Pasandida Aurat Season 2 – 7
पृथ्वी को अवनि को गले लगाने का अहसास अभी तक था। वह उस अहसास को मरते दम तक नहीं भूलने वाला था। पृथ्वी को खोया हुआ देखकर नकुल ने कहा,”क्या हुआ कहा खो गए ?”
“अह्ह्ह्ह कही नहीं चल अवनि के लिए कुछ कपडे देखते है”,पृथ्वी ने कहा और आगे बढ़ गया
पृथ्वी ने अवनि के लिए 2-4 जोड़ी कपडे लिए और बिलिंग एरिया में चला आया। अब पृथ्वी ठहरा लड़का आज से पहले किसी लड़की के लिए कपडे खरीदना तो दूर , लड़कियों के कपड़ो में क्या क्या वेरायटी होती है उसे तो ये तक नहीं पता था।
अवनि जैसे ड्रेसेज पहनती थी वैसे तो यहाँ मिलना मुश्किल था लेकिन पृथ्वी ने उस से मिलते जुलते कपडे ही लिए और एक अपनी पसंद का कुर्ता भी जिसका रंग हल्का हरा था। पृथ्वी ने बिल पे किया और नकुल के साथ वहा से निकल गया।
नकुल और पृथ्वी के जाने के बाद अवनि कुछ देर सोफे पर बैठी रही। उसके लिए ये घर , ये शहर , सब नया था लेकिन जैसे ही उसकी नजर हॉल में फैले सामान पर पड़ी उसने अपने बालों को समेटकर जुड़ा बनाया और दुपट्टे को कंधे से कमर की तरफ बांध लिया। सबसे पहले उसने हॉल में पड़ी सेंटर टेबल से कप प्लेट उठाये और किचन में चली आयी। अवनि ने देखा किचन में एक फ्रीज , गैस , कुछ डिब्बों और बहुत थोड़े बर्तनो के अलावा कुछ भी नहीं था। अवनि ने चाय के बर्तन धोये और देखा किचन का हाल तो हॉल से भी बुरा है।
उसने फ्रीज खोला तो पाया वह भी काफी दिनों से साफ नहीं हुआ है और उसमे रखा आधे से ज्यादा सामान खराब हो चुका है।
“तुम कितने आलसी हो पृथ्वी , अपने घर को भला कोई इतना रखता है”,अवनि ने फ्रीज की बदबू से बचने के लिए अपना नाक बंद करते हुए कहा।
वह किचन से बाहर आयी , बालकनी में रखी झाड़ू उठायी और एक बार फिर किचन में चली आयी। अवनि ने अच्छे से पुरे किचन को साफ किया , फ्रीज में रखा सामान डस्टबिन में डाल दिया बस जो सही था उसे साफ करके साइड रख दिया।
किचन के साथ साथ अवनि ने फ्रीज भी साफ कर दिया और बाहर चली आयी। किचन अब कुछ ठीक लग रहा था। अवनि हॉल में खड़ी होकर मुआयना करने लगी कि उसे कहा से सफाई शुरू करनी है। गनीमत था इस फ्लेट में ज्यादा सामान नहीं था , हॉल के बीच में सोफा सेट था , एक टी टेबल थी , उसी हॉल में एक तरफ दिवार के पास एक टेबल था जिस पर कुछ सामान बिखरा हुआ था और उसके बगल में एक बुक रैंक था जहा कुछ किताबे रखी थी। हॉल से लगकर ही एक बालकनी थी जिसमे कुछ गमले रखे थे और वे सुख चुके थे।
अवनि ने एक गहरी साँस ली और काम में लग गयी। एक घंटे में अवनि ने पूरा हॉल साफ कर दिया। उसने सोफे के कवर उतारकर उन्हें बाथरूम में डाल दिया , बुक रेंक की किताबो को साफ़ करके करीने से जमा दिया। टेबल पर बिखरे सामान को भी व्यवस्तिथ किया और पुरे घर में पोछा मारकर फर्श भी चमका दिया।
बारी थी बालकनी की अवनि ने सबसे पहले सभी गमले एक तरफ किये , बालकनी का सारा कचरा निकाला और उसे भी धोकर साफ कर दिया। बालकनी में लगे शीशे वाले रेलिंग को पोछकर साफ किया।
अवनि को पेड़ पोधो से बहुत प्यार था इसलिए वह घुटनो के बल वही बालकनी में बैठकर गमलो की सफाई करने लगी और उन्हें साफ करके , उनमे पानी देकर एक एक करके करीने से जमाने लगी। आज पहली बार इस फ्लेट की ये बालकनी खूबसूरत लग रही थी। आखरी गमला बचा था अवनि उसे साफ कर रही थी। इस दौरान बालों की एक लट उसे कुछ ज्यादा ही परेशान कर रही थी। अवनि ने मिटटी लगे हाथ से ही उसे साइड किया तो हाथ पर लगी मिटटी उसके गाल पर लग गयी जिसका अहसास अवनि को नहीं था वह बस इत्मीनान से उस गमले में लगे पौधे को नयी जिंदगी देने की कोशिश कर रही थी
डोरबेल बजी अवनि ने दरवाजे की तरफ देखा , पृथ्वी आया होगा ये सोचकर अवनि उठी उसने जल्दी जल्दी वाशबेसिन में अपने हाथो को धोया और कमर से दुपट्टा हटाकर कंधो पर डाल लिया। वह अपने ही दुप्पटे से हाथ पोछते हुए आगे बढ़ी और दरवाजा खोला तो सामने खड़ी महिला को देखकर हैरान रह गयी। सामने नीलम भुआ खड़ी थी जो कि पृथ्वी से मिलने या यू कहे पृथ्वी को समझाने आयी थी। अवनि बीती शाम नीलम को देख चुकी थी और उसे पता था कि उसके सामने खड़ी महिला कोई और नहीं बल्कि पृथ्वी की भुआजी है तो उसने हाथ जोड़कर कहा,”नमस्ते,,,,,,,,,,!!”
नीलम ने सुना तो मुँह बनाया और अवनि को साइड कर अंदर चली आयी। साफ सुथरा हॉल देखकर नीलम ने अवनि को ताना मारते हुए कहा,”क्या बात है तुमने तो आते ही इस फ्लेट को अपना घर बना लिया,,,,,,,आखिर हमारे सीधे साधे पृथ्वी पर अपना जादू चला ही दिया तुमने”
नीलम भुआ के कड़वे शब्द अवनि के मन को ठेस पहुंचा रहे थे फिर भी उसने शांत स्वर में कहा,”घर परिवार के लोगो से बनता है”
“लेकिन उस परिवार को तो तुमने तोड़कर रख दिया , बेचारे मेरे दादा और वहिनी से उनके बेटे को जो छीन लिया है तुमने,,,, और अब ये हमदर्दी दिखाकर मेरे सामने अच्छा बनने का नाटक कर रही हो,,,,,,,,,!!”,नीलम ने अवनि की तरफ देखकर नफरत भरे स्वर में कहा
“मैं कोई नाटक नहीं कर रही , जो कुछ भी हुआ उसके लिए मुझे दुःख है लेकिन मैंने पृथ्वी को उनसे नहीं छीना , मैं ऐसा कभी नहीं चाहती थी”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा
नीलम भुआ ने सुना तो अवनि की बाँह पकड़ी और उसकी आँखों में देखकर गुस्से से कहा,”तुम जैसी लड़कियों को बहुत अच्छे से जानती हूँ मैं , तुमने अपनी बातों में पृथ्वी को फसाया ताकि तुम उस से शादी कर सको और यहाँ आ सको मुंबई जैसे बड़े शहर में,,,,,,,,,तुम्हारी कोई औकात नहीं है समझी , तुम बिक भी जाओ ना तो एक फ्लेट तो क्या यहाँ एक कमरा तक नहीं खरीद पाओगी,,,,,,,,,,,!!”
अवनि ने सुना तो उसकी आँखों में आँसू भर आये। उसने नहीं सोचा था इस शहर में आकर उसे इतनी नफरत और जिल्लत का सामना करना पडेगा।
उसकी आँखों में भरे आँसू किसी भी वक्त बाहर आने को तैयार थे। अवनि नीलम से कुछ कहती इस से पहले नकुल और पृथ्वी वहा आ पहुँचे। नीलम ने पृथ्वी को देखा तो तुरंत उसकी बाँह छोड़ दी। पृथ्वी अंदर आया उसने हाथ में पकडे बैग नकुल को थमा दिए , वह नीलम भुआ को यहाँ देखकर हैरान था।
“आप यहाँ ?”, पृथ्वी ने पूछा
“हाँ ! तुमसे मिलने आयी थी पृथ्वी , पृथ्वी क्या तुम्हे सच में अपने आई बाबा की फ़िक्र है ? कल से वो लोग तुम्हारे बारे में सोचकर दुखी है। तुमने एक लड़की के लिए कल उन्हें सबके सामने शर्मिंदा कर दिया और इतने बेशर्म हो गए कि इस लड़की को लेकर यहाँ चले आये,,,,,,,!!”, नीलम ने गुस्से से कहा
“भुआ ! मैंने कुछ गलत नहीं किया है और आई बाबा को ये समझने की जरूरत है कि मेरी ख़ुशी किसमे है ?”,पृथ्वी ने कठोरता से कहा
“ओह्ह्ह तो तुम इतने बड़े हो गए हो कि अब अपने आई बाबा को सही गलत समझाओगे , तुम जानते भी हो इस वक्त वो कितने दुःख में है”,नीलम ने कहा
नीलम भुआ की बात सुनते हुए पृथ्वी की नजर अवनि के गाल पर पड़ी जिस पर गमले की मिटटी लगी थी। पृथ्वी ने नीलम की बात को नजरअंदाज किया या यू कहे उसके लिए इस वक्त उनकी बात से ज्यादा जरुरी अवनि थी।
वह अवनि के पास आया और जेब से अपना रुमाल निकालकर अवनि की तरफ बढाकर कहा,”अपना गाल साफ कीजिये , गमले की ये मिटटी आपके गाल पर वैसे ही दिखाई दे रही है जैसे चाँद पर दाग,,,,,,,,,,साफ़ कीजिये इसे”
नीलम ने सुना तो एकटक पृथ्वी को देखने लगी। पृथ्वी ने अपनी इस बात से नीलम भुआ को ये अहसास दिला दिया की अवनि उसके लिए महज एक लड़की नहीं थी। पृथ्वी नीलम भुआ के सामने आया और कहा,”हाँ तो आप कुछ कह रही थी”
“इस लड़की के चेहरे पर लगी मामूली सी मिटटी तुम्हे नजर आ गयी पर क्या तुम्हे अपने आई बाबा का दुःख नजर नहीं आता ?”,नीलम ने कहा
“आई बाबा का गुस्सा और दुःख मैं दोनो समझता हूँ,,,,,काश उन्होंने भी मेरा दुःख समझा होता भुआ ,, आई अगर दुखी है तो उन्हें सम्हालने के लिए बाबा है और अगर बाबा परेशान होते है तो उन्हें समझाने के आई है लेकिन इनके पास कोई नहीं है सिवाय मेरे , मैं ही इनका परिवार हूँ और अगर आज मैंने इन्हे अकेला छोड़ दिया तो जिंदगी में कभी खुद से नजरें नहीं मिला पाऊंगा भुआ
वो मेरे भरोसे इस शहर में आयी है अगर मैंने ही छोड़ दिया तो फिर वो कहा जाएगी,,,,,,,,,,आई बाबा मुझसे नाराज है मैं जानता हूँ , मैंने उनका दिल दुखाया है ये भी जानता हूँ। थोड़ा वक्त लगेगा लेकिन वो समझ जायेंगे और मुझे यकीन है एक दिन वो लोग इन्हे भी अपना लेंगे”,पृथ्वी ने कहा
नीलम पृथ्वी को समझाने आयी थी लेकिन पृथ्वी की बाते सुनकर उसे समझ आ गया कि वह अवनि का साथ इतनी आसानी से नहीं छोड़ेगा , उन्होंने अवनि को एक नजर देखा और कहा,”इस लड़की के प्यार में तुम पूरी तरह से पागल हो चुके हो पृथ्वी , जिस लड़की के लिए पुरे परिवार को ठोकर मार रहे हो क्या होगा अगर उस लड़की ने एक दिन तुम्हे छोड़ दिया ?”
“वो दिन मेरी जिंदगी का आखरी दिन होगा भुआ”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर विश्वास भरे स्वर में कहा
अवनि ने सुना तो उसके चेहरे पर दर्द के भाव उभर आये और आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क गए। पृथ्वी का प्यार उसकी आँखों से साफ झलक रहा था।
“बहुत पछताओगे तुम पृथ्वी,,,,,,ये लड़की ज्यादा दिन तुम्हारा साथ नहीं निभा पायेगी,,,,,,!!”,कहकर नीलम भुआ जाने लगी तो पृथ्वी ने कहा,”जाने से पहले मेरी एक बात सुनकर जाईये भुआ ‘आइंदा से अगर आपकी वजह से इनकी आँखों में आँसू आये तो मैं भूल जाऊंगा आप मेरी भुआ है”
“पृथ्वी तुम,,,,,,,,,,,!!”,भुआ ने हैरानी से कहा तो पृथ्वी उनकी तरफ पलटा और कहा,”आप जा सकती है”
“हाह,,,,,!!”,नीलम भुआ पैर पटकते हुए वहा से चली गयी। पृथ्वी ने अपनी गर्दन उठाकर एक गहरी साँस ली और अवनि की तरफ देखा तो पाया अवनि की आँखों से आँसू बहे जा रहे है और अवनि सुबकते हुए उन्हें पोछे जा रही है। पृथ्वी अवनि के सामने आया और अवनि के आँसू पोछने के लिए जैसे ही अपना हाथ बढ़ाया उसे अपनी ही कही बात याद आ गयी और उसने हाथ पीछे करके कहा,”अगर आप ऐसे ही सबकी बाते सुनकर रोती रही तो फिर आप कमजोर पड़ जाएगी ,
आप मेरी परवाह मत कीजिये कि मुझे कैसा लगेगा ? जैसे मेरे गलती करने पर आप मुझे डांट दिया करती थी वैसे ही इन सब को भी डाँट देना चाहिए,,,,,,,,मेरे लिए आपको अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट कम करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आप लड़िये बाकि मैं हूँ मैं सम्हाल लूंगा”
“तो क्या मेरे लिए तुम सब से लड़ोगे पृथ्वी ?”,अवनि ने नम आँखों से पृथ्वी को देखकर कहा
“हम्म्म सबसे , बस आपसे नहीं लड़ सकता क्योकि मैं आपसे कभी जीत नहीं सकता,,,,,,,,या यू कहे जीतना नहीं चाहता”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए बहुत ही प्यार से कहा।
अवनि ने सुना तो उसका दिल धड़कने लगा वह एकटक पृथ्वी को देखने लगी और पृथ्वी प्यार से मुस्कुराते हुए अवनि को देख रहा था। नकुल ने देखा तो मुस्कुराकर दूसरी तरफ देखने लगा।
अवनि और पृथ्वी जब एक दूसरे में खो गए तो नकुल ने झूठ मुठ का खांसकर उनकी तंद्रा तोड़ दी जिस पृथ्वी अवनि से दूर हटा और नकुल के हाथ से बैग लेकर अवनि की तरफ बढाकर कहा,”इसमें कुछ कपडे है , आप नहा लीजिये”
अवनि ने बैग लिया और ख़ामोशी से कमरे की तरफ बढ़ गयी। कमरे में जाकर अवनि ने दरवाजा बंद कर लिया तो पृथ्वी नकुल की तरफ पलटा और नकुल ने कहा,”यार पृथ्वी ! ये फ्लेट तो ऐसे चमक रहा है जैसे आज ही खरीदा हो,,,,,,,कितना साफ सुथरा लग रहा है ना ?”
” इसे अवनि ने साफ किया है”,पृथ्वी ने कहा
“सही है भाई , अब तो मुझे पूरा विश्वास हो गया इस घर की तरह भाभी तेरी जिंदगी भी संवार देगी”,नकुल ने कहा तो सहसा ही पृथ्वी को अवनि की लिखी बात याद आ गयी
“तुम देखोगे जब उसे घर सवांरते अपना , तुम चाहोगे वो लड़की तुम्हारी जिंदगी संवार दे”
पृथ्वी मुस्कुराने लगा तभी कमरे का दरवाजा खुला और अवनि बाहर आयी। पृथ्वी पलटा तो पाया अवनि ने अभी भी वही कपडे पहने है और वह परेशान सी खड़ी है तो पृथ्वी ने कहा,”क्या हुआ आपको कपडे पसंद नहीं आये ?”
“नहीं ऐसी बात नहीं है , सब अच्छे है पर वो,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने झिझकते हुए कहा
“पर वो ?”,पृथ्वी ने पूछा
“अह्ह्ह्ह उन कपड़ो में कुछ कपडे कम है,,,,,,,!!”,अवनि ने पृथ्वी से नजरे चुराते हुए कहा
“कम है ? लेकिन मैं तो 4-5 जोड़ी कपडे लेकर आया हूँ,,,,,,,,आपको और चाहिए तो मैं और ला दूंगा”,पृथ्वी ने कहा वह अवनि की बात नहीं समझ रहा था
“अब मैं तुम्हे कैसे समझाऊ पृथ्वी,,,,,,,कपडे बहुत है बस कुछ,,,,,,तुम्हारी कोई फीमेल फ्रेंड है जो यहाँ आ सकती है ?”,अवनि ने झुंझलाकर पूछा
“हाँ है न लेकिन वो इस वक्त अपने ऑफिस में होंगी,,,,,आप मुझे बताईये ना आपको क्या चाहिए मैं लेकर आता हूँ”,पृथ्वी ने कहा
बेचारी अवनि उसने जैसे ही सुना शर्म से अपनी नजरे नीची कर ली , नकुल जो की वही खड़ा था वो समझ गया अवनि क्या कहना चाह रही है तो उसने कहा,”अरे पृथ्वी रिया है ना वो घर पर ही होगी,,,,,,,भाभी आप रिया से कह दीजिये जो आपको चाहिए वो ले आएगी”
पृथ्वी तो अभी भी नहीं समझ पाया कि आखिर अवनि को चाहिए क्या ? नकुल ने रिया का नंबर डॉयल कर अपना फोन अवनि को दे दिया तो अवनि कमरे में चली गयी और दरवाजा फिर बंद हो गया।
नकुल पानी लेने किचन में चला गया और पृथ्वी हॉल में खड़े होकर प्यार से सब देखने लगा और मन ही मन कल्पना करने लगा कैसे अवनि ने ये सब साफ किया होगा और जमाया होगा। नकुल पानी पीते हुए सोफे पर आ बैठा और पृथ्वी ऑफिस से फोन आने की वजह से उसमे बिजी हो गया। आधे-पौन घंटे बाद रिया अपने हाथ में एक बैग लेकर आयी जिसमे अवनि का सामान था।
नकुल ने उसे देखा तो पृथ्वी के कमरे की तरफ इशारा कर दिया। रिया सीधा कमरे में चली गयी। पृथ्वी ने सेंटर टेबल पर रखी पानी की बोतल उठायी और ढक्कन खोलने लगा। रिया अवनि को सामान देकर वापस आयी तो पृथ्वी ने कहा,”ऐसा तो क्या सामान चाहिए था उसे जो उसने तुम्हे बताया मुझे नहीं”
कहकर पृथ्वी ने पानी की बोतल मुँह से लगायी और पीने लगा
“स्टुपिड ! उसे इनर वियर चाहिए थे”,रिया ने कहा और जैसे ही पृथ्वी ने सुना उसके मुँह में भरा पानी बाहर आ गिरा और वह खाँसने लगा क्योकि रिया की बात के साथ ही उसे याद आये अवनि से अपने कहे “आप मुझे बताईये ना आपको क्या चाहिए मैं लेकर आता हूँ”
( क्या अवनि पृथ्वी के इस कबाड़ख़ाने को बना पायेगी अपनी मेहनत से एक रहने लायक घर ? आखिर क्यों आयी थी नीलम भुआ पृथ्वी के फ्लेट उसे समझाने या अवनि को धमकाने ? कितना मुश्किल होने वाला है अवनि के साथ पृथ्वी का ये प्यार भरा सफर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
