Pasandida Aurat Season 3 – 12
अवनि की शरारत पर शरमा कर पृथ्वी कमरे से बाहर चला आया और दोनों के लिए खाना आर्डर करने लगा। खाना आर्डर करके पृथ्वी सोफे पर आ बैठा। खाना आया तब तक अवनि सब सामान पैक कर चुकी थी। वह कमरे से बाहर आयी देखा डिलीवरी वाला अभी अभी खाना देकर गया है तो वह खाने के बर्तन लेने किचन की तरफ जाने लगी। पृथ्वी ने अवनि को रोका और कहा,”तुम हाथ मुँह धो लो मैं लेकर आता हूँ”
अवनि हाथ मुँह धोने वाशबेसिन की तरफ चली आयी और वापस आयी तब तक पृथ्वी अपने और अवनि के लिए एक प्लेट , एक कटोरी और एक चम्मच लेकर आ चुका था और प्लेट में खाना परोस रहा था।
“आप सिर्फ एक प्लेट क्यों लेकर आये है ?”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ आते हुए पूछा
पृथ्वी ने अवनि का हाथ पकड़कर उसे सोफे के सामने पड़ी टेबल पर ठीक अपने सामने बैठाया और प्लेट में परोसी गयी बिरयानी का निवाला बनाते हुए कहा,”अवनि ! हमारी शादी हो चुकी है अब हम एक ही प्लेट से खाना खा सकते है,,,,,,,,,,!!!”
कहते हुए पृथ्वी ने अपने हाथ से अवनि को निवाला खिला दिया और आगे कहा,”और मुझे तुम्हारे साथ एक ही प्लेट से खाने में कोई दिक्कत नहीं है , ना ही तुम्हारा जूठा खाने से,,,,,,,,,!!!”
कहते हुए पृथ्वी ने अवनि को दूसरा निवाला खिला दिया ये देखकर अवनि ने कहा,”आप भी खाइये,,,,,,,,!!!”
“हम्म्म्म,,,,,,,,!!!”,कहकर पृथ्वी ने एक बड़ा सा निवाला खुद खा लिया और अवनि के लिए फिर से निवाला बनाने लगा ये देखकर अवनि ने प्यार से कहा,”आज ये आपको मुझ पर इतना प्यार क्यों आ रहा है ?”
पृथ्वी निवाला बनाते बनाते रुका और मुस्कुराया। उसने अवनि की तरफ देखा और कहा,”प्यार तो मुझे तुम पर हमेशा आता है बस मैं जता नहीं पाता और आज तुम पर कुछ ज्यादा प्यार इसलिए आ रहा है क्योकि,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने जान बुझकर बात अधूरी छोड़ दी और अवनि को निवाला खिला दिया
“क्योकि ?”,अवनि ने कहा
“क्योकि आज तुम कुछ ज्यादा ही सुन्दर लग रही हो,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने इस बार का निवाला खुद खाकर कहा
“बातें बनाना तो कोई आपसे सीखे,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“हैं ना ! मतलब तुम मानती हो मैं अच्छी बाते कर लेता हूँ , वो तो मैं इंजीनियरिंग में चला गया वरना ऐसी ऐसी कहानिया लिखता ना तुम मेरे सामने फ़ैल हो जाती , लोग मेरे दीवाने होते”,पृथ्वी ने अपनी तारीफ के पुल बांधकर कहा तो अवनि हसने लगी। पृथ्वी भी मुस्कुराया और फिर एक निवाला खुद खाता दूसरा अवनि को खिलाता लेकिन जल्दी ही अवनि का पेट भर गया। बचा हुआ खाना पृथ्वी ने खत्म किया। अवनि ने सब बर्तन उठाये और धोने चली गयी। पृथ्वी ने भी वाशबेसिन में हाथ धोये और अवनि के पीछे किचन में आया।
उसने फ्रीज से पानी की बोतल निकाली और पीकर बोतल प्लेटफॉर्म पर रखकर अवनि के पास आकर कहा,”वैसे तुम चाहो तो मैं तुम्हारी हेल्प कर सकता हूँ”
“इसमें आप मेरी क्या हेल्प करेंगे ? इतना सा तो है मैं कर लुंगी”,अवनि ने प्लेट पर डिशवाश मलते हुए कहा
पृथ्वी की शादी हो चुकी थी और अब तो अवनि ने भी मान लिया था कि वह पृथ्वी से प्यार करती है ऐसे में पृथ्वी अवनि के करीब आने का मौका भला कैसे छोड़ सकता था ? वह अवनि के पीछे आया और उसके हाथ को अपने हाथो में लेकर प्लेट को धोने लगा।
अवनि ना वहा से हिल सकती थी ना ही पृथ्वी को खुद से दूर कर सकती थी। पृथ्वी बस शरारत से उसके दोनों हाथो को अपने हाथो में थामे हुए था और बहुत प्यार से प्लेट को अवनि के हाथो धो रहा था। उसे अवनि की कोई मदद नहीं करनी थी उसे तो बस अवनि को तंग करना था। अवनि खामोश कहे तो कहे क्या ? करे तो करे क्या ? तभी पृथ्वी ने अपनी ठुड्डी को अवनि के कंधे पर टिका दिया !
अब वह अवनि के पहले से भी ज्यादा करीब था। अवनि के दिल की धड़कने सामान्य से तेज और जैसे ही पृथ्वी ने अवनि के कंधे को अपने होंठो से छुआ एक सिहरन अवनि को हुई। पृथ्वी के होंठ अवनि के कंधे पर थे तो अवनि के छोटे छोटे हाथ पृथ्वी के हाथो में। अवनि के करीब आना पृथ्वी को अच्छा लग रहा था , उसके होंठ अवनि के कंधे से हटकर अब उसकी गर्दन पर थे और जैसे ही पृथ्वी के होंठो ने अवनि की गर्दन को छुआ अवनि एकदम से पलट गयी और कहा,”पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“हम्म्म्म,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“सब बर्तन धूल गए है , मैं अब जाऊ ?”,अवनि ने धीरे से कहा
पृथ्वी ने देखा बर्तन धूल चुके है तो उसने अवनि से दूर हटकर कहा,”हम्म्म ! तुम तैयार हो जाओ थोड़ी देर में हम एयरपोर्ट के लिए निकल जायेंगे”
अवनि ने सुना तो जल्दी से वहा से चली और पृथ्वी धुले हुए बर्तनो को देख खुद में ही बड़बड़ाया,”हाह ! ये रोमांस के बीच में बर्तन कहा से आ गए , ओह्ह्ह्ह पृथ्वी ! तुम जितना सोच रहे हो ये उतना भी आसान नहीं है,,,,,,,,,!!!”
कमरे में आकर अवनि ने दरवाजा बंद किया और पीठ दरवाजे से लगाकर अपनी धड़कनो को सामान्य करने लगी। पृथ्वी के होंठो की छुअन उसे अभी भी अपने कंधे और गर्दन पर महसूस हो रही थी। जब तक अवनि ने पृथ्वी के सामने अपना प्यार जाहिर नहीं किया था तब तक पृथ्वी
ऐसी कोई हरकत नहीं करता था लेकिन अब तो वह खुलकर अवनि के सामने अपना प्यार और अपनी फीलिंग्स शेयर कर रहा था। ये देखकर अवनि खुश थी। वह दरवाजे से हटकर बिस्तर की तरफ आयी। उसने अपने और पृथ्वी के लिए कपडे पहले ही निकालकर थे। अवनि ने कपडे लिए और बाथरूम में चली गयी। अवनि ने अपने बालों को अच्छे से धोया और फिर कपडे बदलकर बाहर चली आयी क्योकि वह पहले ही नहा चुकी थी।
शीशे के सामने आकर अवनि ने गीले बालों को तोलिये से पोछना शुरू किया , उसकी नजर सामने शीशे में नजर आते अपने चेहरे पर पड़ी तो अवनि को पृथ्वी की कही बात याद आ गयी “क्योकि आज तुम कुछ ज्यादा ही सुन्दर लग रही हो”
अवनि ने देखा उसके चेहरे की चमक बाकी दिनों के बजाय आज कुछ अलग थी , शर्म-ओ-हया से गालों पर ब्लश लगाने की जरूरत नहीं थी वे पहले से गुलाबी नजर आ रहे थे। होंठो की रंगत सुर्ख लाल थी। माँग में भरा सिंदूर जो बाल धोने की वजह से हल्का पड़ गया था लेकिन उसकी लालिमा अभी भी अवनि की माँग में नजर आ रही थी। आँखों में एक अलग ही ख़ुशी और सुकून के भाव थे। अवनि मुस्कुराते हुए अपने बालों को पोछने लगी।
कमरे का दरवाजा खुला और पृथ्वी अंदर आया। अवनि अपने ही ख्यालों में खोयी थी उसे पता ही नहीं चला कि पृथ्वी अंदर आया है। पृथ्वी जैसे ही अवनि की तरफ आया। अवनि अपने गीले बालों के साथ पलटी और उसके बाल पृथ्वी के चेहरे पर जा लगे। अवनि ने देखा तो हैरान रह गयी। पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए धीरे से बालों को अपने चेहरे से हटाया और कहा,”तुम्हारे ड्रेस की डोरी खुली है , मैं बाँध दू ?”
“हम्म्म,”कहकर अवनि पलट गयी उसने अपने बालों को आगे कर लिया। अवनि की पीठ पृथ्वी के सामने थी और उस पर उसकी पीठ का वो खूबसूरत तिल जिसे पृथ्वी पहले भी देख चुका था। अवनि को लगा पृथ्वी फिर कोई शरारत करेगा इसलिए वह खामोश खड़ी थी लेकिन पृथ्वी ने इस बार ऐसा कुछ नहीं किया उसने डोरी बाँधी और अवनि को अपनी तरफ घुमाकर कहा,”तुमने अपने बाल क्यों धोये ? गीले बालों में ट्रेवल करोगी तो बीमार पड़ जाओगी ना बेटा”
“मैं ड्रायर से सूखा लुंगी तब तक आप चेंज कर लीजिये”,अवनि ने कहा
“हम्म्म ठीक है,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा और बिस्तर पर रखे अपने कपडे लेकर बाथरूम की तरफ चला गया। पृथ्वी ने नहाकर कपडे बदले और बाहर चला आया तब तक अवनि सच में अपने बालों को सूखा चुकी थी साथ ही उसने अपने बालों को थोड़ा कर्ल भी कर लिया। पृथ्वी शीशे के सामने चला आया क्योकि अवनि तैयार हो चुकी थी।
अवनि ने लाल रंग का अनारकली सूट पहना था , पूरा सूट सिम्पल था बस कुर्ते के बाजू की कलाई पर बहुत ही सुंदर डिजाइन था और यही डिजाइन पुरे ड्रेस को खूबसूरत बना रहा था।
पृथ्वी को तैयार होते देखकर अवनि ने अपने हैंडबैग में सब जरुरी सामान रख लिया। पृथ्वी अवनि की तरफ आया और दोनों अपना अपना सामान लेकर फ्लेट से बाहर निकल गए।
लिफ्ट में उन्हें देशमुख आंटी और अंकल मिल गए। दोनों किसी काम से बाहर जा रहे थे देशमुख अंकल पृथ्वी और अवनि को साथ देखकर मुस्कुराये लेकिन देशमुख आंटी ने तो सीधा सीधा पूछ ही लिया,”तुम्ही दोघे फिरायला जात आहात ? ( तुम दोनों घूमने जा रहे हो ? )
अवनि को मराठी भाषा की समझ अभी भी नहीं थी इसलिए वह पृथ्वी का मुँह देखने लगी। पृथ्वी ने आंटी की तरफ देखा और कहा,”हो आंटी, मी काही दिवसांसाठी बाहेर जात आहे” ( जी आंटी! मैं कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहा हूँ। )
“खूप छान ! या वेळी खुशखबरी नक्की आहे, नाही का ?” ( बहुत बढ़िया ! इस बार खुशखबरी पक्की न ? )”,आंटी ने पृथ्वी से कहा तो पृथ्वी बेचारा शरमा गया और अवनि को इस बार भी कुछ समझ नहीं आया वह तो बस झेंपते हुए मुस्कुराकर अंकल आंटी को देख रही थी
पृथ्वी को शरमाते देखकर अंकल ने आंटी से कहा,”तू काय बोलत आहेस ? पृथ्वी ! तुम्ही जा” ( तुम क्या बोल रही हो ? पृथ्वी तुम जाओ )
लिफ्ट नीचे आ चुकी थी और उसके दरवाजे खुल चुके थे ये देखकर पृथ्वी अवनि के साथ जल्दी से बाहर निकल गया। उसने एयरपोर्ट जाने के लिए जो कैब बुक किया था वो सामने ही खड़ा था। गार्ड ने देखा तो अवनि से बैग लेते हुए कहा,”मुझे दे दीजिये मैं रख देता हूँ”
“अरे नहीं नहीं आप तकलीफ मत कीजिये”,अवनि ने कहा हालाँकि बैग थोड़ा भारी था
“इसमें तकलीफ की क्या बात है ? लाईये”,गार्ड ने कहा तो अवनि ने बैग उन्हें दे दिया।
पृथ्वी अपना बैग लेकर आगे बढ़ गया। गार्ड भी अवनि का बैग उठाये पृथ्वी की तरफ आया और उसकी मदद करने लगा।
देशमुख आंटी और अंकल मराठी में कुछ बोलते हुए वहा से गुजरे तो अवनि उन्हें देखने लगी ये देखकर गार्ड ने कहा,”बेटा ! वापस आने के बाद मराठी जरूर सीखना यहाँ बहुत जरुरी है”
अवनि ने सुना तो हामी में गर्दन हिला दी और गार्ड को थैंक्यू बोलकर गाडी की पिछली सीट पर जा बैठी। पृथ्वी भी अवनि के बगल में आ बैठा और दोनों वहा से निकल गए
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
“सर सब तैयारी हो चुकी है। आज शाम की फ्लाइट से मिस्टर देसाई और प्राची मैडम आ रहे है। उनके वेलकम के लिए मैंने बुके मंगवाकर आपकी गाड़ी में रखवा दिया है और ड्राइवर से भी कह दिया है सर वो आपको एयरपोर्ट लेकर जाएगा”,ऑफिस के एम्प्लॉय या यू कहे भरत के रखे गए नए एम्प्लॉय चेतन ने कहा
“गुड ! वैरी गुड ! मैं थोड़ी देर में निकल जाऊंगा,,,,,,,!!”,भरत ने सिगरेट का कश लगाकर कहा
“सर और कुछ ?”,चेतन ने कहा
“अह्ह्ह हाँ ! लीगल डिपार्टमेंट और अकाउंटेंट को मेरे केबिन में भेज दो,,,,,!!!”,भरत ने सिगरेट बुझाकर अपनी कुर्सी पर बैठते हुए कहा
“जी सर,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह सर मेरा जॉब , मेरा जॉब इस कम्पनी में परमानेंट हो जाएगा ना ?”,चेतन ने कहा
“ओह्ह्ह कम ऑन चेतन मेरे होते हुए तुम्हे फ़िक्र करने की जरुरत नहीं है। मैं तुम्हे एक एड्रेस मैसेज कर रहा हूँ वहा जाकर एक पार्टी से मिलो ! वो तुम्हे दो लाख रूपये देगा,,,,,,,,,,,,,,उन्हें लेकर आओ और ध्यान रहे किसी के पास इसका जिक्र तक ना हो”,भरत ने चेतन को घूरकर कहा
“जी जी जी सर मैं ध्यान रखूंगा”,चेतन ने हड़बड़ाकर कहा
“गुड अब जाओ”,भरत ने कहा तो चेतन वहा से चला गया और कुछ देर बाद लीगल डिपार्टमेंट के सीनियर और अकाउंटेंट अंदर आये। भरत ने उन्हें बैठने का इशारा किया तो दोनों कुर्सी खिसकाकर भरत के सामने आ बैठे। भरत ने इस वक्त दोनों को यहाँ क्यों बुलाया है उन्हें नहीं पता था। दोनों ने हैरानी से एक दूसरे को देखा और फिर भरत की तरफ देखने लगे तो भरत ने कहा,”आज शाम की फ्लाइट से मिस्टर देसाई मुंबई वापस आ रहे है , मैं उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट जा रहा हूँ और,,,,,,,,,,,,,,!!!”
भरत अपनी बात कहते कहते एकदम से रुका तो दोनों उन्हें देखने लगे और भरत ने आगे कहा,”और ये बात अपनेदिमाग में फिट कर लो कि बीते एक हफ्ते में इस कम्पनी में जो भी काम हुआ है उसकी जानकारी मिस्टर देसाई को आप लोग नहीं मै दूंगा। आप दोनों का काम है सिर्फ रिपोर्ट बनाना इसलिए कल सुबह तक वो मुझे मेरे टेबल पर चाहिए,,,,,,,,,,,,बाकि मैं अपने आप देख लूंगा”
“लेकिन सर उन रिपोर्ट्स पर अप्रूवल हमेशा सर का ही होता है”,अकाउंटेंट ने कहा
“ओह्ह्ह ! लगता है तुम्हे मेरी बात ठीक से सुनाई नहीं दी ,, मैं इस कम्पनी में MD हूँ और कोई रिपोर्ट मिस्टर देसाई से पहले मैं देखने वाला हूँ उसमे क्या करेक्शन करना है वो मैं आपको बता दूंगा,,,,,,,,,,,,कल सुबह तक सभी रिपोर्ट्स मुझे चाहिए वरना आप अपने लिए एक नयी नौकरी ढूंढ सकते है,,,,,,,,,,,,खैर मुझे देर हो रही है इसलिए अब आप जा सकते है।”,भारत ने रूखेपन से कहा और दोनों के जाने का इन्तजार किये बिना ही अपना फोन और कोट उठाकर केबिन से बाहर निकल गए।
“सर ! जब से भरत सर MD बने है इनकी मनमानिया दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। ऐसे तो ये कम्पनी बर्बाद हो जाएगी सर”,अकाउंटेंट ने चिंता भरे स्वर में कहा
“हाँ प्रवीण ! तुमने सही कहा , जब तक मिस्टर भरत सर के मैनेजर थे तब तक कितने शांत और अच्छे थे और जैसे ही इस कम्पनी में उन्हें MD की पोजीशन मिली इनके तो तेवर ही बदल गए है। देसाई सर को जल्द से जल्द इस बारे में बताना होगा”,लीगल टीम के सीनियर ने कहा
“हाँ सर ! अच्छा हुआ सर दो दिन पहले ही लौट आये वरना दो दिन में तो मिस्टर भरत इस कम्पनी में लाखो का नुकसान कर देते”,प्रवीण ने कहा
“ये तुम क्या कह रहे हो प्रवीण ?”,सीनियर ने हैरानी भरे स्वर में कहा तो पृथ्वी ने उन्हें पिछले पाँच दिनों भरत के जरिये अकाउंट्स में की गयी गड़बड़ और चौधरी ग्रुप को एडवांस माल भेजने की बात बता दी जिसे सुनकर सीनियर के चेहरे पर भी चिंता के भाव उभर आये।
पृथ्वी अवनि के साथ एयरपोर्ट पहुंचा। सामान लेकर वह जैसे ही अंदर जाने लगा पृथ्वी का फोन बजा। पृथ्वी ने फोन निकालकर देखा उसी अनजान शख्स का मैसेज था जो पृथ्वी से मिलना चाहता था। पृथ्वी ने अवनि से अंदर चलने को कहा और खुद पार्किंग की तरफ चला आया। पृथ्वी उस मैसेज वाले को ढूंढने लगा लेकिन पृथ्वी ने ना उसे पहले कभी देखा था ना ही वह उसके बारे में कुछ जानता था। पृथ्वी ने देखा पार्किंग में कोई नहीं है तो वह वापस जाने के लिए पलट गया।
जैसे ही उसने चार कदम आगे बढ़ाये सामने से भागते हुए एक शख्स आया और पृथ्वी से टकरा गया। आदमी के मुँह पर मास्क था उसके हाथ में एक छोटा सा बैग था जो टकराने की वजह से गिर गया था।
पृथ्वी आदमी से कुछ पूछ पाता इस से पहले आदमी ने नीचे गिरे बैग को उठाया और पृथ्वी को थमाकर वहा से चला गया। पृथ्वी ने पलटकर भागते आदमी को देखा और फिर बैग देखकर बड़बड़ाया,”उसने ये बैग मुझे क्यों दिया ?”
पृथ्वी कुछ समझ पाता इस से पहले उसे सामने से आते मिस्टर भरत दिखाई दिए जो कि भागकर उसी तरफ आ रहे थे ! परेशानी और उलझन के भाव उनके चेहरे पर थे और वे जैसे किसी को ढूंढ रहे थे। भरत को आते देखकर पृथ्वी ने पहले ही अपने हाथ में पकडे बैग को पीछे कर लिया। भरत पृथ्वी के सामने आकर रुका तो पृथ्वी ने शांत लहजे में कहा,”मिस्टर भरत ! आप यहाँ क्या कर रहे है ?”
“अह्ह्ह , कुछ नहीं मैं बस यहाँ मिस्टर देसाईं को रिसीव करने आया था”,भरत ने घबराये हुए स्वर में कहा
“यहाँ पार्किंग में ?”,पृथ्वी ने सवाल किया
भरत ने सुना तो खिंसियाकर हंसा और कहा,”अह्ह्ह नहीं नहीं ! यहाँ तो बस गाड़ी पार्क करने आया था”
पृथ्वी ने भरत की आँखों में देखा और कहा,”पर आपको देखकर तो लग रहा है जैसे आप किसी का पीछा कर रहे है, खैर मेरी फ्लाइट का वक्त हो गया है मैं चलता हूँ”
पृथ्वी वहा से चला गया और भरत ने अपना पैर पटकते हुए यहाँ वहा देखा लेकिन जिसके लिए वह यहाँ आया था वह उसे कही दिखाई नहीं दिया।
( क्या पृथ्वी और अवनि की जिंदगी में दे दी है रोमांस ने दस्तक ? क्या प्रवीण और सीनियर बता पाएँगे मिस्टर देसाई को भरत की करतूतों के बारे में या उस से पहले चल देगा भरत कोई नयी चाल ? पृथ्वी से टकराने वाला वो शख्स कौन है और आखिर क्या है उस बैग में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” सीजन 3 मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
