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Pasandida Aurat Season 2 – 62

Pasandida Aurat Season 2 – 62

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
मीटिंग रूम में देसाई सर बैठे थे और उनका मैनेजर उनके बगल में खड़ा था। देसाई सर के सामने ही बैठे थे मिस्टर अविनाश कपूर और उनके छोटे भाई विक्रम कपूर जो कि इस कम्पनी में फायनेंस करने वाले थे। अविनाश का मैनेजर उसके बगल में हाथ बांधकर खड़ा था और लीगल टीम का लॉयर पास ही कुर्सी पर बैठा था। देसाई ग्रुप के स्टाफ से भी कुछ लोग वहा बैठे थे और एक कुर्सी अभी भी खाली थी जो ठीक मिस्टर देसाई की कुर्सी के बगल में थी।

अविनाश ने देखा काफी देर से सब शांत बैठे है , देसाई सर ना मीटिंग शुरू कर रहे है ना ही कुछ बात कर रहे है तो उसने कहा,”मिस्टर देसाई ! आप किसका इंतजार कर रहे है , क्या कोई आने वाला है ?”
“इंतजार करवाने के लिए माफ़ी चाहूंगा मिस्टर कपूर ! एक बहुत ही ख़ास इंसान यहाँ आने वाला है और आज की मीटिंग उनके बिना अधूरी है,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने कहा
“आखिर ऐसा कौन है , जिसका इंतजार आप कर रहे है ?”,अविनाश ने मुस्कुराकर पूछा

मिस्टर देसाई अविनाश की बात का जवाब देते इस से पहले मीटिंग रूम का दरवाजा खुला और प्राची अंदर आयी। ब्राउन शर्ट और ब्लैक पेंट में प्राची इस वक्त वक्त बला की खूबसूरत लग रही थी। बालों को समेटकर पोनी टेल बनाया हुआ था , आँखों में गहरा काजल , होंठो पर गहरी लाल रंग की लिपस्टिक और चेहरे पर गजब का कॉन्फिडेंस नजर आ रहा था। विक्रम ने जैसे ही प्राची को वहा देखा हैरानी से उसकी आँखे बड़ी हो गयी। उसे बीती रात बार में प्राची हुई मुलाकात याद आ गयी।

उसने सोचा नहीं था उसकी प्राची से दोबारा मुलाकात होगी वो भी इतनी जल्दी। प्राची अपनी जगह पर आकर खड़ी हो गयी और सबसे पहले देर से आने के लिए माफ़ी मांगी और फिर अपना परिचय दिया।
प्राची के इस बर्ताव से मिस्टर देसाई जहा हैरान थे वही अविनाश काफी इम्प्रेस हुआ। मिस्टर देसाई ने सबको देखा और कहा,”आज का प्रोजेक्ट मिस प्राची आप सबको बताएंगी”
प्राची ने सुना तो अपनी जगह से उठी और मीटिंग रूम में लगी स्क्रीन के पास चली आयी।

उसने अपना लेपटॉप ऑन किया और फिर बहुत ही अच्छे से सब समझाने लगी। प्राची के नॉलेज और उसके समझाने के तरीके से सभी काफी इम्प्रेस थे और विक्रम तो बस मुस्कुराते हुए एकटक उसे देख रहा था। प्राची जैसी खूबसूरत लड़की इतनी टेलेंटेड भी थी ये देखकर ही विक्रम तो उस पर फ़िदा हो गया हालाँकि प्राची को नशे की वजह से विक्रम बिल्कुल याद नहीं था। मीटिंग 45 मिनिट चली और उसके बाद मिस्टर कपूर ने ख़ुशी ख़ुशी मिस्टर देसाई के साथ डील फिक्स कर दी साथ ही विक्रम भी इस प्रोजेक्ट पर फायनेंस करने को तैयार हो गया।

मीटिंग के बाद मिस्टर देसाई ने सबको लंच के लिए इन्वाइट किया और अपने मैनेजर से ऑफिस के बगल वाले होटल में लंच अरेंज करने को कहा।
सभी एक एक करके मीटिंग रूम से बाहर चले आये। प्राची भी ख़ामोशी से अपना लेपटॉप और फाइल्स उठाकर मीटिंग रूम से बाहर आयी। विक्रम शायद उसी के आने का इंतजार कर रहा था। प्राची के हाथो में सामान देखकर कहा,”आपके हाथो में सामान ज्यादा है , लाईये कुछ मैं पकड़ लेता हूँ”

प्राची ने सुना तो एक नजर विक्रम को देखा और कहा,”No Thankyou”
प्राची ने कहा और जैसे ही आगे बढ़ने लगी विक्रम ने कहा,”मैं बस आपकी मदद कर रहा था”
प्राची ने फिर विक्रम को देखा और इस बार उसकी आँखों में हल्का सा गुस्सा था , उसने बहुत ही सहजता से कहा,”लगता है आपको लड़कियों की मदद करने का कुछ ज्यादा ही शौक है,,,,,,पर मुझे आपकी मदद नहीं चाहिए,,,,,,,,,,!!!”

इतना कहकर प्राची वहा से चली गयी और विक्रम ने उसे जाते देखा और धीरे से बड़बड़ाया,”बहुत जल्द तुम्हे मेरी मदद की जरूरत पड़ेगी मिस देसाई”

“वाह अवनि तुमने उस नकचढ़ी प्राची को क्या सबक सिखाया , आज के बाद वो पृथ्वी के आस पास भी नहीं फटकेगी”, अवनि के साथ शोरूम से बाहर आती सुरभि ने चहकते हुए कहा
अवनि चलते चलते रुकी और सुरभि की तरफ पलटकर कहा,”पता नहीं सुरभि मुझे उस वक्त क्या हो गया था ? मैंने बहुत शांति से उसे समझाने की कोशिश की लेकिन जब उसने कहा कि वो पृथ्वी से दूर नहीं रहेगी तभी मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया और मैंने,,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि कहते कहते रुक गयी तो सुरभि ने अपनी तरफ बात पूरी करके कहा,”और तुमने अपने दिल की सुनी , तुम्हारे दिल ने तुमसे कहा कि पृथ्वी सिर्फ तुम्हारा है और ये हक़ तुम से कोई भी प्राची नहीं छीन सकती बस इसलिए तुमने उस लड़की को उसकी सही जगह दिखा दी,,,,,,,,,हाह ! तुमने उसे अच्छा सबक  सिखाया अवनि,,,,,,,,,,,पृथ्वी के लिए तुम्हारे दिल में जो प्यार है वो उस वक्त तुम्हारी आँखों से साफ झलक रहा था”
सुरभि की बात सुनकर अवनि एकटक उसकी तरफ देखने लगी और फिर उस से नजरे चुराकर कहा,”ऐसा कुछ नहीं है”

“ऐसा ही है , अगर ऐसा नहीं होता तो उस वक्त उस लड़की की बाते सुनकर तुम इतनी बैचैन नहीं होती अवनि,,,,,,,,तुम नहीं भी कहोगी तब भी पृथ्वी के लिए तुम्हारा प्यार तुम्हारी आँखों में साफ नजर आता है,,,,,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने कहा
अवनि इस बात पर खामोश रही लेकिन उसका दिल , उसका दिल चीख़ चीख़ कर ये गवाही दे रहा था कि उसे पृथ्वी से मोहब्बत है। अवनि को खामोश देखकर सुरभि ने कहा,”लेकिन उस लड़की की हिम्मत और बेशर्मी तो देखो वह एक शादीशुदा लड़के के पीछे पड़ी है,,,,,,,!!”

मुझे कल पृथ्वी को उसके साथ भेजना ही नहीं चाहिए था”,अवनि ने खोये हुए स्वर में कहा
“क्या तुम फिर से पृथ्वी पर शक कर रही हो ?”,सुरभि ने पूछा
“नहीं सुरभि ! मैं ये कहना चाह रही हूँ कि मैंने उस लड़की की मदद करने के लिए पृथ्वी को उसके साथ भेजा जबकि मुझे उस लड़की के इरादे नहीं पता थे पर पृथ्वी शायद पहले से जानता था इसलिए वह मुझे बार बार मना कर रहा था और मैं पागल समझ ही नहीं पायी , उलटा मैंने उसे ही सुना दिया उसे कितना बुरा लगा होगा”,अवनि ने उदास होकर कहा

सुरभि ने सुना तो मुस्कुराई और कहा,”अवनि ! मुझे नहीं लगता वो पूकी कभी तुम से नाराज हो सकता है”
“पूकी ?”,अवनि ने पूछा
“अरे तुम्हारा पृथ्वी , वो तुमसे कभी नाराज हो ही नहीं सकता”,सुरभि ने कहा
“वैसे ये पूकी होता क्या है ?”,अवनि ने पूछा

जब एक लड़का किसी लकड़ी के प्यार में होता है तो वह उसकी ख़ुशी के लिए क्यूट हरकते करने लगता है , उस लड़की के सामने अपनी सख्त और सिग्मा पर्सनालिटी छोड़कर बिल्कुल मासूम और सीधा बन जाता है , उसी को पूकी कहते है”,सुरभि ने कहा
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा दी और कहा,”हाँ वो थोड़ा सा पूकी तो है”
सुरभि ने सुना तो खिलखिलाकर हंस पड़ी और फिर अवनि से कहा,”अच्छा सुनो ! अगर तुम्हे लगता है कि कल रात तुम्हारी जिद की वजह से उसे बुरा लगा होगा तो क्यों ना तुम उसे कुछ गिफ्ट करके सॉरी बोल दो”
 “पक्का ?”,अवनि ने पूछा

“हाँ बाबा पक्का ! किस लड़के को अच्छा नहीं लगेगा उसकी वाइफ या गर्लफ्रेंड उसे गिफ्ट दे। तुम अपनी पसंद से उसके लिए कुछ लो उसे जरूर पसंद आएगा वैसे भी आज शाम वह हम लोगो के साथ पिक्चर जाने वाला है तो वहा तुम उसे अपने हाथ से देना”,सुरभि ने कहा
“हम्म्म्म ठीक है,,,,,,,,,,,,,पृथ्वी के लिए मेरी तरफ से ये दूसरा तोहफा होगा”,अवनि ने कहा
“दूसरा तोहफा ! क्या तुम पहले भी उसे कोई तोहफा दे चुकी हो ?”,सुरभि ने हैरानी से पूछा

“दिया नहीं है , रखा है मेरे कमरे में रखी टेबल के दराज में , एक तोहफा और वो कुछ खत जो मैंने पृथ्वी के लिए लिखे पर उसे कभी भेज नहीं पायी ना कभी भेजने की हिम्मत हुई”,अवनि ने कहा
“ओह्ह्ह अवनि ! तुम कितनी बड़ी पागल हो , जब तुम उदयपुर से मुंबई आयी थी तब उन्हें साथ लेकर क्यों नहीं आयी ? मैं जानती हूँ उन खतो में तुम्हारी वो फीलिंग्स है जो तुमने आज तक पृथ्वी से नहीं कही , तुम्हे पृथ्वी को उन खतों के बारे में बता देना चाहिए अवनि,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने अवनि की बाँह छूकर कहा

अवनि ने सुरभि की तरफ देखा और कहा,”हर सही चीज अपने सही वक्त पर सही इंसान के पास पहुँच ही जाती है सुरभि , पृथ्वी को भी वो खत एक दिन जरूर मिलेंगे,,,,,,,,,!!!”
सुरभि ने सुना तो हामी में गर्दन हिलायी और कहा,”जब तुम्हे उस से इतनी मोहब्बत है तो तुम उस से कहती क्यों नहीं ?”

“सुरभि ! मुझे पहली बार विडिओ कॉल पर देखकर पृथ्वी ने मुझसे शादी करने का फैसला कर लिया था , उस वक्त मुझसे प्यार करने के लिए उसके लिए वो एक पल काफी था , मैं भी बस उसी एक पल का इंतजार कर रही हूँ। मैं अपनी भावनाओ को जबरदस्ती प्यार का नाम नहीं देना चाहती सुरभि , मुझे लेकर जो पृथ्वी ने महसूस किया वही अहसास मैं भी महसूस करना चाहती हूँ,,,,,,,,,,,,और यकीनन उस से प्यार करने के लिए वो एक पल काफी होगा”,कहते कहते अवनि की आँखों में नमी उभर आयी ये देखकर सुरभि ने उसके गाल को छुआ और बड़े प्यार से कहा,”वो पल तुम्हारी जिंदगी में बहुत जल्द आएगा अवनि,,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने सुना तो हामी में गर्दन हिला दी।
सुरभि ने अवनि की बाँह थामी और उसे लेकर आगे बढ़ते हुए कहा,”अब चलो भी मुझे बहुत भूख लगी है और मेरे पास तो कोई ऐसा भी नहीं है जिसके प्यार से मेरा पेट भर सके,,,,,,,,,,,!!!!”
अवनि ने सुना तो हँसते हुए सुरभि के साथ आगे बढ़ गयी और कहा,”मैं महादेव से प्रार्थना करुँगी तुम्हारी जिंदगी में भी एक अच्छे इंसान को भेजे जो तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करे”
सुरभि ने सुना तो हसने लगी और दोनों सहेलिया हँसते बातें करते सामने रेस्त्रो की तरफ बढ़ गयी

IT कम्पनी , सिरोही
अपने ऑफिस के केबिन में बैठे सिद्धार्थ का काम में मन नहीं लगा तो उसने लेपटॉप बंद किया और कलाई पर बंधी घडी में वक्त देखा। लंच ब्रेक होने में बस 5 मिनिट बचे थे इसलिए सिद्धार्थ उठा और केंटीन की तरफ चला आया। केंटीन जाने से पहले वह बाथरूम में आया और मुँह धोने लगा।

मुँह धोते हुए सहसा ही सुबह सुरभि से हुई बातें उसके कानो में गूंजने लगी “”तुम्हरे साथ इतना सब हो गया जानकर दुःख हुआ” , “ओह्ह्ह ऐसा क्या ! अभी तो तुम कैसे मेरे सामने रिक्वेस्ट कर रहे थे और अब तुम मुझ पर चिल्ला रहे हो” , “”हाँ हाँ ठीक है मैं तुम्हारी हेल्प करने के लिए तैयार हूँ लेकिन बदले में मुझे क्या मिलेगा ?” , “सिद्धार्थ ! क्या तुमने कभी मेरी पीठ पर लगे पंख देखे है ?” , “जब नहीं देखे तो आज के आज क्या उड़कर आ जाऊ मैं”

ये सब बातें याद आते ही सिद्धार्थ की आँखों के सामने सुरभि का वो गुस्से वाला चेहरा आ गया जो अब तक सिद्धार्थ ना जाने कितनी ही बार देख चुका था और जैसे ही आखरी शब्द याद आये सिद्धार्थ हसने लगा। वह धीरे धीरे हंसा और फिर जोर जोर से हसने लगा जबकि वह भूल गया था कि इस वक्त वह ऑफिस के बाथरूम में खड़ा है।
“आर यू ओके सिद्धार्थ ?”,सिद्धार्थ के सीनियर ने कहा जो वहा से निकलकर जा रहे थे।
सिद्धार्थ ने अपनी हंसी रोकी और कहा,”यस सर ! आई ऍम फाइन”

सीनियर ने सिद्धार्थ का कंधा थपथपाया और वहा से चला गया।
सिद्धार्थ ने शीशे में खुद को देखा और अपने बालों में से उंगलिया घुमाते हुए बोला,”हाह ये लड़की ! मैं अगर थोड़े दिन और इसके साथ रहा तो सच में पागल हो जाऊंगा,,,,,,,बस एक बार वो पापा से मिल ले उसके बाद हमेशा हमेशा के लिए मैं उसे अलविदा कह दूंगा,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने जेब से रूमाल निकाला अपने हाथ पोछे और बाथरूम से बाहर चला आया।

मौर्या Pvt. Ltd. कम्पनी , नवी मुंबई
दिनभर पृथ्वी काम करता रहा और दिनभर उसके दिमाग में बस अवनि चलती रही। उसने सुबह अवनि के हाथ से जो शर्ट छीनी थी वही शर्ट अब उसके जी का जंजाल बन चुकी थी। उस शर्ट की वजह से कही अवनि उसे गलत ना समझ ले , उस पर शक ना करने लगे पृथ्वी यही सब सोच रहा था।
लंच टाइम में सभी खाना खाने बैठे लेकिन पृथ्वी तो आज लंच लेकर ही नहीं आया था और ना ही बाद में उसके लिए घर से लंच आया।

पृथ्वी किसी सोच में डूबा अपनी कुर्सी पर बैठा था कि अपने हाथ में टिफिन थामे जयदीप केबिन में आया और पृथ्वी का कंधा थपथपाकर कहा,”अब इतना भी मत सोचो शाम में घर जाकर सॉरी बोल देना उसे,,,,,,,,,!!!”
जयदीप की आवाज से पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने अपनी जगह से उठकर हैरानी भरे स्वर में कहा,”आपको कैसे पता मैं अवनि के बारे में सोच रहा हूँ ?”जयदीप ने अपने बालों की तरफ इशारा करके कहा,”बेटा ! ये बाल मैं धूप में सफ़ेद नहीं किये है,,,,,,चलो आओ खाना खाते है , रीना ने मेरे लिए लंच भेजा है”

“ये चमत्कार कैसे हुआ ? सुबह तो वो आप से गुस्सा थी”,पृथ्वी ने कहा
“सॉरी माय डार्लिंग एक छोटा सा सॉरी बड़ी से बड़ी लड़ाई को खत्म कर सकता है और तुम चाहो तो तुम भी इसे आजमा सकते हो,,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर जयदीप ने कुर्सी खिसकाई और सबके साथ लंच करने आ बैठा।
पृथ्वी भी खोया हुआ सा कुर्सी पर आ बैठा और फिर सबके साथ मिलकर खाना खाने लगा।

खाना खाने के बाद अंकित किसी काम से बाहर चला गया और साथ में मनीष को भी ले गया। पृथ्वी अपनी कुर्सी पर बैठा शर्ट के बारे में सोच रहा था जो उसके बैग में था लेकिन तान्या और कशिश के सामने वह उसे बाहर कैसे निकाले ? बहुत देर तक अपने ही ख्यालो से उलझने के बाद पृथ्वी तान्या और कशिश की तरफ पलटा और कहा,”अह्ह्ह कशिश ! वो मेहता ग्रुप की फाइल लीगल डिपार्टमेंट में दी थी आज सुबह तुमने उसका काम पूरा नहीं हुआ अभी तक ?”

“पृथ्वी सर लंच से पहले ही मैंने आपको फाइल लाकर दे दी थी , वो देखिये वहा रखी है आपके टेबल पर”,तान्या ने कहा
पृथ्वी ने देखा फाइल पहले से टेबल पर रखी है तो झेंप गया और कहा,”ओह्ह्ह हाँ ! सॉरी मैंने देखा नहीं”
“इट्स ओके सर”,तान्या ने मुस्कुरा कर कहा और अपने काम में लग गयी।
“अब इन दोनों को यहाँ से कैसे भेजू ?”,पृथ्वी अपना नाख़ून चबाते हुए बड़बड़ाया और कुछ देर बाद कहा,”अह्ह्ह तान्या मैं देख रहा हूँ तुम दोनों सुबह काम में लगी हो , आई थिंक तुम दोनों को एक छोटा सा कॉफ़ी ब्रेक ले लेना चाहिए”

पृथ्वी की बात सुनकर तान्या और कशिश ने हैरानी से एक दूसरे की तरफ देखा और कशिश ने दबी आवाज में तान्या से कहा,”ये आज पृथ्वी सर को क्या हो गया है ? वो खुद हमे ब्रेक लेने के लिए कह रहे है,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ लगता है आज सूरज पश्चिम से निकला है”,तान्या ने भी दबे स्वर में कहा
आपस में खुसर फुसर कर के दोनों ने जैसे ही सामने देखा पाया कि पृथ्वी उन्हें ही देख रहा है तो कशिश ने कहा,”अह्ह्ह्ह लेकिन सर आपने ही तो मना किया है लंच के बाद नो ब्रेक”

“हाह ! तुम लोगो को मेरी बात को इतना भी सीरियस नहीं लेना चाहिए,,,,,,,जाओ जाकर कॉफी पीकर आओ और हाँ आराम से आना”,पृथ्वी ने कहा
“नहीं नहीं सर , हमारा कॉफी पीने का मन नहीं है”,तान्या ने कहा
“लेकिन मेरा है,,,,,,Go and get me some coffee”,पृथ्वी ने अपने लेपटॉप की तरफघूमकर कठोर स्वर में कहा
कशिश और तान्या चुपचाप उठी और केबिन से बाहर चली गयी। जैसे ही दोनों बाहर निकली पृथ्वी ने अपने सीने पर हाथ रखा और एक गहरी साँस ली।

वह अपनी जगह से उठा और जल्दी से अपने बैग से अपना शर्ट निकाला , उसे अच्छे से तह किया। लिपस्टिक का निशान शर्ट पर अभी तक था। पृथ्वी ने तह किये शर्ट को टेबल पर रखा और अपने फोन से एक फोटो लेते हुए खुद में ही बड़बड़ाया,”घर जाकर अवनि को ये तस्वीर दिखा दूंगा कि ये निशान उसकी लिपस्टिक का है जो कि गलती से लग गया और उसे सुबह के लिए सॉरी भी बोल दूंगा। वो पूछेगी मैंने शर्ट क्यों नहीं धोने दिया तो मैं उसे कह दूंगा कि मैं उसकी निशानी को मिटाना नहीं चाहता था बस इसलिए,,,,,,,,हाँ ये सही रहेगा , बस वो मुझ पर शक न करे”

पृथ्वी ने अपनी टेबल के ड्रॉवर का लॉक खोला और तह किया हुआ शर्ट सम्हालकर उसमे रख दिया जहा पहले से अवनि का क्लेचर और एक मैसेज नोट रखा था। पृथ्वी ने ड्रॉवर लॉक किया और वापस अपनी कुर्सी पर आ बैठा। अब उसका दिमाग शांत था और मन से जैसे कोई बड़ा बोझ उतर चुका था।

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
लंच के बाद मिस्टर देसाई ने प्राची को अविनाश और उनकी कम्पनी के स्टाफ से मिलवाया। मिस्टर कपूर जल्दी ही मिस्टर देसाई की इस कम्पनी में बड़े शेयर होल्डर बनने वाले थे और इसलिए उनके साथ रिलेशन अच्छे रहना मिस्टर देसाई के लिए बहुत जरुरी था। मिस्टर देसाई सबको छोड़ने ऑफिस के बाहर चले आये। प्राची को ना कपूर में दिलचस्पी थी ना ही उनके शेयर्स में इसलिए वह बाहर ना जाकर अपने केबिन में चली आयी। उसने टेबल पर रखा अपना पानी का बोतल उठाया और पीने लगी तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया
“यस ! कम इन”,प्राची ने कहा

अगली ही पल ड्राइवर अंदर आया और एक बैग प्राची की तरफ बढाकर कहा,”मैडम ! पृथ्वी सर ये कोट कल घर पर ही भूल गए थे”
प्राची ने ड्राइवर के हाथ से बैग लिया और उंगलियों से ही उसे वापस जाने का इशारा कर दिया। ड्राइवर वहा से चला गया।
प्राची ने बैग से पृथ्वी का कोट बाहर निकाला और उसे देखते ही उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी। प्राची ने बड़े प्यार से अपनी उंगलियों से उस कोट को सहलाया और कहा,”देखा पृथ्वी ! किस्मत भी चाहती है कि हम बार बार मिले,,,,,,,,,,,,!!!”

( क्या आगे चलकर प्राची को लेनी पड़ेगी विक्रम की मदद ? क्या अवनि के लिखे वो खत कभी पंहुच पाएंगे पृथ्वी तक ? क्या पृथ्वी अपने सॉरी से कर पायेगा अवनि का शक दूर ? और आज का सबसे अहम् सवाल क्या सच में बार बार पृथ्वी और प्राची मिलवाना चाहती है किस्मत ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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