Pasandida Aurat Season 3 – 21
कमरे की खिड़की के पास खड़ा पृथ्वी कॉफी पीते हुए बाहर के नज़ारे देखने लगा। कॉफी पीकर उसने बैग से कपडे निकाले और नहाने चला गया ! उसने सोचा वह नहाकर आएगा तब तक अवनि उठ जायेगी लेकिन अवनि ऐसा सोइ ऐसा सोई की उठने का नाम ही नहीं लिया। पृथ्वी ने कपडे बदले तैयार हुआ और एक बार फिर अवनि को जगाने लगा लेकिन अवनि ने तकिया उठाकर अपने मुँह पर रखा और सो गयी। वह गहरी नींद में थी और शराब का नशा अभी भी थोड़ा थोड़ा उसके सर चढ़ा हुआ था।
पृथ्वी ने कलाई पर बंधी घडी में समय देखा जो कि 12:30 बजा रही थी। पृथ्वी ने रात में भी ठीक से कुछ खाया पीया नहीं था इसलिए उसे अब जोरो से भूख लगने लगी। उसने अवनि को सोने दिया और खुद सोफे की तरफ चला आया। उसने रिस्पेशन पर फोन किया और अपने लिए सेंडविच और पास्ता आर्डर किया। खाना आने में वक्त था इसलिए पृथ्वी को वो बैग याद आया जो उसे एयरपोर्ट पर किसी अनजान ने थमाया था। पृथ्वी ने अपने बैगपैक से उसे निकाला और सोफे पर आ बैठा।
पृथ्वी को बैग में एक पेन ड्राइव और कुछ पेपर्स मिले जिन्हे देखकर उसकी आँखे हैरानी से बड़ी हो गयी। पृथ्वी ने एक एक करके सभी पेपर्स देखे और फिर उन्हें वापस बैग में रखकर पेन ड्राइव को बाहर निकाला और देखने लगा। पृथ्वी को धीरे सब समझ आ रहा था और अब गोआ से वापस मुंबई लौटने के बाद उसके पास एक इम्पोर्टेन्ट काम भी था। पृथ्वी अपने विचारो में उलझा था कि तभी बेल बजी ! उसने उस पेन ड्राइव को वापस बैग में रखा और उठकर दरवाजा खोला सामने वेटर खाना लिए खड़ा था।
पृथ्वी ने खाना लिया और दरवाजा वापस बंद कर दिया। उसने देखा अवनि अभी भी सो रही है तो वह सोफे की तरफ चला आया और अपने फ़ोन में काम करते हुए खाने लगा।
खाना खाकर पृथ्वी अवनि की तरफ आया और उसके बगल में बैठकर उसे देखने लगा। अवनि सो रही थी और सोते हुए वह बड़ी प्यारी लग रही थी। पृथ्वी को अकेले बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था वह अवनि से बात करना चाहता था , उसके साथ वक्त बिताना चाहता था लेकिन अवनि को तो जैसे कोई परवाह ही नहीं थी। पृथ्वी का मन उदास हो गया , क्या किस्मत थी उसकी शादी के इतने वक्त बाद भी वह अपनी पर अपना हक़ नहीं जाता पा रहा था।
पृथ्वी ने अवनि को जगाने के लिए उसका गाल थपथपाया लेकिन अवनि ने नींद में पृथ्वी का हाथ साइड में कर दिया और इस बार पृथ्वी चिढ गया। हालाँकि वह अवनि पर कभी गुस्सा होता नहीं था लेकिन ना जाने क्यों आज उसे थोड़ा गुस्सा आया। वह उठा और अवनि के पैरों के पास पड़ी चद्दर उठाकर उसे ओढ़ा दी। उसने खिड़कियों के परदे गिराए और कमरे की लाइट बंद करके कमरे से बाहर निकल गया।
पृथ्वी अकेला ही बीच पर चला आया। आसमान में काले बादल छाये हुए थे और धुप का नामोनिशान तक नहीं था। मौसम बहुत ही सुहावना और प्यारा था लेकिन पृथ्वी के चेहरे पर उदासी थी। उस बीच पर ज्यादातर कपल्स ही थे। कोई एक दूसरे का हाथ थामे चल रहा था तो कोई बाँहे थामे और ये सब देखकर पृथ्वी अवनि को बहुत मिस कर रहा था लेकिन अवनि उसके साथ नहीं थी। पृथ्वी बीच पर घूमते घूमते काफी दूर निकल गया उसे विश्वास था कि अवनि जब नींद से जागेगी तो उसे फोन जरूर करेगी।
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
“मैं सोच भी नहीं सकता प्रवीण ऐसा करेगा ? कुछ रुपयों के लिए उसने मुझे धोखा दिया और इल्जाम तुम पर लगाया,,,,,,,,,,,,वो ऐसा कैसे कर सकता है ?”,अपने केबिन में कुर्सी पर बैठे मिस्टर देसाई ने भरत से कहा जो कि हाथ बंधे मिस्टर देसाई के सामने खड़ा था
“जाने दीजिये सर ! ये तो अच्छा हुआ कि उसने कोई बड़ी बेईमानी नहीं की,,,,,,,,,,इंसान के सामने जब पैसा आता है तो वह ईमानदारी भूल जाता है सर”,भरत ने मिस्टर देसाई को दिलासा देकर कहा
“तुम तो ऐसे नहीं हो भरत , धोखा देना तो दूर तुमने तो कभी मुझे शिकायत का मौका तक नहीं दिया , इसलिए मैं तुम पर इतना भरोसा करता हूँ भरत क्योकि मैं जानता हूँ तुम मुझे कभी धोखा नहीं दोगे”,मिस्टर देसाई ने कहा
“सर ! आपको धोखा देने से अच्छा मैं मरना पसंद करूंगा”,भरत ने विश्वास के साथ कहा
“ओह्ह्ह भरत ! तुम नहीं होते तो आज ये कम्पनी इस मुकाम पर नहीं होती,,,,,,,,,,,प्रवीण को मैंने ऑफिस से निकाल तो दिया है लेकिन तुम उसके सभी पेमेंट्स क्लियर कर देना और उसे कुछ ज्यादा कंपनसेशन ( मुआवजा ) दे देना जिस से उसकी फॅमिली को कोई परेशानी ना हो”,मिस्टर देसाई ने कहा
“सर आप सच में बहुत अच्छे इंसान है ! प्रवीण ने आपको धोखा दिया और आप अभी भी उसके परिवार के बारे में सोच रहे है,,,,,,,,,,,सच में सर आपका दिल बहुत बड़ा है,,,,,,,,,मैं अभी जाकर उसके सारे पेमेंट्स क्लियर कर देता हूँ”,भरत ने कहा और जैसे ही जाने लगा मिस्टर देसाई ने आवाज देकर उसे रोका,”भरत,,,,,,!!!”
“जी सर”,भरत ने पलटकर कहा
“मैंने तुमसे नए मैनेजर की पोस्ट के लिए इंटरव्यू लेने को कहा था , क्या हुआ उसका ?”,मिस्टर देसाई ने कहा
“अरे सर ! आपको मैनेजर की क्या जरूरत है ? मैं हूँ ना आप मुझे बताईये क्या करना है ?”,भरत ने कहा
“भरत तुम भूल रहे हो कि तुम अब इस कम्पनी में MD हो , तुम्हारे पास पहले ही इतने सारे काम होते है,,,,,,अब अपने कामो की जिम्मेदारी भी क्या मैं तुम पर डाल दू। नहीं भरत मैं इतना स्वार्थी भी नहीं हूँ”,मिस्टर देसाई ने कहा
“लेकिन सर,,,,,,!!”,भरत ने कहा लेकिन मिस्टर देसाई ने भरत की बात काटकर कहा,”लेकिन वेकिन कुछ नहीं भरत आज ही नए मैनेजर के लिए अनाउंसमेंट करवा दो”
“जी सर ठीक है”,भरत ने मन मारकर कहा और वहा से चला गया। उसके जाने के बाद मिस्टर देसाई भी अपने काम में लग गए।
अपने केबिन में आकर भरत ने अपना कोट निकाला और गुस्से से उसे कुर्सी पर फेंककर कहा,”हाह ! मैं इतनी मेहनत से एक एक करके लोगो को निकाल रहा हूँ और ये देसाई और लोगो को इस कम्पनी में भरे जा रहा है। अब इस साले को मैनेजर चाहिए,,,,,,लेकिन कोई बात नहीं जल्द से जल्द मैं अपने ही किसी आदमी को इसका मैनेजर बनाकर इस कम्पनी में हायर कर लुंगा”
“भरत सर ! मिस्टर कपूर मीटिंग के लिए आ चुके है”,ऑफिस बॉय ने आकर कहा तो भरत उसकी तरफ पलटा और कहा,”उन्हें मीटिंग रूम में बैठाओ मैं बस आता हूँ”
भरत की बात सुनकर लड़का वहा से चला गया। भरत ने खुद को शांत किया और कुछ देर बाद वह भी अपना कोट लेकर वहा से चला गया।
सिरोही , राजस्थान
“आखिर तुम चाहती क्या हो ?”,सुरभि के पीछे आते हुए सिद्धार्थ गुस्से से चिल्लाया क्योकि सुरभि ना उसकी कोई बात सुन रही थी ना ही कुछ समझ रही थी। सुरभि रुकी और गुस्से से पलटकर कहा,”मैं चाहती हूँ तुम मेरा पीछा छोड़ दो और भाड़ में जाओ”
गुस्से में सुरभि को इस बात का ध्यान नहीं रहता था कि वह क्या बोल रही है , सिद्धार्थ ने सुना तो उसे बुरा लगा और उसने कहा,”ठीक है ! आज के बाद में तुम्हारे पीछे नहीं आऊंगा,,,,,,,,,,,जा रहा हूँ मैं बाय”
सुरभि ने कुछ नहीं कहा वह बस गुस्से से सिद्धार्थ को देखती रही और सिद्धार्थ वहा से चला गया। सुरभि ने खुद ही सिद्धार्थ से जाने को कहा और जब वह चला गया तो सुरभि खुद ही चिढ गयी और पैर पटकते हुए वहा से चली गयी। दोनों एक दूसरे की तरफ पीठ किये अलग अलग दिशाओ में बढ़ गए और इस बार ना किसी ने एक दूसरे को रोका और ना ही पलटकर देखा।
चलते चलते सिद्धार्थ मन ही मन खुद में बड़बड़ाया,”ये क्या हो गया
है तुझे ? तुम्हे सुरभि पर ऐसे नहीं चिल्लाना था ! एक तो वो सगाई वाली बात सुनकर वैसे ही परेशान है उस पर उसे मनाने के बजाय तू उसे अकेला छोड़कर आ गया। हाह ! तो मैं और क्या करता वो मेरी कोई बात सुन ही नहीं रही है बस चिल्लाये जा रही है और बेवजह चिढ रही है मुझसे,,,,,,,,,,,मैंने बताया उसे कि सगाई मेरी नहीं मेरे कजिन की थी और कल रात से मैं उसे मना ही तो रहा हूँ पर मजाल है वो मान जाए या कोई बात सुन ले,,,,,,,,,,,ऊपर से मुझे अपने उस गधे बॉयफ्रेंड के साथ कम्पेयर कर रही है,,,,,,,,,,,,उसने गलत किया इसमें मेरी गलती है क्या है ?”
बड़बड़ाते हुए सिद्धार्थ रुका और फिर एकदम से कहा,”लेकिन वो मेरी सगाई के बारे में सुनकर इतना अपसेट क्यों हो गयी ? कही वो मुझे पसंद तो नहीं करने लगी है ?”
सिद्धार्थ को जाने का बोलकर सुरभि भी पैदल ही आगे बढ़ गयी और खुद में ही बड़बड़ाने लगी,”क्या हो गया है तुझे सुरभि ? आखिर तू इतना ओवररिएक्ट क्यों कर रही है ? उसने कहा ना सगाई उसकी नहीं उसके कजिन की थी। तुमने खामखा उस बेचारे पर इतना चिल्ला दिया जबकि वो कल से तुम्हे मनाने की कोशिश कर रहा है। तुमने तो उसकी बात तक नहीं सुनी और उसके मुँह पर ही कह दिया कि भाड़ में जाओ,,,,,,,,,,उसे कितना बुरा लगा होगा ,, तुम उसी के लिए इतनी जल्दी वापस आयी थी ना और अब तुम ही उस से दूर भाग रही हो,,,,,,,,,,,,
तुम्हे ये नहीं करना चाहिए,,,,,,तो मुझे क्या करना चाहिए ? अह्ह्ह्ह मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा मैं क्या करू ?”
सुरभि चलते चलते रुकी और अपना सर झटककर आगे कहा,”क्या मैं वापस जाकर उसे सॉरी बोल दू ? हहहहह लेकिन वो बहुत गुस्से में गया है अगर उसने मेरा सॉरी एक्सेप्ट नहीं किया तो,,,,,,,,,,,,,,,,नहीं करेगा तो फिर मैं दोबारा उसे कभी अपनी शक्ल नहीं दिखाउंगी लेकिन मैं क्या करू ? मुझे अपना ईगो साइड में रखकर उसे सॉरी बोलना ही पड़ेगा क्योकि मैं उस से प्यार जो करने लगी हु,,,,,,,,,,,,,,!!!
एक दूसरे से विपरीत दिशा में जाने वाले दो लोग एक बार फिर एक दूसरे की तरफ चल पड़े। चलते चलते सुरभि को सामने से सिद्धार्थ आता दिखाई दिया तो वह मन ही मन बड़बड़ाई,”अब ये वापस क्यों आ रहा है ? लगता है मुझे दो चार सुनाने के लिए आ रहा है , आओ बेटा अगर तुमने मुझे सुनाया न तो इस बार मैं भी चुप नहीं रहूंगी,,,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ सुरभि की तरफ बढ़ने लगा और सुरभि को देखकर मन ही मन बड़बड़ाया,”ये वापस क्यों आ रही है ? लगता है कुछ सुनाना बाकी रह गया होगा वरना इसके लौटकर आने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता , आने दो इस बार कुछ बकवास करेगी ना फिर बताऊंगा मैं कौन हूँ ? मैं हर बात सुनकर ले रहा हूँ इसका मतलब ये नहीं तुम मेरे सर पर चढ़कर तांडव करो”
दोनों एक दूसरे के सामने आ रुके और एक दूसरे को देखने लगे। दोनों के मन में इस वक्त बहुत कुछ चल रहा था लेकिन दोनों के मुँह से एक साथ निकला,”सॉरी”
सुरभि के मुँह से सॉरी सुनकर सिद्धार्थ चौंका और सिद्धार्थ के मुँह से सॉरी सुनकर सुरभि हैरान हुई और फिर अगले पल दोनों एक साथ हंस पड़े और मुस्कुराकर एक बार फिर साथ साथ कहा,”सॉरी”
“अच्छे से बोलो”,सुरभि ने कहा
सिद्धार्थ ने बीच सड़क पर अपने दोनों कान पकडे और सुरभि की तरफ देखकर कहा,”सॉरी”
सुरभि ने सिद्धार्थ की कलाई पकड़ी और उसे सामने बनी टपरी की तरफ ले जाते हुए कहा,”चाय पिलाओ ! तब माफ़ करुँगी”
सिद्धार्थ ने सुना तो ख़ुशी ख़ुशी सुरभि के साथ आगे बढ़ गया , आखिर उसे इतने सस्ते में माफ़ी जो मिल रही थी जो अब तक उसे काफी भारी पड़ी थी।
पृथ्वी अवनि के फोन का इन्तजार करते हुए बीच पर घूमता रहा। काफी वक्त गुजर जाने के बाद पृथ्वी वापस रिसोर्ट चला आया। पृथ्वी कमरे में आया तो देखा अवनि कमरे में नहीं है। बाथरूम से आती आवाज से पृथ्वी ने अंदाजा लगा लिया कि अवनि नहा रही है। वह बिस्तर पर आ बैठा और अवनि के बाहर आने का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद अवनि नहाकर बाहर आयी। रात वाली शार्ट ड्रेस की जगह उसने सूट पहन रखा था और साथ ही अपने बाल भी धोये थे।
पृथ्वी को वहा देखकर अवनि की जान में जान आयी और उसने पृथ्वी की तरफ आकर कहा,”आप कहा चले गए थे ? मैं कितना घबरा गयी थी , आपको फोन किया लेकिन आपका फोन भी नॉट रिचेबल आ रहा था”
पृथ्वी उठा अवनि की तरफ देखा , दिल तो किया तुरंत अवनि के सारे सवालो का जवाब दे दे लेकिन दिमाग ने उसे रोक लिया। वह बिना कुछ बोले अवनि के बगल से निकलकर टेबल की तरफ आया और जग से गिलास में पानी लेकर पीने लगा।
पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि समझ गयी कि पृथ्वी साथ ही जब वह उठी थी तो खुद को शार्ट ड्रेस में देखकर उसे ये अहसास भी हो गया था कि जरूरत बीती रात उसने कुछ गड़बड़ की है। अवनि ने एक गहरी साँस ली और पृथ्वी की तरफ आकर कहा,”क्या आप मुझसे नाराज है ?”
पृथ्वी ने अवनि को देखा और सधे हुए स्वर में कहा,”नहीं मैं कौन होता हूँ तुम से नाराज होने वाला , मुझे क्या हक़ है
पृथ्वी की बातों से साफ़ जाहिर हो रहा था कि वह अवनि से नाराज है। अवनि को अहसास भी था कि उस से कुछ तो गलती हुई है इसलिए उसने कहा,”ऐसा मत कहिये ! अगर मैंने कुछ गलती की है तो आपको पूरा हक़ है मुझसे नाराज होने का”
पृथ्वी एकटक अवनि को देखता रहा , उसके गीले बालों से पानी झर रहा था ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”अवनि ! अपने बाल सुखाओ और तैयार हो जाओ , खाना खाने चलते है,,,,,,,,,,,तुम्हे भी भूख लगी होगी”
अवनि ने सुना तो उसके चेहरे पर उदासी के भाव तैर गए। उसने खाली आँखों से पृथ्वी की तरफ देखा वह जानती थी पृथ्वी उस से नाराज है बस खुलकर जाहिर नहीं कर रहा।
अवनि चुपचाप ड्रेसिंग की तरफ आयी और ड्रायर से अपने बालों को सुखाने लगी। वह मन ही मन पृथ्वी को लेकर परेशान हो रही थी और खोयी हुई सी अपने बालों को सुखा रही थी। पृथ्वी ने देखा तो अवनि की तरफ आया उसके हाथ से ड्रायर लिया और उसके बालों को सुखाने लगा। अवनि की नजर शीशे में नजर आते पृथ्वी पर थी चेहरे पर कोई भाव नहीं थे , वह बस चुपचाप अवनि के बाल सुखा रहा था। जब बाल अच्छे से सुख गए तो उसने ड्रायर बंद करके अवनि को थमा दिया और कहा,”मैं बाहर तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ , जल्दी आना”
पृथ्वी वहा से चला गया , अवनि के दिल में चुभन का अहसास हुआ। हमेशा की तरह पृथ्वी ने आज उसके करीब आने की कोशिश नहीं की , ना उसे छेड़ा , बल्कि वह अवनि के साथ ना रुककर बाहर चला गया। अवनि ने बुझे मन से अपने बाल बनाये , थोड़ा तैयार हुई और बाहर चली आयी।
दोपहर के 2 बज रहे थे। पृथ्वी अवनि को साथ लेकर उसी रिसोर्ट के रेस्त्रो में चला आया। उसने एक खाली टेबल की कुर्सी की तरफ इशारा करके अवनि से बैठने को कहा और खुद उसके बगल में ना बैठकर अवनि के सामने आ बैठा। अवनि के मन में फिर एक टीस उठी। वह पृथ्वी से बात करना चाहती थी लेकिन क्या कहे ? कहा से शुरू करे उसे समझ नहीं आ रहा था ना ही हिम्मत हो रही थी क्योकि आज पृथ्वी के चेहरे से हमेशा वाली मुस्कुराहट गायब थी। पृथ्वी ने अपने और अवनि के लिए खाना आर्डर किया और बैठकर इंतजार करने लगा।
खाना आने में वक्त था और पृथ्वी खामोश था ये देखकर अवनि ने ही बात की शुरुआत करते हुए कहा,”ये जगह कितनी खूबसूरत है ना”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”क्या फायदा ! लोगो को तो सोने से ही फुर्सत नहीं है,,,,,,,,ऐसा लग रहा है जैसे मैं अकेले अपने हनीमून पर आया हूँ”
आख़िरकार पृथ्वी का गुस्सा उसके शब्दो में झलक ही गया
अवनि समझ गयी कि पृथ्वी उस से कुछ ज्यादा ही नाराज है तो उसने फ़िलहाल चुप रहना ही ठीक समझा। खाना आया और दोनों चुपचाप खाने लगे। खाना खाते हुए अवनि बीच बीच में पृथ्वी को देख लेती लेकिन पृथ्वी की नजरे सिर्फ खाने पर थी और आज वह बहुत खामोश भी था। अवनि चुप थी ताकि कमरे में जाकर पृथ्वी से आराम से बात कर सके और माफ़ी मांग सके तो पृ
थ्वी को लगा कि उसके जवाब पर अवनि कुछ तो कहेगी लेकिन अवनि को खामोश देखकर वह और चिढ गया। उसने खाना खाया और देखा अवनि की प्लेट में खाना अभी भी बचा है तो उसने कहा,”तुम खत्म करो मैं बिल पे करके आया”
“पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा लेकिन पृथ्वी तब तक वहा से जा चुका था।
अवनि ने बेमन से खाना खत्म किया और जैसे ही उठी वेटर ने आकर कुछ चॉकलेट्स के डिब्बे टेबल पर रखकर कहा,”मैडम ! ये पृथ्वी सर ने आपके लिए भिजवाए है”
अवनि ने रिसेप्शन एरिया की तरफ देखा तो पाया पृथ्वी वही खड़ा है। उसने एक नजर अवनि को देखा और वहा से चला गया। अवनि मुस्कुरा उठी गुस्से में भी पृथ्वी उसके लिए अपना प्यार जताना नहीं छोड़ रहा था। अवनि ने हाथ धोये और टेबल पर रखे डिब्बे उठाकर पृथ्वी के पीछे चली आयी। पृथ्वी वहा से जा चुका था। अवनि मुस्कुराते हुए डिब्बे सम्हाले आगे बढ़ी और चलते चलते एकदम से सामने से आते शख्स से टकराई
डिब्बे नीचे जा गिरे अवनि उन्हें उठाने के लिए नीचे बैठी , वह शख्स भी अवनि अवनि की मदद करने उसके सामने बैठा उसने डिब्बा उठाकर जैसे ही अवनि की तरफ बढ़ाया अवनि की आँखो में डर और बेचैनी के भाव तैरने लगे। दिल धड़कने लगा और हाथ काँपने लगे।
( क्या भरत अपने आदमी को बनाएगा मिस्टर देसाई का मैनेजर या कोई और फेरने वाला है उसके इरादों पर पानी ? क्या शुरू हो चुकी है सिद्धार्थ और सुरभि की चटपटी प्रेम कहानी ? क्या पृथ्वी सच में है अवनि से नाराज या कर रहा है जान बूझकर उसे तंग ? आखिर वो कौन है जिसे देखकर अवनि हो गयी है बैचैन ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
