Pasandida Aurat Season 2 – 82
हिमांशु का घर , पनवेल
रवि जी और लता सभी घरवालों के बीच बैठे थे और सहसा ही रवि ने अवनि के बारे मे पुछ लिया। रवि जी के मुँह से अवनि का नाम सुनकर सभी ख़ामोशी से
एक दूसरे को देखने लगे। सबको खामोश देखकर रवि जी ने कहा,”अरे क्या बात है ,आप सब लोग चुप क्यों है ? अवनि कल यहाँ आयी थी ना ?”
“अह्ह्ह्ह रवि ! हिमांशु अवनि को यहाँ लेकर आया था लेकिन,,,,,,,,,,,,!!!”,बड़े पापा ने कहा
“लेकिन क्या दादा ?”,रवि जी ने पूछा उनके चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये
“पृथ्वी सुबह आया और उसे अपने साथ वापस ले गया”,इस बार बड़ी मम्मी ने कहा
“पृथ्वी ले गया,,,,,,,लेकिन आज के दिन तो वो यहाँ सबके साथ रहने वाली थी फिर पृथ्वी ने ऐसा क्यों किया ?”,रवि जी ने पूछा
“दादा दरअसल वो बात ये है कि,,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर चाचा ने रवि जी और लता को सब बता दिया। रवि जी सुना तो उनके चेहरे पर गुस्से के भाव तैरने लगे और वही पहली बार लता के चेहरे पर भी शिकायत के भाव थे लेकिन लता चुप रही।
“आप सब लोग अवनि के साथ ऐसे पेश कैसे आ सकते है ? वो इस घर की बहू है इस परिवार का हिस्सा है ये जानने के बाद भी उसे जलील किया गया , ताने मारे गए,,,,,,,,,,,मैं पूछता हूँ क्यों ? और जब नीलम अवनि के साथ ये सब कर रही थी तब आप सब लोग कहा थे ? क्या आप लोगो की उसके प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं बनती ? जितनी गलत नीलम है उतने ही गलत आप सब भी है , अरे एक लड़की जो अपना घर , अपना परिवार छोड़कर यहाँ आयी है आप सबके बीच उसके साथ ऐसा बर्ताव किया आप लोगो ने,,,,,,,,,,,,,शर्म आ रही है मुझे ये सुनकर,,,,,,,,,!!!”,रवि जी सोफे से उठे और गुस्से में सबको फटकार लगाकर कहा
“ऐसी बात नहीं है रवि , मैंने और पंकज ने अवनि को पहले ही स्वीकार कर लिया था और हम दोनों तो आज शाम तुमसे बात करने घर भी आने वाले थे लेकिन उस से पहले ही ये सब,,,,,,,,,,,,,,,,हाँ नीलम के साथ साथ हम सब की भी गलती है , हम उस इंसान को आजमा रहे थे जिसे इस घर का लड़का पहले ही स्वीकार कर चुका है। यकीन करो रवि हम में से किसी के भी मन में अवनि को लेकर मैल नहीं है ना ही हम में से किसी को उस से शिकायत है”,बड़े पापा ने रवि जी को समझाया
“मैं आपकी बात समझता हूँ दादा लेकिन क्या पृथ्वी समझेगा ? कल कितने दिनों बाद वह घर आया था लेकिन बाहर चौखट पर बैठा रहा अंदर नहीं आया , कहने लगा जब उसकी आई उसकी पत्नी को सम्मान के साथ इस घर में लेकर आएगी तब वो घर आएगा और आप सबने पृथ्वी के सामने ही उसकी पत्नी का अपमान किया। क्या वो ये चीज बर्दास्त करेगा ?”,रवि जी ने गुस्से से कहा
लता ने रवि जी को गुस्से में देखा तो उनके पास आयी और उनकी बांह छूकर कहा,”शांत हो जाईये जी ! जो कुछ हुआ इनमे इन सब की क्या गलती है ? नीलम जीजी ने जो किया उसके लिए सबको दोष देना गलत है,,,,,,,,,,!!!”
रवि जी ने सुना तो लता की तरफ पलटे और कहा,”सही और गलत में फर्क तुम तो मुझे समझाओ ही मत लता ,, अब तक तुमने भी तो उस लड़की के साथ गलत ही किया है। तुमने ही नीलम से कहा था अवनि को यहाँ बुलाने के लिए,,,,,,,,,,,,,,क्या तुम नहीं जानती थी यहाँ ये सब होने वाला है ?”
लता ने सुना तो उनकी आँखों में आँसू भर आये और उन्होंने ना में गर्दन हिलाकर कहा,”मुझे लगा सब उसे आजमाना चाहते है बस इसलिए मैंने”
लता की बात सुनकर रवि जी का गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने कहा,”किसे आजमाने की बातें रही हो तुम लता ? तुम सब में से यहाँ कौन है जिसमे कोई कमी नहीं है ? पृथ्वी हमारा बेटा है गलती उसने की हमारी मर्जी के खिलाफ शादी करके लेकिन इस बात की सजा हम सब अवनि को क्यों दे ? और क्या आजमाना चाहते थे सब ये कि अपने अपमान के बाद वह क्या करती है ?”
सभी खामोश थे रवि जी को इतने गुस्से में देखकर किसी की बोलने की हिम्मत नहीं हुई खुद बड़े पापा की भी नहीं।
लता से मुँह फेरकर रवि जी ने सबकी तरफ देखा और कहा,”कुछ नहीं करेगी वो जानते है क्यों ? क्योकि बहुत चाहती है वो हमारे पृथ्वी को ,, वो चाहती तो यहाँ आने से मना भी कर सकती थी लेकिन ये जानते हुए भी कि इस घर में उसे सिर्फ ताने और अपमान मिलेगा वो फिर भी यहाँ आयी ताकि आप लोगो की शिकायते दूर कर सके। इस परिवार और पृथ्वी के बीच की दूरिया कम कर सके।
आपके ताने , आपका अपमान चुपचाप सहती रही ताकि पृथ्वी को इस घर में फिर से वो जगह वो सम्मान दिला सके जो उस से शादी करके पृथ्वी ने खो दिया था,,,,,,,,,,,,,और आप लोग ,आप लोगो ने ऐसी लड़की का दिल दुखाया , उसे बेइज्जत किया। कहा है नीलम बुलाओ उसे,,,,,,,,,!!!”
“रवि , रवि शांत हो जाओ,,,,,,,,नीलम अभी अपने घर पर है उसे मत बुलाओ ,, तुम्हारे आने से पहले हम सब पहले ही उसे बहुत कुछ कह चुके है,,,,,,,,,तुम तुम शांत हो जाओ और यहाँ बैठो,,,,,,,,!!!”,बड़ी मम्मी ने रवि जी का हाथ पकड़कर उन्हें सोफे पर बैठाते हुए कहा
साक्षी उनके लिए पानी का गिलास ले आयी। रवि जी ने पानी पीया और थोड़ा शांत होकर दुखी स्वर में कहने लगे,”मैं मानता हूँ पृथ्वी का अपने परिवार के खिलाफ जाकर शादी करने का फैसला गलत था लेकिन उसका चुनाव गलत नहीं था। उसने अपने लिए जिसे चुना वो यकीनन उसके लिए सही थी बस हम लोग उसे नहीं समझ पाए,,,,,,,,,,,,,,समाज और रिश्तेदारी की झूठी शान में हम सब अपने ही बच्चो को घूट घूट कर जीने के लिए मजबूर कर देते है।”
“रवि ! तुम्हारी तकलीफ़ मैं समझ सकता हूँ और पिछले एक महीने से घर का जो माहौल बदला हुआ है वो भी लेकिन इसे बदला भी तो जा सकता है ना,,,,,,,,,,,,हमे अवनि से कोई शिकायत नहीं है तुम चाहो तो कल ही उसे अपने घर ला सकते हो”,बड़े पापा ने रवि जी के कंधे पर हाथ रखकर कहा
रवि ने सुना तो लता की तरफ देखा और कहा,”वो तो मैं लाऊंगा ही दादा चाहे किसी को मेरा ये फैसला पसंद आये या ना आये”
इतना कहकर रवि जी वहा से चले गये , चाचा उन्हें मनाने उनके पीछे चले गए और लता वही खड़ी सुबकने लगी ये देखकर बड़े पापा ने बड़ी मम्मी से लता को सम्हालने का इशारा किया और खुद वहा से उठकर चले गए
आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
मोहित ,नकुल और लक्षित पृथ्वी को छेड़ते हुए सोफे पर आ बैठे। अवनि और रिया दोनों मिलकर सबके लिए कोल्ड ड्रिंक और खाने का कुछ सामान ले आयी।
अवनि ने सबको कोल्ड ड्रिंक दी और जैसे ही गिलास पृथ्वी की तरफ बढ़ाया पृथ्वी ने गिलास के साथ साथ अवनि का हाथ भी थाम लिया। पृथ्वी की ये शरारत देखकर अवनि ने आँखों ही आँखों में उस से हाथ छोड़ने का इशारा किया लेकिन पृथ्वी ने नहीं छोड़ा और प्यार भरी नजरो से अवनि को देखता रहा।
“दादा ! अब वहिनी का हाथ छोड़ भी दो,,,,,,,,!!!”,बगल में बैठे लक्षित की नजर पृथ्वी की शरारत पर पड़ी तो उसने सबके सामने ही बोल दिया और सब पृथ्वी को देखने लगे। पृथ्वी ने जल्दी से अवनि का हाथ छोड़ दिया और दूसरी तरफ देखने लगा।
अवनि प्यार भरी नजरो से पृथ्वी को घूरते हुए रिया के बगल में पड़े सोफे पर जा बैठी। रिया नीचे जमीन पर बैठी थी क्योकि उसे वही बैठना अच्छा लग रहा था। उसने अपनी कोहनी अवनि के घुटने पर टिका ली और अवनि की तरफ देखकर कहा,”अवनि ! लगता है पृथ्वी पर तुम्हारे प्यार का रंग कुछ ज्यादा ही चढ़ गया है”
अवनि ने सुना तो धीरे से मुस्कुरा दी और सामने बैठे पृथ्वी ने कहा,”हाह ! ये क्या बात हुई ?”
“वो सही बोल रही है ,आज से पहले तो तुम्हे ऐसा कभी नहीं देखा था,,,,,,,,,,,!!!”,नकुल ने रिया की साइड लेकर कहा
“मैं ऐसा ही था बस आज से पहले मैं बोरिंग लोगो की कम्पनी में था”,पृथ्वी ने कहा तो रिया ने उसे घुरा और कहा,”क्या मतलब हम लोग बोरिंग है ?”
“बहुत ज्यादा ! चलो अब तुम सब लोग जाओ यहाँ से,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने एकदम से कहा
“अरे अभी तो आये है और अभी जाए,,,,,,,,,,,,और अगर जाना ही है तो फिर सिर्फ हम लोग नहीं तुम और अवनि भी हमारे साथ चलोगे ?”,नकुल ने अपनी कोल्ड ड्रिंक खत्म करके कहा
“कहा ?’,पृथ्वी ने पूछा
“अरे भूल गए ! अपनी सोसायटी में हर होली फंक्शन होता है और हम सब भाँग पीते है , इस बार तेरी बिल्डिंग के गार्ड अंकल ने बंदोबस्त किया है चल ना बहुत मजा आएगा”,नकुल ने पृथ्वी से कहा और फिर अवनि की तरफ पलटकर कहा,”भाभी आपने कभी भांग पीया है ?”
“नहीं,,,,,,,,,,,मैं ये सब नहीं पीती”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा
“अह्ह्ह फिर तो आपको जरूर ट्राय करनी चाहिए”,नकुल ने कहा
“ए ! जब वो कह रही है कि वो ये सब नहीं पीती तो फिर क्यों ट्राय करना ?”,पृथ्वी ने कहा
“ठीक है वो नहीं पीती लेकिन तू तो पीता है ना ,चल अब उठ चलते है वरना सब खत्म हो जायेगा”,नकुल ने उठते हुए कहा
मोहित और लक्षित तो पहले से तैयार थे और नकुल जा रहा था इसलिए रिया भी उठ खड़ी हुई।
पृथ्वी का अवनि को छोड़कर जाने का मन तो नहीं था लेकिन वह नकुल से आज बहुत दिनों बाद मिला था और बाकि सब दोस्तों से भी मिलने वाला था इसलिए वह उसे ना नहीं बोल पाया।
नकुल ,रिया ,लक्षित और मोहित दरवाजे की तरफ बढ़ गए तो पृथ्वी अवनि के पास आया और कहा,”तुम साथ चलना चाहोगी ?”
“नहीं ! आप लोग जाईये,,,,,,,,,,मैं थोड़ा घर साफ़ कर लेती हूँ,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“हम्म्म्म,,,,,,,,,,मैं जल्दी आ जाऊंगा”,पृथ्वी ने कहा
अवनि मुस्कुराई और कहा,”पृथ्वी ! इतने दिनों बाद आप अपने दोस्तों से मिल रहे है ,आराम से आईयेगा,,,,,,,,,!!!”
“तुम कितनी समझदार हो यार,,,,,,,,,,,,मैं फिर भी जल्दी आऊंगा”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा और जैसे ही जाने के लिए बढ़ा अवनि ने एकदम से उसे आवाज दी,”सुनिए,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो उसका हाथ अपने सीने पर चला गया और ख़ुशी से आँखे चमक उठी वह पलटा और कहा,”हाँ हाँ ठीक है ज्यादा नहीं पिऊंगा”
पृथ्वी ने अवनि के कहे बिना ही ये जान लिया कि अवनि क्या कहने वाली है , अवनि ने सुना तो बस मुस्कुरा दी और पृथ्वी सबके साथ वहा से चला गया।
अवनि मुस्कुराते हुए वही खड़ी बंद दरवाजे को देखती रही और फिर शरमा कर अपने चेहरे को अपने हाथो में छुपा लिया। उसने अपना दुपट्टा हटाया और उसे साइड में रखकर घर की सफाई करने लगी।
मुस्कराहट उसके होंठो से जाने का नाम नहीं ले रही थी। पृथ्वी के साथ बिताये पल उसकी आँखों के सामने आ रहे थे। वह उन्ही पलों को याद करती , हँसती ,मुस्कुराती सब काम कर रही थी। अवनि ने घर साफ़ किया कुछ बर्तन धोये और फिर नहाने चली गयी। उसने सलवार कुरता पहना और गीले बालों को सुखाने बालकनी में चली आयी।
अवनि बहुत खुश थी और उसकी ख़ुशी उसके चेहरे से झलक रही थी। बाल सूख चुके थे इसलिए अवनि उन्हें समेटते हुए अंदर आयी तभी उसकी नजर अपने फोन पर पड़ी और अवनि को आया कि उसने तो सुरभि को होली तक विश नहीं की। अवनि ने फोन उठाया और कमरे में चली आयी। उसने सुरभि का नंबर डॉयल किया और बिस्तर पर आ बैठी।
एक दो रिंग के बाद सुरभि ने फोन उठाय लेकिन अवनि का उसकी लड़खड़ाती आवाज पर ध्यान नहीं गया और उसने कहा,”हेलो सुरभि ! हैप्पी होली”
“हैप्पी होली अवनि”,सुरभि ने कहा
“अच्छा सुरभि सुनो ना ! मुझे तुम्हे कुछ बताना है”,अवनि ने खुशीभरे स्वर में कहा उसकी आवाज में खनक और चेहरे पर ख़ुशी के भाव थे
“क्या हुआ ? क्या उस चुड़ैल ने तुम्हे फिर परेशान किया ? अह्ह्ह्ह वो लड़की तुम्हारे पीछे क्यों पड़ी है ?”,सुरभि ने लड़खड़ाती आवाज में कहा
“चुड़ैल ? अह्ह्ह्ह नहीं सुरभि मुझे तुम्हे कुछ और बताना है”,अवनि ने सुरभि की बात को नजरअंदाज करके उतनी ही ख़ुशी से फिर कहा
“हाँ बोलो”,सुरभि ने कहा
“मुझे पृथ्वी से प्यार हो गया है”,अवनि ने ख़ुशी भरे स्वर में कहा
अवनि की बात सुनकर सुरभि का नशा एकदम से उतर गया हो जैसे , वह उठकर बैठी और कहा,”क्या क्या क्या कहा तुमने फिर से कहना ?”
“मैंने कहा मुझे पृथ्वी से प्यार हो गया है,,,,,,,,मैं उस से प्यार करती हूँ सुरभि,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने धड़कते दिल के साथ खुश होकर कहा
“हाह ! ये तो तुम्हे बहुत पहले हो गया था तभी तो तुमने उस से शादी की,,,,,,,,,,वैसे मुझे लगता है मुझे भी किसी से प्यार कर लेना चाहिए”,सुरभि ने फिर लड़खड़ाती जबान में कहा
“हाँ सुरभि तुम्हे भी अपने लिए कोई अच्छा लड़का ढूंढ़ लेना चाहिए,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“अरे लड़का है मेरे पास लेकिन उस से प्यार करने का मेरा मूड नहीं है,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने कहा
“कौन लड़का ?”,अवनि ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“सिद्धार्थ,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने भांग के नशे में सिद्धार्थ का नाम लिया और ये सुनकर अवनि चौंकी उसने कहा,”तुम किस सिद्धार्थ की बात कर रही हो सुरभि ? और तुम होश में हो ना , तुमने कुछ पीया है क्या ?”
“सिद्धार्थ कौन सिद्धार्थ मैंने कहा स्वार्थ , बहुत स्वार्थ उस अनिकेत में,,,,,,,,,,,पता है मुझे छोड़कर वह किसी दीवानी से शादी कर रहा है,,,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मैंने उसे कितना प्यार किया था,,,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने पहले चौंककर कहा और फिर एकदम से अनिकेत को याद कर रोने लगी
सुरभि की बहकी बहकी बातें सुनकर अवनि समझ गयी कि जरूर आज होली पर उसने भांग पीया है जैसा वह होली किया करती थी। उसने सुरभि को समझाते हुए कहा,”सुरभि ! सुरभि ऐसे रोते नहीं ,जाने दो अनिकेत को तुम्हे उस से भी अच्छा लड़का मिलेगा। देखो अभी तुम होश में नहीं हो इसलिए तुम थोड़ी देर के लिए सो जाओ मैं तुम्हे शाम में फोन करती हूँ,,,,,,,,,ठीक है अपना ख्याल रखना”
“हम्म्म ठीक है तुम फोन करोगी न ?”,सुरभि ने सुबकते हुए कहा
“हाँ मैं फोन करुँगी,,,,,,,,,बाय”,अवनि ने कहा और फोन काट दिया। उसने फोन साइड में रखा और खुद से ही कहा,”बेचारी सुरभि ! जब से अनिकेत उस से दूर हुआ है कितनी उदास हो गयी है। हे महादेव ! सुरभि की जिंदगी में भी कोई अच्छा सा हमसफ़र भेज दो जो उसे सम्हाल सके,,,,,,,,,,,,,,प्लीज प्लीज प्लीज”
( क्या लता करेगी रवि जी के फैसले का विरोध और जतायेगी अब भी अवनि से नाराजगी ? भांग पीने के बाद क्या पृथ्वी करेगा कोई गड़बड़ ? क्या महादेव भेजेंगे सुरभि की जिंदगी में कोई हमसफ़र या पहले ही हो चुकी है उसकी एंट्री ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
