Pasandida Aurat Season 2 – 92
नीलम भुआ की बात सुनकर सब हैरान थे तो वही अवनि की आँखों में आँसू थे। पृथ्वी के घर में जिस इंसान ने उसे सबसे ज्यादा दुःख दिया , जलील किया वही इंसान उसके लिए उसका मायका बनने को तैयार थी। अवनि की आँखों में आँसू देखकर लता उसके पास आयी और कहा,”उदास मत हो अवनि ,हम सब है ना हम सब भी तो तुम्हारा ही परिवार है”
पृथ्वी ने सुना तो उसके दिल को एक सुकून मिला आखिरकार लता ने अवनि को अपना मान ही लिया।
दादी और बाकि घरवालों को भी नीलम का ये ख्याल अच्छा लगा। सभी पृथ्वी और अवनि की शादी के लिए तैयार थे और आखिर में दादी ने फोड़ा पृथ्वी पर बम और कहा,”ए पृथ्वी ! तूने सुना ना मैंने क्या कहा ?”
“हाँ 5 दिन बाद हमारी शादी है”,पृथ्वी ने शरमाकर कहा
“हाये ! देखो कैसे शरमा रहा है शादी के नाम से,,,,,,,,,,,,,5 शादी बाद हैं लेकिन तब तक,,,,,,,,!!!”,दादी ने कहा
“तब तक क्या ?”,पृथ्वी ने चौंककर पूछा
“तब तक तुम दोनों साथ साथ नहीं रह सकते”,दादी ने कहा
“अरे ये क्या बात हुई ? हमारी शादी हो चुकी है फिर हम साथ क्यों नहीं रह सकते ? अवनि कही नहीं जाएगी वो यही रहेगी”, पृथ्वी ने एकदम से कहा
“5 दिन बाद पुरे रस्मो रिवाज से ये शादी होनी है और यही मेरा आखिर फैसला है,,,,,,,,,,,,शादी तक अवनि मेरे साथ रहेगी नीलम के घर में,,,,,,,,,,किसी को कोई दिक्कत है ?”,दादी ने कड़क स्वर में कहा
अब भला दादी के सामने कोई क्या कह सकता था इसलिए सबने उनकी बात में अपनी सहमति जता दी लेकिन पृथ्वी तैयार नहीं था उसने दादी के पास आकर धीरे से कहा,”ये आप ठीक नहीं कर रही है”
“ओह्ह तो अब ये तू मुझे सिखाएगा,,,,,,,,,,,,,,बेटा ये सब इंतजाम मैंने तेरे लिए ही किया है ,चल अब खड़ा हो और ख़ुशी ख़ुशी अपनी बायको को हमारे साथ विदा कर,,,,,,,,!!!”,दादी ने प्यार से कहा
“क्या अभी ? अरे आज रात तो उसे यहाँ रहने दो ना प्लीज,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने फिर दबी आवाज में कहा
“ये आप दोनों फिर से क्या खुसर फुसर करने लगे ,आई अगर सब बातें हो चुकी है तो क्यों न सब घर चले ?”,बड़े पापा ने कहा
पृथ्वी आँखों ही आँखों में दादी से अवनि को साथ ना ले जाने की रिवेस्ट कर रहा था , दादी समझ गयी इसलिए कलाई पर बंधी घडी में समय देखते हुए कहा,”हाँ ! काफी वक्त हो चुका ,एक काम करो तुम सब घर चलो”
“और आप ?”,रवि जी ने कहा
“मैं आज रात यही रुकना चाहूंगी ताकि अवनि से थोड़ी बात कर सकू और इसके हाथ से बने भरवा करेले खा सकू। नीलम बता रही थी कि अवनि खाना बहुत अच्छा बनाती है”,दादी ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा तो पृथ्वी उन्हें घूरने लगा। कहा वह बेचारा अवनि के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहता था और कहा दादी ने यहाँ रुकने की बात करके उसके अरमानो पर पानी फेर दिया। घरवालों को दादी के वहा रुकने से कोई ऐतराज नहीं था और पृथ्वी सबके सामने दादी से कुछ कह भी नहीं पाया।
“ठीक है आई अगर आपका यहाँ अपने पाते के साथ रुकने का मन है तो यहाँ रुक जाईये हम सब चलते है”,बड़े पापा ने उठते हुए कहा
“पोते के पास कहा रुकना है इनको तो पोते को परेशान करना है”,पृथ्वी धीरे से बड़बड़ाया
“तुमने कुछ कहा ?”,पृथ्वी के पास खड़े रवि जी ने पूछा
“अह्ह्ह्ह नहीं मैं तो बस ये कह रहा था कि अच्छा है दादी यहाँ रुक जाए तो अवनि का भी मन लग जाएगा”,पृथ्वी ने झेंपते हुए कहा
“उसके मन की चिंता तुम मत करो कही मेरे यहाँ रुकने से तुम्हारा मन तो खराब नहीं हो रहा”,दादी ने कहा
“क्या दादी आप भी ? आपने आने से मैं बहुत खुश हूँ”,पृथ्वी ने उठते हुए कहा और फिर सबको छोड़ने दरवाजे तक चला आया।
जाते जाते लता दरवाजे पर रुकी और पृथ्वी की तरफ पलटकर कहा,”घर कब आ रहे हो ?’
“बस कल एक जरुरी काम निपटा लू उसे बाद आता हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“अपना ख्याल रखना और उसका भी,,,,,,,,,,,!!”,लता ने पृथ्वी का गाल छूकर कहा। पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिला दी और लता सबके साथ वहा से चली गयी।
पृथ्वी ने दरवाजा बंद किया और अंदर चला आया। उसने देखा दादी ने अवनि को अपने बगल वाले सोफे पर बैठा रखा है और उसका हाथ थामकर उस से बात कर रही है।
पृथ्वी जैसे ही उनकी तरफ आया दादी ने उसकी तरफ देखकर कहा,”ए पृथ्वी ! मेरा चाय का पीने का बड़ा मन है जा जाकर दो कप चाय बना ला”
“मैं बना लेती हूँ”,पृथ्वी के कुछ कहने से पहले अवनि ने उठते हुए कहा
“तुम बैठो , चाय ये बनाएगा,,,,,,,,,,!!!”,दादी ने अवनि को वापस बैठाते हुए कहा
पृथ्वी ने देखा एक ही दिन में दादी को अवनि से कुछ ज्यादा ही प्यार हो गया है तो उसने किचन की तरफ जाते हुए कहा,”हाँ हाँ ! बहू मिल गयी तो पोते को भूल गयी आप,,,,,,,,,!!”
“शक्कर थोड़ी ज्यादा लुंगी मैं और अच्छी चाय बनाना”,दादी ने ऊँचे स्वर में कहा तो पृथ्वी ने किचन से बाहर झाँका और चिढ़कर कहा,”और कुछ मालकिन ?”
“नहीं,,,,,,,,,,!!!”, दादी ने कहा तो पृथ्वी अपनी गर्दन झटककर वापस अंदर चला गया और दादी अवनि को देखकर हंस पड़ी।
सिरोही रेलवे स्टेशन
रात 9 बजे ट्रेन स्टेशन पहुंची। सुरभि ने अपना सामान लिया और स्टेशन से बाहर चली आयी। अगली सुबह उसे पोस्ट ऑफिस जाना था इसलिए उसे इसी समय आना पड़ा। बाहर आकर उसने ऑटो वाले से अपने अपार्टमेंट में चलने का भाड़ा पूछा तो ऑटोवाले ने दुगुना किराया बताया ये सुनकर सुरभि ने कहा,”क्या लूट मचा रखी है,,,,,,,,,,,इस से अच्छा पैदल ना चली जाऊ मैं”
“हाँ तो जाईये ना मैडम”,ऑटोवाले ने सुरभि के सामने हाथ जोड़कर कहा और सुरभि चिढ़कर पैदल ही चल पड़ी।
कुछ दूर चलकर ही उसे समझ आ गया कि उसने गलती की ,वह थोड़ा आगे और चली और नुक्कड़ पर आकर ऑटो का इंतजार करने लगी लेकिन ऑटो नहीं आया। सुरभि बोर होकर अपने ही सूटकेस पर आ बैठी और सड़क पर गुजरती गाड़ियों को देखने लगी।
जहन में एक बार फिर अनिकेत से हुई मुलाक़ात चलने लगी और सुरभि बड़बड़ाई,”हाह ! उस शिवानी के साथ कितना खुश था वो ऐसे लग ही नहीं रहा था कि उसे मुझसे दूर जाने का कोई मलाल भी है। अब तो लगता है जैसे उसे कभी मुझसे प्यार था ही नहीं,,,,,,,,भाड़ में जाए वो और उसकी शिवानी , उसे क्या लगता है मैं उसके बिना मर जाउंगी , अरे जीकर दिखाउंगी मैं उसे और उस से भी स्मार्ट , हेंडसम और अच्छे लड़के से शादी भी करुँगी,,,,,,,,,,,,,वो समझता है वो मुझे छोड़ देगा तो मुझे कोई और नहीं मिलेगा,,,,,,,,,,,,
हाह वहम है बच्चू कोई न कोई तो बना होगा मेरे लिए भी और कभी न कभी तो आएगा ही,,,,,,,,,,,,!!!!”
सुरभि ने इतना ही कहा कि उसके बगल में खड़े सिद्धार्थ ने कहा,”आ गया”
सिद्धार्थ की आवाज सुनकर सुरभि चौंकी और जैसे ही अपने बगल में खड़े सिद्धार्थ को देखा तो घबराकर गिरने ही वाली थी कि सिद्धार्थ ने उसकी कलाई पकड़कर उसे गिरने से रोक लिया।
“तुम तुम तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”,सुरभि ने घबराये हुए स्वर में कहा
सिद्धार्थ ने सुरभि को देखा और कहा,”मेरी छोडो तुम इस वक्त यहाँ क्या कर रही हो वो भी अपने सामान के साथ ,तुम्हारे लैंडलॉर्ड ने तुम्हे घर से निकाल दिया क्या ?”
सुरभि ने सुना तो चिढ गयी और कहा,”हा हा हा हा वैरी फनी,,,,,,,,,,,,,बहुत हंसी आयी मुझे”
सिद्धार्थ ने सुना तो झेंप गया और अपनी गर्दन खुजाते हुए कहा,”आई नो बहुत ही बेकार जोक था”
“हाँ तुम्हारी तरह,,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने फिर चिढ़कर कहा और अपने हाथो को बांधकर सामने देखने लगी
“ये तुम हमेशा मुझसे ऐसे बात क्यों करती हो ? थोड़ा प्यार से भी बोल सकती हो लेकिन नहीं जब देखो तब बस चिढ़ी हुयी रहती हो”,सिद्धार्थ ने भी उखड़े स्वर में कहा
सुरभि और चिढ गयी और कहा,”तो और क्या करू मैं ? एक तो इतनी बेकार जॉब और उसके लिए भी मुझे इस वक्त उदयपुर से ट्रेन लेकर आना पड़ा , उस पर रास्तेभर बात करने के लिए कोई नहीं , स्टेशन से बाहर आयी तो ऑटोवाला ऐसे किराया मांग है जैसे ऑटो चलाकर नहीं उड़ाकर लेकर जाएगा और अब यहाँ पिछले 10 मिनिट से इंतजार कर रही हूँ लेकिन मुझे कोई ऑटो नहीं मिल रहा,,,,,,,,,,,,,,,,,और मुझे भूख भी लगी है”
सिद्धार्थ ने ख़ामोशी से सुरभि की बात सुनी और धीरे से कहा,”तो अभी तुम्हे ऑटो चाहिए या फिर खाना ?”
सुरभि ने सुना तो सिद्धार्थ की तरफ आते हुए गुस्से से कहा,”मैं तुम्हारा मुँह तोड़ दूंगी समझे,,,,,,,,,,,,,,अगर मेरी मदद नहीं कर सकते तो मेरी प्रॉब्लम का मजाक भी मत बनाओ”
“अरे सॉरी मैं मजाक नहीं बना रहा ,एक्चुली मैं भी यही से गुजर रहा था कि गाड़ी खराब हो गयी अब आस पास कोई मेकेनिक भी नहीं है तो वही ढूंढते ढूढ़ते इधर आया तो देखा तुम यहाँ खड़ी हो बस इसलिए मैं चला आया,,,,,,,,,,,,,सॉरी”,सिद्धार्थ ने कहा
सुरभि ने सुना तो उसका गुस्सा थोड़ा शांत हुआ और उसने कहा,”इट्स ओके”
सिद्धार्थ ने सुना तो मुस्कुराया और सुरभि के बगल में आकर खड़ा हो गया। सुरभि को खामोश देखकर सिद्धार्थ ने कहा,”वैसे उस दिन तुमने कहा था कि ये हमारी आखरी मुलाक़ात है और इसके बाद तुम मेरी शक्ल भी नहीं देखोगी,,,,,,,,,,,,लेकिन किस्मत हमे फिर एक दूसरे के सामने ले आयी इसका मतलब जानती हो तुम ?”
सुरभि ने सिद्धार्थ की तरफ देखा और चेहरे पर कठोर भाव लाकर कहा,”इसका मतलब है दो लोगो में से एक समझदार है और एक बेवकूफ इसलिए दोनों बार बार टकराते है”
“ओह्ह्ह कम ऑन सुरभि तुम्हे खुद को बेवकूफ नहीं कहना चाहिए”,सिद्धार्थ ने इतरा कर कहा तो सुरभि ने उसे खा जाने वाली नजरो से देखा और फिर इधर उधर देखकर पत्थर ढूंढने लगी ताकि सिद्धार्थ का सर फोड़ सके। सिद्धार्थ सुरभि के हाव भाव से ही समझ गया इसलिए पहले ही वहा से दूर हट गया और कहा,”ए तुम क्या कर रही हो ? लग जाएगा मुझे”
“आज तो लग ही जाने दो”,सुरभि ने पत्थर उसके पीछे फेंककर कहा। सिद्धार्थ झुक गया और सामने खड़ी गाडी के शीशे पर पत्थर जा लगा। ये देखकर सिद्धार्थ चौंका और सुरभि ने मारे डर के अपना हाथ अपने मुँह पर रख लिया।
गाड़ी का मालिक गाडी के पास ही खड़ा था उसने जैसे ही देखा गुस्से से आग बबूला होकर सुरभि की तरफ आया और कहा,”ए लड़की ! ये क्या किया तुमने , मेरी इतनी महंगी गाड़ी का शीशा तोड़ दिया,,,,,,,,,!!!”
“आ आ आई ऍम सो सॉरी वो मैंने तो,,,,,,,,!!”,सुरभि ने घबराकर कहा
आदमी गुस्से से सुरभि की तरफ बढ़ा तो सुरभि ने डरकर आँखे बंद कर ली लेकिन आदमी और सुरभि के बीच सिद्धार्थ आया और आदमी के सीने पर हाथ रखकर उसे पीछे करके कहा,”ज़रा आराम से,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“आराम से इस लड़की ने मेरी गाडी का शीशा तोड़ दिया और तू मुझे ही ऐटिटूड दिखा रहा है”,आदमी ने गुस्से से कहा तो सुरभि ने अपनी एक आँख खोलकर देखा उसके और आदमी के बीच सिद्धार्थ खड़ा था तो सुरभि ने दोनों आँखे खोली तभी आदमी ने सिद्धार्थ के मुँह पर एक घुसा दे मारा और सिद्धार्थ सुरभि की बाँहो में आ गिरा , उसके नाक से खून निकल आया ये देखकर सुरभि ने कहा,”ज्यादा जोर से मारा क्या ?’
सिद्धार्थ ने अपनी नाक का खून पोछकर कहा,”बहुत जोर से यार,,,,,,,,,,,,इसकी तो मैं”
कहकर सिद्धार्थ ने भी आदमी को दो चार घुसे दे मारे और फिर उसकी कोलर पकड़कर उसे सीधा खड़ा किया और अपनी जेब से पर्स निकालकर कुछ नोट उसे देते हुए कहा,”ये लो अपनी गाड़ी का शीशा लगवा लेना और आज के बाद किसी लड़की पर अपनी मर्दानगी नहीं दिखाना समझे”
आदमी सिद्धार्थ को घूरते हुए वहा से चला गया।
सिद्धार्थ अपनी नाक पोछते हुए सुरभि की तरफ आया तो सुरभि ने कहा,”क्या जरूरत थी हीरो बनने की ?”
सिद्धार्थ ने एक नजर सुरभि को देखा और कहा,”तुम्हारे सामने मैं कितना भी हीरो बन जाऊ , तुम्हारी कहानी में मैं हमेशा विलीन ही रहूंगा,,,,,,,,ऑटो”
सुरभि से कहकर सिद्धार्थ ने बगल से गुजरते ऑटो को रोका। उसने सुरभि का सामान उठाया और ऑटो में रखकर सुरभि से उसमे बैठने का इशारा किया और ऑटोवाले को किराया देकर उसे अपार्टमेंट का एड्रेस बताया और जाने को कहा।
ऑटोवाला आगे बढ़ गया। सुरभि सिद्धार्थ से कुछ कह ही नहीं पायी और सिद्धार्थ वही खड़ा ऑटो को जाते देखता रहा। अगले ही पल सुरभि ने ऑटो से बाहर गर्दन निकाली और चिल्लाकर कहा,”मुझे कहानी में हीरो नहीं विलीन पसंद है”
सिद्धार्थ ने सुना तो मुस्कुरा उठा और वहा से चला गया।
आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
रात के खाने के बाद दादी अवनि और पृथ्वी हॉल में बैठे थे। दादी के पास अवनि को बताने के लिए इतनी बातें थी कि खत्म ही नहीं हो रही थी और बेचारा पृथ्वी उनके सामने पड़े सोफे पर बैठकर अपनी किस्मत को कोस रहा था। कितने इंतजार के बाद तो अवनि ने उसे अपने पति के रूप में स्वीकार किया था , अपनी मोहब्बत जताई थी लेकिन बीते दो दिनों में पृथ्वी अवनि के साथ ठीक से बात तक नहीं कर पाया था और आज दादी यहाँ आ गयी। अवनि से बाते करते करते दादी ने कहा,”अरे अवनि बेटा ! मेरे सर में हल्का हल्का दर्द हो रहा है”
“नॉनस्टॉप बोलोगी तो दर्द ही होगा न”,पृथ्वी बड़बड़ाया
“दादी ! आप बैठिये मैं आपका सर दबा देती दू , आपका दर्द कम हो जाएगा”,अवनि ने कहा तो दादी अवनि के सामने नीचे मुड्ढे पर आ बैठी। अवनि उठी और टेबल ले आयी उसने अपने हाथो में थोड़ा तेल लगाया और दादी के बालों में लगाकर मसाज करने लगी। पृथ्वी अवनि के ठीक सामने सोफे के कुशन को अपनी बाँहो में लेकर बैठा था। उसने देखा अवनि उस पर ध्यान ना देकर दादी की सेवा में लगी है तो मन ही मन खुद से कहा,”हाह ! इस लड़की को दादी का सर दर्द दिख रहा है लेकिन मेरे दिल का दर्द नहीं,,,,,,,,,,!!!”
अवनि को अहसास हुआ जैसे पृथ्वी ने उसे कुछ कहा है तो उसने सामने देखा और पाया पृथ्वी उसे ही देख रहा है और अगले ही पल पृथ्वी ने अपनी गर्दन उचकाई और कमरे की तरफ इशारा किया। दादी आँखे बंद किये बैठी थी उन्होंने ये सब नहीं देखा लेकिन अवनि ने में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने अपने हाथ जोड़े और फिर इशारा किया तो अवनि ने फिर मना कर दिया। पृथ्वी ने देखा तो बाँहो में पकडे कुशन को साइड में पटका और अपने हाथो को बांध मुँह बनाकर साइड में देखने लगा।
ये देखकर अवनि मुस्कुराई और फिर अपना ध्यान दादी पर लगा लिया। अवनि पृथ्वी की भावनाये समझ रही थी लेकिन ऐसे कैसे वह पृथ्वी के बुलाने से चली जाती।
“अच्छा अवनि बस इतना काफी है ! रात बहुत हो गयी है तुम जाकर सो जाओ”,दादी ने अवनि से कहा
पृथ्वी ने सुना तो उसे राहत मिली की चलो आख़िरकार उसे अवनि के साथ वक्त बिताने का मौका मिलेगा वह खुश होकर जैसे ही कमरे की तरफ जाने लगा अवनि ने दादी से कहा,”दादी आप भी चलिए ना , आज आप मेरे कमरे में सो जाईये”
“फिर ये कहा सोयेगा ?”,दादी ने कहा
“ये यहाँ सो जायेंगे , इन्हे आदत है”,अवनि ने सोफे की तरफ इशारा करके कहा और एक बार फिर अवनि ने बेचारे पृथ्वी के अरमानो पर पानी फेर दिया।
“तुम सो जाओगे ना यहाँ ?”,दादी ने पृथ्वी से पूछा
“हाँ दादी ! मैं सो जाऊंगा , वैसे भी मुझे आदत है”,कहते हुए पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा तो अवनि अनजान बनकर दूसरी तरफ देखने लगी।
दादी ने अवनि का हाथ पकड़ा और पृथ्वी के अरमानो को रौंदते हुए वहा से चली गयी और पृथ्वी मायूस सा चेहरा लिए सोफे पर आ बैठा। उसने कुशन रखा और अपना मुँह उसमे छुपा लिया और फिर बच्चो की तरह अपने हाथ-पैरो को सोफे पर पटका और सो गया।
कमरे का दरवाजा बंद करते हुए अवनि ने जब ये नजारा देखा तो मुस्कुराये बिना ना रह सकी
( क्या पृथ्वी जाने देगा फिर से अवनि को खुद से दूर ? अवनि की जिंदगी में विलीन बनने के बाद क्या सुरभि की जिंदगी में हीरो बना पायेगा सिद्धार्थ ? अवनि और पृथ्वी के बीच की ये दूरिया कब होगी कम ? जानने के लिए सुनते रहिये “पसंदीदा औरत” सीजन 2 मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
