Pasandida Aurat Season 2 – 51
देर रात पृथ्वी , अवनि और सुरभि के साथ बैठकर बातें करता रहा और सुरभि को समझाता रहा। अवनि इमोशनल थी और हर बार दिल से फैसले लेती थी वही पृथ्वी प्रेक्टिकल था और समझदारी से हर फैसला करता था। पृथ्वी ने सुरभि को जितना भी समझाया उस से अवनि अभी भी कही न कही असहमत थी और चाहती थी सुरभि अनिकेत को एक मौका और दे क्यों क्योकि अनिकेत बुरा लड़का नहीं था। पृथ्वी समझ गया कि अवनि के सामने सुरभि को समझाने का कोई फायदा नहीं इसलिए वह उठा और अंगड़ाई लेते हुए कहा,”सुरभि ! तुमने रास्ते में मुझसे कहा था कि तुम्हे चाय पीनी है , अवनि बहुत अच्छी चाय बनाती है”
“तुम मुझे यहाँ से भगाना चाहते हो ?”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर पूछा
“मैं तो चाहता हूँ जिंदगीभर तुम मेरे सामने रहो”,पृथ्वी ने प्यार से अवनि की तरफ देखकर कहा और फिर अगले ही पल सुरभि की तरफ देखकर कहा,”लेकिन तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड पहली बार घर आयी है और उसका चाय पीने का बहुत मन है”
पृथ्वी की बात सुनकर सुरभि ने जैसे ही ना में गर्दन हिलायी पृथ्वी ने अपना पैर उसके पैर पर मारा और सुरभि के मुँह से आह निकली
“क्या हुआ तुम चिल्लाई क्यों ?”,अवनि ने सुरभि की तरफ देखकर पूछा
“अह्ह्ह्ह वो सर में थोड़ा दर्द है न इसलिए,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने अपना हाथ सर से लगाकर कहा
“देखा बेचारी इतनी टेंशन में है कि इस का सर दर्द करने लगा , इसलिए मैं कह रहा था कि तुम्हे इसके लिए चाय बनानी चाहिए”,पृथ्वी ने मासूमियत भरे स्वर में कहा
“ठीक है मैं बनाती हूँ”,अवनि ने उठते हुए कहा और वहा से चली गयी।
अवनि के जाते ही सुरभि ने उठकर एक घुसा पृथ्वी की बाँह पर मारा और कहा,”स्टुपिड इतनी जोर से क्यों मारा ?”
पृथ्वी ने सुरभि की टीशर्ट का कोना पकड़ा और उसे बालकनी की तरफ लेकर चला आया।
सुरभि पृथ्वी की सामने खड़ी थी , पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और फिर कहा,”अब मेरी बात ध्यान से सुनो ! अवनि के सामने मैं तुम्हे ये सब नहीं कह सकता वरना वो मुझे ही विलीन समझने लगेगी। जितना तुमने बताया उसके बाद मैं बस यही कहूंगा सुरभि कि तुम्हे अनिकेत को छोड़कर अपनी लाइफ में आगे बढ़ जाना चाहिए। देखो हम लड़को में एक खासियत होती है अगर हमे सच में किसी से शादी करनी है और उसके साथ रहना है हम उसके लिए सब करेंगे लेकिन अगर हमे किसी से शादी नहीं करनी तो फिर हम उसे इधर उधर के बहाने देंगे
सामने वाले के सामने ऐसी बाते रख देंगे जिस से सामने वाला खुद हमे छोड़ दे या फिर मज़बूरी बताकर हम उन्हें छोड़ देते है। मैं ये नहीं कहूंगा अनिकेत गलत लड़का है लेकिन हाँ वो तुम्हारे लायक नहीं है”
सुरभि ने सुना तो उसकी आँखों में नमी उभर आयी और उसने कहा,”तो फिर कौन है मेरे लायक ?”
पृथ्वी ख़ामोशी से सुरभि की आँखों में देखता रहा और फिर बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा,”जो तुम्हे कभी बदलने की कोशिश ना करे , तुम जैसी हो तुम्हे वैसी एक्सेप्ट करे ,
जो तुम्हारी अन्नोयिंग पर्सनालिटी के साथ भी ख़ुशी ख़ुशी रह सके और जो बहुत शांति से तुम्हे झेल सके,,,,,,,,,,एक सही लड़का कभी तुम्हे तुम्हारे बेटरमेंट के लिए बदलना चाहेगा ना कि अपने कम्फर्ट के लिए,,,,,,,,,,तुम ऐसा लड़का डिजर्व करती हो सुरभि जिसे तुम्हारी मेहनत की कदर हो और जो तुम्हे हर सिचुएशन में सम्हाल सके,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
“ऐसा लड़का इस दुनिया में नहीं मिलेगा,,,,,,,,!!”,सुरभि ने मायूसी से कहा
“हाँ तुम्हारे साथ बहुत ही सब्र वाला बन्दा चल सकता है वरना हरकतें तो तुम्हारी मार खाने वाली है”,पृथ्वी ने मुँह बनाकर कहा और अपनी बाँह सहलाई जिस पर पर कुछ देर पहले ही सुरभि ने जबरदस्त मुक्का मारा था।
सुरभि ने सुना तो पृथ्वी को घूरकर देखा और कहा,”तुम मेरा मजाक उड़ा रहे हो ?”
“अरे नहीं मैं तो बस सच्चाई बता रहा हूँ,,,,,,,,बच गया बेचारा अनिकेत”,पृथ्वी ने सुरभि को छेड़ते हुए कहा तो सुरभि खीजकर जाने लगी। पृथ्वी ने उसकी टीशर्ट का कोना पकड़कर फिर उसे रोक लिया और कहा,”अरे मजाक कर रहा हूँ मैं,,,,,,,!!”
“ये तुम बार बार मेरी टीशर्ट क्यों पकड़ते हो , मेरे हाथ में क्या काँटे लगे है ?”,सुरभि ने पलटकर कहा
पृथ्वी ने अपनी गर्दन सहलाकर कहा,”मैं सिर्फ अपनी वाइफ को छूना पसंद करता हूँ,,,,,,,बाकि लड़कियों से मैं दूर ही ठीक हूँ”
“तुम तो अवनि के प्यार में कुछ ज्यादा ही पागल हो गए हो,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने अपनी टीशर्ट पृथ्वी के हाथ से छुड़ाकर कहा और किचन की तरफ चली गयी।
सुरभि के जाने के बाद पृथ्वी ने अपना निचला होंठ बाहर निकाला और खुद में ही बड़बड़ाया,”देखा ! सबको दिखता है मैं उसके प्यार में पागल हो चुका हूँ बस एक उसे ही नहीं दिखता,,,,,,!!”
कहते हुए पृथ्वी ने ऊपर देखा और कहा,”आखिर कब तक मैं अपनी फीलिंग्स खुद से ही शेयर करता रहूंगा ? उसे भी तो अहसास होना चाहिए ना कि मैं उस से कितना प्यार करता हूँ , आखिर उसके दिल में मेरे लिए मोहब्बत कब जगायेंगे आप ? इतना तो कर ही सकते है ना,,,,,,,,,,,!!!!”
“पृथ्वी तुम्हारी चाय”,अवनि की आवाज पृथ्वी के कानो में पड़ी तो पृथ्वी की तन्द्रा टूटी और उसने बगल में खड़ी अवनि को देखकर कहा,”सॉरी ! वो सुरभि का ध्यान फालतू बातो से हटाने के लिए मैंने तुम्हे परेशान किया”
“कोई बात नहीं , मुझे ख़ुशी है पृथ्वी कि तुमने सुरभि को समझा और समझाया भी,,,,,,,,,,आई हॉप उसकी लाइफ में सब ठीक हो जाये”,अवनि ने कहा
“चिंता मत करो उसके साथ कुछ गलत नहीं होगा,,,,,,,,उसके साथ हम है”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना तो अपनीओ पलकें झपका दी और वहा से चली गयी।
पृथ्वी सोफे पर आ बैठा और चाय पीने लगा तो वही अवनि सुरभि को साथ लेकर कमरे में चली आयी ताकि उस से अकेले में कुछ बाते कर सके। चाय पीने के बाद सुरभि ने अवनि से कुछ देर बातें की और फिर दोनों सोने चली गयी। पृथ्वी को हॉल में सोफे पर सोना पड़ा जो कि अब उसकी आदत बन चुका था।
अगली सुबह पृथ्वी जल्दी उठकर ऑफिस जाने की तैयारी करने लगा। सुरभि कमरे सो रही थी पृथ्वी अंदर आने में थोड़ा झिझक रहा था अवनि ने देखा उसने खुद पृथ्वी के ऑफिस के कपडे लाकर उसे दिए और कॉमन वाशरूम में नहाने को कहा अवनि पृथ्वी के लिए खाना बनाने लगी पृथ्वी नहाने चला गया। रात में देर से सोने की वजह से सुरभि गहरी नींद में सो रही थी और इसलिए अवनि ने उसे नहीं उठाया उसने कमरे का दरवाजा बंद किया और हॉल में आयी तो पृथ्वी परेशान सा खड़ा था। ये देखकर अवनि उसके पास आयी और कहा,”क्या हुआ ?”
“आज मीटिंग में वाइट शर्ट पहनकर जाना था लेकिन ये बटन निकल गया और अभी मेरे पास कोई दूसरा वाईट शर्ट भी नहीं है”,पृथ्वी ने मासूमियत से कहा
“एक मिनिट , ये मुझे दो”,अवनि ने अपना हाथ पृथ्वी के सामने करके कहा
पृथ्वी ने बटन अवनि की हथेली पर रख दिया। वह बटन हाथ में लेकर टेबल की तरफ गयी और दराज में रखा सुई धागा ले आयी। अवनि एक बार फिर पृथ्वी के सामने चली आयी लेकिन पृथ्वी की हाइट ज्यादा होने की वजह से अवनि टूटे हुए बटन तक पहुँच नहीं पा रही थी।
पृथ्वी ने अवनि से रुकने का इशारा किया और पास ही पड़ी छोटी कुर्सी को अपने पैर से अवनि की तरफ किया और उसे उस पर खड़े होने का इशारा किया। अवनि कुर्सी पर आ खड़ी हुई और अब वह आराम से उस बटन को लगा सकती थी।
पृथ्वी अपनी सांसे रोककर खड़ा था और अवनि ख़ामोशी से उसके शर्ट का बटन लगा रही थी। अवनि ने जितनी देर बटन लगाया पृथ्वी अपलक उसे ही देखता रहा , अवनि का उसके इतना करीब होना उसकी धड़कने बढ़ाने के लिए काफी था और जैसे ही अवनि ने बचा धागा तोड़ने के लिए अपना मुँह बटन की तरफ बढ़ाया पृथ्वी की तो साँसे ही रुक गयी। अवनि ने धागा तोडा और पीछे होकर कहा,”हो गया”
पृथ्वी कुछ बोल नहीं पाया , अवनि ने जैसे ही कुर्सी से पैर नीचे रखा लड़खड़ाई और उसका सर जा टकराया पृथ्वी के सीने से और उसी के साथ उसके होंठो की छाप भी पृथ्वी के शर्ट पर जा लगी जिस पर न अवनि ने ध्यान दिया नाही पृथ्वी ने,,,,,,,,,,,!!!!”
अवनि जल्दी से पृथ्वी से दूर हटी और कहा,”मैं , मैं तुम्हारा नाश्ता लेकर आती हूँ”
पृथ्वी मुस्कुरा उठा और अवनि वहा से चली गयी। पृथ्वी ने देखा सुरभि जग चुकी है और कमरे से बाहर आ रही है तो वह सुरभि से गुड मॉर्निंग बोलकर कमरे के अंदर चला गया। पृथ्वी सीधा बाथरूम में आया और अवनि के उस क्लेचर को उठाया जिसे अवनि ने कल उसकी कोलर पर लगाया था। पृथ्वी ने उसे अपनी जेब में रखा और कमरे से बाहर चला आया।
उसने अपना सामान और बैग लिया और बाहर चला आया। अवनि ने पृथ्वी से नाश्ता करने को कहा लेकिन वह जल्दी में था इसलिए अपना टिफिन लेकर चला गया। अवनि ने उसके जाने के बाद दरवाजा बंद किया और वापस आयी तो पाया कि सुरभि उसे ही देख रही है।
“अवनि तुम दोनों के बीच सब ठीक है न ?”,सुरभि ने एकदम से पूछा
“सब ठीक है मतलब ? हाँ सब ठीक है,,,,,,,!!!”,अवनि ने सुरभि से नजरे चुराकर कहा
“अवनि देखा मैंने तुम्हारे और पृथ्वी के बीच कितनी कम बातें होती है , उसने तुम्हे ठीक से बाय भी नहीं कहा और चला गया। एक नार्मल शादी में ये सब नहीं होता है अवनि , क्या अब भी तुम और पृथ्वी एक दूसरे से दूर हो ?”,सुरभि ने गंभीर स्वर में कहा
अवनि ने सुना तो ख़ामोशी से सुरभि को देखने लगी और फिर कहा,”तुम ब्रश कर लो मैं तुम्हारे लिए चाय नाश्ता ले आती हूँ”
अवनि सुरभि की बात का जवाब दिए बिना ही वहा से चली गयी और सुरभि अवनि और पृथ्वी के उलझे हुए रिश्ते के बारे में सोचने लगी।
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पृथ्वी ऑफिस पहुंचा और जैसे ही अपने केबिन में आया अंकित उसे देखकर मुस्कुराने लगा। पृथ्वी को अजीब लगा उसने अपने डेस्क के ड्रॉवर का लॉक खोला और अपनी जेब से अवनि का क्लेचर निकालकर बड़े प्यार से उसमे रख दिया। उसी ड्रावर में अवनि की लिखी वो चिट भी रखी थी जो पहली बार अवनि ने खाने के साथ पृथ्वी के टिफिन में रखी थी। पृथ्वी ने ड्रावर बंद किया और पलटा तो कशिश भी उसे देखकर मुस्कुरा उठी।
मनीष और तान्या अभी ऑफिस आये नहीं थे। पृथ्वी को नहीं समझ आया कि दोनों क्यों मुस्कुरा रहे है उसने अंकित से कहा,”ये लड़कियों की तरफ मुस्कुराना बंद करो और कपूर ग्रुप की फाइल मुझे दो,,,,,,,,,आज उनके साथ मेरी मीटिंग है”
“वो उनके ऑफिस में ही है कुछ करेक्शन के लिए भेजी थी अभी तक आयी नहीं है जैसे ही आती है मैं तुम्हे देता हूँ”,अंकित ने कहा और फिर मुस्कुराने लगा क्योकि सुबह सुबह उसे पृथ्वी के शर्ट पर लिपस्टिक का निशान देखने को जो मिल रहा था।
“तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना ?”,पृथ्वी ने हैरानी से पूछा
अंकित ने कुर्सी घुमाई और अपने लेपटॉप की तरफ पलटकर कहा,”हाँ मैं बिल्कुल ठीक हूँ पर लगता है तुम कुछ ठीक नहीं हो,,,,,,,वैसे मैंने सोचा नहीं था तुम इतने रोमांटिक भी हो सकते हो”
“रोमांटिक ?”,पृथ्वी ने चौंककर कहा
अंकित ने कुछ नहीं कहा बस मुस्कुराते हुए अपना काम करने लगा ये देखकर पृथ्वी ने उसके सर पर एक चपत लगायी और कहा,”मैं देख रहा हूँ आजकल तुम्हारा ध्यान ऑफिस के कामो में कम और फालतू बातो में ज्यादा लग रहा है। लांच से पहले वो फाइल मुझे चाहिए”,कहकर पृथ्वी वहा से चला गया।
पृथ्वी के जाते ही कशिश ने कहा,”सर ! आपने सर को बताया क्यों नहीं उनकी शर्ट पर लिपस्टिक का निशान लगा है , ऑफिस में सब देखेंगे तो क्या सोचेंगे ?”
अंकित ने कुर्सी घुमाई और कशिश की तरफ पलटकर कहा,”कल जब तुम्हारे पूकी पृथ्वी सर अपनी कोलर पर अपनी वाइफ का क्लेचर लगाकर घूम रहे थे तब तुम्हे ये ख्याल क्यों नहीं आया ?”
“ओह्ह्ह्हह हाँ,,,,,,,,,!!”,कशिश ने कहा
“अब तो पुरे ऑफिस को पता चलना चाहिए कि हमारे खड़ूस पृथ्वी की जिंदगी में भी कोई है”,अंकित ने कहा तो कशिश हंस पड़ी और फिर दोनों अपना अपना काम करने लगे।
पृथ्वी अपने केबिन से बाहर निकला और वाशरूम की तरफ बढ़ गया। पृथ्वी शीशे के सामने आया और हाथ धोते हुए खुद में ही बड़बड़ाने लगा,”अंकित मुझे देखकर हंस क्यों रहा था , और उसने ये क्यों कहा कि मैं बहुत रोमांटिक हूँ। हाँ मैं हूँ लेकिन ऑफिस में मैंने ये सब किसी को नहीं दिखाया फिर उसने,,,,,,,,,!!!”
कहते हुए पृथ्वी ने जैसे ही सामने शीशे में खुद को देखा उसकी नजर अपनी शर्ट पर लगे निशान पर पड़ी तो वह परेशान हो गया। पृथ्वी ने उसे हटाने का सोच लेकिन सफ़ेद शर्ट थी और हटाने की कोशिश की तो शर्ट खराब हो जाएगी। पृथ्वी उलझन में पड़ गया और बड़बड़ाया,”ये तुमने क्या किया अवनि अब मैं ये लेकर मीटिंग में जाऊ ? हाह उस से पहले मुझे ऑफिस वालो को फेस करना होगा , जयदीप सर को फेस करना होगा ,, लेकिन ये अच्छा लग रहा है मेरी शर्ट पर,,,,,,,,,,,!!”
कहते हुए पृथ्वी फिर शीशे की तरफ पलटा , अपने बालों को सही किया। अब शर्ट पर लगे लिपस्टिक के निशान को छुपाना था इसलिए पृथ्वी ने अपना हाथ वहा रख लिया और बाहर चला आया।
पृथ्वी अपने सीने पर हाथ रखे हुए जयदीप के केबिन की तरफ चला आया। सभी पृथ्वी को ही देख रहे थे कि वह अपना हाथ सीने पर रखकर क्यों चल रहा है ? हर गुजरते दिन के साथ पृथ्वी अजीब हरकते कर रहा था और सभी उसे देखकर कभी हैरान होते तो कभी खुश होते।
पृथ्वी ने जयदीप के केबिन का दरवाजा खटखटाया
“यस कम इन”,अंदर बैठे जयदीप ने कहा
पृथ्वी दरवाजा खोलकर अंदर आया उसे देखकर जयदीप ने कहा,”क्या बात है पृथ्वी , आज तुम बिल्कुल टाइम से आये हो”
अपने सीने पर हाथ रखे पृथ्वी ने हामी भरी तो जयदीप ने मन ही मन कहा,”ये इसने सीने पर हाथ क्यों रखा है , क्या ये मेरे साथ पोलाइट बनना चाहता है ? ओह्ह्ह लगता है इसने कल जो किया उसे लेकर शायद ये शर्मिंदा है,,,,,,,अब इसमें क्या शर्मिंदा होगा पृथ्वी लेकिन ठीक है तुम्हे गिल्ट है तो फिर मैंने माफ़ किया लेकिन तुम्हे इतना पोलाइट भी नहीं होना था मेरे दोस्त,,,,,,,,,!!!”
“सर , सर”,पृथ्वी ने पहले धीरे और फिर जोर से कहा तो जयदीप की तन्द्रा टूटी और वह अपने खयालो से बाहर आया
“हाँ पृथ्वी ! अरे तुम खड़े क्यों हो बैठो ना ?”,जयदीप ने कहा
पृथ्वी ने कुर्सी खिसकाई और उस पर आ बैठा ,जयदीप ने देखा अभी भी उसका हाथ सीने पर ही है तो उसने कहा,”अरे ठीक है ! मैं समझ सकता हूँ तुम्हे कल के लिए गिल्ट है अब बस भी करो”
पृथ्वी ने सुना तो उसकी नजर अपने सीने पर पड़ी और उसे समझते देर नहीं लगी कि जयदीप उसे गलत समझ रहा है इसलिए उसने कठोर स्वर में कहा,”मुझे कोई गिल्ट नहीं है,,,,,,,,अगर दोबारा भी मुझे किसी मीटिंग को छोड़कर जाना पड़े तो मैं चला जाऊंगा अगर बात मेरी वाइफ की हो,,,,,,,,,,!!!!”
जयदीप ने सुना तो बेचारे के ख्यालो का बुलबुला मन में ही फुटकर चूर हो गया और उसने कहा,”तो फिर तुमने ये हाथ अपने सीने पर क्यों रखा है ?”
“मेरी मर्जी”,पृथ्वी ने कहा
“दर्द है क्या ?”,जयदीप ने पूछा
“सर क्या आप मुझे आज का सेडुअल बताएँगे ?”,पृथ्वी ने थोड़ा गुस्सा होकर कहा
जयदीप समझ गया कि पृथ्वी नहीं बताना चाहता इसलिए अपने बॉस वाले अवतार में आकर कठोर स्वर में कहा,”आज शाम तुम्हारी कपूर ग्रुप के साथ मीटिंग है और कोशिश ये रहे कि आज ही ये डील फाइनल हो जाये। तीन नए प्रोजेक्ट्स की फाइल मैंने तुम्हारे केबिन में भिजवाई है और इस वीकेंड मुझे उनकी रिपोर्ट तैयार चाहिए और,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
और पर आते आते जयदीप थोड़ा नरम पड़ गया
“और ?”,पृथ्वी ने पूछा
“समझ नहीं आ रहा कैसे कहू ? दरअसल वो बात कुछ ऐसी है कि,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने शब्दों को चबाते हुए कहा
“आप ये कहना चाहते है कि मैं देसाई ग्रुप में जाकर मिस प्राची देसाई से कल के लिए माफ़ी मांगू ताकि आपके और देसाई सर के बीच बिजनेस रिलेशन खराब ना हो ?”,पृथ्वी ने सहजता से कहा जयदीप ने सुना तो हैरानी से कहा,”तुम दिमाग भी पढ़ लेते हो क्या आई मीन तुम्हे कैसे पता मैं यही कहने वाला हूँ ?”
पृथ्वी उठा और कहा,”क्योकि एक अच्छाई की मूरत मेरे घर में मेरे साथ भी रहती है , लीगल टीम के साथ एक जरुरी मीटिंग अटेंड करके मैं सीधा वही निकल जाऊंगा”
कहकर पृथ्वी वहा से चला गया और जयदीप उसे जाते देखकर मुस्कुराया और कहा,”देखना पृथ्वी वो अच्छाई की मूरत एक दिन तुम्हे भी अच्छा बना ही देगी”
( क्या सुरभि मानेगी पृथ्वी की बात और कर लेगी हमेशा के लिए अनिकेत से किनारा ? क्या अवनि और पृथ्वी की जिंदगी में सुरभि बनकर आयी है एक उम्मीद ? क्या देसाई ग्रुप के ऑफिस में होने वाला कोई नया तमाशा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
