Pasandida Aurat Season 2 – 93
आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
दादी के आने की वजह से पृथ्वी को आज फिर हॉल में सोना पड़ा। पृथ्वी सुबह आराम से गहरी नींद में सोया था। अवनि हमेशा की तरह जल्दी उठ चुकी थी। दादी को उसने नहीं जगाया और सोने दिया। अवनि ने घर की सफाई की और नहा-धोकर तैयार होकर कमरे से बाहर आयी देखा पृथ्वी सो रहा है। वह पृथ्वी की तरफ आयी और उसके पास खड़े होकर प्यारभरी नजरो से उसे देखने लगी। सोया हुआ पृथ्वी किसी मासूम बच्चे सा लग रहा था। अवनि ने अपनी उंगलियों को अपने होंठो से छुआ और पृथ्वी के गाल से लगाकर मुस्कुराई और फिर वहा से चली गयी। पृथ्वी नींद में था इसलिए करवट बदलकर सो गया।
अवनि घर के मंदिर के सामने चली आयी। उसने अपनी पूजा की और फिर पृथ्वी और दादी के लिए नाश्ता बनाने किचन में चली आयी। अवनि में चाय नाश्ता बनाया तब तक दादी भी उठ चुकी थी और पृथ्वी के पास चली आयी थी। पृथ्वी को सोया देखकर दादी ने उसका कन्धा थपथपाया और कहा,”अरे कितना सोयेगा अब उठ भी जा,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी नींद में था उसे लगा अवनि उसे उठा रही है तो उसने दादी के हाथ को अपने हाथो में थामा और कहा,”सोने दो ना अवनि”
दादी ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखा और फिर उसका कान मरोड़ दिया। पृथ्वी उठा और देखा कि अवनि की जगह उसने दादी के हाथ को थाम रखा है तो जल्दी से उनका हाथ छोड़ा और कहा,”अरे दादी ! आप यहाँ”
“दादी और बीवी के हाथ में फर्क नहीं दिखता तुमको”,दादी ने पृथ्वी का कान मरोड़कर कहा
“अरे दादी सॉरी,,,,,,,,,,,नींद में था”,पृथ्वी ने कहा तो दादी ने उसका कान छोड़ दिया और कहा,”चल अब उठ जा”
पृथ्वी अंगड़ाई लेते हुए उठा और वाशबेसिन के सामने चला आया।
उसने अपना मुँह धोया और ब्रश किया तब तक अवनि दादी और उसके लिए चाय ले आयी। अवनि ने दोनों को चाय दी और खुद भी अपनी चाय लेकर आ बैठी तीनो चाय पीने लगे।
पृथ्वी हर घूंठ के साथ अवनि को देखता और पलकें झुका लेता , ऐसा इसलिए क्योकि वह जानता था कुछ देर बाद अवनि उस से दूर चली जाएगी और जाने से पहले वह जीभरकर अवनि को देखना चाहता था।
अवनि को भी इस बात का अहसास था कि पृथ्वी को उसका जाना खल रहा है लेकिन सिर्फ घरवालों की ख़ुशी के लिए वह चुप है।
तीनो ने ख़ामोशी से चाय पी और पृथ्वी उठकर अपने कमरे में चला गया।
“अवनि जरा यहाँ आना”,कमरे से पृथ्वी ने अवनि को आवाज दी तो अवनि उठकर चली गयी।
कमरे में आकर अवनि ने देखा पृथ्वी अपने बैग में अपने कपडे रख रहा है। उसने अवनि को देखा तो सामान बैग में रखते हुए कहा,”अवनि मेरा वो नया वाला शर्ट नहीं मिल रहा , तुमने कही रखा है क्या ?”
“आपके कबर्ड में ही रखा है , रुकिए मैं देती हूँ”,अवनि ने कहा और कबर्ड की तरफ चली गयी
पृथ्वी ने दरवाजे से झाँककर देखा दादी सोफे पर बैठी फोन पर किसी से बात कर रही थी। शर्ट तो बहाना था पृथ्वी तो बस अवनि से बात करना चाहता था इसलिए उसे बुलाया। जैसे ही अवनि कबर्ड की तरफ गयी पृथ्वी भी उसके पीछे पीछे चला आया। अवनि ने देखा शर्ट सामने ही रखा है तो उसने उसे उठाया और
देने के लिए जैसे ही पलटी पीछे खड़े पृथ्वी से टकरा गयी। आंखो मे शरारत लिए पृथ्वी अवनि की तरफ बढ़ा तो अवनि की पीठ कबर्ड से जा लगी।
पृथ्वी अवनि के ठीक सामने खड़ा था उसने अवनि की आँखों में देखते हुए अपना हाथ उसकी कमर से लगाया और उसे अपने पास करके कहा,”कल दादी के सामने क्या भाव खा रही थी तुम हाँ ? मैं बुलाऊंगा तो तुम नहीं आओगी”
पृथ्वी की नजदीकियों ने अवनि के दिल की धड़कने बढ़ा दी। उसने घबराहटभरे स्वर में कहा,”पृथ्वी ! ये आप क्या कर रहे है ? दरवाजा खुला है”
पृथ्वी को जैसे अवनि की बात सुनाई ही ना दी हो या फिर उसने सुनकर भी जैसे नजरअंदाज कर दिया हो। वह अवनि की आँखों में देखता रहा , उसकी उंगलियों ने अवनि की कमर पर हरकत की तो अवनि सिहर गयी और कहा,”पृथ्वी ! मुझे जाना है”
पृथ्वी ने इस बार भी अवनि की बात पर ध्यान नहीं दिया और उसे देखता था। पृथ्वी की ख़ामोशी और उसका ऐसे देखना अवनि को बैचेन करने लगा उसने देखा पृथ्वी उसकी बात नहीं सुन रहा है तो उसने एकदम से कहा,”दादी आप यहाँ,,,,,,,,,,,!!!!”
अवनि के मुँह से दादी का नाम सुनकर पृथ्वी जल्दी से उस से दूर हटा तो अवनि ने उसे साइड किया और दरवाजे की तरफ चली आयी। पृथ्वी ने देखा दादी वहा नहीं है तो समझ गया अवनि ने उसे बुद्धू बनाया। उसने बिस्तर पर पड़े अपने बैग की तरफ आते हुए धीमे स्वर में अवनि से कहा,”जितना सताना है सता लो बेटा , मैं सब याद रखूंगा और जब मेरी बारी आएगी तब बताऊंगा”
अवनि ने सुना और अपने हाथ में पकड़ा पृथ्वी का शर्ट उसकी तरफ फेंककर कहा,”हाह ! देखेंगे”
पृथ्वी ने भी शर्ट लिया और अपने बैग में रखते हुए कहा,”हाँ देख लेना , जल्दी ही वो दिन आएंगे”
“आप कपडे क्यों पैक कर रहे है , आज ऑफिस नहीं जा रहे ?”,अवनि ने पूछा
“नहीं आज मैंने ऑफिस से छुट्टी ली है , मुझे एक जरुरी काम से सिटी से बाहर जाना है , आते आते देर हो जाएगी”,पृथ्वी ने बैग पैक कर साइड में रखकर कहा
पृथ्वी के जाने के नाम से ही अवनि का मन उदास हो गया जबकि वह खुद भी तो उस से दूर जाने वाली थी। अवनि को उदास देखकर पृथ्वी उसके पास आया और कहा,”अरे क्या हुआ बेटा ? मैं हमेशा के लिए थोड़े जा रहा हूँ कल सुबह वापस आ जाऊंगा और वैसे भी तुम तो दादी के साथ घर जा रही हो”
“हम्म्म्म लेकिन आपके बिना वहा जाना,,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने इतना ही कहा कि पृथ्वी ने अपना हाथ अवनि के गाल से लगाया और बड़े प्यार से कहा,”अवनि पहली बार जब मैंने वहा तुम्हे भेजा तब मुझे डर लग रहा था लेकिन अब तुम्हे वहा भेजकर मुझे ख़ुशी हो रही है। 4 दिन बाद हमारी शादी है और घरवालों ने हमे लेकर बहुत कुछ सोचा होगा। तुम्हे भी शादी की तैयारियां करनी होगी इसलिए वो चाहते है तुम उनके साथ रहो और मुझे यकीन है इस बार सब तुम पर अपना प्यार लुटाने वाले है,,,,,,,,,,,,,!!!!”
अवनि ने देखा ये सब कहते हुए पृथ्वी की बातों में एक अटूट विश्वास था इसलिए वह मुस्कुराई और हामी में गर्दन हिला दी। पृथ्वी ने उसके ललाट को अपने होंठो से छुआ और कहा,”तुम मेरी अमानत हो अवनि और मैं हमेशा तुम्हारा ख्याल रखूंगा”
पृथ्वी के होंठो की छुअन ने अवनि के ललाट पर ठंडक का अहसास दिया , सुकून के भाव उसके चेहरे पर झिलमिलाने लगे और उसने महसूस किया कि इस दुनिया में कोई तो है जो उसे वैसी ही मोहब्बत करता है जैसी वह अपनी किताबो में लिखा करती थी।
पृथ्वी की नजर हॉल में लगी घडी पर पड़ी। वह अवनि के सामने से हटा और कहा,”मैं जल्दी से नहा लेता हूँ फिर मुझे निकलना होगा। एक काम करूंगा तुम्हे और दादी को भी साथ लेते चलूँगा और नीलम भुआ के घर छोड़ता चला जाऊंगा”
अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी और वहा से चली गयी।
पृथ्वी तैयार होकर बाहर आया तब तक अवनि ने सबके लिए नाश्ता लगा दिया था। पृथ्वी दादी के बगल में आ बैठा और एक निवाला दादी को खिलाकर उन्हें छेड़ते हुए कहा,”आपकी बहुओ ने भी खिलाया है कभी इतने प्यार से ?”
दादी ने निवाला खाया और कहा,”मेरी बहू नहीं होती न तो तू भी नहीं होता,,,,,,,,,,,और ये सुबह सुबह बैग लेकर कहा जा रहा है ?”
“किसी जरुरी काम से मुंबई से बाहर जा रहा हु दादी”,पृथ्वी ने खाते हुए कहा
“मुंबई से बाहर ? अरे चार दिन बाद तेरा लग्न है तुझे कही नहीं जाना”,दादी ने उसे डाँटकर कहा
“हाँ तो कल दोपहर तक वापस आ जाऊंगा ना मैं और वैसे भी शादी 4 दिन बाद है”,पृथ्वी ने कहा
“जाना जरुरी है क्या ? ऐसा क्या काम आ गया तुझे ?”,दादी तो पृथ्वी के पीछे ही पड़ गयी और अवनि मुस्कुराते हुए खाती रही।
पृथ्वी दादी की तरफ पलटा और कहा,”मेरा जाना बहुत जरुरी है दादी मैंने किसी से वादा किया है। मैं कल वापस आ जाऊंगा ,अभी आप नाश्ता कीजिये फिर मैं जाते हुए आपको और अवनि को नीलम भुआ के घर छोड़ देता हूँ”
“हुंह ! जब देखो तब बस मनमानी करनी है तुम्हे”,दादी ने पृथ्वी से नाराज होकर कहा तो पृथ्वी ने दादी के कंधो पर अपनी बाँह रखी और उन्हें अपनी तरफ करके उनके गाल पर किस करके कहा,”आई लव यू”
पृथ्वी ने ये तीन शब्द कहे तो दादी से थे लेकिन उसकी नजर सामने बैठी अवनि पर थी। अवनि ने जब सुना और उसकी नजरे पृथ्वी से मिली तो वह शरमाकर दूसरी तरफ देखने लगी और पृथ्वी मुस्कुरा उठा।
नाश्ता करने के बाद पृथ्वी ने कैब बुक कर दी। नीलम भुआ ने अवनि से सिर्फ जरुरी सामान लाने को कहा बाकि कपड़ो और दूसरी चीजों के लिए मना कर दिया। कैब आ चुकी थी पृथ्वी अपना और अवनि का बैग लेकर ,अवनि और दादी के साथ फ्लेट से बाहर निकल गया। उसने फ्लेट को अच्छे से लॉक किया और फिर तीनो लिफ्ट के सामने चले आये।
गाड़ी पहले से ही नीचे खड़ी थी पृथ्वी ने सामान पीछे रखा और दादी के बैठने के लिए गाडी का पिछला दरवाजा खोला तो दादी पीछे ना बैठकर आगे वाला दरवाजा खोलते हुए बोली,”तुम दोनों पीछे बैठो मैं आगे बैठूंगी”
जाने से पहले पृथ्वी को अवनि के साथ थोड़ा वक्त और मिल रहा था ये सोचकर ही वह खुश हो गया और अवनि के साथ पीछे आ बैठा। ड्राइवर ने गाडी आगे बढ़ा दी। दादी पृथ्वी से बात करते हुए जा रही थी।
पृथ्वी ने अपना हाथ अवनि के घुटने पर रखा और अपनी हथेली खोल दी हालाँकि उसकी नजरे सामने दादी पर थी लेकिन अवनि समझ गयी पृथ्वी क्या चाहता है , उसने धीरे से अपना हाथ पृथ्वी के हाथ पर रखा और दोनों हाथो की हथेलियाँ आपस में जा मिली। पृथ्वी ने अवनि के हाथ को मजबूती से थाम लिया। उसके हाथ में अवनि का हाथ किसी छोटे बच्चे सा नजर आ रहा था।
अवनि मुस्कुराते हुए खिड़की से बाहर देखने लगी और पृथ्वी रास्तेभर अवनि के हाथ को ऐसे ही थामे बैठा रहा।
कैब नीलम भुआ की बिल्डिंग के सामने आकर रुकी। दादी गाडी से नीचे उतर गयी और अवनि उतरने लगी तो देखा पृथ्वी ने अभी भी उसका हाथ थाम रखा है। अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा तो उसका उदास चेहरा देखकर समझ गयी कि पृथ्वी को उस से दूर जाते देखकर अच्छा नहीं लग रहा है।
“पृथ्वी ! मैं जाऊ ?”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो अवनि के हाथ को और कसकर पकड़ लिया और सर पीछे सीट से लगाकर अवनि की तरफ देखने लगा। दादी बाहर खड़ी अवनि का इंतजार कर रही थी ये देखकर अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! दादी माँ इंतजार कर रही है,,,,,,,,,,!!”
भारी मन के साथ पृथ्वी ने अपने हाथ की पकड़ ढीली और अवनि ने धीरे से अपना हाथ हटा लिया। पृथ्वी के हाथ से दूर जाते अवनि के हाथ की उंगलियों ने एक आखरी बार पृथ्वी की उंगलियों को छुआ और अवनि गाड़ी का दरवाजा खोलकर नीचे उतर गयी। उसने अपना बैग लिया और पृथ्वी से कहा,”ध्यान से जाना और अपना ख्याल रखना , खाना वक्त से खा लेना”
“और कुछ मैडम जी ?”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा क्योकि वह अवनि को उदास चेहरे के साथ विदा करना नहीं चाहता था
अवनि मुस्कुराई और धीरे से कहा,”जल्दी आना , मैं आपका इंतजार करुँगी”
पृथ्वी ने सुना तो हामी में गर्दन हिला दी और कैब ड्राइवर का कंधा थपथपा कर उसे चलने का इशारा किया क्योकि एक घंटे बाद ही उसकी फ्लाइट थी और उसे समय से एयरपोर्ट पहुंचना था।
मौर्या Pvt. Ltd. कम्पनी , नवी मुंबई
जयदीप ने देखा आज पृथ्वी ऑफिस नहीं आया है तो वह उसके केबिन मे आया और अंकित से कहा,”पृथ्वी आज ऑफिस नहीं आया उसका कोई अपडेट ?’
“सर उसने मेल डाला है कि वो आज लीव पर है , आपने देखा नहीं क्या ?”,अंकित ने कहा
“नहीं मैं देखता हूँ,,,,,,,,,,,,यू गाइज केरी ऑन”,कहकर जयदीप वहा से चला गया
जयदीप अपने केबिन में आया और मेल चेक किया तो देखा पृथ्वी के कल शाम ही एक लीव एप्लिकेशन डाला था।
जयदीप ने अपना फोन देखा। व्हाट्सप्प पर भी पृथ्वी का मैसेज था जिसमे आज और कल ऑफिस ना आने के बारे में लिखा था। जयदीप खुद में ही बड़बड़ाया,”ओह्ह्ह्ह ! लगता है मैंने ही ठीक से नहीं देखा,,,,,,,,,,,,लेकिन आज तो केंसल डील को लेकर मिस्टर देसाई के साथ मीटिंग्स थी और पृथ्वी आज ही नहीं आया,,,,,,,,,,,,!!!”
जयदीप ने पृथ्वी का नंबर डॉयल किया।
पृथ्वी कैब से उतरकर आगे बढ़ा ही था कि उसका फोन बजा। पृथ्वी ने फोन जेब से निकालकर देखा स्क्रीन पर जयदीप का नंबर देखकर पृथ्वी ने फोन उठाया और कहा,”हेलो,,,,,,,!!!”
“हेलो पृथ्वी ! कहा हो तुम ?’,जयदीप ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“एयरपोर्ट हूँ , मैंने आपको मैसेज किया था और कल शाम लीव मेल भी डाला था और मुझे पूरा यकीन है हमेशा की तरह आपने नहीं देखा होगा बट आई ऍम सॉरी अभी बहुत देर हो चुकी है। आधे घंटे बाद मेरी फ्लाइट है और मेरा जाना बहुत जरुरी है”,पृथ्वी ने कहा
“तुम क्या मुझे ताना मार रहे हो ! मैंने तुम्हे फोन इसलिए किया था कि तुम ऑफिस में नहीं रहोगे तो मन नहीं लगेगा”,जयदीप ने कहा
“क्यों मैं आपकी गर्लफ्रेंड हूँ क्या जो मेरे बिना आपका मन नहीं लगेगा ? आपको जो कहना है जल्दी कहिये मुझे देर हो रही है”,पृथ्वी ने कहा
“आज मिस्टर देसाई के साथ मीटिंग है और तुम तो जानते ही हो उस प्राची को मैं फूटी आँख नहीं सुहाता,,,,,,,!!”,जयदीप ने मायूस होकर कहा
“मिस्टर देसाई के साथ आज की मीटिंग आप अटेंड कर लीजिये और हाँ प्राची की टेंशन मत लीजिये वो अब ऑफिस नहीं आएगी”,पृथ्वी ने कहा
“ए पृथ्वी तुम इतना यकीन के साथ कैसे कह सकते हो ? तुमने कुछ किया है क्या ?”,जयदीप ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“आपको क्या लगता है मेरे पास और कोई काम नहीं है ? एक काम कीजिये आज की मीटिंग ज्वाइन कीजिये मैं शाम में आपको कॉल करता हु”,पृथ्वी ने कहा
“अह्ह्ह्ह ठीक है , अच्छा सुनो”,जयदीप ने कहा
“अब क्या है ?”,पृथ्वी झुंझला उठा
“ध्यान से जान और अपना ख्याल रखना”,जयदीप ने बड़े प्यार से कहा
“जी मालिक ! आप कहे तो मैं जाता ही नहीं हु यही रुक जाता हूँ आपके पास”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा तो जयदीप मुस्कुरा उठा और कहा,”ठीक है बाय”
पृथ्वी ने फोन काटा और राहत की साँस लेकर आगे बढ़ गया
( अवनि और पृथ्वी की ये नजदीकियां आखिर कब पहुंचेगी अपने अंजाम पर ? अचानक मुंबई से बाहर क्यों जा रहा है पृथ्वी ? क्या जयदीप समझा पायेगा मिस्टर देसाई को अपनी डील केंसल होने का कारण ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
