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Pasandida Aurat Season 2 – 3

Pasandida Aurat Season 2 – 3

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी अवनि को अपने साथ लेकर मुंबई के लिए निकल गया। 2 घंटे बाद दोनों मुंबई पहुंचे और जैसे ही एयरपोर्ट से बाहर आये सामने ही उन्हें नकुल मिल गया।
“हेलो भाभी,,,,,,,,,,,!!”,नकुल ने अवनि के सामने आकर ख़ुशी से चहककर कहा
नकुल से अवनि बनारस में पहले भी मिल चुकी थी और जैसे ही उसने नकुल के मुँह से अपने लिए “भाभी” सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा और पृथ्वी अपना सर खुजाते हुए दूसरी तरफ देखने लगा। अवनि को चुप और परेशान देखकर नकुल ने पृथ्वी से कहा,”चले ?”

“हम्म्म्म,,,,,,,,,चले अवनि ?”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर कहा तो अवनि उसके साथ आगे बढ़ गयी। पृथ्वी ने नकुल को फोन पर पहले ही सब बता दिया था इसलिए नकुल दोनों को लेकर पार्किंग में खड़ी गाड़ी के पास आया और अंदर बैठने को कहा।
अवनि इस शहर में पृथ्वी पर भरोसा करके आयी थी और अब पृथ्वी उसे जहा लेकर जाएगा उसे जाना था। अवनि गाड़ी में आ बैठी और पृथ्वी नकुल के बगल वाली सीट पर आ बैठा। नकुल ने गाड़ी स्टार्ट की और वहा से निकल गया

गाड़ी अपनी स्पीड में मुंबई की सड़को पर दौड़ी जा रही थी और अवनि उदास आँखों से खिड़की के बाहर देख रही थी। वो शहर जहा अवनि अपना सबसे बड़ा सपना पूरा करना चाहती थी , इस शहर में एक दिन उसे ऐसे आना पड़ेगा अवनि ने सोचा नहीं था। आगे बैठे पृथ्वी की नजरें गाड़ी में लगे मिरर पर थी जिसमे  उसे अवनि की उदास आँखे नजर आ रही थी। पृथ्वी एकटक मिरर को देखता रहा और मन ही मन खुद से कहा,”मैं जानता हूँ अवनि इस वक्त तुम्हारे जहन में बहुत कुछ चल रहा है जो तुम मुझसे भी कहना नहीं चाहती

तुम इस शहर आना चाहती थी लेकिन इस तरह आना पड़ेगा ये किसी ने नहीं सोचा था। तुमने जो खोया है मैं उसकी भरपाई तो नहीं कर सकता लेकिन वादा जरूर करता हूँ कि कभी तुम्हे अपने पापा और घरवालों की कमी महसूस नहीं होने दूंगा , तुम्हे वो हर ख़ुशी दूंगा जिसकी तुम हक़दार हो , मेरा वादा है तुम से”
इतना कहकर पृथ्वी ने मिरर से नजर हटा ली और बाहर देखने लगा। वह बार बार अपनी कलाई पर बंधी घडी में वक्त देख रहा था जैसे उसे कही पहुंचने की जल्दी हो।

कुछ देर बाद गाड़ी मैरिज रजिस्ट्रार ऑफिस के बाहर आकर रुकी। नकुल , पृथ्वी और अवनि गाडी से नीचे उतरे। नकुल ने हाथ पर बंधी घडी में वक्त देखा और कहा,”मैरिज रजिस्ट्रार का ऑफिस बंद होने में अभी आधा घंटा है,,,,,,,,!!”
अवनि ने देखा पृथ्वी उसे यहाँ लेकर आया है तो उसके चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे। 

अवनि को लगा पृथ्वी उसे लेकर अपने घर जाएगा , अपने घरवालों को शादी के लिए मनाएगा लेकिन पृथ्वी ने ऐसा कुछ नहीं किया वह सीधा अवनि को मैरिज रजिस्ट्रार ऑफिस लेकर चला आया। पृथ्वी और नकुल आगे बढे लेकिन अवनि अपनी जगह खड़ी रही वह आगे नहीं बढ़ी ये देखकर पृथ्वी उसके सामने आ खड़ा हुआ।  पृथ्वी ख़ामोशी से अवनि को देखता रहा और फिर बहुत ही शांत स्वर में कहने लगा,”मैडम जी मैं जानता हूँ ये सब करना आपको गलत लग रहा होगा लेकिन जितना नया ये आपके लिए है उतना ही नया मेरे लिए भी है।

मैं आपको यहाँ इसलिए लेकर आया हूँ क्योकि अगर एक बार हमारी शादी हो गयी तो फिर आपको मुझसे कोई दूर नहीं कर सकता,,,,,,,,,,बस यही एक रास्ता है”
“तुम्हारे घरवाले,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“मेरे घरवाले हमारी शादी के लिए नहीं मानेंगे मैडम जी और मैं अब आपको किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए विश्वास भरे स्वर में कहा
“तो क्या मेरे लिए तुम उनके खिलाफ चले जाओगे ?”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा

“आज अगर ईश्वर भी मेरे सामने खड़े हो तो मैं उनके खिलाफ भी चला जाऊंगा मैडम जी और ये मैंने उसी पल तय कर लिया था जिस पल आपने मेरा हाथ थामा था,,,,,,मैं आपके भरोसे को टूटने नहीं दे सकता मैडम जी,,,,,,,प्लीज चलिए एक बार शादी हो गयी तो कोई कुछ नहीं कर पायेगा और घरवाले , वो बाद में मान जायेंगे मैं मना लूंगा उन्हें”,पृथ्वी ने कहा
अवनि पृथ्वी का हाथ थामकर यहाँ आयी थी और अब पृथ्वी ही उसका सबकुछ था इसलिए अवनि उसकी बात मानकर आगे बढ़ गयी।

तीनो अंदर आये नकुल ने पहले ही अधिकारी से बात करके रखी थी। उन्होंने अवनि और पृथ्वी से कुछ सवाल जवाब किये। उनका नाम पता पूछा और दोनों को बालिग पाकर शादी की मंजूरी दे दी। पृथ्वी और अवनि ने दूसरी फॉर्मेलिटी पूरी की तब तक नकुल गाड़ी में रखी वरमाला और बाकि सामान ले आया। नकुल ने अवनि और पृथ्वी को वरमाला दी और एक दूसरे को पहनाने को कहा।

एक दूसरे के सामने खड़े अवनि और पृथ्वी उदास आँखों से एक दूसरे को देख रहे थे। उनके हाथो में वरमाला थी , अवनि का उदास चेहरा पृथ्वी को अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन इस वक्त वह अवनि की भावनाये अच्छे से समझ रहा था।
“आप दोनों एक दूसरे को वरमाला पहनाइए”,अधिकारी ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो अवनि के सामने अपना सर झुका दिया जिस से अवनि उसे वरमाला पहना सके।

अवनि के लिए ये इतना आसान भी नहीं था , उसके हाथ काँप रहे थे और आँखों में आँसू थे उसने हिम्मत करके पृथ्वी को वरमाला पहना दी। पृथ्वी ने अपना सर उठाया और हाथो में पकड़ी वरमाला अवनि के गले में पहना दी। सफ़ेद रंग के सूट में अवनि खूसबूरत लग रही थी लेकिन जैसे ही गुलाबो की वरमाला उसके गले में पड़ी तो वह और खिल उठी। बालों की लटे गालों पर झूल रही थी।  

नकुल ने सिंदूर की डिब्बी पृथ्वी की तरफ बढ़ा दी। पृथ्वी ने डिब्बी अपनी बाँयी हथेली पर रखी और उसमे भरा सिंदूर चुटकी से उठाकर अवनि की माँग में भर दिया जिस से थोड़ा सा सिंदूर छिटक कर अवनि के नाक पर आ गिरा। जैसे ही सिंदूर ने अवनि की माँग को छुआ अवनि ने अपनी आँखे मूँद ली। पृथ्वी ने दो बार और अवनि की माँग में सिंदूर भरा ,, तीन बार सिंदूर भरने के बाद उसने नकुल से मंगलसूत्र लिया और अवनि के गले में पहना दिया। अवनि अपनी आँखे खोल चुकी थी और इसी के साथ वह अब क़ानूनी रूप से पृथ्वी की धर्मपत्नी थी।

अधिकारी ने अवनि और पृथ्वी से रजिस्टर में साइन करने को कहा।
“गवाह के लिए चार लोगो के साइन चाहिए बाकि तीन लोग कहा है ? लड़की की तरफ से कोई नहीं आया”,अधिकारी ने नकुल से पूछा
नकुल ने पृथ्वी की तरफ देखा वह कुछ कहता इस से पहले सामने से आते जयदीप ने कहा,”अवनि की तरफ गवाही मैं और मेरी वाइफ देंगे”

जयदीप को वहा देखकर पृथ्वी को हैरानी हुई तो वही अवनि जयदीप को नहीं जानती थी।
“बताईये कहा साइन करना है ?”,जयदीप ने अधिकारी से कहा
अधिकारी ने रजिस्टर जयदीप की तरफ कर दिया और साइन करने का इशारा किया। जयदीप ने अवनि के गवाह के रूप में साइन किया और अपनी पत्नी से साइन करने का इशारा करके पृथ्वी की तरफ चला आया। पृथ्वी अभी भी ख़ामोशी से जयदीप को देख रहा था उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसे वक्त में जयदीप उसकी मदद के लिए आगे आएगा।

“कॉन्ग्रैचुलेशन मिस्टर उपाध्याय , आखिर तुमने कर दिखाया , मैं जानता ही था कि तुम हार मानने वालो में से तो नहीं हो,,,,,,,,,,तुम्हे यहाँ देखकर अच्छा लगा”,जयदीप ने कहा तो पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने कहा,”लेकिन आप यहाँ ?”
जयदीप ने पृथ्वी के कंधे पर हाथ रखा और उसकी आँखों में देखकर कहा,”इसे तुम मेरी तरफ से अपनी शादी का तोहफा समझो”
पृथ्वी के पास इस वक्त जयदीप से कहने के लिए शब्द नहीं थे वह बस नम आँखों के साथ मुस्कुरा दिया। जयदीप अवनि की तरफ पलटा और कहा,”शादी मुबारक हो,,,,,,,!!”
“थैंक्यू”,अवनि ने धीमे स्वर में कहा उसे नहीं समझ आ रहा था वह जयदीप से क्या कहे ?

जयदीप की पत्नी पृथ्वी और अवनि की तरफ आयी उन्हें शादी की शुभकामनाये दी। पृथ्वी की तरफ से नकुल ने साइन किये लेकिन अभी भी एक गवाह के साइन की जरूरत और थी ये देखकर नकुल ने अधिकारी से रिक्वेस्ट की लेकिन उन्होंने उसकी बात नहीं मानी और चौथे गवाह को बुलाने को कहा। नकुल ने कुछ दोस्तों को फोन किया लेकिन उस वक्त किसी ने फ़ोन नहीं उठाया तो कोई बहुत दूर था

नकुल परेशान हो ही रहा था कि तभी किसी की अंदर आने की आहट हुई। पृथ्वी के साथ साथ नकुल और जयदीप ने भी पलटकर देखा तो दरवाजे पर खड़े लड़के को देखकर जयदीप ने कोई प्रतिक्रया नहीं दी लेकिन नकुल और पृथ्वी के चेहरे का रंग उड़ गया।
“यार ये हिमांशु भैया यहाँ क्या कर रहे है ?”,नकुल ने दबी आवाज में पृथ्वी से कहा
“मुझे नहीं पता , क्या तुमने इन्हे यहाँ बुलाया है ?”,पृथ्वी ने भी दबी आवाज में कहा

“पागल है क्या मैं इन्हे यहाँ क्यों बुलाऊंगा ?”,नकुल ने कहा तब तक हिमांशु भैया उनकी तरफ चले आये और अधिकारी से कहा,”चौथा गवाह मैं हूँ बताईये कहा साईन करना है ?”
हिमांशु भैया की बात सुनकर नकुल और पृथ्वी ने हैरानी से एक दूसरे को देखा , हिमांशु भैया ने पृथ्वी की तरफ से साईन किया और शादी क़ानूनी तौर पर रजिस्टर हो गयी। अधिकारी अपना काम करने लगा और नकुल से कुछ दिन बाद आकर डाक्यूमेंट्स ले जाने को कहा।

हिमांशु के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे वे पृथ्वी के सामने आये और एकटक उसे देखने लगे तो पृथ्वी ने कहा,”दादा वो मैं,,,,,,,,,,,,!!”
“तुमने सही किया पृथ्वी”,हिमांशु ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो पहले हैरान हुआ और फिर हिम्मत करके कहा,”मुझे ये करना पड़ा दादा , अवनि आज जिन हालातों में है मैं उसे अकेला नहीं छोड़ सकता , आई इस शादी के लिए कभी हां नहीं कहती दादा इसलिए मैंने,,,,,,,,,,,!!”

हिमांशु ने पृथ्वी के कंधे पर हाथ रखा और कहा,”पृथ्वी मैंने कहा ना तुमने सही किया , कुछ साल पहले अगर तुमने मेरा और साक्षी का साथ नहीं दिया होता तो क्या आज हम साथ होते ? तुमने कुछ गलत नहीं किया है उलटा अब तक हम सब तुम्हारे साथ गलत कर रहे थे। अब जब तुमने इनका हाथ थाम लिया है तो हमेशा इसका साथ निभाना,,,,,,,,,,,घरवालों का जो रिएक्शन होगा वो तुम्हे अकेले फेस करना होगा मैं इसमें तुम्हारे साथ नहीं हूँ,,,,,,,,,,,,,गुड लक”

“आपने मेरे लिए इतना किया वही काफी है दादा , थैंक्यू”,पृथ्वी ने कहा
हिमांशु ने पृथ्वी का गाल थपथपाया और वहा से चला गया। नकुल पृथ्वी के पास आया और कहा,”यार हिमांशु भैया तो सच में डार्लिंग निकले”
“थैंक्यू”,पृथ्वी ने नकुल की तरफ देखकर कहा
“बस क्या साले अब दोस्त को थैंक्यू बोलेगा”,नकुल ने पृथ्वी की बाँह पर मारकर कहा तो पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए उसे साइड हग किया। सामने खड़ी अवनि दोनों को देख रही थी।

पृथ्वी को नकुल से चिपकते देखकर जयदीप ने कहा,”ए पृथ्वी ! तुम्हारी शादी अवनि से हुई है नकुल से नहीं,,,,,,!”
“आप तो ऐसे जल रहे है जैसे मैं आपकी गर्लफ्रेंड हूँ”,पृथ्वी ने दबी आवाज में कहा
“कुछ कहा तुमने ?”,जयदीप ने पूछा
“हाँ वो मैं ये कह रहा था कि Thankyou So Much Sir”,पृथ्वी ने कहा
“तुम्हारा ये थैंक्यू , थैंक्यू कम ताना ज्यादा लग रहा है ,, खैर अब अवनि को क्या यही रखने का इरादा है ?”,जयदीप ने कहा

“हाँ पृथ्वी कोई गड़बड़ हो इस से पहले यहाँ से चलते है , तुम्हारे घरवालों को भी तो फेस करना है”,नकुल ने कहा तो पृथ्वी के होंठो से मुस्कुराहट गायब हो गयी और चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे। पृथ्वी की आँखों के सामने वो पल आ गए जब अवनि के बारे में जानकर घरवालों ने उसे कितना सुनाया था आज जब वो लोग अवनि को पृथ्वी के साथ देखेंगे तो उनका क्या हाल होगा ?
“क्या हुआ कहा खो गया ?”,नकुल ने पृथ्वी की बाँह छूकर कहा  
“हाँ चलते है,,,,,,चले ?”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर कहा

अवनि पृथ्वी के साथ आगे बढ़ गयी। चलते चलते उसने गले में पहली वरमाला निकालकर अपने हाथ पर डाल ली। मांग में भरा सिंदूर उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा था।
 सभी मैरिज रजिस्ट्रार ऑफिस से बाहर आये। चलते चलते पृथ्वी के कदम ठिठके और वह रुक गया। कुछ ही दूर सामने उसका पूरा खानदान खड़ा था बस हिमांशु भैया नहीं थे। पृथ्वी के घरवालों को देखकर अवनि का दिल धड़कने लगा , वह पृथ्वी के बगल से हटकर उसके पीछे हो गयी , उनसे पृथ्वी की बाँह से शर्ट को पकड़ा था और इसी से पृथ्वी ने अवनि के डर का अंदाजा लगा लिया।

दिल पृथ्वी का भी धड़क रहा था और डर उसे भी लग रहा था। पृथ्वी ने जो किया उसके बाद घरवालों का गुस्सा होना जायज था और सबसे ज्यादा गुस्से में थी लता क्योकि आज पृथ्वी ने उनसे किया वादा ही नहीं तोडा था बल्कि अवनि से शादी करके उनके खिलाफ भी खड़ा था।
लता पृथ्वी के सामने आ खड़ी हुई और उसकी आँखों में देखकर कहा,”तो इस लड़की के लिए तुम अपने ही परिवार के खिलाफ खड़े हो गए पृथ्वी ? एक बार भी नहीं सोचा उन सबके बारे में,,,,,,,,,,ये लड़की तुम्हे इतनी प्यारी हो गयी कि तुम मुझसे किया वादा तक भूल गए”

“आई , आई एक बार मेरी बात सुन लीजिये इसमें इनकी कोई गलती नहीं है। मैं इन्हे यहाँ लेकर आया हूँ ,, आई मैं इनसे बहुत प्यार करता हूँ , आप मेरी बात समझने की कोशिश तो कीजिये मैं नहीं रह सकता इनके बिना आई”,पृथ्वी ने रोआँसा होकर कहा
“पृथ्वी ! तुम इस लड़की को जहा से लेकर आये हो वही वापस छोड़कर आओगे समझे तुम , ये लड़की मेरे घर में नहीं आ सकती”,लता ने गुस्से से अवनि को घूरकर कहा तो अवनि डरकर पृथ्वी के पीछे छुप गयी और कहा,”मुझे यहाँ नहीं आना चाहिए था पृथ्वी,,,तुमने ठीक नहीं किया”

पृथ्वी ने अवनि को अपने पीछे हटाकर अपने बगल में लाया और उसका हाथ थामकर उसकी आँखों में देखकर कहा,”डरो मत , मैं हूँ”
पृथ्वी के ये दो शब्द “मैं हूँ” उस वक्त अवनि को हिम्मत देने के लिए काफी थे शायद,,,,,,,,,,लता ने जब देखा कि पृथ्वी पर उनकी बात का कोई असर नहीं हुआ है तो उन्होंने कहा,”पृथ्वी तुम इस लड़की को वापस इसके घर छोड़कर आओगे”

“इसका वहा कोई नहीं है आई , ये मेरे भरोसे इस शहर में आयी है और अब ये मेरी पत्नी है”,पृथ्वी ने कहा
लता ने जैसे ही सूना खींचकर एक तमाचा पृथ्वी के गाल पर रसीद कर दिया और ये देखकर वहा खड़े जयदीप के चेहरे पर दर्द के भाव उभरे और उसने अपनी आँखे मींच ली।

( क्या पृथ्वी कर पायेगा सामना अपने घरवालों का या मान लेगा हार ? क्या लता करेगी अवनि को अपनी बहू के रूप में स्वीकार या बढ़ जाएगी उसकी नफरत ? क्या हिमांशु देगा मोहब्बत के इस सफर में आगे भी पृथ्वी का साथ ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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