Site icon Sanjana Kirodiwal

Pasandida Aurat Season 2 – 69

Pasandida Aurat Season 2 – 69

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

“मैं तुम्हे एक ऑफर देना चाहता हूँ पृथ्वी”,मिस्टर देसाई ने अपने सामने बैठे पृथ्वी से कहा
पृथ्वी ने सुना तो ख़ामोशी से मिस्टर देसाई को देखने लगा और कुछ देर बाद कहा,”क्या मैं जान सकता हूँ ये ऑफर किस बारे में है ?”

“हाँ बिल्कुल ! दरअसल मेरी कम्पनी को तुम्हारे जैसे होनहार और मेहनती एम्प्लॉय की जरूरत है जो अपनी सूझ बुझ से इस कम्पनी को आगे लेकर जा सके। मैं तुम्हे जयदीप से 4 गुना ज्यादा सैलरी दूंगा ,साथ ही मेरी कम्पनी में तुम्हारा खुद का अपना केबिन होगा और ऑफिस आने जाने के लिए एक लग्जरी कार,,,,,,,,,तुम्हारा काम बस कम्पनी में मौजूद लोगो के काम पर नजर रखना और कम्पनी से जुडी सभी मीटिंग्स अटेंड करना होगा। ट्रस्ट मी पृथ्वी मेरी कम्पनी में काम करके कुछ ही सालों में तुम सक्सेस की उंचाईयों पर होंगे”,मिस्टर देसाई ने पृथ्वी के सामने अपना प्रस्ताव रखा

पृथ्वी ने सुना तो उसने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और ख़ामोशी से मिस्टर देसाई को देखने लगा। मिस्टर देसाई भी मुस्कुराते हुए पृथ्वी के जवाब का इंतजार करने लगे। पृथ्वी कुछ देर शांत रहा और फिर बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा,”सबसे पहले तो मैं आपका शुक्रिया अदा करना चाहूंगा जो आपने मेरे सामने ये ऑफर रखा लेकिन साथ ही माफ़ी भी चाहूंगा कि मैं इसे एक्सेप्ट नहीं कर सकता ,आई ऍम सॉरी सर”

मिस्टर देसाई ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखने लगे। लोग देसाई ग्रुप में काम करने के लिए तरसते थे और यहाँ पृथ्वी चार गुना सैलेरी की बात सुनकर भी मना कर रहा था। मिस्टर देसाई ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”पृथ्वी ! तुम जानते भी हो ये ऑफर ठुकरा कर तुम कितनी बड़ी गलती कर रहे हो ? आई थिंक तुम्हे एक बार फिर सोचना चाहिए ऐसे मोके जिंदगी में बार बार नहीं आते है”

पृथ्वी ने सुना तो हल्का सा मुस्कुराया और कहा,”सर चार गुना क्या आप अगर मुझे इस कम्पनी का मालिक भी बनने को कहे तब भी मैं इस कम्पनी में काम करना पसंद नहीं करूंगा,,,,,,,,,क्योकि जब मुझे नौकरी की जरुरत थी तब इसी कम्पनी में मुझे सिर्फ मेरी डिग्री देखकर मुझे नौकरी नहीं दी गयी थी और इस वक्त मैं जिनके लिए काम करता हूँ उन्होंने मुझे नौकरी मेरी डिग्री देखकर नहीं बल्कि मेरी काबिलियत देखकर दी थी इसलिए मैं उनके लिए ज्यादा वफादार हूँ,,,,,,,,,,,,,

मेरी बातों से आप ये मत समझियेगा कि मैंने आपका ऑफर आपको या आपकी कम्पनी को नीचे दिखाने के लिए ठुकराया है , मैंने हमेशा अपनी जड़ो से जुड़कर रहना पसंद किया है सर ,थोड़े ज्यादा पैसे और ऐशो आराम की जिंदगी के लिए मैं उस विश्वास को नहीं खो सकता जो मिस्टर जयदीप मौर्या मुझ पर करते है,,,,,,,,,,,आई ऍम रियली सॉरी सर लेकिन मुझे आपका ये ऑफर नहीं चाहिए

मैं अपनी 40 हजार की नौकरी में खुश हूँ , एक बड़े केबिन में अकेले बैठने के बजाय अपनी टीम के साथ लंच शेयर करने में ज्यादा खुश हूँ , मैं आज तक कभी खुद की कार में नहीं बैठा क्योकि कार खरीदने की मेरी औकात नहीं है सर लेकिन मैं रोज ट्रेन से ट्रेवल करता हूँ और ट्रेन मे सफर करते हुए रोज जो सैंकड़ो चेहरे देखता हूँ मैं उसमे खुश हूँ,,,,,,,,,,,,मैं बहुत साधारण जिंदगी जीने में विश्वास रखता हूँ सर और उसी में खुश हू”  

पृथ्वी की बाते सुनकर मिस्टर देसाई ख़ामोशी से उसे देखने लगे वे उसकी बातो से इतना प्रभावित हुए कि धीरे से मुस्कुराये और कहा,”जानते हो पृथ्वी मैं तुम्हे पसंद क्यों करता हूँ ? क्योकि तुम्हारे अंदर कोई छल कपट नहीं है , तुम अपनी बात बहुत ही साफ और सपाट कहने में विश्वास रखते हो बिना इस बात की परवाह किये कि ये सुनकर सामने वाले को कैसा लगेगा ? देखा जाए तो तुम्हारे अंदर वो लालच नहीं है जो आज के लोगो में है,,,,,,,,,,,,

प्रमोशन और बड़ी पोजीशन पाने के लिए लोग क्या क्या नहीं करते और तुम इतना बड़ा ऑफर भी बस इसलिए ठुकरा रहे हो क्योकि तुम अपने काम के प्रति ईमानदार हो,,,,,,,,,,,,आज मेरी नजरो में तुम्हारे लिए इज्जत और बढ़ गयी पृथ्वी , देखना एक दिन तुम बहुत आगे जाओगे”
पृथ्वी को लगा ऑफर ठुकराने के बाद मिस्टर देसाई उस से नाराज होंगे या निराश होंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ उलटा मिस्टर देसाई पृथ्वी की ईमानदारी से खुश थे। पृथ्वी ने महसूस किया कि मिस्टर देसाई अपनी बेटी से काफी अलग थे।

“थैंक्यू सर ! आई थिंक अब मुझे चलना चाहिए”,पृथ्वी ने कलाई पर बंधी घडी में वक्त देखते हुए कहा
“मिस्टर पृथ्वी ! तुम कुछ भूल रहे हो”,मिस्टर देसाई ने कहा
“क्या सर ?”,पृथ्वी ने पूछा

“अरे भई तुमने मुझसे वादा किया था कि तुम मेरे साथ एक कप चाय पीने वाले हो , ऑफर ना सही एक साथ बैठकर एक कप चाय तो पी सकते हो ना ?”,मिस्टर देसाईं ने बड़े प्यार से कहा
पृथ्वी उन्हें ना नहीं कह पाया इसलिए हामी में गर्दन हिलाई और वापस सोफे पर आ बैठा।

मिस्टर देसाई ने बगल में रखे लेडलाइन से नंबर डॉयल किया और रिसीवर कान से लगाकर कहा,”ज़रा मेरे केबिन में दो कप चाय भिजवा दीजिये”
चाय आने में अभी वक्त था इसलिए मिस्टर देसाई पृथ्वी से बाते करने लगे। बातो बातो में जैसे ही मिस्टर देसाई ने प्राची का जिक्र किया पृथ्वी की भँवे तन गयी और उसे सुरभि की कही बातें याद आ गयी। दरअसल एयरपोर्ट पर सुरभि ने पृथ्वी को वो सब बता दिया तो मॉल में हुआ था।
पृथ्वी प्राची की बदतमीजियों और इरादों से पहले ही वाकिफ था और नहीं चाहता था उसे लेकर प्राची कभी अवनि को नुकसान पहुंचाए।

आज की मीटिंग में पृथ्वी जान बुझकर आया था ताकि प्राची इस मीटिंग को अटेंड करे और वह उसे सबक सीखा सके लेकिन प्राची आज की मीटिंग में आयी ही नहीं। ऑफिस बॉय मिस्टर देसाई और पृथ्वी के लिए चाय रखकर चला गया और दोनों बाते करते हुए चाय पीने लगे। अगले ही पल केबिन का दरवाजा खुला और प्राची ने अंदर आकर मिस्टर देसाई से कहा,”डेड ! मिस्टर मेहताज के आज की मीटिंग बहुत ही बकवास थी ,वो जो डील हमारी कम्पनी के फाइनल करना चाहते है उसमे हमारी कम्पनी को सिर्फ नुकसान है और कुछ नहीं,,,,,,,,,,,!!!”

प्राची ने ये देखा ही नहीं कि पृथ्वी भी वहा है वह तो बस उखड़ी हुई मिस्टर देसाई को देख रही थी।
मिस्टर देसाई ने प्राची को देखा और बहुत ही सधे स्वर में कहा,”कुछ बिजनेस रिलेशन बनाये रखने के लिए कम्पनी को नुकसान भी झेलना पड़ता है ,हम हर बार अपना फायदा नहीं देख सकते प्राची,,,,,,,,,,,ये बात तुम्हे पृथ्वी से सीखनी चाहिए जिसने अपने बॉस के लिए अभी अभी चार गुना सैलरी का ऑफर ठुकराया है”

मिस्टर देसाई के मुँह से पृथ्वी का नाम सुनकर प्राची का दिल धड़कने लगा उसने गर्दन घुमाकर देखा तो नजर पीछे सोफे पर बैठे पृथ्वी पर पड़ी जिसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था.पृथ्वी को वहा देखकर प्राची की आँखे चमक उठी और चेहरा खिल गया जैसे उसकी मन की कोई मुराद पूरी हो गयी हो।

उस रात जब पृथ्वी उसे घर छोड़ने आया था उसे बाद प्राची पृथ्वी को अब देख रही थी। वह मुस्कुराते हुए पृथ्वी की तरफ आयी और बड़ी ही अदा से मुस्कुरा कर कहा,”ओह्ह्ह हेलो मिस्टर पृथ्वी , मैंने सोचा नहीं था आपसे फिर मुलाकात होगी वो भी यहाँ , लगता है देसाई ग्रुप में आपका भी दिल लगने लगा है,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी को प्राची से ऐसे ही किसी बेकार मजाक की उम्मीद थी वह मुस्कुराते हुए खड़ा हुआ और कहा,”मैं खाली जगहो पर ना अपना दिल लगाता हूँ और ना ही दिमाग,,,,,,,,,,,,,by the way मैं आपको कुछ देने आया था”

प्राची ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखा पृथ्वी उसे कुछ देना चाहता है ये सुनकर ही प्राची के दिल में ख़ुशी की एक लहर उठी और उसने खुश होकर कहा,”क्या   पृथ्वी ?
पृथ्वी ने कुछ देर ख़ामोशी से प्राची को देखा और फिर खींचकर एक थप्पड़ उसके गाल पर रसीद कर दिया। मिस्टर देसाई ने देखा तो अपनी जगह से उठ खड़े हुए और हैरानी से उनका मुँह खुला का खुला रह गया। पृथ्वी के एक थप्पड़ से ही प्राची का गाल झनझना उठा। वह अपना हाथ अपने गाल से लगाए गुस्से से भरकर पृथ्वी की तरफ देखती रही।

“पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,,,ये क्या बदतमीजी है , प्राची पर हाथ उठाने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुयी ?”,मिस्टर देसाईं ने गुस्से से ऊँचे स्वर में कहा
पृथ्वी के मारे गए थप्पड़ की गूँज इतनी तेज थी कि पुरे केबिन में वह आवाज गुंजी। उसने मिस्टर देसाई की तरफ देखा और कहा,”काश बहुत पहले ये थप्पड़ मारने की हिम्मत आपने की होती सर तो आज मिस प्राची इतनी बद्तमीज और बिगड़ैल ना होती”
“पृथ्वी ! ये क्या कह रहे हो , तुम होश में तो हो ?”,मिस्टर देसाई चिल्लाये

“जी सर मैं बिल्कुल होश में हूँ ,मैं इनकी तरह दौलत का नशा नहीं करता,,,,,,,,,,,,,,ज़रा पूछिए इनसे कि मेरी पत्नी से बदतमीजी करने का हक़ इन्हे किसने दिया ?”,पृथ्वी ने प्राची की तरफ देखकर कहा तो प्राची का सर शर्म से झुक गया
मिस्टर देसाई ने सुना तो हैरानी से कहा,”प्राची ! ये सब मैं क्या सुन रहा हूँ ? तुमने पृथ्वी की वाइफ से बदतमीजी की लेकिन क्यों ?”
“क्योकि वो इसके लायक नहीं है , ही डिजर्व बेटर डेड और बेटर मैं हूँ”,इस बार प्राची ने गुस्से से तेज आवाज में कहा

पृथ्वी ने सुना तो अफ़सोस में अपना सर हिलाया , वह कुछ कहता इस से पहले ही मिस्टर देसाई प्राची की तरफ आये और उसकी बाँह पकड़कर उसे अपनी तरफ करके कहा,”तुम्हारा दिमाग तो सही है प्राची ये क्या बकवास कर रही हो तुम ?”
“मैं कोई बकवास नहीं कर रही डेड , आई लव हिम मैं पृथ्वी से प्यार करती हूँ,,,,,,,,,,और मैं किसी और को इसके साथ बर्दास्त नहीं कर सकती”,प्राची ने अपनी बाँह झटककर गुस्से से कहा

पृथ्वी ने सुना तो मन ही मन उसे प्राची पर बहुत गुस्सा आया लेकिन उसने खुद को शांत रखने की पूरी कोशिश की और प्राची के सामने आकर कहा,”जिसे तुम प्यार कह रही हो वो सिर्फ तुम्हारी जिद और तुम्हारा पागलपन है प्राची है। मैं शादीशुदा हूँ और अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता हूँ मैं उसकी जगह किसी को नहीं दे सकता। तुमने जो अवनि के साथ किया वो पहली और आखरी बार था , अगर तुमने दोबारा ऐसा कुछ करने का सोचा भी तो मैं भूल जाऊंगा कि तुम एक लड़की हो,,,,,,,,,,,,,,,,अवनि सीधी और मासूम है लेकिन मैं नहीं ,, मुझसे और और मेरी पत्नी से दूर रहो,,,,,,,,,,,,,,,बेटर फॉर यू”

मिस्टर देसाईं ने सुना तो उन्हें बहुत ही दुःख हुआ। वे पृथ्वी के पास आये और कहा,”आई ऍम सॉरी पृथ्वी , प्राची की तरफ से मैं तुमसे माफ़ी मांगता हूँ , आइंदा से ये ऐसा कुछ नहीं करेगी,,,,,,,,,,!!!!”

“सर आपको माफ़ी मांगने की जरूरत नहीं है , ये बात इन्हे समझाइये जो आग ये लगाने की कोशिश कर रही है एक दिन ये उसमे अपने ही हाथो को जला लेंगी,,,,,,,,,,,,मैं सब बर्दास्त कर सकता हूँ लेकिन अपनी पत्नी का अपमान नहीं,,,,,,,,,,,,बात अगर उसके सम्मान की आयी तो मैं आपको भी भूल जाऊंगा,,,,,,,,आप एक अच्छे बिजनेसमैन है और अच्छे इंसान भी बस सिर्फ इसलिए मैं इसे ये आखरी मौका दे रहा हूँ”

मिस्टर देसाई ने निराश होकर अपना सर हिलाया तो पृथ्वी वहा से जाने के लिए आगे बढ़ गया। चलते चलते वह प्राची के बगल में रुका और कहा,”जितनी अच्छी तुम बिजनेस में हो काश असल जिंदगी में भी उतनी ही सरल होती,,,,,,,,,,,,गुड बाय , हेव अ गुड डे”
पृथ्वी वहा से चला गया और प्राची खामोश खड़ी रही। मिस्टर देसाई को समझ नहीं आ रहा था इस वक्त वे क्या कहे क्या करे ? इस वक्त उन्हें प्राची पर बहुत गुस्सा आ रहा था वे प्राची के सामने चले आये

“डेड वो,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने इतना ही कहा कि मिस्टर देसाई ने खींचकर एक थप्पड़ प्राची के गाल पर मारा और कहा,”शट अप ! मैं सोच भी नहीं सकता प्राची कि मेरी बेटी होकर तुम ऐसी घटिया हरकत करोगी। इतनी बड़ी कम्पनी की होने वाली CEO होकर तुम ऐसी सोच रखती हो। शुक्र है पृथ्वी ने तुम्हे इस बंद कमरे में थप्पड़ मारा अगर यही थप्पड़ बाहर सबके सामने मारा होता तो क्या इज्जत रह जाती तुम्हारी इस कम्पनी में,,,,,,,,,,,,

सही कहा उसने ये थप्पड़ मुझे तुम्हे बहुत पहले मारना चाहिए था क्योकि मेरे ही लाड़ प्यार और छूट ने तुम्हे बिगाड़ रखा है। सच प्राची आज तुमने मुझे बहुत शर्मिंदा किया है इस से पहले कि मैं तुम्हारे साथ और बुरा पेश आउ चली जाओ यहाँ से , दूर हो जाओ मेरी नजरो से,,,,,,,,,,,गेट आउट”

प्राची ने सुना तो उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। आज मिस्टर देसाई की आँखों में उसे अपने लिए गुस्सा और नफरत नजर आ रही थी। उसने एक नजर मिस्टर देसाई को देखा और फिर वहा से चली गयी। मिस्टर देसाई सोफे पर आ बैठे और अपना सर झुका लिया। इतने बड़े बिजनेसमैन को आज एक मामूली से मैनेजर के सामने शर्मिन्दा होना पड़ा ये बात उन्हें अंदर ही अंदर खाने लगी।

सिरोही , राजस्थान
दोपहर होते होते सुरभि सिरोही पहुंची। सिद्धार्थ के पास भले ही सुरभि का नंबर नहीं था लेकिन सुरभि ने अवनि के फोन से सिद्धार्थ का नंबर पहले ही ले लिया था इसलिए बस स्टेण्ड से बाहर निकलकर सुरभि ने सिद्धार्थ का नंबर डॉयल किया और फोन कान से लगा लिया। सिद्धार्थ इस वक्त किसी काम से बाहर आया था और गाड़ी चला रहा था। सिद्धार्थ का फोन बजा ,

अनजान नंबर देखकर सिद्धार्थ ने पहली बार फोन नहीं उठाया लेकिन अगले ही पल फोन फिर बजा और उसने फोन उठाकर कान से लगा लिया तो दूसरी तरफ से कानों की चीरती आवाज आयी
“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरा कॉल इग्नोर करने की ? यहाँ मैं इतनी दूर तुम्हारी हेल्प करने आयी हूँ और तुम मेरा कॉल इग्नोर कर रहे हो,,,,,,,,,,,,हाह !”

ये आवाज सुरभि की है ये बात सिद्धार्थ को पहला शब्द सुनते ही समझ आ गयी इसलिए उसने सुरभि की बात सुनते हुए फोन को अपने कान से थोड़ा दूर ही रखा क्योकि उसने इतनी जोर से कहा कि उसकी आवाज फोन के बाहर तक आ रही थी।
“आई ऍम सो सॉरी ! अनजान नंबर देखकर मैंने नहीं उठाया वैसे तुम्हे मेरा नंबर कहा से मिला ?”,सिद्धार्थ ने पूछा
“ट्रेन के टॉयलेट में लिखा था,,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने बहुत ही शांति से कहा
“व्हाट ?”,सिद्धार्थ चौंका

“क्या मतलब कहा से मिला ? तुम्हे मेरी हेल्प से मतलब है या नंबर से , मैं बस स्टेण्ड के बाहर तुम्हारा वेट कर रही हूँ अब जल्दी आओ,,,,,,,,,,,,मुझे आज शाम उदयपुर भी जाना है”,सुरभि ने एक बार फिर गुस्से से कहा
सिद्धार्थ ने देखा वह बस स्टेण्ड वाले रास्ते पर ही है तो उसने कहा,”मैं बस 5 मिनिट में आया और हाँ”

सिद्धार्थ अपनी बात पूरी करता इस से पहले ही सुरभि ने फोन काट दिया और सिद्धार्थ ने झल्लाकर फोन अपने ललाट पर मारकर कहा,”अह्ह्ह्ह ये लड़की भी ना ,बस एक बार ये मम्मी पापा से मिलकर उन्हें सच बता दे उसके बाद हमेशा हमेशा के लिए इसका नंबर ब्लॉक ही कर दूंगा,,,,,,,,,,,,हाह !”

सुरभि सिद्धार्थ का इंतजार करने लगी साथ ही उसे बहुत तेज भूख भी लगी थी और झुँझलाहट भी हो रही थी कि वह यहाँ क्यों है ? कुछ देर बाद सिद्धार्थ की उसके बगल में आकर रुकी सिद्धार्थ ने शीशा नीचे किया और कहा,”चलो बैठो”
सुरभि ने सुना तो अपनी भंव चढ़ाकर कहा,”अहसान कर रहे हो मुझ पर”
“अरे मैं तुम पर अहसान क्यों करूंगा ? गाड़ी में बैठो”,सिद्धार्थ ने चिढ़कर कहा

“अंधे हो ? दिखाई नहीं देता मेरे हाथो में सामान है , दरवाजा क्या पैर से खोलू मैं ?”,सुरभि ने भी चिढ़कर कहा जबकि उसके हाथ में बस एक छोटा बैग और पानी का बोतल था जबकि सूटकेस साइड में रखा था।
सिद्धार्थ ने सुना तो मन ही मन झल्लाया और बड़बड़ाते हुए गाड़ी से नीचे उतरा,”हाह ! पैर से क्यों खोलोगी भगवान् ने इतनी लम्बी जबान दी है उसका इस्तेमाल करो ना”
सिद्धार्थ सुरभि की तरफ आया और गाड़ी का दरवाजा खोला और ताना मारकर कहा,”आईये मेम”

सुरभि ने हाथ में पकड़ा बैग और बोतल सिद्धार्थ की तरफ फेंकी और गाड़ी की तरफ बढ़ी और जैसे ही सिद्धार्थ दूसरी तरफ जाने लगा सुरभि ने चुटकी बजाकर कहा,”ओह्ह्ह हेलो ! वो सामान रखने कोई और आएगा ?”
सिद्धार्थ ने सुना तो चिढ़कर सुरभि का गला दबाने उसकी तरफ बढ़ा लेकिन उस से पहले सुरभि गाडी में बैठकर दरवाजा बंद कर चुकी थी। अब गुस्सा कही तो निकालना था इसलिए सिद्धार्थ ने अपना पैर जोर से गाड़ी के टायर पर मारा और अपना पैर पकड़ लिया क्योकि टायर का तो कुछ नहीं बिगड़ा लेकिन उसके पैर को जरूर लगी।

 ( मिस्टर देसाईं का ऑफर ठुकरा कर क्या पृथ्वी ने सही किया ? पृथ्वी के मारे थप्पड़ से क्या प्राची सुधर जाएगी या ये थप्पड़ पड़ेगा पृथ्वी को भारी ? क्या सुरभि सच में करेगी सिद्धार्थ की मदद या डाल देगी उसे और बड़ी मुसीबत में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69

Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69Pasandida Aurat Season 2 – 69

Continue With Pasandida Aurat Season 2 – 70

Follow Me On https://www.instagram.com/sanjanakirodiwal/

Read Kitni Mohabbat Hai

संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
Exit mobile version