Pasandida Aurat Season 2 – 68
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
“भरत ! आज की मीटिंग्स की डिटेल्स तुमने मुझे मेल की है ना , देखो आज मौर्या एंड मेहता कम्पनी के अलावा एक बहुत बड़ी मीटिंग है मिस्टर वेद खन्ना के साथ और इसमें मुझे किसी भी तरह की कोई भी गड़बड़ नहीं चाहिए”,मिस्टर देसाई ने भरत के साथ अपने केबिन में आते हुए कहा।
“जी सर ! आप बेफिक्र रहिये मैंने सब अरेंज कर दिया है। मौर्य ग्रुप एंड मेहताज के साथ मीटिंग लंच से पहले है और मिस्टर खन्ना के साथ लंच के बाद ताकि आप उन्हें थोड़ा ज्यादा वक्त दे सके”,भरत ने कहा
“थैंक्यू भरत ! तुम नहीं होते तो इस कम्पनी का क्या होता ?”,मिस्टर देसाई ने कहा
“नहीं सर ! मैं नहीं अगर आप अब तक अपनी सूझ बुझ से इस कम्पनी को नहीं चलाते तो मेरा और इस कम्पनी में काम करने वाले बाकि 70 एम्प्लॉय का क्या होता ?”,भरत ने कहा
“ओह्ह्ह भरत तुम भी ना कभी कभी अपनी बातो से मुझे निशब्द कर देते हो,,,,,,,,,,अच्छा प्राची ऑफिस आयी या नहीं ?”,मिस्टर देसाई ने अपनी कुर्सी पर बैठते हुए कहा
भरत कुछ कहता इस से पहले उनके केबिन का दरवाजा खुला और प्राची मुस्कुराती हुई अंदर आयी। आज प्राची को वक्त से ऑफिस आया देखकर मिस्टर देसाई जहा हैरान थे वही भरत भी चौंक गया क्योकि पहली बार ऐसा हुआ था जब प्राची इतनी सुबह ऑफिस आयी थी वरना तो वह ऑफिस वालो को अपने दर्शन दोपहर बाद ही दिया करती थी।
“हाय डेड ! गुड मॉर्निंग ,गुड मॉर्निंग मिस्टर भरत,,,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने मिस्टर देसाई की तरफ आकर मुस्कुराते हुए कहा
“गुड मॉर्निंग मेम”,भरत ने कहा
“गुड मॉर्निंग प्राची ! आज सूरज पश्चिम से निकला है या उत्तर से ,तुम और ऑफिस वक्त से”,मिस्टर देसाई ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“ओह्ह्ह कम ऑन डेड आपके उस एक लेक्चर ने मेरी आँखे खोल दी और फिर आगे जाकर जब मुझे ही इस कम्पनी को सम्हालना है तो वक्त से ऑफिस भी तो आना पड़ेगा ना”,प्राची ने कुर्सी खिसकाकर उस पर बैठते हुए कहा
“वैरी गुड बेटा ! सो आज का क्या प्लान है ?”,मिस्टर देसाई ने खुश होकर पूछा
“आज मैं कम्पनी के CA से मिलकर इस साल का अकाउंट देखने वाली हूँ , उसके बाद कम्पनी की लीगल टीम के साथ मेरी एक मीटिंग है,,,,,,,,,डेड आई थिंक हमे अपनी कम्पनी के कॉन्ट्रेक्ट में कुछ क्लॉट्स घटाकर कॉन्ट्रेक्ट को आसान बनाना चाहिए। लोग यहाँ काम करने आते है हमारी गुलामी करने नहीं”,प्राची ने गंभीर होकर कहा
“मैडम सही कह रही है सर ,कम्पनी कॉन्ट्रेक्ट की वजह से पिछले महीने ही 6 होनहार एम्प्लॉय ने जॉब रिजाइन दिया है”,भरत ने प्राची की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा
ठीक है तुम्हे जैसा ठीक लगे वैसा करो बस फाइनल करने से पहले एक बार कॉन्ट्रेक्ट मुझे रिव्यू करने के लिए जरूर देना”,मिस्टर देसाई ने कहा
“ऑफकोर्स डेड उसे फाइनल आप ही करेंगे ,,मेहताज ग्रुप से मेरी बात हो चुकी है आज की मिटिंग उन्होंने बाहर रखी है मैं और नीलेश उसे ज्वाइन कर लेंगे और मौर्या ग्रुप की मीटिंग,,,,,,,,,,,!!!”,कहते कहते प्राची रुकी और उसकी आँखे चमक उठी
मिस्टर देसाई ने देखा तो थोड़ा चिंतित हो गए क्योकि उन्हें नहीं पता था मौर्या ग्रुप से मीटिंग के लिए कौन आने वाला था ? उन्हें लगा शायद पृथ्वी आएगा और उसके आने से कही प्राची पर फिर से उसे पाने का भूत सवार ना हो जाये।
मिस्टर देसाई को उलझन में देखकर प्राची ने कहा,”हाँ तो डेड मैं ये कह रही थी कि मोर्या ग्रुप के साथ अगर मीटिंग आप देख ले तो बेहतर होगा , वैसे भी मुझे लगता है उनकी डील आप बेहतर समझ पाएंगे,,,,,,,,,,,,!!!”
प्राची की बात सुनकर मिस्टर देसाई और ज्यादा हैरान हुए ,आखिर प्राची को एकदम से क्या हो गया वह मौर्या ग्रुप को इग्नोर को कर रही है ?
“डेड ! डेड”,प्राची ने कहा
“अह्ह्ह्ह हाँ हाँ ठीक है आई विल मैनेज”,मिस्टर देसाई ने कहा
“थैंक्यू डेड ,लंच के बाद मिलती हूँ”,कहकर प्राची उठी और वहा से चली गयी
प्राची के जाने के बाद मिस्टर देसाई ने भरत से कहा,”मिस्टर भरत ये मैं क्या देख रहा हूँ प्राची कब से ऑफिस के कामो को लेकर इतना सीरियस हो गयी और मौर्या ग्रुप की मीटिंग में भी उसने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई ,ये कैसे मुमकिन है ?”
“सर मैं भी देख रहा हूँ मैडम बाकि दिनों के बजाय आज कुछ बदली बदली नजर आ रही है,,,,,,,,,,,,,,आई होप ये बदलाव उनकी बेहतर जिंदगी के लिए हो”,भरत ने कहा और फिर मिस्टर देसाई के साथ बैठकर उनसे मीटिंग के बारे में बात करने लगा
प्राची को नहीं पता था आज की मीटिंग में पृथ्वी आने वाला है इसलिए उसने मेहता ग्रुप के मैनेजेर को बाहर मीटिंग रखने के लिए कहा और नीलेश के साथ ऑफिस से निकल गयी। गाड़ी नीलेश चला रहा था और प्राची पीछे सीट पर बैठी अपने फोन में मेल्स चेक कर रही थी। नीलेश प्राची से कुछ कहना चाहता था लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। बहुत देर तक खुद में ही उलझने के बाद नीलेश ने कहा,”प्राची मैडम”
“हाँ नीलेश,,,,,,,,!”,प्राची ने अपना फोन साइड में रखकर कहा
“आप बुरा ना माने तो मैं आपसे कुछ पुछु ?”,नीलेश ने डरते डरते कहा
“हाँ पूछो ना,,,,,,,,!!”,प्राची ने थोड़ा प्यार से कहा क्योकि आज उसका मूड काफी अच्छा था।
“आप मौर्या कम्पनी के मैनेजर पृथ्वी उपाध्याय के पीछे क्यों पड़ी है ? जबकि वो तो आप में बिल्कुल भी इंट्रेस्ट नहीं दिखाते”,नीलेश ने अपने दिल को मजबूत करके कहा क्योकि प्राची कब कहा किस पर भड़क जाए उसका कोई भरोसा नहीं
प्राची ने सुना तो कुछ देर खामोश रही और फिर एकदम से हंसकर कहा,”यही बात तो उसे सबसे अलग बनाती है नीलेश ,इस शहर में कितने ही ऐसे लोग होंगे जो मुझसे बात करना चाहते है , मुझसे मिलना चाहते है , मेरे साथ वक्त बिताना चाहते है लेकिन पृथ्वी ऐसा नहीं है उसका मुझसे दूर जाना ही तो मुझे बार बार उसके करीब ला रहा है,,,,,,,,,,He is something,,,,,,,!!”
प्राची की बात सुनकर नीलेश को चुभन का अहसास हुआ और साथ ही पृथ्वी से जलन भी उसने कहा,”लेकिन पृथ्वी शादीशुदा है मेडम”
“So what ? खाली कुर्सी पर तो कोई भी बैठ सकता है लेकिन कुर्सी खाली करवाकर बैठने में जो ख़ुशी है वो तुम नहीं समझोगे,,,,,,,,,,,वैसे भी मुझे पृथ्वी चाहिए ,हर हाल में चाहिए और मैं उसे हासिल करके रहूंगी”,प्राची ने बेशर्मी से कहा
प्राची की बात सुनकर नीलेश को बहुत बुरा लगा और उसने कहा,”आप जो कर रही है वो गलत है मेडम,,,,,,,!!!”
“Stop the car , i said stop the car,,,,,,,,,,,,,!!”,प्राची ने पहले धीरे से कहा और फिर तेज चिल्लाई।
नीलेश ने गाडी साइड में रोक दी तो प्राची गाड़ी से उतरी और ड्राइवर सीट का दरवाजा खोलकर कहा,”out,,,,,,,,,,,,,!!!”
“मेम,,,,,,,,!!!”,नीलश ने कहा
“i said get out of my car,,,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने गुस्से से कहा
नीलेश कार से बाहर चला आया उसे नहीं समझ आया प्राची को अचानक से ये क्या हुआ ? वह तो अभी भी हैरानी से बस प्राची को देख रहा था।
प्राची ने नीलेश को साइड किया और खुद ड्राइवर सीट पर आ बैठी। उसने शीशा नीचे किया और पीछे पड़े अपने पर्स को उठाकर उसमे से कुछ रूपये निकालकर नीलेश के मुँह पर फेंककर कहा,”ये पैसे लो और ऑटो पकड़ कर वापस ऑफिस चले जाओ,,,,,,,,,,,,,,,मेरी कम्पनी में एक मामूली से मैनेजर होकर तुम मुझे सिखाओगे सही-गलत क्या है ?
दफा हो जाओ यहाँ से और आइंदा मुझे बिना माँगे सलाह दी तो याद रखना ऑफिस में तुम्हारी जगह लेने वालो की कमी नहीं है,,,,,,,,,,,Now get lost मेहताज के साथ आज की मीटिंग मैं अकेले अटेंड कर लुंगी”
नीलेश ने सुना तो उसका चेहरा उतर गया और आँखों में नमी उभर आयी। आज से पहले किसी ने उसकी इतनी बेइज्जती कभी नहीं की थी लेकिन प्राची ने तो सीधा पैसे ही उसके मुँह पर मार दिए। इस अपमान से दुखी होकर नीलेश ने नीचे गिरे पैसो को हाथ तक नहीं लगाया और वहा से चला गया।
दोपहर 2 बजे ,आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
अवनि सब काम खत्म कर चुकी थी साथ ही उसने दो दिन के कपडे और जरुरी सामान भी एक छोटे बैग में रख लिया। उसने घर को अच्छे से साफ किया ,पृथ्वी के धुले हए कपडे प्रेस करके रख दिए , किचन में सब्जिया नहीं थी इसलिए नीचे जाकर वह कुछ फल और सब्जिया भी ले आयी और उन्हें भी धोकर फ्रीज में रख दिया। अवनि हॉल में चली आयी और घडी की तरफ देखा जो कि दोपहर के 2 बजा रही थी।
वह सोफे पर आ बैठी और पृथ्वी के बारे में सोचने लगी , अब तक पृथ्वी ने उसके लिए जो कुछ भी किया उसका थोड़ा भी अवनि पृथ्वी के लिए कहा कर पायी थी। हिमांशु के साथ जाने के लिए भी अवनि ने इसलिए हामी भरी ताकि वह पृथ्वी के घरवालों को समझा सके , उन्हें मना सके कि पृथ्वी ने जो किया उसमे उसकी कोई गलती नहीं थी। अवनि चाहती थी पृथ्वी के घरवाले उसे फिर से अपना ले और इसके लिए उसे जो करना पड़े वह करेगी बिना पृथ्वी को ये अहसास दिलाये।
पृथ्वी के बारे में सोचते हुए अवनि का मन उदास होने लगा , इतने दिनों में उसे पृथ्वी को देखने की , उसके लिए खाना बनाने की ,उसे डाँटने की ,उस से बाते करने की और उसका ख्याल रखने की अवनि को आदत हो चुकी थी। दो दिन ना जाने क्यों उसे अब एकदम से भारी लग रहे थे।
डोरबेल बजी तो अवनि की तंद्रा टूटी वह उठकर आयी और दरवाजा खोला तो सामने हिमांशु खड़ा था। आज हिमांशु का ऑफिस लंच टाइम में ही खत्म हो गया और वह अवनि को लेने सीधा यही चला आया क्योकि पनवेल से हिमांशु का घर एक घण्टे दूर था।
“तुमने सब रख लिया ना अवनि , देखो तुम्हे वहा दो दिन रहना है तो उस हिसाब से कपडे रख लेना और कल रात होलिका दहन है तो उसके लिए भी,,,,,,,,,,,उसके अगले दिन तो पुराने कपडे भी चलेंगे तुम्हे सबके साथ रंग जो खेलना है”,हिमांशु ने अंदर आते हुए कहा
“मैं आपके लिए पानी लाती हूँ”,अवनि ने कहा और जैसे ही जाने लगी हिमांशु ने कहा,”अरे तुम रुको मैं ले लेता हूँ तुम एक बार चेक कर लो सब सामान रहा है ना तुमने,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“हम्म्म्म,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा और अपने कमरे में चली गयी
हिमांशु ने टेबल पर रखे जग से गिलास में पानी लिया और पीकर हॉल में चला आया। अवनि अपना छोटा सा बैग लेकर आयी और कहा,”मैंने सब रख लिया है”
“गुड,,,,,,,मैं पृथ्वी को फोन कर देता हूँ”,हिमांशु ने कहा
“उनका फोन सर्विस में है , उन्होंने कहा था अगर उनसे बात करनी हो तो मैं उन्हें ऑफिस के फ़ोन पर फोन करू”,अवनि ने धीरे से कहा
“ठीक है फिर उसके ऑफिस का नंबर दो मैं बात करता हूँ”,हिमांशु ने कहा तो अवनि ने अपने फोन में ऑफिस का नंबर निकाला और हिमांशु की तरफ बढ़ा दिया। हिमांशु ने नंबर डॉयल किया और पृथ्वी के बारे में पूछा तो दूसरी तरफ से जवाब सुनकर हिमांशु ने फोन काट दिया।
“क्या हुआ भैया ! बात हुई उनसे ?”,अवनि ने पूछा
“अह्ह्ह्ह नहीं ! उसके स्टाफ से किसी ने बताया कि वह बाहर किसी मीटिंग के लिए गया है। कोई बात नहीं मैं उसे बाद में फोन कर दूंगा वैसे भी सुबह उसने तुम से घर चलने के लिए कहा ही था”,हिमांशु ने कहा
अवनि ने सुना तो उसका मन उदास हो गया फिर उसने हिमांशु की तरफ देखा जो कि उसे घर ले जाने के लिए तैयार खड़ा था और अवनि के पहली बार घर जाने से खुश भी था। अवनि ने गले से दुपट्टा निकालकर सर पर ओढ़ा और कहा,”मैं ठीक लग रही हूँ न ?”
“बहुत प्यारी लग रही हो , एक काम करो एक छोटा सा काला टीका लगा लो ताकि तुम्हे किसी की नजर ना लगे”,हिमांशु ने अवनि के सर पर हाथ रखकर कहा।
एक बड़े भाई के छूने पर जो महसूस होता है वही भावना अवनि ने भी महसूस की और मुस्कुरा दी
“चलो आओ देर हो रही है”,हिमांशु ने कहा
अवनि ने बैग उठाना चाहा तो हिमांशु ने रोक दिया और कहा,”अहा ! ये रहने दो मैं उठा लेता हूँ , तुम चलो”
हिमांशु बैग उठाकर आगे बढ़ गया और अवनि उसके पीछे चली आयी। घर की दहलीज लांघते हुए अवनि ने पलटकर खाली घर को देखा ना चाहते हुए भी उसकी आँखों में नमी उभर आयी और पृथ्वी की कमी खलने लगी।
हिमांशु ने देखा तो कहा,”पहली बार पृथ्वी से दूर जा रही हो ?”
अवनि ने नम आँखों से हिमांशु को देखा और कहा,”नहीं दूसरी बार,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“उदास मत हो अवनि सिर्फ दो दिन की बात है ,उसके बाद पृथ्वी खुद तुम्हे लेने आएगा,,,,,,,,,आओ चलते है”,हिमांशु ने प्यार से कहा
अवनि फ्लेट से बाहर आयी दरवाजा बंद किया और लॉक करके हिमांशु के साथ लिफ्ट की तरफ बढ़ गयी।
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी ,वाशी
“थैंक्यू सो मच मिस्टर उपाध्याय ! आपने तो आज की मीटिंग को आसान और मजेदार बना दिया। आज से पहले इतनी अच्छी प्रेजेंटेशन मैंने नहीं सुनी , आप बहुत आगे जाने वाले है मिस्टर उपाध्याय ,, बेस्ट ऑफ़ लक”,देसाई ग्रुप की लीगल टीम के हेड ने मीटिंग रूम से बाहर पृथ्वी से हाथ मिलाते हुए कहा
“थैंक्यू सर”,पृथ्वी ने जवाब में मुस्कुरा कर कहा
हेड और बाकि लोग वहा से चले गए पृथ्वी ने अपनी कलाई पर बंधी घडी में समय देखा जो कि दोपहर के 2 बजा रही थी। पृथ्वी को अवनि के दिए टिफिन की याद आयी और वह अपने ऑफिस वापस जाने के लिए जैसे ही आगे बढ़ा देसाई सर के मैनेजर भरत ने आकर कहा,”हेलो पृथ्वी”
“हेलो सर ! कैसे है आप ?”,पृथ्वी ने शालीनता से पूछा
“मैं ठीक हूँ , दरअसल देसाई सर ने आपको अपने केबिन में बुलाया है , वे आपसे कुछ जरुरी बात करना चाहते है”,भरत ने कहा
पृथ्वी ने कलाई पर बंधी घडी को एक बार फिर देखा वह यहाँ से निकलना चाहता था लेकिन एकदम से भरत को मना भी नहीं करना चाहता था। आख़िरकार उनसे हामी में गर्दन हिला दी और भरत के साथ चल पड़ा।
देसाई सर के केबिन के बाहर आकर भरत रुक गया और पृथ्वी से अंदर जाने का इशारा करके खुद वहा से चला गया। पृथ्वी ने दरवाजा खोला और कहा,”May i come in sir ?”
“ओह्ह्ह पृथ्वी ! आओ आओ मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था”,मिस्टर देसाई ने अपनी जगह से उठते हुए कहा और केबिन में रखे सोफों की तरफ चले आये।
पृथ्वी ने आकर देसाई सर से हाथ मिलाया और कहा,”हेलो सर”
“हेलो,,,,,,,,,,,,आओ बैठो”,देसाई सर ने सोफे की तरफ इशारा करके कहा
पृथ्वी सोफे पर आ बैठा और बगल में पड़े दूसरे सिंगल सोफे पर देसाई सर आ बैठे।
“आपके मैनेजर मिस्टर भरत ने बताया कि आप मुझसे कुछ जरुरी बात करना चाहते है”,पृथ्वी ने सीधा मुद्दे पर आकर कहा
देसाई सर ने पृथ्वी को देखा और थोड़ा ठहरकर कहा,”मैं तुम्हे एक ऑफर देना चाहता हूँ पृथ्वी”
पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से देसाई सर को देखने लगा और देसाई सर ख़ामोशी से पृथ्वी के जवाब का इंतजार करने लगे
( नीलेश का अपमान कर क्या प्राची ने बढ़ा ली है अपनी मुसीबते ? वो कौनसा पल था जब पहली बार अवनि गयी थी पृथ्वी से दूर ? आखिर मिस्टर देसाई कौनसा ऑफर देना चाहते है पृथ्वी को ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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