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Pasandida Aurat Season 2 – 50

Pasandida Aurat Season 2 – 50

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

छत्रपती शिवाजी महाराज इंटरनॅशनल एअरपोर्ट, मुंबई
देर रात पृथ्वी एयरपोर्ट पहुंचा और सामने से आती भीड़ में से किसी को ढूंढने लगा। पृथ्वी ने देखा सब आ रहे है लेकिन जिसका इंतजार उसे था वह दिखाई नहीं दी। पृथ्वी उस तरफ देख ही रहा था कि तभी किसी ने उसका कंधा थपथपाया। पृथ्वी ने पलटकर देखा तो हैरानी और ख़ुशी से उसकी आँखे चमक उठी।
“तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”,पृथ्वी के सामने खड़ी सुरभि ने कहा
“तुम ?”,पृथ्वी ने सुरभि को घूरकर कहा

“मेरा मतलब आप यहाँ क्या कर रहे है , जीजाजी ?”,सुरभि ने जीजाजी शब्द पर कुछ ज्यादा ही जोर देकर कहा
पृथ्वी ने सुना तो शरमा गया और कहा,”अब इतना प्यार से भी मत कहो , मुझे शर्म आती है,,,,,,,!!!”
“अवनि कहा है ?”,सुरभि ने पूछा क्योकि पुरे एयरपोर्ट पर उसे अवनि कही दिखाई नहीं दे रही थी
“वो घर पर है,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने सुरभि से नजरे चुराकर कहा क्योकि अगले ही पल उसका सच सुरभि के सामने आने वाला था।
“लेकिन मैंने तो अवनि को बताया था कि मैं मुंबई आ रही हूँ , क्या अवनि ने तुम्हे सब बता दिया है ?”,सुरभि ने हैरानी से पूछा

“अह्ह्ह्ह दरअसल वो बात ये है कि तुमसे बात अवनि ने नहीं बल्कि मैंने की थी अवनि बनकर,,,,,,,,और तुम्हारे मैसेज का जवाब भी मैंने ही दिया था , और मैंने ही तुमसे कुछ समझ ना आने पर मुंबई आने को कहा था”,पृथ्वी ने मासूम बनकर धीरे से कहा
सुरभि ने सुना तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया उसने पृथ्वी के सीने पर मुक्का मारकर कहा,”अह्ह्ह तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो ? तुम मेरे और अवनि के बीच की प्रायवेट बातें कैसे पढ़ सकते हो ?”

“अह्ह्ह अरे यहाँ मत मारो यार”,पृथ्वी ने अपने सीने के बांयी तरफ हाथ रखकर कहा
“क्यों ना मारू ?”,सुरभि ने पृथ्वी को घूरकर कहा
“अरे यहाँ मेरा दिल है और उसमे अवनि रहती है,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने बच्चो की तरह कुनमुनाकर कहा
“हाह ! क्या ही अजीब लड़के हो न तुम , मतलब तुमने झूठ बोलकर मुझे यहाँ बुलाया और अवनि को पता तक नहीं है कि मैं मुंबई में हूँ,,,,,,,,ओह्ह्ह पृथ्वी क्या करू मैं तुम्हारा ?”,सुरभि ने आखिर में रोआँसा होकर कहा

“मुझे थैंक्यू बोलो और मेरे साथ चलो”,पृथ्वी ने बिना किसी भाव के कहा , जिसे सुनकर सुरभि चिढ गयी और पृथ्वी के पास आकर कहा,”किस बात का थैंक्यू ? आधी रात में मुझे ऐसे परेशान करने के लिए,,,,,,,,मैं पहले ही अपनी जिंदगी में कितना परेशान हूँ और तुम्हे ये सब मजाक लग,,,,,,,,!!!”
सुरभि अपनी बात पूरी करती इस से पहले पृथ्वी ने अपना हाथ उसके मुँह पर रखा और कहा,”शांत हो जाओ , तुम्हारे गले में स्टॉप का बटन नहीं है क्या ? कितना बोलती हो तुम,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी की बात सुनकर सुरभि खामोश हो गयी। पृथ्वी ने सुरभि के मुँह से अपना हाथ हटाया और कहा,”मैं जानता हूँ तुम परेशान हो और इसलिए मैंने तुम्हे यहाँ  बुलाया है ताकि तुम कुछ
वक्त यहाँ बिताओ और अपनी लाइफ को लेकर सही फैसला कर सको”
“लेकिन तुमने मुझसे अवनि बनकर बात क्यों की , क्या ये गलत नहीं है ?”,सुरभि ने चिढ़कर कहा

“वो इसलिए क्योकि मेरी वाइफ बहुत महान और मासूम है , उसे सबको खुश रखने और दुसरो की ख़ुशी के लिए सेक्रिफाइज करने की बीमारी है , तुम अगर उसे अपनी प्रॉब्लम बताती तो वो तुम्हे भी एडजस्ट करने के लिए कहती और ये मैं बिल्कुल नहीं चाहता इसलिए मैंने अवनि बनकर तुमसे बात की,,,,,!!!”,पृथ्वी ने सुरभि को समझाते हुए कहा

सुरभि ने सुना तो उसे समझ आया और साथ ही पृथ्वी से किये बर्ताव पर पछतावा भी हुआ उसने धीरे से कहा,”आई ऍम सॉरी मैंने तुम पर चिल्लाया”
“कोई बात नहीं मुझे बुरा नहीं लगा , अभी तुम परेशान हो इसलिए मैं समझ सकता हूँ,,,,,,!!”,पृथ्वी ने प्यार से कहा
सुरभि की आँखों में आँसू भर आये वह आगे बढ़कर पृथ्वी के सीने से लगी और कहा,”यार तुम इतने अच्छे क्यों हो पृथ्वी ?”

बेचारा पृथ्वी अवनि के अलावा किसी और के बारे में सोचता तक नहीं था और यहाँ सुरभि उसे गले लगा रही थी। उसने धीरे से सुरभि का कंधा थपथपाया और कहा,”बस करो यार ! मैं शादीशुदा हूँ”
सुरभि ने सुना तो पृथ्वी से दूर हटी और अपने आँसू पोछकर कहा,”तो अब ?”
“अब घर चलते है अवनि से मिलते है , तुम्हे यहाँ देखकर वो खुश हो जाएगी”,पृथ्वी ने सुरभि का ट्रॉली बैग सम्हालकर कहा
पृथ्वी सुरभि को साथ लेकर घर के लिए निकल गया।

सनशाइन होटल , वाशी
देसाई सर ने जो पार्टी रखी थी वो देर रात चलती रही , पृथ्वी से खफा होकर प्राची ने जयदीप की कम्पनी के साथ जो डील केंसल की थी , मिस्टर देसाई ने अपने बिजनेस बेनिफिट को देखते हुए उसे वापस जयदीप को दे दिया और साथ ही प्राची के बर्ताव के लिए माफ़ी भी मांगी।

“सर मुझसे माफ़ी मांगकर आप मुझे शर्मिन्दा कर रहे है। मिस प्राची में अभी थोड़ा बचपना है वो बिजनेस की बातें नहीं समझती है इसलिए उन्होंने ऐसा किया बट इट्स ओके आपकी कम्पनी के साथ हमारी कम्पनी के टर्म्स अच्छे है इसलिए मैं आज की पार्टी में आया हूँ,,,,,,,,,,,डील आप वैसे भी कन्फर्म कर चुके है तो माफ़ी रहने दीजिये प्लीज”,जयदीप ने बहुत ही सहजता से कहा
“मिस्टर मौर्या अगर आप माफ़ी एक्सेप्ट नहीं कर रहे तो फिर खुद माफ़ी मांग लीजिये”,मिस्टर देसाई ने जयदीप की आँखों में देखकर कहा

“मैं कुछ समझा नहीं सर,,,,,,,!!!”,जयदीप ने हैरानी से कहा
“मिस्टर मौर्या ! देसाई कम्पनी का CEO होने के नाते डील तो मैंने कन्फर्म कर दी है लेकिन एक बाप होने के नाते मेरा अपनी बेटी के प्रति भी कुछ फर्ज बनता है। जिस तरह से आपके मैनेजर ने सबके सामने प्राची से बदतमीजी से बात की उसी तरह वे कल सुबह मेरे ऑफिस में आकर उस से माफ़ी मांगेंगे”,मिस्टर देसाई ने कहा

जयदीप ने सुना तो उसे समझ आ गया कि ये पार्टी और डील देना तो बस एक बहाना था असल वजह तो देसाई सर पृथ्वी से मिलना चाहते थे ताकि पृथ्वी से माफ़ी मंगवा सके। जयदीप उलझन में पड़ गया वह पृथ्वी को माफ़ी मांगने के लिए मजबूर भी नहीं करना चाहता था और ना ही देसाई सर के साथ अपने बिजनेस रिलेशन खराब करना चाहता था। जयदीप को खामोश देखकर मिस्टर देसाई ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा,”मिस्टर मौर्या ! आई होप आप मुझे निराश नहीं करेंगे,,,,,,,,,!!”

“मैं कोशिश करूंगा सर,,,,,,,,,,!!”,जयदीप ने धीरे से कहा तो देसाई सर वहा से चले गए।
पार्टी खत्म होने के बाद जयदीप भी अपने साथ आये टीम मेम्बर्स को लेकर वहा से निकल गया। रास्तेभर वह बस यही सोचता रहा कि कल पृथ्वी को प्राची से माफ़ी माँगने के लिए कैसे मनाएगा जबकि वह तो खुद ही पृथ्वी से मना करके आया था।

देसाई सर होटल से बाहर आये और अपनी गाडी में आ बैठे। आगे वाली सीट पर ड्राइवर के बगल में उनका PA भरत बैठा था।
“भरत ! प्राची कहा है ?”,देसाई सर ने पूछा
“मैडम तो घर चली गयी सर”,भरत ने कहा
“ठीक है ! ड्राइवर गाड़ी घर ले लो”,देसाई सर ने कहा और अगले ही पल गाडी हवा से बाते करने लगी।

आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
कैब बिल्डिंग के नीचे आकर रुकी , पृथ्वी सुरभि के साथ नीचे उतरा और उसका सामान लेकर अंदर चला आया। लिफ्ट के सामने आकर पृथ्वी ने सुरभि से कहा,”Be Comfortable हाँ”
लिफ्ट के दरवाजे खुले और सुरभि ने पृथ्वी से पहले अंदर जाते हुए कहा,”Don’t worry पृथ्वी i know तुम अच्छे लड़के हो , कोई भी लड़की तुम्हारे साथ अनसेफ फील नहीं कर सकती,,,,,,,!!!”

पृथ्वी ने सुना तो धीरे से मुस्कुरा उठा , एक मर्द के लिए एक औरत के मुँह से ये सुनना कि वह उसके साथ सेफ है इस से ज्यादा ख़ुशी की बात उसके लिए और क्या हो सकती है भला , उसने फ्लोर नंबर दबाया और सुरभि के साथ 7वे माले पर चला आया। सुरभि खुश भी थी और साथ ही नर्वस भी कि इस वक्त उसे यहाँ देखकर अवनि का क्या रिएक्शन होगा ?

पृथ्वी ने बेल ना बजाकर दूसरी चाबी से दरवाजा खोला और जैसे ही अंदर आया देखा अवनि जगी हुई थी और हॉल में यहाँ वहा चक्कर काट रही थी। जैसे ही दरवाजा खुला अवनि रुकी और दरवाजे की तरफ पृथ्वी को देखकर उसकी तरफ आते हुए कहा,”तुम कहा चले गए थे ?”
पृथ्वी कुछ कहता इस से पहले सुरभि उसके पीछे से निकलकर अवनि के सामने आयी। सुरभि को देखकर अवनि के चेहरे पर परेशानी और हैरानी के भाव उभर आये और उसने कहा,”सुरभि तुम यहाँ , वो भी इस वक्त ,, सब ठीक तो है ना ?”

अवनि का ये पूछना कि सब ठीक तो है ना सुरभि के मन को कमजोर कर गया और उसकी आँखों में आँसू भर आये। अवनि ने देखा तो आगे बढ़कर सुरभि को गले लगाया और उसका सर सहलाने लगी। अवनि नहीं जानती थी सुरभि यहाँ क्यों है और उसके साथ क्या हुआ है वह इस वक्त बस ये देख पा रही थी कि उसकी दोस्त को उसकी जरूरत है।

पृथ्वी सुरभि का बैग लेकर साइड से निकल गया और बैग को हॉल में छोड़कर खुद सुरभि के लिए पानी लेने किचन में चला आया। उसने पानी का बोतल उठाया और बाहर चला आया। सुरभि सोफे पर बैठी थी और उसका हाथ थामे अवनि उसके बगल में बैठी थी। उदासी और परेशानी सुरभि के चेहरे पर थी और साथ ही अब अवनि के चेहरे से भी झलकने लगी थी।  

पृथ्वी ने पानी का बोतल लाकर सुरभि की तरफ बढ़ा दिया और खुद पास पड़े सोफे पर आ बैठा। सुरभि ने पानी पीया थोड़ा शांत हुई तो अवनि ने कहा,”क्या हुआ सुरभि मुझे बताओ ?”
सुरभि ने एक नजर पृथ्वी को देखा और फिर ख़ामोशी से अवनि की तरफ देखने लगी तो पृथ्वी ने उठते हुए कहा,”अह्ह्ह्ह तुम दोनों इतने दिनों बाद मिली हो तो तुम दोनों बातें करो , सुरभि को भूख लगी होगी तो मैं एक काम करता हूँ इसके लिए कुछ बना देता हूँ,,,,,,,,!!!”
“पृथ्वी मैं बना देती हूँ”,अवनि ने कहा

“अवनि ! तुम बैठो उसे तुम्हारी जरूरत है , मैं बना लूंगा”,कहकर पृथ्वी वहा से चला गया
अवनि को लगा कि सुरभि के अचानक यहाँ आ जाने से पृथ्वी को अच्छा नहीं लगेगा लेकिन पृथ्वी तो नॉर्मल है ये देखकर अवनि सुरभि की तरफ पलटी और उसके हाथ को अपने हाथो में थामकर कहा,”सुरभि ! क्या हुआ है बताओ मुझे , तुम तुम बिना बताये यहाँ कैसे ?”

सुरभि ने अवनि को सारी बातें बता दी , अनिकेत का शादी को लेकर उसे परेशान करना , नौकरी छोड़ने का दबाव डालना , ऑफिस के कामो में होती गलतिया सब एक एक करके उसने अवनि को बता दी बस सिद्धार्थ से हुई मुलाकतें छोड़कर , सुरभि अवनि के सामने सिद्धार्थ का नाम लेकर उसके भरे हुए जख्मो को कुरदेना नहीं चाहती थी।

अवनि ने सुना तो पहली बार उसे अनिकेत पर बहुत गुस्सा आया और उसने कहा,”मैंने तो सोचा था कि अनिकेत बहुत समझदार लड़का है लेकिन वो ऐसा बचपना कैसे कर सकता है ? मुझे माफ़ कर दो सुरभि यहाँ आने के बाद मैं भी तुमसे ठीक से बात नहीं कर पायी और तुम्हे ये सब अकेले झेलना पड़ा,,,,,,,,,,,तुम कितनी अकेली हो गयी होगी और कितना बुरा लगा होगा तुम्हे”

सुरभि ने सुना तो अवनि के हाथ को अपने दोनों हाथो में लेकर कहा,”नहीं अवनि तुम माफ़ी मत मांगों , तुम्हारी जिंदगी में क्या परेशानिया कम थी जो मैं अपनी परेशानी का बोझ भी तुम पर डाल देती। कितनी मुश्किलों के बाद तुम्हारी और पृथ्वी की जिंदगी में सब सही हुआ है मैं बस तुम दोनों को परेशान करना नहीं चाहती थी इसलिए मैं तुम्हे नहीं बताया”

“मुझे ना सही तुमने पृथ्वी को बताया ये जानकर अच्छा लगा सुरभि,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“पृथ्वी बहुत अच्छा लड़का है अवनि”,सुरभि ने किचन की तरफ देखकर कहा जहा खड़े होकर पृथ्वी सुरभि के लिए कुछ बना रहा था। अवनि ने सुना तो वह भी किचन की तरफ देखने लगी। ट्राउजर टीशर्ट में खड़ा पृथ्वी इत्मीनान से सब्जिया काट रहा था जिस से उसके बायसेप्स उभरकर आ रहे थे। अवनि एकटक उसे देखते रही और कहा,”हाँ ! वो बहुत अच्छा है”

सुरभि ने सुना तो अवनि की तरफ देखने लगी , पृथ्वी को देखते हुए अवनि की आँखों मे जो मोहब्बत और चेहरे पर जो सुकून था उसे देखकर कोई भी कह सकता है कि अवनि को पृथ्वी से प्यार होने लगा था।
अवनि ने पृथ्वी से ध्यान हटाया और सुरभि की तरफ देखकर कहा,”तुम्हे अनिकेत के बारे में सोचकर खुद को परेशान करने की कोई जरूरत नहीं है , तुम कुछ दिन यहाँ रुक जाओ मेरे पास मैं उस से बात करुँगी और उसे समझाउंगी”

“वो नहीं समझेगा अवनि”,सुरभि ने उदास होकर कहा
“सुरभि तुम्हे इतनी जल्दी हार नहीं माननी चाहिए। तुम्हे अनिकेत को एक मौका देकर देखना चाहिए”,अवनि ने कहा
“हाँ ताकि वो इसकी मेन्टल हेल्थ की धज्जिया उड़ा दे और अगली बार हम दोनों इस से मिलने सिरोही के बजाय आगरा जाए”,पृथ्वी ने हाथ में उठायी ट्रे को टेबल पर रखते हुए कहा।  

पृथ्वी ने सुरभि के लिए वेजिटेबल मैगी बनायीं थी और सुरभि के साथ साथ वह अपने और अवनि के लिए परोसकर लाया था। उसने एक कटोरा उठाया और सुरभि की तरफ बढाकर कहा,”तुम्हे अपनी दोस्त की हर बात मानने की कोई जरूरत नहीं है सुरभि,,,,,,,,इन्फेक्ट तुम्हे इतना अच्छा नहीं बनना है कि अपना ही बुरा कर लो,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”पृथ्वी ये दोनों चार साल से साथ है , क्या इन्हे चार दिन में ये फैसला कर लेना चाहिए कि इन्हे साथ नहीं रहना चाहिए ?”

पृथ्वी ने दूसरा कटोरा उठाकर अवनि की तरफ बढ़ाया और कहा,”अवनि ! किसी से मोहब्बत होने के लिए एक पल काफी होता है और हमे उसके साथ जिंदगी बितानी है या नहीं ये फैसला करने के लिए 7 मिनिट लेकिन किसी के साथ जिंदगी नहीं बितानी है इसका फैसला करने के लिए 7 सेकेण्ड काफी है। कुत्ता अगर हमे काट ले तो हमे अपने जख्म का इलाज करना चाहिए ना कि कुत्ते के पास बैठकर उस से ये सवाल करना चाहिए कि तुमने मुझे क्यों काटा ? मेरी क्या गलती थी ? उसे दूसरा मौका देने की सोचना बेवकूफी है, वो दूसरी बार भी काटेगा क्योकि काटना उसकी फितरत है”

अवनि ने सुना तो एकटक पृथ्वी को देखने लगी , उसकी बातों में एक गहराई थी जिसे समझना हर किसी के बस का नहीं था। अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी ने सुरभि से कहा,”सुरभि ! फ़िलहाल के लिए कुछ मत सोचो कोई फैसला लेने की जरूरत नहीं है,,,,,मैग्गी खाओ और बताओ मुझे कैसी बनी है ?”
अवनि हैरान थी इतनी टेंशन के माहौल में भी पृथ्वी इतना शांत कैसे रह सकता है ?
“क्या हुआ अवनि तुम खा क्यों नहीं रही हो ?”,पृथ्वी ने अवनि को अपनी ओर देखते पाकर पूछा

अवनि ने सुना तो पृथ्वी से नजरे हटा ली और चुपचाप खाने लगी। सुरभि ने भी एक चम्मच खाया और पृथ्वी की तरफ देखकर कहा,”तुमने इतना अच्छा खाना बनाना कहा से सीखा ?”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और शरमाकर कहा,”ये मैंने अपनी मैडम जी से सीखा है,,,,,,,मैं तुम्हे भी सीखा दूंगा”
सुरभि ने सुना तो मुस्कुराने लगी , उसने अवनि की तरफ देखा और मन ही मन कहा,”तुम बहुत किस्मतवाली हो अवनि जो तुम्हे पृथ्वी मिला,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी ने अपनी बातो से माहौल को थोड़ा नार्मल किया और सुरभि से इधर उधर की बाते करने लगा जिस से सुरभि कुछ देर के लिए अपनी परेशानियों को भूल जाये। धीरे धीरे अवनि को भी समझ आ गया कि पृथ्वी जान बूझकर सुरभि का ध्यान भटका रहा है और इसके बाद वह भी पृथ्वी का साथ देने लगी और तीनो हॉल में बैठकर बाते करने लगे।

मिस्टर देसाई की गाड़ी आकर घर के पोर्च में रुकी। वे गाड़ी से नीचे उतरे और अंदर चले आये। अंदर आकर उन्होंने घर के नौकर से पूछा,”प्राची कहा है ?”
“मैडम ऊपर अपने कमरे में है सर”,नौकर ने सर झुकाकर कहा
मिस्टर देसाई सीढ़ियों की तरफ बढ़ गए। वे ऊपर प्राची के कमरे के सामने आकर रुके और दरवाजा खोलकर अंदर चले आये।

अंदर आकर उन्होंने देखा प्राची अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ी हाथ में गिलास उठाये कुछ पी रही है। मिस्टर देसाई उसकी तरफ आये और उसके हाथ से गिलास लेकर उसे सूंघते हुए कहा,”तुम्हारा दिमाग तो सही है प्राची , ये क्या पी रही हो तुम ?”
“क्यों डेड ! क्या आप नहीं जानते ये क्या है ?”,प्राची ने उन्मांद भरे स्वर में कहा हालाँकि उसकी आँखों में गुस्से और निराशा के भाव थे
“मैं जानता हूँ लेकिन मैं ये जानना चाहता हूँ कि तुम इसे क्यों पी रही हो ?”,मिस्टर देसाई ने गिलास को साइड में रखकर पूछा

क्योकि मुझे बुरा लग रहा है डेड,,,,,,मेरी वजह से आपकी कम्पनी की डील चली गयी , मेरी वजह से आपको जयदीप मौर्या के सामने शर्मिन्दा होना पड़ा और मेरी वजह से आपको उनसे माफ़ी,,,,,,,,अह्ह्ह्ह मैं बहुत बुरी हूँ डेड मेरी वजह से आपको,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने लड़खड़ाती जबान में कहा वह ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी
मिस्टर देसाई ने उसे सम्हाला और कहा,”ओह्ह्ह प्राची ! ऐसा कुछ नहीं है बेटा , तुम आओ मेरे साथ आओ , यहाँ आकर बैठो और आराम करो ,, अभी तुम होश में नहीं हो हम सुबह बात करते है,,,,,,,,,!!!”

कहते हुए मिस्टर देसाई प्राची को उसके बिस्तर की तरफ ले आये और उसे बैठा दिया। प्राची ने आँखों में मायूसी और चेहरे पर उदासी लाकर कहा,”आई ऍम सॉरी डेड,,,,,,,,!!!”
“कोई बात नहीं , तुम्हे ये सब के लिए खुद को गिल्ट में डालने की जरूरत नहीं है मैंने जयदीप से मिलकर उस डील को कन्फर्म कर दिया है और वो लड़का , कल सुबह वो ऑफिस आकर तुम से माफ़ी भी मांग लेगा , मैं CEO अपनी कम्पनी में हूँ निजी जीवन में तुम्हारा पिता हूँ और कोई मेरी बेटी के साथ बदतमीजी करे ये मैं हरगिज बर्दास्त नहीं करूंगा”,मिस्टर देसाई ने कठोर शब्दों में कहा

प्राची ने सुना तो उन्मांद से भरी अपनी पलकों को झपकाया और कहा,”लेकिन वो मेरे साथ बदतमीजी कर सकता है डेड,,,,,,,उसे हक़ है”
कहकर प्राची एकदम से मुस्कुराई और आगे कहा,”उसे पूरा हक़ है मुझसे बदतमीजी करने का , मुझ पर चिल्लाने का , मेरे साथ वक्त बिताने का , बिकॉज आई लाइक हिम डेड,,,,,,,,,,मैं उसे पसंद करती हूँ”

इतना कहकर प्राची ने आँखे मूँद ली और बिस्तर पर निढाल हो गयी। मिस्टर देसाई ने सुना तो उनके चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये। उन्होंने प्राची को कम्बल ओढ़ाई और कमरे से बाहर जाने लगे। जाते जाते उनके कानो में प्राची के कहे शब्द पड़े जिन्हे वह नींद में बड़बड़ा रही थी “आई लाइक हिम डेड , आई लाइक हिम”

( क्या मुंबई आकर दूर होगी सुरभि की उलझने या बढ़ जाएगी उसकी परेशानी ? पृथ्वी की बात मानकर सुरभि तोड़ देगी अनिकेत से रिश्ता या अवनि की बात मानकर देगी उसे एक मौका ? क्या प्राची का पृथ्वी को पसंद करना बढ़ा देगा मिस्टर देसाई की परेशानिया ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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