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Pasandida Aurat Season 2 – 59

Pasandida Aurat Season 2 – 59

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

सुरभि की बात सुनकर पृथ्वी चुपचाप किचन से बाहर चला आया। सुरभि ने चाय से भरे कप ट्रे में रखे और बाहर हॉल में चली आयी। सुरभि को देखते ही पृथ्वी दूसरी तरफ देखने लगा ये देखकर सुरभि ने कहा,”ओह्ह हो तुम तो मुझसे ऐसे शरमा रहे हो जैसे मैंने तुमसे कोई आउट ऑफ़ सेलेबस क्वेश्चन पूछ लिया हो , रिलेक्स सबकी जिंदगी में ये दिन आता है अब इसमें इतना भी क्या शर्माना ?”


“अब समझ आया उस गधे अनिकेत ने तुम से ब्रेकअप क्यों किया ?”,पृथ्वी ने चाय का कप उठाते हुए कहा
“कोई वो सच में गधा है”,सुरभि ने भी अपना कप लिया और सोफे पर आ बैठी
अवनि उठ चुकी थी और मुँह धोकर बाहर चली आयी। उसने देखा आज चाय पहले से तैयार है तो उसे थोड़ी हैरानी हुई। वह हॉल में चली आयी और चाय का कप उठाकर सुरभि से कहा,”तुम आज जल्दी उठ गयी ?”
“हाँ ! इन्फेक्ट मैं पूरी रात सोई ही नहीं”,सुरभि ने उदासी भरे स्वर में कहा


“सोई नहीं ? इसलिए मैं कहा था अंदर जाकर सो जाओ यहाँ सोफे पर सोना अनकम्फर्टेबल होता है”,पृथ्वी ने कहा
“ओह्ह पृथ्वी ! ऐसा नहीं है मैं बस किसी बात से परेशान थी इसलिए नहीं सोई और तुम भूल रहे हो अनकम्फर्टेबल ये तुम्हारे लिए भी है,,,,,,,,,जब इतना बड़ा कमरा है और उसमे इतना बड़ा बेड है तो फिर तुम यहाँ क्यों सोते हो ?”,सुरभि ने कहा तो पृथ्वी ख़ामोशी से अवनि को देखने लगा।


अवनि के पास भी सुरभि की इस बात का कोई जवाब नहीं था इसलिए उसने कहा,”ये छोडो ये बताओ कि तुम परेशान क्यों थी , फिर से कुछ हुआ ही क्या ?”
 सुरभि ने सुना तो उदास होकर कहा,”होना क्या है अवनि मैं बस खुद को ये यकीन दिलाने की कोशिश कर रही हूँ कि मैंने एक बहुत ही गलत इंसान से प्यार किया”
सुरभि की उदासी देखकर अवनि का मन भी भारी हो गया और उसने कहा,”क्या हुआ सुरभि ? अनिकेत ने फिर कुछ कहा क्या तुमसे ?”


“वो शादी कर रहा है अवनि , वो भी किसी और से”,सुरभि ने उदास होकर कहा
अवनि ने सुना तो उसे बहुत दुख हुआ साथ ही अनिकेत पर गुस्सा भी आया तो उसने कहा,”अनिकेत ऐसा कैसे कर सकता है ? वो तो तुमसे प्यार करता है न सुरभि फिर वो किसी और से शादी कैसे कर सकता है ?”


अवनि की बात सुनकर जवाब पृथ्वी ने दिया,”वो सुरभि से नहीं बल्कि उस कम्फर्ट से प्यार करता है जो उसे चाहिए और जब वो उसे सुरभि से नहीं मिला तो उसने किसी और में ढूंढ लिया,,,,,,,,,,अवनि कभी कभी 7 साल रिश्ते में रहकर भी दो लोग शादी नहीं करते और कभी कभी किसी से शादी करने के लिए 7 मिनिट भी काफी होते है और ये सारा खेल इस दिमाग का है ,

अनिकेत ने भी वही किया जब उसे ये अहसास हुआ कि सुरभि उसके हिसाब से नहीं चलेगी और उसकी जायज-नाजायज बात नहीं मानेंगी तो उसने अपने लिए ऐसा हमसफ़र चुन लिया जो उसकी हर बात माने,,,,,,,,,और इस बात के लिए तुम्हे अफ़सोस करने की जरूरत नहीं है”
पृथ्वी की बात सुनकर सुरभि उसे देखने लगी और अवनि ने भी पृथ्वी की तरफ देखकर मायूसी से कहा,”लेकिन सुरभि उस से प्यार करती है पृथ्वी,,,,,,,,,!!!!”


“अवनि ! बेशक सुरभि ने उस से प्यार किया लेकिन वो सुरभि के साथ के लायक नहीं है अगर लायक होता या इसके प्यार को समझता तो सुरभि यहाँ नहीं वहा उदयपुर में उसके साथ होती,,,,,,,,,,एंड प्लीज तुम ये अनिकेत को डिफेंड करना बंद करो , वो गलत है और यही सच है”,पृथ्वी ने थोड़ा कठोरता से कहा तो अवनि खामोश हो गयी।
सही तो कह रहा था पृथ्वी अगर अनिकेत को सच में सुरभि से प्यार होता या उसके साथ जिंदगी बितानी होती तो क्या वह सुरभि की भावनाये नहीं समझता।

सुरभि ने देखा पृथ्वी और अवनि उसके लिए आपस में लड़ रहे है , बहस कर रहे है तो उसने अपनी आँखों के किनारे साफ किये और कहा,”अवनि , पृथ्वी शांत हो जाओ प्लीज , तुम दोनों आपस में मत लड़ो,,,,,,,,,,,,!!!”
“मैं लड़ नहीं रहा सुरभि मैं बस इसे समझा रहा हूँ , तुम बताओ क्या मैंने कुछ गलत कहा ?”,पृथ्वी ने पूछा
“नहीं पृथ्वी तुमने सही कहा और अवनि मैं तुमसे भी कहना चाहती हूँ , जाने दो अनिकेत को मैं बेहतर डिजर्व करती हूँ और फ़िलहाल मैं तुम दोनों के साथ खुश हूँ”,सुरभि ने प्यार से कहा  


पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुरा दिया और अवनि ने भी अपनी पलकें झपकाकर हामी में गर्दन हिला दी
तीनो ने अपनी अपनी चाय ख़त्म की और पृथ्वी ने कहा,”सो आज का क्या प्लान है ?”
“मैं सोच रही हूँ क्यों ना हम सब मंदिर जाए”,अवनि ने कहा
“बहुत ही बोरिंग ख्याल है आपका मैडम जी”,पृथ्वी ने इतराकर कहा तो अवनि ने मुँह बनाया और दूसरी तरफ देखने लगी।


अवनि का पृथ्वी की किसी बात पर चिढ जाना और यू मुँह बनाना पृथ्वी को बहुत अच्छा लगता था। वह अवनि को देखकर मुस्कुराया और कहा,”मेरे ख्याल से तुम दोनों को शॉपिंग पर जाना चाहिए और बाहर ही एक बढ़िया लंच करना चाहिए उसके बाद शाम में यहाँ के थियेटर में एक अच्छी फिल्म देखनी चाहिए और फिर मुंबई की नाईट लाइफ को इंजॉय करना चाहिए”
“परफेक्ट”,सुरभि ने पृथ्वी को हाई फाइव देते हुए कहा


अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”और तुम ! तुम साथ नहीं आओगे ?”
“मुझे ऑफिस जाना पड़ेगा ना बेटा,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर बड़े ही प्यार से कहा लेकिन अगले ही पल उसे अहसास हुआ कि सुरभि भी वहा मौजूद है तो उसने पीछे हटकर कहा,”जयदीप सर के साथ मुझे आज वर्ली जाना है वहा किसी क्लाइंट के साथ मीटिंग है और लंच भी तो मैं नहीं आ पाऊंगा,,,,,,,,,,तुम दोनों एन्जॉय करना और कुछ जरूरत हो तो मुझे फ़ोन करना”


“हम्म्म ठीक है,,,,,,,,!!!”,अवनि ने उदास होकर कहा , इन दिनों धीरे धीरे उसे पृथ्वी की कमी खलने लगी थी बस उसने कभी खुलकर इस भावना को जाहिर नहीं किया

“पृथ्वी ! शॉपिंग और लंच पर तो तुम नहीं आ सकते लेकिन शाम में हम लोगो के साथ पिक्चर देखने तो चल सकते हो ना ?”,सुरभि ने कहा
“हाँ क्यों नहीं ? मैं ऑफिस से सीधा थियेटर ही आ जाऊंगा,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने उठते हुए कहा
“तुम नहा लो मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बना देती हूँ”,अवनि ने उठते हुए कहा और किचन की तरफ चली गयी


पृथ्वी जाने लगा तो सुरभि ने उसे अपने पास आने का इशारा किया। सुरभि पृथ्वी के पास आया तो सुरभि ने दबे स्वर में कहा,”शाम में जब तुम थियेटर आओ तो सफ़ेद गुलाब और नीले ऑर्किड के फूलो का एक बुके लेकर आना , अवनि को ये दोनों फूल बहुत पसंद है और अगर तुम उसे अपने हाथो से दोगे तो उसे अच्छा लगेगा”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और फिर उसे याद आया कि शादी के बाद उसने अभी तक अवनि को ना कोई फूल दिया ना ही कोई तोहफा , उसने सुरभि को थैंक्स कहा और वहा से चला गया।

पृथ्वी को जाते देखकर सुरभि ने मन ही मन कहा,”ओह्ह्ह पृथ्वी ! तुम सच में बहुत मासूम हो , अवनि के लिए तुम्हारा प्यार तुम्हारी आँखों से साफ झलकता है। हमेशा ऐसे ही रहना और उस से इतनी ही मोहब्बत करना , अवनि को तुम्हारी बहुत जरूरत है,,,,,,,,,तुम ही हो जो उसके दिल में फिर से मोहब्बत जगा सकते हो और उसे मोहब्बत में फिर से यकीन दिला सकते हो”


टेबल पर रखा अवनि का फोन बजा , अवनि किचन में थी इसलिए सुरभि ने अवनि का फोन उठाया और जैसे ही स्क्रीन पर सिद्धार्थ का नाम देखा सुरभि की भँवे तन गयी और वह धीरे से बड़बड़ाई,”ये चिलगोजा अवनि को फोन क्यों कर रहा है ?”
सुरभि ने साइड बटन दबाकर फोन साइलेंट किया और फिर अवनि का फोन लेकर बालकनी में चली आयी। उसने फोन उठाया और कान से लगाकर धीमी आवाज में कहा,”तुम्हारे अंदर शरम नाम की चीज है भी या नहीं , तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई अवनि को फोन करने की , आखिर चल क्या रहा है तुम्हारे दिमाग में हां ?

कही तुम अवनि और पृथ्वी के बीच आग लगाने की कोशिश तो नहीं कर रहे ? देखो मिस्टर सिद्धार्थ अगर तुमने ऐसा घटिया ख्याल अपने दिमाग में भी लाया तो मैं तुम्हे छोडूंगी नहीं समझे। अवनि और पृथ्वी एक दूसरे के साथ खुश है , इन्फेक्ट बहुत खुश है और तुम उन दोनों की जिंदगी में दखल देना बंद करो,,,,,,,,,!!!!”


सुरभि ने ना सिद्धार्थ को हेलो कहा ना ही उस बेचारे की बात सुनी वह तो बस फ़ोन उठाते ही उस पर बरस पड़ी
फ़ोन के दूसरी तरफ जब सिद्धार्थ ने ये सुना तो अपना सर पकड़ लिया और कहा,”thank god सुरभि फोन तुमने उठाया , एक्चुली मुझे तुमसे ही बात करनी थी”
सुरभि ने सुना तो गिरते गिरते बची आखिर सिद्धार्थ को उस से क्या बात करनी है वो भी अवनि के फोन पर,,,,,,,,,,!!!!”

“मुझसे ! मुझसे क्या बात करनी है तुम्हे ? ओह्ह्ह हेलो तुम्हारे साथ एक दो बार बैठकर खाना क्या खा लिया तुम तो फ्रेंक होने लगे , भूलो मत मैं सुरभि हूँ और मैं तुम्हे जरा भी पसंद नहीं करती,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने चिढ़े हुए स्वर में कहा
“हाँ हाँ मैं तो जैसे तुम्हारे प्यार में यहाँ मरा जा रहा हूँ,,,,,,,,,अपनी बकवास बंद करो और पहले मेरी बात ध्यान से सुनो”,सिद्धार्थ ने भी चिढ़कर कहा क्योकि वह सुरभि से बात करे और उसका मूड खराब ना हो ऐसा भला कैसे हो सकता है ?

“हाँ बोलो और जल्दी बोलो मेरे पास टाइम नहीं है”,सुरभि ने इतरा कर कहा
सिद्धार्थ इस वक्त अपने घर की छत पर था और सुरभि की बात सुनकर उसका दिल किया नीचे कूद जाए लेकिन उसने जैसे तैसे करके खुद को शांत रखा और फिर सुरभि को सब बता दिया। कैसे उसकी पड़ोसन ने उन दोनों को साथ देखा , कैसे उसने सिद्धार्थ के मम्मी पापा को बताया और उसके बाद सिद्धार्थ के मम्मी पापा का रिएक्शन , सिद्धार्थ ये सब बताते हुए बहुत ही परेशान और उदास था।

“प्लीज सुरभि ! मैं रिक्वेस्ट करता हूँ एक बार आकर मेरे पापा से मिलकर उन्हें ये क्लियर कर दो कि तुम्हारे और मेरे बीच में कुछ नहीं है मैं बस उस दिन तुम्हारी  हेल्प करने के लिए तुम्हे घर लाया था , प्लीज प्लीज प्लीज मैं हाथ जोड़ता हूँ”,सिद्धार्थ ने गिड़गिड़ाकर कहा
सुरभि ने सुना तो पहले तो मुस्कुराई और फिर ख़ुशी से बालकनी में यहाँ वहा डांस करने लगी। सिद्धार्थ को मुसीबत में देखकर उसे जो ख़ुशी हो रही थी उसे सुरभि शब्दों में बया नहीं कर पा रही थी।

सुरभि फोन कान से लगाये कभी सोफे पर चढ़ती , कभी बालकनी में झूलती , कभी अपने हाथ को हवा में उठाकर ख़ुशी जताती तो कभी दिवार से चिपककर खुश होती। जब से सिद्धार्थ ने अवनि को परेशान किया था तब से ही सुरभि सिद्धार्थ को ऐसे रोते गिड़गिड़ाते देखना चाहती थी और आज जाकर उसका ये ख्वाब पूरा हुआ। किचन से कमरे की तरफ जाते हुए अवनि ने सुरभि को सोफे पर चढ़कर डांस करते देखा तो अपनी भँवे उचकाई सुरभि रुकी और झेंपकर ना में गर्दन हिला दी।

अवनि वहा से चली गयी तो सुरभि सोफे से नीचे उतरी और वापस बालकनी में आकर फोन कान से लगाकर बड़े ही अफ़सोस भरे स्वर में कहा,”तुम्हरे साथ इतना सब हो गया जानकर दुःख हुआ”
सुरभि ने जिस तरह से कहा सिद्धार्थ समझ गया कि सुरभि उसे ताना मार रही है तो उसने चिढ़कर कहा,”मेरे जले पर नमक छिड़कना बंद करो तुम”
“ओह्ह्ह ऐसा क्या ! अभी तो तुम कैसे मेरे सामने रिक्वेस्ट कर रहे थे और अब तुम मुझ पर चिल्ला रहे हो”,सुरभि ने भी चिढ़कर कहा

सिद्धार्थ की इस वक्त हालत ऐसी थी कि या तो सुरभि का गला दबा दे या फिर खुद जाकर अपना सर किसी दिवार पर मार ले फिर भी उसने अपनी सहनशीलता का परिचय देते हुए एक लम्बी गहरी साँस ली और कहा,”सुरभि ! आई रिक्वेस्ट यू प्लीज , प्लीज मेरी हेल्प करो प्लीज,,,,,,,,,,पापा मुझसे बहुत गुस्सा है और मुझे लेकर वो कोई गलत फैसला ले उस से पहले मैं उनकी ये ग़लतफ़हमी दूर कर देना चाहता हूँ , प्लीज”
सिद्धार्थ को इतना प्लीज करते देखकर सुरभि ने कहा,”हाँ हाँ ठीक है मैं तुम्हारी हेल्प करने के लिए तैयार हूँ लेकिन बदले में मुझे क्या मिलेगा ?”

“तुम जो कहोगी मैं वो करूँगा बस तुम एक बार पापा से मिलकर उनसे ये कह दो कि तुम्हारे और मेरे बीच में कुछ नहीं है,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने जल्दबाजी में कहा और यही तो सुरभि चाहती थी इसलिए कहा,”ठीक है मैं उन से मिल लुंगी ! मैं अभी मुंबई में हूँ और मुझे यहाँ काफी अच्छा लग रहा है सो वापस आने के बाद या फिर होली के बाद मैं उनसे मिल लूँगी”

सिद्धार्थ ने सुना तो टेंशन में आ गया क्योकि होली पर घर पर मेहमान आने वाले थे और जगदीश जी इस बार किसी भी हाल में सिद्धार्थ का रिश्ता तय करने वाले थे फिर चाहे उसमे सिद्धार्थ की मर्जी हो या ना हो इसलिए उसने कहा,”अरे नहीं नहीं , तुम्हे आज ही उनसे मिलना होगा , परसो होली है और मैं नहीं चाहता कुछ गलत हो,,,,,,,,,,!!”

“सिद्धार्थ ! क्या तुमने कभी मेरी पीठ पर लगे पंख देखे है ?”,सुरभि ने कहा
“नहीं,,,,,,,,,,,मतलब ये क्यों पूछ रही हो तुम ?”,सिद्धार्थ ने असमझ की स्तिथि में कहा
“जब नहीं देखे तो आज के आज क्या उड़कर आ जाऊ मैं ?”,सुरभि ने गुस्से से कहा
“मेरा मतलब तुम अगर फ्लाइट लोगी तो 2-4 घंटे में यहाँ पहुंच जाओगी एंड डोंट वरी मैं सब अरेंज कर दूंगा बस तुम आ जाओ”,सिद्धार्थ ने कहा

“आज तो मेरा मुंबई घूमने का प्लान है और मेरे हैंडसम जीजू ने मेरे और अपनी ब्यूटीफुल वाइफ के साथ शाम में फिल्म देखने का प्लान बनाया है जिसे मैं तुम्हारे लिए बिल्कुल स्पोइल नहीं कर सकती,,,,,,हाँ अब तुम इतनी रिक्वेस्ट कर ही रहे हो तो मैं कल सुबह यहाँ से निकल जाउंगी,,,,,,,,,!!!!”,सुरभि ने कहा
“ठीक है”,सिद्धार्थ ने राहत की साँस लेकर कहा

“और हाँ ये अवनि का फोन है तो दोबारा इस पर फोन मत करना,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने कहा
“अरे लेकिन अगर मुझे तुमसे बात करनी हुई तो मैं कैसे करूंगा ? तुम्हारा नंबर नहीं है मेरे पास,,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने अपनी मज़बूरी जताई
“सिद्धू !! तुम इतने लकी भी नहीं हो कि सुरभि शर्मा का नंबर तुम्हारे फोन में हो,,,,,,,,,,बाय”,कहकर सुरभि ने फोन काट दिया और ख़ुशी से उछलकर जैसे ही पलटी तौलिये से अपने बालों को पोछते हुए पृथ्वी बालकनी की तरफ आया और सुरभि से कहा,”क्या हुआ तुम्हे ?”

“अह्ह्ह्हह कुछ कुछ भी तो नहीं,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर सुरभि वहा से चली गयी और चलते चलते उसने अवनि के फोन से सिद्धार्थ का की कॉल डिटेल्स को डिलीट किया और फिर उसका नंबर हमेशा के लिए बंद कर दिया।
“अजीब लड़की है , कभी एकदम से उदास हो जाएगी तो कभी इतना खुश की यकीन करना मुश्किल हो जाये”,पृथ्वी अपने बालों को पोछते हुए बड़बड़ाया।

 

अवनि कमरे में आयी और धुलने वाले कपडे उठाकर वाशिंग मशीन की तरफ चली आयी। उसने अपने , सुरभि और पृथ्वी के कपडे मशीने में डालने शुरू किये। वह एक एक करके कपडे मशीन में डाल रही थी और उसके दिमाग में चल रहा था पृथ्वी का मासूम चेहरा जो उसने रात में सोते वक्त देखा था। पृथ्वी के कपड़ो में उसका एक सफ़ेद शर्ट भी था जिसे अवनि ने साइड में करने के लिए अपने हाथो में लिया और मन ही मन खुद से कहने लगी,”ये तू क्या कर रही है अवनि ,  आखिर क्यों तुमने पृथ्वी को खुद से इतना दूर रखा है ?

तुम्हारी जिंदगी में जो कुछ भी हुआ उसमे पृथ्वी का क्या कसूर ? वो तो तुम्हारी जिंदगी में उस पल आया था जब तुम पूरी तरह टूट चुकी थी और तुम्हे किसी ऐसे इंसान की जरूरत थी जो तुम्हारे दर्द की दवा बन सके , तुम्हे गलत रिश्तो से बाहर निकाल सके , तुम्हारे मन को समझ सके और जो तुम्हारा टुटा दिल जोड़ सके। पृथ्वी ने तुम्हारे लिए वो सब किया अवनि जो वह कर सकता था और वह आज भी कर रहा है फिर तुम क्यों उसे और उसके प्यार को समझ नहीं पा रही। तुम्हारा पति होने के बाद भी कल एक कमरे में क्यों तुमने उसे अजनबी महसूस करवाया ?

उस वक्त उसकी आँखों में कितनी तकलीफ थी,,,,,,,,,,!!!!”
“अवनि,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कमरे में आकर कहा तो अवनि की तन्द्रा टूटी और वह शर्ट हाथो में थामे पलटकर बोली,”हाँ,,,,,!!!”
“अह्ह्ह्ह वो नाश्ता तैयार है ? एक्चुली मुझे थोड़ा जल्दी निकलना होगा वरना ट्रेन निकल जाएगी”,पृथ्वी ने कहा
“हाँ मैं आती हूँ”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी चला गया।

अवनि ने सफ़ेद शर्ट को जैसे ही मशीन में डालने के लिए बढ़ाया उसकी नजर शर्ट पर लगी लिपस्टिक के निशान पर पड़ी। अवनि को अंदाजा भी नहीं था कि ये निशान उसी के होंठो का है जो पृथ्वी का बटन लगाते हुए इस शर्ट पर लगा था। वह हैरानी से उस निशान को देखने लगी और उसके मन में कई ख्याल एक साथ चलने लगे

कमरे से बाहर निकलकर पृथ्वी को सहसा ही याद आया कि अवनि के हाथो में उसका वो सफ़ेद शर्ट था। कही अवनि उसे धुलने के लिए ना डाल दे सोचकर पृथ्वी वापस कमरे में आया और अवनि के हाथ से वो शर्ट लेकर कहा,”अह्ह्ह्ह ! इसे रहने दो”
अवनि ने सुना तो उसके ख्याल उस पर और हावी होने लगे क्या सच में पृथ्वी उस से कुछ छुपाना चाहता था ?

( क्या सुरभि के कहने पृथ्वी लेकर आएगा अवनि के उसके पसंदीदा फूल ? क्या सुरभि जाएगी वापस सिरोही और करेगी सिद्धार्थ की मदद ? क्या अवनि को होने लगा है पृथ्वी के प्यार पर शक ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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