Site icon Sanjana Kirodiwal

Pasandida Aurat Season 2 – 90

Pasandida Aurat Season 2 – 90

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

जयदीप के मुँह से प्राची का नाम सुनकर पृथ्वी की आँखों के सामने वो पल आ गया जब वह उसके ऑफिस में प्राची से टकराया था और प्राची के हाथ में पकड़ा सामान नीचे आ गिरा था। तब एक मायूसी पृथ्वी ने प्राची की आँखों में देखी थी। पृथ्वी को खोया देखकर जयदीप पीछे हटा और कहने लगा,”समझ नहीं आ रहा ये सब हो क्या रहा है ? मुझे आज ही मिस्टर देसाई से मिलकर ये सब के बारे में बात करनी होगी”
“उस से कोई फर्क नहीं पड़ेगा सर”,पृथ्वी ने अपनी चुप्पी तोड़ी

“मतलब ? तुम कहना क्या चाहते हो पृथ्वी ?”,जयदीप ने हैरानी से पूछा
पृथ्वी जयदीप के पास आया और कहने लगा,”सर देसाई ग्रुप ने जो डील केंसल की है उसमे ना तो मिस प्राची का हाथ है ना ही मिस्टर देसाई का”
जयदीप ने सुना तो उसे हैरानी हुई , पृथ्वी को प्राची की तरफदारी करते देखकर जयदीप ने कहा,”मिस्टर देसाई का समझ आता है पृथ्वी लेकिन तुम , तुम प्राची को डिफेंड कर रहे हो ! are you serious ?”

पृथ्वी ने सुना तो जयदीप की तरफ देखा और कहा,”सर !  प्राची ने मिस्टर देसाई के ऑफिस से रिजाइन दे दिया है और अब मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी के प्रेजिडेंट मिस्टर भरत है और उन्होंने ही हमारी कम्पनी के साथ हुयी सभी डील को केंसल किया है”
जयदीप ने सुना तो उसे एक धक्का सा लगा और उसने कहा,”व्हाट ? क्या तुम सच कह रहे हो पृथ्वी ? मिस्टर देसाई ऐसा कैसे कर सकते है , अपनी ही बेटी को हटाकर वे अपने मैनेजर को अपनी कम्पनी का प्रेजिडेंट कैसे बना सकते है ? मिस्टर देसाई का दिमाग खराब हो गया है। वे जानते भी है  उन्होंने कितनी बड़ी गलती की है”

जयदीप का चौंकना जायज था लेकिन पृथ्वी शांत रहा और कहा,”सर ! मिस्टर देसाई ने ऐसा क्यों किया ये जानने से ज्यादा जरुरी है जिन डील को देसाई ग्रुप ने कन्फर्म की या था उन्हें बचाना”
“ओह्ह्हो पृथ्वी लेकिन अब ये कैसे होगा ? तुम तुम जानते हो न वो भरत कितना कमीना और धोखेबाज आदमी है। तुम देखना वो एक दिन मिस्टर देसाई को भी ऐसे धोखा देगा”,जयदीप ने गुस्से से कहा

“रिलेक्स ! वो कुछ नहीं कर सकता अभी फ़िलहाल उसके हाथ में सिर्फ किसी भी कम्पनी से डील करना और उन्हें केंसल करना है। उसकी सच्चाई मिस्टर देसाई के सामने कैसे लानी है ये मैं बहुत अच्छे से जानता हूँ”,पृथ्वी ने कुछ सोचते हुए कहा
जयदीप ने सुना तो चिंता के भाव उसे चेहरे पर झिलमिलाने और उसने पृथ्वी के पास आकर कहा,”ध्यान से पृथ्वी कही इन चक्करो में तुम अपने दुश्मनो की गिनती बढ़ा ना लो”

पृथ्वी ने जयदीप की तरफ देखा और धीरे से मुस्कुरा कर कहा,”सर ! मेरा नाम पृथ्वी उपाध्याय है और मैं इस पूरी दुनिया में सिर्फ एक ही चीज से डरता हूँ”
“किस से ?”,जयदीप ने जिज्ञासा से भरकर पूछा
पृथ्वी ने जयदीप की आँखों में देखा और कहा,”गलत साबित होने से”

जयदीप ने सुना तो खामोश हो गया।  पृथ्वी पीछे हटा और कहा,”देसाई ग्रुप ने सिर्फ 6 डील केंसल की है लेकिन आप शायद भूल रहे है कि इस शहर में अभी 150 कम्पनीया और है जिन्हे हमारे प्रोजेक्ट्स की जरूरत है,,,,,,,,,,,,,,देसाई नहीं तो कोई और सही,,,,,,,,,,!!!”

जयदीप ने सुना तो उसे थोड़ी राहत मिली और उसने मुस्कुरा कर कहा,”मुझे तुम पर भरोसा है,,,,,,तुम कर लोगे”
“मैं चलता हूँ मुझे कुछ जरुरी रिपोर्ट्स तैयार करनी है शाम तक आपको अपडेट देता हूँ”,कहकर पृथ्वी वहा से चला गया और जयदीप भी अपनी कुर्सी पर आ बैठा और काम करने लगा।

उसी शाम , उदयपुर रेलवे स्टेशन 
“ध्यान से जाना  बेटा और हमने जो कहा उस बारे में थोड़ा सोचना। शशांक अच्छा लड़का है और अपने ही शहर से है। तुम्हारी हाँ होगी तो ही आगे बात करेंगे”,सुरभि के पापा ने सुरभि के साथ स्टेशन के अंदर आते हुए कहा
सुरभि ख़ामोशी से सब सुन रही थी क्योकि उसके दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। वह बेचारी यहाँ आयी थी होली मनाने लेकिन जब घरवालों ने देखा कि अनिकेत किसी और से शादी कर रहा है तो उन्होंने सुरभि के लिए आया रिश्ता पसंद कर लिया और सुरभि को बताया।

अनिकेत से मिले धोखे के बाद सुरभि को अब प्यार और शादी में कोई दिलचस्पी नहीं रह गयी थी इसलिए उसने ट्रेन के पास पहुंचकर अपने पापा से कहा,”पापा ! आप शशांक के घरवालों को मना कर दीजिये कह दीजिये मुझे लड़का पसंद नहीं आया और प्लीज पापा अभी मुझे कोई शादी नहीं करनी है”

“लेकिन बेटा ऐसे कब तक अकेले रहोगी ? अनिकेत से शादी के लिए तुमने खुद मना कर दिया इसलिए अब वो कही ओर शादी कर रहा है और वो तुम्हारी दोस्त अवनि देखो उसने भी तो शादी की है न ,एक ना एक दिन तो शादी करनी ही होगी न बेटा,,,,,,,,,,शशांक नहीं तो अपनी पसंद हमे बता दो”,सुरभि के पापा ने प्यार से कहा

“मेरी पसंद आप लोगो ने देख ली तो थूकने का मन करेगा”,सुरभि ने अपना सर खुजाते हुए मन ही मन कहा और फिर अपने पापा से बोली,”पापा अवनि ने जिस से शादी की है वो लाखो में एक है अह्ह्ह्हह नहीं लाखो में नहीं करोडो में है वैसा लड़का मिले तो मैं कल ही हाँ कह दू,,,,,,,,,,,,,लेकिन वैसा मुझे मिलेगा नहीं जो मुझे झेल सके इसलिए मेरे प्यारे पापा मुझे कुछ दिन शांति से जीने दीजिये”

कहते हुए सुरभि ने अपने पापा को गले लगाया और फिर अपना सामान लेकर ट्रेन में चढ़ गयी। ट्रेन ने हॉर्न दिया और आगे बढ़ गयी। सुरभि के पापा हाथ हिलाते हुए स्टेशन पर खड़े रहे और कुछ देर में ही सुरभि उनकी आँखों से ओझल हो गयी।
ट्रेन चलने के बाद सुरभि अपनी सीट पर आ बैठी जो कि साइड लोअर थी। उसने अपना सूटकेस नीचे रखा और अपना पर्स अपने पास रख लिया।

बैग से इयरफोन निकालकर कानो में लगाए और फोन में गाना चलाकर छोड़ दिया। वह गाना सुनते हुए खिड़की से बाहर देखने लगी और कुछ देर बाद सर पीछे लगाकर अपनी आंखे मूँद ली। गाने के साथ ही उसकी बंद आँखों में ना जाने क्यों सिद्धार्थ के साथ बिताये पल आने लगे। सिद्धार्थ से पहली बार टकराने से लेकर उसे परेशान करने और उसकी परवाह करने वाले पल , उसे चिढ़ाने वाले और उसे गुस्सा दिलाने वाले पल सब एक एक करके सुरभि की आँखों में चलने लगे।

उसने जल्दी से अपनी आँखे खोली और देखा ट्रेन लोगो से भरी हुई थी और सब अपने में मग्न , सुरभि ने गाना बंद करके ईयर फोन निकाला और बड़बड़ायी,”ये रोमांटिक गाने सुनकर मुझे उस चिलगोजे की याद क्यों आ रही है ? और तो और उसके साथ बिताये मोमेंट मेरे दिमाग में इतना स्लो मोशन में क्यों चल रहे ? अह्ह्ह लगता है मुझे अवनि से बात करनी पड़ेगी,,,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह नहीं नहीं नहीं नहीं अवनि से बात की तो वो पता नहीं क्या ही सोचने लगेगी ,अवनि से नहीं मुझे मुझे पृथ्वी से बात करनी चाहिए,,,,,,,,,,,,,

अह्ह्ह्ह उस से भी तो नहीं कर सकती उसे अगर मैंने ये सब बताया तो वो तो मेरा खून ही कर देगा,,,,,,,,,,,,,,,,अब मैं क्या करू ? हाह क्या करू क्या ? मैं कौनसा उस से प्यार करती हूँ या उसके बिना मरी जा रही हूँ हो सकता है ये सब मेरे स्टुपिड ख्याल हो,,,,,,,,,,,मुझे सिरोही जाना चाहिए और अपनी नौकरी को बचाना चाहिए,,,,,,,,,,,,लेकिन उस से पहले एक काम करती हूँ सो जाती हूँ ताकि इन सब से बच सकू , हाँ ये अच्छा आइडिआ है”
सुरभि ने खुद ही खुद से बात की , सवाल जवाब किये और फिर आँखे बंद करके सो गयी ताकि सिरोही पहुंचने तक उसके जहन में ये सब बाते ना आये। 

रवि जी का घर , पनवेल
“तो आखिरकार तुम सबको अकल आ ही गयी , चलो देर आये दुरुस्त आये मैंने तो पृथ्वी से पहले भी कहा था कि वो जो भी फैसला करे मैं उसके साथ हूँ,,,,,,,,,अरे वो मेरा पोता है वो अपने लिए कुछ गलत चुन ही नहीं सकता”,पृथ्वी की दादी चंद्रकांता जी ने कहा
“हाँ आई ! मैं समझ गया हूँ कि अपने बच्चो की ख़ुशी में ही हम सबकी ख़ुशी है बाकि समाज का क्या वो तो ना कल खुश था ना आज खुश है”,रवि जी ने कहा

“अरे वाह रवि ! बड़ी जल्दी समझ आ गयी तुझे ,, मुझे तो लगा पोते नाती देखने के बाद आएगी”,दादी ने रवि जी को ताना मारकर कहा तो पास ही खड़े पंकज और बड़े पापा दबी सी हंसी हसने लगे
रवि जी ने उन्हें घूरकर देखा तो दोनों इधर उधर देखने लगे। दादी ने लता जी की तरफ देखकर कहा,”क्यों लता मंजूर है तुम्हे वो लड़की”
“लड़की नहीं आई अवनि ,अवनि नाम है उसका”,रवि ने बीच में कहा

“तू कब से अपने बेटे की तरह बात करने लगा ?”,दादी ने फिर रवि को झिड़का तो रवि जी झेंप गए और कहा,”नहीं मैं तो बस आपको,,,,,,,,,,,जाने दीजिये”
“नहीं आई मुझे कोई परेशानी नहीं है , आप सबने उसे अपना लिया है तो मैं भी उसे अपनाने के लिए तैयार हूँ”,लता जी ने कहा

“बस फिर ठीक है कोई अच्छा सा मुहूर्त देखकर दोनों का लग्न करवाकर घर ले आते है ,, अरे बड़के तू कह रहा था पंडित को बुलाया है तूने , अभी तक आया क्यों नहीं ?”,दादी ने कहा

“आ गया जी आ गया , चंद्रकांता जी आप बुलाये और हम ना आये ऐसा भला हो सकता है क्या ?”,पंडित जी ने हिमांशु के साथ अंदर आते हुए कहा
“आईये आईये पंडित जी आप ही का इंतजार कर रहे थे ,खबर तो आपको मिल ही गयी होगी”,दादी ने पंडित जी से सामने पड़े सोफे पर बैठने का इशारा करके कहा और बाकि सब भी आ बैठे। लता और चाची चाय नाश्ते का इंतजाम करने किचन में चली गयी।

दादी ने पंडित जी को पृथ्वी और अवनि की शादी के लिए कोई शुभ मुहूर्त देखने को कहा। पंडित जी ने अपने पोथी पन्ने निकाले कुछ देर उनमे देखा और कहा,”5 दिन बाद एक बहुत ही शुभ मुहूर्त है चंद्रकांता जी उसके एक हफ्ते बाद से खरमास शुरू हो जाएगा तो एक महीने तक कोई मुहूर्त नहीं नहीं ना ही उस महीने में कोई शुभ काम करना चाहिए,,,,,,,,,,,,अगर आपको ऐतराज ना हो तो आप 5 दिन बाद वाले मुहूर्त में शादी सम्पन्न कर लीजिए”

दादी ने 5 दिन का सुना तो उनके चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये। वे सोचने लगी इतनी जल्दी शादी की तैयारियां और बाकि सब काम कैसे होंगे ?  उन्होंने बड़े पापा और रवि जी की तरफ देखा तो बड़े पापा ने कहा,”अरे आई ! आप क्यो चिंता करती है सब हो जाएगा , ये 5 दिन बाद वाला मुहूर्त सही है मुश्किल से सब राजी हुए है किसी का मन बदले इस से पहले बहू को घर ले आते है”

बड़े पापा की बात सुनकर सभी हंस पड़े तो पंडित जी ने दादी से पूछा,”तो फिर ये 5 दिन बाद का मुहूर्त कर दे ?”
“हाँ अब सब यही चाहते है तो फिर कर दीजिये”,दादी ने जैसे ही कहा सबके चेहरे ख़ुशी से खिल उठे।  

आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
शाम में पृथ्वी घर आया। ऑफिस में काम इतना ज्यादा था कि पृथ्वी को घर आने में थोड़ी देर हो गयी और ट्रेन में धक्के खाते खाते वह काफी थक भी गया था। पृथ्वी ने आकर बेल बजायी और कुछ देर बाद अवनि ने दरवाजा खोला। आज अवनि ने लाल रंग का चूड़ीदार सूट पहना था और बालो की आगे की दो लटें पीछे ले जाकर बाकी बालो को खुला छोड़ रखा था।

ललाट  पर बिंदी और मांग में सिन्दूर के अलावा चेहरे पर कोई मेकअप नहीं था। पृथ्वी उसे देखकर ही अपनी आधी थकान भूल गया और प्यार से उसे देखता रहा। वह हल्का सा मुस्कुराई पृथ्वी के हाथ से बैग और टिफिन लेकर कहा,”आज आपने आने में देर कर दी”

अवनि की आवाज से पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने अंदर आते हुए कहा,”हाँ ऑफिस में काम थोड़ा ज्यादा था और फिर ट्रेन भी लेट थी उस पर भीड़ इतनी थी कि पुरे रास्ते खड़े होकर आना पड़ा,,,,,,,,,!”
अवनि ने सुना तो उसे वो दिन याद आ गया जब उसने पृथ्वी को ट्रेन से सफर करते देखा था। पृथ्वी शर्ट के ऊपरी दो बटन खोलकर बाजु फोल्ड करते हुए सोफे पर आ बैठा। अवनि ने उसका बैग कमरे में रखा और खाली टिफिन लेकर किचन में चली आयी।

उसने पृथ्वी के लिए ठंडा पानी लिया और लेकर बाहर आयी तो देखा पृथ्वी आँखे मूँदे सर पीछे सोफे से लगाए बैठा है। थकान उसके चेहरे से साफ़ झलक रही थी। अवनि को पृथ्वी का उतरा हुआ चेहरा देखकर दया आने लगी
“पृथ्वी ! पानी”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने आँखे खोली और अवनि के हाथ से पानी का गिलास लेकर कहा,”तुमने आज ये ड्रेस क्यों पहना है ,हम कही बाहर जा रहे है क्या ?”

अवनि ने सुना तो मन ही मन खीजकर कहा,”बुद्धू कही के ! मैं आपके लिए तैयार हुई हूँ , अच्छे कपडे क्या सिर्फ बाहर जाने के लिए पहने जाते है ? पत्नी अपने पति के लिए भी तो तैयार हो सकती है”
अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी ने कहा,”क्या हुआ तुमने जवाब नहीं दिया”
“क्या फायदा आपने तो मुझे ठीक से देखा भी नहीं”,कहकर अवनि ने पृथ्वी के हाथ से गिलास लिया और जाने के लिए मुड़ गयी।

पृथ्वी ने देखा आज पहली बार अवनि ने उसके सामने पत्नी की तरह बर्ताव किया तो वह मुस्कुराया और सोफे से उठते हुए कहा,”तुमने लाल रंग का चूड़ीदार सूट पहना है , सूट के गले पर गोल्डन जरी का कुछ तो बारीक काम किया गया है , दुपट्टे का रंग लाल है लेकिन उसमे पीले और सफ़ेद रंग के फूल है और चारो कोनो पर छोटे छोटे गोल गोल डिजाइन लटकी है। तुम्हारे दोनों हाथो में लाल रंग की चुडिया है जिनके आगे पीछे तुमने गोल्डन रंग की चुडिया लगायी है लेकिन तुम्हारे दाँये हाथ में दो चूड़ी ज्यादा है ,

ललाट पर लाल रंग की बिंदी है लेकिन रोजाना से थोड़ी बड़ी है , आँखों में तुमने आज काजल नहीं लगाया है ,मांग में सूखे की जगह लिक्विड सिंदूर लगाया है ,बालों में तुमने आज पिंक क्लेचर डाला है , तुमने आज अपने बाल धोये है , कानों में तुमने गोल्डन कलर के झुमके पहने है जिन पर रेड डायमंड है,,,,,,,,,,,,,,,,!!
अवनि ने सुना तो पलटकर हैरानी से पृथ्वी को देखा और पृथ्वी ने अवनि के सामने आकर प्यार से कहा,”और कुछ मैडम जी,,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने ना में अपनी गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने आगे बढ़कर अवनि के चेहरे को अपने हाथो में थामा और उसके ललाट को अपने होंठो से छूकर कहा,”बहुत सुन्दर लग रही हो,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो शरमा कर जाने लगी लेकिन पृथ्वी ने उसकी कलाई पकड़कर उसे रोक लिया और कहा,”अवनि ! तुम कही भी रहो मेरी नजरे हमेशा तुम पर ही रहेगी,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने सुना तो उसके दिल में गुदगुदी सी होने लगी। पृथ्वी ने धीरे से उसका हाथ छोड़ दिया और कहा,”मैं चेंज करके आता हूँ”
पृथ्वी वहा से चला गया अवनि ने उसे जाते हुए देखा और शरमा कर अपना चेहरा अपने हाथो में छुपा लिया।

अवनि किचन में चली आयी और पृथ्वी के लिए चाय बनाने लगी। पृथ्वी ने भी कपडे बदले हाथ मुँह धोया और बाहर चला आया। उसने देखा अवनि किचन में है तो वह सोफे पर आ बैठा। अवनि पृथ्वी के लिए चाय लेकर आयी। उसने पृथ्वी को चाय दी तभी डोरबेल बजी। अवनि ने पृथ्वी से चाय पीने को कहा और खुद दरवाजा खोलने चली आयी।

अवनि ने दरवाजा खोला सामने पृथ्वी की दादी खड़ी थी जीने अवनि नहीं जानती थी और फिर बाकि घरवाले भी दादी के पीछे आ खड़े हुए तो अवनि को समझ आया कि सामने खड़ी महिला पृथ्वी की दादी है लेकिन पृथ्वी के घरवालों को एक साथ देखकर अवनि का दिल धड़कने लगा। उसने जल्दी से दुपट्टा अपने सर पर ले लिया। पृथ्वी ने देखा अवनि दरवाजे पर ही खड़ी है तो उसने चाय का कप रखा और दरवाजे की तरफ आते हुए कहा,”कौन है अवनि ?”
अवनि ने कोई जवाब नहीं दिया लेकिन जब पृथ्वी ने दरवाजे पर दादी के साथ अपने घरवालों को देखा तो हैरान रह गया और दादी से कहा,”दादी आप यहाँ ?”

( मिस्टर देसाई की कम्पनी बचाने के लिए क्या पृथ्वी ला पायेगा सबके सामने भरत का असली चेहरा ? आखिर सुरभि को क्यों आने लगे है सिद्धार्थ के ख्याल , क्या ये जानने के लिए सुरभि लेगी अवनि या पृथ्वी में से किसी की मदद ? आपको और मुझे तो पता है कि दादी और पृथ्वी के घरवाले क्यों आये है लेकिन ये जानने के बाद क्या होगा पृथ्वी का रिएक्शन ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90

Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90Pasandida Aurat Season 2 – 90

Continue With Pasandida Aurat Season 2 – 91

Read Pasandida Aurat

Follow Me On https://www.instagram.com/sanjanakirodiwal/

संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
Exit mobile version