Pasandida Aurat Season 3 – 4
जयदीप का घर , मुंबई
“रीना सब तैयारी हो गयी ना ? वो दोनों बस पहुंचने वाले है”,जयदीप ने डायनिंग पर खाने की प्लेट रखकर कहा। रीना अपने कमरे में थी आज बहुत दिनों बाद उसने जयदीप का पसंदीदा नीला रंग पहना था और इस रंग में वह बहुत खूबसूरत लग रही थी।
रीना अपनी साड़ी की सलवटें सही करते हुए जयदीप की तरफ आयी और कहा,”ओह्ह्ह फ़ो जयदीप ! तुम खामखा परेशान हो रहे हो मैंने सब कर लिया है। खाना तैयार है , अवनि और पृथ्वी को देने वाले गिफ्ट्स पैक हो चुके है , खाने के बाद मीठे के लिए मैंने बाहर से कुछ स्पेशल आर्डर कर दिया है। अवनि पहली बार घर आ रही है उसकी खातिरदारी में किसी तरह की कोई कमी नहीं होगी”
“सिर्फ अवनि ही नहीं बल्कि मेरा पृथ्वी भी पहली बार घर आ रहा है”,जयदीप ने खुश होकर एकदम से कहा
रीना ने हैरानी से जयदीप को देखा और कहा,”क्या ! मेरा पृथ्वी ?”
“अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह क क कुछ नहीं कुछ नहीं,,,,,,,,,,,मैंने सब प्लेट्स लगा दिए है मैं चेंज करके आया”,जयदीप ने हड़बड़ा कर कहा और अपने कमरे में चला गया। रीना ने उसे जाते देखा और मुस्कुरा उठी।
जयदीप कपडे बदलकर आया और घडी में समय देखा जो कि शाम के 7 बजा रही थी। उसने रीना की तरफ देखा और कहा,”कहा रह गए वो लोग ? अब तक तो उन्हें आ जाना चाहिए था”
जयदीप का इतना कहना था कि तभी डोरबेल बजी और रीना ने मुस्कुरा कर कहा,”लगता है वो लोग आ गए”
जयदीप भी रीना के साथ दरवाजे की तरफ बढ़ गया। जयदीप ने दरवाजा खोला सामने अवनि और पृथ्वी खड़े थे। उन्हें साथ देखकर जयदीप का चेहरा खिल उठा उसने दोनों से अंदर आने को कहा।
पृथ्वी ने फॉर्मल पेंट शर्ट पहना था और अवनि ने पिले रंग की लाल बॉर्डर वाली बहुत ही सुन्दर साड़ी पहनी थी जो उसे नीलम भुआ से मिली थी।
गले में मंगलसूत्र , मेहंदी लगे हाथो में शादी का चूड़ा , माँग में सिंदूर और ललाट पर छोटी लाल बिंदी , आँखों में गहरा काजल और होंठो पर हलकी लिपस्टिक बस इस से ज्यादा अवनि ने कोई मेकअप नहीं किया था। बालों को गूंथकर सलीके से चोटी बनायीं हुई थी और उनसे छनकर आती दो लटें उसके गालो पर झूल रही थी।
अंदर आकर अवनि ने जयदीप के पैर छूने चाहे तो जयदीप ने उसे बीच में ही रोक दिया और कहा,”अरे ! ये क्या कर रही हो अवनि ? तुम्हे मेरे पैर नहीं छूने चाहिए”
“आपने मुझे अपनी छोटी बहन कहा है इस रिश्ते से आप मेरे बड़े भाई हुए और हमारे यहाँ बड़े भाई पिता समान होते है इसलिए मैंने आपके पैर छुए”,अवनि ने सहजता से कहा
जयदीप ने सुना तो अवनि को देखा और प्यार से कहा,”बस अवनि ! अब मुझे इतना बड़ा दर्जा भी मत दो”
अवनि मुस्कुराई , रीना की तरफ पलटकर अपने दोनों हाथ जोड़े और कहा,”नमस्ते,,,,,,,,!!!”
“खुश रहो ! सादगी में तुम और भी खूबसूरत लगती हो अवनि”,रीना ने अवनि का गाल छूकर प्यार से कहा तो अवनि मुस्कुरा दी।
चारो हॉल में पड़े सोफों पर आ बैठे। पृथ्वी और अवनि एक सोफे पर आ बैठे और जयदीप उनके बगल में पड़े सिंगल सोफे पर बैठ गया। रीना अवनि और पृथ्वी के लिए पानी लेने चली गयी। कुछ देर बाद रीना सबके लिए पानी ले आयी। उसने पृथ्वी और अवनि को पानी दिया और खुद जयदीप वाले सोफे के हत्थे पर आ बैठी और दोनों से बाते करने लगी।
कुछ देर इधर उधर की बाते चली और फिर जयदीप ने दोनों को डायनिंग की तरफ चलने को कहा। पृथ्वी जब से आया था तब से बहुत कम बात कर रहा था। अवनि और रीना ने इस पर ध्यान नहीं दिया लेकिन जयदीप समझ गया कुछ बात है इसलिए खाना खाने के बाद उसने रीना से कहा,”रीना ! अवनि को अपना घर दिखाओ”
“हाँ क्यों नहीं ! आओ अवनि”,रीना ने मुस्कुरा कर कहा
अवनि रीना के साथ जाने लगी तो पृथ्वी भी उन दोनों के पीछे चल पड़ा। जयदीप ने पृथ्वी की बाँह पकड़कर उसे रोका और कहा,”तुम कहा चले ?”
“आपका घर देखने”,पृथ्वी ने मासूमियत से कहा
“इसकी कोई जरूरत नहीं , घर तुम बाद में देख लेना पहले मेरे साथ आओ”,कहकर जयदीप पृथ्वी की बाँह थामे उसे बालकनी की तरफ ले आया और अपने सामने करके कहा,”क्या चल रहा है ?”
“क्या चल रहा है मतलब ?”,पृथ्वी ने हैरानी भरे स्वर में कहा
जयदीप ने एक नजर पृथ्वी को देखा और कहा,”पृथ्वी मैं देख रहा है तुम कुछ परेशान हो। जब तुम घर आये तब चुप थे , हम सब हॉल में बैठे थे तब भी चुप थे , खाने की टेबल पर भी चुप थे,,,,,,क्या हुआ है पृथ्वी , सब ठीक तो है ना ?”
पृथ्वी ने सुना तो अपनी पीठ रेलिंग से लगा ली और अपने हाथो को बाँधकर सामने देखते हुए कहा,”समझ नहीं आ रहा अवनि को अपनी नौकरी छोड़ने के बारे में कैसे बताऊ ? इतने टाइम बाद वो दिल से खुश है और मैं उसकी खुशिया छीनना नहीं चाहता। अगर मैंने उसे बताया कि मैंने नौकरी छोड़ दी है तो इन सब की वजह कही वो खुद को ना समझ ले”
पृथ्वी की बात सुनकर जयदीप भी एक पल के लिए परेशान हुआ और फिर कहा,”अवनि को बताने से पहले तुम मौर्या कम्पनी फिर से ज्वाइन कर लो”
“नहीं सर ! मैं नहीं चाहता मेरी वजह से आपकी इतने सालों की मेहनत बर्बाद जाए। देसाई ग्रुप ने अभी डील कन्फर्म की है ,, उन्हें मार्किट में आने और उन पर काम शुरू होने 3 महीने लग जायेंगे। मैं चाहता हूँ आप अपने सपने पुरे करे”,पृथ्वी ने जयदीप की तरफ देखकर कहा
“ठीक है सिर्फ 3 महीने ना पृथ्वी 3 महीने बाद तो तुम मेरी कम्पनी वापस ज्वाइन कर सकते हो ना और अब से मैं देसाई ग्रुप के साथ कोई प्रोजेक्ट साइन नहीं करने वाला ये मेरा आखरी प्रोजेक्ट समझो,,,,,,,,,देसाई ग्रुप के बिजनेस सपोर्ट के लिए मैं तुम जैसे होनहार और ईमानदार एम्प्लॉय को नहीं खोना चाहता,,,,,,,!!
तुम्हे पता है तुम्हारे बिना वो ऑफिस बेजान लगता है। मेरा ऑफिस जाने का मन नहीं करता। तुम्हारी टीम अब पहले से ज्यादा सीरियस हो गयी है और सिर्फ अपने काम में ध्यान देती है। सच कहू तो हम सबको तुम्हारी आदत हो चुकी है। मैं तो कहता हूँ भाड़ में जाए देसाई ग्रुप और उनकी डील , तुम तुम वापस आ जाओ पृथ्वी , हम मिलकर सब ठीक कर लेंगे”,जयदीप ने बेचैनी भरे स्वर में कहा
पृथ्वी ने सुना तो हल्का सा मुक्सुराया और कहा,”सर ! आपको क्या लगता है आपकी कम्पनी मैंने भरत के डर से छोड़ी है ?”
जयदीप ने हामी में गर्दन हिलायी तो पृथ्वी थोड़ा और मुस्कुराया और अपने हाथो को खोलकर बालकनी की रेलिंग पर फैलाकर कहा,”आपको याद है मैंने आपसे कहा था कि मैं इस दुनिया में सिर्फ एक ही चीज से डरता हूँ,,,,,,,,,,,,,आपकी नौकरी मैंने भरत या देसाई ग्रुप के डर से नहीं छोड़ी बल्कि उन सबको उनकी सही जगह दिखाने के लिए छोड़ी है”
पृथ्वी की बातें सुनकर जयदीप के चेहरे पर चिंता के भाव आये और उसने कहा,”तुम क्या करने वाले हो पृथ्वी ?”
“जल्दी ही आपको पता चल जायेगा और फ़िलहाल मुझे बस इस बात की चिंता है कि मैं अवनि को कैसे समझाऊंगा ? कल से ऑफिस की छुट्टिया खत्म हो जाएगी और मुझे ऑफिस जाना पडेगा”,पृथ्वी ने कहा
जयदीप ने सुना और कहा,”तो तुम्हे अवनि को सच बताने के लिए कितना वक्त चाहिए ?”
“बस मुझे एक हफ्ता मिल जाये तो मैं सब ठीक कर लूंगा”,पृथ्वी ने कहा
“समझो मिल गया”,जयदीप ने मुस्कुरा कर कहा
“मैं कुछ समझा नहीं ?”,पृथ्वी ने कहा
जयदीप ने पृथ्वी के कंधो पर बाँह रखी और उसे हॉल की तरफ ले जाते हुए कहा,”आओ ! मैं समझाता हूँ”
जयदीप पृथ्वी के साथ हॉल में आया तब तक रीना भी अवनि को अपना घर दिखा चुकी थी और दोनों हॉल में चली आयी। रात के 10 बज रहे थे और दोनों को घर भी जाना था इसलिए पृथ्वी ने जयदीप और रीना से जाने की इजाजत मांगी। जयदीप ने अवनि और पृथ्वी से बैठने को कहा और और खुद रीना के साथ कमरे में चला गया।
अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा तो वह हल्का सा मुस्कुराया। अवनि भांप गयी की पृथ्वी की ये मुस्कुराहट असली नहीं है लेकिन इस वक्त उसने पृथ्वी से कुछ नहीं पूछा। कुछ देर बाद जयदीप और रीना अपने हाथो में कुछ तोहफे ओर सामान उठाये बाहर आये। जयदीप ने पृथ्वी को तिलक किया , उसे शगुन का लिफाफा दिया , कपडे दिए और साथ में कुछ गिफ्ट्स भी तो वही रीना ने अवनि का तिलक किया और उसे अपनी साड़ी का पल्लू आगे करने को कहा।
अवनि ने पल्लू आगे किया तो रीना ने थाली में भरा पीला चावल और एक चाँदी का सिक्का अवनि की झोली में डाल दिया। इसके बाद कपडे और तोहफे दिए। अवनि को ये सब लेते हुए अजीब लग रहा था उसने झिझकते हुए पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने पलकें झपकाकर हामी में गर्दन हिलायी और अवनि से सब लेने का इशारा कर दिया।
जयदीप और रीना के चेहरे ख़ुशी से चमक रहे थे। रीना ने दोनों का सामान बैग में रख दिया और उसके बाद जयदीप के बगल में चली आयी और मुस्कुराकर दोनों को देखने लगी।
रीना के साथ जयदीप भी मुस्कुरा रहा था ये देखकर पृथ्वी को थोड़ा अजीब लगा। कुछ देर बाद जयदीप ने अपने जैकेट के जेब से एक लिफाफा निकाला और रीना की तरफ बढाकर पृथ्वी और अवनि को देने का इशारा किया। रीना ने ख़ुशी ख़ुशी लिफाफा पृथ्वी और अवनि की तरफ बढ़ाया। पृथ्वी ने लिफाफा लिया और कहा,”ये क्या है ?”
“तुम दोनों के हनीमून के लिए फ्लाइट टिकट्स और गोआ के रिसोर्ट की बुकिंग”,जयदीप ने कहा
“लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी , माफ़ करना मैं ये नहीं ले सकता”,पृथ्वी ने कहा
“तुम दोनों की शादी हो चुकी है और फ़िलहाल इसी की जरूरत है इसलिए चुपचाप रखो , कल शाम 5 बजे की फ्लाइट है”,जयदीप ने कहा
शाम 5 बजे का नाम सुनकर पृथ्वी को आज दोपहर में आये मैसेज की याद आयी और साथ ही उसे याद आया कि कल शाम 5 बजे का तो उसने किसी को टाइम दिया है। उसे परेशान देखकर जयदीप ने कहा,”अब मान भी जाओ पृथ्वी , वैसे भी ये मेरा नहीं बल्कि रीना का आईडिया है,,,,,,,,इसी ने तुम दोनों के लिए ये सब प्लान किया है”
अवनि तो चुप थी , ऐसी सिटुअशन में भला वह क्या कहती ? वही पृथ्वी थोड़ा परेशान था उसने जयदीप की तरफ देखा और कहा,”लेकिन मैं,,,,,,,,,,,,!!!”
“लेकिन वेकिन कुछ नहीं , क्या तुम अपनी भाभी की बात नहीं मानोगे ? क्या मैं और जय तुम दोनों के कुछ नहीं लगते ?”.इस बार रीना ने कहा
“ऐसी बात नहीं है”,पृथ्वी ने धीरे से कहा
“तो फिर ठीक है , कल सुबह पैकिंग करो और शाम की फ्लाइट से निकल जाओ”,रीना ने कहा
पृथ्वी के पास जयदीप और रीना की बात मानने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था। उसने जयदीप की तरफ देखा तो जयदीप मुस्कुराया , जयदीप को मुस्कुराते देखकर पृथ्वी सहसा ही अहसास हुआ कि हनीमून के बहाने वह एक हफ्ते तक अवनि से अपने नौकरी छोड़ने की बात छुपा सकता है। पृथ्वी को समझ आया तो वह भी मुस्कुरा उठा और उसे मुस्कुराते देखकर जयदीप के दिल को राहत मिली।
रीना और जयदीप पृथ्वी और अवनि को छोड़ने नीचे तक आये। कैब आ चुकी थी पृथ्वी अवनि को लेकर वहा से निकल गया। उनके जाने के बाद रीना जयदीप की तरफ पलटी और कहा,”ये हनीमून आपने प्लान किया फिर आपने उनके सामने मेरा नाम क्यों लिया ?”
जयदीप ने रीना के कंधो पर हाथ रखा और उसे साथ लेकर लिफ्ट की तरफ बढ़ते हुए कहा,”वो जो लड़का कुछ देर पहले यहाँ खड़ा था रीना , वो एक बहुत ही खुद्दार लड़का है।
भले उसने मेरी नौकरी छोड़ दी लेकिन आज भी मैं उसके लिए उसका बॉस ही हूँ और अपने बॉस से ये सब लेना उसे मंजूर नहीं , इसलिए मैंने तुम्हारा नाम लिया। मुझे ख़ुशी होगी जब इस सफर के साथ अवनि और पृथ्वी अपनी जिंदगी की नयी शुरुआत करेंगे”
रीना ने सुना तो जयदीप के सीने से लगकर कहा,”ओह्ह्ह जय ! तुम बहुत अच्छे हो,,,,,,,,,,,,,आई लव यू”
“आई लव यू सो मच”,जयदीप ने अपने होंठो से रीना का ललाट छूकर कहा और दोनों लिफ्ट के अंदर चले गए।
कैब की पिछली सीट पर बैठी अवनि खुश थी और उसके बगल में बैठे पृथ्वी के चेहरे पर उलझन और परेशानी के भाव थे इसलिए वह खिड़की से बाहर देख रहा था। अवनि ने देखा तो उसने अपना हाथ धीरे से पृथ्वी के हाथ पर रख दिया। पृथ्वी को अपने हाथ पर अवनि का हाथ महसूस हुआ तो उसने अपने हाथ को पलटकर मजबूती से अवनि का हाथ थाम लिया।
“पृथ्वी,,,,,,,,,,,!!!!”,अवनि ने धीरे से कहा
अवनि की आवाज से पृथ्वी की तन्द्रा टूटी उसने अपनी गर्दन अवनि की तरफ घुमाई और कहा,”हाँ अवनि”
अवनि ने अपना दूसरा हाथ अपने और पृथ्वी के हाथ पर रखा और उसकी तरफ पलटकर कहा,”पृथ्वी ! जयदीप भैया और रीना भाभी बहुत अच्छे है। जयदीप भैया भले ही आपके बॉस है लेकिन उन्होंने हमेशा आपसे प्यार किया है और आपको कभी अपना एम्प्लॉय नहीं समझा बल्कि उस से बढ़कर ही माना ! पृथ्वी कभी उनके साथ कोई दगा मत करना , उनके अच्छे बुरे वक्त में उनके साथ रहना।
वो बहुत अच्छे इंसान है , मुझे खुश है आप इतने अच्छे इंसान के साथ काम करते है,,,,,,,,,,इस बार जब आप ऑफिस जायेंगे तो मै उनके लिए कुछ स्पेशल बनाकर दूंगी आप उन्हें मेरी तरफ दे देना,,,,,,,,,,,एक छोटे से थैंक्यू के रूप में”
पृथ्वी ने सुना तो उसका मन उदासी से भर गया। अवनि ऑफिस जाने की बात कर रही थी। पृथ्वी अवनि को अभी सच बताना नहीं चाहता था इसलिए जबरदस्ती अपने होंठो पर मुस्कान लाकर कहा,”उन्हें मशरूम बहुत पसंद है , तुम उनके लिए वही बनाना”
अवनि ने सुना तो हामी में सर हिलाते हुए मुस्कुरा उठी और पृथ्वी की बाँह थामकर अपना सर उसके कंधे पर टिका लिया।
रवि जी का घर , पनवेल
“आपने पृथ्वी से बात की ?”,लता ने रवि जी के सामने खाने की प्लेट रखते हुए कहा
लक्षित बाहर अपने दोस्तों के साथ गया था और दादी आज चाचा के घर थी। शादी की भागदौड़ के चलते पूरा घर अस्त व्यस्त था और सामान से भरा हुआ था। रवि जी अकेले थे इसलिए लता को उनसे पृथ्वी और अवनि के बारे में बात करने का मौका मिल गया।
लता की बात सुनकर रवि जी निवाला तोड़ा और कहा,”जल्दी क्या है लता ? अभी उनकी शादी हुई है उन्हें थोड़ा वक्त साथ गुजारने दो फिर बात करेंगे,,,,,,,,,,वैसे मैं कहूंगा कि वो दोनों अपने फ्लेट में ही रहे तो ज्यादा बेहतर है। तुम और मैं कभी कभार वही जाकर उनसे मिल लिया करेंगे या उन्हें यहाँ बुला लिया करेंगे,,,,,,,,,,ये घर छोटा है यहाँ सब साथ कैसे रह पाएंगे ?”
“कैसी बातें कर रहे है आप ? बेटे की शादी हो गयी है अब तो वह अपनी पत्नी के साथ हमारे साथ रह सकता है ना और घर छोटा है तो क्या हुआ हम थोड़ा बड़ा घर लेंगे लेकिन रहेंगे सब साथ ही,,,,,,,,,,,,, कल को अवनि को ये ना लगे कि हमने उसे अपनाया नहीं”,लता ने कहा और उठकर किचन की तरफ चली गयी।
“लता ! ऐसा तुम सोच रही हो , अवनि और पृथ्वी दोनों समझदार है और अपनी जिम्मेदारियां समझते है,,,,,,,दोनों ने मिलकर उस फ्लेट को घर बनाया है और तुम चाहती हो मैं उन्हें वो छोड़कर नए घर में आने के लिए कहू,,,,,,,,,,,ये गलत बात है लता”,रवि जी ने लता को समझाते हुए कहा
लता जी प्लेट में चपाती लिए किचन से बाहर आयी और रवि जी की प्लेट में रखते हुए कहा,”बच्चे अपने माँ बाप के साथ रहे तो गलत है ? मैं कुछ नहीं जानती आप पृथ्वी से बात करेंगे बस,,,,,,,,,,,,,!!!”
लता की जिद के आगे भला किसकी चली है जो रवि जी की चलती उन्हें झुकना पड़ा और उन्होंने लता जी को छेड़ते हुए कहा,”अच्छा अच्छा अब समझा , अवनि यहाँ नहीं रहेगी तो तुम सास बनकर उस पर हुकुम कैसे चलाओगी ?”
लता ने सुना तो थोड़ा उदास हो गयी और रवि जी के बगल में पड़ी खाली कुर्सी पर बैठते हुए बुझे स्वर में कहा,”कैसी बातें करते है जी ? उसकी माँ नहीं है , मैं सास बनकर हुकुम चलाने के बजाय उसे माँ का प्यार देना चाहती हूँ बस इसलिए चाहती हूँ कि वो हमारे साथ रहे और कोई वजह नहीं है”
लता को उदास देखकर रवि जी ने प्यार से कहा,”अरे ! तुम तो उदास हो गयी , ठीक है मैं कल ही पृथ्वी से बात करता हूँ,,,,,,,,!!!”
लता ने सुना तो मुस्कुराई और हामी में गर्दन हिला दी।
( क्या सफल होगा अवनि और पृथ्वी का हनीमून या आयेगी वहा कोई मुसीबत ? क्या पृथ्वी मिल पायेगा उस मैसेज वाले शख्स से और जान पायेगा उसके इरादे ? क्या रवि जी मना पाएंगे पृथ्वी को वापस घर आने के लिए ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
