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Pasandida Aurat Season 3 – 48

Pasandida Aurat Season 3 – 48

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

आनंदा निलय अपार्टमेंट , पनवेल
सुबह सुबह अपने कमरे में बिस्तर पर सोया पृथ्वी कोई प्यारा सा सपना देख रहा था कि खट पट से उसकी नींद टूट गयी। आँखे मूंदे पृथ्वी ने करवट ली और अपनी बाँह को बगल में लेटी अवनि पर डाला लेकिन अवनि तो वहा थी ही नहीं , पृथ्वी ने नींद में ही अपना हाथ बिस्तर पर घुमाया लेकिन अवनि सच में वहा नहीं थी उसने धीरे से अपनी आँखे खोली , अवनि को अपने बगल में ना पाकर पृथ्वी ने सामने दिवार पर लगी घडी की तरफ देखा जो कि सुबह के 7 बजा रही थी। पृथ्वी उबासी लेते हुए उठा और शीशे के सामने चला आया।

आजकल पृथ्वी की रातें सुकूनभरी बीत रही थी इसलिए दिनभर उसका चेहरा खिला खिला रहता था। पृथ्वी ने अपने बालों में से दो तीन बार हाथ घुमाया और फिर कमरे से बाहर चला आया। मंदिर के सामने खड़ी अवनि पूजा कर रही थी। पृथ्वी हाथ मुँह धोकर हॉल में चला आया और अवनि से कुछ दूर खड़े होकर प्यार से उसे देखने लगा। अवनि पूजा की प्लेट लेकर पृथ्वी के सामने आयी और उस से आरती लेने को कहा तो पृथ्वी ने पृथ्वी ने आरती ली लेकिन अपने सर से लगाने के बजाय अपने दोनों हाथो को अवनि के ही सर से लगा दिया।  

पृथ्वी हमेशा यही करता था खुद से पहले वह अवनि के लिए प्रार्थना करता था। अवनि मुस्कुराई और वापस मंदिर की तरफ चली गयी। पृथ्वी ने टेबल पर रखा अख़बार उठाया और सोफे पर आ बैठा। अख़बार के पहले पन्ने पर छपी खबर देखकर पृथ्वी मुस्कुरा उठा। अवनि पृथ्वी की तरफ आयी और देखा पृथ्वी इत्मीनान से अख़बार पढ़ रहा है। अवनि ने देखा हमेशा की तरह आज पृथ्वी को ऑफिस जाने की जल्दी भी नहीं थी।
“पृथ्वी ! आज आपको ऑफिस नहीं जाना क्या ?”,अवनि ने पृथ्वी के सामने आकर कहा

पृथ्वी ने अवनि का हाथ पकड़कर पकड़कर उसे अपनी गोद में बैठाया और अख़बार के दूसरे पन्ने पर छपी खबर दिखाकर कहा,”पहले ये देखो ! नवी मुंबई में आज एग्जीबिशन लगा है जहा फीमेल्स को 70% डिस्काउंट है,,,,,,,,,,,मेरे ऑफिस जाने के बाद तुम घर में अकेली बोर हो जाओगी , क्यों ना तुम यहाँ जाकर देखो ,, यहाँ कई बुक स्टॉल्स भी है”अवनि ने अखबार में छपी खबर देखी और कहा,”बाकि सब तो नहीं लेकिन हाँ यहाँ से मैं अपनी कुछ पसंदीदा किताबे खरीद सकती हूँ,,,,,,,,,,,,!!!”

“हम्म्म लेकिन तुम अकेले जाओगी कैसे ?”,पृथ्वी ने पूछा
“मैं नीलम भुआ के साथ जाउंगी ! आज उनकी छुट्टी है और उन्होंने कल मुझसे कहा था कि वो मुझे बाहर लेकर जाएँगी,,,,,,,,,,,तो क्यों ना हम इसी एग्जीबिशन में चले जाए”,अवनि ने खुश होकर कहा
“अच्छा आइडिआ है”,पृथ्वी ने कहा और अवनि के साथ शरारत करने लगा तो अवनि ने पृथ्वी की गोद उठकर कहा,”लेकिन आपके इरादे मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहे,,,,,,,,,,,,जाईये जाकर नहा लीजिये”

  पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और अपनी तरफ आने का इशारा किया लेकिन अवनि सुबह सुबह उसके अरमानो पर पानी फेरकर चली गयी ! पृथ्वी वही बैठा रहा तभी उसका फोन बजा स्क्रीन पर नीलेश का नाम देखकर पृथ्वी ने फोन उठाया और कहा,”हेलो ! हाँ नीलेश , कहो क्या बात है , तुमने इतनी सुबह मुझे फोन क्यों किया है ?”
“पृथ्वी ! अब हमे जल्द से जल्द इस खेल को खत्म कर देना चाहिए”,नीलेश ने गंभीर स्वर में कहा

“खत्म कर देना चाहिए ? अभी तो हमने शुरू किया है नीलेश , तुम इतनी जल्दी ये सब खत्म करने की बात क्यों कर रहे हो ?”,पृथ्वी ने हैरानी से पूछा
“क्योकि मैं चाहता हूँ मेरे बाप की सच्चाई जल्द से जल्द मिस्टर देसाई के सामने आ जाए और वे उन्हें अपनी कम्पनी से बाहर निकाल दे,,,,,,!!!”,नीलेश ने कहा
“ऐसा तुम इसलिए कह रहे हो ताकि मैं प्राची देसाई को कोई नुकसान ना पहुचाऊ ?”,पृथ्वी ने बीती शाम जयदीप के केबिन में हुई बातचीत को याद करके पूछा

“नहीं पृथ्वी ! इसकी वजह प्राची नहीं है”,नीलेश ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“तो फिर क्या वजह है नीलेश और तुम इतना परेशान क्यों हो ?”,पृथ्वी ने अपनेपन से कहा
“क्योकि मैं अपने बाप को इस हालत में नहीं देख सकता”,एकदम से नीलेश चिल्ला उठा। पृथ्वी हैरान था कि आखिर एक ही रात में नीलेश को ये क्या हो गया ? नीलेश को गुस्से में पाकर पृथ्वी कहा,”मैं थोड़ी देर में तुम से मिलता हूँ , इस बार में हम बैठकर बात करेंगे”

“हम्म्म,.,,,,,,,,,,,,,,,सॉरी ! मुझे तुम पर चिल्लाना नहीं चाहिए था”,नीलेश ने मायूसी भरे स्वर में कहा
“इट्स ओके ! मैं तुम से ऑफिस के बगल वाले कैफे में मिलूंगा”,पृथ्वी ने कहा और फोन काट दिया
 कुछ देर पहले जिस पृथ्वी के चेहरे पर ख़ुशी के भाव थे अब उसी चेहरे पर उलझन के भाव नजर आ रहे थे , आखिर नीलेश को क्या हुआ है ? क्या वह भरत से मिला था या फिर वजह कोई और है ? पृथ्वी के जहन में यही सवाल घूमते रहे और वह वही हॉल में खड़ा इस बारे में सोचता रहा।

अवनि किसी काम से किचन से बाहर आयी तो देखा पृथ्वी अभी तक हॉल में ही खड़ा है तो ये देखकर अवनि ने उसके पास आते हुए कहा,”पृथ्वी ! आप अभी तक नहाने नहीं गए ?”
अवनि की आवाज से पृथ्वी की तंद्रा टूटी , उसने अवनि की तरफ कहा,”हाँ मैं बस जा ही रहा हूँ”
“ठीक है जल्दी जाओ”,अवनि ने कहा  

पृथ्वी नहाने चला गया और अवनि उसके लिए नाश्ता बनाने किचन में चली गयी। पृथ्वी नहाकर आया तो देखा बिस्तर पर उसके लिए कपडे , रुमाल , घडी और उसका पर्स जमाकर रखा हुआ है। पृथ्वी तौलिये से अपने बालों को पोछते हुए बिस्तर की तरफ आया और तौलिया साइड में रखकर शर्ट उठाते हुए खुद में ही बड़बड़ाया,”ऐसे तो तुम मेरी आदतें बिगाड़ दोगी अवनि”

लेकिन साथ ही पृथ्वी को अवनि का यू परवाह करना भी अच्छा लग रहा था ! वह खुश था कि धीरे धीरे अवनि उसके प्यार को समझ रही थी। तैयार होकर पृथ्वी ने अपना ऑफिस बैग उठाया और कमरे से बाहर चला आया ! अवनि तब तक पृथ्वी के लिए नाश्ता लगा चुकी थी। पृथ्वी और अवनि दोनों ने नाश्ता किया और फिर पृथ्वी वाशबेसिन के सामने आकर हाथ धोने लगा। अवनि ने पृथ्वी के लिए लंच भी बनाया था लेकिन वह टिफिन किचन में ही भूल गयी। अवनि पृथ्वी को  तक आयी। दरवाजा अभी बंद था पृथ्वी ने अवनि के गाल पर आयी बालों की लट को पीछे किया और कहा,”तो मैं जाऊ ?”

“हम्म्म्म”,अवनि ने मुस्कुराकर हामी में गर्दन हिला दी
“एक मिनिट”,कहते हुए पृथ्वी ने अपनी जेब से पर्स निकाला और उसमे रखा डेबिट कार्ड निकालकर अवनि की तरफ बढाकर कहा,”इसे रखो , तुम्हे जो चाहिए खरीद लेना , कोड 20## है”
“पृथ्वी ! मेरे पास पैसे है मैं अपना कार्ड यूज कर लूंगी”,अवनि ने कहा
“कोई जरूरत नहीं है , तुम अपने पैसे बचाकर रखो काम आएंगे,,,,,,,,,,,,,,जो चाहिए इसमें से लेना”,पृथ्वी ने बड़े प्यार से कहा

अवनि ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगी और अवनि ने महसूस किया कि पृथ्वी उस से कुछ ज्यादा ही लंबा है तो उसने अपनी ऐड़िया उठाते हुए कहा,”आप इतने लम्बे क्यों है ?”
पृथ्वी कुछ समझ पाता इस से पहले अवनि ने अपने होंठो से उसके गाल को छुआ और कहा,”थैंक्यू,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी खुद अवनि के सामने चाहे जितना प्यार जताये लेकिन जब अवनि कभी कभार उस से प्यार जताती तो पृथ्वी खुश हो जाया करता था।

ख़ुशी के मारे उसके गाल लाल हो रहे थे उसने अवनि की तरफ देखकर कहा,”मैं सोच रहा हूँ आज ऑफिस से छुट्टी ले लू”
अवनि ने दरवाजा खोला और पृथ्वी को बाहर करके कहा,”कोई जरूरत है , ऑफिस जाईये”
“हाह ! तुम कितनी पत्थर दिल हो यार,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने मुँह बनाकर कहा लेकिन ऐसा करते हुए भी वह प्यारा लग रहा था।
अवनि ने मुस्कुराते हुए हाथ हिलाया और दरवाजा बंद कर दिया। पृथ्वी भी मुस्कुरा कर लिफ्ट की तरफ बढ़ गया।

अंदर आकर अवनि सीधा कमरे में चली आयी। उसने कुर्सी पर पड़ा तौलिया उठाया और उसे लेकर बालकनी में चली आयी। अवनि ने सब कपड़ो के साथ उसे भी बालकनी में सुखा दिया ! हॉल और कमरे की सफाई कर अवनि किचन में चली आयी तो नजर किचन प्लेटफॉर्म पर रखे टिफिन पर पड़ी
“पृथ्वी अपना लंच ले जाना तो भूल ही गए,,,,,,,,,,,,,,कोई बात नहीं आज उनका लंच लेकर मैं जाउंगी,,,,,,,,,,इसी बहाने उनका ऑफिस भी देख लुंगी”,अवनि ने कहा और फिर किचन साफ़ करने लगी।

देसाई मेंशन्स , मुंबई
बीती रात प्राची से हुई बहस और प्राची के शादी के लिए किये गए इंकार से मिस्टर देसाई को रातभर नींद नहीं आयी मिस्टर देसाई को लगा प्राची और विक्रम एक दूसरे को पसंद करते है इसलिए दोनों साथ घूमते फिरते है लेकिन ऐसा नहीं था ! प्राची अभी भी पृथ्वी को चाहती थी और उसे हासिल करने के सपने देख रही थी। मिस्टर देसाई ऑफिस जाने के लिए तैयार होकर आये और नाश्ते के लिए डायनिंग पर आ बैठे। नौकर ने उनके लिए नाश्ता लगा दिया।

मिस्टर देसाई ने अभी खाना शुरू ही किया था कि प्राची भी चली आयी और मिस्टर देसाई के सामने आ बैठी। उसने नौकर से नाश्ता लगाने को कहा। मिस्टर देसाई प्राची से नाराज थे इसलिए उन्होंने कोई बात नहीं की और चुपचाप अपना नाश्ता करने लगे।
“डेड ! मिस्टर शर्मा के नए प्रोजेक्ट को मैं डील करना चाहती हूँ”,प्राची ने खाते हुए कहा

मिस्टर देसाई ने सुना तो हैरानी से प्राची की तरफ देखा। पिछले कई दिनों से प्राची देसाई ग्रुप एंड कम्पनी से दूर थी और अब अचानक से वह ऑफिस आने की बात कर रही थी। मिस्टर देसाई प्राची को एकटक देखते रहे और फिर सधे हुए स्वर में कहा,”क्या तुम देसाई ग्रुप फिर से इसलिए ज्वाइन करना चाहती हो क्योकि पृथ्वी मेरा मैनेजर है ?’

“पृथ्वी के वहा होने या ना होने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता डेड , वो आपकी कम्पनी में सिर्फ एक मामूली सा मैनेजेर है और उस कम्पनी के होने वाले CEO की होने वाली Wife हूँ , एंड डेड बेहतर होगा प्रॉफेशनल चीजों में आप पर्सनल चीजे ना लाये,,,,,,,,,,,,शर्मा ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज के साथ मेरा रिलेशन अच्छा रहा है और आपकी कम्पनी में सिर्फ दो ही लोग है जो उन्हें इस डील के लिए एग्री कर सकता है , पहले आप खुद और दूसरी मैं,,,,,,,,,,,,,,,सो इस डील को मुझे देखने दीजिये”,प्राची ने बहुत ही गंभीर और शांत स्वर में कहा

मिस्टर देसाई समझ नहीं पा रहे थे आखिर प्राची के दिमाग में चल क्या रहा है ? बीती रात ही उसने मिस्टर देसाई से कितनी बहस की थी और अब वह उन्ही के साथ उनके ऑफिस आने की बात कर रही थी।
“और अगर मैं तुम्हे ऑफिस आने से मना कर दू तो ?”,मिस्टर देसाई ने कहा
“मैं फ्री में नहीं आ रही डेड बाकि एम्पलॉयज की तरह मैं आपसे सेलेरी लेने वाली हूँ,,,,,,,,,,,,,,,आप मुझे नौकरी से निकाल सकते है लेकिन ऑफिस आने से मना नहीं कर सकते , आज भी आपकी कम्पनी के 60% शेयर्स पर मेरा हक़ है,,,,,,,,,,,,!!!!”,प्राची ने कहा

मिस्टर देसाई को घुटने टेकने पड़े क्योकि वे जानते थे प्राची कितनी जिद्दी है , उन्होंने प्राची से नजरे हटाई और नाश्ता करते हुए कहा,”ठीक है मैं तुम्हे ऑफिस आने से नहीं रोकूंगा लेकिन तुम पृथ्वी से दूर रहोगी”
“मंजूर है , और कुछ डेड ?’,प्राची ने मुस्कुराकर कहा

मिस्टर देसाई ने ना में गर्दन हिला दी और उठकर वहा से चले गए। प्राची ने मिस्टर देसाई को जाते देखा और धीरे धीरे से बड़बड़ाई,”मैं तो पृथ्वी से दूर रहूंगी लेकिन पृथ्वी को मेरे पास आने से कैसे रोकेंगे आप ?”
एक बड़ी सी मुस्कान प्राची के होंठो पर तैर गयी और वह ख़ुशी ख़ुशी अपना नाश्ता करने लगी

सुरभि का घर , सिरोही
सुरभि के मम्मी पापा के कहने पर सिद्धार्थ रात में उनके घर ही रह गया। सुरभि खुश थी कि आखिरकार घरवाले मान ही गए और उसे ये सब के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी ! वह आराम से अपने कमरे में सुकून की नींद सो रही थी। सिद्धार्थ उसके भाई के कमरे में सो रहा था। फोन बजने से सिद्धार्थ की आँखे खुली , स्क्रीन पर जगदीश जी का नंबर देखकर सिद्धार्थ ने फोन उठाया और कान से लगा लिया लेकिन नेटवर्क ना होने की वजह से वह कमरे से बाहर आया और छत पर चला आया। सुबह सुबह ठंडी हवाये चल रही थी और बहुत ही सुकूनभरा माहौल था।

सिद्धार्थ ने जगदीश को वापस फोन लगाया और दूसरी तरफ से जगदीश जी ने कहा,”हेलो सिद्दू। वहा सब ठीक है ना ? तुम घर वापस कब आ रहे हो ?”
सिद्धार्थ ने बीती रात ही जगदीश जी और गिरिजा जी को फोन करके बता दिया था कि वह सुरभि को छोड़ने उदयपुर आया है लेकिन ये नहीं बताया क्यों ? जगदीश जी और गिरिजा जी को लगा अचानक सुरभि के यहाँ कोई दुर्घटना हो गयी होगी इसलिए सिद्धार्थ को जाना पड़ा , वे बस सुरभि को लेकर चिंतित थे।

“यहाँ सब ठीक है पापा ! मैं घर आकर आपको सब बताता हूँ”,सिद्धार्थ ने कहा
“हम्म्म ठीक है ! अपना ख्याल रखना और जल्दी वापस आना”,जगदीश जी ने कहा
“मैं अभी थोड़ी देर बाद यहाँ से निकल जाऊंगा”,सिद्धार्थ ने कहा और फोन काटकर जैसे ही पलटा उसकी नजर हाथ में चाय का कप लिए सुरभि पर पड़ी जो उसके लिए चाय लेकर आयी थी। सुरभि सिद्धार्थ के सामने आयी और कहा,”कहा निकल जाओगे तुम ?”

“अपने घर”,सिद्धार्थ ने कहा
“क्या ये तुम्हारा घर नहीं है ?”,सुरभि ने कहा
“ऐसी बात नहीं है , मम्मी पापा वहा अकेले है , उन्हें मेरी जरूरत है,,,,,,,,,,,,वैसे भी तुम्हे लेकर तुम्हारे मम्मी पापा की ग़लतफ़हमी दूर हो चुकी है ! अब वो तुमसे नाराज नहीं है,,,,,,,,,,,,!!!!”,सिद्धार्थ ने कहा
“हम्म्म्म लेकिन कल रात तो तुमने मुझे मरवा ही दिया होता , अगर पापा नहीं मानते और तुम्हे भगा देते फिर तुम क्या करते ? बोलो ?”,सुरभि ने कहा

“तुम्हारे पापा बहुत समझदार है , वो तुम्हारी तरह कम कम दिमाग वाले नहीं है”,सिद्धार्थ ने सुरभि के हाथ से चाय का कप लेकर कहा
“क्या ! तुमने मुझे कम दिमाग वाली कहा ? तुम्हे तो मैं छोडूंगी नहीं”,सुरभि ने सिद्धार्थ की बाँह पर मुक्का मारकर कहा , सिद्धार्थ के हाथ में पकडे कप से चाय गिरते गिरते बची और सिद्धार्थ ने सुरभि की तरफ देखकर कहा,”हाँ हो तुम कम दिमाग , एक लड़के के लिए कोई अपने घर से भागता है क्या ? रास्ते में तुम्हे कुछ हो जाता तो ?”
“तुम मेरे लिए सिर्फ एक लड़के नहीं हो”,सुरभि ने अपने नाख़ून कुतरते हुए कहा

सिद्धार्थ ने चाय का खाली कप दिवार पर रखा और सुरभि के सामने आकर कहा,”तो फिर मैं क्या हूँ ?”
सुरभि ने सामने खड़े सिद्धार्थ को देखा , सिद्धार्थ एकटक उसे देख रहा था , उसकी निगाहो ने सुरभि को बैचैन कर दिया और उसके दिल की धड़कने तेज हो गयी। सुरभि जो दिनभर बक बक करती रहती थी , इस वक्त सिद्धार्थ के सामने कुछ बोल ही नहीं पायी। सिद्धार्थ ने सुरभि की बाँह थामकर उसे अपने करीब किया और कहा,”बताओ सुरभि कौन लगता हूँ मैं तुम्हारा ?”

सुरभि ने कहा कुछ नहीं बस सिद्धार्थ के होंठो को अपने होंठो से छुआ और पीछे हटकर कहा,”जल्दी वापस आना”
सिद्धार्थ का दिल धड़क उठा , उसे सुरभि से ऐसी किसी हरकत की उम्मीद नहीं थी , वह सुरभि को रोकता या उस से कुछ कहता इस से पहले सुरभि वहा से भाग गयी और सिद्धार्थ मुस्कुरा उठा।

( क्या भरत के लिए जाग उठा है नीलेश का प्यार ? क्या प्राची सच में करना चाहती है देसाई ग्रुप की मदद या ये है बस पृथ्वी को पाने की कोई नयी चाल ? क्या बिन कहे सुरभि ने कर दिया है अपने इजहार ?  जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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