगा , तुम दोनों दफा हो जाओ यहाँ से,,,,,,,,,,,,,,!!!”
दिल-दिमाग ने सुना तो हैरानी से दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर खिड़की की तरफ बढ़ गए दिल मासूम था इसलिए चुपचाप आगे बढ़ गया लेकिन दिमाग रुका और पृथ्वी की तरफ पलटकर बोला,”बस क्या दोस्त ?”
“निकलो,,,,,,,,,,,,,,,!!!१”,पृथ्वी ने दिमाग को घूरकर कहा तो दिमाग ने खिड़की से बाहर छलांग लगा दी। पृथ्वी ने राहत की साँस ली और हाथ में पकडे सॉरी नोट को देखने लगा।
खाना बनाकर अवनि किचन से बाहर आयी उसने देखा पृथ्वी हॉल में नहीं है। अवनि का चेहरा उदासी से घिरा हुआ था , सच जानने के बाद अवनि को खुद में ही बुरा लग रहा था कि उसने पृथ्वी पर गुस्सा क्यों किया ? अवनि पृथ्वी को बुलाने कमरे में चली आयी। पृथ्वी अपने हाथो को बांधे कबर्ड से पीठ लगाए खड़ा था। अवनि अंदर आयी पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने ड्रेसिंग के पास टेबल पर रखे पन्नो की तरफ इशारा किया।
अवनि टेबल की तरफ बढ़ गयी। टेबल पर कुछ पन्ने रखे थे और साथ में वो सफ़ेद गुलाब जो कुछ देर पहले पृथ्वी ने अवनि को दिया था। अवनि ने गुलाब उठाकर साइड में रखा और पन्नो को उठाकर देखा। हर पन्ने पर पृथ्वी ने “I Am Sorry मैडम जी” लिखा था वो भी 10-20 बार नहीं बल्कि पुरे 200 बार ,, अवनि ने जैसे ही ये देखा उसकी आँखों में आँसू भर आये और उसे वो पल याद आ गए जब शादी से पहले सुरभि की वजह से पृथ्वी ने ऐसे ही अवनि के लिए 100 बार सॉरी नोट लिखा था।
अवनि को खामोश पाकर पृथ्वी धीरे से बड़बड़ाया,”लगता है कुछ ज्यादा ही नाराज है , अब तो सिर्फ यही है जो मुझे बचा सकता है”
कहकर पृथ्वी अवनि के ठीक पीछे चला आया और उस से कुछ दूरी बनाकर खड़ा हो गया। पृथ्वी ने एक माफ़ी के लिए 200 बार सॉरी लिखा ये देखकर अवनि का दिल भर आया , वह नम आँखों के साथ पृथ्वी की तरफ पलटी लेकिन पलटकर अवनि ने जो देखा उस से उसकी आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये।
हमारे पृथ्वी बाबू , अपने दोनों कानों को पकड़कर छोटे मासूम बच्चे की तरह उठक बैठक लगा रहे थे। ये देखने के बाद तो किसी का भी दिल पिघल जाए फिर अवनि तो उसकी पत्नी थी। अवनि आगे बढ़कर पृथ्वी के सीने से लगी और रोते हुए कहा,”आई ऍम सॉरी”
पृथ्वी मुस्कुरा उठा उसने अवनि का सर सहलाकर बड़े प्यार से कहा,”अरे बेटा ! गलती मैंने किया तुम क्यों सॉरी बोल रही हो ?”
“मुझे आपको समझना चाहिए थे,,,,,,,,,,,,आप पर गुस्सा नहीं करना चाहिए था।”,अवनि ने सिसकते हुए कहा
“तुम कर सकती हो , तुम्हे मुझ पर गुस्सा करने का पूरा हक़ है। काम के चक्कर में मैं थोड़ा ज्यादा ही लापरवाह हो गया और तुम्हे ये सब नहीं बताया पर यकीन मानो अवनि मैं बस तुम्हे परेशान करना नहीं चाहता था इसलिए तुम्हे ये सब से दूर रखा,,,,,,,,,,,,बस कुछ दिन की बात है फिर सब ठीक हो जाएगा”,पृथ्वी ने अवनि का चेहरा अपने हाथो में लेकर उसके आँसू पोछते हुए कहा
अवनि ने नम आँखों के साथ हामी में सर हिला दिया और कहा,”लेकिन आपने सॉरी नोट क्यों लिखा ?”
“क्योकि मैं लिखना चाहता था , हर लाइन के साथ बस एक ही ख्याल मेरे जहन में आया कि चाहे जो हो जाये मुझे हमेशा तुम्हरा ख्याल रखना है,,,,,,,,,तुम नाराज हो जाती हो ना तो मुझे अच्छा नहीं लगता”,पृथ्वी ने कहा
“सॉरी,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“सॉरी से काम नहीं चलेगा”,पृथ्वी ने कहा
“फिर ?”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखा और फिर प्यार से कहा,”भूख लगी है मुझे प्लीज खाना खिला दो,,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि मुस्कुरा उठी और पृथ्वी को साथ लेकर कमरे से बाहर निकल गयी।
( क्या प्राची बताएगी मिस्टर देसाई को विक्रम की इस घटिया हरकत के बारे में या साध लेगी चुप्पी ? क्या यहाँ से बदल जायेंगे नीलेश को लेकर प्राची के ख्यालात ? पृथ्वी की तरह क्या अवनि सुरभि को भी कर देगी माफ़ ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
