Pasandida Aurat Season 3 – 41
सिद्धार्थ का घर , सिरोही
सुबह सुबह सुरभि को अपने सामने देखकर सिद्धार्थ घबरा गया हालाँकि सुरभि को देखकर वह खुश भी था लेकिन सिर्फ उसने ही सुरभि को नहीं देखा था बल्कि सिद्धार्थ की पड़ोसन ने भी सुरभि को देख लिया था। पड़ोसन शोर मचाती इस से पहले सिद्धार्थ उसे समझाने उसकी तरफ चला गया और सुरभि अंदर चली आयी। सुरभि के पास ना कोई बैग था ना ही कोई सामान बस एक छोटा बैग था जो उसने अपने गले में डाल रखा था।
सुरभि को अंदर जाते देखकर सिद्धार्थ उसकी तरफ भागा , वह सुरभि को रोक पाता इस से पहले ही सुरभि अंदर हॉल में चली आयी। सुबह सुबह सुरभि को अपने घर में देखकर गिरिजा जी और जगदीश जो दोनों हैरान थे। सिद्धार्थ हैरान परेशान सा हॉल में पहुंचा तो सुरभि ने एक नजर उसे देखा और फिर जगदीश जी और गिरिजा को नमस्ते किया !
“तुम सुबह सुबह यहाँ क्या कर रही हो ?”,जगदीश जी ने बहुत ही शांत स्वर में पूछा
सुरभि ने सिद्धार्थ को देखा , फिर जगदीश जी को देखा और फिर इधर उधर देखने लगी। सिद्धार्थ की तो जान ही हलक में अटकी हुई थी ये सोचकर कि कही सुरभि जगदीश जी के सामने कुछ उलटा सीधा ना बोल दे। जगदीश जी और गिरिजा सुरभि के बोलने का इंतजार कर रहे थे ये देखकर सुरभि के बगल में खड़े सिद्धार्थ ने उसे धीरे से अपनी कोहनी मारी और आँखों ही आँखों में बोलने का इशारा किया !
“तुम ही बोल दो ना”,सुरभि ने चिढ़कर कहा
सिद्धार्थ मन ही मन झल्लाया , सुरभि ने खुद कुछ ना बोलकर उसे जो फंसा दिया !
जगदीश जी ने सिद्धार्थ की तरफ देखा और कहा,”सिद्धार्थ ! कहो क्या बात है , ये यहाँ क्या कर रही है ? क्या तुमने इसे बुलाया है ?”
“अह्ह्ह्ह पापा वो,,,,,,,,,,,,!!!”, सिद्धार्थ ने हिचकिचाते हुए कहा
सुरभि ने सिद्धार्थ को साइड किया और कहा,”अरे अंकल ! ये क्या बताएगा , मैं बताती हूँ ! इसने कहा आज ये आप लोगो के लिए नाश्ते में आलू के पराठे बनाने वाला है ! मैंने सुना तो मुँह में पानी आ गया और मैंने इस से कहा कि मुझे भी खाना है तो इसने कहा घर आ जाओ , इसलिए मैं आ गयी”
सुरभि ने अपनी तरफ से अजीब ही कोई कहानी जगदीश जी और गिरिजा जी को सुना दी , सिद्धार्थ मुँह फाडे बस सुरभि को देखता ही रह गया !
जगदीश जी को भी सुरभि की बात सुनकर थोड़ा अजीब लगा लेकिन वे उसे एकदम से वापस जाने को भी नहीं कह सकते थे। गिरिजा जगदीश के चेहरे पर आये भाव बखूबी समझ गयी इसलिए जगदीश जी के कुछ कहने से पहले ही वे सुरभि से बोल पड़ी,”अच्छा हुआ चली आई ! तुम वहा क्यों खड़ी हो ? आओ बैठो ना,,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि ख़ुशी ख़ुशी गिरिजा जी के बगल में आ बैठी और जैसे ही उसकी नजर उनके पैर पर बंधे प्लास्टर पर पड़ी तो उसने चौंककर कहा,”अरे आंटी ! ये कैसे हुआ ?”
“बाथरूम में फिसलकर गिर गयी थी बेटा , डॉक्टर ने 2 हफ्ते का प्लास्टर बांधा है और रेस्ट करने को कहा है”,गिरिजा जी ने कहा
“ओह्ह्ह ! फिर तो आप सबको बहुत प्रॉब्लम हो रही होगी ना ? आई मीन घर का काम , आपका ख्याल , ये कौन करता होगा ?”,सुरभि ने चिंता जताते हुए कहा
“सिद्दू है ना ! वो सब कर लेता है”,गिरिजा जी ने सिद्धार्थ की तरफ देखकर कहा
सिद्धार्थ तो बस मन ही मन सुरभि को लेकर परेशान था ! उसे सुरभि से बहुत कुछ पूछना था लेकिन पूछे कैसे ? सुरभि तो आते ही गिरिजा जी से बाते करने लगी और जगदीश जी भी बीच बीच में सुरभि से सवाल कर लेते। सिद्धार्थ बस खामोश खड़ा तीनो को देख रहा था ये देखकर सुरभि ने कहा,”तुम क्या खड़े होकर हमारी बाते सुन रहे हो जाओ जाकर आलू के पराठे बनाओ मुझे बहुत भूख लगी है”
“जी मैडम,,,,,,,,,,!!!!”,सिद्धार्थ ने अपने दाँत पीसते हुए कहा और सुरभि को घूरते हुए वहा से चला गया।
भरत का घर , मुंबई
सुबह से भरत का चेहरा ख़ुशी से चमक रहा है और वह बहुत खुश है ! आज उसे देसाई ग्रुप एंड कम्पनी के पेपर्स मिलने वाले थे जिन पर धोखे से वह मिस्टर देसाई के साइन लेकर कम्पनी को हड़पने वाला था ! नीलेश के जाने के बाद भरत इस घर में अकेला हो गया था लेकिन दौलत के सामने ना उसे नीलेश की अहमियत समझ आयी ना ही उसके साथ अपना रिश्ता।
शीशे के सामने खड़ा भरत गुनगुनाते हुए अपने बाल बना रहा था तभी उसका फोन बजा।
भरत ने कंघी साइड रखी और फोन उठाकर कान से लगा लिया तो दूसरी तरफ से उसके वकील की आवाज उभरी,”मिस्टर भरत ! आपके पेपर्स रेडी है , क्या मैं इन्हे लेकर देसाई ग्रुप आ जाऊ ?”
“नहीं नहीं ! तुम वहा मत आना। ऑफिस जाने से पहले मैं तुमसे मिलकर जाऊंगा तब पेपर्स भी ले लूंगा ! वैसे भी मिस्टर देसाई ने अगर तुम्हे वहा देखा तो उन्हें तुम पर शक हो जाएगा,,,,,,,,,,!!!!”,भरत ने गंभीर स्वर में कहा
“ठीक है सर लेकिन मेरा पैसा ?”,वकील ने कहा
“तुम्हारा पैसा आज शाम तक तुम्हारे अकाउंट में आ जाएगा ! एक बार देसाई ग्रुप मेरे नाम हो जाये उसके बाद मैं तुम्हे मुंह मांगी कीमत दूंगा”,भरत ने कहा
“थैंक्यू ! वैसे मुझे एक डाउट था”,वकील ने कहा
“कैसा डाउट ?”,भरत ने पूछा
“आपने मुझे बताया कि देसाई ग्रुप एंड कम्पनी मिस्टर देसाई और उनकी बेटी प्राची देसाई के नाम है ! आपने मिस्टर देसाई के लिए पेपर्स तो बनवा लिए लेकिन कम्पनी को अपने नाम करने के लिए आपको प्राची देसाई के सिग्नेचर की भी जरूरत पड़ेगी ! वो आप कैसे करेंगे ?”,वकील ने गंभीर स्वर में कहा
वकील की बात सुनकर भरत मुस्कुराया और कहा,”तुम्हे क्या मैं इतना बेवकूफ लगता हूँ ! उस प्राची देसाई के साइन तो मैंने उसी दिन ले लिए थे जिस दिन उसने मुझसे पृथ्वी उपाध्याय को लेकर एक सौदा किया था। हाह ! बेवकूफ लड़की उसे लगा मैं उसकी मदद कर रहा हूँ जबकि ये पता नहीं चला कि एक मामूली सी मदद के बदले मैं उसे ही इस्तेमाल कर रहा हूँ। अब मुझे बस इन पेपर्स पर बस देसाई के साइन चाहिए इसके बाद मैं उस देसाई और उसकी घमंडी बेटी को धक्के मारकर उनकी ही कम्पनी से बाहर निकलूंगा”
“मैंने जितना सोचा था आप तो उस से भी दो कदम आगे निकले सर”,वकील भी भरत के इस कमीनेपन की तारीफ किये बिना ना रह सका
“ठीक है मैं थोड़ी देर में मिलता हूँ तब तक तुम एक बार फिर पेपर पढ़ लो ! मुझे उसमे कोई गड़बड़ नहीं चाहिए”,भरत ने कहा और फोन काट दिया
वकील से बात करने के बाद भरत मन ही मन खुश हुआ , आज शाम होते होते वह इस शहर का सबसे आमिर आदमी बन जाएगा। सहसा ही भरत को नीलेश का ख्याल आया और उसने चेतन को फोन लगाया
दो रिंग के बाद ही चेतन ने फोन उठा लिया तो भरत ने कड़क स्वर में कहा,”चेतन ! मैंने तुमसे नीलेश का पता लगाने को कहा था , उसका क्या हुआ ?”
“सर आपके लिए एक बुरी खबर है”,चेतन ने गंभीर स्वर में कहा
चेतन की बात सुनकर भरत के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये और उसने कहा,”क्या ?”
चेतन ने एक गहरी साँस ली और कहा,”नीलेश का पता चल गया है और इस वक्त वह ‘मौर्या कम्पनी’ में मैनेजर है”
भरत ने जैसे ही सुना उसके चेहरे का रंग उड़ गया और दिल जोरो से धड़कने लगा। भरत ने सोचा नहीं था नीलेश उसे धोखा देकर जयदीप मौर्या से हाथ मिलाएगा।
“सर , सर , आप सुन रहे है न ?”,दूसरी तरफ से चेतन की आवाज उभरी
“तुमने खुद अपनी आँखों से उसे मौर्या कम्पनी में देखा ?”,भरत ने पूछा जैसे उसे अभी भी यकीन ना हुआ हो
“हाँ सर मैं सच कह रहा हूँ ! नीलेश ने जयदीप मौर्या से हाथ मिला लिया है अगर ये बात देसाई सर को पता चली तो गजब हो जाएगा”,चेतन ने घबराकर कहा
“शट-अप ! मैंने तुम्हे नीलेश को ढूंढने को कहा था , मौर्या ग्रुप ज्वाइन करने से पहले ही अगर तुम उसे ढूंढ लेते तो ये सब नहीं होता ! मुझे कुछ सोचने दो और तुम , तुम उस पर नजर रखो वो कहा जा रहा है किस से बात कर रहा है , मुझे सब खबर चाहिए,,,,,,,,,समझे तुम”,भरत ने गुस्से से चिल्लाकर कहा
“जी जी सर समझ गया”,चेतन ने घबराहटभरे स्वर में कहा और फोन काट दिया !
कुछ देर पहले जो भरत खुश था अब वही भरत गुस्से से तिलमिला उठा आखिर उसके राज नीलेश से बेहतर कौन जान सकता था ?
मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी के बाहर खड़े चेतन ने भरत से बात करके फोन काटा और अपने सामने खड़े नीलेश और जयदीप की तरफ देखकर मुस्कुराया तो नीलेश ने अपने जेब से कुछ रूपये निकालकर चेतन की शर्ट की जेब में रखकर कहा,”नाइस एक्टिंग”
“हाह ! तुम कितने कमीने हो कुछ पैसो के लिए अपने ही बॉस को धोखा दे रहे हो”,जयदीप ने कहा
“सही इंसान को धोखा दो तो गलत है लेकिन धोखेबाज को धोखा देना गलत नहीं होता , क्यों नीलेश सर ?”,चेतन ने कहा तो नीलेश बस हल्का सा मुस्कुरा दिया !
जयदीप का तो सब देखकर ही सर चकराने लगा उसे बस अब पृथ्वी का इंतजार था , वही था जो उसकी इस उलझन को दूर कर सकता था।
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
मिस्टर देसाई प्राची के साथ अपने ऑफिस पहुंचे। उन्होंने एक बोर्ड मीटिंग बुलाई जिसमे प्राची भी शामिल थी ! भरत अभी ऑफिस नहीं आया था इसलिए मिस्टर देसाई ने उसे इस मीटिंग में इन्वाइट भी नहीं किया क्योकि ये मीटिंग कम्पनी के शेयर होल्डर्स और मिस्टर देसाई के बीच थी ! कम्पनी के 60% शेयर्स अकेली प्राची के पास थे जो कुछ साल पहले ही मिस्टर देसाई ने उसके नाम किये थे और खुद 20% शेयर्स के साथ कम्पनी चला रहे थे। कम्पनी के बाकि शेयर्स दुसरो के पास थे ! मीटिंग काफी देर चली और सबने मिस्टर देसाई के आखरी फैसले पर अपनी सहमति जताई !
मिस्टर देसाई ने ऑफिस बॉय से कहकर सबके लिए चाय कॉफी का इंतजाम करवाया और खुद उठकर मीटिंग रूम से बाहर निकल गए। प्राची भी उनके पीछे पीछे मीटिंग रूम से बाहर निकल गयी।
मिस्टर देसाई अपने केबिन में आये और अपनी कुर्सी पर आ बैठे।
प्राची उनके सामने आ खड़ी हुई और कहा,”डेड ! आप ये क्या कर रहे है ? आपने मेरे हिस्से के शेयर्स वापस ले लिए और उन शेयर्स को किसी अननोन होल्डर के नाम डाल दिया है। आपने फैसला किया है कि मेरे 60% शेयर्स और आपके 20% शेयर्स को आप कम्पनी के नए CEO को सौंपने वाले है ! क्या मैं जान सकती हूँ वो नया CEO कौन है डेड ?”
मिस्टर देसाई ने प्राची को एक नजर देखा और बहुत ही सहजता से कहा,”जिस से तुम शादी करोगी”
“ओह्ह्ह कम ऑन डेड ! मैं जिस से शादी करुँगी उसे ये सब देना जरुरी है ? डेड मैं आपकी कम्पनी को बिना किसी की मदद के भी रन कर सकती हूँ फिर ये सब क्यों ?”,प्राची ने कहा
मिस्टर देसाई ने सुना तो उनके चेहरे के भाव थोड़े गंभीर हो गए और उन्होंने कहा,”क्योकि मरने से पहले मैं तुम्हारी जिम्मेदारी एक मजबूत और जिम्मेदार हाथो में सौंपना चाहता हूँ। इन दिनों कम्पनी में जो बदलाव हो रहे है उन्हें देखते हुए मुझे यही ठीक लगा कि मैं अपने सारे शेयर्स सिक्योर करके उस इंसान के नाम कर दू जो तुम्हे और इस कम्पनी दोनों को सम्हाल सके”
“और वो सिक्योर इंसान कौन है डेड ?”,प्राची ने चिढ़कर कहा
“इसका जवाब तुम्हे जल्द ही मिल जायेगा प्राची ! नाउ रिलेक्स , तुम्हे अपने डेड पर भरोसा होना चाहिए। मैं जो कुछ भी कर रहा हूँ बहुत सोच समझकर कर रहा हूँ। इस कम्पनी पर तुम्हारा भी उतना ही हक़ होगा जितना नए CEO का,,,,,,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने प्राची को समझाते हुए कहा
प्राची ने कुर्सी खिसकाई और उस पर बैठते हुए कहा,”इट्स ओके डेड ! मैं बस आपको लेकर वरीड हूँ ! कही नए CEO के चक्कर में कही आप मुसीबत में ना फंस जाए,,,,,,,,,,,,,बाय द वे आज की मीटिंग में आपने भरत देशमुख को इन्वाइट क्यों नहीं किया ?”
मिस्टर देसाई कुछ जवाब देते इस से पहले ही केबिन का दरवाजा खुला और भरत ने दरवाजा खटखटाकर कहा,”मे आई कम इन सर ?”
“ओह्ह भरत आओ आओ , तुम्हारी ही बात हो रही थी,,,,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने ख़ुशी भरे स्वर में कहा
भरत के हाथ में एक फाइल थी उसने आकर फाइल मिस्टर देसाई के सामने रखी और कहा,”सर ये शर्मा ग्रुप के प्रोजेक्ट के पेपर्स है , मुझे इन पर आपका सिग्नेचर चाहिए”
“आई ऍम सॉरी भरत मैं इन पेपर्स पर साइन नहीं कर सकता”,मिस्टर देसाई ने भरत को एकटक देखते हुए बड़े ही गंभीर स्वर में कहा
भरत ने सुना तो उसका दिल धड़का , ललाट पर पसीने की बुँदे उभर आयी क्योकि इन्ही पेपर्स के बीच एक पेपर वो भी था जिस पर भरत को मिस्टर देसाई के सिग्नेचर चाहिए थे। मिस्टर देसाई भरत पर इतना भरोसा करते थे कि बिना पेपर पढ़े उन पर साइन कर दिया करते थे लेकिन आज उन्होंने एकदम से मना कर दिया जिसे सुनकर भरत परेशान हो गया !
“क्यों सर ?”,भरत ने घबराहटभरे स्वर में पूछा
मिस्टर देसाई मुस्कुराये और कहा,”ओह्ह्ह भरत ! तुम तो खामखा परेशान हो गए ! मैं चाहता हूँ इन पेपर पर साइन करने से पहले मेरा नया मैनेजर एक बार इन्हे अच्छे से स्टडी कर ले”
“नया मैनेजर”,प्राची और भरत ने एक साथ कहा तो मिस्टर देसाई ने केबिन के दरवाजे की तरफ देखकर कहा,”मिस्टर मैनेजर”
जूतों के टक टक की आवाज प्राची और भरत के कानों में पड़ी तो दोनों ने पलटकर दरवाजे की तरफ देखा।
मिस्टर देसाई का नया मैनेजर अंदर आया और जैसे ही प्राची की नजर उस पर पड़ी वह अपनी कुर्सी से उठ खड़ी हुई और भरत के चेहरे का रंग उड़ गया।
( क्या सुरभि सच में आयी है सिद्धार्थ के घर आलू पराठे खाने या वजह है कुछ और ? क्या नीलेश के साथ मिलकर चेतन दे रहा है शुरू से ही भरत को धोखा ? आखिर कौन है मिस्टर देसाई का नया मैनेजर जिसे देखकर प्राची है हैरान और भरत के उड़ चुके है होश ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
वकील की बात सुनकर भरत मुस्कुराया और कहा,”तुम्हे क्या मैं इतना बेवकूफ लगता हूँ ! उस प्राची देसाई के साइन तो मैंने उसी दिन ले लिए थे जिस दिन उसने मुझसे पृथ्वी उपाध्याय को लेकर एक सौदा किया था। हाह ! बेवकूफ लड़की उसे लगा मैं उसकी मदद कर रहा हूँ जबकि ये पता नहीं चला कि एक मामूली सी मदद के बदले मैं उसे ही इस्तेमाल कर रहा हूँ। अब मुझे बस इन पेपर्स पर बस देसाई के साइन चाहिए इसके बाद मैं उस देसाई और उसकी घमंडी बेटी को धक्के मारकर उनकी ही कम्पनी से बाहर निकलूंगा”
