Pasandida Aurat Season 2- 47
जयदीप पृथ्वी से मिलने ऊपर आ रहा था और पृथ्वी मन ही मन परेशान था कि कही जयदीप अवनि के सामने सब सच ना बोल दे। पृथ्वी को उलझन में देखकर अवनि ने कहा,”क्या हुआ पृथ्वी तुम परेशान क्यों हो ?”
“अह्ह्ह्ह कुछ नहीं वो जयदीप सर आ रहे है , तुम थक गयी होगी जाओ जाकर अपने कमरे में आराम करो,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“पृथ्वी मैं ठीक हूँ , वो आ रहे है और मैं जाकर सो जाऊ ये तो गलत है न,,,,,,,मैं तुम्हारे और उनके लिए चाय चढ़ा देती हूँ”,अवनि ने अपने बालों को समेटते हुए कहा और पृथ्वी की तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया। पृथ्वी ने अपनी भँवे उचकाई तो अवनि ने कहा,”मेरा क्लेचर ?”
“अह्ह्ह्ह वो वो मैं कही रखकर भूल गया तुम दुसरा लगा लो न”,पृथ्वी ने हड़बड़ाकर कहा
“तुम भी न,,,,,ठीक है मैं चाय चढ़ा देती हूँ”,अवनि ने कमरे की तरफ जाते हुए कहा
पृथ्वी सोच में उलझा ही था कि तभी डोरबेल बजी। पृथ्वी ने आकर दरवाजा खोला सामने जयदीप खड़ा था जिसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे और ये देखकर पृथ्वी अंदर ही अंदर और परेशान हो गया। पृथ्वी खामोश सा दरवाजे पर खड़ा रहा ना उसने जयदीप को अंदर आने दिया ना ही खुद दरवाजे से हटा ये देखकर जयदीप ने कहा,”अगर मेरा सौंदर्य दर्शन हो गया हो तो क्या मैं अंदर आ सकता हूँ ?”
जयदीप ने फिर पृथ्वी को ताना मारा और ये सुनकर पृथ्वी झेंपते हुए साइड हट गया और जयदीप अंदर चला आया। अवनि किचन में थी और चाय बना रही थी।
पृथ्वी ने दरवाजा बंद किया और जयदीप के पीछे आते हुए धीमे स्वर में कहा,”
आप ऊपर क्यों आये है ? मैं नीचे आ रहा था ना”
जयदीप ने पृथ्वी की बात पर ध्यान नही दिया और सोफे पर आ बैठा। उसने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”अवनि को भी तो पता चले मिस्टर पृथ्वी उपाध्याय कितने बहादुर है जो सबके सामने मीटिंग बीच में छोड़कर चले आये”
जयदीप ने पृथ्वी को फिर ताना मारा लेकिन पृथ्वी के चेहरे पर अफ़सोस के बजाय चिढ के भाव थे उसने जयदीप की तरफ आकर कहा,”आप ऑफिस की बात में अवनि को बीच में क्यों ला रहे है ?”
“वैसे ही जैसे अवनि के लिए तुमने आज मीटिंग बीच में छोड़ दी और एक बड़ी डील हमारे हाथ से चली गयी”,जयदीप ने पृथ्वी की तरफ देखकर बहुत ही सहजता से कहा
पृथ्वी ने सुना तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ उसने अपनी नजरे झुका ली और धीमे स्वर में कहा,”उसके लिए मैं आपसे माफ़ी चाहता हूँ , आप नहीं जानते उस वक्त अवनि बहुत बड़ी प्रॉब्लम में थी और अकेली थी बस इसलिए मुझे मीटिंग बीच में छोड़कर जाना पड़ा,,,,,,,,मिस देसाई से किये बर्ताव के लिए भी मैं शर्मिंदा हूँ मुझे उनसे इतना रूड होकर बात नहीं करनी चाहिए थी ,
अगर आप कहेंगे तो मैं उनसे माफ़ी मांगने के लिए तैयार हूँ और कोशिश करूंगा कि वो ये डील केंसल ना करे,,,,,,,,,मेरी वजह से आपको परेशानी हुई मुझे माफ़ कर दीजिये”
जयदीप ख़ामोशी से पृथ्वी की बात सुनता रहा और फिर एकदम से कहा,”कोई जरूरत नहीं है तुम्हे उस नकचढ़ी प्राची से माफ़ी मांगने की”
पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से जयदीप की तरफ देखा , जयदीप सोफे से उठा और कहा,”मनीष ने मुझे सब बताया और तुमने जो किया ठीक किया बस तुम्हे ऐसे मीटिंग छोड़कर नहीं जानी चाहिए थी , खैर रही बात मिस देसाई से माफ़ी मांगने की तो पहले मुझे भी लगा कि तुम्हे माफ़ी मांगनी चाहिए लेकिन जब उसने मुझसे ऐटिटूड में बात की तो मैंने ये तय किया कि तुम उस से माफ़ी नहीं मांगोगे,,,,,,,,,,,,हाह ! समझती क्या है वो खुद को अपने फादर के पैसो पर घमंड करने वाली वो लड़की मुझे जयदीप मौर्या को ऐटिटूड दिखा रही थी”
“लेकिन सर आपकी डील,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“अरे वो क्या डील केंसल करेंगी कल मिस्टर मौर्या से मिलकर मैं खुद इस डील को केंसल करने वाला हूँ,,,,,,,,,मेरे लिए तुम इम्पोर्टेन्ट हो वो डील नहीं,,,,,,,!!!”,जयदीप ने सधे हुए स्वर में कहा तो पृथ्वी उसे देखने लगा
अवनि तब तक चाय और कुछ सूखा नाश्ता ले आयी। उसने ट्रे टेबल पर रखी और जयदीप की तरफ पलटकर कहा,”हेलो सर ! मैं जानती हूँ आप यहाँ पृथ्वी से मिलने आये है , आज इन्होने जो किया उसके लिए आप प्लीज इन्हे डाटियेगा मत , वो मैं अकेली थी और बहुत डर गयी थी तो मैंने ही पृथ्वी से आने को कहा। मुझे नहीं पता थे ये किसी इम्पोर्टेन्ट मीटिंग में है,,,,,,,,,,मेरी वजह से आपकी कम्पनी को नुकसान हुआ उसके लिए आई ऍम,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि अपनी बात पूरी करती इस से पहले पृथ्वी ने उसकी तरफ पलटकर कहा,”अवनि,,,,,,,,,,,!!!”
जयदीप ने सुना तो अवनि की तरफ देखा और कहा,”अवनि ! बेटा पहले तो तुम मुझे ये सर बुलाना बंद करो , सर मैं सिर्फ इनका हूँ तुम्हारा नहीं तुम मुझे भैया कहकर बुला सकती हो और दूसरी बात तुम्हे माफ़ी मांगने की कोई जरूरत नहीं है,,,,,,,,,मैं यहाँ पृथ्वी को डाटने या उसकी शिकायत करने नहीं आया मैं बस तुम दोनों को देखने आया हूँ कि तुम दोनों ठीक हो,,,,,,,,,,,मीटिंग का क्या है वो तो होती रहती है बट फॅमिली इज आवर फर्स्ट प्रायोरिटी और पृथ्वी ने जो किया सही किया , उस वक्त तुम्हे पृथ्वी की जरूरत थी और इसका तुम्हारे साथ होना जरुरी था”
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा दी। जयदीप कितना सुलझा हुआ इंसान था उसकी जगह कोई और होता तो अब तक पृथ्वी को नौकरी से निकाल चुका होता , पृथ्वी भी ख़ामोशी से जयदीप को देख रहा था और आज पहली बार उसे ये अहसास हुआ कि जयदीप को उसकी और अवनि की कितनी परवाह है। पृथ्वी को खामोश पाकर जयदीप ने अवनि से कहा,”अह्ह्ह अवनि ! क्या मुझे एक गिलास पानी मिलेगा ?”
“जी ! मैं अभी लेकर आयी”,अवनि ने मुस्कुराकर कहा और वहा से चली गयी
“आपने अवनि के सामने झूठ क्यों कहा ?”,पृथ्वी ने जयदीप की तरफ देखकर पूछा
जयदीप मुस्कुराया और कहा,”यार पृथ्वी ! तुम्हे इतनी प्यारी लड़की मिली है न कि वो तुम्हारी गलती की माफ़ी भी खुद माँग रही है जिस से मैं तुम्हे कुछ ना कहू , अब तुम ही बताओ क्या मुझे उसका दिल तोड़ना चाहिए ?”
पृथ्वी ने सुना तो धीरे से मुस्कुराया और ना में अपनी गर्दन हिला दी। अवनि ने पानी लाकर जयदीप को दिया और फिर दोनों को अकेला छोड़कर अपने कमरे में चली गयी।
जयदीप सोफे पर आ बैठा और पृथ्वी से भी बैठने का इशारा किया। पृथ्वी ने अपना चाय का कप लिया और बगल वाले सोफे पर आ बैठा। उसने चाय का घूंठ भरा और जयदीप के बोलने का इंतजार करने लगा। जयदीप ने चाय ली और एक घूंठ भरकर कहा,”मौर्या ग्रुप के साथ तो ये डील केंसल ही समझो मैंने नहीं की तो अपने ईगो में आकर वो मिस प्राची इसे केंसल कर देंगी लेकिन अभी भी एक इम्पोर्टेन्ट डील हमारे हाथ में है अगर तुम उसे फिक्स कर लो तो मैं तुम्हे माफ़ कर सकता हूँ और हमारी कम्पनी भी डूबने से बच जाएगी”
पृथ्वी ने सुना तो कहा,”मैं तैयार हूँ सर ! आप बताईये मैं इसे फिक्स करने की हर कोशिश करूंगा फिर चाहे इसके लिए मुझे डबल मेहनत ही क्यों ना करनी पड़े”
कहते हुए पृथ्वी ने चाय का एक घूंठ मुँह में भर लिया। जयदीप ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”ठीक है फिर कल सुबह ऑफिस आ जाओ मैं क्लाइंट के साथ तुम्हारी मीटिंग रख देता हूँ,,,,,,,,तुम एक बार उस से मिलकर प्रोजेक्ट के बारे में समझ लो देन आगे सब तुम्हे और तुम्हारी टीम को सम्हालना है”
“मैं कर लूंगा”,पृथ्वी ने बहुत ही कोंफ़िड़ेंस से कहा
“हमारे ऑफिस के बगल में जो बिल्डिंग है वहा “मिस्टर विक्रम कपूर” का ऑफिस है , तुम कल जाकर उनसे मिल लेना ये प्रोजेक्ट उनके बड़े भाई की कम्पनी से है लेकिन इसमें फायनेंस वही करेंगे,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने अपनी चाय खत्म करके कहा
पृथ्वी ने जैसे ही “विक्रम कपूर” का नाम सुना मुँह में भरा चाय का घूंठ फनवारा बनकर उसके मुँह से बाहर निकला और उसने हैरानी से जयदीप को देखा।
पोस्ट ऑफिस , सिरोही
अपने केबिन में बैठी सुरभि काम में अपना ध्यान लगाने की नाकाम कोशिश कर रही थी लेकिन बार-बार अनिकेत के ख्याल उसे परेशान कर रहे थे। सिद्धार्थ के घर छोड़ने के बाद सुरभि दिनभर बिस्तर पर पड़ी रही। खाना उसने बाहर से आर्डर कर दिया। आज सोमवार था इसलिए मन ना होते हुए भी उसे पोस्ट ऑफिस आना पड़ा और काम करना पड़ा। कल पूरा दिन उसने अनिकेत को कितने मैसेज और कॉल किये लेकिन अनिकेत ने एक बार भी उसका फोन नहीं उठाया और इसी बात से दुखी सुरभि आज उदास थी।
सुरभि मुंहफट थी , बद्तमीज थी , गुस्सैल थी लेकिन उसे अनिकेत से प्यार था और पिछले 4 साल से वह उसके साथ घर बसाने के सपने देख रही थी लेकिन अनिकेत ने उसके सामने ऐसी दुविधा खड़ी कर दी जिसका हल सुरभि के पास नहीं था। वह इतनी मेहनत से मिली अपनी नौकरी को छोड़ना नहीं चाहती थी और अनिकेत उसे समझने को तैयार नहीं था वह तो बस अपने माँ-बाप के कहने पर एक ही जिद पर अड़ा था कि सुरभि सब छोड़कर उदयपुर वापस आ जाये और उस से शादी करके उसके घर को सम्हाले।
“सुरभि , सुरभि , ये क्या कर रही हो , ध्यान कहा है तुम्हारा ? सुरभि,,,,,,,,,,!!”,मैनेजर की तेज आवाज सुरभि के कानों में पड़ी तो वह होश में आयी और उसने देखा कि वह सरकारी मोहर किसी गलत लिफाफे पर लगाए ही जा रही है।
“आई ऍम सो सॉरी सर”,सुरभि ने अपनी जगह से उठकर कहा
“मेरे केबिन में आओ , अभी”,मैनेजर ने कहा और वहा से चला गया। मायूस होकर सुरभि उसके पीछे पीछे चल पड़ी। केबिन में आकर सुरभि ने अपने हाथो को बांधा और सर झुका लिया।
“ये सब क्या है सुरभि ? मैं देख रहा हूँ पिछले कुछ दिनों से तुम्हारा काम में बिल्कुल ध्यान नहीं है ,, कभी तुम कस्टमर्स पर चिल्ला देती हो , कभी गलत डाक्यूमेंट्स भेज देती हो , कभी किसी और का एड्रेस किसी और के लेटर पर लिख देती हो , मैं जानना चाहता हु आखिर तुम्हारे साथ परेशानी क्या है ? क्या तुम किसी बात को लेकर परेशान हो ?”,मैनेजर ने बहुत ही आराम से पूछा जबकि सुरभि को लगा था कि मैनेजर उस पर चिल्लायेगा
सुरभि ने सुना तो सर उठाकर अपने मैनेजर को देखा उसकी आँखों में नमी और चेहरे पर उदासी नजर आ रही थी ये देखकर मैनेजर ने फिर पूछा,”क्या हुआ , कोई परेशानी है तो मुझे बताओ ?”
सुरभि ने सुना तो एकदम से रो पड़ी और कहा,”अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ! आप कितने अच्छे है सरररररररर मैं खामखा आपको बुरा , खड़ूस और लीचड़ समझती थी लेकिन आप तो मेरी परवाह कर रहे है। मैं सच में बहुत परेशान हूँ सरररररररर”
सुरभि को ऐसे रोते देखकर बेचारा मैनेजर घबरा गया वह उठा और पानी का गिलास सुरभि की तरफ बढाकर कहा,”रिलेक्स ! शांत हो जाओ और ये पानी पीओ”
सुरभि ने गिलास लिया और एक साँस में पीकर गिलास मैनेजर की तरफ बढ़ा दिया। मैनेजर ने गिलास लिया और कहा,”फिलिंग बेटर ?”
“हम्म्म,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने हामी में गर्दन हिलाकर कहा
“आओ बैठो और बताओ मुझे क्या हुआ है ?”,मैनेजर ने वापस अपनी कुर्सी की तरफ बढ़ते हुए कहा
सुरभि ने कुर्सी खिसकाई और उस पर आ बैठी। वह कुछ देर शांत रही और फिर कहा,”मैं अपनी पर्सनल लाइफ की वजह से परेशान हूँ सर , कुछ चीजे है जो मुझे शार्ट करनी है लेकिन यहाँ नौकरी करने की वजह से मुझे टाइम नहीं मिल पा रहा। ना मैं अपने घर जा सकती हूँ और ना ही यहाँ रह पा रही हूँ , जब तक चीजे शार्ट नहीं होगी मैं ऐसे ही परेशान रहूंगी और शायद ऐसे ही गलतिया करती रहू,,,,,,,,,,!!!”
मैनेजर ने सुना तो समझ गया कि सुरभि को एक ब्रेक की जरूरत है उसने कहा,”एक काम करो तुम एक हफ्ते की छुट्टी लेकर घर चली जाओ , वैसे भी अगले हफ्ते होली है तो तुम्हे अपनी फॅमिली के साथ टाइम स्पेंड करने को भी मिल जाएगा और होली के बाद तुम एक फ्रेश स्टार्ट करना,,,,,,,,!!!”
सुरभि ने सुना तो हैरानी से अपने मैनेजर को देखने लगी और कहा,”सर ! क्या आप सच कह रहे है ?”
“हाँ ! तुम एक हफ्ते की लीव एप्लिकेशन दे दो मैं अप्रूव कर देता हूँ उसके बाद 3 दिन होली की छुट्टी रहेगी और उसके अगले दिन सन्डे है तो तुम आराम से अपनी प्रोब्लेम्स शाल्व करके वापस आना”,मैनेजर ने कहा
“आप मुझसे इतना प्यार करते है सर”,सुरभि ने आँखों में आँसू भरकर मायूसी भरे स्वर में कहा
मैनेजर ने सुना तो उसका मुँह बन गया और उसने कहा,”प्यार और तुम से ? अभी जो मेरी तारीफ में तुमने खड़ूस , बुरा इंसान और लीचड़ कहा है ना उसके बाद तो मुझे तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखनी चाहिए और मैं कोई प्यार व्यार नहीं करता तुम से मैं दो बच्चो का बाप हूँ,,,,,,,,,,,मैंने तुम्हारी छुट्टी इसलिए अप्रूव की है ताकि कुछ दिन के लिए यहाँ शांति रहे और मैं इस पोस्ट ऑफिस को बंद होने से बचा सकू,,,,,,,,,,,!!!”
मैनेजर की बात सुनकर सुरभि का मुँह बन गया वह उठी और कहा,”वैसे इतने अच्छे भी नहीं हो आप,,,,,,,,,,,,लीव एप्लिकेशन मैं आपको मेल कर दूंगी , क्या मैं अब घर चली जाऊ ?”
“यस प्लीज,,,,,,,,!!!”,मैनेजर ने कहा तो सुरभि उनके केबिन से बाहर निकल गयी।
सुरभि ने अपना सब काम खत्म किया और मैनेजर को लीव एप्लिकेशन मेल करके लंच टाइम में ही पोस्ट ऑफिस से निकल गयी क्योकि आज काम बहुत कम था और सुरभि काफी थका हुआ भी महसूस कर रही थी।
पोस्ट ऑफिस से बाहर आकर सुरभि ने सामने से आते ऑटो को रोका और उसमे आ बैठी। उसे तेज भूख लगी थी इसलिए उसने ऑटो वाले को मार्किट साइड चलने को कहा जहा उस खाने के कई ऑप्शन मिल सकते थे। मार्किट आकर सुरभि ने किराया दिया और फुटपाथ पर चल पड़ी। चलते चलते सुरभि के जहन में फिर से अनिकेत चलने लगा और उसका चेहरा उदासी से घिर गया लेकिन अगले ही उसके जहन में सिद्धार्थ की कही बात कौंधी “एक नंबर का गधा है वो”
“हाँ गधा तो है तभी तो ऐसी जिद पकड़कर बैठा है लेकिन तुम्हे ये हक़ किसने दिया कि तुम उसे गधा कहो ? खुद को देखा है कभी जितना परेशान तुमने अवनि को किया है ना तुम से बुरा इंसान तो कोई और हो भी नहीं सकता,,,,,,,,,लेकिन तुमने हमेशा अवनि को परेशान किया है मुझे नहीं,,,,,,,,,हाह ! मुझे कर भी नहीं सकते मुझसे तुम डरते जो हो,,,,,,लेकिन आजकल तुम सच में बदल गए हो ना तुम पहले की तरह मुझसे चिढ़ते हो , ना मुझ पर गुस्सा करते हो , ना ही मुझसे झगड़ते हो,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह पता नहीं तुम्हे क्या हो गया है ?”
खुद में ही बड़बड़ाते हुए सुरभि सामने रेस्त्रो में चली आयी और एक खाली कुर्सी पर आ बैठी उसने ये भी नहीं देखा कि उसी टेबल पर सामने सिद्धार्थ किसी लड़की के साथ बैठा खाना खा रहा है।
सुरभि का सिद्धार्थ से बार बार टकराना कोई इत्तेफाक तो नहीं था। वह जब भी किसी उलझन में होती थी या उदास होती थी हर बार आकर सिद्धार्थ से ही टकराती और आज भी वही हुआ। सुरभि को अपने सामने बैठा देखकर सिद्धार्थ हैरान था तो उसके साथ बैठी लड़की बातें करते हुए अपना खाना खाने में व्यस्त थी। सुरभि अपने फोन में देख रही थी कि शायद अनिकेत ने उसे कोई मैसेज किया हो।
“मेम आर्डर ?”,सुरभि के बगल में खड़े वेटर ने पूछा
“कड़ाही पनीर विथ बटर नान”,सुरभि ने फोन में देखते हुए कहा उसके चेहरे पर उदासी थी और आवाज में मायूसी जिसे सिद्धार्थ महसूस कर रहा था।
वेटर चला गया और सुरभि ने मायूस होकर अपना फोन टेबल पर रखकर जैसे ही सामने देखा सिद्धार्थ को देखकर चौंकी। अगले ही पल सिद्धार्थ की कही बात उसके कानों में गुंजी,”आज के बाद मेरे सामने मत आना और अगर आ भी जाओ तो ऐसे बिहेव करना जैसे हम एक दूसरे को जानते ही नहीं,,,,,,,,क्योकि मैं तुम्हे अब और नहीं झेल सकता
सिद्धार्थ के कहे शब्द याद आते ही सुरभि के चेहरे पर कठोर भाव उभर आये और वह दूसरी तरफ देखने लगी।
सिद्धार्थ के साथ बैठी लड़की ने सामने बैठी सुरभि को देखा तो कहा,”हेलो ! आप कही और क्यों नहीं बैठ जाती , दिखाई दे रहा है ना ये टेबल हमने बुक किया है वी नीड़ सम प्रायवेसी”
सुरभि एक तो सिद्धार्थ को देखकर पहले से चिढ़ी हुई थी , लड़की की बातें सुनकर और खीज गयी और कहा,”इतनी ही प्रायवेसी चाहिए तो अपने घर जाओ या कोई रिसोर्ट बुक कर लो,,,,,,,,ये पुब्लिक प्लेस है और अगर तुम्हे प्रॉब्लम हो रही है तो तुम अपने बाबू शोना को लेकर कही और बैठ जाओ”
“व्हाट डू यू मीन ?”,सिद्धार्थ के साथ बैठी लड़की ने गुस्से से कहा
सिद्धार्थ ने देखा आस पास कोई भी टेबल खाली नहीं था इसलिए उसने धीरे से लड़की से कहा,”ईशा ! इट्स ओके , हम यही बैठते है”
सुरभि ने सुना तो सिद्धार्थ को घूरकर देखा और मन ही मन कहा,”हाँ हाँ यहाँ बैठकर मेरे जले पर नमक जो छिड़कना है तुम्हे , मेरा ब्रेकअप करवा कर खुद नयी गर्लफ्रेंड के साथ लंच करने आये हो,,,,,,,,,,,,हाह ! मेरी ही किस्मत खराब है , ओह्ह्ह्ह अनिकेत तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया ?”
“मुझे घूरना बंद करो”,सिद्धार्थ ने धीरे से कहा जिसे सिर्फ सुरभि सुन पायी और सिद्धार्थ से अपनी नजरें हटाकर उसी की तरह धीरे से कहा,”हाह ! तुम इतने भी हैंडसम नहीं हो समझे , अपनी इस गिलहरी को लो और दफा हो जाओ यहाँ से,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने सुना तो उसने सुरभि को घुरा और कहा,”आखिर तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है ? तुम बार बार मेरे सामने आती हो मैं नहीं,,,,,,,,!!!”
“ओह्ह्ह रियली ! तुम कही के प्रिंस चार्मिंग हो”,सुरभि ने कहा ईशा का ध्यान खाने और अपने फ़ोन में ज्यादा था , सिद्धार्थ और सुरभि की बातों से उसे कोई मतलब नहीं था वह मस्त अपना खाने में लगी थी।
सुरभि की बात सुनकर सिद्धार्थ मुस्कुराया और कहा,”कही तुम्हे मुझे इसके साथ खुश देखकर जलन तो नहीं हो रही ?”
“हाह ! तुम्हे लगता है मैं तुमसे जलूँगी,,,,,,,,,,मेरी तरफ से भाड़ में जाओ तुम दोनों,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने गुस्से से कहा हालाँकि वह खुद नहीं समझ पा रही थी कि उसे इतना गुस्सा क्यों आ रहा है ?
“मेम आपका आर्डर”,वेटर ने कड़ाई पनीर और नान की प्लेट टेबल पर रखकर कहा लेकिन सुरभि तो सुरभि है उसका पारा अब तक गर्म हो चुका था वह उठी और वेटर की तरफ देखकर गुस्से से कहा,”तो खिलाओ इन्हे और बिल भी इनसे ही भरवाना”
वेटर ने सुना तो सिद्धार्थ की तरफ देखने लगा और सुरभि वहा से चली गयी।
( क्या जयदीप की बिजनेस डील बचाने के लिए पृथ्वी प्राची देसाई से माफ़ी ? क्या होगा जब जयदीप को पता चलेगी पृथ्वी और विक्रम कपूर की पहली मुलाक़ात की सच्चाई ? क्या सिद्धार्थ ने कर लिया है सुरभि से हमेशा के लिए किनारा और बढ़ रहा है अपनी नई जिंदगी में आगे ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
