Pasandida Aurat Season 2 – 85
पृथ्वी को अपने सीने से लगाए अवनि हॉल में सोफे पर बैठी रही। हर बार जब पृथ्वी उसके करीब आता था तब अवनि के मन में एक झिझक होती थी लेकिन आज उसे अपने सीने से लगाकर उसे एक सुकून महसूस हो रहा था। लग रहा था जैसे वह और पृथ्वी एक ही है दोनों में कोई अंतर नहीं है। पृथ्वी अवनि से दूर हटा और मासूमियत से कहा,”मुझे बहुत भूख लगी है”
अवनि ने सुना तो उसे याद आया कि पृथ्वी ने सुबह के बाद से कुछ खाया ही नहीं है। उसने पृथ्वी का चेहरा अपने हाथो में लिया और प्यार से कहा,”तुम जाकर नहा लो तब तक मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने को बना देती हूँ”
पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिलायी तो अवनि मुस्कुराई और उठकर किचन की तरफ चली गयी। पृथ्वी उठा और कमरे में चला आया लेकिन बिस्तर देखते ही उसे नींद आने लगी और वह बिस्तर पर आ गिरा। अवनि ने पृथ्वी के लिए नूडल्स बनाये और साथ में अपने लिए चाय भी , वह दोनों लेकर कमरे में आयी तो देखा पृथ्वी बिना नहाये सो रहा है। उसके कपड़ो पर लगा रंग बिस्तर की बेडशीट पर भी लग चुका था लेकिन अवनि ने उस पर गुस्सा नहीं किया। उसने ट्रे टेबल पर रखी और पृथ्वी के पास आकर उसे जगाते हुए कहा,”पृथ्वी ! पृथ्वी ! पृथ्वी उठो , देखो मैंने आपके लिए नूडल्स बनाया है , चलिए उठिये”
पृथ्वी कुनमुनाया और मुँह फेर लिया। अवनि ने फिर उसे जगाने की कोशिश की तो पृथ्वी ने उसका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया। अवनि पृथ्वी के बगल में आ गिरी और जैसे ही उठने को हुई पृथ्वी ने उसकी कमर पर हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खिसकाकर उन्मांद भरे स्वर में कहा,”तुमने कहा था तुम मुझे छोड़कर कभी नहीं जाओगी , तो फिर मत जाओ ना”
“पृथ्वी क्या कर रहे हो ? उठो”,अवनि ने उसी बाँह से निकलने की कोशिश की लेकिन पृथ्वी इतना हट्टा कट्टा लड़का था अवनि तो उसके सामने बच्ची नजर आ रही थी। पृथ्वी ने अवनि को फिर अपनी तरफ खींचा और कहा,”मुझे बहुत नींद आ रही है तुम भी सो जाओ”
कहकर पृथ्वी सो गया और बेचारी अवनि उसकी बाँह में फसकर रह गयी और जब उसे अहसास हुआ कि पृथ्वी उसका पति है तो वह खुद पर ही हंस पड़ी और फिर अपनी आँखे मूँद ली। पृथ्वी नशे में था इसलिए अवनि के करीब सो रहा था लेकिन अवनि पुरे होशो हवास में थी इसलिए पृथ्वी के करीब थी।
रवि जी का घर ,पनवेल
होली खेलने के बाद बड़े पापा ,बड़ी मम्मी ,चाचा ,चाची ,लता और रवि जी सब रवि जी के घर में मौजूद थे। रवि ने लता जी से सबके लिए चाय बनाने को कहा तो चाची भी उनकी मदद करने किचन में चली आयी। सभी बैठकर अवनि और पृथ्वी को घर कैसे लाना है के बारे में बात करने लगे तभी घर के दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई। सबने दरवाजे की तरफ देखा बड़े पापा और चाचा के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये ,बड़ी मम्मी भी चिंतित नजर आने लगी और रवि जी के चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये।
दरवाजे पर खड़ी नीलम अंदर आयी तो रवि जी ने गुस्से से कहा,”अब क्यों आयी हो यहाँ ? अवनि के साथ इतना सब गलत करके तुम्हारा मन नही भरा या अभी और भी कुछ बाकी है ?”
“शांत हो जाओ रवि”,बड़े पापा ने रवि जी के कंधे पर हाथ रखकर कहा और फिर नीलम की तरफ देखकर बोले,”तुम यहाँ क्या कर रही हो नीलम ?”
नीलम भुआ ने एक नजर सबको देखा और सर झुकाकर उदासी भरे स्वर में कहा,”मैं यहाँ आप सब से माफ़ी माँगने आयी हूँ”
नीलम के मुँह से माफ़ी की बात सुनकर सब हैरानी से उसे देखने लगे। रवि जी ने सुना तो गुस्से से कहा,”तुमने जो किया तुम्हे लगता है वो माफ़ी मांगने लायक है ? तुमने हम सब का अपमान किया है नीलम , हम सब तुम्हे माफ़ कर भी देंगे पर क्या पृथ्वी तुम्हे माफ़ कर पायेगा ? तुमने अवनि के साथ ठीक नहीं किया नीलम , हम में से किसी को भी तुमसे ये उम्मीद बिल्कुल नहीं थी,,,,,,,,,,,,!!””
नीलम भुआ ने सुना तो उनकी आँखों में आँसू भर आये और उन्होंने कहा,”मुझे माफ़ कर दीजिये दादा मुझसे गलती हो गयी ! अपनी नफरत और जलन के चलते मैंने अवनि के साथ इतना बुरा बर्ताव किया लेकिन उसकी सजा मुझे मिल चुकी है , आज मेरा अपना ही परिवार मुझसे नाराज है यही मेरी सजा है दादा यही मेरी सजा है,,,,,,,,,,,,मैं जो कुछ भी किया वो बहुत गलत था , मुझे कोई हक़ नहीं है इस घर के फैसलों में दखल देने की फिर भी मैंने दिया और सब बर्बाद कर दिया। मैं अपने किये के लिए बहुत शर्मिन्दा हूँ दादा , मुझे माफ़ कर दीजिये”
नीलम भुआ की आँखों में पश्चाताप के आँसू देखकर रवि जी का मन पिघल गया साथ ही सभी घरवालों को भी लगा कि नीलम अपने किये पर शर्मिन्दा है इसलिए बड़े पापा ने रवि जी से कहा,”हो सके तो नीलम को माफ़ कर दो रवि ,गलती इंसान से ही होती है और फिर नीलम को अपनी गलती आ अहसास भी हो चुका है”
रवि जी ने नीलम को देखा और कहा,”हम सब तो तुम्हे माफ़ कर देंगे नीलम क्योकि तुम हमारी अपनी हो लेकिन असल में तुम्हे उन दोनों से मांगनी चाहिए जिनका तुमने दिल दुखाया है”
लता सबके लिए चाय ले आयी उन्होंने नीलम भुआ को चाय का कप दिया और सबकी तरफ पलटकर बोली,”गलती तो हम सब से ही हुई है और उस गलती का पश्चाताप भी हम सबको ही करना होगा,,,,,,,!!”
“लता सही कह रही है रवि ! हम सबने ही पृथ्वी की भावनाओ को नहीं समझा और उसे तकलीफ दी उसे लिए हम सभी उसे गुनहगार है। हमे उसे और अवनि को माफ़ करके अपना लेना चाहिए”,बड़ी मम्मी ने कहा
“ठीक है एक बार आई यहाँ आ जाये उसके बाद सब बैठकर इस बारे में बात करेंगे तब तक पृथ्वी का गुस्सा भी शांत हो जाएगा”,रवि ने कहा
नीलम ने रवि जी के साथ साथ बाकि सब से भी माफ़ी मांगी और सबने एक एक करके उन्हें माफ़ कर दिया साथ ही बड़े पापा ने नीलम भुआ को हिदायत भी दी कि आइंदा से वह किसी के साथ ऐसा बर्ताव ना करे।
होली के इस शुभ अवसर पर सबके मन के मैल धुल चुके थे और इस बार होली सच में कुछ ख़ास रही।
आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
शाम में सोया पृथ्वी देर रात उठा और उसके साथ साथ अवनि को भी नींद आ गयी। वह पृथ्वी की बाँहो में इतना सुकून से सोइ थी जैसे कोई छोटा बच्चा बेफिक्र होकर सोता है। अवनि से पहले पृथ्वी की आँख खुली और जब उसने अवनि को अपने करीब पाया तो हैरान हुआ क्योकि पृथ्वी को याद ही नहीं था दोपहर बाद क्या हुआ था और वह इस कमरे में अवनि के साथ कब आया ? पृथ्वी ने धीरे से अपना हाथ अवनि से हटाया और उस से दूर हटकर बिस्तर से नीचे आया। पृथ्वी ने दिवार पर लगी घडी में समय देखा जो कि रात के 11 बजा रही थी।
पृथ्वी बाथरूम में गया फ्रेश हुआ और मुँह धोकर वापस आया। उसने देखा अवनि भी सो रही थी तो उसने मुँह पोछने के लिए तौलिया उठाया और कमरे की लाइट बंद कर बाहर चला आया ! पृथ्वी मुँह पोछते हुए बाहर हॉल में आया और खुद में ही बड़बड़ाने लगा,”ये अवनि मेरे इतना करीब क्यों सो रही थी और मैं घर कब आया ? कही मैंने नशे में अवनि के साथ कुछ,,,,,,,,,,,,,छह छह क्या कुछ भी बोल रहा है तू ऐसा नहीं करेगा ?
लेकिन वो तेरी पसंदीदा औरत है यार और भूल मत तू एक मर्द है और मर्द आखिर अपनी पसंदीदा औरत के सामने खुद को कितना ही रोक पायेगा,,,,,,,,,,,,,,,जरूर तूने कुछ गड़बड़ की है ? कही अवनि मुझे गलत ना समझ ले , हाह ! मैं ही गधा हूँ मैं बाहर गया ही क्यों ? उस नकुल की बात मुझे माननी ही नहीं चाहिए थी , ना मैं बाहर जाता ना मैं भांग पीता और ना इस तरह अवनि के बगल में सो रहा होता,,,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने टेबल पर रखा पानी का बोतल उठाया और पीने लगा। पानी पीने के बाद पृथ्वी वही सोफे पर आ बैठा और सहसा ही उसकी आँखों के सामने वो घटना आ गयी जो आज सुबह हिमांशु भैया के घर में घटी थी।
जो गुस्सा अवनि को लेकर पृथ्वी ने घरवालों पर निकाला था वो सब उसकी आँखों के सामने चलने लगा और सहसा ही पृथ्वी को याद आये अपने कहे शब्द “अवनि अनाथ नहीं है , मैं आप सबको इसका परिवार बनकर दिखाऊंगा”
पृथ्वी ने कह तो दिया पर अब वह खुद ही अपने कहे शब्दों को लेकर सोच में पड़ गया और बड़बड़ाने लगा,”मैंने सबके सामने कह तो दिया कि मैं अवनि को कभी परिवार की कमी महसूस नहीं होने दूंगा लेकिन अवनि भी तो अपना परिवार डिजर्व करती है न।
कभी कभी उसके लिए उसकी पसंद का खाना बनाने वाली एक माँ हो , उसे समझने वाले सुनने वाले उसके बनाये खाने की तारीफ करे वाले एक पिता हो , उसके साथ हंसी मजाक करने वाला एक छोटा भाई हो , उसके सुख दुःख में उसके साथ खड़े होने वाले उसके रिश्तेदार हो,,,,,,,,,,,,,,अवनि अनाथ नहीं है वो सच में अनाथ नहीं है बस उसके एक फैसले ने उसे सबसे दूर कर दिया और अब ये मेरी जिम्मेदारी है कि मैं उसे उसका परिवार लौटाऊ , मैं उदयपुर जाऊंगा ,अवनि के लिए जाऊंगा और सबसे रिक्वेस्ट करूंगा कि वो अवनि को माफ़ कर दे और उसे फिर से अपना ले।
मैं पति और पिता बनकर भले ही उसे संसार की सारी खुशिया दे दू लेकिन परिवार का सुख तो उसे अपनों के साथ ही मिलेगा,,,,,,,,,,!!!”
“आप इतनी रात में यहाँ क्या कर रहे है ?”,अवनि ने हॉल में आते हुए कहा
अवनि की आवाज से पृथ्वी की तन्द्रा टूटी तो उसने कहा,”अवनि ! घर आने के बाद मैंने कुछ गलत बोला क्या ?”
अवनि पृथ्वी की तरफ आयी और कहा,”नहीं ! बस आप होश में नहीं थे इसलिए आकर सो गए”
अवनि पृथ्वी को सब बताकर परेशान करना नहीं चाहती थी।
पृथ्वी फिर सोच में पड़ गया आखिर अवनि उसके साथ इतनी नॉर्मल कैसे है वरना अब तक तो वह उसे कितना सुना चुकी होती। पृथ्वी को सोच में डूबा देखकर अवनि ने कहा,”क्या हुआ , आप ठीक है ?”
“अह्ह्ह्ह ! हाँ मैं बस खाने के बारे में सोच रहा था”,पृथ्वी ने कहा
“आपको भूख लगी है ? मैं आपके लिए कुछ बना देती हूँ”,अवनि ने कहा और जैसे ही किचन की तरफ जाने लगी पृथ्वी ने कहा,”अवनि ! रहने दो , काफी लेट हो गया है मैं बाहर से ही कुछ आर्डर कर देता हूँ,,,,,,,,,,,,तुम बताओ तुम क्या खाओगी ?”,पृथ्वी ने टेबल पर पड़ा अपना फोन उठाते हुए कहा
“आप आपको ठीक लगे”,अवनि ने कहा और मुँह धोने के लिए वाशबेसिन की तरफ बढ़ गयी। पृथ्वी ने दोनों के लिए खाना आर्डर किया और फिर अपने फोन में आये मेल्स और नोटिफिकेशन चेक करने लगा। एक मैसेज पृथ्वी को जयदीप का मिला जिसमे जयदीप ने उसे सुबह जल्दी ऑफिस आने को कहा था। मैसेज देखकर पृथ्वी ने जयदीप को फोन लगाने का सोचा लेकिन रात बहुत हो चुकी थी इसलिए उसने बस एक मैसेज ड्राप किया और फोन साइड में रख दिया। पृथ्वी को याद आया कि मुंबई से जाने के बाद सुरभि ने एक बार भी फोन मैसेज नहीं किया है तो उसने अवनि से कहा,”अवनि ! तुम्हारी सुरभि से बात हुई क्या ?”
“हाँ मैंने आज ही उसे फोन किया था वो होली पर अपने घर है”,अवनि ने अपना मुँह पोछते हुए कहा उसके हाथो में पृथ्वी का तौलिया था
“अवनि ! तुमने मेरा टॉवल यूज़ किया है”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”पृथ्वी आज से इस घर में तेरा मेरा नहीं बल्कि हमारा कहने की आदत डाल लो,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने सुना तो अवनि को देखता ही रह गया , एक ही दिन में अवनि की बातें और उसके ख्याल कितने बदल गए थे लेकिन अवनि को ऐसी बाते करते देखकर पृथ्वी को अच्छा लग रहा था। पृथ्वी को खोया देखकर अवनि वहा से किचन की ओर चाली गयी ! कुछ देर बाद खाना आया और दोनों खाकर सोने चले गए लेकिन इस बार पृथ्वी पहले ही अवनि से दूर बनाकर सो गया ताकि अवनि उसे गलत ना समझे और वही अवनि ये सब देखकर मन ही मन मुस्कुरा उठी।
मौर्या Pvt. Ltd कम्पनी , नवी मुंबई
जयदीप अपने केबिन में यहाँ से वहा घूमते हुए पृथ्वी के आने का इंतजार कर रहा था। कुछ देर बाद किसी ने केबिन का दरवाजा खटखटाया और जयदीप ने कहा,”यस कम इन”
दरवाजा खटखटाने वाला कोई और नहीं बल्कि पृथ्वी ही था इसलिए जैसे ही वह अंदर आया जयदीप ने चैन की साँस ली और कहा,”अच्छा हुआ तुम आ गए , मुझे तुम्हे कुछ बताना है”
“क्या हुआ , आप सुबह सुबह इतना परेशान क्यों है ? आपकी वाइफ को आपके अफेयर के बारे में पता चल गया क्या ?”,पृथ्वी ने हाथ में पकड़ी फाइल जयदीप की टेबल पर रखकर कहा
जयदीप ने सुना तो बुरा सा मुँह बनाया और फिर बेचैनी भरे स्वर में कहा,”ओह्ह्ह पृथ्वी ! अगर ये मजाक था तो आई ऍम सॉरी मैं अभी मजाक के मूड में बिल्कुल नहीं हूँ,,,,,,,,,,तुम नीलेश को तो जानते ही होंगे ?”
“कौन वो प्राची देसाई का मैनेजर ?”,पृथ्वी ने याद करके कहा क्योकि वह एक दो बार उस से मिल चुका था
“हाँ वही ! तुम जानते हो उसने अपनी नौकरी से रिजाइन कर दिया और अब वो प्राची का मैनेजर भी नहीं रहा”,जयदीप ने बहुत ही गंभीर स्वर में कहा
“तो आप क्या चाहते है मैं उस प्राची का मैनेजर बन जाऊ ?”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
“ओह्हफो पृथ्वी ! तुम उसके मैनेजर क्यों बनोगे ? मुझे बस ये समझ नहीं आ रहा कि उसने एकदम से मिस्टर देसाई की कम्पनी से रिजाइन क्यों कर दिया ? आखिर ऐसी तो क्या वजह रही होगी ?”,जयदीप ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो जयदीप को घूरने लगा और कहा,”ये मोहल्ले की आंटियो की तरह बात करना बंद कीजिये आप और ये बताईये मुझे इतनी जल्दी ऑफिस क्यों बुलाया आपने ?”
“तुम्हे क्या मैं मोहल्ले की आंटी नजर आता हूँ ?”,जयदीप ने चिढ़कर कहा
“नहीं आप उनसे भी दो कदम आगे है , किस कम्पनी में कौन ज्वाइन कर रहा है कौन रिजाइन दे रहा है से ज्यादा अगर आप अपनी कम्पनी में ध्यान देंगे तो 5 सालों में ये कम्पनी मुंबई की टॉप कम्पनीज में होगी”,पृथ्वी ने कहा
“सच ?”,जयदीप ने पूछा
“अह्ह्ह्हह ! आपसे तो बात करना ही बेकार है , ये फाइल मैंने कम्प्लीट कर दी है प्लीज एक बार इसे चेक कर लीजियेगा”,कहकर पृथ्वी जाने लगा
“पृथ्वी,,,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने उसे रोककर कहा
“अब क्या है ?”,पृथ्वी ने पलटकर कहा
जयदीप पृथ्वी के पास आया और कहा,”तुम्हे नहीं लगता देसाई ग्रुप एंड कम्पनी खतरे में है ,, कम्पनी के सबसे मजबूत और होनहार कैंडिडेट्स का रिजाइन करके जाना ,तुम्हे नहीं लगता वहा कुछ गड़बड़ है ?”
पृथ्वी जयदीप को एक नजर देखा और बहुत ही गंभीर स्वर में कहा,”सर ! ना मुझे देसाई ग्रुप में कोई दिलचस्पी है न ही वहा काम करने वाले एम्पलॉयस में,,,,,,,,,बाकि एक बात आपने सही कही गड़बड़ तो वहा है और उस गड़बड़ का नाम है “प्राची देसाई” ,अब मैं चलता हु मेरे पास बहुत काम है”
जयदीप ने सुना तो सोच में पड़ गया और फिर चिल्लाया,”ए मैं उस गड़बड़ की बात नहीं कर रहा हूँ,,,,,,,,,,पृथ्वी”
लेकिन पृथ्वी वहा से जा चुका था
( नीलम को माफ़ करके क्या घरवाले कर रहे है कोई गलती या फिर सच में नीलम अपने बर्ताव से शर्मिंदा है ? क्या पृथ्वी अब भी रहेगा अवनि से दूर और नहीं जतायेगा उस पर अपने पति होने का हक़ ? देसाई कम्पनी में असली गड़बड़ प्राची ही है या फिर है कोई और ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
