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Pasandida Aurat Season 2 – 98

Pasandida Aurat Season 2 – 98

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

अवनि ने फोन देखा तो स्क्रीन पर सुरभि का नंबर देखकर वह उठ बैठी और अपना हाथ अपने ललाट पर मारा। ऐसा अवनि ने इसलिए किया क्योकि यहाँ मुंबई में इतना सब हो रहा था और लेकिन वह सबके साथ इतना बिजी हुई कि उसे बताना ही भूल गयी। उसने फोन उठाया और कहा,”हेलो सुरभि,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

“बस यही थी तुम्हारी दोस्ती , मतलब मुझे अब किसी और से पता चलेगा कि कल तुम्हारी शादी है,,,,,,,,,,,,,तुम मुझे कैसे भूल सकती हो अवनि ? तुम से अच्छे तो मेरे पृथ्वी जीजू है , उन्होंने फोन करके मुझे नहीं बताया होता तो मुझे तो पता ही नहीं चलता,,,,,,,,,तुमने तो मेरा दिल ही तोड़ दिया अवनि”,सुरभि ने उदासी भरे स्वर में कहा
“ऐसी बात नहीं है सुरभि , मैं तुम्हे बताने ही वाली थी”,अवनि ने कहा

“कब शादी हो जाने के बाद या फिर मुझे दो चार बच्चो की मौसी बनाने के बाद”,सुरभि ने चिढ़कर कहा
“अच्छा बाबा सॉरी ! मुझे माफ कर दो प्लीज,,,,,,,,,,सब इतनी जल्दी हुआ न कि मैं तुम्हे बता ही नहीं पायी। शादी अभी हुई नहीं है कल है मैं उनसे कहकर तुम्हारी टिकट्स बुक करवा देती हूँ”,अवनि ने कहा
“क्या बात है अवनि अभी से उनसे,,,,,,,,,,,,,,अह्हह्ह्ह्ह कही मुंबई आकर पृथ्वी के लिए तुम्हारा प्यार देखकर मैं मर ही ना जाऊ”,सुरभि ने आह भरकर कहा

“चुप करो ! कुछ भी बोलती हो ना तुम,,,,,,,!!”,अवनि ने सुरभि को प्यार से डांटकर कहा
“तो कब कर रही हो तुम पृथ्वी से अपने प्यार का इजहार ?”,सुरभि ने पूछा  
अवनि मुस्कुरा उठी और कहा,”बहुत जल्द,,,,,,,,,,लेकिन पहले तुम यहाँ आ जाओ मुझे तुम्हे बहुत कुछ बताना है सुरभि ,पृथ्वी को लेकर जो मेरी भावनाये है वो तुमसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता,,,,,,,,,तुम चाहती थी ना हमारी शादी हो तो मैं चाहती हूँ कल तुम मेरे साथ रहो,,,,,,मेरे मायके से आने वाली तुम पहली और आखरी इंसान हो सुरभि,,,,,,,,,,,तुम आओगी ना ?”,कहते कहते अवनि रोआँसा हो गयी  

सुरभि ने सुना तो उसका भी दिल भर आया और उसने कहा,”ऐसा नहीं कहते अवनि ! मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ और मैं जरूर आउंगी,,,,,,,,,,!!”
“हम्म्म,,,,,,,,,,मैं इंतजार करुँगी”,अवनि ने कहा और सुरभि से कुछ देर बात करके फोन रख दिया।
अवनि ने अपनी पीठ दिवार से लगा ली और उदास सी अपने घरवालों के बारे में सोचने लगी। आज उसी जिंदगी में इतना बड़ा ख़ुशी का मौका था और उसके परिवार से कोई भी उसके साथ नहीं था और अब तो अवनि को उनके आने की उम्मीद भी नहीं थी। उसकी आँखों के सामने बीते दिनों की यादें घूमने लगी।

कौशल चाचा का हमेशा अवनि की साइड लेना , मयंक चाचा के लिए रोज कुछ चटपटा बनाना और उनसे तारीफ सुनना , सीमा और मीनाक्षी के साथ किचन में खाना बनाना , दीपिका सलोनी के साथ वक्त बिताना , अंशु और नितिन को सोने से पहले नयी नयी कहानिया सुनाना , कार्तिक के देर रात घर आने पर सबसे छुपकर उसके लिए दरवाजा खोलना और सबसे आख़िर में याद आये अवनि को विश्वास जी के साथ बिताये पल , विश्वास जी के कमरे को ज़माना , उनकी दवा से लेकर उनके खाने का ख्याल रखना ,

जब खुश होती थी तो सबसे पहले आकर विश्वास जी को बताती थी और जब किसी बात पर उदास होती थी तो जमीन पर बैठकर घंटो उनके घुटने पर अपना सर रखकर बैठी रहती,,,,,,,,,,,!!
ये सब सोचते हुए अवनि की आँखों में आँसू भर आये लेकिन अवनि ने उन आँसुओ को आँखों में ही रोक लिया। वह कमजोर पड़ना नहीं चाहती थी तभी उसका फोन बजा। अवनि ने फोन उठाकर देखा पृथ्वी ने उसे विडिओ कॉल किया था। अवनि ने फोन उठाया तो पृथ्वी ने एक ड्रेस अवनि को दिखाकर कहा,”अवनि ! ये कैसा है ?”

अवनि कुछ बोल नहीं पायी उसकी आँखों में आँसू थे और जैसे ही पृथ्वी ने उसकी आँखों में आँसू देखे पृथ्वी के चेहरे के भाव बदल गए और ख़ुशी गायब हो गयी।

अवनि की आँखों में आँसू देखकर पृथ्वी का मन बैचैन हो उठा उसने फोन काटा और तुरंत शोरूम से बाहर निकल गया।
“पृथ्वी , पृथ्वी सुनो ! अरे कहा जा रहे हो ?”,चाचा ने आवाज दी लेकिन पृथ्वी नहीं रुका और वहा से चला गया। हिमांशु चाचा के पास आया और कहा,”क्या हुआ ,पृथ्वी कहा चला गया ?”
“पता नहीं फोन पर किसी से बात कर रहा था और फिर एकदम से चला गया। ये लड़का भी ना हिमांशु , कभी कभी इसे समझना मुश्किल हो जाता है”,चाचा ने हताश होकर कहा

“कोई बात नहीं जाने दीजिये उसे होगा कुछ जरुरी काम , वैसे भी कपडे तो हम सेलेक्ट कर ही चुके है। चलिए चलकर पेमेंट करते है और फिर घर चलते है”,हिमांशु ने कहा तो चाचा ने हामी भरी और हिमांशु के साथ रिसेप्शन की तरफ चले आये।

पृथ्वी शोरूम से निकला और सीधा जा पंहुचा नीलम भुआ के घर , हॉल में सभी घरवाले जमा थे लेकिन पृथ्वी ने ध्यान नहीं दिया वह सीधा नीलम भुआ के कमरे की तरफ बढ़ गया। पृथ्वी अंदर आया तो देखा अवनि सो रही थी। पृथ्वी अवनि के पास आया उसे सोया देखकर पृथ्वी के दिल को थोड़ी तसल्ली मिली। उसने बिस्तर पर रखा चददर अवनि को ओढ़ा दिया और उसके सर को होंठो से छूकर बाहर चला आया। पृथ्वी को इतनी जल्दी घर आया देखकर रवि जी ने कहा,”अरे पृथ्वी ! तुम तो पंकज और हिमांशु के साथ बाहर गए थे ना फिर इतनी जल्दी आ भी गए और वो दोनों कहा है ?”

“आप लोग मुझे ये बताईये मेरे जाने के बाद यहाँ कुछ हुआ था क्या ?”,पृथ्वी ने सबके बीच आकर कहा तो सब एक दूसरे का मुँह देखने लगे।
“नहीं यहाँ तो बस मस्ती मजाक चल रहा है”,चाची ने कहा
“क्या हुआ , तू इतना परेशान क्यों है ?”,बड़े पापा ने पूछा
“कुछ देर पहले मैंने अवनि को फोन किया था और उसकी आँखों में आँसू थे , किसी ने उस से कुछ कहा क्या ?”,पृथ्वी ने पूछा

“आँसू थे ? लेकिन किसी ने उस से कुछ नहीं कहा ,, वो थक गयी थी इसलिए लता ने ही उसे अंदर जाकर कुछ देर आराम करने को कहा था”,बड़ी मम्मी ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो परेशान हो गया , घरवालों के व्यवहार में तो उसे कुछ गड़बड़ नहीं लगी फिर अवनि की आँखों में आँसू क्यों ? उसे सोच में डूबा देखकर लता ने कहा,”हो सकता है उसे अपने घरवालों की याद आ रही हो,,कल शादी है और उसके परिवार से कोई भी उसके साथ नहीं है , कही न कही ये बात उसे अंदर ही अंदर खाये जा रही है”

लता की बात सुनकर पृथ्वी को भी तसल्ली हुई कि हो न हो अवनि शायद इसी वजह से उदास है वह हल्का सा मुस्कुराया और कहा,”कल का दिन उसकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन होगा”

“चल अब तू आ गया है तो फिर अब वापस मत जाना”,नीलम भुआ ने कहा
“क्यों ?’,पृथ्वी ने आकर सोफे पर बैठते हुए कहा
“अरे क्यों क्या ? कल शादी है तो हाथो में मेहँदी लगेगी ना,,,,,,,अभी कुछ देर बाद सोसायटी के सभी लोग आ जायेंगे तब तुम्हे और अवनि को साथ साथ मेहँदी लग जाएगी,,,,,,,गीता तुमने वो मेहँदी लगाने वाली को फोन कर दिया था न ?”,नीलम भुआ ने पृथ्वी से कहा और चाची की तरफ पलटी

“हाँ मैंने सुबह ही कह दिया था वो बस आने वाली ही है”,चाची ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो मुँह बनाया और कहा,”भुआ ! मेहँदी लड़किया लगाती है , मैं ये सब नहीं करूंगा”
“अरे दादा ! आपको तो मैं अपने हाथ से मेहँदी लगाउंगी”,हिमानी ने पृथ्वी के बगल में बैठते हुए कहा
“हरगिज नहीं,,,,,,,,,आई समझाइये ना इन्हे !!!”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा और लता के पास चला आया
“ए कोई मेरे बेटे को परेशान नहीं करेगा,,,,,,,,,इसको मेहँदी मैं लगाउंगी”,लता ने कहा

“आई,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कुनमुना कर कहा और फिर वही लता कि गोद में सर रखकर लेट गया। सभी बातें करने लगे और पृथ्वी के जहन में चल रही थी बस अवनि की वो आँसुओ से भरी आँखे

चाचा और हिमांशु भैया पृथ्वी का सारा सामान लेकर घर चले आये। चाचा तो आते ही पृथ्वी पर टूट पड़े और कहा,”हम दोनों क्या तुम्हारे नौकर है जो तू हमे वहा छोड़कर भाग आया”
हालाँकि चाचा ने बस मजाक में पृथ्वी को दबोच रखा था और पृथ्वी हंस रहा था। ये देखकर दादी ने कहा,”अरे छोडो भाई उसे ! कल उसकी शादी है”

“शादी है तो क्या ये हम सबको ऐसे परेशान करेगा,,,,,,,,,,,!!!”,चाचा ने पृथ्वी को छोड़कर सोफे पर बैठते हुए कहा
“सॉरी,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने पानी का बोतल खोलकर चाचा की तरफ बढ़ा दिया। चाचा ने बोतल लिया और पानी पीकर बोतल हिमांशु की तरफ बढ़ा दी और पृथ्वी से कहा,”देख लेना सब सामान आया है या नहीं और कपडे भी ट्राय कर लेना,,,,,,,,,,,!!!”

“ठीक है,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा और सामने से आती साक्षी भाभी की मदद करने के लिए उठ खड़ा हुआ जो कि सबके लिए चाय लेकर आ रही थी। पृथ्वी ने ट्रे लिया और सबको चाय दी तो चाचा ने उसकी टाँग खींचते हुए कहा,”ये सब तमीज वाले काम तुमने कही अवनि से तो नहीं सीखे ?”
पृथ्वी कहा पीछे हटने वाला था उसने भी चाचा के मजाक का जवाब देकर कहा,”हाँ जैसे आपने चाची सीखा है”
चाचा ने सुना तो झेंप गए और हिमांशु दबी सी हंसी हसने लगा।

शाम में मेहँदी के फंक्शन के लिए सभी जमा हुए। नीलम भुआ ने मेहँदी में पहनने के लिए अवनि को हरे रंग की बहुत ही सुन्दर सी साड़ी दी। सबके बीच बैठी अवनि हंस मुस्कुरा रही थी और मेहँदी लगवा रही थी। पृथ्वी अपने भाई और दोस्तो के साथ कमरे में था वह कल शादी में पहनने वाले कपडे पहनकर देख रहा था और बाकि सब उसे छेड़ रहे थे। कुछ देर बाद साक्षी आयी और कहा,”पृथ्वी भैया ! बाहर चाचीजी ने आपको बुलाया है”
“आप चलिए मैं चेंज करके आता हूँ”,पृथ्वी ने कहा

साक्षी चली गयी और कुछ देर बाद पृथ्वी भी कपडे बदलकर बाहर चला आया। लता ने उसे मेहँदी लगवाने को कहा तो पृथ्वी ने फिर मुँह बना लिया दरअसल उसे मेहँदी की खुशबु पसंद नहीं थी। बहुत कहने पर उसने सिर्फ उंगलियों के पोरो पर मेहँदी लगवाई और उठकर चला गया क्योकि वहा घर और सोसायटी की औरते ही थी इसलिए पृथ्वी को वहा बैठना अच्छा नहीं लगा। अवनि के हाथो में बहुत सुन्दर मेहँदी लगी और साथ ही हाथ की हथेली में लिखा गया पृथ्वी का नाम जिसे देखकर अवनि मुस्कुरा उठी।

सिरोही रेलवे स्टेशन
टिकट खिड़की से उदयपुर जाने वाली ट्रेन का टिकट लेकर सुरभि बेंच पर आ बैठी क्योकि ट्रेन आने में अभी वक्त था। सुरभि खुश थी कि आख़िरकार अवनि और पृथ्वी की जिंदगी में सब सही हो गया और घरवालों ने उन्हें अपना लिया है। सुरभि की आँखों के सामने वो पूरी कहानी चलने लगी जो उसके एक जवाब से शुरू हुई थी। सुरभि मुस्कुराते हुए बीते वक्त के बारे में सोच ही रही थी की तभी सिद्धार्थ की आवाज उसके कानो में पड़ी,”सच ही कहते है लोग कि इंसान जब प्यार में होता है तो अकेले में भी मुस्कुरा लेता है”

सिद्धार्थ की आवाज से सुरभि की तंद्रा टूटी उसने गर्दन घुमाकर देखा तो पाया बगल में ही सिद्धार्थ खड़ा है। उसे यहाँ देखकर आज सुरभि ना चौंकी ना ही उसे चिढ हुई बल्कि उसने बहुत ही शांत स्वर में पूछा,”तुम यहाँ क्या कर रहे हो
“मम्मी पापा एक रिश्तेदार के यहाँ शादी में जा रहे है तो उन्हें छोड़ने स्टेशन आया था,,,,,,,,,,,,लेकिन तुम यहाँ क्या कर रही हो ?? फिर से भाग रही हो क्या ?”,कहते हुए सिद्धार्थ सुरभि के बगल में आ बैठा
“हाह ! मैं क्यों भागने लगी और मैं किस से भागुंगी ?”,सुरभि ने इतरा कर कहा

“पर तुम भाग रही हो बताओ किस से खुद से ,इस शहर से ,इस शहर में रहने वाले लोगो से या फिर अपनी फीलिंग्स से ?”,सिद्धार्थ ने सुरभि की आँखों में झाँकते हुए कहा
सिद्धार्थ का यू आँखों में देखना सुरभि के मन को बैचैन कर गया और उसने सिद्धार्थ से नजरे हटाकर सामने देखते हुए कहा,”फिलहाल तो मैं किसी से नहीं भाग रही बल्कि ख़ुशी ख़ुशी अवनि और पृथ्वी की शादी में जा रही हूँ”
“अवनि और पृथ्वी की शादी ?”,सिद्धार्थ ने हैरानी भरे स्वर में कहा

सुरभि सिद्धार्थ की तरफ पलटी और खुश होकर कहा,”हाँ अवनि और पृथ्वी की शादी,,,,पृथ्वी के घरवाले मान गए है और उन्होंने ख़ुशी ख़ुशी अवनि को भी अपना लिया है इसलिए कल अवनि और पृथ्वी की शादी है,,,,थैंक्यू सिद्धार्थ”
“मुझे थैंक्यू किसलिए ?”,सिद्धार्थ ने फिर हैरानी से कहा
“उस दिन अगर तुमने शादी से इंकार नहीं किया होता तो अवनि ये कभी एक्स्पेट नहीं करती कि वो पृथ्वी से प्यार करती है,,,,,,,,,,,तुमने उस दिन अवनि की भावनाये ही नहीं समझी बल्कि पृथ्वी को उसका प्यार भी सौंपा था,,,,,,,,,,,,इसलिए आज वो दोनों साथ है सो थैंक्यू”,सुरभि ने कहा

“अह्ह्ह्ह ! तो तुम मानती हो कि मैं एक अच्छा लड़का हूँ ?”,सिद्धार्थ ने अपने हाथो को बांधकर इतराते हुए कहा
सुरभि मुस्कुराई और कहा,”हाँ तुम इतने बुरे भी नहीं हो बस अवनि के साथ तुमने जो किया वो गलत था,,,,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने सुना तो उसके चेहरे पर मायूसी के भाव आ गए और वह कहने लगा,”मैंने अवनि के साथ जो किया उसके लिए मैं आज भी शर्मिन्दा हूँ। उस वक्त मैं अपने अहंकार में चूर था इसलिए उसकी अहमियत समझ ही नहीं पाया और जब तक अहमियत समझ आयी तब तक मैं उसे खो चूका था।

अवनि मेरे लिए नहीं पृथ्वी के लिए बनी है ये बात मुझे उस पल समझ आयी जब मैंने शादी वाले दिन उसके हाथो में काँच की मामूली चूड़ियां देखी थी।मैं जान गया कि अवनि की मुझसे शादी सिर्फ एक समझौता है और मैं उसे ये समझौता किसी भी हाल में करने नहीं दे सकता था। वैसे भी किसी ने कहा है “खुद को साबित करने से अच्छा है बुरा बनकर कहानी से निकल जाओ”

सिद्धार्थ की बात सुनकर सुरभि खामोश हो गयी। उसने महसूस किया कि सिद्धार्थ सच में बदल चूका था जिस सिद्धार्थ से वह अवनि के साथ मिली थी वह सिद्धार्थ कोई और था और आज जो उसके सामने है वह कोई और ही सिद्धार्थ हैं।
सुरभि को खामोश पाकर सिद्धार्थ ने कहा,”वैसे तुम ट्रेन से क्यों जा रही हो ? फ्लाइट से जाओगी तो जल्दी पहुंच जाओगी”
“फ्लाइट से ही जाउंगी लेकिन उस से पहले उदयपुर जाउंगी”,सुरभि ने कहा
“उदयपुर किसलिए ? अवनि तो मुंबई में है न”,सिद्धार्थ ने कहा

“मुंबई जाने से पहले मुझे उदयपुर जाना होगा , अवनि की एक अमानत आज भी उसके उदयपुर वाले घर में है , अब सही वक्त आ गया है कि मैं उस तक उसकी अमानत पहुंचा दू”,सुरभि ने कहा
सिद्धार्थ ने सुना तो उसे कुछ समझ नहीं आया लेकिन उसने सुरभि से इस बारे में ज्यादा कुछ पूछा भी नहीं और कहा,”फिर तो तुम्हे जरूर जाना चाहिए,,,,,,,,,,!!”
“तुम चलोगे अवनि की शादी में ?”,सुरभि ने ना जाने क्यों सिद्धार्थ से साथ चलने के लिए पूछ लिया

“नहीं ! वो हक़ मैं बहुत पहले ही खो चुका हूँ”,सिद्धार्थ ने उदासी भरे स्वर में कहा तो सुरभि उसे एकटक देखने लगी सिद्धार्थ ने सुरभि की तरफ देखा और आगे कहा,”लेकिन मैं यहाँ रहकर इंतजार करूंगा”
“कैसा इंतजार ?”,सुरभि ने अपनी बेचैनी को छुपाकर पूछा
सिद्धार्थ ने सुरभि की आँखों में देखा और कहा,”तुम्हारे लौटकर आने का,,,,,,,,,,,,,!!”

सुरभि ने सुना तो उसका दिल धड़का और वह ख़ामोशी से सिद्धार्थ की आँखों में देखती रही वह कुछ कहती इस से पहले ट्रेन का हॉर्न बजा। सुरभि की तन्द्रा टूटी उसने देखा उदयपुर जाने वाली ट्रेन आ चुकी है। उसने अपना बैग उठाया और सिद्धार्थ की तरफ देखकर कहा,”बाय,,,,,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ को उम्मीद थी कि सुरभि उसकी बात का कोई तो जवाब देगी लेकिन सुरभि ने उसे सिर्फ बाय कहा और ट्रेन में चढ़ गयी। सिद्धार्थ का चेहरा उतर गया उसने ट्रेन के दरवाजे की तरफ देखा जिस से सुरभि अंदर गयी थी।

मायूस होकर वह जाने के लिए मुड़ गया और जैसे ही अपने कदम बढ़ाये उसके कानो में सुरभि की आवाज पड़ी,”ओये चिलगोजे,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने सुना तो पलटा देखा ट्रेन के दरवाजे पर खड़ी सुरभि मुस्करा रही है। सिद्धार्थ को देखकर सुरभि ने आगे कहा,”जिंदगीभर इंतजार कर पाओगे ?”
सिद्धार्थ ने सुना तो धीरे से मुस्कुराया और कहा,”तुम्हारे लिए कर लूंगा”
“चल झूठा”,सुरभि ने धीरे से कहा और सिद्धार्थ को देखकर हाथ हिला दिया ट्रेन आगे बढ़ गयी और सिद्धार्थ ने सुरभि को देखकर अपन हाथ हिला दिया।

( मुंबई आकर क्या सुरभि बताएगी अवनि और पृथ्वी को सिद्धार्थ के बारे में ? क्या सच में होगा कल का दिन अवनि की जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन ? क्या जुड़ने लगे है एक दूसरे से  सुरभि और सिद्धार्थ के मन ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” सीजन 2 मेरे साथ )

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Rerad Pasandida Aurat

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संजना किरोड़ीवाल 

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