Pasandida Aurat Season 3 – 52
नीलेश को विक्रम के फार्म हॉउस भेजकर पृथ्वी स्टेशन चला आया। उसने पनवेल जाने के लिए ट्रेन पकड़ ली , आज उसकी किस्मत अच्छी थी इसलिए उसे सीट मिल गयी। पृथ्वी खिड़की के पास खाली पड़ी सीट पर आ बैठा और अवनि के बारे में सोचने लगा। उसने अवनि से अपनी नौकरी के बारे में सच छुपाया था अब घर जाकर वह अवनि का सामना कैसे करेगा ? पृथ्वी खामोश बैठा खिड़की से बाहर देखने लगा। रास्तेभर पृथ्वी अवनि के बारे में सोचते रहा। ट्रेन स्टेशन पर आकर रुकी , पृथ्वी स्टेशन से बाहर आया और पैदल ही निकल पड़ा।
अपार्टमेंट के बाहर से उसने अवनि के लिए एक गुलाब का फूल खरीदा और अपार्टमेंट में
चला आया। दरवाजे के सामने आकर पृथ्वी ने एक लम्बी गहरी साँस ली और बेल बजा दी हालाँकि पृथ्वी का दिल धड़क रहा था , शादी के बाद आज पहली बार वह अवनि के गुस्से का सामना जो करने वाला था।
पृथ्वी ख़ामोशी से दरवाजे के सामने खड़ा था , कुछ देर बाद दरवाजा खुला , सामने अवनि खड़ी थी मायूस और उदास।
आज से पहले अवनि ने पृथ्वी के लिए जब भी दरवाजा खोला पृथ्वी ने उसे हँसते मुस्कुराते ही देखा लेकिन आज अवनि के चेहरे पर उदासी देखकर पृथ्वी समझ गया कि अवनि उस से बहुत ज्यादा नाराज है। अवनि ने एक नजर पृथ्वी को देखा और बिना कुछ कहे साइड हट गयी। पृथ्वी भी चुपचाप अंदर चला आया। अवनि ने दरवाजा बंद किया और पृथ्वी के पीछे चली आयी।
पृथ्वी ने कंधे से बैग उतार कर सोफे पर रखा और फिर अपने शर्ट की बाजू फोल्ड करते हुए अवनि की तरफ पलटकर कहा,”अवनि ! एक गिलास पानी मिलेगा ?”
अवनि ने कुछ नहीं कहा बस चुपचाप किचन की तरफ चली गयी। वापस आयी तो उसके हाथ में पानी का गिलास था जिसे अवनि ने जोर से टेबल पर रखकर कहा,”पानी,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी समझ गया आज अवनि बहुत गुस्से में है इसलिए पानी का गिलास उठाया और पानी पीकर गिलास वापस टेबल पर रख दिया। अवनि अपने हाथो को बांधे गुस्से से एकटक पृथ्वी को ही देख रही थी।
पृथ्वी ने अपनी शर्ट के पीछे से गुलाब निकाला और अवनि की तरफ बढ़ा दिया। अवनि के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे उसने पृथ्वी के हाथ से गुलाब लिया और उसे टेबल पर रख दिया और फिर हाथ बांधकर पृथ्वी की तरफ देखने लगी। पृथ्वी की तो सांसे ही अटकी हुई थी , उसने इधर उधर देखा , अपने होंठो को दबाया , अपनी गर्दन खुजाई और मरे हुए स्वर में कहा,”बॉस ने बताया तुम आज ऑफिस आयी थी ?”
“अगर मैं वहा नहीं आती तो मुझे पता कैसे चलता कि आजकल आप मुझसे झूठ भी बोलने लगे है”,अवनि ने सधे हुए स्वर में कहा
“अवनि वो मैं , मैं तुम्हे बताने ही वाला था लेकिन,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने इतना ही कहा कि अवनि का गुस्सा फूट पड़ा,”लेकिन क्या पृथ्वी ? क्या हमारा रिश्ता सिर्फ घर की इस चार दीवारी में कैद है ? या फिर मुझे ये जानने का हक़ नहीं कि बाहर आपकी जिंदगी में क्या चल रहा है ? पिछले दो हफ्ते से आप सिर्फ मुझे झूठ बोल रहे है और अकेले सब सह रहे है , क्या मैं इतनी परायी हूँ कि आपने मुझे बताना तक जरुरी नहीं समझा,,,,,,,,,,,,,,,,,,
पृथ्वी ! मुझे लगता था हम एक दूसरे से कुछ नहीं छुपाते , सुख हो , दुःख हो , परेशानी हो सब एक दूसरे से बांटते है ताकि एक दूसरे की तकलीफ कम कर सके , एक दूसरे को समझ सके फिर इस बार आपने कुछ क्यों नहीं बताया ? क्यों अकेले सब ठीक करते रहे ?”
अवनि गुस्से से ज्यादा दुःख में थी , उसके चेहरे से साफ़ झलक रहा था कि पृथ्वी के झूठ बोलने और ये बाते छुपाने से अवनि को कितनी तकलीफ हुई है।
पृथ्वी ख़ामोशी से अवनि को देखता रहा , पृथ्वी की ख़ामोशी ने अवनि को और आहत कर दिया और इस बार उसने अपने मन में भरी सारी तकलीफ पृथ्वी के सामने जाहिर कर दी
“मेरी जिंदगी में दो लोग मेरे सबसे करीब है , एक आप और दूसरी सुरभि और आप दोनों ने ही मुझसे सच छुपाआपने अपनी नौकरी का सच छुपाया और सुरभि ने अपने और सिद्धार्थ के रिश्ते का,,,,,,,,,,,,आप दोनों ने मुझे पराया कर दिया पृथ्वी।
आप अपनी परेशानी बताते तो क्या मैं उसे नहीं समझती ? और अगर सुरभि मुझसे एक बार कहती कि वो सिद्धार्थ को चाहती है तो मैं ख़ुशी ख़ुशी इस बात को स्वीकार कर लेती लेकिन आप दोनों ने ही मुझे इस लायक नहीं समझा,,,,,,,,,,,,,आज मुझे बहुत बुरा लगा पृथ्वी जब आपके पुराने ऑफिस जाकर मुझे पता चला अब आप वहा काम नहीं करते,,,,,,,,,,,,मैं तो ये जानकर हैरान हूँ कि जिस लड़की से आप नफरत करते है अब आप उसी के साथ काम कर रहे है,,,,,,,,,,,,,,मैं आपको समझ नहीं पा रही हूँ पृथ्वी ?
आखिर ऐसा क्यों किया आपने ? क्यों छुपाया मुझसे ये सब क्या मैं आपकी कुछ नहीं लगती ?”
अवनि की बाते सच थी लेकिन साथ ही पृथ्वी के दिल में चुभ रही थी वह अवनि के पास आया और उसके होंठो पर अपनी उंगलिया रखकर कहा,”शशशशश बस ! अब अगर कुछ मत कहना,,,,,,,,,,,,,तुम मेरे लिए सब कुछ हो”
अवनि की आँखों में आँसू भर आये लेकिन उसने जैसे तैसे करके उन्हें अपनी आँखों में ही रोक लिया। उसकी नाक लाल हो चुकी थी और आँखों में शिकायत के भाव थे। उसने पृथ्वी का हाथ नीचे किया और कहा,”तो फिर मुझसे झूठ क्यों कहा ?”
पृथ्वी अवनि से पीछे हटा और कहने लगा,”अवनि ! ये सब मैंने तुम्हारे लिए किया , मैंने तुम से झूठ इसलिए कहा क्योकि मैं तुम्हे परेशान करना नहीं चाहता था। कितनी मुश्किलों के बाद तुम्हारी जिंदगी में ख़ुशी के पल आये थे , तुम घरवालों के साथ खुश थी , हमारी शादी से खुश थी , मैं तुम से तुम्हरी वो ख़ुशी छीनना नहीं चाहता था अवनि। यहां आने के बाद मैं तुम्हे कोई ख़ुशी नहीं दे पाया था , कितने दिनों बाद तुम्हे ख़ुशी मिली थी , तुम्हे खुश देखकर मैंने अपनी सारी परेशानिया छुपा ली ताकि तुम पर उन परेशानियों का साया भी ना पड़े।
हालात ऐसे थे कि हमारी शादी से दो दिन पहले मुझे अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी ,, जयदीप बॉस सच्चाई जानते थे इसलिए उन्होंने जान बुझकर हमे एक हफ्ते के लिए मुंबई से बाहर भेज दिया ताकि तुम्हे इस बारे में पता ना चले,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“लेकिन क्यों ?”,अवनि ने तड़पकर कहा
पृथ्वी अवनि के पास आया , उसकी बाँहो को प्यार से थामा और उसकी आँखों में देखकर कहा,”क्योकि अगर तुम जानती तो इसके लिए खुद को जिम्मेदार ठहराती और ये मैं नहीं चाहता था,,,,,,,,,,,,,तुम्हे याद है वो दिन जब मैं पहली बार तुम्हे इस शहर में लेकर आया था और घरवाले मेरे इस फैसले से नाराज थे,,,,,,,,,तब भी तुमने खुद को दोष दिया और मैं ये नहीं चाहता था , मैं नहीं चाहता मेरी किसी भी तकलीफ की वजह तुम खुद को समझो,,,,,,,,,,,मैं बस तुम्हे तकलीफ देना नहीं चाहता अवनि,,,,,,,,,,,,,मुझे माफ़ कर दो अवनि”
पृथ्वी की बात सुनकर अवनि की आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये। पृथ्वी ने उस से सच छुपाया ताकि अवनि परेशान ना हो। पृथ्वी उसकी आँखों में आये आँसू देख ना ले सोचकर अवनि वहा से चली गयी। पृथ्वी को लगा अवनि उस से कुछ ज्यादा नाराज है तो वह मायूस होकर वहा से कमरे में चला आया। उदासी पृथ्वी के चेहरे से साफ झलक रही थी उसने अपना बैग रखा और कबर्ड से कपडे लेकर नहाने चला गया। पृथ्वी नहाकर कमरे में आया तो उसकी नजर टेबल पर रखी चाय पर पड़ी जिसे अवनि रखकर गयी थी।
पृथ्वी टेबल की तरफ आया , उसने चाय का कप उठाया और पीने लगा। अवनि उस से नाराज थी और उसे अवनि को किसी भी हाल में मनाना था। चाय पीते हुए सहसा ही पृथ्वी को अवनि की कही बात का ख्याल आया जिसमे सुरभि का भी जिक्र था , सुरभि ने भी आज अवनि से बात की होगी और उसे कुछ ऐसा कहा होगा जिसे सुनकर अवनि और ज्यादा उदास हो गयी !
“हाह ! ये सुरभि ने अब अवनि से क्या कहा होगा जिस से वह इतना अपसेट है , उस से तो मैं कल बात करूंगा पहले मुझे अपनी मैडम जी को मनाना है”,पृथ्वी चाय का घूंठ भरकर बड़बड़ाया
पृथ्वी के मुँह से जैसे ही “मैडम जी” निकला वह मुस्कुरा उठा और उसे याद आया शादी से पहले जब अवनि उस से बहुत ज्यादा गुस्सा हो गयी थी तब उसने उसे कैसे मनाया था ? पृथ्वी ने चाय पीकर कप रखा , शीशे के सामने आकर अपने बाल पोछे और फिर टेबल के दराज को खोलकर उसमे रखे खाली पन्ने उठा लाया। उसने अपने बैग से पेन निकाला और बैठकर इत्मीनान से उन पन्नो पर कुछ लिखने लगा।
किचन में खड़ी अवनि पृथ्वी के लिए खाना बना रही थी। सच जानने के बाद अब उसे खुद से भी चिढ हो रही थी कि उसने पृथ्वी को इतना गलत क्यो समझा ? क्यों उसने पृथ्वी को समझने की कोशिश नहीं ? अवनि ख़ामोशी से अपना काम करती रही , उसे नहीं पता था कमरे में बैठा पृथ्वी क्या कर रहा है ?
विक्रम का फार्म हॉउस , मुंबई
फार्म हॉउस के कमरे की खिड़की के पास खड़ी प्राची ने बाहर हो रही बारिश को देखकर कहा,”ये मुंबई की बारिश भी ना , कभी भी शुरू हो जाती है। अब मैं घर कैसे जाउंगी ?”
कुछ ही दूर खड़े विक्रम गिलासों में शराब डाल रहा था। प्राची उसकी तरफ चली आयी तो विक्रम ने शराब का गिलास प्राची की तरफ बढ़ा दिया। प्राची ने विक्रम के हाथ से गिलास लेकर उसे वापस रखकर कहा,”मैंने शराब पीना बंद कर दिया है”
विक्रम ने हैरानी से प्राची को देखा तो प्राची ने मुस्कुरा कर आगे कहा,”पृथ्वी ड्रिंक नहीं करता , अब उसके लिए मुझे अपनी कुछ बुरी आदतें तो छोड़नी पड़ेगी ना,,,,,,,,,तुम पीओ मैं ये जूस ले लेती हूँ”
प्राची के मुँह से पृथ्वी का नाम सुनकर विक्रम अंदर ही अंदर जल उठा लेकिन चेहरे पर कोई भाव आने नहीं दिए और प्राची के जूस के गिलास के साथ चियर्स करके उसे पीने लगा।
बिजली की कड़कड़ाहट और तेज बारिश देखकर प्राची अपने जूस का गिलास हाथ में थामे फिर खिड़की की तरफ बढ़ गयी तो विक्रम ने कहा,”तो फिर तुमने क्या सोचा है प्राची ?”
“किस बारे में ?”,प्राची ने खिड़की के बाहर देखते हुए पूछा
“हमारी शादी के बारे में,,,,,,,,,,,,!!”,विक्रम ने लड़खड़ाती आवाज में कहा , अब तक वह बहुत ज्यादा शराब पी चुका था और धीरे धीरे उसे शराब चढ़ने लगी थी।
प्राची ने सुना तो पलटकर हैरानी से विक्रम को देखा और कहा,”तुमसे किसने कहा मैं तुम से शादी करने वाली हूँ ? कम ऑन विक्रम मैंने कल रात ही तुम से ये बात क्लियर कर दी ,, तुम मेरे टाइप के नहीं हो”
विक्रम ने सुना तो गुस्से से उसकी आंखे लाल हो गयी और उसने कहा,”क्या कमी है मुझमे बताओ ? अच्छा दिखता हूँ , अच्छे घर से , अच्छा कमाता हूँ और तुम्हे चाहता हूँ लेकिन तुम , तुम अभी भी उस दो कौड़ी के पृथ्वी के पीछे पड़ी हो,,,,,,,,,,,,ऐसा क्या है उसमे जो मुझमे नहीं है बोलो”
विक्रम को गुस्से में देखकर प्राची हैरान थी वह उसकी तरफ आयी और उसके हाथ से शराब का गिलास छीनकर साइड में रखते हुए,”बस करो विक्रम , तुमने बहुत ज्यादा शराब पी ली है। तुम होश में नहीं हो,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
विक्रम ने प्राची की तरफ देखा और कहा,”होश में तो तुम नहीं हो प्राची , तुम्हे , तुम्हे उस पृथ्वी के सामने मेरा प्यार दिखाई क्यों नहीं दे रहा है ? भूल जाओ उसे और मुझसे शादी कर लो,,,,,,,,,,,,,मैं तुम्हे बहुत खुश रखूंगा”
कहते हुए विक्रम ने प्राची के करीब आने की कोशिश की तो प्राची ने विक्रम को पीछे धक्का देकर कहा,”बिहेव योरसेल्फ विक्रम , इस वक्त तुम होश में नहीं हो,,,,,,,,,,,मैं जा रही हूँ बाय”
“तुम्हारे डेड ने हमारी शादी फिक्स कर दी है प्राची , क्या उन्होंने तुम्हे ये नहीं बताया ?”,विक्रम ने कहा
प्राची पलटी और विक्रम के सामने आकर कहा,”मैं तुमसे शादी नहीं करुँगी ये बात तुम अपने दिमाग में बैठा लो,,,,,,,,,,,,,,और रही बात मेरे डेड की तो उन से मैं खुद बात कर लूंगी,,,,,,,,मैं यहाँ तुमसे माफ़ी मांगने आयी थी लेकिन यहाँ आकर मुझे समझ आया कि तुम तो इसके लायक भी नहीं हो,,,,,,,,,,!!!!”
विक्रम से कड़वी बाते कहकर प्राची जाने लगी तो विक्रम ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया , विक्रम ने जैसे ही प्राची का हाथ पकड़ा गुस्से से प्राची की भँवे तन गयी और उसने पलटकर कहा,”हाउ डेयर यू ?”
विक्रम ने नशीली आँखों से प्राची को सर से लेकर पाँव तक देखा और उन्मांद भरे स्वर में कहा,”शादी नहीं हो सकती तो क्या हुआ सुहागरात तो मना ही सकते है”
प्राची ने जैसे ही सुना उसका दिल जोरो से धड़कने लगा , विक्रम में उसे इस वक्त अच्छा दोस्त नहीं बल्कि एक जानवर नजर आ रहा था। उसे देखकर प्राची को अहसास हुआ कि उसने सच में यहाँ आकर बहुत बड़ी गलती कर दी है।
( अवनि को मनाने के लिए क्या करेगा पृथ्वी और क्या अवनि कर देगी उसे माफ़ ? क्या सच में प्राची ने फार्म हॉउस डाल लिया है खुद को मुसीबत में ? क्या नीलेश पहुंच पायेगा सही वक्त पर या विक्रम हो जायेगा अपने नापाक इरादों में कामयाब ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
प्राची पलटी और विक्रम के सामने आकर कहा,”मैं तुमसे शादी नहीं करुँगी ये बात तुम अपने दिमाग में बैठा लो,,,,,,,,,,,,,,और रही बात मेरे डेड की तो उन से मैं खुद बात कर लूंगी,,,,,,,,मैं यहाँ तुमसे माफ़ी मांगने आयी थी लेकिन यहाँ आकर मुझे समझ आया कि तुम तो इसके लायक भी नहीं हो,,,,,,,,,,!!!!”
विक्रम से कड़वी बाते कहकर प्राची जाने लगी तो विक्रम ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया , विक्रम ने जैसे ही प्राची का हाथ पकड़ा गुस्से से प्राची की भँवे तन गयी और उसने पलटकर कहा,”हाउ डेयर यू ?”
प्राची पलटी और विक्रम के सामने आकर कहा,”मैं तुमसे शादी नहीं करुँगी ये बात तुम अपने दिमाग में बैठा लो,,,,,,,,,,,,,,और रही बात मेरे डेड की तो उन से मैं खुद बात कर लूंगी,,,,,,,,मैं यहाँ तुमसे माफ़ी मांगने आयी थी लेकिन यहाँ आकर मुझे समझ आया कि तुम तो इसके लायक भी नहीं हो,,,,,,,,,,!!!!”
विक्रम से कड़वी बाते कहकर प्राची जाने लगी तो विक्रम ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया , विक्रम ने जैसे ही प्राची का हाथ पकड़ा गुस्से से प्राची की भँवे तन गयी और उसने पलटकर कहा,”हाउ डेयर यू ?”
