Pasandida Aurat Season 3 – 2
सुरभि के मुँह से सिद्धार्थ का नाम सुनकर पृथ्वी को झटका लगा। उसकी आँखों के सामने सबसे पहले उसी सिद्धार्थ का चेहरा आया जिसने अवनि को तकलीफ दी थी ! पृथ्वी को खाँसते देखकर सब उसकी तरफ चले आये। अवनि ने उसकी पीठ थपथपाई और कहा,”आप ठीक है ना ?”
पृथ्वी ने साँस ली और खुद को सामान्य करके कहा,”हाँ ! वो बस पानी अटक गया था”
“जरा ध्यान से जमाई सा ! शादी की भागदौड़ में पहले ही आप थक चुके है कही बीमार मत पड़ जाना”,मयंक चाचा ने कहा
“अगर बीमार पड़ भी गया तो अवनि है ना मेरा ख्याल रखने के लिए”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर कहा तो अवनि शरमाकर दूसरी तरफ देखने लगी और फिर सब बाते करने लगे।
सुरभि एक तरफ अकेली खड़ी अपने नाख़ून चबा रही थी ये देखकर पृथ्वी उसके पास चला आया और अपने हाथो को बांधकर उसके बगल में आ खड़ा हुआ। सुरभि ने मायूसी से अपनी गर्दन घुमाकर पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी ने उसकी तरफ देखकर कहा,”तुमने सिद्धार्थ का नाम लिया , आई हॉप ये वो न हो जो मैं सोच रहा हूँ,,,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि ने सुना तो मायूसी से हाँ में गर्दन हिला दी और पृथ्वी के चेहरे के भाव एकदम से बदल गए , उसने चिढ़कर कहा,”पूरी दुनिया में प्यार करने के लिए तुम्हे कोई और नहीं मिला ?”
“प्यार अँधा होता है ना पृथ्वी”,सुरभि ने अपनी गर्दन पृथ्वी की तरफ लुढ़काकर कहा
“प्यार अँधा होता है पर तुम तो अंधी नहीं हो ना , कभी सोचा है अवनि को पता चला तो उसे कैसा लगेगा ?”,पृथ्वी ने कहा
“इसीलिए तो उसे नहीं बताया,,,,,,,,,,पृथ्वी तुम मेरी मदद करो ना प्लीज”,सुरभि ने पृथ्वी के शर्ट की बाजू खींचकर कहा
“हाह ! मैं इसमें तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूँ ? मैं कभी सपने में भी अवनि का दिल नहीं दुखा सकता आई ऍम सॉरी”,पृथ्वी ने अपने हाथो को बांधे सामने देखते हुए कहा
सुरभि ने सुना तो उसकी बाँह पर मुक्का मारा और कहा,”हाह ! कितने सेल्फिश हो गए हो तुम पृथ्वी , उस दिन अगर मैं तुम्हारे मैसेज का रिप्लाय नहीं करती तो क्या आज अवनि यहाँ होती,,,,,,,,,,,मदद नहीं कर सकते”
सुरभि को चिढ़ा हुआ देखकर पृथ्वी उसकी तरफ पलटा और बहुत ही प्यार से कहा,”सुरभि ! तुम जानती हो ना सिद्धार्थ अवनि का अतीत है और तुम उसके अतीत को उसके सामने लेकर खड़ा करना चाहती हो ? मैं तुमसे नहीं पूछूंगा तुमने सिद्धार्थ से प्यार करने का फैसला क्यों किया ? ये तुम्हारी लाइफ है और इसके फैसले तुम बेहतर ले सकती हो लेकिन अवनि तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड है सुरभि , उसका दिल दुखाकर क्या तुम खुश रहोगी ?”
पृथ्वी की बाते धीरे धीरे सुरभि को समझ आ रही थी। सही तो कह रहा था पृथ्वी , सुरभि ने उस से प्यार किया जिसने उसकी बेस्ट फ्रेंड का दिल तोडा। कल तक सुरभि चाहती थी सिद्धार्थ अवनि से दूर हो जाये और आज वह खुद सिद्धार्थ के करीब चली आयी। वह सोच में पड़ गयी और मायूसी भरे स्वर में कहा,”तो अब मैं क्या करू पृथ्वी ?”
पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और फिर कहा,”सुरभि ! अगर तुम्हे लगता है सिद्धार्थ सच में बदल गया है और उसे भी तुमसे जेनुअन प्यार है तो मैं तुम्हे नहीं रोकूंगा लेकिन जैसे उसने अवनि के साथ किया वैसा अगर वो तुम्हारे साथ भी करने की सोच रहा है तो मैं उसे नहीं छोडूंगा”
सुरभि ने सुना तो धीरे से हामी में गर्दन हिलायी और कहा,”पृथ्वी ! वो सच में बदल चुका है”
“ठीक है ! सही समय देखकर मैं अवनि से बात करूंगा”,पृथ्वी ने कहा
सुरभि ने सुना तो मारे ख़ुशी के पृथ्वी के गले आ लगी और पृथ्वी ने कहा,”क्या कर रही हो सुरभि ? मैं शादीशुदा हूँ”
“तुम दुनिया के सबसे अच्छे जीजू हो,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने पृथ्वी से चिपककर कहा
पृथ्वी ने अपने हाथ हवा में उठाये हुए थे , अवनि के अलावा किसी भी लड़की को छूने से उसे परहेज जो था। कुछ ही दूर खड़ी अवनि ने सुरभि को पृथ्वी के करीब देखा तो आज पहली बार उसे हलकी सी जलन महसूस हुयी। उसने सुरभि और पृथ्वी से अपना ध्यान हटा लिया और घरवालों से बाते करने लगी।
कुछ देर बाद ट्रेन आ गयी और सभी अपने अपने सामान के साथ ट्रेन में आ चढ़े। कौशल चाचा ने पृथ्वी और अवनि को जल्दी ही उदयपुर आने को कहा और ट्रेन में चढ़ गए। ट्रैन चल पड़ी और कुछ ही देर में आँखों से ओझल भी हो गयी। पृथ्वी अवनि के साथ स्टेशन से बाहर चला आया। घरवालों के वापस चले जाने से अवनि थोड़ी उदास थी पृथ्वी ने कैब बुक किया और दोनों घर के लिए निकल गए।
कैब अपार्टमेंट के बाहर आकर रुकी तब तक सुबह हो चुकी थी। पृथ्वी और अवनि गाड़ी से नीचे और अंदर जाने लगे तभी वह से गुजरते नकुल की नजर उन दोनों पर पड़ी और वह उनके पास चला आया।
“ये सुबह सुबह तुम दोनों कहा से आ रहे हो ?”,नकुल ने पूछा
अवनि ने ख़ामोशी से पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने कहा,”हम लोग कही से भी आये तुम सुबह सुबह सोसायटी की आंटियो की तरह बात क्यों कर रहे हो ?”
नकुल को पृथ्वी से जवाब की उम्मीद थी लेकिन पृथ्वी तो उलटा उस से ही सवाल कर रहा था ये देखकर नकुल ने अवनि से कहा,”अह्ह्ह भाभी ! आप चलिए मुझे ज़रा इस से कुछ पर्सनल बात करनी है”
अवनि ने सुना तो अकेले ही लिफ्ट की तरफ चली गयी , पृथ्वी भी उसके पीछे जाने लगा तो नकुल ने उसकी बाँह पकड़कर उसे रोक लिया और कहा,”तुम रुको मुझे तुम से बात करनी है”
“अबे ये कोई बात करने का टाइम है ?”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
“वही तो मैं जानना चाहता हूँ कि आखिर चल क्या रहा है ? कल तुम्हारा रिसेप्शन था और अवनि के साथ घर में होने के बजाय तुम बाहर क्या कर रहे हो ? तुम्हे उसके साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए,,,,,,,,,,,,जिनकी नयी नयी शादी होती है वो देर तक सोते है”,नकुल ने पृथ्वी का कंधा दबाकर दबे स्वर में कहा
पृथ्वी ने उसकी तरफ देखा और कहा,”अच्छा ! तुम्हे कैसे पता , तुम्हारी शादी हो गयी ?”
“नहीं हुई है तो हो जाएगी और मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ मुझे सब पता है”,नकुल ने मुँह बनाकर कहा
“मेरी तरह बन भी नहीं सकते , अब जाओ यहाँ से मुझे बहुत नींद आ रही है बाय”,कहकर पृथ्वी लिफ्ट की तरफ बढ़ गया जहा अवनि पहले से उसका इंतजार कर रही थी।
पृथ्वी अवनि के साथ ऊपर फ्लेट में आया। सुबह हो चुकी थी और सूरज भी निकल आया था इसलिए अवनि ने कबर्ड से कपडे लिए और नहाने चली गयी। वही पृथ्वी कमरे में आकर बिस्तर पर गिर गया और सो गया। थकान की वजह से उसे जल्दी ही नींद आ गयी। अवनि नहाकर आयी तो देखा पृथ्वी सो रहा है। उसने नजर घुमाकर कमरे की सजावट को देखा जो ज्यों की त्यों थी। बिस्तर पर बिछे फूल अब मुरझाने लगे थे। अवनि ने बाल धोये थे उन्हें पोछते हुए वह खिड़की के पास चली आयी और खिड़की खोल दी।
बाहर से आते ठंडी हवा के झोंके उसे छूकर गुजरने लगे। आज अवनि के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी और चेहरा खिला हुआ था। उसने जैसे ही गीले बाल झटके कुछ छींटे पृथ्वी पर जा गिरे और वह नींद में कुनमुनाया। अवनि ने देखा तो अपने बालों को समेटा और पृथ्वी के पास चली आयी। खिड़की से आती धूप की सीधी किरण पृथ्वी के चेहरे पर गिर रही थी। अवनि खिड़की और पृथ्वी के बीच आती तो धुप हट जाती और साइड होती तो फिर पृथ्वी चेहरे पर आ जाती। अवनि ने दो तीन बार ऐसा किया और अकेले में ही खुश हो रही थी।
पृथ्वी नींद में धुप छाव के इस खेल से कुनमुना रहा था और फिर उसने तकिया उठाया और अपने मुँह पर रखकर करवट बदल ली ये देखकर अवनि मुस्कुराई और वहा से चली गयी। कमरे से बाहर आकर अवनि ने मंदिर की सफाई की , पूजा की और फिर किचन में चली आयी। कुछ दिनों से अवनि यहाँ नहीं थी इसलिए किचन और घर दोनों ही गंदे पड़े थे। अवनि ने किचन की सफाई की और फिर पृथ्वी के लिए चाय चढ़ा दी।
चाय उबलने लगी और अवनि अपने ही ख्यालों में खोयी बड़बड़ाने लगी,”ये तुम क्या कर रही हो अवनि , क्यों पृथ्वी को इतना सता रही हो ? सच तो ये है कि तुम भी उस से प्यार करती हो फिर तुम दोनों में ये दूरिया क्यों ? कल रात तुम्हे उसके साथ होना चाहिए था , अपना पत्नी धर्म निभाना चाहिए था। अब तक जो कुछ भी हुआ वो सब भूलकर तुम्हे पृथ्वी के साथ एक नयी जिंदगी शुरू करनी चाहिए। आखिर उसके भी कुछ अरमान है तुम्हे अब उसकी ख़ुशी का ख्याल रखना चाहिए अवनि,,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि यहाँ अपने ख्यालों में डूबी थी और वहा चाय जैसे ही उफनकर गिरने वाली थी पृथ्वी ने आकर गैस का फ्लेम कम कर दिया। पृथ्वी को अचानक वहा देखकर अवनि की तन्द्रा टूटी और उसकी नजर उफनती चाय पर पड़ी लेकिन तब तक पृथ्वी गैस कम कर चुका था। अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने अवनि के थोड़ा करीब आकर कहा,”मेरे बारे में सोच रही थी ना ?”
अवनि घबराई जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो और पीछे खिसककर कहा,”अह्ह्ह्ह नहीं”
“झूठ,,,,,,,,,,,तुम मेरे ही बारे में सोच रही थी”,पृथ्वी ने अवनि के और करीब आकर कहा तो अवनि की पीठ किचन प्लेटफार्म से जा लगी और अब पीछे जाने के लिए कोई जगह नहीं बची थी। पृथ्वी एकटक अवनि की आँखों में देखे जा रहा था और अवनि का दिल धड़कने लगा। पृथ्वी की ख़ामोशी ने उसे और बैचैन कर दिया।
“शुरू करे ?”,पृथ्वी ने एकदम से कहा
“क्या ?”,अवनि ने घबराकर कहा
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”कल रात किसी ने तो मुझसे कहा था कि मैं उसे जो सजा दू उसे मंजूर है”
“हम्म्म,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने धीरे से कहा
पृथ्वी अपने होंठो को अवनि के गाल की तरफ लेकर आया तो अवनि ने अपनी आँखे मूँद ली। ये देखकर पृथ्वी मुस्कुराया और अवनि होंठो को अवनि के कान के पास लेकर धीरे से कहा,”आज का खाना तुम मुझे अपने हाथ से खिलाओगी”
अवनि ने सुना तो हैरानी से अपनी आँखे खोली और पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने अपने होंठो से उसके गाल को छुआ और वहा से चला गया।
पृथ्वी के जाने के बाद अवनि मुस्कुरा उठी और अपना हाथ अपने गाल से लगा लिया। उसने चाय कप में छानी और लेकर बाहर चली आयी। पृथ्वी बालकनी में खड़ा नीचे देख रहा था अवनि चाय के कप लेकर उसकी तरफ आयी , एक कप उसने पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया और दूसरा कप खुद लेकर चाय पीने लगी। दोनों खामोश , कल तक दोनों के पास बात करने के लिए कितना कुछ था और आज समझ नहीं आ रहा क्या बात करे ? बीच बीच कभी पृथ्वी अवनि को देखता तो कभी अवनि पृथ्वी को ,, दोनों ने चाय खत्म की और वही खड़े होकर बाहर की ऊँची इमारतों और खाली आसमान को देखने लगे।
“पृथ्वी ! एक बात पुछु”,अवनि ने दोनों के बीच फैली ख़ामोशी को तोड़ते हुए कहा
“हम्म्म पूछो”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा
“कौशल चाचा और बाकि सब घरवालों को मनाने और हमारी शादी
में बुलाने के लिए आपने उनके पैर पकड़ लिए , आपने ऐसा क्यों किया पृथ्वी ?”,अवनि ने आँखों में आँसू भरकर कहा पृथ्वी ने सुना तो कुछ देर के लिए खामोश हो गया , अवनि को ये बात कैसे पता चली पृथ्वी नहीं जानता था और वह चाहता था अवनि को कभी ये सब पता भी ना चले। पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि ने रोआँसा होकर कहा,”आपने ऐसा क्यों किया पृथ्वी ? मेरी ख़ुशी के लिये आपने अपने आत्मसम्मान तक को दांव पर लगा दिया। आपको उनके पैर नहीं पकड़ने चाहिए थे पृथ्वी”
अवनि को रोआँसा देखकर पृथ्वी को अच्छा नहीं लगा वह अवनि की तरफ पलटा और उसके चेहरे को अपने हाथो में लेकर प्यार से कहा,”अवनि ! मैंने जो भी किया सिर्फ चेहरे पर ख़ुशी देखने के लिए किया। तुमने कभी कहा नहीं लेकिन मैं जानता हूँ तुम्हे हमेशा उन सबकी कमी खलती थी। उन्हें यहाँ बुलाने के लिए अगर मैं उनके पैरो में झुक भी गया तो क्या हुआ ? तुम्हारी ख़ुशी से बढकर मेरे लिए कुछ भी नहीं है अवनि , एक बार तो क्या वो अगर 100 बार भी कहेंगे तो मैं झुकने के लिए तैयार हूँ,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी की बाते सुनकर अवनि की आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”अरे तुम रोने क्यों लगी ?”
“आज तक किसी ने मुझे इतना प्यार नहीं किया”,अवनि ने सुबकते हुए कहा
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और अवनि को अपने सीने से लगाकर कहा,”मैं करता हूँ ना और हमेशा करूंगा,,,,,,,,,,,तुम मेरे लिए बहुत स्पेशल हो अवनि और मैं तुम्हे कभी खोना नहीं चाहता”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी को कसकर गले लगाया और कहा,”Thankyou”
“अब ये Thankyou किसलिए ?”,पृथ्वी ने अवनि के बालों में उंगलिया घुमाते हुए कहा
“बस Thankyou”,अवनि ने कहा
“वैसे इस Thankyou के बदले में तुम चाहो तो मुझे एक चुम्मा भी दे सकती हो मैं मना नहीं करूंगा”,पृथ्वी ने शरारती लहजे में कहा
अवनि ने सुना तो उस से दूर हटी अपने हाथ से पृथ्वी के चेहरे की साइड में किया और उसके गाल को अपने होंठो से छूकर वहा से चली गयी।
पृथ्वी ने अपना हाथ अपने सीने पर बाँयी तरफ रखा और जाती हुई अवनि को देखकर मुस्कुराया। वह खुद अवनि करीब आकर उस पर हक़ जताता था वो ठीक था लेकिन जब अवनि सामने से उसके लिए ये सब करती थी तो पृथ्वी खुश हो जाता था।
पृथ्वी ने देखा घर काफी गन्दा है तो वह सफाई में अवनि की मदद करने उसकी तरफ चला आया और फिर दोनों मिलकर घर साफ़ करने लगे।
मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी , नवी मुंबई
जयदीप अपने केबिन में बैठा लेपटॉप पर आये मेल्स चेक कर रहा था। ऑफिस बॉय आया और कुछ फाइल्स रखकर जैसे ही जाने लगा जयदीप ने लेपटॉप में नजरे गड़ाए कहा,”सुनो ! ज़रा पृथ्वी को भेजना”
ऑफिस बॉय ने सुना तो ठिठका और पलटकर कहा,”लेकिन सर पृथ्वी सर ने तो कुछ दिन पहले ही नौकरी से रिजाइन दे दिया ना”
ऑफिस बॉय की बात सुनकर जयदीप को याद आया कि उसने खुद ही तो पृथ्वी का रिजाइन लेकर भरत को भेजा था। पृथ्वी नौकरी छोड़ चुका है ये ख्याल आते ही जयदीप उदास हो गया और बुझे स्वर में ऑफिस बॉय से कहा,”ठीक है ! तुम , तुम जाओ”
ऑफिस बॉय वहा से चला गया , जयदीप ने भी लेपटॉप बंद कर दिया और उठकर खिड़की के पास चला आया।
जयदीप पृथ्वी के लिए बहुत खुश था लेकिन पृथ्वी के बिना उसे ऑफिस सुना सुना लग रहा था। अपने मन की उदासी मिटाने के लिए उसने सिगरेट जला ली और कश लगाकर कहा,”ओह्ह्ह पृथ्वी ! तुमने ये सही नहीं किया , मुझे नुकसान से बचाने के लिए तुमने खुद को मुसीबत में डाल दिया”
पृथ्वी के केबिन में आज अंकित , मनीष , तान्या और कशिश थे। पृथ्वी जहा बैठा करता था वो जगह आज खाली थी। पृथ्वी की डांट उसके तानों और उसकी बातों की सबको आदत हो चुकी थी। सब चुपचाप और गुमसुम से अपना अपना काम कर रहे थे। तभी ऑफिस बॉय केबिन में आया और देखा सब उदास है तो बोल पड़ा,”वहा बॉस अपसेट है और यहाँ आप लोग , आप सब पृथ्वी सर को वापस क्यों नहीं बुला लेते ?”
अंकित ने सुना तो फाइल उठाकर ऑफिस बॉय की तरफ बढ़ाकर कहा,”वो वापस नहीं आएगा,,,,,,,,,,,,हम सबको अब उसके बिना काम करने की आदत डालनी होगी , ये फाइल लीगल डिपार्टमेंट में दे देना”
“ठीक है सर”,कहकर ऑफिस बॉय वहा से चला गया
ऑफिस बॉय के जाने के बाद तान्या ने कहा,”अंकित सर आपने ऐसा क्यों कहा कि पृथ्वी सर वापस नहीं आएंगे ?”
“बॉस ने उसे नौकरी से नहीं निकाला है तान्या बल्कि उसने खुद रिजाइन दिया है , मुझे नहीं लगता वो वापस आएगा”,अंकित ने बुझे स्वर में कहा
तान्या ने पृथ्वी के बंद ड्रॉवर की तरफ देखा जिसे वह हमेशा लॉक रखता था , उसने अंकित की तरफ देखा और कहा,”पर मेरा दिल कहता है सर वापस आएंगे”
“तुम इतना यकीन से कैसे कह सकती हो ?”,इस बार मनीष ने कहा
तान्या मुस्कुराई और पृथ्वी के ड्रॉवर की तरफ इशारा करके कहा,”अगर सर हमेशा के लिए ये नौकरी छोड़कर जाते तो वो अपने इस ड्रॉवर में रखे सामान को अपने साथ लेकर जरूर जाते,,,,,,,,,,,इसका मतलब है कि वो वापस आएंगे”
तान्या की बात सुनकर मनीष , कशिश और अंकित एक दूसरे की तरफ देखने लगे और तान्या मुस्कुरा कर पृथ्वी के बंद ड्रॉवर को
( क्या पृथ्वी बताएगा अवनि को सिद्धार्थ और सुरभि के रिश्ते के बारे में ? क्या अवनि करेगी पहल पृथ्वी के करीब आने की ? क्या सच होगी तान्या की बात और पृथ्वी आएगा लौटकर इसी कम्पनी में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
