Pasandida Aurat Season 2 – 74
नीलेश भरत का अपना बेटा है ये बात भरत ने ऑफिस में सबसे छुपाकर रखी। भरत के इरादे बहुत ही गलत थे वह अपने बेटे नीलेश के साथ मिलकर मिस्टर देसाई की कम्पनी को हथियाना चाहता था और इसीलिए उसने खुद मिस्टर देसाई का मैनेजर बनना स्वीकार किया और अपने बेटे नीलेश को प्राची का मैनेजर बना दिया जिस से उसे हर तरफ की खबर मिलती रहे लेकिन प्राची के साथ रहते रहते नीलेश को कब उस से प्यार हो गया नीलेश को पता ही नहीं चला।
नीलेश प्राची को चाहता था लेकिन प्राची के लिए नीलेश के प्यार की कोई अहमियत नहीं थी वह उसे जरा सा भी भाव नहीं देती थी और आज तो बीच सड़क नीलेश की बेइज्जती कर प्राची ने ये साबित कर दिया कि नीलेश उसके लिए उसकी कम्पनी में काम करने वाला बस एक मामूली सा मैनेजर है।
नीलेश को खामोश देखकर भरत ने कहा,”जाओ जाकर अपना हुलिया सुधारो और मुझे ऑफिस में आकर मिलो,,,,,,,,,,,तुम्हारी एक बेवकूफी की वजह से मैं करोडो की कम्पनी को अपने हाथ से जाने नहीं दे सकता”
“और अगर मैं आज के बाद ऑफिस आने से मना कर दू तो”,नीलेश ने डरते डरते कहा
भरत ने सुना तो गुस्से से उसकी भँवे तन गयी और उसने नीलेश के सामने आकर कहा,”तो मैं तुम्हे लात मारकर अपने घर से बाहर निकाल दूंगा , अपनी माँ को तो तुम पैदा होते ही खा गए लेकिन अब मैं तुम्हे मेरी खुशियों को खाने नहीं दूंगा,,,,,,,,,,,,,समझे तुम ,चुपचाप मुझे ऑफिस आकर मिलो”
कहकर भरत वहा से चला गया और जाते जाते दरवाजा जोर से बंद कर दिया। नीलेश उन्हें जाते देखता रहा उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह मायूस चेहरा लिए सोफे पर आ बैठा और अपना सर झुका लिया।
अब तक वह अपने पापा भरत के हिसाब से जिंदगी जीता आ रहा था क्योकि उसका एकमात्र सहारा वही थे। उन्होंने ही उसे पाल पोसकर बड़ा किया , पढ़ाया लिखाया और इस काबिल बनाया कि आज वह एक इतनी बड़ी मल्टीनेशनल कम्पनी का मैनेजर था लेकिन धीरे धीरे उसे समझ आ रहा था कि ये सब उसके पापा ने अपने फायदे के लिए किया , उसका इस्तेमाल किया और वह होता रहा बिना इसी परवाह किये की आगे इन सब का अंजाम क्या होगा ?
हिमांशु का घर , पनवेल
साक्षी अवनि को अपने कमरे में ले आयी जहा हिमांशु पहले से मौजूद था और अपने ऑफिस का कुछ काम कर रहा था। उसने जब अवनि को देखा तो उठते हुए कहा,”तुम दोनों आराम से यहाँ बैठो मैं दूसरे कमरे में चला जाता हूँ”
हिमांशु के जाने के बाद कमरे में मौजूद साक्षी और हिमांशु की बेटी मीशू ने कहा,”मम्मा ! ये कौन है ?”
“ये तुम्हारी चाची है,,,,,,,,,,तुम्हारे पृथ्वी चाचा की बायको”,साक्षी ने कहा
“उनकी शादी कब हुई ?”,मीशू ने कहा
“अह्ह्ह्ह शादी हो गयी तभी तो चाची यहाँ है”,साक्षी ने कहा
“तो फिर चाचा ने शादी में मुझे क्यों नहीं बुलाया ?”,मीशू ने फिर कहा तो अवनि मुस्कुरा उठी। अब साक्षी उसकें सवालो का क्या जवाब देती इसलिए उसे बहलाते हुए कहा,”क्योकि वो बड़ो की शादी थी न इसलिए बच्चे वहा अलॉउड नहीं थे,,,,,,,,,,!!!”
“ठीक है फिर जब मैं शादी करूंगी ना तब मैं भी उन्हें अपनी शादी में नहीं बुलाऊंगी”,मीशू ने अपने हाथो को आपस में बांधकर गुस्सा होते हुए कहा
गुस्सा करते हुए वह इतनी प्यारी लग रही थी कि अवनि उसे देखकर मुस्कुरा उठी। मीशू ने देखा तो अवनि के पास आयी और कहा,”आप स्माइल क्यों कर रही है ?”
अवनि घुटनो के बल बैठी और मीशू का गाल थपथपा कर कहा,”क्योकि आप बहुत प्यारी है”
“आप भी बहुत प्यारी है”,कहते हुए मीशू ने अवनि का गाल थपथपाया और वहा से चली गयी। अवनि हंस पड़ी और उठकर साक्षी के सामने चली आयी। साक्षी ने अवनि से बैठने को कहा तो अवनि बिस्तर के एक कोने पर आ बैठी
“अवनि ! मम्मी जी और नीलम भुआ की बातो का बुरा मत मानना। मैं जानती हूँ तुम्हारे लिए ये सब मुश्किल होगा लेकिन बस तुम थोड़ा सब्र रखना , देखना एक दिन ये सब तुम्हे अपना लेंगे और माफ़ भी कर देंगे। पृथ्वी और तुम्हे लेकर इन सब के मन में अभी भी थोड़ी शिकायते बची है जो शब्द बनकर बाहर आ रही है।
इनकी बातो को तुम बस दिल पर मत लेना”,साक्षी ने अवनि का हाथ अपने हाथो में लेकर प्यार से कहा
अवनि ने सुना तो दूसरे हाथ से उनके हाथ को छुआ और कहा,”अपनों की बातों का क्या बुरा मानना भाभी ! मैं तो आपको सब को उसी दिन अपना परिवार मान लिया था जिस दिन मैंने उनका हाथ थामा था। हाँ जानती हूँ कि हमने जो किया उस से सब नाराज है और इन सबकी नाराजगी भी जायज है लेकिन मुझे यकीन है जिस दिन ये उनकी भावनाओ को समझेंगे उस दिन उन्हें माफ़ कर देंगे”
“तुम बहुत समझदार हो अवनि , अच्छा अपने बारे में कुछ बताओ ना , तुम और पृथ्वी कैसे मिले ? कहा मिले ? शादी तक बात कैसे पहुंची ?”,साक्षी ने आँखों में चमक भरकर पूछा
साक्षी का सवाल सुनकर अवनि के जहन में पृथ्वी की कही बात आयी “वहा कोई भी तुमसे हमारी कहानी के बारे में पूछे तो कुछ मत बताना और कहना पृथ्वी से पूछो , मैं नहीं चाहता ये सब सुनकर वहा कोई तुम्हारे बारे में अपनी राय बनाये”
अवनि को खोया देखकर साक्षी ने कहा,”क्या हुआ ! कहा खो गयी ? देखो तुम नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं,,,,,,,,,,,तुम थोड़ा रेस्ट कर लो फिर शाम में पूजा के लिए भी जाना होगा ना”
अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी और दिवार से पीठ लगा ली। साक्षी अवनि से बाते करते हुए कमरे में बिखरे कपडे तह करके रखने लगी और इसी से उन दोनों के बीच एक बांड बन चुका था।
सिद्धार्थ का घर , सिरोही
जगदीश जी एकटक सुरभि को देख रहे थे और उसके बोलने का इंतजार कर रहे थे तो वही सिद्धार्थ अपना दिल थामकर खड़ा था कि अब सुरभि क्या बोलने वाली है ? गिरिजा जी भी वही जगदीश जी के बगल में खड़ी परेशान सी कभी सुरभि को देखती तो कभी सिद्धार्थ को और आखिर में उन्होंने बेचैनी भरे स्वर में कहा,”बोलो बेटा ! चुप क्यों हो ?”
सुरभि ने सिद्धार्थ को एक नजर देखा और कहने लगी,”अब मैं क्या ही बोलू आंटी ! अवनि मलिक को तो आप लोग जानते ही होंगे अरे आपके बेटे की दोस्त,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ हाँ,,,,,,,,,!!!”,गिरिजा जी ने कहा
“मैं उसकी दोस्त हूँ सुरभि शर्मा , हम दोनों साथ में ही रहते थे और उसी की वजह मेरी मुलाकात एक दो बार सिद्धार्थ से हुई,,,,,,,,,,,,,ना हम दोनों दोस्त है ना ही हमारे बीच कोई रिश्ता है इन्फेक्ट जब से अवनि यहाँ से गयी है उसके बाद से तो मैं इस से कभी मिली भी नहीं,,,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने कहा
“जब मिली नहीं तो फिर उस रात तुम यहाँ कैसे पहुंची ?”,जगदीश जी जगदीश जीने कठोर स्वर में पूछा
“अच्छा वो ! वो तो उस शाम मैं घर जा रही थी और अचानक बारिश होने लगी। सिद्धार्थ भी कही से आ रहा होगा गाड़ी लेकर और एकदम से इसकी गाड़ी ने मुझे टक्कर मार दी। मैं वही सड़क पर गिर पड़ी। अब इसकी जगह कोई और होता तो भाग जाता लेकिन लड़का अच्छा है ये भागा नहीं बल्कि मुझे उठाया और गाड़ी में बैठाकर अपने घर ले आया क्योकि आपका घर पास था।
घर आते ही बारिश फिर शुरू हो गयी और मुझे यही रुकना पड़ा लेकिन आपकी वो पड़ोसन ने मुझे सुबह यहाँ देख लिया और आपके कान भर दिए,,,,,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने अपनी तरफ से ही कोई कहानी बनाकर सुना दी और वो भी इतने विश्वास से भरकर सुनाई की जगदीश जी गिरिजा को देखने लगे।
सिद्धार्थ ने देखा सुरभि कुछ भी बकवास कर रही है तो उसने इशारो इशारो में सुरभि से पूछा और सुरभि ने हाथ उसकी तरफ करके उसे रुकने का इशारा किया।
वह जगदीश जी की तरफ पलटी और कहा,”अंकल ! अभी मैंने जो कहा वही सच है ! आप लोग सिद्धार्थ जैसे अच्छे ,सीधे-साधे ,संस्कारी लड़के पर शक कैसे कर सकते है ? अरे आपको अपनी परवरिश पर शक है क्या ? नहीं अगर है तो बताईये मुझे,,,,,,,,,,,,और वो आपकी पड़ोसन उसने जब मेरी शक्ल देखी ही नहीं तो उसे कैसे पता यहाँ एक लड़का लड़की के बीच क्या हुआ ?
जरुरी है एक लड़का लड़की एक घर में एक रात साथ रुके हो तो वो गलत हो , हो सकता है वो दोनों एक दूसरे की शक्ल तक देखना ना चाहते हो फिर भी मज़बूरी में उन्हें साथ रहना पड़ा हो,,,,,,,,,,,,,,अंकल आंटी आप मानिये ना मानिये ,मैं यहाँ आयी थी ,रुकी थी और सुबह चली गयी लेकिन इन सब में सिद्धार्थ की कोई गलती है आप लोग खामखा उस बेचारे पर शक कर रहे है,,,,,,,,,,,,,,,,,आप लोग कन्विंस हो गए या मैं और बोलू ?”
सुरभि ने ये सारी बातें इतनी फटाफट कही कि जगदीश जी और गिरिजा जी हैरानी से आपस में ही एक दूसरे को देखने लगे और फिर जगदीश जी ने कहा,”ठीक है तुम्हारी बात पर यकीन है लेकिन बेटा आगे से ऐसे किसी भी लड़के के घर मत रुकना , तुम अकेली लड़की हो लोग देखेंगे तो गलत समझेंगे”
सुरभि ने सुना तो एकदम से जगदीश जी के पास आकर कहा,”आप कितने समझदार है लेकिन आपका ये लड़का ये एक नंबर का चू,,,,,,,,,,मेरा मतलब गधा है , अगर यहाँ लेकर आने के बजाय ये मुझे मेरे घर छोड़ देता तो ना आपकी पड़ोसन मुझे देखती ना आप लोग इस बेचारे की बेंड बजाते,,,,,,,,,,,,अच्छा अंकल अब मैं चलती हूँ,,,,,,,,,,,मुझे अभी और ट्रेवल करना है ,, बाय अंकल ,बाय आंटी”
“ह्म्म्मम्म,,,,,,,!!!”,जगदीश जी ने कहा क्योकि सुरभि जैसी अजीब लड़की वे पहली बार देख रहे थे और अब तो खुद उन्हें भी पूरा यकीन हो गया कि सिद्धार्थ और सुरभि के बीच कोई रिश्ता नहीं है।
जगदीश जी के सामने से हटकर सुरभि सिद्धार्थ के पास आयी और बड़े प्यार से कहा,”आप जरा मुझे दरवाजे तक छोड़ेंगे ?”
“अह्ह्ह्ह हाँ ! मैं अभी आया”,सिद्धार्थ ने अपनी मम्मी की तरफ देखकर कहा और सुरभि के साथ हॉल से बाहर चला गया।
घर के दरवाजे पर आकर सुरभि ने इतरा कर कहा,”कैसी लगी मेरी एक्टिंग ?”
“तुम पागल हो क्या ? मैंने तुम्हे कार से टक्कर मारी ऐसी झूठी कहानी क्यों बनायीं तुमने उनके सामने ?”,सिद्धार्थ ने अपने दाँत पीसकर कहा
“ओह्ह्ह्हह्ह तो क्या मैं उनके सामने खुद को बेवडी बता देती , उनसे ये कहती कि अंकल मैंने बहुत ज्यादा शराब पी ली थी और मैं होश में नहीं थी इसलिए सिद्धार्थ मुझे अपने घर ले आया,,,,,,,,,,,,,,He is so caring,,,,,हाह माय फुट ! इसके बाद क्या इज्जत रह जाती मेरी उनकी नजरो में कि ओह्ह्ह लड़की शराब भी पीती है”,सुरभि ने अपने हाथो को नचाते हुए कहा
“ओहके फाइन ! अब जाओ यहाँ से और आज के बाद मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने सुरभि के सामने अपने हाथ जोड़कर कहा
“हाह ! तुम कितने रुड हो , एक तो मैंने तुम्हारी हेल्प की और तुम मुझसे ऐसे बात कर रहे हो,,,,,,,,,,,,अरे मैं क्या तुम्हे अपनी शकल दिखाउंगी , मैं खुद तुम्हारी शक्ल देखना नहीं चाहती,,,,,,,,,,,और इस बार मेरे सामने आये न तो सच में तुम्हारा मुँह तोड़ दूंगी”
कहकर सुरभि वहा से चली गयी। सिद्धार्थ ने उसे जाते हुए देखा और कहा,”अच्छा सुनो”
सुरभि जाते जाते गुस्से से पलटी और कहा,”अब क्या है ? देखो मैं तुम्हे कोई सॉरी वोरी नहीं बोलने वाली समझे”
सिद्धार्थ मुस्कुराया और कहा,”यहाँ आने के लिए थैंक्यू”
सुरभि ने जैसे ही सुना उसका गुस्सा एकदम से शांत हो गया ,वह मन ही मन मुस्कुराई लेकिन बाहर से मुँह बनाकर वहा से चली गयी।
सिद्धार्थ उसे जाते देखकर मुस्कुराता रहा। सुरभि के जाने के बाद वह जाने के लिए जैसे ही पलटा गिरिजा को वहा देखकर उसके होंठो से मुस्कुराहट एकदम से गायब हो गयी।
“क्या चल रहा है ये सब ?”,गिरिजा ने पूछा
“क्या , क्या चल रहा है ? कुछ भी तो नहीं”,सिद्धार्थ ने कहा
“अच्छा ! तो फिर तुम उस लड़की को देखकर मुस्कुरा क्यों रहे थे ?”,गिरिजा ने पूछा
सिद्धार्थ ने सुना तो अफ़सोस में अपना सर झटका और कहा,”ओह्ह्ह्ह मम्मी ! प्लीज अब पापा की तरह आप मत शुरू हो जाना”
गिरिजा कुछ कहती इस से पहले सिद्धार्थ अंदर चला गया और गिरिजा भी दरवाजा बंद कर अंदर चली आयी।
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
नीलेश से मिलकर भरत वापस ऑफिस चला आया और अपने काम में लग गया। उसने देखा उसके कहने के बाद भी नीलेश ऑफिस नहीं आया है तो उसे नीलेश पर बहुत गुस्सा आया लेकिन वह ऑफिस में था और देसाई सर ने उसे काम में फंसा रखा था इसलिए उसका बाहर जाना भी मुश्किल था। शाम होते होते नीलेश ऑफिस आया। मायूस चेहरा , सूजी आँखे और काफी थका हुआ लग रहा था उसके हाथ में एक लिफाफा था। रिसेप्शन पर आकर उसने लड़की से पूछा,”प्राची मेडम ऑफिस में है क्या ?”
“हाँ वो शायद अपने केबिन में है लेकिन आप कहा चले गए थे दोपहर बाद नजर ही नहीं आये , प्राची मेडम की दो इम्पोर्टेन्ट मीटिंग थी वो भी केंसल हो गयी क्योकि आप नहीं थे और आपके बिना प्राची मेडम किसी मीटिंग में नहीं जाती है”,लड़की ने शरारती लहजे में कहा
पहले जब ऑफिस में कोई नीलेश के सामने प्राची का नाम लेता था तो नीलेश का चेहरा खिल उठता था लेकिन आज ऐसा नहीं हुआ उसने कुछ नहीं कहा और सीधा प्राची के केबिन की तरफ चला गया।
“नीलेश सर को क्या हो गया ? पहले तो इन्हे ऐसे कभी नहीं देखा”,लड़की ने साथ बैठी स्टाफ से कहा
“पता नहीं सुबह तो ठीक थे उसके बाद क्या हुआ मुझे नहीं पता ?”,दूसरी लड़की ने कहा
“हाँ वैसे भी आजकल इस ऑफिस में क्या हो रहा है किसी को नहीं पता”,कहकर पहली लड़की अपने काम में लग गयी
नीलेश प्राची के केबिन के सामने आया उसका दिल जोरो से धड़क रहा था और आँखों के सामने वही सब आ रहा था जो प्राची ने उसके साथ किया था। उसने अपना दिल मजबूत किया एक गहरी साँस ली और अंदर चला आया। उस वक्त से सोफे पर बैठी प्राची अभी तक वही बैठी थी ना वह वहा से उठी ना कही गयी। हाथ में लगा घाव भी अब सुख चुका था और हथेली पर लगा खून भी जम चुका था। वह खाली आँखों से केबिन में बनी बड़ी सी खिड़की को देखे जा रही थी।
नीलेश प्राची की तरफ आया लेकिन जब उसकी नजर फर्श पर बिखरे सामान पर पड़ी तो वह समझ गया कि यहाँ क्या हुआ होगा क्योकि पहले भी वह बहुत बार प्राची का इस तरह से गुस्सा करना देख चुका था।
नीलेश की नजर प्राची के हाथ पर पड़ी तो वह उसने अपनी जेब से रुमाल निकाला और प्राची की तरफ आकर घुटनो के बल उसके बगल में बैठा और उसके हाथ पर रुमाल बांधते हुए कहा,”ये आपने क्या किया मैडम , किसी और का गुस्सा खुद पर निकाला,,,,,,,,,!!!”
“मुझे थोड़ी देर के लिए अकेला छोड़ दो नीलेश,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने अपनी आँखे मूँदकर कहा
नीलेश ने सुना तो चुपचाप उठा और केबिन से बाहर चला आया। मिस्टर देसाई और भरत बात करते हुए सामने से चले आ रहे थे। नीलेश ने देखा तो उनकी तरफ चला आया।
नीलेश को ऑफिस में देखकर भरत की जान में जान आयी उसने नीलेश के कान के पास आकर धीरे से कहा,”मुझे पता था तुम जरूर आओगे,,,,,,,,,,,गुड”
भरत पीछे हट गया और देसाई सर के साथ आ खड़ा हुआ। नीलेश ने एक नजर भरत को देखा और फिर अपने हाथ में पकड़ा लिफाफा देसाई सर की तरफ बढ़ाकर कहा,”ये मेरा रिजाइन लेटर है सर , मैं आपकी आज और अभी से आपकी कम्पनी छोड़ रहा हूँ”
सबने सुना तो आपस में खुसर फुसर करने लगे और भरत के चेहरे का रंग उड़ गया।
( क्या भरत के नापाक इरादों में नीलेश देगा उसका साथ या अपने ही पिता का सच लाएगा मिस्टर देसाई के सामने ? पृथ्वी ने क्यों किया अवनि को अपनी प्रेम कहानी सुनाने से मना ? क्या फिर मिलेंगे सुरभि और सिद्धार्थ और इस बार कैसी होगी उनकी मुलाकात ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
Pasandida Aurat Season 2 – 74 Pasandida Aurat Season 2 – 74 Pasandida Aurat Season 2 – 74 Pasandida Aurat Season 2 – 74 Pasandida Aurat Season 2 – 74 Pasandida Aurat Season 2 – 74 Pasandida Aurat Season 2 – 74 Pasandida Aurat Season 2 – 74 Pasandida Aurat Season 2 – 74
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संजना किरोड़ीवाल
