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Pasandida Aurat Season 2 – 45

Pasandida Aurat Season 2 – 45

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

अवनि विक्रम के ऑफिस से बाहर चली आयी , अवनि का दिल जोरो से धड़क रहा था और उसकी आँखों के सामने अभी भी विक्रम का वह घिनोना चेहरा आ रहा था। उसकी आँखों में आँसू थे और किसी भी वक्त बहने को तैयार थे। चलते हुए अवनि उसी जगह चली आयी जहा उसने पृथ्वी को छोड़ा था। अवनि की हिम्मत नहीं हो रही थी पृथ्वी को फोन करके ये सब बताने की , पृथ्वी की आज जरुरी मीटिंग थी और अवनि उसे परेशान करना नहीं चाहती थी।

उसने एक नजर उस बिल्डिंग की तरफ देखा जिसमे पृथ्वी का ऑफिस था और घर जाने के लिए जैसे ही आगे बढ़ी पीछे आते मनीष ने उसे आवाज दी,”मेम , मेम सुनिए”
मनीष की आवाज अवनि के कानो तक पड़ती इस से पहले पास से गुजरता ऑटो रुका और अवनि उसमे बैठकर वहा से चली गयी। मनीष भागकर आया लेकिन अवनि तब तक वहा से जा चुकी थी।

पनवेल , रवि जी का घर
लक्षित को बुखार था इसलिए आज उसने कॉलेज से छुट्टी ले ली और घर पर आराम कर रहा था। नाश्ते के बाद लता ने उसे दवा दे दी थी जिस से बुखार कुछ कम था। घर में बैठे बैठे उसे बोरियत होने लगी तो वह घर के हॉल में आकर विडिओ गेम खेलने लगा। लता धुले हुए कपडे सूखा रही थी तभी किसी ने बेल बजायी। लक्षित ने उठना चाहा तो लता ने उसके बगल से गुजरते हुए कहा,”तू बैठ ना मैं देखती हूँ”

लता ने आकर दरवाजा खोला तो सामने नीलम भुआ खड़ी थी। नीलम भुआ को देखकर लता मुस्कुराई और कहा,”अरे ताई आप , अंदर आईये ना”
“हाँ वहिनी ! आपने तो अब उस तरफ आना जैसे बंद ही कर दिया है,,,,,,,,,,!!”,कहते हुए नीलम भुआ अंदर चली आयी और लक्षित को घर में देखकर कहा,”अरे तुम आज कॉलेज नहीं गए ?”
“इसकी तबियत खराब है,,,,,,,,आप बैठिये ना , क्या लेंगी चाय कॉफी या कुछ और ?”,लता ने किचन की तरफ जाते हुए कहा

“चाय ले लुंगी वहिनी , वैसे मैं यहाँ आपको ये बताने आयी हूँ कि इस बार होली का प्रोग्राम सबने मिलकर बड़े दादा के घर पर रखा है,,,,,,,!!”,नीलम ने कहा
“अच्छा है , पर सच कहू तो मेरा इस बार त्यौहार मनाने का बिल्कुल नहीं है ताई”,लता ने पानी का गिलास नीलम की तरफ बढाकर उदासी भरे स्वर में कहा
“आपकी उदासी मैं समझ सकती हूँ वहिनी लेकिन हम सबने क्या नहीं किया , सब करके देख लिया लेकिन वो लड़की तो पृथ्वी से दूर होने का नाम नहीं ले रही”,नीलम ने धीरे से लेकिन नफरत भरे स्वर में कहा

“इन सब में उस लड़की की भी क्या गलती है ताई , सब किया धरा तो अपनी औलाद का है न फिर बार बार उस लड़की को भी क्यों दोष देना ? वो अगर उस लड़की को यहाँ लेकर ही नहीं आता तो क्या वो यहाँ आती ?”,लता ने आज पहली बार अवनि को गलत ना कहकर पृथ्वी के लिए अपना गुस्सा दिखाया

नीलम भुआ ने सुना तो हैरानी से लता को देखा और कहा,”ये आप क्या कह रही है वहिनी , आप उस अवनि की तरफदारी कर रही है अरे उसी ने फंसाया है हमारे पृथ्वी को और देखो आज आपके ही बेटे को आपके खिलाफ कर दिया है,,,,,,,,,क्या हो गया जो आपने गुस्से में उसे पेपर भेज दिए उसके बाद क्या पृथ्वी इस घर में वापस आया ? अरे घर आना तो दूर क्या उसने आपसे कभी बात भी की ?”

लता ने सुना तो उन्हें वो पल याद आ गया जब पृथ्वी उनके साथ खड़े होकर सब्जी खरीद रहा था लेकिन उसने लता से बात नहीं की थी और उस रात कैसे उसने अवनि से चिल्लाकर गुस्से में कहा था कि उसका अब अपने घरवालों से कोई रिश्ता नहीं है। वो पल याद आते ही लता की आँखों में आँसू भर आये और चेहरा उदासी से भर गया।

लता को खामोश देखकर नीलम ने अपना हाथ उनके हाथ पर रखा और कहा,”वहिनी ! मानो या ना मानो पर जो हो रहा है उसके लिए सिर्फ और सिर्फ वो लड़की जिम्मेदार है , ना वो पृथ्वी की जिंदगी में आती ना पृथ्वी आपको छोड़कर जाता”

इस बार नीलम ने ये बात जरा ऊँचे स्वर में कही जो कि लक्षित के कानो में पड़ी। लक्षित ने सुना तो उठा और नीलम की तरफ आकर कहा,”इसमें वहिनी की कोई गलती नहीं है भुआ,,,,,,,और ऐसा तो क्या कर दिया दादा ने जो आप लोग उनसे इतने नाराज है , ठीक है कर ली उन्होंने अपनी मर्जी से शादी लेकिन मैंने खुद देखा है वहिनी के साथ खुश है वो,,,,,,,,,,,!!!”

लक्षित के मुँह से अवनि के लिए “वहिनी” सुनकर लता उसे हैरानी से देखने लगी तो वही नीलम के चेहरे पर गुस्से के भाव थे। उसने लक्षित की बाँह पकड़कर पूछा,”वो तेरी वहिनी कब से हो गयी रे ? पृथ्वी के साथ साथ क्या तुझ पर भी उसकी अदाओ का जादू चल गया है”  

“वो मेरे दादा की पत्नी है तो उस रिश्ते से मेरी वहिनी ही हुई और वहिनी आई समान होती है वो मुझे पर जादू क्यों चलायेगी ? पहले मैं भी था उनसे गुस्सा लेकिन कल जब मैंने दादा को उनके साथ खुश देखा तो मुझे समझ आया कि दादा का फैसला गलत नहीं था,,,,,,,,,,,इसलिए आप सब भी उनके लिए गलत बोलना बंद कीजिये”,लक्षित ने थोड़ा गुस्से से कहा   

लक्षित को नीलम के साथ बहस करते देखकर लता ने कहा,”लक्षित अंदर जाओ”
“लेकिन आई,,,,,,,,,!!”,लक्षित ने कहा
“मैंने कहा ना अंदर जाओ”,लता ने थोड़ा कठोरता से कहा तो लक्षित वहा से अंदर ना जाकर घर से बाहर चला गया क्योकि घर में रहकर उसे अवनि के बारे में कुछ भी गलत नहीं सुनना था।

लक्षित के जाने के बाद नीलम को आग लगाने का और मौका मिल गया तो उसने कहा,”देखा वहिनी अब तो लक्षित भी पृथ्वी की तरफ हो गया कही ऐसा न हो धीरे धीरे वो अवनि सबको अपनी मीठी बातो में फंसा ले और आखिर में आप अकेली रह जाये”
लता ने नीलम की बात पर ध्यान नहीं दिया वह तो अभी भी लक्षित की कही बात के बारे में सोच रही थी और फिर खोये हुए स्वर में कहा,”अभी लक्षित ने कहा कि उसने पृथ्वी को अवनि के साथ खुश देखा,,,,,,,,ताई वो मेरे पृथ्वी का ठीक से ख्याल रखती तो होगी ना ?”

नीलम ने सुना तो उसका मुँह बन गया और उसने कहा,”इतनी फ़िक्र है तो खुद ही जाकर देख लीजिये , वैसे क्या पता वो ख्याल रखने का दिखावा कर रही हो,,,,,,,वो सच में हमारे खानदान और पृथ्वी के लायक है भी या नहीं अगर ये पता ही करना है तो मेरे पास इसकी एक तरकीब है”
“कैसी तरकीब ?”,लता ने पूछा

“क्यों न इस होली उसे अपने घर बुला लिया जाए,,,,,,,,,,वैसे भी लड़किया पहली होली पर अपने पति के साथ नहीं रहकर अपने मायके में रहती है , अब उसका कोई मायका तो है नहीं तो क्यों न उसे भी बड़े दादा के घर बुला लिया जाये और फिर देखा जाए अपने पृथ्वी के लिए वो कितनी सही है और कितनी नहीं”,नीलम ने अपने मन ही मन कुछ सोचते हुए कहा

“क्या पृथ्वी इसके लिए मानेगा ?”,लता ने कहा
“पृथ्वी को मनाने की जिम्मेदारी मेरी बस आप अपनी परमिशन दीजिये बाकि सब मैं सम्हाल लुंगी”,नीलम ने कहा और उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी।

मौर्या Pvt. Ltd. , पनवेल
मीटिंग रूम में खड़ा पृथ्वी वहा मौजूद सभी लोगो को देसाई ग्रुप के साथ शुरू करने जा रहे प्रोजेक्ट के बारे में बता रहा था। पृथ्वी का पूरा ध्यान अपने काम पर था और प्राची का पृथ्वी पर , वह तो जैसे पृथ्वी की दीवानी हो चुकी थी।
जयदीप की नजर बीच बीच में प्राची पर चली जाती और प्राची को देखकर ही वह समझ गया कि वह यहाँ सिर्फ पृथ्वी के लिए है लेकिन दोनों कम्पनी के अच्छे रिलेशन और डील की वजह से वह खामोश था।

सभी को पृथ्वी का आइडिआ काफी पसंद आ रहा था और साथ ही एक के बाद एक सभी उसकी बात से सहमत भी हो रहे थे बस कुछ टीम मेम्बर्स और प्राची ने अभी तक अप्रूवल नहीं दिया था और इसी वजह से पृथ्वी को थोड़ी मेहनत और करनी पड़ रही थी ताकि ये डील उसके हाथ से ना जाये।
मीटिंग जारी थी तभी मीटिंग रूम का दरवाजा खुला और मनीष अंदर आया।

मीटिंग के बीच में मनीष को वहा देखकर बाकी सब हैरान थे तो पृथ्वी के चेहरे पर गुस्से के भाव थे लेकिन मनीष ने इसकी परवाह नहीं की और सीधा पृथ्वी के पास आकर उसके कान में कुछ कहा जिस से उसके चेहरे के भाव एकदम से बदल गए और हाथ की मुट्ठी भी भिंच गयी। पृथ्वी ने मनीष को साइड किया और सबकी तरफ देखकर कहा,”आई ऍम सॉरी टीम , मीटिंग इज ओवर मुझे जाना होगा”

सभी आपस में खुसर फुसर करने लगे और जयदीप ने मनीष की तरफ देखकर अपनी गर्दन उचकाई लेकिन पृथ्वी के डर से उसने कुछ नहीं कहा और अपना सर झुका लिया। पृथ्वी जैसे ही दरवाजे की तरफ बढ़ा प्राची अपनी जगह से उठी और पृथ्वी के सामने आकर सधे हुए स्वर में कहा,”मिस्टर उपाध्याय ! डील अभी फाइनल नहीं हुई है तुम ऐसे मीटिंग बीच में छोड़कर नहीं जा सकते”

मेम इट्स अर्जेन्ट और मुझे जाना होगा सो मेरे रास्ते से हटिये”,पृथ्वी ने अपने गुस्से को काबू में रखकर कहा
“इतनी बड़ी डील से इम्पोर्टेन्ट और क्या हो सकता है पृथ्वी ? तुम जानते भी हो तुम्हारी वजह से ये डील लास्ट मोमेंट पर केंसल भी हो सकती है और देसाई ग्रुप एंड कम्पनी अभी और इसी वक्त इस कम्पनी से सभी बिजनेस रिलेशन खत्म कर सकती है”,प्राची ने घमंडभरे स्वर में कहा

जयदीप ने सुना तो अफ़सोस में अपना हाथ अपने सर से लगाकर सर झुका लिया क्योकि वे जानते थे प्राची गलत इंसान के सामने ये सब बाते कर रही है।
पृथ्वी ने एक नजर प्राची को देखा और कठोरता से कहा,”भाड़ में गयी आपकी डील और भाड़ में गयी आपकी कम्पनी,,,,,,,इस वक्त मेरे लिए सिर्फ मेरी वाइफ
इम्पोर्टेन्ट है और उस पर ऐसी 100 नौकरी कुर्बान”
कहकर पृथ्वी ने प्राची को साइड किया और वहा से चला गया।

मनीष ने विक्रम के ऑफिस में जो कुछ देखा सुना वो सब पृथ्वी को बता दिया था और ये जानने के बाद पृथ्वी में कहा इतना सब्र था उसे बस अवनि की परवाह थी। वह ऑफिस से बाहर उस जगह चला आया जहा खड़े होकर उसने अवनि को विदा किया था। गुस्से से लाल पृथ्वी इस वक्त ना किसी से बात करने के मूड में था ना किसी की बात सुनने के , उसे बस अवनि से बात करनी थी और सब जानना था। उसने खुद को शांत किया और अपने फोन से अवनि का नंबर डॉयल किया।

रिंग जा रही थी लेकिन अवनि ने फोन नहीं उठाया जिस से पृथ्वी और परेशान हो गया। उसने झल्लाकर एक बार फिर अवनि का नंबर डॉयल किया और इस बार दो रिंग के बाद अवनि ने फोन उठा लिया तो पृथ्वी ने घबराहटभरे स्वर में कहा,”हेलो बेटा ! कहा हो तुम ?”
“रेलवे स्टेशन,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने धीरे से कहा

“ठीक है वही रुको मैं अभी आया”,पृथ्वी ने कहा उसकी आवाज में कम्पन्न था। फोन पर अवनि से कुछ पूछकर या उस पर गुस्सा करके वह उसे परेशान करना नहीं चाहता था इसलिए बस इतना ही कहा और फोन काटकर जेब में रखते हुए सामने से गुजरती टेक्सी में आ बैठा और स्टेशन चलने को कहा।

पनवेल रेलवे स्टेशन , मुंबई
स्टेशन की बेंच पर सिमटकर बैठी अवनि के चेहरे पर उदासी और आँखों में आँसू थे। उसकी आँखों के सामने बार बार विक्रम का चेहरा आ रहा था और जितनी बार विक्रम का चेहरा उसके जहन में आता और उसे उस से और नफरत होती। अवनि को खुद पर भी गुस्सा आ रहा था आखिर क्यों उसने इतनी आसानी से विक्रम जैसे इंसान पर भरोसा कर लिया और उस से मिलने चली आयी। आज अगर उसके साथ कुछ गलत हो जाता तो जिम्मेदार कौन होता यही सब ख्याल उसे परेशान कर रहे थे।

पृथ्वी  के बारे में सोचकर भी अवनि घबरा रही थी क्योकि कुछ दिन पहले ही उसने पृथ्वी का गुस्सा देखा था और वह नहीं चाहती थी  ऐसा उसे फिर देखने को मिले। अपने हाथो की उंगलियों को आपस में फंसाकर होंठो से लगाए अवनि यही सब सोच रही थी।
कुछ देर बाद ही पृथ्वी स्टेशन पहुंचा और अवनि को ढूंढते हुए प्लेटफॉर्म पर चला आया , वह इतना घबराया हुआ था कि उसे अवनि को दोबारा फोन करना याद ही नहीं रहा।

प्लेटफॉर्म पर आकर पृथ्वी ने इधर उधर देखा तो कुछ ही दूर सामने बेंच पर बैठी अवनि उसे दिखाई दी। इस वक्त स्टेशन पर भीड़ कम होती है बस इसलिए उसे अवनि आसानी से मिल गयी।
पृथ्वी अवनि की तरफ बढ़ गया। उसके कानो में मनीष की कही बातें गूंज रही थी और आँखों के सामने था अवनि का उदास चेहरा और साथ ही हो रहा और तीखी चुभन का अहसास,,,,,,,,,,!!”

अवनि को अहसास हुआ जैसे पृथ्वी उसके आस पास ही है उसने अपनी गर्दन घुमाई तो उसे कुछ ही दूर से पृथ्वी आता दिखाई दिया। अवनि उठी और पृथ्वी की तरफ बढ़ गयी। प्लेटफॉर्म पर मौजूद भीड़ में बस एक पृथ्वी था जिसे अवनि जानती थी। जैसे जैसे वह पृथ्वी की तरफ बढ़ रही थी उसे विक्रम का छूना याद आ रहा था जो कि अवनि को बुरे अहसास दे रहा था। वही अवनि की तरफ बढ़ते हुए पृथ्वी को भी अचानक से प्राची का छूना याद आया और उसका मन कड़वाहट से भर गया।

दोनों एक दूसरे के सामने आकर रुके और फिर एकदम आगे बढ़कर दोनों ने एक दूसरे को गले लगा लिया। अवनि की आँखों में भरे आँसू बह पृथ्वी खामोश हो गया। पृथ्वी के हाथ ने अवनि के सर को जैसे ही सहलाया और दूसरे हाथ ने जैसे ही उसकी पीठ को छूआ विक्रम की छुअन का वो बुरा अहसास अगले ही पल गायब हो गया। अवनि को गले लगाने के बाद पृथ्वी के मन से भी प्राची की छुअन की कड़वाहट फीकी पड़ गयी।

अवनि को फर्क नहीं पड़ा कि उसने पृथ्वी को गले लगाया है और वही पृथ्वी के लिए तो इस वक्त कौन दुनिया ? कौन चार लोग ? वाली कहावत सही साबित हो रही थी उसे नहीं फर्क पड़ा प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोग उसे देख रहे है , बातें कर रहे है , उसे बस अवनि की फ़िक्र थी,,,,,,,,,,,!!

अवनि पृथ्वी से दूर हटी , पृथ्वी ने अवनि का हाथ थामा और कहा,”चलो मेरे साथ”
अवनि चुपचाप पृथ्वी के साथ स्टेशन से बाहर चली आयी। बाहर आकर पृथ्वी ने अवनि को बेंच पर बैठाया और खुद सामने दुकान पर चला गया। वहा से उसने पानी का एक बोतल लिया और अवनि की तरफ चला आया। उसने पानी की बोतल का ढक्कन खोला और अवनि की तरफ बढाकर कहा,”पानी पीओ”
अवनि ने अपने आँसू पोछे और जितने आँसू अवनि की आँखों से गिर रहे थे पृथ्वी खामोश खड़ा उन्हें गिन रहा था।

अवनि की आँख से गिरता एक एक आँसू उसके दिल पर मजबूत चोट की तरह था बस इस पल उसने खुद को जैसे तैसे करके सम्हाले रखा। अवनि ने पानी पीया और बोतल पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी ने दो घूंठ पानी खुद पिया और अपनी जेब से रूमाल निकालकर अवनि की तरफ बढा दिया। अवनि ने रूमाल लिया और अपना चेहरा पोछने लगी। पृथ्वी उसके बगल में आ बैठा। अवनि थोड़ा नार्मल हुई तो पृथ्वी ने पूछा,”मैंने तुम से कहा था फ्री होकर मुझे फोन करना , तुमने मुझे फोन क्यों नहीं किया और अकेले यहाँ क्यों चली आयी ?”

“मुझे लगा तुम मीटिंग में होंगे और मैं तुम्हे डिस्टर्ब करना नहीं चाहती थी,,,,,,,,इसलिए मैं स्टेशन चली आयी ताकि मैं घर चली जाऊ,,,,,,!!!”,अवनि ने धीरे से कहा
पृथ्वी ने सुना तो उसे थोड़ा गुस्सा आया लेकिन सामने उसकी मैडम थी उस पर भला वह गुस्सा कैसे कर सकता था ? इसलिए एक गहरी साँस ली और कहा,”तुम्हे मुझे डिस्टर्ब करने का पूरा हक़ है अवनि , और घर जा रही थी बिना मुझे बताये खो जाती तो कहा ढूंढता मैं ?”

पृथ्वी गुस्सा करना नहीं चाहता था लेकिन आखिर में प्यार भरा गुस्सा उसकी बात में झलक ही गया  
“मैं बच्ची नहीं हूँ पृथ्वी , घर का एड्रेस पता है मुझे”,अवनि ने धीरे से कहा
“बच्ची ही है आप , दुनिया के लिए बड़ी बेशक बड़ी हो जाये लेकिन मेरे लिए बच्ची ही रहेगी ! क्या हुआ था वहा ?”,पृथ्वी ने थोड़ा सीरियस होकर पूछा

“जाने दो ना पृथ्वी , वैसे भी मैंने वहा काम करने से मना कर दिया है”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा
“अवनि ! मैंने पूछा वहा क्या हुआ था ? मैं तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता हूँ इसलिए बताओ मुझे,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए गंभीर स्वर में कहा
अवनि ने पृथ्वी को सब बता दिया और पृथ्वी ख़ामोशी से सब सुनता रहा क्योकि अवनि के सामने वह अपना असली गुस्सा दिखा नहीं सकता था लेकिन अंदर ही अंदर गुस्से से उबल रहा था।  

अवनि सब बताकर चुप हो गयी तो पृथ्वी ने कहा,”तुमने सच में उसे थप्पड़ मारा ?”
अवनि ने धीरे से हामी में अपनी गर्दन हिलाई तो पृथ्वी ने प्यार से उसका सर थपथपाते हुए कहा,”वैरी गुड ! ऐसे लोगो के साथ ऐसा ही करना चाहिए,,अब चले ?”
“कहा ? और तुम्हारी मीटिंग थी ना उसका क्या हुआ ?”,अवनि ने पूछा

“आज की मीटिंग मैंने बीच में छोड़ दी , हो सकता है इस से कम्पनी को बड़ा नुकसान हो और ये भी हो सकता है जयदीप सर मुझे नौकरी से निकाल दे,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने बहुत ही आराम से कहा लेकिन उसकी बात सुनकर अवनि के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये और उसने रोआँसा होकर कहा,”मेरे लिए तुमने मीटिंग छोड़ दी ?”
“मेरे लिए तुम इम्पोर्टेन्ट हो वो मीटिंग नहीं,,,,,,,,,चलो चलते है , मेरे ऑफिस के बगल में एक बहुत अच्छा कैफे है वहा चलकर कॉफी पीते है,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने उठते हुए कहा

अवनि अब भी हैरान थी , पृथ्वी की नौकरी जाने वाली थी और पृथ्वी को रत्तीभर फर्क नहीं पड़ रहा था बल्कि वह तो अवनि के साथ कॉफी पीने की बाते कर रहा था। अवनि को परेशान देखकर पृथ्वी ने अपना हाथ अवनि की तरफ बढ़ा दिया। अवनि ने उसका हाथ थामा और उसके साथ चल पड़ी।

( होली के बहाने अवनि को घर बुलाकर आखिर कौनसी चाल चलने वाली है नीलम भुआ ? क्या पृथ्वी के इस रवैये के बाद प्राची कर देगी मौर्या कम्पनी से सारी डील केंसल ? अवनि से सब सुनने के बाद भी आखिर क्यों है पृथ्वी इतना शांत ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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