Site icon Sanjana Kirodiwal

Pasandida Aurat Season 2 – 43

Pasandida Aurat Season 2 – 43

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी सुबह जल्दी उठ गया क्योकि आज उसे ऑफिस जाना था। देसाई ग्रुप के साथ उसकी मीटिंग थी जिसमे उसे प्रेजेंटेशन देना था और पृथ्वी अपने काम को लेकर किसी तरह की लापरवाही बरतना नहीं चाहता था। वाशबेसिन के सामने आकर उसने मुँह धोया और पोछते हुए हॉल में चला आया। अवनि भी जल्दी उठकर नहा चुकी थी और मंदिर के सामने खड़ी होकर पूजा कर रही थी। उसे भी आज “विक्रम कपूर” से मिलना था जिसका ऑफिस पनवेल में ही था। अवनि ने पूजा की और पृथ्वी के लिए चाय बनाने किचन में चली आयी।

अवनि चाय लेकर आयी तब तक पृथ्वी अपने फोन पर आये मेल्स और नोटिफिकेशन चेक करने लगा। अवनि चाय लेकर आयी और पृथ्वी से कहा,”आज तुम्हे ऑफिस जाना है ना ?”
“हाँ ! वो एक जरुरी मीटिंग और सर ने कहा है मेरा वहा होना जरुरी है , अब तुम्हारी तबियत कैसी है ?”,पृथ्वी ने अवनि के हाथ से चाय का कप लेकर कहा
“पहले से काफी बेहतर लग रहा है,,,,,,,,,मुझे आज पनवेल जाना है एक प्रोडक्शन हॉउस के डायरेक्टर के साथ मेरी मीटिंग है,,,,,,,तो क्या मैं जाऊ ?”,अवनि ने अपनी चाय लेकर पृथ्वी के बगल पर वाले सोफे पर बैठते हुए कहा

पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखा और कहा,”अवनि ! तुम्हे कही भी आने जाने के लिए मुझसे परमिशन लेने की जरूरत नहीं है , हाँ बस तुम मुझे बता सकती हो या चाहो तो मुझसे लेकर चलने को भी कह सकती हो , मैंने तुम से शादी की है तुम मेरी गुलाम नहीं हो,,,,,,,,,मैंने तुमसे वादा किया था मैं तुम्हारे काम को लेकर हमेशा तुम्हे स्पेस दूंगा,,,,,,,,वैसे किस टाइम जाने वाली हो ?”
“11 बजे बुलाया है”,अवनि ने कहा

“तो फिर एक काम करते है साथ ही निकल जाते है,,,,,,,मेरा ऑफिस भी पनवेल में ही है तुम वहा से प्रोडक्शन हॉउस चली जाना”,पृथ्वी ने चाय पीते हुए कहा
“हम्म्म्म ठीक है , तुम नहा लो मैं तुम्हारे लिए खाने को कुछ बना देती हूँ,,,,,,,!!!”,अवनि ने अपनी चाय खत्म कर उठते हुए कहा
पृथ्वी ने भी अपनी चाय ख़त्म की और नहाने चला गया

पृथ्वी तैयार होकर आया तब तक अवनि उसके लिए दोपहर का खाना और नाश्ता तैयार कर चुकी थी। अवनि प्लेट में पराठा लेकर किचन से बाहर आयी उसने देखा अपने कान और कंधे के बीच अपना फोन लगाए पृथ्वी किसी से बात कर रहा था और साथ ही अपने शर्ट की बाजू फोल्ड कर रहा था। अवनि ने घडी देखी जिसमे 9.45 हो रहा था। वह प्लेट लिए पृथ्वी के पास चली आयी ताकि पृथ्वी जल्दी से अपना नाश्ता करे और ऑफिस के लिए निकले।

पृथ्वी ने अवनि से एक मिनिट रुकने का इशारा किया और फोन पर किसी को कुछ समझाने लगा। अवनि ने देखा पृथ्वी कुछ ज्यादा ही बिजी है तो उसने निवाला तोडा और पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी ने देखा तो हैरान रह गया क्योकि बीती रात अवनि ने पृथ्वी को जो निवाला खिलाया था वो तो जयदीप के कहने पर था लेकिन आज पहली बार अवनि खुद से पृथ्वी को खिलाना चाह रही थी। पृथ्वी की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था , उसका दिल अंदर ही अंदर ख़ुशी से उछल रहा था बस उसने उस ख़ुशी को अपने चेहरे पर आने नहीं दिया।

अवनि को अपने सामने देखकर पृथ्वी खामोश हो गया और फोन के उस तरफ से बात करता क्लाइंट हेलो हेलो करता रहा। क्लाइंट की आवाज बाहर तक आ रही थी ये देखकर अवनि ने कहा,”तुम्हारा फोन”
पृथ्वी ने अपना फोन कान से हटाया और कॉल काटकर कहा,”भाड़ में गया फोन , तुम खिलाओ ना”
अवनि ने सुना तो उंगलियों में पकड़ा निवाला पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया और पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए उसे बड़े प्यार से खा लिया।

पृथ्वी ने ध्यान ही नहीं दिया कि प्लेट में पराठे के साथ कद्दू की खट्टी मीठी सब्जी थी , वह सब्जी जिसे पृथ्वी नापसंद करता था अवनि के हाथ से बड़े प्यार से खा रहा था। अवनि ने एक के बाद एक निवाले पृथ्वी को खिलाये और पृथ्वी चुपचाप बच्चे की तरह खाता रहा। पराठा खत्म करके अवनि ने कहा,”और खाना है ?”
“मेरा पेट तो पहले निवाले से ही भर गया था अवनि , बाकी तो मैंने बस इसलिए खाया ताकि तुम मेरे सामने रहो”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए बड़े  प्यार से कहा। अवनि ने सुना तो पृथ्वी से नजरे हटाई और कहा,”मैं अभी आयी”

पृथ्वी ने अपने होंठो पर लगे खाने को हाथ के अंगूठे से पोछा और खाकर कहा,”डिलिशियस”
पृथ्वी इस पल को एन्जॉय कर पाता इस से उसका फ़ोन फिर बजा। पृथ्वी ने फोन उठाया तो दूसरी तरफ से क्लाइंट ने कहा,”मिस्टर उपाध्याय ! आई थिंक कॉल कट गया था,,,,,,,!!!”
“जी सर बताईये,,,,,,!!”,कहते हुए पृथ्वी एक बार फिर क्लाइंट से बात करने में बिजी हो गया।
अवनि तैयार होकर आ चुकी थी। आज उसने बाल धोये थे इसलिए उन्हें गुथने के बजाय खुला छोड़ दिया। वह बाहर आयी और कहा,”चले पृथ्वी ?”

पृथ्वी कॉल कट कर चुका था इसलिए जैसे ही पलटा उसकी नज़रे अवनि पर ठहर गयी। लॉन्ग कुरता साथ में चूड़ीदार , आँखों में काजल , ललाट पर बिंदी , कानों में छोटे झुमके , मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र , दोनों कंधो पर जमा दुपट्टा और चेहरे पर हमेशा की तरह मासूमियत लिए अवनि उसके सामने खड़ी थी लेकिन आज कुछ अलग था जो अवनि को बाकि दिनों से ज्यादा खूबसूरत बना रहा था और वो थे उसके लम्बे घने बाल जिन्हे अवनि ने खुला रखा था।

पृथ्वी ने देखा तो अवनि की तरफ बढ़ते हुए कहा,”तुम ऐसे जाने वाली हो ? मेरा मतलब ऐसे खुले बालो के साथ , सब तुम्हे देखेंगे और मैं वहा नहीं रहूंगा”
“मैं इन्हे समेट लेती हूँ”,अवनि ने अपने बालो को समेटकर उनमे क्लेचर लगाकर कहा  
पृथ्वी शायद कुछ और कहना चाहता था लेकिन अवनि ने उसे आगे बोलने का मौका ही नहीं दिया ,पृथ्वी ने एक नजर अवनि को देखा और फिर अपना बैग और टिफिन उठाकर कहा,”आओ चलते है”
अवनि भी अपना बैग उठाये पृथ्वी के साथ फ्लेट से बाहर निकल गयी।

मुंबई आने के बाद आज पहली बार अवनि अपने सपनो की तरफ पहला कदम बढ़ा रही थी। वह बहुत खुश थी और होती भी क्यों नहीं उसके इस नए सफर में उसका हमसफ़र उसके साथ जो था। अवनि आज इतनी खुश थी कि पृथ्वी का उसे खुले बालों के लिए टोकना भी उसे बुरा नहीं लगा बल्कि एक आज्ञाकारी लड़की की तरह उसने अपने बालो को समेटा और उसके साथ चल पड़ी। दोनों लिफ्ट के अंदर चले आये। अवनि किसी सोच में गुम मुस्कुराती हुयी लिफ्ट के बंद दरवाजो को देख रही थी और बगल में खड़ा पृथ्वी उसे ,

अवनि के समेटे हुए बाल उसे अच्छे नहीं लग रहे थे उसने अपना हाथ अवनि के सर की तरफ बढ़ाया और क्लेचर हटा दिया। अवनि ने पलटकर हैरानी से पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी ने हाथ में पकडे अवनि के क्लेचर को अपने शर्ट की कोलर पर लगाकर कहा,”कुछ देर पहले मैं तुम से कह नहीं पाया , तुम्हारे बाल खुले हुए ज्यादा अच्छे लगते है,,,,,,,,तुम अपने बालों को और खुद को आजाद रख सकती हो अवनि”

अवनि ने सुना तो ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगी , एक पल में वह खुद को लेकर पृथ्वी की मीठी सी जलन देखती और अगले ही उसकी ऐसे बातें सुनकर हैरान हो जाती। अवनि ने चेहरे पर आये बालों को बड़ी अदा के साथ अपने कान के पीछे किया और पलटकर खड़ी हो गयी।
पृथ्वी ने अपने दोनों हाथो को बांधा और लिफ्ट की दिवार से पीठ लगाकर खड़ा हो गया। वह मुस्कुराकर अवनि को देखने लगा और ये भूल गया कि अवनि का क्लेचर उसके शर्ट की कोलर पर लगा है।

 दोनों अपार्टमेंट से बाहर आये और स्टेशन के लिए निकल गए। पृथ्वी बहुत खुश था आज वह पहली बार अवनि के साथ ट्रेवल करने वाला था और ये भी उसके छोटे छोटे प्यारे सपनो में से एक सपना था जो कभी उसने खुली आँखों से देखा था। पृथ्वी ने अवनि से रुकने को कहा और खुद टिकट लेने चला गया। कुछ देर बाद वह वापस आया और अवनि के साथ प्लेटफॉर्म पर चला आया। ट्रेन आने में बस कुछ ही वक्त था। अवनि पहली बार नए शहर के रेलवे स्टेशन पर आयी थी  और इतनी भीड़ देखकर हैरान भी थी।

अवनि ने देखा यहाँ सब जल्दी में थे , किसी को किसी से कोई मतलब नहीं बस सब भाग रहे थे अपनी अपनी मंजिलो के लिए , भीड़ देखकर अवनि थोड़ा घबरा भी रही थी , राजस्थान जैसे शांत और सुकूनभरी जगह पर रहने वाली अवनि ने जब मुंबई की भाग दौड़ भरी जिंदगी को देखा तो उसके चेहरे पर हैरानी और घबराहट के भाव आना जायज था। पृथ्वी ने देखा तो एक नजर में भांप गया

उसने अपनी बाँह अवनि की तरफ बढ़ाई और कहा,”अगर तुम सहज हो तो मेरी बाँह थाम लो , जानता हूँ तुम्हारे लिए ये सब नया है लेकिन मुंबई में ये आम बात है। यहाँ के लोगो के पास वक्त नहीं होता इसलिए तो इसे मुंबई कहते है,,,,,,,,,!!!”
अपने ही पति की बाँह थामने में भला कैसी शर्म सोचकर अवनि ने धीरे से पृथ्वी की बाँह थाम ली जिस से वह उसके थोड़ा और करीब आ गयी। कुछ देर बाद ट्रेन आयी और प्लेटफॉर्म पर जमा भीड़ ट्रेन में चढ़ने के लिए उमड़ पड़ी। पृथ्वी ने भी अवनि का हाथ थामा और ट्रेन में चढ़ गया लेकिन अंदर भी वैसी ही भीड़ थी।

पृथ्वी ने देखा एक सीट खाली है तो उसने अवनि को वहा बैठाया और खुद हैंडल पकड़कर खड़ा हो गया। पृथ्वी के साथ ही ना जाने कितने लोग खड़े थे वो  सटे हुए। अवनि के लिए ये पहली बार था लेकिन पृथ्वी को रोज इसी ट्रेन से आना जाना पड़ता था और महीने में एक दो बार ऐसा होता जब उसे बैठने के लिए सीट मिले। अवनि ने देखा भीड़ में खड़े पृथ्वी के लिए ये सब कितना मुश्किल हो रहा था। अपनी नौकरी के लिए उसे कितनी मेहनत करनी पड़ रही थी। वह चेहरे पर उदासी और बुझी आँखे लिए पृथ्वी को देखने लगी।

पृथ्वी की नजर जब अवनि पर पड़ी तो वह धीरे से मुस्कुराया और अपनी गर्दन उचकाई। अवनि ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने अपनी ऊँगली सीने पर रखी और फिर अपनी हथेली अवनि को दिखाकर इशारो इशारो में ये अहसास दिलाया कि वह ठीक है। अवनि ने भी जवाब में अपनी पलकें झपका दी और फिर खिड़की से बाहर देखने लगी।

40 मिनिट बाद ट्रेन पनवेल स्टेशन पहुंची। पृथ्वी अवनि को लेकर ट्रेन से नीचे उतरा और स्टेशन से बाहर चला आया। स्टेशन से बाहर आकर उसने अवनि से प्रोडक्शन हॉउस का पता पूछा जो कि उसके ऑफिस से 500 मीटर आगे था। पृथ्वी अवनि के साथ ऑटो में आ बैठा और चलने को कहा। स्टेशन से पृथ्वी के ऑफिस का रास्ता बस दस मिनिट की दूरी पर था इसलिए रास्तेभर पृथ्वी अवनि को समझाता रहा कि उसे पुरे कॉन्फिडेंस से मीटिंग अटेंड करनी है , घबराना नहीं है और खुद को अकेला तो बिल्कुल नहीं समझना है।

अवनि ख़ामोशी से सब सुनती रही उसकी आँखों के सामने तो अभी भी वही ट्रेन वाले पल चल रहे थे जब भीड़ में खड़ा पृथ्वी परेशान हो रहा था।
ऑटो पृथ्वी के ऑफिस के सामने आकर रुका और दोनों नीचे उतर गए। पृथ्वी ने ऑटोवाले को पैसे दिए और जैसे ही पलटा अवनि के चेहरे पर उदासी देखकर कहा,”क्या हुआ ?”
“क्या तुम रोज उसी ट्रेन से ऑफिस आते हो ?”,अवनि ने कहा

“हाँ,,,,,नवी मुंबई से पनवेल के लिए वही लोकल ट्रेन है,,,,,,,,क्यों क्या हुआ ?”,पृथ्वी ने कहा
“तुम्हे रोज ऐसे भीड़ में खड़े होकर आना पड़ता है , तुम्हारे पैर दुखते होंगे ना,,,,,,,,,एक नौकरी के लिए तुम कितनी मेहनत कर रहे हो ना पृथ्वी,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा और ये कहते हुए अवनि की आँखों में नमी उभर आयी
पृथ्वी ने सुना तो उसे ख़ुशी हुई कि आखिर अवनि उसे नोटिस तो करती है लेकिन साथ ही अवनि की नम आँखे देखकर मीठा सा दर्द भी हुआ और उसने कहा,”ठीक है इस बार मेरे पैर दुखे तो तुम दबा दिया करना,,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने सुना तो उदास आँखों से पृथ्वी की तरफ देखा , पृथ्वी ने आगे बढ़कर अवनि के चेहरे को अपने दोनों हाथो में थामा और बड़े प्यार से कहा,”अवनि ! ये सब मेहनत मैं इसलिए कर रहा हूँ ताकि तुम्हे एक अच्छी जिंदगी दे सकू , ये सब मैं हमारे लिए कर रहा हूँ और मुझे ट्रेन में खड़े होकर आने में कोई परेशानी नहीं है अब तो ये मेरी आदत बन चुकी है,,,,,,,लेकिन तुम्हे मेरी परवाह करते देखकर अच्छा लग रहा है,,,,,,,,और कोई जरूरत नहीं है मेरे पैर दबाने की , मैं बस मजाक कर रहा था मैं कभी नहीं चाहूंगा तुम मेरे पैरो को हाथ लगाओ,,,,,,,!!!”

अवनि ने सुना तो एकटक पृथ्वी को देखने लगी , आखिर ऐसे इंसान से मोहब्बत करने से वह अब तक खुद को क्यों रोक रही थी ? पृथ्वी की बातो में कोई बनावट नहीं थी कोई झूठ नहीं था कोई बहलाव नहीं था। वह कब भी बात करता था लगता था जैसे उसने अपना दिल अवनि के सामने रख दिया है।

“चलो अब मुस्कुराओ और अपनी मीटिंग अटेंड करो”,अवनि को खामोश पाकर पृथ्वी ने कहा
अवनि धीरे से मुस्कुरा दी तो पृथ्वी ने उसके गालों को अपने हाथो से दो बार धीरे से थपथपाया और कहा,”गुड गर्ल , आई नो तुम अपना बेस्ट दोगी , All The Best राइटर साहिबा”
“थैंक्यू”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने अवनि से मीटिंग खत्म होने के बाद फ़ोन करने को कहा और फिर अवनि पृथ्वी को बाय बोलकर वहा से चली गयी  

पृथ्वी वही खड़ा अवनि को खुद से दूर जाते देखता रहा और फिर एकदम से कहा,”अवनि,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी की आवाज सुनकर अवनि चलते चलते रुकी और पलटकर देखा तो पृथ्वी ने कहा,”मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूंगा”
“हम्म्म ठीक है,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“अपना ख्याल रखना”,पृथ्वी ने कहा और ये कहते हुए ना जाने क्यों उसका मन भारी हो गया  
“तुम भी,,,,,,,आती हूँ”,कहकर अवनि पलटी और वहा से चली गयी। अवनि आँखों से ओझल हो गयी तो पृथ्वी भी ऑफिस की तरफ बढ़ गया। 

कपूर प्रोडक्शन हॉउस , पनवेल
अवनि अंदर आकर उस लड़की से मिली जिस से अवनि की फोन पर बात हुई थी।
“विक्रम सर अभी बस आने ही वाले है , आप अपना ‘पोर्टफोलियो’ लेकर आयी है ?”,लड़की ने पूछा
“जी नहीं मेरा पोर्टफोलियो नहीं बना है , मुझे मुंबई आये अभी कुछ ही दिन हुए है,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा

“अह्ह्ह्ह नो प्रॉब्लम ! आप डायरेक्ट उन से मिलकर भी उन्हें अपने काम के बारे में समझा सकती है,,,,,,,,वैसे आपने अपने मेल में काफी कुछ पहले ही एक्सप्लेन कर दिया था सो नो वरि , आप बैठिये थोड़ी देर में सर आ जायेंगे”,लड़की ने मुस्कुरा कर कहा
अवनि मुस्कुराई और वेटिंग एरिया में आकर बैठ गयी। लड़की ने अवनि से चाय कॉफी पूछा लेकिन अवनि ने मना कर दिया। वह बैठकर ऑफिस को देखने लगी जो कि काफी अच्छा और आलिशान था।

कुछ देर बाद एक बहुत ही हेंडसम और अच्छी पर्सनालिटी का आदमी ऑफिस में आया और सीधा एक कमरे की तरफ चला गया जिसके दरवाजे पर लगी नेम प्लेट पर लिखा था “विक्रम कपूर” , अवनि समझ गयी कि यही वह आदमी था जिस से मिलने अवनि यहाँ आयी थी।
लड़की ने फोन पर किसी से बात की और फिर अवनि से कहा,”मिस अवनि विक्रम सर ने आपको अंदर बुलाया है”
अवनि उठी और अंदर जाने से पहले लड़की की तरफ आकर कहा,”मिस नहीं मिसेज अवनि उपाध्याय , मैं शादीशुदा हूँ”

“ओह्ह्ह सॉरी मिसेज उपाध्याय”,लड़की ने मुस्कुरा कर कहा और दरवाजे की तरफ हाथ करके अवनि से अंदर जाने का इशारा किया
अवनि आगे बढ़ गयी उसने दरवाजा खटखटाया तो अंदर से आवाज आयी,”यस कम इन”
अवनि अंदर चली आयी। विक्रम अवनि की तरफ पीठ किये खिड़की से बाहर देख रहा था , जैसे ही अवनि के आने की आहट हुई वह पलटा और कहा,”प्लीज हेव अ सीट”

“थैंक्यू,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा और टेबल के पास चली आयी। विक्रम भी अपनी कुर्सी पर आ बैठा और ख़ामोशी से अवनि देखने लगा , कुछ देर बाद उसने कहा,”जितनी खूबसूरत कहानिया आप लिखती है उस से कई ज्यादा खूबसूरत आप खुद है”
अवनि ने सुना तो फीका सा मुस्कुराई और कहा,”मेरी पहचान मेरे लिखने से है मेरी खूबसूरती से नहीं,,,,,,!!!”

“खूबसूरत होने के साथ साथ आप काफी स्मार्ट भी है,,,,,,,,वेल ! मेरे प्रोडक्शन हॉउस में स्क्रिप्ट राइटर की जरूरत है और मैं एक ऐसी ही राइटर चाहता था जो टेलेंटेड होने के साथ साथ स्मार्ट भी हो,,,,,,,,,मैं एक वेब सीरीज बना रहा हूँ , 18+ स्टोरी जिसमे रोमांस हो और स्क्रिप्ट थोड़ी अडल्ट हो,,,,,कुछ ऐसा जो रियल लगे ऐसा कुछ लिख सकती है आप”,विक्रम ने अवनि को देखते हुए पूछा
अवनि ने सुना तो उसने पलकें झुका ली और ख़ामोशी से टेबल को देखने लगी क्योकि विक्रम जो लिखने के लिए उसे कह रहा था वैसा कंटेंट अवनि ने आज से पहले कभी नहीं लिखा था

( क्या अवनि समझने लगी है धीरे धीरे पृथ्वी की भावनाये ? पृथ्वी को ट्रेन में सफर करते देख क्यों उदास हुआ अवनि का मन ? क्या अवनि स्वीकार करेगी मिस्टर विक्रम कपूर का ऑफर या ठुकरा देगी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 2” मेरे साथ )

Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43

Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43 Pasandida Aurat Season 2 – 43

संजना किरोड़ीवाल 

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
Exit mobile version