Site icon Sanjana Kirodiwal

Pasandida Aurat Season 3 – 49

Pasandida Aurat Season 3 – 49

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

सुरभि के घरवाले सिद्धार्थ और सुरभि के रिश्ते के लिए तैयार थे बस कोई भी फैसला लेने से पहले सुरभि के पापा सिद्धार्थ के घरवालों से मिलना चाहते थे। सुरभि ने भी बिना कुछ कहे सिद्धार्थ के होंठो को अपने होंठो से छूकर अपने प्यार का इजहार कर दिया !

मुस्कुराते हुए सिद्धार्थ नीचे चला आया और फिर सुरभि के घरवालों से इजाजत लेकर सिरोही के लिए निकल गया।  सुरभि बहुत खुश थी लेकिन जैसे ही सिद्धार्थ की गाडी वहा से निकली सुरभि ने अपना हाथ अपने ललाट  मारा और खुद से ही कहा,”हाह ! कितनी पागल लड़की हो ना तुम , उसका नंबर तक नहीं लिया”

“तुम्हारे उनका नंबर मेरे पास है दीदी”,सुरभि के पीछे खड़े उसके छोटे भाई ने कहा
सुरभि पलटी और अपने भाई को देखकर ख़ुशी भरे स्वर में कहा,”तो लाओ दो मुझे उसका नंबर,,,,,,,,,,,,!!!”
“नंबर चाहिए तो पहले आपको मेरे लिए एक नया विडिओ गेम खरीदना पडेगा”,सुरभि के भाई ने इतरा कर कहा
सुरभि ने सुना तो अपने भाई का कान मरोड़कर कहा,”अच्छा तो अब तुम मुझे ब्लेकमैल करोगे , भूलो मत मैं तुमसे बड़ी हूँ”

“हाँ लेकिन पापा को उस अनिकेत का सच तो मैंने ही बताया ना,,,,,,,,,,वरना तो अब तक पापा आपकी शादी कर देते”,छोटे भाई ने कहा तो सुरभि ने उसका कान छोड़ दिया।
सुरभि कुछ देर खामोश रही और फिर अपने भाई के कंधो पर बांह रखकर अंदर जाते हुए कहा,”चल आ तुझे नया विडिओ गेम दिलाती हूँ”
“थैंक्यू दीदी”,छोटे भाई ने खुश होकर कहा और सुरभि के साथ वहा से चला गया

विक्रम का ऑफिस , नवी मुंबई
“रीना ! मेरे केबिन में आओ और मुझे बताओ आज के अपडेट्स क्या है ?”,रिसेप्शन के सामने से गुजरते विक्रम ने रिसेप्शन पर बैठी लड़की से कहा और अपने केबिन में चला गया।
रीना ने कुछ पेपर्स प्रिंट किये और लेकर विक्रम के केबिन में चली आयी। विक्रम अपने केबिन में रखे फिश टेंक में मछलियों को दाना डाल रहा था।
“सर,,,,,,,,!!!”,रीना ने धीरे से कहा

विक्रम पलटकर अपनी टेबल की तरफ आया और कुर्सी पर आ बैठा। रीना ने उसके सामने पेपर्स रखे और कहा,”सर ये आज के सभी इम्पोर्टेन्ट कामो का अपडेट्स और डिटेल्स है। आज आपकी तीन मीटिंग्स है उसके बाद शाम में ऐड कम्पनी के मैनेजर से मिलने जाना है जो अपने कुछ ऐड्स हमारे प्रोडक्शन हॉउस से बनवाना चाहते है”
“हम्म्म ठीक है !  इन सबके साथ मीटिंग्स का जो टाइम और वेन्यू है वो मुझे मेल कर देना,,,,,,,,,,,,!!!”ने ,विक्रम ने पेपर्स देखते हुए कहा

रीना ने देखा बाकि दिनों के बजाय विक्रम आज कुछ ज्यादा ही सीरियस है , उसकी विक्रम से कुछ पूछने की हिम्मत नहीं हुई इसलिए वह चुपचाप वहा से जाने के लिए दरवाजे की तरफ बढ़ गयी। विक्रम को कुछ याद आया और उसने कहा,”रीना ! एक मिनिट,,,,,,,,,,,!!!”
रीना पलटी और कहा,”यस सर”

“मिस्टर कुलकर्णी की तरफ से तुम्हे कोई अपडेट मिला ? कुछ दिन पहले एक पार्टी में उन्होंने मुझसे कहा था कि उन्हें अपने नए सीरियल के लिए राइटर की तलाश है और मैंने तुमसे तुम से कहा था कि हमारी प्रोडक्शन के जितने भी बेस्ट राइटर्स है उनका एक लिस्ट बनाओ और उनके साथ मीटिंग फिक्स करो,,,,,,,,,,,क्या तुमने ये किया ?”,विक्रम ने कहा

“सर मिस्टर कुलकर्णी दो दिन पहले ही आपसे मिलने ऑफिस आये थे लेकिन आप यहाँ से जा चुके थे , मैंने आपको कई बार कॉल भी किया लेकिन आपने फोन नहीं उठाया और उसके बाद आप आज ऑफिस आये है,,,,,,,,,,,,,,!!!”,रीना ने मायूसी भरे स्वर में कहा
“तो इसका मतलब उन्होंने ये डील केंसल कर दी है ?”,विक्रम को याद आया कि उस शाम उसने अपनी सभी इम्पोर्टेन्ट मीटिंग्स को केंसल कर दिया था ताकि वह प्राची से मिलने जा सके , उसने निराशा भरे स्वर में कहा

रीना मुस्कुराई और कहा,”सर ! मैं आपको निराश कैसे कर सकती हूँ ? आपकी अब्सेंस में मैंने उनसे मिलकर सब फिक्स कर दिया। मिस्टर कुलकर्णी मुंबई से बाहर है। दो दिन बाद वो आपके साथ सभी राइटर्स से मिलेंगे”
विक्रम ने सुना तो मुस्कुराया और कहा,”ओह्ह्ह रीना ! थैंक्यू सो मच , मुझे तुमसे यही उम्मीद थी। तुम उन सभी राइटर्स की डिटेल मुझे मेल कर दो”

“स्योर सर,,,,,,,,,,आप कॉफी लेंगे ?”,रीना ने केबिन से बाहर जाते हुए पूछा
“येह स्योर”,विक्रम ने कहा और अपने लेपटॉप पर काम करने लगा।

कुछ देर बाद रीना एक हाथ में कॉफी मग और दूसरे हाथ में एक पेपर लिए केबिन में चली आयी।  रीना ने कॉफी विक्रम के साइड में रखी और पेपर उसकी तरफ बढाकर कहा,”सर मेल के साथ मैंने सभी राइटर्स के नाम और डिटेल इस पेपर पर भी प्रिंट कर दिया है।

विक्रम ने पेपर लिया और दूसरे हाथ से कप उठाकर एक घूंठ भरकर पेपर पर लिखे राइटर्स के नाम देखने लगा। पेपर पर खाली 8 राइटर्स के नाम लिखे थे जो कपूर प्रोडक्शन हॉउस के लिए काम करते थे।

सहसा ही विक्रम की आँखों के सामने अवनि का चेहरा आ गया और वो पल याद आ गए जब अवनि ने उसके मुँह पर उसके ऑफर को ठुकरा दिया था।
अवनि की याद आते ही विक्रम के चेहरे के भाव बदल गए , उसे अवनि से भी तो अपनी बेइज्जती का बदला लेना था और आज उसे मौका मिला था। अवनि के साथ ही उसे पृथ्वी को भी बर्बाद करना था और इसकी शुरुआत वह अवनि से करना चाहता था। उसने पेपर रीना की तरफ बढ़ाया और कहा,”इसमें एक नाम और ऐड करो अवनि मलिक”

अवनि मलिक का नाम सुनकर रीना ने हैरानी से विक्रम को देखा , रीना अच्छे से जानती थी कि अवनि इस प्रोडक्शन हॉउस के लिए काम नहीं करती ना ही भविष्य में कभी करेगी फिर विक्रम ने उसका नाम लिखने को क्यों कहा ? रीना ने विक्रम की तरफ देखा और कहा,”लेकिन सर ! अवनि मलिक ने तो बहुत पहले ही हमारे साथ काम करने से मना कर दिया है फिर आप उसका नाम इस लिस्ट में क्यों चाहते है ?”

विक्रम ने सुना तो गुस्से से रीना की तरफ देखा और कहा,”तुम से जितना कहा है उतना करो,,,,,,,,,,,ये लिस्ट मुझे अपडेट करके दो और सुनो अवनि मलिक का  नाम इस लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए”
“ओके सर,,,,,,,,,,,,,!!!”,रीना ने कहा और पेपर लेकर वहा से चली गयी। गुस्से के भाव अभी भी उसके चेहरे पर थे , एक बार अवनि ने उसे बेइज्जत किया था और अवनि के लिए पृथ्वी ने उसे मारा था और आज वह जिस प्राची को पसंद करता है वह भी उसी पृथ्वी के पीछे पागल थी।

विक्रम के लिए इन सब बातो का बस एक ही मतलब था और वो था “पृथ्वी उपाध्याय की बर्बादी”
विक्रम ने अपना सर पीछे झुका और आँखे बंद करके दो दिन बाद अवनि से होने वाली मुलाकात के बारे में सोचने लगा।

ऑफिस के लिए घर से निकला पृथ्वी देसाई ग्रुप जाने से पहले मौर्या ग्रुप जाना चाहता था ताकि नीलेश से मिल सके। सुबह नीलेश से फोन पर हुई बातचीत के बाद पृथ्वी लगा जैसे नीलेश किसी बात से परेशान है। पृथ्वी ट्रेन से नवी मुंबई जा रहा था , रोजाना की भांति आज भी उसे सीट नहीं मिली और उसे खड़े खड़े ही जाना पड़ रहा था।

पृथ्वी जैसे ही स्टेशन से बाहर आया मिस्टर देसाई ने वही नवी मुंबई में मीटिंग के लिए एक क्लाइंट के ऑफिस बुला लिया। अब चूँकि पृथ्वी मिस्टर देसाई का मैनेजर था इसलिए उसे जाना पड़ा। वह नीलेश से नहीं मिल पाया और मिस्टर देसाई के बताये ऑफिस आ पहुंचा।

पृथ्वी मीटिंग रूम में आया तो उसके कदम ठिठके क्योकि आज की मीटिंग में मिस्टर देसाई के साथ साथ प्राची देसाई और भरत भी मौजूद थे लेकिन पृथ्वी ने अपने मन की उलझन  पर नहीं आने दिया और पुरे कॉन्फिडेंस से आकर प्राची के बगल में खाली पड़ी कुर्सी पर आ बैठा।
इन चारो के अलावा वहा कुछ और लोग भी मौजूद थे और एक नए प्रोजेक्ट पर चर्चा कर रहे थे। आज की प्रेजेंटेशन प्राची ने दी और वह इतनी बेहतरीन थी कि पृथ्वी भी उसके लिए ताली बजाने से खुद को रोक नहीं पाया।

पृथ्वी को अपने लिए ताली बजाते देखकर प्राची तो ख़ुशी से फूली नहीं समाई , वही प्राची के वापस लौट आने से भरत कही न कही परेशान था। प्राची के चले जाने से वह कितना खुश था ओट बिना किसी डर के ऑफिस में अपनी मनमानियां करता था लेकिन अब तो प्राची को वापस ऑफिस में देखकर उसे अपनी MD की पोस्ट भी खतरे में नजर आ रही थी।

मीटिंग खत्म होने के बाद मिस्टर देसाई , भरत , पृथ्वी और प्राची ऑफिस से बाहर चले आये। मिस्टर देसाई को पृथ्वी को बहुत से काम समझाने थे इसलिए उन्होंने पृथ्वी से अपनी गाडी में ही चलने को कहा जिसे भरत चलाकर लाया था !

भरत ने गाडी की चाबी पृथ्वी की तरफ बढाकर धीमे स्वर में कहा,”गाडी तुम चलाओगे,,,,,,,,,,,,,वैसे भी तुम्हारी यही औकात है कि तुम मिस्टर देसाई के लिए गाडी चलाओ”
पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया वह ना भरत की बात से चिढ़ा ना ही उसे कोई जवाब दिया। उसने चाबी हाथ में ली और मिस्टर देसाई की तरफ पलटकर अपने हाथ से गर्दन खुजाकर कहा,”चले सर ?”

मिस्टर देसाई की नजर पृथ्वी की हथेली पर लगी बेंडेज पर पड़ी उन्होंने हैरानी से कहा,”क्या गाडी तुम चलाओगे ?”
“यस सर ! मिस्टर भरत चाहते है मैं ड्राइव करू ?”,पृथ्वी ने सहजता से कहा

“ओह्ह नो नो नो पृथ्वी , तुम ड्राइव नहीं करोगे तुम्हारे हाथ में चोट लगी है , एक काम करो चाबी भरत को दो और तुम आगे बैठो,,,,,,,,,,,,,चलो प्राची”,मिस्टर देसाई ने कहा और पिछली सीट का दरवाजा खोलकर अंदर आ बैठे
पृथ्वी ने भरत की हथेली पर चाबी रखी और मुस्कुराते हुए उसके सामने से गुजरकर ड्राइवर के बगल वाली सीट पर जा बैठा। भरत अंदर ही अंदर गुस्से से उबल पड़ा , कल के आये पृथ्वी को मिस्टर देसाई कितनी अहमियत दे रहे थे।  
“भरत !  क्या सोचने लगे ? चलो देर हो रही है”,खिड़की से बाहर झांककर मिस्टर देसाई ने कहा
भरत की तंद्रा टूटी उसने गाड़ी का दरवाजा खोला और ड्राइवर सीट पर आ बैठा। भरत ने एक नजर बगल में बैठे पृथ्वी को देखा और गाडी स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी।

पीछे बैठी प्राची अपने फ़ोन में बिजी थी और मिस्टर देसाई चुपचाप किसी सोच में डूबे खिड़की के बाहर देख रहे थे। उदासी और परेशानी मिस्टर देसाई के चेहरे पर साफ नजर आ रही थी। बीती रात के बाद उनकी विक्रम से बात करने की भी हिम्मत नहीं थी।

आगे बैठा पृथ्वी ख़ामोशी से सामने चल रहा था हालांकि उसके दिमाग में कई बाते एक साथ चल रही थी। भरत का असली चेहरा जल्द से जल्द उसे मिस्टर देसाई के सामने लाना था। पृथ्वी ने सामने देखा एक बाइक तेजी से उनकी तरफ आ रही थी लेकिन भरत ने बहुत ही अच्छे से और सावधानी से गाडी को साइड से निकाल लिया।


“नाइस मिस्टर भरत,,,,,,,,,,,,,,आपकी ड्राइविंग स्किल्स तो काफी अच्छी है,,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने भरत की तारीफ में कहा और फिर भरत की तरफ झुककर धीमे स्वर में कहा,”देसाई ग्रुप छोड़ने के बाद काम आएगी क्योकि इस पुरे शहर में कोई और कम्पनी आपको काम नहीं देगी तब घर चलाने के लिए आपकी ये ड्राइविंग ही काम आएगी”
 भरत ने सुना तो गुस्से से उसकी आँखे जल उठी और उसने पृथ्वी को देखा पृथ्वी आराम से वापस अपनी सीट पर टिक गया और खिड़की से बाहर देखने लगा।

दिनभर पृथ्वी मिस्टर देसाई के साथ बिजी रहा उसे नीलेश से मिलने या उस से बात करने का टाइम ही नहीं मिला। लंच टाइम में पृथ्वी थोड़ा फ्री हुआ तो उसने नीलेश को फोन किया और बाहर मिलने के लिए कहा ताकि वह उस से बात कर सके।  

अवनि नीलम भुआ के साथ नवी मुंबई की एग्जीबिशन में चली आयी ! अवनि ने लता से भी साथ आने को कहा लेकिन पैरो में दर्द होने की वजह से उन्होंने मना कर दिया और अवनि से घुमकर आने को कहा। अवनि और नीलम भुआ ने कुछ कपडे और कुछ सामान लिया। अवनि ने अपने लिए ढेर सारी किताबे ली जिन्हे वह काफी टाइम से पढ़ना चाहती थी।

सब खरीदारी करके अवनि और नीलम भुआ एग्जीबिशन से बाहर चली आयी। अवनि घर से आयी थी तब से उसके हाथ में एक बैग था जिसे देखकर नीलम भुआ ने कहा,”अरे अवनि ! ये इस बैग में क्या है ?”

 अवनि ने नीलम भुआ की तरफ देखा और मुस्कुरा कर कहा,”सुबह पृथ्वी अपना टिफिन ले जाना भूल गए थे , इसमें उनके लिए खाना है”
“और ये तुम घर से लेकर आयी हो ?”,नीलम भुआ ने हैरानी भरे स्वर में कहा
अवनि ने मुस्कुराते हुए हामी में गर्दन हिलायी तो नीलम भुआ ने बड़े प्यार से कहा,”अरे बेटा ! तुमने इतनी तकलीफ क्यों की ? वो आज आज बाहर खाना खा लेता,,,,,,,,!!!”

“उनका ऑफिस यही पास ही में है भुआ जी ! सोचा एग्जीबिशन के बाद उन्हें दे दूंगी”,अवनि ने कहा
नीलम भुआ ने अपनी कलाई पर बंधी घडी में समय देखकर कहा,”वैसे उसका लंच टाइम तो हो चुका है और मुझे भी भूख लगी है”

“भुआजी जी ! उनके ऑफिस के बगल में ही एक बहुत अच्छा रेस्त्रो है आप वहा कुछ खा लीजियेगा , तब तक मैं उन्हें उनका टिफिन देकर आ जाउंगी”,अवनि ने कहा
“हाँ ठीक है ! अब चले ?”,नीलम भुआ ने कहा
अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी और नीलम भुआ के साथ पृथ्वी के ऑफिस के बाहर चली आयी।

“अवनि तुम जाकर पृथ्वी को उसका टिफिन देकर आओ तब तक मैं हम दोनों के खाने के लिए कुछ आर्डर कर देती हूँ”,नीलम भुआ ने कहा
“आप मेरे साथ नहीं आएँगी ?’,अवनि ने पूछा
“नहीं ! ये उसके लिए बहुत ही ख़ास पल होगा जब पहली बार उसकी पत्नी उसके लिए खाना लेकर उसके ऑफिस जाएगी ! मैं नहीं चाहती मुझे तुम्हारे साथ देखकर वह ऑक्वर्ड हो और मैं इस मोमेंट को खराब करना नहीं चाहती इसलिए तुम जाओ,,,,,,,,,,,,,,मैं वहा तुम्हारा इंतजार करुँगी”,कहकर नीलम भुआ ऑफिस के बगल वाले रेस्त्रो की तरफ बढ़ गयी।  

अवनि मुस्कुराते हुए पृथ्वी के ऑफिस की तरफ बढ़ गयी। उसने बॉटनेक कुर्ती और पलाजो पहना था , कानो में झुमके , गले में मंगलसूत्र , मांग में सिंदूर , ललाट पर बिंदी , आँखों में काजल , होंठो पर हलकी लिपस्टिक थी और आधे बालों को समेटकर उनमे क्लेचर लगाया हुआ था। अवनि बहुत प्यारी लग रही थी।

वह झिझकते हुए ऑफिस के अंदर आयी।  ऑफिस में काम करने वालो की नजरें अवनि पर जा टिकी , कुछ तो अपनी जगह से उठ उठ कर अवनि को देख रहे थे जबकि वहा मौजूद लोगो को पता ही नहीं था कि ये उनके पुराने मैनेजर पृथ्वी उपाध्याय की पत्नी है।

अंकित अपने केबिन से निकलकर जयदीप के केबिन की तरफ जा ही रहा था कि उसकी नजर अवनि पर पड़ी और वह अवनि को यहाँ देखकर हैरान हुआ। अंकित अवनि के पास आया और कहा,”अरे भाभी ! आप यहाँ ?”
“हेलो ! मैं पृथ्वी से मिलने आयी थी,,,,,,,,,,,,,दरअसल वो अपना लंच घर भूल आये थे। मैं इस तरफ किसी काम से आयी थी सोचा उन्हें दे दू”,अवनि ने कहा

जयदीप भी नीलेश को कुछ समझाते हुए उसी वक्त अपने केबिन से बाहर निकला और उसने जैसे ही अवनि को अपने ऑफिस में देखा उसके चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे। जयदीप जानता था कि अवनि यहाँ पृथ्वी से मिलने आयी होगी और हो ना हो पृथ्वी ने अभी तक अवनि को अपनी नौकरी छोड़ने के बारे में नहीं बताया होगा।
वह अवनि को समझाने अवनि की तरफ बढ़ा की तभी अंकित ने अवनि से कहा,”अरे भाभी ! पृथ्वी लंच तो तब करेगा ना जब वो यहाँ होगा”

“मतलब ?”,अवनि ने पूछा
“मतलब ये कि पृथ्वी अब यहाँ काम नहीं करता , उसने तो दो हफ्ते पहले ही ये नौकरी छोड़ दी थी और अब वह देसाई ग्रुप में काम करता है। क्या पृथ्वी ने आपको इस बारे में नहीं बताया ?”,अंकित ने हैरानी भरे स्वर में कहा
अवनि ने सुना तो ख़ुशी उसके चेहरे से गायब हो गयी और चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये। जयदीप ने सुना तो मन ही मन अपना सर पीट लिया उसने अवनि की तरफ देखा ,

अवनि की नजरे जयदीप से मिली और फिर वह हाथ में पकड़ा बैग वही टेबल पर रखकर वहा से चली गयी !  अवनि की आँखों में पृथ्वी के लिए शिकायत देखने के बाद जयदीप चाहकर भी अवनि को रोक नहीं पाया।  

( क्या सुरभि बताएगी अवनि को अपने और सिद्धार्थ के बारे में या अब भी छुपाएगी उस से सच ? पृथ्वी को बर्बाद करने के लिए क्या विक्रम बनाएगा अवनि को अपनी नफरत का शिकार ? पृथ्वी का सच जानकर क्या टूट जाएगा अवनि का दिल और क्या समझ पायेगी वह पृथ्वी के हालात ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49

Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49Pasandida Aurat Season 3 – 49

Continue With Pasandida Aurat Season 3 – 50

Read pasandida aurat sanjana kirodiwal

Follow Me On https://www.instagram.com/sanjanakirodiwal/

संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal
Exit mobile version