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Pasandida Aurat Season 3 – 11

Pasandida Aurat Season 3 – 11

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी लता से मिलने घर चला गया और अवनि दरवाजा बंद करके अंदर चली आयी। अवनि कमरे में आयी और कबर्ड से अपने और पृथ्वी के कपडे निकालकर बिस्तर पर रखने लगी। कुछ घंटे दोनों मुंबई से बाहर जाने वाले थे और पृथ्वी बाहर गया था उसे आने में कितना टाइम लगे सोचकर अवनि ने दोनों के लिए पैकिंग करना सही समझा। वह एक एक करके जरूरत का सारा सामान बिस्तर पर रख रही थी। कबर्ड से सामान लेते हुए उसकी नजर एक डिब्बे पर पड़ी।

अवनि ने डिब्बा निकाला और खोलकर देखा , उस डिब्बे में कशिश की गिफ्ट की शार्ट ड्रेस थी जिसे अवनि ने आज तक नहीं पहना था। अवनि ने उसे डिब्बे से बाहर निकालकर देखा और खुद से ही कहा,”वैसे ये इतनी छोटी भी नहीं है और पृथ्वी के सामने तो मैं इसे पहन ही सकती हूँ”
अवनि ने उस ड्रेस को तह किया और लाकर अपने बाकि कपड़ो के साथ रख दिया। अवनि ने अपने पहनने के लिए कुछ साड़ी और कुछ सूट रखे थे जबकि वह पृथ्वी के साथ गोआ जा रही थी ,

वहा इन सब कपड़ो का क्या काम लेकिन अवनि और पृथ्वी को शॉपिंग करने का टाइम ही नहीं मिला इसलिए अवनि को यही सब रखना पड़ा। सब सामान बिस्तर पर रखने के बाद अवनि ने इधर उधर देखा कबर्ड के ऊपर सूटकेस रखा था जहा तक अवनि का हाथ मुश्किल से पहुंच रहा था फिर भी अवनि ने उसे उतारने की कोशिश की। वह सूटकेस उतार पाती इस से पहले ही उसका फोन बजा।

अवनि सूटकेस छोड़ बिस्तर की तरफ आयी और अपना फोन उठाकर देखा। स्क्रीन पर कौशल चाचा का नंबर देखकर अवनि का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा। उसने फोन उठाया और कान से लगाकर कहा,”हेलो चाचाजी ! उदयपुर कब पहुंचे आप ?”
“रात में पहुंच गए थे लेकिन सब इतना थके हुए थे कि घर आते ही सो गए , बच्चे तो अभी भी सो रहे है। मैं भी थोड़ी देर पहले ही उठा तो सोचा तुम्हे खबर कर दू। हम सब सही सलामत पहुंच गए है और तुम बताओ तुम ठीक हो ना अवनि ?”,कौशल चाचा ने प्यार से कहा

“जी चाचा जी ! मैं बिल्कुल ठीक हूँ,,,,,!!!”,अवनि ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा
“जमाई सा कैसे है ? उन्हें मेरी तरफ से थैंक्यू कहना बेटा ! इतनी सुबह वो तुम्हे लेकर स्टेशन आये सिर्फ हम लोगो से मिलवाने के लिए,,,,,,,,सच में उनका दिल बहुत बड़ा है। किस्मतवाली हो तुम जो तुम्हे उनके जैसा हमसफ़र मिला”,कौशल चाचा ने कहा
कौशल चाचा के मुँह से पृथ्वी की तारीफ सुनकर अवनि का चेहरा खिल उठा और उसने कहा,”वो ठीक है चाचा जी ! अभी बाहर गए है”

“कोई बात नहीं बेटा , तुम आराम करो मैं तुम्हे बाद में फिर फोन करूंगा,,,,,,,,,,,,अपना ख्याल रखना और जमाई सा का भी,,,,,!!!”,कौशल चाचा ने कहा
“जी चाचा जी , मैं रखती हूँ”,अवनि ने कहा और फोन काट दिया  
 कौशल चाचा से बात करके अवनि का मन खुश हो गया। जब उसकी जिंदगी में दुःख आये तो इतने आये कि वह बिखर गयी और अब खुशिया आयी तो इतनी आयी कि उस से सम्हाले नहीं सम्हल रही थी। पृथ्वी के घरवालों ने उसे सम्मान के साथ अपना लिया था ,

उसके अपने घरवालों ने उसे और पृथ्वी को माफ़ कर दिया था , सुरभि जैसी दोस्त उसके पास थी , मायके से दूर होकर भी जयदीप के रूप में एक मायका उसके पास था और पृथ्वी जैसा प्यार करने वाला हमसफ़र उसकी जिंदगी में था और हर तरफ बस खुशिया ही खुशिया थी। कौशल चाचा से बात करके अवनि ने फोन साइड में रखने के लिए जैसे ही अपना हाथ बढ़ाया उसे सुरभि की याद आयी। अवनि ने सुरभि का नंबर डॉयल किया और फोन कान से लगा लिया।

एक दो रिंग जाने के बाद सुरभि ने फोन उठाया और कहा,”हेलो मिसेज उपाध्याय कैसी रही आपकी फर्स्ट नाईट ?”
सुरभि ने फोन उठाते ही पहला सवाल ऐसा किया जिसे सुनकर अवनि शरमा गयी और सुरभि को मीठी सी फटकार लगाकर कहा,”कितनी बेशर्म हो ना तुम सुरभि ! ना कोई हाय-हेलो ना कोई हाल चाल सीधा शुरू हो गयी तुम,,,,,,,,,,,,!!!
सुरभि कहा अवनि की इस फटकार से चुप होने वाली थी उसने अवनि को छेड़ते हुए कहा,”मैं कहा अवनि शुरू तो वो हुए होंगे,,,,,,,बेचारे इतने दिन तुम से दूर जो थे,,,,,,,,,,,,,,!!!”

“चुप करो ! उदयपुर पहुंच गयी और मुझे बताया भी नहीं , कम से कम एक मैसेज ही कर देती”,अवनि ने सुरभि को फिर डांट लगायी
“मुझे लगा तुम पृथ्वी के साथ बिजी होगी,,,,,,,,,,,यू नो क्वालिटी टाइम तो बस मैंने तुम दोनों को डिस्टर्ब नहीं किया,,,,,,,और उदयपुर तो मैं पीछे छोड़ आयी”,सुरभि ने कहा
“पीछे छोड़ आयी मतलब ? तुम अभी हो कहा ?”,अवनि ने हैरानी से पूछा
“ट्रेन में हूँ और सिरोही जा रही हूँ”,सुरभि ने कहा

“सिरोही ! लेकिन अचानक सिरोही क्यों ? अभी अभी तुमने इतना लंबा सफर किया है। एक दो दिन छोड़कर चली जाती,,,,,,,,,,वैसे भी तुमने एक हफ्ते की छुट्टी ले रखी है और उन्हें खत्म होने में अभी 4 दिन बाकी है फिर इतनी जल्दी वापस क्यों जा रही हो ?”,अवनि ने पूछा

सुरभि फंस गयी क्योकि अवनि से झूठ बोलना इतना आसान भी नहीं था फिर भी उसने कॉन्फिडेंस से भरकर कहा,”अरे वो एक्चुली ! सुबह ही मेरे बॉस का फोन आया था उन्होंने अर्जेन्ट सबको पोस्ट ऑफिस बुलाया है बस इसलिए मुझे भी जाना पड़ रहा है।”
“ओह्ह्ह्ह अच्छा”,अवनि ने कहा  
“अच्छा अवनि मैं तुम्हे वहा पहुंचकर शाम में आराम से फोन करती हूँ”,सुरभि ने कहा

“सुरभि ! आज शाम मैं और पृथ्वी एक हफ्ते के लिए मुंबई से बाहर जा रहे है,,,,,,,,,,,शाम की फ्लाइट है तो हो सकता है मैं तुम्हारा कॉल अटेंड ना कर पाऊ”,अवनि ने कहा
“तुम और पृथ्वी हनीमून पर जा रहे हो क्या ? हो ना हो ये आइडिआ मेरे रोमांटिक जीजू पृथ्वी का ही होगा , है ना ?”,सुरभि ने चहककर कहा
“अह्ह्ह नहीं ! जयदीप भैया है ना उनके के बॉस,,,,,,,,ये सब उन्होंने प्लान किया है”,अवनि ने कहा

“अवनि ! तुम्हारे मुँह से पृथ्वी के लिए ‘उनके’ कितना अच्छा लगता है। अब लग रही हो तुम परफेक्ट वाइफ,,,,,,,,,ठीक है मैं तुम्हे वापस लौटने के बाद फोन करुँगी वैसे भी मुझे तुम्हे कुछ बताना है अवनि,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने आखरी कुछ शब्द गंभीर होकर कहे
“हाँ बताओ ना”,अवनि ने कहा

“अह्ह्ह्ह अभी नहीं ! तुम और पृथ्वी वापस आ जाओ उसके बाद,,,,,,,,हैप्पी जर्नी ! दोनों खूब इंजॉय करना और हाँ इस बार पृथ्वी से आई लव यू कह देना वरना मैं उसे आई लव यू कह दूंगी,,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने कहा
अवनि ने सुना तो हंसी और कहा,”ए ! वो सिर्फ मेरे है तुमने उन्हें ऐसा कुछ कहा न तो मैं तुम्हारी जान ले लुंगी”
“आये हाये अवनि ! बस यही मोहब्बत तो देखनी थी मुझे तुम्हारी पृथ्वी को लेकर,,,,,,,,,,बस अब जितनी जल्दी हो सके पृथ्वी से अपने प्यार का इजहार कर देना”,सुरभि ने कहा

“हम्म्म्म,,,,,,,,,,,अच्छा अब मैं रखती हूँ मुझे पैकिंग भी करनी है”,अवनि ने कहा और सुरभि को बाय बोलकर फोन काट दिया।
 सुरभि की बातें अवनि के जहन में घूमने लगी और कानों में गूंजने लगी ! अवनि ने फोन अपने होंठो से लगाया और पृथ्वी के बारे में सोचकर मुस्कुरा उठी।

 देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
मिस्टर देसाई और प्राची एक हफ्ते के लिए कोलकता गए हुए थे और देसाई ग्रुप की सभी जिम्मेदारी भरत के कंधो पर थी। भरत जो फैसला करता ऑफिस के लोग उसे मानते और चुपचाप अपना काम करते। मिस्टर देसाई के ऑफिस में कुछ वफादार और ईमानदार  एम्प्लॉय थे उन्हें भरत ने ऑफिस से निकाल दिया और उनकी जगह अपने आदमियों को हायर कर लिया अब वे सब मिस्टर भरत के इशारो पर काम करते।

अपने केबिन में बैठा भरत हाथ में पकड़ी फाइल के अंदर रखे पेपर्स को बड़े ध्यान से पढ़ रहा था तभी किसी ने दरवाजा नॉक किया।
“यस कम इन,,,,,,,,,!!!”,भरत ने फाइल में नजरे गड़ाए कहा
देसाई ग्रुप का अकाउंटेंट अंदर आया और कहा,”मिस्टर भरत ! आपने चौधरी एंड संस को 12 लाख का मेटेरियल अप्रूव किया है जबकि आप जानते है देसाई सर ने पिछले महीने ही इन्हे माल देने से मना कर दिया था।

मिस्टर चौधरी के पिछले 8 महीने के चेक अभी क्लियर है हुए है और आपने एक और नया अप्रूवल दे दिया,,,,,,,क्या देसाई सर इस बारे में जानते है ?”
भरत ने जब देखा कि देसाई ग्रुप का एक मामूली सा अकाउंटेंट उन से सवाल कर रहा है तो उनके चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये उन्होंने हाथ में पकड़ी फाइल को टेबल पर साइड में पटका और सामने खड़े अकाउटेंट को देखकर कहा,”तुम्हे क्या लगता है इन छोटी छोटी बातो के लिए मुझे मिस्टर देसाई से परमिशन लेनी पड़ेगी , भूलो मत मैं इस कम्पनी में MD हूँ मुझे ये सारे राइट्स मिस्टर देसाई से ही मिले है,,,,,,,,!!!”

“आई नो सर लेकिन फिर भी अगर एक बार आप सर से बात करके कन्फर्म कर लेते तो बेहतर होता,,,,,,,,,,!!!”,अकाउंटेंट ने कहा
भरत ने सुना तो गुस्से से तेज आवाज में कहा,”तुम चाहते हो इतनी छोटी सी बात के लिए मैं मिस्टर देसाई को परेशान करू ? मिस्टर देसाई कोलकता में अपनी बेटी के साथ छुट्टिया बिता रहे है और तुम चाहते हो मैं उन्हें फोन करके ये सब डिस्कस करू ? लिस्टन ! मिस्टर देसाई के बाद इस कम्पनी के फैसले लेने का हक़ मुझे है इसलिए आज शाम से पहले मिस्टर चौधरी को माल पहुंचा दो बाकि सब मैं अपने आप देख लूंगा,,,,,,,,,,,!!!”

भरत को गुस्से में देखकर अकाउंटेंट खामोश हो गया और चुपचाप वहा से चला गया। भरत ने अपने गले में बंधी टाई को ढीला किया और अपनी कुर्सी पर आ बैठा।
अगले ही पल उसका फोन बजा स्क्रीन पर मिस्टर चौधरी का नाम देखकर वह मुस्कुराया और फोन उठाकर कान से लगाकर गर्मजोशी से कहा,”हेलो मिस्टर चौधरी ! मैं बस अभी आपको ही याद कर रहा था। आपका माल आज शाम से पहले गोडाउन में पहुंच जाएगा,,,,,,,,,,,!!!”

“थैंक्यू मिस्टर भरत ! मुझे आपसे यही उम्मीद थी”,मिस्टर चौधरी ने ख़ुशी भरे स्वर में कहा
“इसमें थैंक्यू की क्या बात है मिस्टर चौधरी , बस आप मेरे वो 2 लाख मत भूलियेगा बाकि आपके पिछले सभी चेक क्लियर करने की जिम्मेदारी मेरी,,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर भरत ने मुस्कुरा कर कहा
“अरे बिल्कुल भरत ! आज शाम मेरा आदमी पैसे तुम तक पहुंचा देगा लेकिन भरत मिस्टर देसाई मुझे माल देने को तैयार कैसे हो गए ?”,मिस्टर चौधरी ने कहा  

“आप आम खाइये गुठलिया गिनने की कोशिश मत कीजिये,,,,,,,,!!”,भरत ने कहा
“हाहाहाहा ठीक है भरत , मुझसे हाथ मिलाकर सच में फायदे का सौदा किया है तुमने , मैं रखता हूँ जल्दी ही मिलेंगे”,मिस्टर चौधरी ने कहा और फोन काट दिया

भरत ने फोन रखा और कुर्सी से उठकर कहा,”मेरा नाम भरत देशमुख है , बिना मतलब के मैं कुछ नहीं करता। उस देसाईं ने मुझे इस कम्पनी का MD बनाया है लेकिन जल्द ही मैं इस कम्पनी का मालिक बन जाऊंगा और उस देसाई को सड़क पर ला दूंगा,,,,,,,,,,,,,,,और इसमें मेरा साथ देगी खुद उसकी अपनी बेटी,,,,,,,,!!!”
ये सब कहते हुए भरत के चेहरे पर नफरत और ख़ुशी के मिले जुले भाव थे और वह बहुत ही रहस्य्मयी तरीके से मुस्कुराया

पृथ्वी घर आकर लता से मिला और उन्हें एक हफ्ते के लिए मुंबई से बाहर जाने के बारे में बताया तो लता ने भी ख़ुशी ख़ुशी हामी भर दी !  पृथ्वी कुछ देर रुका और फिर गलत जाने के लिए घर से निकल गया। रवि जी के घर से अपार्टमेंट ज्यादा दूर नहीं था। पृथ्वी पैदल चला जा रहा था कि चलते चलते उसके दिमाग में वह मैसेज आया “क्या हम मिल सकते है ?”

पृथ्वी को याद आया कि आज शाम 5 उसे उस शख्स से मिलना था लेकिन आज शाम तो उसकी फ्लाइट थी। पृथ्वी रुका अपनी उंगलिया होंठो से लगाकर सोच में पड़ गया। उसका उस शख्स से मिलना भी जरुरी था और शाम में टाइम से एयरपोर्ट भी पहुंचना था। उसने जेब से फोन निकाला और जिस नंबर से मैसेज आया था वो नंबर डॉयल किया लेकिन नंबर बंद आ रहा था। पृथ्वी ने एक बार फिर ट्राय किया लेकिन नंबर फिर बंद आ रहा था
पृथ्वी ने उस नंबर पर एक मैसेज छोड़ा और फिर अपार्टमेंट की तरफ चला आया।

फ्लेट की दूसरी चाबी हमेशा पृथ्वी के पास रहती थी इसलिए उसने बेल बजाकर अवनि को डिस्टर्ब नहीं किया और दरवाजा खोलकर अंदर चला आया। पृथ्वी सीधा कमरे में आया देखा अवनि अपना हाथ उठाये कबर्ड पर रखे सूटकेस को उतारने की नाकाम कोशिश कर रही है। पृथ्वी उसके बगल में आया , अपना हाथ उठाया और बहुत ही आराम से खली सूटकेस नीचे उतारकर अवनि के सामने रख दिया। अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने अपने कंधे पर हाथ रखकर अवनि के कंधे की तरफ इशारा करके उसे ये अहसास दिलाया कि वह अवनि से लंबा है।  

अवनि ने देखा पृथ्वी उसकी हाइट को लेकर उसे चिढ़ा रहा है तो उसने मुँह बनाया और साइड में रखा दूसरा सूटकेस उतारने लगी लेकिन ये पहले वाले से भी ज्यादा ऊपर रखा था। अवनि का हाथ नहीं पहुंच पाया ये देखकर पृथ्वी धीरे से हँसा और अवनि की तरफ आकर सूटकेस उतारते हुए कहा,”अरे बेटा ! क्यों परेशान हो रही हो ? ये सब करने के लिए मैं हूँ ना”

अवनि उम्र में पृथ्वी से दो साल बड़ी थी लेकिन पृथ्वी के मुँह से “बेटा” सुनना उसे अच्छा लगता था। पृथ्वी को लेकर उसकी चिढ एकदम से गायब हो गयी और वह प्यार से उसे देखने लगी। कोई और दिन होता तो पृथ्वी शायद इस पल को एन्जॉय करता लेकिन उस से पहले उसकी नजर घडी पर पड़ी और उसने कहा,”हमारे पास सिर्फ 2 घंटे है , जल्दी से पैकिंग करके निकलते है वरना फ्लाइट छूट जाएगी”

“मैंने सब कपडे और जरुरी सामान निकालकर रखा है। 10 मिनिट में सब पैक हो जाएगा”,अवनि ने कहा
“तुमने कुछ खाया ?”,पृथ्वी ने बिस्तर पर रखे सामान की तरफ आकर कहा
“नहीं,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“ठीक है मै बाहर से आर्डर कर देता हूँ,,,,,,,,,,,उस से पहले मैं तुम्हारी हेल्प कर देता हूँ”,पृथ्वी ने कहा और खाली सूटकेस उठाकर बिस्तर पर रखा

पृथ्वी अपना सामान और अपने कपडे अपने सूटकेस में रखने लगा और अवनि अपना सामान अपने सूटकेस में , पृथ्वी ने देखा अवनि ने साड़ी और सूट रखे है तो अपना सर पीटकर मन ही मन खुद से कहा,”हनीमून पर ये सब कपडे कौन पहनता है ? लगता है इसे सब मुझे ही सिखाना पडेगा”
“पृथ्वी ! मैं पढ़ने के लिए अपनी कुछ बुक्स भी रख लू ?”,अवनि ने हाथ में कुछ किताबे उठाये पृथ्वी की तरफ पलटकर पूछा

पृथ्वी अवनि के पास आया। अपनी एक बाँह उसकी कमर से लपेटकर उसे अपने करीब किया और दूसरे हाथ से अवनि के हाथ में पकड़ी किताबे लेकर उन्हें बिस्तर पर साइड में फेंककर कहा,”हम वहा पढाई करने नहीं जा रहे अवनि,,,,,,,,,,!!!”
“हम्म्म,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने धीरे से कहा क्योकि पृथ्वी की नजरें इस वक्त उसे बैचैन कर रही थी।

पृथ्वी अवनि के करीब खड़ा रहा तो अवनि ने उसे छोड़ने का इशारा किया लेकिन पृथ्वी तो पृथ्वी है उसने दूसरी बाँह को भी अवनि की कमर से लपेटा और उसे अपने और करीब करके कहा,”ये तुम हमेशा मुझसे दूर जाने के बहाने क्यों ढूंढती रहती हो ? तुम्हे लगता है मैं तुम्हे खुद से दूर जाने दूंगा”
पृथ्वी के साथ रहते रहते अवनि पर भी धीरे धीरे उसका असर होने लगा था इसलिए उसने अपनी बांहो को पृथ्वी के गले में डाला और उसकी आँखों देखकर कहा,”कौन कमबख्त आपसे दूर जाना चाहता है ?”

अवनि की बात सुनकर पृथ्वी का दिल जोर से धड़का वह एकदम से दूर हटा और कहा,”ए भाई ! तुम अपना पैकिंग करो मैं खाना आर्डर करता हूँ”
पृथ्वी की ऐसी हालत देखकर अवनि मुस्कुरा उठी और फिर बचा हुआ सामान सूटकेस में रखने लगी।

( छुट्टियां ख़त्म होने से पहले ही आखिर सुरभि क्यों जा रही है सिरोही ? क्या भरत चलने वाला है मिस्टर देसाई के खिलाफ कोई चाल ? क्या होगा पृथ्वी की हाल जब अवनि जतायेगी उस से मोहब्बत ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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