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Pasandida Aurat Season 2 – 80

Pasandida Aurat Season 2 – 80

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

रातभर अवनि बैचेनी से करवटें बदलती रही और ठीक से सो नहीं पायी। सुबह वह जल्दी उठ गयी ताकि कोई उसे बालकनी में सोते ना देख ले। अवनि ने सर पर साड़ी का पल्लू लिया और हॉल में चली आयी। सभी घरवाले हॉल में जमा थे तभी डोरबेल बजी। हिमांशु ने आकर दरवाजा खोला तो सामने खड़े पृथ्वी को देहकर हैरान रह गया और कहा,”अरे पृथ्वी तुम यहाँ,,,,,,,,,,,,,!!!”


पृथ्वी ने कोई जवाब नहीं दिया उसके चेहरे पर कठोर भाव थे उसने हिमांशु को साइड किया और अंदर चला आया। पृथ्वी को देखकर अवनि का दिल धड़क उठा और बाकि सब हैरान थे कि पृथ्वी सुबह सुबह  यहाँ क्यों चला आया जबकि उसे यहाँ आने की मनाही थी। चाचा चाची मोहित हिमानी पहले से  यहाँ मौजूद थे बाकि हिमांशु का पूरा परिवार वहा था शिवाय नीलम भुआ के क्योकि वे अभी तक सोकर नहीं उठी थी।
“अरे पृथ्वी ! तू यहाँ क्यों चला आया ?”,बड़ी मम्मी ने कहा


“मैं अवनि को वापस ले जाने आया हूँ”,पृथ्वी ने कठोरता से कहा
हिमांशु ने पृथ्वी को गुस्से में देखा तो वह समझ गया जरूर कुछ बात हुई है इसलिए वह पृथ्वी के पास आया और उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”क्या बात है पृथ्वी कुछ हुआ है क्या ?”
पृथ्वी ने हिमांशु की तरफ देखा और कहा,”ये आप मुझसे पूछ रहे है हिमांशु भैया ? अवनि को अपने साथ इस घर में आप लेकर आये थे , आपने कहा था आप इसका ख्याल रखेंगे , ये ख्याल रखा आपने ?”


हिमांशु को कुछ समझ नहीं आया वह हैरानी से पृथ्वी तो कभी अवनि को देख रहा था और अवनि खामोश आँखों से पृथ्वी को।
“पृथ्वी ! आखिर बात क्या है ?”,बड़े पापा ने कहा
“बात ये है बड़े पापा कि आप लोग अवनि को पसंद नहीं करते ये जानने के बाद भी मैंने इसे यहाँ आप लोगो के बीच भेजा और आप लोगो ने इसके साथ गैर जैसा बर्ताव किया,,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने दुखी स्वर में कहा


“ये तुम क्या कह रहे हो पृथ्वी ?”,चाचा ने हैरानी से कहा जबकि बीती रात ही उन्होंने बड़े पापा के साथ बैठकर अवनि और पृथ्वी को अपनाने और वापस घर बुलाने की बाते की थी फिर वे अवनि के साथ गैरो जैसा बर्ताव कैसे कर सकते थे ?
“आखिर हम लोगो ने ऐसा क्या किया है जो तू ऐसी बात कर रहा है पृथ्वी ?”,इस बार बड़ी मम्मी ने कहा
“अपमान किया है आप सबने मिलकर मेरी मेरी पत्नी का”,पृथ्वी ने थोड़ा तेज आवाज में कहा। उसकी आवाज अंदर तक गयी तो बाहर शोर शराब सुनकर नीलम की नींद खुली और वह भी बाहर चली आयी।


पृथ्वी ने एक नजर सबको देखा और फिर दुखी स्वर में कहने लगा,”अपमान किया है आप सबने अवनि का , उसे घर की बहू मानकर बुलाया जरूर लेकिन किसी ने उसे बहू स्वीकार नहीं किया।

इस घर में सब कुछ है किसी चीज की कोई कमी नहीं लेकिन अवनि के लिए खाना नहीं था , इतने कमरे इतने बिस्तर होने के बाद भी इसके सोने के लिए जगह  नहीं थी आप लोगो के पास,,,,,,,,,,क्या कोई बताएगा कल रात अवनि वहा बालकनी में जमीन पर क्यों सो रही थी ?”


 पृथ्वी की बात सुनकर सबने हैरानी से एक दूसरे को देखा क्योकि सबको लगा अवनि थक गयी है इसलिए नीलम के कमरे में सोने चली गयी है। नीलम भुआ ने जब देखा कि उनका झूठ सामने आने वाला है तो उन्होंने पृथ्वी को ही फटकारते हुए कहा,”पृथ्वी ! सुबह सुबह ये क्या तमाशा लगा रखा है तुमने , तुम्हे क्या लगता है हम सब तुम्हारी पत्नी के बुरा बर्ताव करेंगे,,,,,,,,,,!!!!”


“आप चुप रहिये ! सच क्या है ये मैं भी जानता हूँ और आप भी,,,,,,,,,,आप सबने मिलकर उसे कितने ताने मारे , उलटी सीधी बातें वो चुप रही। घर के सारे गंदे बर्तन अकेले मांजती रही वो तब भी चुप रही , उसे बालकनी में जमीन पर सोने को कहा गया वो तब भी चुप रही और,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,इतना कहकर पृथ्वी किचन में गया और कुछ देर बाद वापस आया उसके हाथ में एक प्लेट में वही पुरानी बची हुई एक रूखी सुखी रोटी थी जिसे दिखाकर पृथ्वी ने कहा,”और जब उसके लिए खाना नहीं बचा और उसे ये खाने को दिया गया वो तब भी चुप रही,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”


पृथ्वी की बात सुनकर सब खामोश हो गयी और अवनि की आँखों में आँसू भर आये उसकी पृथ्वी से नजरें मिलाने की हिम्मत तक नहीं हो रही थी क्योकि वह जानती थी अगर उसने पृथ्वी की तरफ देखा तो वह रो देगी और अवनि इस वक्त कमजोर पड़ना नहीं चाहती थी।
नीलम भुआ ने जब सुना तो पृथ्वी को देखने लगी पृथ्वी ने नीलम भुआ की तरफ देखा और कहा,”आप जानना चाहती है मुझे ये किसने बताया ?”


“भाई को ये सब बाते मैंने बताई थी,,,,,,,,!”,मोहित ने आगे आकर कहा क्योकि बीती रात से वह अवनि के साथ हुई हर ज्यादती नोटिस कर रहा था और जब उसने देखा कि अवनि चुपचाप सब सहन कर रही है तो उसने ये बात सीधा पृथ्वी को बता दी
“पृथ्वी तुम जैसा समझ रहे हो वैसा कुछ नहीं है,,,,,,,,,,,,,हम सब अवनि पसंद करते है और किसी ने उसे साथ कोई ज्यादती नहीं की है ,, तुम्हे शायद कोई गलतफहमी हुई है”,बड़े पापा ने कहा


“मैं सब समझ रहा हूँ और बहुत समझ रहा हूँ बड़े पापा ,अरे घर के नौकरो के साथ भी इतना बुरा बर्ताव नहीं किया जाता जितना आप सबने अवनि के साथ किया है,,,,,,,,,,ये खाना दिया आप लोगो ने इसे ,ये खाना , आप खुद बताईये बड़े पापा क्या ये खाने लायक है ? कोई जानवर भी इसे नहीं खायेगा फिर भी इसने इसे खाया ताकि आप सबकी शिकायते दूर कर सके,,,,,,,,रातभर वो वहा जमीन पर सोती रही ताकि आप लोगो को शिकायत का मौका न मिले,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने तकलीफभरे स्वर में कहा


पृथ्वी की बाते सुनकर सब चुप हो गए और धीरे धीरे सबको अहसास हुआ कि गलती तो उनसे हुई है। उन्होंने बीती रात ध्यान ही नहीं दिया अवनि असल में है कहा बस नीलम भुआ और बाकि सबने जो कहा वो मान लिया।

सबको खामोश देखकर पृथ्वी ने हाथ में पकड़ी प्लेट को साइड में रखा और कहा,”अगर आप लोग उसे नहीं अपना सकते तो आप लोगो को उसे दुःख देने का , जलील करने का , उसके मन को ठेस पहुंचाने का कोई हक़ नहीं है। भाड़ में गयी आपकी रस्म और रिवाज मैं अभी और इसी वक्त अवनि को यहाँ से लेकर जा रहा हूँ,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“पृथ्वी शांत हो जाओ जो कुछ हुआ वो अनजाने में हुआ”,चाचा ने कहा


“अनजाने में ये चीज चाची के साथ क्यों नहीं हुई ,साक्षी भाभी के साथ क्यों नहीं हुई ? आप में से किसी को भी उसका दिल दुखाने का हक़ नहीं है चाचा,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने गुस्से से कहा और आज पहली बार वह चाचा की आँखों में आँखे डालकर बात कर रहा था
नीलम ने देखा तो पृथ्वी की बाँह पकड़कर उसे दूर किया और कहा,”ए पागल हो गया है तू , अपने से बड़ो से ऐसे बात करेगा ? वो भी इस लड़की के लिये”


पृथ्वी ने सुना तो गुस्से से नीलम की तरफ देखा और चिल्लाकर कहा,”लड़की नहीं है वो ,पत्नी है मेरी , शादी की है मैंने उस से और प्यार करता हूँ मैं उस से,,,,,,,
और अगर अब किसी ने अवनि के लिए एक और शब्द गलत कहा तो मैं भूल जाऊंगा मैं कहा खड़ा हूँ,,,,,,,,,,,,,,!!!


पृथ्वी को गुस्से में देखकर सब खामोश हो गए वही हिमांशु को मन ही मन बहुत बुरा लग रहा था उसके रहते इतना सब हुआ और उसे पता तक नहीं चला जबकि ये सारा किया धरा नीलम भुआ का था। अवनि ने नम आँखों से पृथ्वी की तरफ देखा इतने लोगो के बीच उसे अपना सिर्फ एक पृथ्वी नजर आ रहा था और उस पर पल अवनि को अहसास हुआ कि हां उसे पृथ्वी से प्यार हो गया है।

पृथ्वी ने सबको एक नजर देखा उसकी आँखों मे गुस्से की जगह अब आँसुओ ने ले ली थी। वह मायूसी भरे स्वर में कहने लगा,”आखिर क्या गलत किया मैंने अपनी मर्जी से शादी की ये ? और अगर ये गलती है तो फिर इसकी सजा आप लोग मुझे दीजिये उसे क्यों दे रहे है ? उसने पहले ही अपनी जिंदगी में बहुत कुछ देखा है ,बहुत कुछ सहा है अगर आप लोग उसे परिवार का प्यार नहीं दे सकते तो कम से कम उसे जलील तो मत कीजिये।

जानता था आप लोगो का दिल नहीं पिघलेगा फिर भी मैंने उसे यहाँ आने दिया क्योकि उसे लगता था आप लोग उसे अपना लेंगे,,,,,,,,,,आप लोगो ने जो किया है वो ये डिजर्व नहीं करती थी,,,,,,आप लोगो को ताने मारने है मुझे मारिये ,सजा देनी है मुझे दीजिये जो करना है मेरे साथ कीजिये लेकिन उसे कुछ मत कहिये,,,,,,,,,,,मैं नहीं देख पाऊंगा”


कहते कहते पृथ्वी रोआँसा हो गया। उस से आगे कुछ बोला ही नहीं गया ,उसका गला रुंधने लगा और उसने महसूस किया जैसे वह अब रो देगा। पृथ्वी ने अपने शर्ट की बाँह से अपनी आँखों को साफ किया और अवनि की तरफ आकर उसका हाथ थामकर कहा,”चलो अवनि ! तुम्हे यहाँ रुकने की कोई जरूरत नहीं है,,,,,,,,,,,आज से तुम्हारा परिवार मैं हूँ और मेरे होते तुम्हे किसी की जरूरत नहीं है”


अवनि ने सुना तो आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये। जिस मजबूती से पृथ्वी ने उसका हाथ पकड़ा था उसने महसूस किया दुनिया में इस से ज्यादा सुरक्षित जगह जैसे उसके लिए अब दूसरी कोई नहीं है और यही वो पल था जब अवनि ने महसूस किया कि उसे पृथ्वी से मोहब्बत है,,,,,,,,,,,,,!!!”
किसी ने पृथ्वी को नहीं रोका ना ही किसी में उसे रोकने की हिम्मत थी। अवनि का हाथ थामे पृथ्वी घर की दरवाजे की तरफ बढ़ गया।

जाते जाते वह रुका और पलटकर कहा,”और एक बात और अवनि अनाथ नहीं है , मैं हु इसके साथ मैं इसे पति बनकर प्यार भी दूंगा और पिता बनकर इसका ख्याल भी रखूंगा,,,,,,,,,,,मैं दिखाऊंगा आप सबको कि मैं अकेले होकर भी इसका परिवार बनने की हिम्मत रखता हूँ,,,,,,,!!”


पृथ्वी अवनि की तरफ पलटा और उसे वहा से लेकर चला गया। नीलम भुआ ने उन दोनों को जाते देखा और मुँह बनाकर हॉल में सबके बीच आकर कहा,”हाह ! हिम्मत तो देखो उस छोकरे की आप सबका मुँह बंद करवा कर चला गया ,अरे बावला हो गया है उस लड़की के पीछे,,,,,,,,,,!!”
“तुम चुप रहो नीलम और मुझे ये बताओ कि तुम में से किसने अवनि के साथ बदसुलूकी की थी ?”,बड़े पापा ने गुस्से से कहा


“हाँ कुछ तो हुआ है कल वरना घर की बहू को ये खाना क्यों खाना पड़ता और जमीन पर सोना क्यों पड़ता ? गीता क्या तुमने अवनि से कुछ कहा था ?”,चाचा ने भी गुस्से से पूछा
“नहीं जी ! मैं तो होलिका दहन के बाद उस से मिली भी नहीं थी , पूरा वक्त इनके साथ थी”,चाची ने नीलम भुआ की तरफ इशारा करके कहा
“लेकिन अवनि से वहा सोने के लिए कहा किसने ?”,हिमांशु ने कहा


“मोहित तुम बताओ सच क्या है ?”,बड़े पापा ने मोहित से कहा तो मोहित ने सब घरवालों के सामने नीलम की पोल खोल दी और सब गुस्से और अफ़सोस वाले भाव लेकर नीलम भुआ को देखने लगे।
“आप सब लोग मुझे ऐसे क्यों देख रहे है ? अरे मैं तो बस उसे आजमा रही थी मुझे क्या पता था वो इतनी कमजोर निकलेगी”,नीलम भुआ ने मुँह बनाकर कहा


“कमजोर वो नहीं कमजोर तुम्हारी सोच है नीलम ! जब हम सब पृथ्वी को माफ़ कर उसकी पत्नी को अपना चुके है तो फिर तुम्हे उसे से क्या परेशानी थी , तुमने उसके साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया ? आखिर वो भी इस घर की बहू है”,बड़े पापा ने नीलम भुआ को फटकारते हुए कहा
बड़ी मम्मी , चाचा और चाची ने भी नीलम भुआ को खूब सुनाया और साथ ही रही सही कसर साक्षी ने पूरी कर दी कि कैसे नीलम भुआ ने उसे अवनि को लेकर झूठ कहा था।

नीलम भुआ शर्मिन्दा होकर सब सुनती रही और फिर रोते हुए वहा से चली गयी। बड़े पापा सोफे पर आ बैठे और अफ़सोस भरे स्वर में कहा,”अब लता और रवि को हम लोग क्या जवाब देंगे ?”
“चिंता मत कीजिये दादा शाम में उनके घर चलकर उन्हें सारी बाते समझायेंगे और अब तो हम सब पृथ्वी और अवनि को माफ़ कर अपना ले उसी में सबकी भलाई है वरना कही इन गलतफहमियों के चलते पृथ्वी अपने परिवार से हमेशा के लिए दूर ना हो जाये”,चाचा ने भी बगल में बैठते हुए कहा


“पंकज सही कह रहा है आज शाम रवि से मिलकर फैसला कर लीजिये और जब पृथ्वी का गुस्सा शांत हो जाये तो उसे मनाकर घर ले आईये”,बड़ी मम्मी ने कहा तो बड़े पापा ने हामी में गर्दन हिला दी।
चाची और साक्षी ने सुना तो दोनों एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुरा दी। हिमांशु उदास होकर वहा से चला गया क्योकि पृथ्वी से उसने जो वादा किया था उसे निभा ना सका

सिरोही , राजस्थान
सुबह सुबह पूरी सोसायटी में सभी रंगो से भरे होली का आनंद ले रहे थे। सिद्धर्थ जींस और सफ़ेद शर्ट पहनकर अपने कमरे में बैठा फोन की स्क्रीन देख रहा था। ना जाने क्यों उसे सुरभि के मैसेज का इंतजार था जबकि आखिर बार सुरभि ने जाते जाते उस से कहा था कि वह अब दोबारा उसकी शक्ल भी नहीं देखना चाहती। सिद्धार्थ ने फोन साइड में रख दिया और ख़ामोशी से सामने दिवार को देखने लगा। उसे सुरभि से बहस करना ,उसकी परवाह करना , उसे गुस्सा दिलाना याद आने लगा।

बीती शाम ही सुरभि ने उसे फोन किया था लेकिन वो फोन सिद्धार्थ के लिए नहीं था बल्कि वह तो बस अनिकेत को जलाना चाहती थी इसलिए उसने सिद्धार्थ से वो प्यार भरी बाते की। सिद्धार्थ ना चाहते हुए भी बार बार उसे याद कर रहा था कि तभी उसका फोन बजा। स्क्रीन पर न्यू मेसेज देखकर सिद्धार्थ का दिल धड़का और उसने जैसे ही मैसेज खोलकर देखा उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी।


मैसेज सुरभि का ही था जिसमे लिखा था “Happy Holi सिद्धू , तुम सोच रहे होंगे कि मैं , मैं द सुरभि शर्मा तुम्हे होली विश क्यों कर रही हूँ ? क्योकि तुम से ज्यादा बदलते रंग मैंने आज तक किसी के नहीं देखे सो तुम ये विश डिजर्व करते हो”
सुरभि ने सिद्धार्थ को होली तो विश की लेकिन साथ ही साथ ताना भी मार दिया लेकिन सिद्धार्थ को बुरा नहीं लगा बल्कि वह मुस्कुराया और जवाब में सुरभि को लिखकर भेजा “Happy Holi सो तुम्हे मेरा कोई रंग पसंद आया या नहीं ?”


सिद्धार्थ के भेजे मैसेज का सुरभि ने कोई जवाब नहीं दिया और ऑफलाइन हो गयी इसलिए सिद्धार्थ ने अपना फोन वही बिस्तर पर छोड़ा और होली खेलने बाहर चला आया। उसने सामने टेबल पर पड़े रंगो को अपने दोनों हाथो की मुट्ठी में भरा और मुस्कुराते हुए हवा में उड़ा दिया। बाहर सबके साथ खड़े गिरिजा और जगदीश जी ने सिद्धार्थ को देखा और फिर हैरानी से एक दूसरे को देखा क्योकि आज से पहले उन्होंने सिद्धार्थ को होली खेलते नहीं देखा था लेकिन उन्हें क्या पता ये रंग होली का नहीं किसी के प्यार का था जो धीरे धीरे सिद्धार्थ पर चढ़ रहा था।

आनंद निलय अपार्टमेंट ,पनवेल
पृथ्वी अवनि को लेकर अपने घर चला आया। अंदर आकर पृथ्वी ने अवनि से कहा,”जाओ नहा लो”
अवनि ने कुछ नहीं कहा वह सीधा अपने कमरे में चली गयी। उसने कपडे लिए और नहाने चली गयी। पृथ्वी उदास था और उस से भी ज्यादा अंदर ही अंदर दुखी था उसे इस बात का मलाल था कि उसने अवनि को वहा जाने क्यों दिया ? वह बालकनी में चला आया और उदास सा बाहर देखने लगा। इस वक्त उसके जहन में ना जाने कितनी ही बाते चल रही थी जिनका जवाब उसके पास नहीं था।


अवनि नहाकर आयी आज होली थी इसलिए उसने सफ़ेद रंग का सूट पहन लिया। बालों को गूंथकर चोटी बना ली। आँखों में काजल ,होंठो पर लाली और ललाट पर बिंदी लगाकर माँग में सिंदूर लगा लिया। हिमांशु के घर में जो कुछ हुआ उसका अवनि को कोई मलाल नहीं था ना ही ख्याल उसकी आंखों में सामने तो बस बार बार पृथ्वी का चेहरा आ रहा था साथ ही कानों में गूँज रहे थे पृथ्वी के कहे शब्द ,,,,,,,,,,,,,,आईने में खुद को देखते हुए अवनि कभी मुस्कुराती तो कभी खो जाती , उस घर से लौटने वाली अवनि आज कुछ अलग ही नजर आ रही थी।

उसने दुपट्टा गले में डाला और बाहर आयी तो देखा पृथ्वी बालकनी में खड़ा है। हॉल में पड़ी टेबल पर प्लेट दिखी जिस में लाल रंग का गुलाल रखा था ये शायद पृथ्वी ही लेकर आया था। अवनि ने उसे उठाया और पृथ्वी के सामने आ खड़ी हुई। पृथ्वी ने उदास आँखों से अवनि को देखा उसके पास अवनि से कहने के लिए बहुत कुछ था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी वह अवनि से कैसे बात करे तभी अवनि ने कहा,”आप मुझे रंग नहीं लगाएंगे ?”


आज पहली बार अवनि ने पृथ्वी को “आप” कहकर पुकारा था पृथ्वी ने सुना तो उसका दिल धड़क उठा उसे याद आया जब अवनि ने कहा,“ठीक है जिस दिन ये सब ठीक हो जाएगा और तुम्हारे घरवाले मुझे अपना लेंगे मैं तुम्हे ये हक़ जरूर दूंगी” पृथ्वी ने अपने हाथो में थोड़ा सा रंग लिया और अवनि के गालों पर लगा दिया। अवनि बस प्यार भरी नजरो से पृथ्वी को देखते रही। उसने हाथ में पकड़ी प्लेट पृथ्वी को थमा दी और उसमे से थोड़ा रंग लेकर पृथ्वी के पैरों में जा बैठी। उसने अपने दोनों हाथो के पृथ्वी के पैरो पर रखा और हाथो में लगा रंग पैरों में लगा दिया।

ये देखकर पृथ्वी की आँखों में भरे आँसुओ की एक बूँद टपककर अवनि की माँग के सिंदूर में जा गिरी

हाँ तो अब आप लोगो बताईये कि अवनि ने पृथ्वी के पैरो पर रंग क्यों लगाया और पृथ्वी की आँखों में आँसू क्यों आये ?

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संजना किरोड़ीवाल

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