Pasandida Aurat Season 2 – 31
पृथ्वी सामने खड़ी लड़की को हैरानी से देख रहा था क्योकि उसके सामने खड़ी लड़की कोई और नहीं बल्कि रुषाली थी। रुषाली को वहा देखकर पृथ्वी के मन में एक साथ कई ख्याल चलने लगे , रुषाली आज अचानक यहाँ क्यों आयी है पृथ्वी ये सोच ही रहा था कि रुषाली ने कहा,”तुम मुझे देखकर इतना चौंक क्यों गए , मुझे अंदर आने को नहीं कहोगे ?”
“अह्ह्ह्ह नहीं ! ऐसी बात नहीं है , आओ ना”,पृथ्वी ने साइड होकर कहा
रुषाली पर्स हाथ में थामे अंदर चली आयी। अंदर आकर उसने जब फ्लैट का बदला हुआ रूप देखा तो हैरान रह गयी और कहा,”क्या बात है पृथ्वी ये घर तो पहले से काफी अच्छा लग रहा है”
“तुम यहाँ क्यों आयी हो ?”,पृथ्वी ने हिम्मत करके रुषाली के सामने आया और उस से सीधा सीधा ही पूछ लिया
रुषाली ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”हाउ रूड पृथ्वी ? इस से पहले भी मैं यहाँ आ चुकी हूँ,,,,,,,,,और आई नो कि हम अब साथ नहीं है लेकिन दोस्त तो है न,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो ख़ामोशी से रुषाली को देखने लगा उसे रुषाली का यु अचानक घर आना अच्छा नहीं लगा। पृथ्वी को खामोश पाकर रुषाली ने कहा,”यहाँ से गुजर रही थी सोचा तुमसे मिलती जाऊ , पृथ्वी क्या मुझे एक गिलास पानी मिलेगा ?”
“हाँ ! मैं अभी लाया”,पृथ्वी ने कहा और किचन की तरफ चला गया।
रुषाली सोफे पर आ बैठी और हॉल को देखने लगी। एक एक चीज करीने से जमी थी , खिड़कियों पर परदे थे , गमलो में लगे पौधे अच्छे हाल में थे , हॉल की दीवारे पेंटिंग्स और सामान से सजी हुई थी। रुषाली को सब नया लग रहा था और साथ ही वह उलझन में भी थी कि ये सब किसने किया होगा क्योकि पृथ्वी से तो उसे ये सब की उम्मीद नहीं थी। अवनि जिस कमरे में सो रही थी उसका दरवाजा बंद था इसलिए रुषाली को अवनि के होने की खबर नहीं थी। ना इस फ्लेट में और ना ही पृथ्वी की जिंदगी में,,,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी पानी लेकर आया और गिलास रुषाली की तरफ बढ़ा दिया। पानी का गिलास लेते हुए रुषाली ने जान-बुझकर अपनी उंगलियों से पृथ्वी के हाथ को छू लिया। पृथ्वी को अजीब सा महसूस हुआ लेकिन उसने कुछ कहा नहीं वह बस चाहता था कि रुषाली यहाँ से चली जाये लेकिन रुषाली तो सोफे पर इत्मीनान से बैठी थी।
पृथ्वी को खामोश देखकर रुषाली ने कहा,”तुम इतना चुप चुप क्यों हो पृथ्वी ? ओह्ह्ह्ह अच्छा तुम सोच रहे होंगे कि मैं कही उस दिन की तरह तुम्हारे सामने रोने ना लग जाऊ,,,,,,,,,,,तो ऐसा कुछ नहीं होगा , हाँ लेकिन मुझे आज भी तुम्हारे लौट आने का इंतजार है और वो मैं हमेशा करुँगी,,,,,,,,,,,!”
“रुषाली तुम जैसा समझ रही हो,,,,,,,,,,,!!!”पृथ्वी ने कहा
लेकिन वह अपनी बात पूरी कर पाता इस से पहले ही रुषाली उठी और पृथ्वी के सामने उसके एकदम करीब आकर कहा,”पृथ्वी ! मैं जानती हूँ तुम किसी और को पसंद करते हो लेकिन तुम्हारे घरवाले , तुम्हारे घरवाले उसे बिल्कुल पसंद नहीं करते फिर तुम क्यों उसके पीछे अपना वक्त बर्बाद कर रहे हो,,,,,,,,,,एक गलती तो सब माफ़ करते है ना पृथ्वी तो क्या तुम मेरी उस गलती को माफ़ नहीं कर सकते,,,,,,,,,,,अनजाने में मैंने जो गलती की उसे भूलकर क्या तुम मेरे साथ आगे नहीं बढ़ सकते ?
मैं जानती हूँ आज भी तुम्हारे दिल में मेरे लिए कही न कही फीलिंग्स है बस अपने ईगो की वजह से तुमने उन्हें दबा दिया है,,,,,,,,,मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ पृथ्वी , कुछ भी,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो उसने रुषाली के कंधो को अपने हाथो में थाम लिया , रुषाली मुस्कुरा उठी लेकिन अगले ही पल पृथ्वी ने उसे पीछे किया और कहा,”Be in your limits रुषाली,,,,,,,,,
मेरे दिल में तुम्हारे लिए अब कोई भावनाये नहीं है , तुम जितनी जल्दी खुद को इस ग़लतफ़हमी से बाहर निकाल लो तुम्हारे लिए अच्छा होगा , मेरी शादी हो चुकी है और अब मैं किसी का पति हूँ,,,,,,,,,आइंदा से यहाँ मत आना”
रुषाली ने जैसे ही सुना पृथ्वी की शादी हो चुकी है तो उसे एक धक्का लगा , उसे अब तक लगता था कि वह पृथ्वी को मना लेगी और पृथ्वी उसे माफ़ कर अपनी जिंदगी में शामिल कर लेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
रुषाली अवाक् सी पृथ्वी को देखती रही , उसका दिल तेजी से धड़क रहा था , चेहरे पर गुस्से और हार के भाव थे , उसकी आँखों में नमी थी और होंठ काँप रहे थे। वह बदहवास सी पृथ्वी के करीब आयी और कहा,”तुम ऐसा कैसे कर सकते हो पृथ्वी ? तुम किसी और से शादी कैसे कर सकते हो ? 8 साल का रिलेशनशिप था हमारा तुम उसे 8 महीनो में कैसे भुला सकते हो ?,,,,,,,ये करने से पहले एक बार मुझसे पूछा तो होता पृथ्वी , तुमने ऐसा क्यों किया ?”
“रुषाली ! मैंने तुम्हे उसी दिन सब सच बता दिया था तुम अब तक उसे एक्सेप्ट नहीं कर पायी हो , प्लीज जाओ यहाँ से”,पृथ्वी ने सहजता से कहा
रुषाली कुछ देर खामोश रही और फिर एकदम से पृथ्वी के सीने से लगकर कहा,”पृथ्वी , पृथ्वी कह दो ये झूठ है , तुम तुम मुझे सताने के लिए झूठ बोल रहे हो न , तुम जान बूझकर ऐसा कह रहे हो ना ? मैं जानती हूँ ऐसा कुछ नहीं हुआ है , मैंने तुम्हे हर्ट किया इसलिए तुम मुझसे ये सब कह रहे हो,,,,,,,,,,,!!!”
रुषाली का करीब आना , उसका गले लगना पृथ्वी को अच्छा नहीं लग रहा था। उसने रुषाली को खुद से दूर करने की कोशिश की लेकिन रुषाली तो जैसे पृथ्वी को छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी। पृथ्वी ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन रुषाली कुछ सुनने को तैयार नहीं थी और फिर वह एकदम से रो पड़ी। पृथ्वी परेशान हो गया , अवनि अंदर सो रही थी अगर उसने रुषाली को यहाँ ऐसे रोते देखा तो वह ना जाने पृथ्वी के बारे में क्या सोचेगी ? सोचकर पृथ्वी ने रुषाली के चेहरे को अपने हाथो में थामा और उसकी आँखों में देखकर कहा,”रुषाली ! लिस्टन टू मी,,,,,,,,,,,!!!”
तभी कमरे का दरवाजा खुला पृथ्वी और रुषाली ने एक साथ कमरे की तरफ देखा सामने अवनि खड़ी थी। रुषाली का चेहरा पृथ्वी के हाथो में था और वह रुषाली के बहुत पास खड़ा था। अवनि को देखकर पृथ्वी रुषाली से दूर हट गया।
रुषाली ने अवनि को देखा और पृथ्वी से कहा,”ये ये कौन है ?”
“ये मेरी पत्नी है “अवनि मलिक” और मैं शादीशुदा हूँ रुषाली,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने सहजता से कहा
रुषाली ने सुना तो गुस्से से उसका चेहरा लाल हो गया और वह चिल्लाई,”तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो पृथ्वी ? तुम किसी और से शादी कैसे कर सकते हो ? तुम तुम निकालो इस लड़की को यहाँ से बाहर , ये तुम्हारी जिंदगी में इस घर में मेरी जगह कैसे ले सकती है ?”
कहते हुए रुषाली जैसे ही अवनि की तरफ बढ़ी पृथ्वी बीच में आ गया और रुषाली को पीछे धकेलकर कहा,”इनफ इज इनफ रुषाली , बहुत हो चुका अब बस भी करो,,,,,,,,,,,,मैंने तुम्हारे साथ कोई धोखा नहीं किया है ना तुम्हे कोई झूठी उम्मीद दी , पैसो और ऐशो आराम की जिंदगी के लिए तुमने मुझे छोड़ा था मैंने नहीं और आज जब तुम्हारे पास कुछ नहीं है , उस इंसान ने तुम्हे धोखा दिया तो तुम मेरे पास वापस आ रही हो,,,,,,,,तुम इतनी सेल्फिश कैसे हो सकती हो हाँ ? अवनि मेरी पत्नी है और मैं हमेशा इसके साथ रहूंगा और अगर तुमने इस से बदतमीजी करने की कोशिश भी की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी को गुस्से में देखकर रुषाली खामोश हो गयी , वह जानती थी गलती उसकी थी , पृथ्वी को उसने खुद छोड़ा था लेकिन आज पृथ्वी को अवनि के साथ देखकर वह बर्दास्त नहीं कर पा रही थी | अवनि ने पृथ्वी को गुस्से में देखा तो उसकी तरफ आयी और कहा,”पृथ्वी ! तुम्हे इनसे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए,,,,,,,!!”
“अरे लेकिन ये कुछ समझने को तैयार ही नहीं है,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने गुस्से से लेकिन रोआँसा होकर कहा
अवनि ने पृथ्वी से पीछे हटने को कहा और खुद रुषाली के सामने आकर कहने लगी,”मैं जानती हूँ तुम्हे इस वक्त बहुत बुरा लग रहा है लेकिन इन सब में पृथ्वी की कोई गलती नहीं है। वो मुझसे बहुत प्यार करता है और यहाँ तक आने के लिए उसने बहुत कुछ सहा है
मैं तुमसे रिक्वेस्ट करती हूँ प्लीज यहाँ से चली जाओ और दोबारा यहाँ मत आना,,,,,,,किस्मत ने तुम्हे पृथ्वी का प्यार दिया था पर शायद तुम ही उस प्यार के लिए नहीं बनी थी। इसकी जिंदगी में पहले से बहुत मुश्किलें है , उन मुश्किलों को तुम और मत बढ़ाओ प्लीज,,,,,,,,,यहाँ से चली जाओ प्लीज,,,,,,,,,!!!”
अवनि का रुषाली से रिक्वेस्ट करना पृथ्वी को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था , उसे इस वक्त रुषाली पर बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन वह सिर्फ अवनि की वजह से चुप था।
रुषाली ने सुना तो जलती आँखों से अवनि को देखा और अपना बैग उठाकर जाने के लिए दरवाजे की तरफ बढ़ गयी। पृथ्वी अवनि के बगल में चला आया। जाते जाते रुषाली ने अपने पैर से सैंडिल निकाली और पृथ्वी की तरफ फेंककर कहा,”तुम दोनों साथ में कभी खुश नहीं रहोगे”
रुषाली का फेंका सेंडल पृथ्वी को आकर लगता इस से पहले अवनि पृथ्वी के सामने आ गयी और वह सेंडल आकर अवनि की पीठ पर लगा। पृथ्वी ने जब ये देखा तो उसका खून खौल उठा उसने जब रुषाली की तरफ जाना चाहा तो अवनि ने उसे रोक लिया।
रुषाली ने दरवाजे को जोर से बंद किया और वहा से चली गयी।
रुषाली का फेंका सेंडल आकर अवनि को लगा ये देखकर पृथ्वी के चेहरे पर गुस्से और दुःख के मिले जुले भाव झिलमिलाने लगे। जो कुछ हुआ उसके लिए वह खुद को जिम्मेदार मान रहा था। उसने अवनि की तरफ देखा बुझा चेहरा , उदास आँखे लिए अवनि उसके सामने खड़ी थी। पृथ्वी ने अपना हाथ अवनि के सर के पीछे रखा और उसे अपने सीने से लगाकर रुंधे गले से कहा,”आई ऍम सॉरी , आई ऍम रियली सॉरी,,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो उसकी आँखों में आँसू भर आये , वह भी जानती थी कि जो कुछ हुआ उसमे पृथ्वी की कोई गलती नहीं थी लेकिन उसे इस वक्त दर्द में देखकर उसका मन भी भारी हो गया। वह पृथ्वी के सीने से सर लगाए वही खड़ी रही। रुषाली का चेहरा अब भी उसकी आँखों के सामने आ रहा था। पृथ्वी का दिल इस वक्त दर्द और तकलीफ से भरा था , उसके लिए अवनि ने रुषाली के फेंके सेंडिल को अपने ऊपर ले लिया सोचकर ही पृथ्वी का दिल कटा जा रहा था।
अवनि पृथ्वी से दूर हटी और जाने लगी तो पृथ्वी ने रुंधे गले से कहा,”मैडम जी ! आप मुझे गलत तो नहीं समझ रही है न ? कुछ देर पहले आपने जो देखा वो बस,,,,,,,,,,मैं बस उसे समझाने की कोशिश कर रहा था”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ पलटी और सहजता से कहा,”पृथ्वी ! जिस मर्द ने आज तक मेरी मर्जी के बिना मुझ पर अपने पति होने का हक़ नहीं जताया वो किसी और लड़की के करीब जाने के बारे में सोच भी नहीं सकता
मैंने उस वक्त सिर्फ तुम्हारी आँखों में मज़बूरी का भाव देखा और कुछ नहीं,,,,,,,,मैं तुम्हे गलत नहीं समझ रही , अगर मेरा दिल भी ये कहे कि तुम गलत हो तो मैं उसे भी नकार दूंगी,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो नम आँखों से अवनि को देखा और कहा,”बस यहाँ मैं जीत गया मैडम जी,,,,,,,,,थैंक्यू”
“जाओ मुँह धोकर आओ , तुम ऐसे रोते हुए बिल्कुल अच्छे नहीं लगते”,अवनि ने कहा और किचन की तरफ चली गयी
पृथ्वी वाशबेसिन के पास चला आया उसने अपना मुँह धोया और तौलिये से पोछकर शीशे में खुद को देखा। उसकी आँखों के सामने बार बार रुषाली का गुस्से से भरा चेहरा और उसका अवनि पर सेंडिल फेंकना आ रहा था। पृथ्वी की आँखों में एक बार फिर गुस्से के भाव उभर आये। रुषाली से वह अपने सारे रिश्ते बहुत पहले खत्म कर चुका था इसके बाद भी उसका वापस उसकी जिंदगी में आना और अवनि के सामने तमाशा करना उसे समझ नहीं आ रहा था।
पृथ्वी किचन की तरफ चला आया। उसने जब अवनि को चाय बनाते देखा तो उसके पास आया और उसके हाथ से डिब्बा लेकर प्लेटफॉर्म पर रख , अवनि को साइड करके कहा,”क्या कर रही है आप ? आपको कुछ चाहिए तो आप मुझसे कहिये ना मैं करता हूँ आपके लिए,,,,,,,,,,!!”
“पृथ्वी ! मैं अब ठीक हूँ,,,,,,,,,,देखो मेरा बुखार भी उतर गया है”,अवनि ने अपना हाथ आगे करके कहा
पृथ्वी ने धीरे से अवनि के हाथ को छूआ और कहा,”हाँ बुखार तो उतर गया है लेकिन फिर भी आप छोड़िये ये सब मैं बनाता हूँ”
“मुझे करने दो न पृथ्वी , ऐसे तो मैं और बीमार हो जाउंगी,,,,,,,,!!!”,अवनि ने चाय बनाते हुए कहा
अवनि की जिद के आगे भला पृथ्वी की क्या चलती इसलिए वह साइड हट गया और अवनि को चाय बनाने दी। पृथ्वी ने अपने हाथ बांधे और प्लेटफॉर्म से पीठ लगाकर वही खड़ा हो गया। पृथ्वी ने अपना सर झुका रखा था और वह एकटक जमीन को देख रहा था। अवनि अपना चाय बनाने में व्यस्त थी तभी पृथ्वी ने धीरे से कहा,”वो यहाँ क्यों आयी थी ? जबकि मैं पहले ही अपने सारे रिश्ते उस से खत्म कर चुका हूँ,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ पलटी और कहा,”पृथ्वी कुछ पुराने दर्द और पुराने लोग हमारी जिंदगी में दस्तक इसलिए भी देते है ताकि हमे परख सके और हम ये देख सके कि क्या सच में हम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके है। उसे उसका जवाब मिल चुका है और मुझे यकीन है अब वो फिर से तुम्हारी जिंदगी में नहीं आएगी,,,,,,,,!!!”
“और अगर वो फिर भी आयी तो ?”,पृथ्वी ने अपने मन का डर अवनि के सामने रखा
अवनि ने सुना तो अपना हाथ उठाकर अपनी नाजुक सी बाँह थपथपाई और कहा,”तो फिर मैं उसे देख लुंगी , चिंता मत करो मिस्टर उपाध्याय मैं तुम्हारी रक्षा करुँगी”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराने लगा इसलिए नहीं कि अवनि ऐसी बातें कर रही थी बल्कि इसलिए कि इस वक्त ये सब कहते हुए वह बहुत प्यारी लग रही थी। पृथ्वी को मुस्कुराते देखकर अवनि भी मुस्कुरा दी और अपना हाथ नीचे करके गैस की तरफ पलटी और चाय कप में छानकर एक कप उठाया और पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”तुम्हारी चाय”
पृथ्वी ने कप लिया और एक घूंठ भरकर मुस्कुराया , अवनि ने देखा तो अपनी भँवे उचकाई इस पर पृथ्वी ने धीरे से कहा,”आप इसमें चीनी डालना भूल गयी”
अवनि ने सुना तो अपना हाथ अपने ललाट पर मारा और कहा,”देखा इसलिए मैं तुम्हे अपने साथ किचन में नहीं आने देती , तुम्हारे चक्कर में मैंने इसमें चीनी तो डाली ही नहीं,,,,,,,,तुम तुम जाओ यहाँ से,,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे लेकिन मैंने क्या किया ?”,पृथ्वी ने कहा लेकिन अवनि ने तब तक उसे किचन से बाहर धकेल दिया।
पृथ्वी के जाने के बाद अवनि अपनी चाय की तरफ पलटी और खुद भी मुस्कुरा उठी।
“हाह ! आपने तो मुझसे कहा था कि वो लड़की मुझे पृथ्वी के साथ देखकर भड़क जाएगी और पृथ्वी से झगड़ा करेगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ उलटा वो तो जाने के लिए मुझसे रिक्वेस्ट कर रही थी और पृथ्वी वो तो जैसे उस लड़की के लिए पागल ही हो चुका है , एक लड़की जिस से वो अभी अभी मिला है उसके लिए उसने मेरे प्यार को ठुकरा दिया,,,,,,,,,,,वो आखिर मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकता है ?”,सोसायटी के लॉन में खड़ी रुषाली ने अपने सामने खड़ी नीलम भुआ से गुस्से और झुँझलाहट भरे स्वर में कहा
“उस लड़की के लिए उसने अपने माँ-बाप को छोड़ दिया तुम क्या चीज हो ? वैसे वो लड़की तो मेरी सोच से भी ज्यादा तेज निकली,,,,,,,,मुझे लगा तुम दोनों को साथ देखकर वो पृथ्वी पर भड़केगी , उस पर गुस्सा होगी , चिल्लायेगी उस से सवाल करेगी लेकिन यहाँ तो सब उलटा हो गया,,,,,,,उस लड़की को पृथ्वी की जिंदगी से निकालना इतना भी आसान नहीं है”,नीलम भुआ ने अफ़सोस भरे स्वर में कहा
रुषाली ने सुना तो नीलम भुआ को देखने लगी और कहा कुछ देर बाद कहा,”ये पृथ्वी को आखिर क्या हो गया है ? ऐसा तो क्या देख लिया उसने उस लड़की में जो इतना पागल है उसके लिए,,,,,,,,,,!!!”
“मोहब्बत रुषाली मोहब्बत ! मोहब्बत अच्छे अच्छे पागल लोगो को समझदार बना देती है और समझदार लोगो को पागल,,,,,,,,!!!”,नीलम भुआ ने दार्शनिक अंदाज में कहा
“लेकिन मोहब्बत तो पृथ्वी मुझसे करता था ना,,,,,,,,,!!!”,रुषाली ने कहा
“ऐसा होता तो आज उस लड़की की जगह तुम होती , मर्द कभी अपनी पसंदीदा औरत को हाथ से जाने नहीं देता फिर चाहे उसे हासिल करने के लिए उसे कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े,,,,,,,,,!!”,कहकर नीलम भुआ वहा से चली गयी
रुषाली ने उन्हें जाते हुए देखा और फिर पैर पटकते हुए वहा से चली गयी
( रुषाली और पृथ्वी को इतना करीब देखकर भी आखिर क्यों नहीं आने दी अवनि ने अपने मन में कड़वाहट ? क्या पृथ्वी देगा रुषाली को उसकी बदतमीजी का जवाब ? रुषाली का पृथ्वी की जिन्दगी में लौटकर आना थी उसकी मोहब्बत या नीलम भुआ की कोई नयी चाल ? जानने के लिये पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
