Pasandida Aurat Season 2 – 84
नीलम भुआ घर देखती रही तब तक अवनि उनके लिए चाय और कुछ वेफर्स ले आयी। अवनि को देखकर नीलम भुआ ने कहा,”तुमने इस घर को बहुत सुन्दर सजाया है अवनि,,,,,,,,,सब सामान इतना परफेक्ट है जैसे इसी घर के लिए बना हो”
अवनि ने चाय का कप उठाया और नीलम भुआ की तरफ बढाकर कहा,”घर सामान से नहीं भुआ जी लोगो से बनता है,,,,,,,,!!!”
नीलम भुआ ने सुना तो उनके सीने में एक टीस उठी। सही तो कह रही थी अवनि घर सामान से नहीं बल्कि उसमे रहने वाले लोगो से बनता है और इस घर में तो सिर्फ दो लोग रहते थे। पृथ्वी और अवनि ,, नीलम ने महसूस किया कि इतना बड़ा परिवार होने के बाद भी भी पृथ्वी और अवनि इस घर में कितने अकेले थे। वे अवनि की तरफ देखकर मुस्कुराई और विश्वास भरे स्वर में कहा,”जल्दी ही ये घर तुम्हे घर जैसा लगेगा अवनि”
अवनि ने सुना तो हामी में गर्दन हिला दी। नीलम भुआ अपनी चाय लेकर सोफे पर आ बैठी और अवनि भी अपनी चाय लेकर उनके सामने पड़े सोफे पर बैठ गयी और कहा,”भुआ जी ! अब तो आप मुझसे नाराज नहीं है ना ?”
नीलम मुस्कुराई और कहा,”नहीं,,,,,,,,,,!!”
“तो फिर मुझे घरवालों के बारे में कुछ बताईये ना , मेरा मतलब घर में सब कैसे है ? सबको क्या क्या पसंद है ? पृथ्वी के बचपन के बारे में ,आप सब के बारे में ?,,,,,,,,,,,,,,,पृथ्वी ने तो मुझे सिर्फ खुद के बारे में बताया लेकिन मुझे आप सबके बारे में जानना है , प्लीज बताईये ना”,अवनि ने बच्चो की तरह मासूमियत भरे स्वर में कहा
नीलम भुआ ने सुना तो मुस्कुराई और अवनि को बारी बारी से सबके बारे में बताने लगी। अवनि कभी मुस्कुराते हुए तो कभी हैरानी से सब सुनती और कभी नीलम भुआ के साथ मिलकर खिलखिला कर हंस पड़ती
कुछ देर वक्त बिताने के बाद नीलम उठी और कहा,”अच्छा अवनि मैं अब चलती हूँ पर जल्दी ही सबके साथ तुम्हे लेने आउंगी”
“अनजाने में अगर मैंने आपसे कभी कुछ कह दिया हो तो मुझे माफ़ कर देना भुआ जी”,अवनि ने कहा
नीलम ने सुना तो उदास हो गयी वह अवनि के पास आयी और उसका ललाट अपने होंठो से छूकर कहा,”माफ़ी तो मुझे तुमसे मांगने की जरूरत है अवनि , इतना सब होने के बाद भी तुम में कोई बदलाव नहीं आया। तुम उतनी ही सरल और मासूम हो,,,,,,,,,,,,,,अपना और पृथ्वी का ख्याल रखना मैं अब चलती हूँ”
“अरे भुआ जी ! आप एक चीज भूल रही है”,अवनि ने एकदम से कहा
“क्या ?”,नीलम भुआ पूछा
“एक मिनिट मैं अभी आयी,,,,,,,,,,,!!”,कहकर अवनि टेबल की तरफ गयी जहा प्लेट में गुलाल रखा था। अवनि उसे लेकर आयी और नीलम भुआ के सामने करके कहा,”आज होली है ,क्या आप मुझे रंग नहीं लगाएंगी ?”
नीलम भुआ ने सुना तो मुस्कुराई और एक चुटकी रंग उठाकर अवनि के दोनों गालो पर लगाकर कहा,”हैप्पी होली ,खूब खुश रहो ,, सौभाग्यवती भवः”
अवनि मुस्कुराई और फिर थोड़ा सा गुलाल उंगलियों पर लेकर नीलम भुआ को लगाकर कहा,”हैप्पी होली भुआ जी”
नीलम भुआ ने अवनि का गाल थपथपाया और फिर वहा से चली गयी। अवनि ने दरवाजा बंद किया और प्लेट रखकर मंदिर के सामने चली आयी। मंदिर में रखी महादेव की मूर्ति को देखकर अपने हाथ जोड़े और मुस्कुराते हुए कहा,”मुझे पता था आप सब ठीक कर दोगे ,थैंक्यू महादेव”
देसाई मेंशन , मुंबई
बीती रात प्राची विक्रम से हाथ मिला चुकी थी इसलिए उसने अगली सुबह विक्रम को अपने घर होने वाले होली के फंक्शन में इन्वाइट किया। मिस्टर देसाई भी बीती रात हुई प्राची से बहस को भूलकर मेहमानो में शामिल हो गए और रंग लगाने लगे। विक्रम अपने भाई के साथ देसाई मेंशन पंहुचा। मिस्टर देसाई ने जब कपूर ब्रदर्स को साथ देखा तो बहुत खुश हुए।
एक तो कपूर ग्रुप के साथ देसाई ग्रुप का बिजनेस रिलेशन था उस पर उनका सामने से यहाँ आना मिस्टर देसाई के लिए किसी सुनहरे मौके से कम नहीं था। मिस्टर देसाई ने आगे बढ़कर उन दोनों से हाथ मिलाया और उनका स्वागत किया। वहा मौजूद सभी बड़े बड़े लोगो और मेहमानो से उन दोनों बी भाईयो को मिलवाया।
विक्रम का भाई जो कि एक बहुत ही बड़ा बिजनेसमैन था वह सबसे मिल रहा था लेकिन विक्रम की नजरें तो किसी और को ही ढूंढ रही थी।
“मैं अभी आया,,,,,,,,!!!”,कहकर विक्रम बाकी सब के बीच से निकला और साइड में चला आया।
देसाई मेंशन में खाने पीने के स्टॉल के साथ ही ड्रिंक का भी बंदोबस्त था विक्रम उसी तरफ चला आया और वेटर से एक ड्रिंक बनाने को कहा। वेटर ने ड्रिंक बनाकर विक्रम को दी तो पास खड़ी प्राची ने विक्रम से पहले उस ड्रिंक को लिया और साइड रखकर अपने हाथ में पकड़ा गिलास विक्रम की तरफ बढ़ाकर कहा,”ये नहीं ये ट्राय करो”
प्राची को वहा देखकर विक्रम का चेहरा खिल उठा और उसने कहा,”हे तुम यहाँ ?”
“जिस मेंशन में तुम खड़े हो एक्चुली वो मेरे डेड का ही है,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने अदा से अपने बालों को झटककर कहा
“ओह्ह्ह ! आई ऍम सो सॉरी , दरअसल तुम्हे यहाँ देखकर मैं सब भूल गया”,विक्रम ने प्राची से फ्लर्ट करते हुए कहा
“मुझसे फ्लर्ट करने की कोशिश भी मत करना , मुझ पर इसका कोई असर नहीं होगा,,,,,,,,,,,वैसे तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”,प्राची ने हाथ में पकड़ी ड्रिंक का घूंठ भरकर कहा
“तुम्हारे डेड ने इन्वाइट किया ,यू नो बिजनेस रिलेशन”,विक्रम ने भी काउंटर से पीठ लगाकर ड्रिंक का एक घूंठ भरकर कहा
प्राची भी ड्रिंक पीते हुए उसके बगल में आ खड़ी हुई और सामने देखते हुए कहा,”सो ! क्या सोचा तुमने उन दोनों के बारे में ?”
विक्रम ने प्राची की तरफ देखकर लुक दिया जैसे वह जानना चाह रहा था कि प्राची किन दोनों की बात कर रही है ? विक्रम को ख़ामोशी से अपनी ओर देखते पाकर प्राची ने कहा,”मैं पृथ्वी और अवनि की बात कर रही हूँ , तुमने कुछ सोचा उन दोनों के बारे में ?”
विक्रम ने सुना तो धीरे से मुस्कुराया और कहा,”प्राची प्राची प्राची ! कितनी बेसब्र इंसान हो ना तुम,,,,,,,इतनी भी क्या जल्दी है ?”
प्राची ने सुना तो विक्रम की तरफ देखा और गुस्से से कहा,”क्योकि मैं पृथ्वी को उस अवनि के साथ नहीं देख सकती , वो जितनी जल्दी उस से दूर होगी मेरा काम उतना ही आसान हो जाएगा”
“प्राची ! मुझे लगा नहीं था तुम इतनी बेवकूफ होगी,,,,,,,,,,,!!!”,विक्रम ने ड्रिंक का एक घूंठ भरकर कहा
“What do you mean ?”,प्राची ने विक्रम को घूरकर कहा
विक्रम ने खाली गिलास काउंटर पर रखा और प्राची की तरफ पलटकर कहा,”आई मीन कि सबसे पहले तो तुम पृथ्वी के लिए खुद को डेस्परेट दिखाना बंद करो , उस पृथ्वी को अपनी नौकरी और अपने प्यार पर बहुत घमंड है तो सबसे पहले उस से वो छीनो वो खुद ही कमजोर हो जायेगा। रही अवनि की बात तो उसके लिए मैं हूँ , बहुत जल्द मुंबई में राइटिंग कॉम्पिटिशन होने वाला है और मैं जानता हूँ अवनि उसमे जरूर ट्राय करेगी। एक बार वो इंडस्ट्री में आ जाये उसके बाद उसका कैसे इस्तेमाल करना है मैं बहुत अच्छे से जानता हूँ।
इधर अवनि अपने सपनो को पूरा करने में बिजी रहेगी और उधर पृथ्वी अपनी नौकरी को बचाने में और दोनों ही एक दूसरे को वक्त नहीं दे पाएंगे और यही से शुरू होगी उन दोनों के बीच मिसअंडरस्टेंडिंग जो हर शादी में होती है। धीरे धीरे एक दूसरे को ब्लेम करते करते वो दोनों खुद ही एक दूसरे से दूर हो जायेंगे,,,,,,,,,And that would be the right time जब तुम पृथ्वी को अपना बना सकती हो क्योकि दिल टूटने के बाद उसे किसी के सहारे की जरूरत तो पड़ेगी ही तो क्यों ना वो सहारा तुम्हारा हो”
विक्रम ने जैसे ही अपनी बात खत्म की प्राची के होंठो पर मुस्कान और आँखों में चमक उभरी उसने विक्रम को गले लगाते हुए कहा,”ओह्ह्ह्हह विक्रम ! You are such a darling अगर ऐसा हुआ तो फिर पृथ्वी को मेरा होने से कोई नहीं रोक सकता , खुद पृथ्वी भी नहीं,,,,,,,,,!!”
कुछ दूर खड़े मिस्टर देसाई ने जब प्राची को विक्रम के साथ खुश देखा तो उन्हें भरत की कही बात याद आयी और वे साइड में चले आये। प्राची का खुश होना और करीब आना विक्रम को अच्छा लगा वह मुस्कुरा उठा। प्राची विक्रम से दूर हटी और कहा,”लेकिन मुझे अभी भी समझ नहीं आ रहा कि तुम मेरी मदद क्यों कर रहे हो ?”
विक्रम ने सुना तो उसे वो सुबह याद आ गयी जब पृथ्वी ने अवनि को लेकर उसे मारा था और उसे अवनि से माफ़ी भी मांगनी पड़ी थी। वो सब आते ही विक्रम के चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये और उसने कहा,”मैं ये सब तुम्हारे लिए नहीं अपने लिए कर रहा हूँ , बहुत घमंड है ना उस पृथ्वी को अपने प्यार पर अब देखो उसके प्यार की सबके सामने कैसे धज्जिया उड़ाता हूँ”
प्राची विक्रम से कुछ कहती इस से पहले विक्रम वहा से चला गया और प्राची ने उसे जाते देखकर कहा,”तुम चाहे ये जिसके लिए भी करो अगर इसका रिज्लट पृथ्वी है तो फिर मैं तुम्हारे साथ हूँ,,,,,,,,,!!!”
आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
दिनभर होली खेलकर मस्ती करने के बाद दोपहर बाद पृथ्वी घर आया और बेल बजायी ! नीलम भुआ के जाने के बाद अवनि अपने कमरे में सो रही थी। पहली बार बेल बजने से उसकी नींद नहीं खुली लेकिन अगले ही पल बेल बजती ही गयी और अवनि उठी। अपने खुले बालों को समेटते हुए वह कमरे से बाहर आयी।
बेल अब भी बजती जा रही थी ये देखकर अवनि को झुंझलाहट होने लगी वह दरवाजे के पास आयी और दरवाजा खोला तो उसकी झुंझुलाहट कुछ कम हुई सामने पृथ्वी खड़ा था लेकिन पृथ्वी की तबियत अवनि को कुछ गड़बड़ लगी।
वह पृथ्वी से कुछ पूछ पाती इस से पहले पृथ्वी ने अवनि को साइड में किया और अंदर चला आया। अवनि ने दरवाजा बंद किया और पृथ्वी के पीछे आते हुए कहा,”आपने आने में इतनी देर क्यों की ?”
पृथ्वी जिसने इतनी भांग पी ली थी कि उसे कुछ होश नहीं था वह कहा खड़ा है और किस के सामने खड़ा है ? वह अवनि की तरफ पलटा और कहा,”मेरी मर्जी मैं कभी भी आउ और ये मैं देर से क्यों आया मैं ये तुम्हे क्यों बताऊ ?”
अवनि ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखने लगी , पृथ्वी अवनि को नहीं पहचान पा रहा था। अवनि पृथ्वी की तरफ आयी और कहा,”आप शायद होश में नहीं है , वह बैठिये मैं आपके लिए पानी लेकर आती हूँ”
अवनि पृथ्वी के लिए पानी लेने चली गयी और पृथ्वी सोफे पर आ बैठा। सामने टेबल पर मिठाई की प्लेट रखी थी , पृथ्वी ने प्लेट में रखा लड्डू उठाया और खाने लगा। एक तो उसने भांग पी रखी थी उस पर वह मीठा भी खा रहा था।
अवनि पानी लेकर आयी लेकिन जब उसने पृथ्वी को लड्डू खाते देखा तो जल्दी से पानी का गिलास टेबल पर रखकर उसके हाथ से लड्डू छीनकर कहा,”ये क्या कर रहे है आप ? अपने भांग पी है और ऊपर से मीठा खा रहे है,,,,,!!”
पृथ्वी ने देखा अवनि ने उसके हाथ से लड्डू छीन लिया है तो बच्चो की तरह अपना निचला होंठ बाहर निकाला और कहा,”तुम बहुत बुरी हो,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि मुस्कुराई क्योकि ये कहते हुए पृथ्वी बिल्कुल एक मासूम छोटे बच्चे सा लग रहा था।
अवनि ने लड्डू वापस प्लेट में रखा और खुद पृथ्वी के बगल में सोफे पर आ बैठी और उसकी तरफ पलटकर कहा,”जब आपसे बर्दास्त नहीं रही तो फिर आपने इतनी भांग क्यों पी ?”
अवनि को अपने करीब बैठा देखकर पृथ्वी पीछे खिसका और कहा,”वो मैं तुम्हे क्यों बताऊ ?”
अवनि ने देखा पृथ्वी के माथे पर पसीने की बुँदे उभर आयी है उसने अपने दुप्पटे से पृथ्वी का ललाट पोछने के लिए जैसे ही हाथ पृथ्वी की तरफ बढ़ाया पृथ्वी ने एकदम से कहा,”रुक जाओ”
अवनि रुक गयी और हैरानी से पृथ्वी को देखने लगी तो पृथ्वी ने अवनि को डाँटते हुए कहा,”पीछे हटो और ये क्या कर रही हो तुम ? मुझे अकेला देखकर तुम मेरे पास आने की कोशिश कर रही हो,,,,,,,,,,,,देखो मैं शादीशुदा हूँ और मेरी बायको बहुत सुन्दर है। मैं उस से बहुत प्यार करता हूँ,,,,,,,,,!!”
अवनि ने सुना तो उसे समझते देर नहीं लगी कि पृथ्वी पूरी तरह से भांग के नशे में है और इसलिए वह अवनि तक को नहीं पहचान पा रहा है। अवनि ने अपना हाथ पीछे कर लिया और खुद भी पीछे खिसक गयी।
“तो फिर आप यहाँ क्या कर रहे है ? अपनी बायको के पास जाईये”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने अपना सर खुजाया और मासूमियत से कहा,”अह्ह्ह्हह ! लगता है मैं गलत घर में आ गया हूँ”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराने लगी उसे समझ नहीं आ रहा था इस वक्त वह पृथ्वी को डांटे या उसे समझाए लेकिन पृथ्वी ऐसी बाते करते हुए कुछ ज्यादा ही प्यारा लग रहा था। अवनि को अपनी और देखते पाकर पृथ्वी ने अपने शर्ट का ऊपरी बटन बंद करते हुए कहा,”देखो तुम मुझे ऐसे मत देखो अगर मेरी बायको को पता चला तो वो तुम्हे छोड़ेगी नहीं,,,,,,,,,,!!!”
“अच्छा क्या करेगी तुम्हारी बायको , मुझे मारेगी ?”,अवनि ने पूछा
“हाह ! वो क्या तुम्हे मारेगी ? वो तो एक चींटी को भी नहीं मार सकती,,,,,,,,पता है वो चिकन के लिए क्या कहती है ? वो कहती है लोग मुर्गी का बच्चा कैसे खा सकते है ? उसमे जान होती है कितना पाप लगता है,,,,,,,,,,,,हाह ! उसे पता ही नहीं चिकन कितना टेस्टी होता है”,पृथ्वी ने अपने होंठो पर जीभ फिराकर कहा
अनजाने में वह बेचारा अवनि के सामने अपने दिल की बात जो कह गया अवनि बस ख़ामोशी से उसे देख रही थी और फिर अगले ही पल पृथ्वी ने कहा,”लेकिन वो तुम्हे पनिशमेंट जरूर दे सकती है,,,,,,,,,हाह ! तुमसे कहेगी 100 टाइम्स सॉरी लिखो वो भी अपनी हाथ से,,,,,,,,,,,,वो बहुत स्ट्रिक्ट है इसलिए तुम मुझसे दूर रहो समझी”
अवनि ने सुना तो उसे वो पल याद आ गया जब उसने पृथ्वी से 100 बार सॉरी लिखने को कहा था। वो पल याद आते ही अवनि मुस्कुराने लगी , पृथ्वी ने देखा तो कहा,”देखा तुम फिर मुस्कुरा रही हो,,,,,,,,,कही तुम मुझे लेकर कुछ गलत तो नहीं सोच रही हो ? दरवाजा कहा है मुझे अपने घर जाना है ?”
कहते हुए पृथ्वी उठा और दरवाजे की तरफ भागा अवनि उसे रोक पाती इस से पहले ही पृथ्वी दरवाजा खोलकर बाहर भाग गया और अवनि ने अफ़सोस में अपना सर झटक लिया।
पृथ्वी अपने ही फ्लेट से बाहर आया और लिफ्ट में आ खड़ा हुआ। सातवे माले खड़े होकर उसने लिफ्ट का 7 नंबर दबाया और कुछ देर बाद लिफ्ट से बाहर आकर एक बार अपने फ्लेट के दरवाजे के सामने आ खड़ा हुआ और बेल बजायी। पृथ्वी के जाने के बाद अवनि सोफे पर ही बैठी थी जैसे ही बेल बजी वह उठकर आयी और दरवाजा खोला तो देखा सामने एक बार फिर पृथ्वी खड़ा था। अवनि को देखते ही पृथ्वी के चेहरे पर सुकून के भाव तैर गए और उसने अंदर आकर जल्दी से दरवाजा बंद करके कहा,”अच्छा हुआ तुम मुझे मिल गयी”
“क्या हुआ पृथ्वी ?”,अवनि ने उलझनभरे स्वर में पूछा
पृथ्वी ने अवनि का हाथ पकड़ा और उसे लेकर सोफे पर चला आया। उसने अवनि को अपने बगल में अपने साथ बैठाया और उसका हाथ थामकर कहा,”पता है अभी थोड़ी देर पहले मैं गलती से किसी और के घर में चला गया था। वो लड़की , वो लड़की मेरे पास आकर बैठ गयी और मुझे छूने की कोशिश की,,,,,,,,,,मैंने कहा उस से कि मैं शादी शुदा हूँ और मेरी वाइफ है,,,,,,,,,फिर भी वो मुझे देखे जा रही थी , पता है मैं कितना डर गया था ,, कैसे भाग के आया मैं वहा से,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा उठी पृथ्वी पहले भी उसके पास ही आया था और अब भी , लेकिन अवनि को ये जानकर एक सुकून का अहसास हुआ कि नशे में होकर भी पृथ्वी को उसका ख्याल था। पृथ्वी की मासूमियत भरी बातें सुनकर अवनि ने आगे बढ़कर उसे सीने से लगाया और कहा,”शांत हो जाओ पृथ्वी कुछ नहीं हुआ है ,तुम अपने घर में हो अपनी अवनि के साथ”
पृथ्वी ने सुना तो अवनि के सीने से लगा रहा और अपने बाँहो को अवनि की कमर से लपेट लिया और आँखे मूंदकर कहा,”अब मुझसे दूर मत जाना अवनि,,,,!!!”
अवनि ने अपने होंठो से पृथ्वी के सर को छुआ और कहा,”हम हमेशा साथ रहेंगे”
( क्या नीलम भुआ अपनी गलती के लिए मांगेगी घरवालों से माफ़ी और आएगी सबके साथ अवनि को लेने ? अवनि को लेकर आखिर क्या है विक्रम के इरादे ? पृथ्वी की मासूमियत के सामने क्या अवनि सम्हाल पायेगी खुद को ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
