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Pasandida Aurat Season 2 – 19

Pasandida Aurat Season 2 – 19

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

अवनि किचन में आकर खाना बनाने लगी। खाना बनाते हुए अवनि बड़बड़ाने लगी,”ये सुरभि भी न , मैंने उसकी बात मानी ही क्यों ? पृथ्वी के लिए एफर्ट करो , हाह ! एफर्ट किया तो देखा न उसने क्या किया , जब देखो तब अपने लम्बे होने पर इतराता रहता है,,,,,,,हाँ ठीक है नहीं पहुंचा मेरा हाथ बैग तक तो मैंने कोशिश तो की ना लेकिन नहीं मेरे एफर्ट्स किसको दिखते है,,,,,,,,,,,!!”

बड़बड़ाते हुए अवनि ने टिफिन उठाया और उसमे पृथ्वी के लिए खाना पैक करने लगी। अवनि ने टिफिन को कवर में रखकर जैसे ही बंद किया उसे कुछ याद आया और वह किचन से बाहर चली आयी। अवनि ने टेबल पर रखा पेन पेपर उठाया और लेकर किचन में चली आयी।

पृथ्वी भी अपना बैग लेकर कमरे से बाहर हॉल में आया और सभी जरुरी सामान बैग में रखने लगा। पृथ्वी ने अपना बैग उठाया और किचन की तरफ देखा की शायद उसके ऑफिस जाने से पहले अवनि उसे मिलने आये लेकिन अवनि नहीं आयी। पृथ्वी ने कलाई पर बंधी घडी में समय देखा तो पाया देर हो चुकी है। वह दरवाजे की तरफ बढ़ गया और जाते जाते कहा,”अवनि ! मैं ऑफिस जा रहा हूँ , कुछ जरूरत हो तो मुझे फोन करना”

अवनि ने सुना तो जल्दी से टिफिन को कवर में डाला और दौड़कर किचन से बाहर आते हुए कहा,”पृथ्वी,,,,,,,,!!”
पृथ्वी दरवाजा खोलकर बाहर जा ही रहा था , अवनि की आवाज सुनकर रुक गया तो अवनि उसके पास आयी और टिफिन पृथ्वी की तरफ बढ़ाकर कहा,”तुम्हारा टिफिन,,,,,,,,,!!!”
अवनि के हाथ में टिफिन देखकर पृथ्वी हैरान था। अवनि उसके लिए टिफिन बनाएगी ये तो पृथ्वी ने बिल्कुल नहीं सोचा था। उसने अवनि के हाथो से टिफिन लिया और कहा,”ये आपने बनाया है , मेरे लिए ?”

अवनि ने मुस्कुरा कर हामी में गर्दन हिलायी तो पृथ्वी का दिल किया आगे बढ़कर अवनि को गले लगा ले या उसका ललाट चुम ले लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकता था क्योकि वह अवनि से किये वादे में जो फंसा था लेकिन उसका दिल ख़ुशी से नाच रहा था कि अवनि ने उसके लिए टिफिन बनाया है। पृथ्वी अवनि को देखते हुए मन ही मन खुद से कहने लगा,”हाह ! मेरे पास इस वक्त आपसे कहने के लिए शब्द नहीं है मैडम जी,,,,,,,,,,,आज से पहले ऐसा सिर्फ मेरी आई ने किया था और आज आपने किया,,,,,,,,,

मैं आपको बता नहीं सकता मुझे इस वक्त कितनी ख़ुशी हो रही है और मेरा दिल कर रहा है कि मैं आज ऑफिस ना जाकर बस आपके साथ रहू , आपने मेरे लिए टिफिन बनाया सोचकर ही कितना अच्छा महसूस कर रहा हूँ मैं,,,,,,,,,अब तो अगर इसमें आपने करेला , टिंडा , गंवार फली भी रखी तो मैं ख़ुशी ख़ुशी खा लूंगा”
पृथ्वी को खोया देखकर अवनि ने उसके सामने हाथ हिलाया और कहा,”पृथ्वी , पृथ्वी , तुम्हे ऑफिस नहीं जाना ?”

पृथ्वी की तंद्रा टूटी वह चौंका और कहा,”अह्ह्ह हां हां , इसके लिए थैंक्यू ! मैं जल्दी आ जाऊंगा आपको कुछ काम हो या जरूरत हो तो आप बेझिझक मुझे कॉल करना,,,,,,,,,मैं चलता हूँ”
पृथ्वी टिफिन हाथो में उठाये वहा से चला गया और अवनि दरवाजा बंद करके अंदर चली आयी।  
पृथ्वी लिफ्ट के सामने आया , बैग उसके कंधो पर था और टिफिन को उसने दोनों हाथो से थाम रखा था जैसे वो टिफिन ना होकर अवनि का दिल हो।

पृथ्वी उस टिफिन को देखता और मुस्कुराता आज से पहले वह शायद ही कभी इतना मुस्कुराया या खुश हुआ हो। पृथ्वी लिफ्ट से बाहर आया और टिफिन को दोनों हाथो में अपने सामने उठाये गुनगुनाते हुए अपार्टमेंट से बाहर निकल गया। गार्ड ने पृथ्वी को खुश देखा तो पास खड़े आदमी से कहा,”शादी के बाद ये लड़का कुछ ज्यादा ही खुश रहने लगा है , लगता है इसकी बायको बहुत अच्छी है”

“हाँ ! आज से पहले मैंने इसे इतना खुश कभी नहीं देखा पर सुना है इस शादी से इसके घरवाले नाराज है,,,,,,,!!!”,आदमी ने कहा
“हाँ सुना तो मैंने भी है लेकिन आजकल के बच्चे है अपनी पसंद से जीवनसाथी चुन भी लिया तो क्या गलती कर दी माँ-बाप को समझना चाहिए और दोनों को माफ़ करके अपना लेना चाहिए”,गार्ड ने कहा
“सही कहा,,,,,,!!”,कहकर आदमी वहा से चला गया और गार्ड अपने काम में लग गया

पृथ्वी फ्लेट से लिफ्ट में , लिफ्ट से अपार्टमेंट के ग्राउंड फ्लोर पर , अपार्टमेंट से मेन रोड और रोड से स्टेशन तक उस टिफिन को दोनों हाथो में वैसे ही थामे रहा। अवनि ने उसके लिए टिफिन बनाया है ये सोचकर सहसा ही उसके होंठो पर मुस्कान तैर जाती। उसे ना अब ऑफिस जाने की जल्दी थी ना ही जयदीप से डाँट खाने का डर वह तो बस अपनी मैडम जी के ख्यालों में खोया था।

स्टेशन आकर उसने हमेशा की तरह लोकल ट्रेन पकड़ी और आज भी उसे सीट नहीं मिली खड़े होकर ही जाना पड़ा लेकिन आज पृथ्वी को ना इस बात से झुंझलाहट हुई ना ही वह खीजा वह तो बस टिफिन बॉक्स को अपने सीने से लगाकर अपने स्टेशन के आने का इंतजार कर रहा था

पृथ्वी को ऑफिस भेजकर अवनि अंदर आयी। अपने लिए खाना बनाया और किचन साफ किया। उसने प्लेट में खाना लिया और हॉल में आ बैठी। पृथ्वी के बिना उसे ये घर खाली खाली लगने लगा। अवनि ने मुश्किल से खाना खाया और फिर धुले हुए कपडे लेकर बालकनी में सुखाने चली आयी। अवनि कपडे सुखाकर जैसे ही जाने लगी उसकी नजर बगल वाली बालकनी में खड़ी देशमुख आंटी पर पड़ी जो कि अवनि को देखकर मुस्कुरा रही थी। उन्हें अपनी तरफ मुस्कुराते देखकर अवनि भी मुस्कुरा दी और कहा,”नमस्ते”

“येथे या”,आंटी ने मराठी में कहा लेकिन अवनि को समझ नहीं आया और वह परेशान सी उन्हें देखने लगी ये देखकर आंटी ने प्यार से कहा,”अरे यहाँ आओ”
अवनि उनकी तरफ चली आयी तो देशमुख आंटी ने कहा,”तुला मराठी येत नाही ?”
अवनि ने मराठी शब्द सुनकर ये अंदाजा लगा लिया कि वे जानना चाहती है अवनि मराठी है या नहीं इसलिए उसने मासूमियत से अपनी गर्दन ना में हिला दी
अवनि की मासूमियत देखकर देशमुख आंटी ने उसके गाल को छुआ और बड़े प्यार से कहा,”अरे तो ऐसा कहो ना , तुम यहाँ की नहीं हो ?”

“मैं उदयपुर , राजस्थान से हूँ”,अवनि ने धीरे से कहा
“हहहहहह उदयपुर तो बहुत सुन्दर शहर है , मैं और वो एक बार गए है वहा घूमने,,,,,,,,,,तो तुम दोनों का ये लव मैरिज है ?”,आंटी ने फिर पूछा
अवनि कुछ देर खामोश रही और फिर धीरे से हाँ में गर्दन हिला दी तो आंटी मुस्कुराई और कहा,”ये पृथ्वी को देखकर लगा नहीं था इसको कभी किसी से प्यार होगा,,,,,,,,,,,,!!”
अवनि ने सुना तो हैरानी से कहा,”ऐसा क्यों ?”

“अरे बहुत ही चुप चुप रहने वाला लड़का है , मैंने उसको अपार्टमेंट के लोगो से कभी बात करते घुलते मिलते नहीं देखा। शाम में आता था सुबह चला जाता था उसके आई बाबा दूसरी सोसायटी में रहते है ना शायद इसलिए,,,,,,,,कभी कभी देर यहाँ खड़ा होकर पता नहीं आसमान में क्या देखता रहता था ? अब तुम आ गयी हो तो चेहरा चमकने लगा है उसका,,,,,,,,!!”,आंटी ने कहा

देशमुख आंटी की बातें सुनकर अवनि की आँखों के सामने पृथ्वी का मासूम हसंता मुस्कुराता चेहरा आया और साथ ही याद आयी पृथ्वी की शरारतें , अवनि के सामने पृथ्वी कुछ और था और बाकि सबके सामने कुछ और,,,,,,,,,,,!!
अवनि को खोया देखकर देशमुख आंटी ने कहा,”कुछ भी चाहिए या परेशानी हो तो मुझसे कहना ठीक है,,,,,,,,,बस यहाँ आकर एक आवाज लगा देना”

“जी थैंक्यू”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा
तभी आंटी के घर के अंदर से आवाज आयी और आंटी चली गयी। अवनि कुछ देर वही खड़ी होकर आस पास की ऊँची इमारतों को देखने लगी और फिर अंदर चली आयी।  

पृथ्वी ख़ुशी ख़ुशी ऑफिस पहुंचा। पुरे एक हफ्ते बाद पृथ्वी आज ऑफिस आया था और मुस्कराहट उसके होंठो से हटने का नाम नहीं ले रही थी। पृथ्वी को देखकर सभी खुश थे। पृथ्वी अपने केबिन में आया तो देखा उसकी पूरी टीम पहले से वहा मौजूद है। किसी को नहीं पता था पृथ्वी ने शादी कर ली है। उसने अपना  टिफिन साइड में रखा और बैग से फाइल्स निकालकर बाहर रखने लगा।

यार पृथ्वी ! एक हफ्ते से कहा गायब थे तुम ?”,अंकित ने अपनी कुर्सी पृथ्वी की तरफ घुमाकर कहा
“हाँ सर ! आपने मैसेज और मेल्स का भी कोई जवाब नहीं दिया”,तान्या ने पूछा
“सर आपकी तबियत तो ठीक थी ना , जयदीप सर से पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें भी कुछ नहीं पता,,,,,,,,!!”,कशिश ने पूछा
“इन सब ने पहले ही इतना पूछ लिया है तो मैं पूछकर क्या करूंगा ?”,मनीष ने कहा

पृथ्वी ने चारो को देखा और कुछ देर खामोश रहने के बाद कहा,”मैं किसी काम से मुंबई से बाहर था,,,,,,,,,अब आ गया हूँ अब तुम लोग अपने ऑफिस के सारे डाउट्स क्लियर कर सकते हो”
“इनके ऑफिस के डाउट तो मैं क्लियर कर दूंगा तुम मुझे ये बताओ क्या चल रहा है ?”,अंकित ने पृथ्वी के पास आकर धीरे से पूछा
“क्या चल रहा है मतलब ?”,पृथ्वी ने कहा  
अंकित कुछ कहता इस से पहले ऑफिस बॉय आया और कहा,”पृथ्वी सर ! आपको बॉस ने अपने केबिन में बुलाया”

पृथ्वी ने टेबल पर पड़ी फाइल उठायी और अपने केबिन से निकल गया। पृथ्वी को जाते देखकर अंकित बड़बड़ाया,”कुछ तो है जो तुम हम सब से छुपा रहे हो पृथ्वी,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह मैं जल्दी ही पता लगा लूंगा”
“क्या पता लगा लेंगे अंकित सर ?”,तान्या ने पलटकर कहा
“कुछ नहीं काम में ध्यान दो,,,,,,,,मुझे सभी डाक्यूमेंट्स क्लियर चाहिए”,अंकित ने कठोर स्वर में कहा और वहा से चला गया

तान्या ने कशिश-मनीष की तरफ देखा और कहा,”लगता है मनीष सर ने अब पृथ्वी सर की जगह ले ली है काम पर ध्यान दो,,,,,,,,,,,हुँह”
मनीष और कशिश ने सुना तो हसने लगे और फिर तीनो अपने अपने काम में लग गए  

पृथ्वी जयदीप के केबिन में आया और जैसे ही उसने अंदर कदम रखा जयदीप गाना गाते हुए उसके पास आया,”आईये ! आपका इन्तजार था,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने सुना तो अजीब सा मुँह बनाकर जयदीप को देखने लगा और पृथ्वी के पास आते आते जयदीप पृथ्वी के आगे पीछे घूमते हुए गाना गाने लगा,”देर लगी आने में तुमको शुक्र है फिर भी आये तो,,,,,,,,,!!”
“क्या आपने सच में इस कम्पनी को बेचने का मन बना लिया है ?”,पृथ्वी ने जयदीप की तरफ देखकर पूछा

“नहीं ! तुम ऐसा क्यों कह रहे हो ?”,जयदीप ने हैरानी से पूछा
“क्योकि जिस तरह की आपकी हरकते है मुझे नहीं लगता ये कम्पनी ज्यादा दिन चलेगी,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
जयदीप ने सुना तो हंसा और कहा,”ओह्ह्ह पृथ्वी ! तुम्हारी ये मजाक करने की आदत कब जाएगी ? अच्छा ये सब छोडो और ये बताओ कैसा चल रहा है ?”
“क्या कैसा चल रहा है ?”,पृथ्वी ने कहा

“अरे वही,,,,,,,,,,मतलब तुम्हारे और अवनि के बीच , सब ठीक है न ?”,जयदीप ने दबे स्वर में कहा
“आप मेरी पर्सनल लाइफ में इतना इंट्रेस्ट क्यों दिखा रहे है ?”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
“अरे मैं बस पूछ रहा हूँ , उस दिन रजिस्ट्रार ऑफिस के बाहर जो कुछ हुआ उसके बाद से मुझे तुम्हारी और अवनि की चिंता हो रही थी बस इसलिए,,,,,,,,,,,हाह ! तुम अब भी वैसे ही हो खड़ूस और चिड़चिड़े,,,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने बच्चो की तरह मुँह बनाकर कहा

अवनि की चिंता करने के लिए मैं हूँ , आप आज की मीटिंग की चिंता कीजिये”,पृथ्वी ने फाइल जयदीप की टेबल पर पटककर कहा
” अहहममममम सुबह सुबह इसका पारा हाई है,,,,,,,,,,लगता है अवनि ने इसे नाश्ता नहीं दिया , अब लव मैरिज में तो ये सब होता ही है लड़कियों को कहा कुछ बनाना आता है,,,,,,,,,!!”,जयदीप बड़बड़ाया जो कि पृथ्वी आसानी से सुन पा रहा था

जयदीप की बात सुनकर पृथ्वी उसे घूरने लगा , जयदीप ने देखा तो झेंप गया और पृथ्वी ने एक बार फिर चिढ़ते हुए कहा,”अवनि को सब बनाना आता है। वो बहुत अच्छी है , हमारी शादी को दो दिन हुए है और मैं आज ऑफिस में हूँ आपकी उस बेकार मीटिंग की वजह से फिर भी उसने मुझसे एक बार भी शिकायत नहीं और मेरे लिए टिफिन भी बनाया”
जयदीप ने सुना तो उठकर पृथ्वी के पास आया और हैरानी से कहा,”उसने तुम्हारे लिए आज का लंच बनाया है ?”
“हाँ,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा

“ठीक है फिर आज मैं लंच तुम्हारे साथ करूंगा और मीटिंग लंच के बाद रखते है”,जयदीप ने टेबल पर खुली पड़ी फाइल को बंद करके कहा
“उसने वो मेरे लिए बनाया है”,पृथ्वी ने कहा
“तो क्या तुम अकेले खाओगे ? मैं बस थोड़ा सा टेस्ट करूंगा”,जयदीप ने कहा
“नो थैंक्यू,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और जाने लगा तो जयदीप ने कहा,”मैं तुमसे लंच में मिलूंगा”    

“क्या मुसीबत है ?”,पृथ्वी बड़बड़ाया और केबिन से बाहर निकल गया
पृथ्वी के जाने के बाद जयदीप मुस्कुराया और खुद से कहने लगा,”क्या बात है पृथ्वी ? अवनि ने तुम्हारे लिए लंच बनाया है सच में यार तुम्हारी पसंद बहुत अच्छी है ,, उसने तुम्हारे लिए इतना सोचा ये उसका प्यार नहीं तो और क्या है ? वो अपने नवरे को भूखा कैसे देख सकती है ?  ये लंच टाइम कब होगा यार ?”
जयदीप का फोन बजा और इसके बाद जयदीप अपने काम में बिजी हो गया !

दोपहर तक अवनि ने घर के सभी काम कर लिए लेकिन उसका मन नहीं लगा। अवनि के पास करने के लिए घर के कामो के अलावा कुछ था नहीं , फोन चलाकर भी वह बोर हो चुकी थी इसलिए हॉल में पड़े सोफे पर आ बैठी और उदास सी घर की खाली दीवारों को देखने लगी। ये घर जरुरी सामान के बाद अभी भी खाली नजर आ रहा था। अवनि ने पुरे घर को अच्छे से देखा और फिर अपना फोन उठाकर ऑनलाइन घर का सामान देखने लगी।

अवनि ने सबसे पहले परदे देखे काफी देखने के बाद अवनि को हलके हरे रंग के परदे पसंद आये और उसने उन्हें सेलेक्ट कर लिया , हरे परदो के साथ उसने कुछ सफ़ेद रंग के परदे भी सेलेक्ट किये जबकि अवनि को याद नहीं था कि हरा रंग पृथ्वी का पसंदीदा है। पर्दो के बाद अवनि ने घर की दीवारे सजाने के लिए कुछ पेंटिंग्स सेलेक्ट की , बालकनी के लिए कुछ गमले और आर्टिफिशयल पौधे , लाईटे और सामान सेलेक्ट किया। ये सब करते करते अवनि की बोरियत धीरे धीरे कम होने लगी।

सब सामान के साथ उसने कुछ किताबे भी आर्डर की ताकि खाली समय में उन्हें पढ़ सके। अवनि ने सब सामान सेलेक्ट करके रख दिया लेकिन आर्डर कैसे करे उसे तो यहाँ का पता भी ठीक से मालूम नहीं था। अवनि ने कुछ देर सोचा और फिर शाम में पृथ्वी के आने पर पूछने का फैसला कर अवनि बुक रेंक की तरफ आयी और एक किताब लेकर वापस सोफे पर चली आयी। अवनि सोफे पर आ बैठी और किताब पढ़कर वक्त काटने लगी। किताब पढ़ते पढ़ते अवनि को नींद आ गयी और वह किताब अपने सीने पर रखे रखे ही सो गयी |

( क्या अवनि ने टिफिन के साथ रखा है पृथ्वी के लिए कोई खत ? क्या पृथ्वी अंकित पता लगा पायेगा पृथ्वी का सच ? क्या पृथ्वी के लिए अवनि भूल जाएगी अपना सपना और रह जाएगी हॉउस वाइफ बनकर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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