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Pasandida Aurat Season 2 – 18

Pasandida Aurat Season 2 – 18

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी अवनि को लेकर घर आया घर आते आते रात के 12 बज चुके थे। अवनि थकी हुई होगी सोचकर पृथ्वी ने उस से आराम करने को कहा और खुद किचन में पानी लेने चला आया। पृथ्वी ने खाली बोतल उठायी और फ़िल्टर से उसमे पानी भरने लगा। एक बार फिर पृथ्वी लता और अपने घरवालों के बारे में सोचने लगा , आज घरवालों ने जो किया उस से पृथ्वी के मन को एक ठेस पहुंची थी। पृथ्वी अपने सोच विचार में इतना खोया हुआ था कि उसे पता ही नहीं चला बोतल में पानी भर चुका है और पानी बाहर गिर रहा है।

अवनि पानी लेने किचन में आयी थी उसने जब बोतल से पानी गिरते देखा तो आकर नल बंद किया और कहा,”पृथ्वी ! बोतल भर चुका है”
अवनि की आवाज से पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने अवनि की तरफ पलटकर कहा,”अह्ह्ह हाँ ! वो मैंने ध्यान नहीं दिया”
“तुम कुछ परेशान दिख रहे हो , क्या हुआ ?”,अवनि ने पृथ्वी का चेहरा देखकर ये भाँप लिया

“अह्ह्ह नहीं तो मैं तो बिल्कुल ठीक हूँ,,,,आप खामखा ज्यादा सोच रही है। वैसे आप यहाँ,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अपनी बेचैनी छुपाकर कहा
“पानी लेने आयी थी”,अवनि ने कहा।
“ये लीजिये मैं दूसरा ले लेता हूँ”,पृथ्वी ने अपना बोतल अवनि की तरफ बढाकर कहा
“गुड नाईट”,अवनि ने बोतल लेकर कहा और वहा से चली गयी।
“गुड नाईट मैडम जी,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और दूसरी बोतल में पानी भरने लगा

किचन से बाहर निकलकर अवनि कमरे की तरफ बढ़ गयी। कमरे में आकर उसने बोतल टेबल पर रखा और पृथ्वी के बारे में सोचने लगी,”कुछ तो हुआ है तुम्हे पृथ्वी , तुम्हारे शब्द झूठे हो सकते है कि ‘मैं ठीक हूँ’ लेकिन तुम्हारी आँखे तुम्हारी मासूम आँखे झूठ नहीं बोल सकती,,,,,तुम इसलिए मुझे कुछ नहीं बताना चाहते क्योकि तुम्हे डर है कही तुम्हारी परेशानी जानकर मैं परेशान ना हो जाऊ,,,,,,,,मुझे परेशान ना करने के लिए तुम खुद परेशान हो रहे हो उसका क्या ? देखा मैंने आज कैसे तुम मेरे सामने जबरदस्ती मुस्कुराने , खुश रहने का दिखावा कर रहे थे।

जानती हूँ पृथ्वी हमारे बीच पति पत्नी वाला रिश्ता अभी पूरी तरह से नहीं है पर क्या मुझे तुम्हारे दुःख जानने का हक़ भी नहीं है। तुम बेझिझक मुझसे अपना दुःख अपनी परेशानी कह सकते हो मैं सुनूंगी और समझूंगी भी,,,,,,,,,पर तुम ना जाने किस मिटटी के बने हो पृथ्वी,,,,,!!!”
अवनि पृथ्वी के बारे में सोच ही रही थी कि तभी उसका फोन बजा। स्क्रीन पर सुरभि का नंबर देखकर अवनि ने फोन उठाया और बुझे स्वर में कहा,”हेलो”

– हेलो अवनि ! इस वक्त फ़ोन करके मैंने डिस्टर्ब तो नहीं किया ना ?
“नहीं सुरभि ! तुम ऐसा क्यों कह रही हो ?”
– अह्ह्ह्ह फिर ठीक है , एक्चुली वो मैं अपनी जॉब को लेकर थोड़ा कन्फ्यूज थी तो सोचा तुमसे बात करू
“क्या हुआ सुरभि , सब ठीक है ना ?”
– अरे हाँ सब ठीक है , एक्चुली अनिकेत अगले महीने अपने मम्मी पापा के साथ मेरे घरवालों से मिलने वाला है हमारी शादी की बात को लेकर

“ये तो अच्छी बात है ना सुरभि ! वैसे भी काफी वक्त हो चुका तुम दोनों को साथ रहते हुए अब तुम्हे अनिकेत से शादी कर लेनी चाहिए”
– हम्म्म मैं शादी के लिए तैयार हूँ लेकिन,,,,,,,,,,
सुरभि ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी
“लेकिन क्या ?”
– अनिकेत के मम्मी पापा चाहते है मैं नौकरी छोड़कर हमेशा के लिए उदयपुर में रहू
“और अनिकेत ? उसने कुछ नहीं कहा अपने मम्मी पापा से ?

– अनिकेत की तो उनके सामने आवाज तक नहीं निकलती है अवनि , मैंने बात की अनिकेत से और समझाया उसे कि जिस नौकरी के लिए मैंने इतनी  मेहनत की उसे मैं कैसे छोड़ दू ? अभी कुछ ही महीने हुए है सिरोही आये अगर मैं ट्रांसफर का भी सोचू तो मुझे इतनी जल्दी कही और ट्रांसफर नहीं मिलेगा ना ही परमानेंट उदयपुर में,,,,,,,,,,हाह ! मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा अवनि मैं क्या करू ?
“तुम परेशान मत हो सुरभि ! मैं अनिकेत से बात करुँगी वो समझ जाएगा”
– बो बावली बूच ही कोनी समझे अवनि

अवनि ने सुरभि के मुँह से एकदम से मारवाड़ी सुनी तो वह समझ गयी कि सुरभि गुस्से में है इसलिए अवनि ने प्यार से उसे समझाते हुए कहा,”सुरभि ! गुस्सा मत करो , मैं बात करुँगी उस से और समझाउंगी उसे ,, जितना तुम्हारे लिए उसका प्यार जरुरी है उतनी ही तुम्हारी नौकरी भी,,,,,,,मैंने नौकरी अपने बुरे हालातों की वजह से छोड़ी थी लेकिन तुम ऐसा कोई फैसला मत करना सुरभि,,,,,,,,,जो भी करो सोच समझ कर करना”

– मैंने उसे कितना समझाया अवनि लेकिन वो कुछ सुनने को तैयार ही नहीं है बस एक ही जिद पकड़कर बैठा है कि जो मम्मी पापा कह रहे है वो करो,,,,,,,,मैंने आज तक अपने मम्मी पापा की नहीं सुनी मैं उनकी क्यों सुनू और क्या अब मुझे अपनी जिंदगी के फैसले उन लोगो के हिसाब से करने पड़ेंगे ?”
“नहीं सुरभि ! ये तुम्हारी जिंदगी है इसे कैसे जीना है इस पर तुम्हारा हक़ है किसी और का नहीं,,,,,,,,अनिकेत को तुम्हे और तुम्हारे सपनो को समझना चाहिए”

– सॉरी यार अवनि ! मैंने तुम्हे इस वक्त फोन किया लेकिन अगर मैं ये सब किसी से नहीं कहती तो मेरा दिमाग फट जाता , वैसे भी इस फ्लेट में मैं अकेली रहती हूँ तुम भी यहाँ नहीं हो,,,,,,,,,,,,जब भी इस खाली फ्लेट को देखती हूँ तो तुम्हारी बहुत याद आती है
सुरभि को भावुक होते देखकर अवनि ने कहा,”सच में पागल हो तुम , मुझसे स्ट्रांग रहने को कहती हो और खुद छोटी छोटी बात पर भावुक हो जाती हो,,,,,मुझे भी तुम्हारी और घरवालों की बहुत याद आती है सुरभि,,,,,,,,पता नहीं वो सब मुझे फिर से माफ़ करेंगे या नहीं”

“अवनि तुम उन सबके बारे में मत सोचो वो तुम्हे माफ़ करे या न करे क्या फर्क पड़ता है , विश्वास अंकल ने तुम्हारे लिए जिसे चुना वो तुम्हारे साथ है इतना काफी है,,,,,,,,,,वैसे है कहा पृथ्वी बाबू ?”,सुरभि ने पूछा
“वो बाहर सो रहा है”,अवनि के मुँह से एकदम से निकल गया
“बाहर सो रहा है मतलब ? तुम दोनों साथ नहीं रहते क्या ? एक मिनिट अवनि कही तुमने उसे खुद से दूर रहने को तो,,,,,,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने हैरानी से कहा

वो दरअसल,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि के इतना कहने भर से सुरभि समझ गयी कि अवनि और पृथ्वी के बीच शादी के बाद वाला रिश्ता कितना कॉम्प्लिकेटेड है उसने मायूसी भरे स्वर में कहा,”ओह्ह्ह्ह अवनि तुम कितनी बड़ी पागल हो,,,,,,,,,,तुमने उसे खुद से दूर रहने को क्यों कहा ? तुम दोनों अब पति पत्नी हो तुम्हे साथ रहना चाहिए,,,,,,,और तुम हो कि तुमने उसे बाहर सोने को कह दिया,,,,,,,,!!!”

सुरभि ! मेरी बात सुनो , ये शादी जिन हालातों में हुई है उसमे एक दूसरे के करीब आना , साथ रहना , मुझे नहीं लगता ये अभी सही है। पृथ्वी के घरवाले इस शादी से बिल्कुल खुश नहीं है सब उस से बहुत नाराज है ऐसे में उसके साथ शादी शुदा जिंदगी शुरू करना,,,,,,,,,,मैं तुम्हारी बात समझ रही हूँ लेकिन मुझसे नहीं पायेगा सुरभि,,,,,,,,,मुझे ये सब के लिए थोड़ा टाइम चाहिए था इसलिए मैंने,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा लेकिन सुरभि ने फिर उसकी बात बीच में काट दी और कहा,”और तुमने पृथ्वी को खुद से दूर रहने को कह दिया , अब वो बेचारा अपने ही घर में अपने ही कमरे से बाहर सोफे पर सो रहा होगा”

“हम्म्म,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने धीरे से कहा
“कितनी महान हो ना तुम अवनि , अवनि यार वो तुमसे प्यार करता है , तुम्हे चाहता है और सबसे बड़ी बात वो एक लड़का है उसके दिल में भी तो तुम्हे लेकर कुछ फीलिंग्स होगी , कुछ अरमान होंगे , वो भी तो चाहता होगा कि वो तुम्हारे सामने अपना प्यार जाहिर करे , तुम्हे स्पेशल फील करवाए,,,,,,,,,अवनि एक कमरे में साथ रहने का मतलब सिर्फ फिजिकल रिलेशन ही नहीं होता है तुम उसके साथ इमोशनली और मेंटली भी रह सकती हो जिस से वो तुम्हारे साथ इतना सहज हो कि अपने मन की बात खुलकर तुम्हे बता सके,,,,,,,,,,,,,!!”

अवनि ने सुना तो उसे पृथ्वी का बुझा चेहरा याद आया जब वह अपने मन ही मन किसी उलझन में फंसा हुआ था और चाहकर भी अवनि से अपनी परेशानी नही कह पाया। अवनि को खामोश पाकर सुरभि ने प्यार से कहा,”अवनि ! मैं ये नहीं कह रही कि कल ही जाकर उसके सामने अपने प्यार का इजहार कर दो लेकिन तुम धीरे धीरे उसे ये अहसास तो दिला सकती हो ना , उसके लिए छोटे छोटे एफ्फोर्ट्स कर सकती हो , उसे ये अहसास दिला सकती हो कि तुम उसके साथ हो ,

उसे अपने साथ इतना सहज बनाओ अवनि कि वह अपना दिल खोलकर तुम्हारे सामने रख दे। तुम्हे उस से प्यार है लेकिन ये बात समझने में तुम्हे अभी वक्त लगेगा शायद पर जब तक अहसास नहीं होता तब तक तुम उसके साथ एक अच्छे दोस्त की तरह पेश आ सकती हो ना अवनि,,,,,,,,!!”
“मैं तुम्हारी बात समझ रही हूँ सुरभि,,,,,,,मैं पूरी कोशिश करुँगी पृथ्वी को मुझसे कोई शिकायत ना हो”,अवनि ने धीमे स्वर में कहा

“हम्म ! सब ठीक हो जाएगा अवनि,,,,,,बस तुम दोनों एक दूसरे का साथ मत छोड़ना,,,,,,,रात बहुत हो गयी है अब तुम सो जाओ मैं तुम्हे कल फोन करती हूँ”,सुरभि ने कहा
“हम्म्म ! गुड नाईट”,अवनि ने कहा
“गुड नाईट”,सुरभि ने कहा और फोन काट दिया। सुरभि से बात करने के बाद अवनि ने फोन साइड में रखा और उसकी कही बातें अवनि के जहन में चलने लगी। अवनि का मन उदास हो गया सही तो कहा था सुरभि ने अवनि पृथ्वी के साथ जो कर रही है वह कहा सही था।

अवनि का दिल किया वह एक बार जाकर पृथ्वी को देखे , वह कुछ देर इसी उलझन में रही और फिर उठकर कमरे के दरवाजे के सामने चली आयी। अवनि ने धीरे से दरवाजा खोला उसकी नजर हॉल में सोफे पर सोये पृथ्वी पर पड़ी जो कि सोफे पर ठीक से न सो पाने की वजह से नींद में करवटें बदल रहा था। उसके पैर हत्थे से बाहर जा रहे थे और बहुत ही तंगहाल में सोया हुआ था। पृथ्वी को परेशान होते देखकर अवनि के कानों में सुरभि की कही बात गुंजी

“अवनि एक कमरे में साथ रहने का मतलब सिर्फ फिजिकल रिलेशन ही नहीं होता है तुम उसके साथ इमोशनली और मेंटली भी रह सकती हो जिस से वो तुम्हारे साथ इतना सहज हो कि अपने मन की बात खुलकर तुम्हे बता सके,,,,,,,,,,,,,!!”
अवनि के चेहरे पर उदासी के भाव झिलमिलाने लगे , उसने महसूस किया कि महज उसे खुश और आराम से रखने के लिए पृथ्वी कितना एडजस्ट कर रहा था। अवनि ने दरवाजा बंद किया और बिस्तर पर आकर लेट गयी। रातभर अवनि सुरभि की कही बातो के बारे में सोचती रही और फिर उसे नींद आ गयी।  

अगली सुबह अवनि जल्दी उठ गयी। नहा धोकर वह किचन में चली आयी उसने चाय बनाई और लेकर पृथ्वी के पास चली आयी। पृथ्वी सो रहा था , आज उसे ऑफिस जाना था लेकिन उसे तो ये बात याद तक नहीं थी और वह मस्त घोड़े बेच के सो रहा था। अवनि ने चाय टेबल पर रखी और दूर से ही पृथ्वी का कंधा थपथपाया क्योकि अवनि को पिछली बार का पृथ्वी को नींद से उठाना अभी तक याद था। पृथ्वी उठा और टेबल पर रखी चाय देखकर अवनि से कहा,”आपने बनाई है ?”

अवनि ने हामी में गर्दन हिलायी। पृथ्वी ने जैसे ही चाय के कप को उठाने के लिए हाथ बढ़ाया अवनि ने उसे टोक दिया और कहा,”पहले मुँह धोकर आओ”
”चाय तो पी सकते है ना”,पृथ्वी ने कहा
“बिल्कुल नहीं ! उठो मुँह धोवो और फिर चाय पीओ”,अवनि ने थोड़ा कठोर स्वर में कहा
“हाह ! लगता है ये मुझे सुधार कर ही रहेगी”,पृथ्वी उठते हुए बड़बड़ाया और वाशबेसिन के सामने आकर कुल्ला किया ,

मुँह धोया और जैसे ही अपनी टीशर्ट की बाजु से पोछने लगा अवनि ने छोटा तौलिया उसकी तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी झेंपते हुए मुस्कुराया और अवनि के हाथ से तौलिया लेकर मुँह पोछने लगा। अवनि ने खुद चाय का कप उठाकर पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी ने कप लिया और मन ही मन खुद से कहा,”ये इतना अच्छे से पेश क्यों आ रही है अब मुझसे क्या गलती हुई”
अवनि ने सोफे के कवर को सही किया , टेबल पर रखा एक्स्ट्रा सामान उठाया और पृथ्वी से कहा,”चाय पीकर तुम नहा लो , तुम्हे ऑफिस जाना है ना तुमने बताया था आज किसी क्लाइंट के साथ तुम्हारी मीटिंग है,,,,,,,,,!!”

अवनि की बात सुनकर पृथ्वी को याद आया कि आज तो उसे ऑफिस जाना था और जैसे ही उसकी नजर हॉल की घडी पर पड़ी तो उसने जल्दी जल्दी चाय खत्म की क्योकि हमेशा की तरह आज भी वह लेट हो चुका था। पृथ्वी नहाने चला गया और अवनि किचन में चली आयी। अवनि खाना बनाने की तैयारी कर किसी काम से कमरे में आयी।

पृथ्वी बाथरूम में था , अवनि ने देखा पृथ्वी ने बिस्तर पर ऑफिस पहनकर जाने वाले कपडे निकालकर रखे है। अवनि ने देखा कपडे प्रेस नहीं किये हुए है तो अवनि ने वही कबर्ड में रखी प्रेस उठायी और पृथ्वी के कपड़ो को अच्छे से प्रेस करके तह करके रख दिया।

अवनि किचन में आयी और पृथ्वी के लिए खाना बनाने लगी। पृथ्वी नहाकर कमरे में आया जैसे ही उसने पहनने के लिए अपना शर्ट उठाया देखा कि शर्ट बहुत ही अच्छे से प्रेस किया हुआ है और उस पर एक सलवट तक नहीं थी। टेबल पर रखी प्रेस देखकर पृथ्वी समझ गया कि ये कपडे अवनि ने प्रेस किये है।

वह मुस्कुरा उठा और जैसे ही शर्ट को छूकर देखा तो उसे लता की कही बात याद आ गयी “तुझे प्रेस किये कपडे चाहिए तो जल्दी आकर खुद कर लिया कर,,,,,,,,,वरना शादी कर ले और बीवी ले आ वो रोज तेरे लिए कपडे प्रेस भी कर देगी और तुझे टाइम से ऑफिस भी भेज देगी,,,,,,,,,,!!”
लता की बात याद आते ही पृथ्वी पहले खुश हुआ और फिर उदास होकर कहा,”देखो आई ! आज अवनि ने मेरे लिए कपडे प्रेस किये है,,,,,,,,,,मुझे यकीन है एक दिन वो आपका भी दिल जीत लेगी”

पृथ्वी ने ख़ुशी ख़ुशी पेंट शर्ट पहना और शीशे के सामने आकर तैयार होने लगा। उसने बाल बनाये , कलाई में विश्वास जी की दी घडी पहनी , अपना पर्स और फोन जेब में रखा और ऑफिस का बैग ढूंढने लगा लेकिन ये क्या ऑफिस का बैग तो उसे मिल ही नहीं रहा था। पृथ्वी यहाँ वहा ढूंढने लगा और जब नहीं मिला तो अवनि को आवाज दी,”अवनि , अवनि मेरा बैग नहीं मिल रहा है ,, क्या अपने उसे कही रखा है ?”

अवनि किचन में थी और खाना बना रही थी , उसके हाथो में आटा लगा था और बालों की लटें गालों पर झूल रही थी जिन्हे आटे से सने हाथो से वह पीछे भी नहीं कर पा रही थी। पृथ्वी की आवाज सुनकर अवनि कमरे में आयी और जब पृथ्वी ने अवनि को ऐसे देखा तो बैग ढूंढना भूल गया और एकटक अवनि को देखने लगा  , कौन कहता है औरत सिर्फ सजने सवरने के बाद ही खूसबूरत लगती है , अवनि तो इस वक्त उलझी लटों और सादगी में भी बला की हसीन लग रही थी।

पृथ्वी को अपनी तरफ देखते पकड़ अवनि ने कहा,”क्या हुआ , तुमने मुझे आवाज क्यों दी ?”
“अह्ह्ह्ह हां वो मेरा बैग नहीं मिल रहा”,पृथ्वी की तंद्रा टूटी
अवनि के बाल उसे परेशान कर रहे थे इसलिए उसने आटे से सने हाथ से उस जिद्दी लट को पीछे किया तो थोड़ा सा आटा अवनि के गाल पर भी लग गया। पृथ्वी ने देखा तो मुस्कुराने लगा।

अवनि ने उसे मुस्कुराते देखा तो अपनी गर्दन उचकाई। पृथ्वी अवनि के सामने आया और ऊँगली से उसके गाल पर लगे आटे की तरफ इशारा किया क्योकि अवनि की परमिशन के बिना तो वह उसे छूना भी नहीं चाहता था।
अवनि वही हाथ अपने गाल की तरफ बढ़ाया तो पृथ्वी ने रुकने का इशारा किया और अपनी जेब से रुमाल निकालकर अवनि के सामने कर दिया।  
“मेरे हाथ गंदे है तुम्हारा रुमाल गंदा हो जायेगा”,अवनि ने अपने दोनों हाथ पृथ्वी के सामने करके कहा
“May I ?”,पृथ्वी ने बड़े ही प्यार से धीमे स्वर में पूछा

अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी , पृथ्वी ने रुमाल से अवनि का गाल साफ किया और रुमाल को अपने जेब में रखकर पीछे हटते हुए कहा,”अब प्लीज क्या आप बताएंगी मेरा बैग कहा है ? मुझे कुछ जरुरी फाइल्स देखनी है”
“वो रहा , मैं देती हूँ”,अवनि ने ऊपर रखे पृथ्वी के बैग की तरफ इशारा करके कहा और खुद ही उसे उतारने आगे बढ़ गयी। पृथ्वी ने देखा तो फिर मुस्कुराने लगा क्योकि बैग अवनि के हाथ से बहुत ऊपर था।

वह मुस्कुराते हुए अवनि के बगल में आया और अपना हाथ उठाकर बड़े ही आराम से उसे नीचे उतारा तो अवनि झेंप गयी। पृथ्वी ने अपने हाथ से इशारा किया और अपने कंधे और अवनि के सर का कद बताते हुए उसे ये अहसास दिलाया कि वह उस से लंबा है। अवनि ने मुँह बनाया और वहा से चली गयी। पृथ्वी मुस्कुराया , मुस्कुराता रहा और फिर हंस पड़ा।

( क्या अवनि पर पड़ेगा सुरभि की बातों का कुछ असर या फिर अवनि रहने वाली है पृथ्वी से दूर ? क्या पृथ्वी समझ पायेगा अवनि के छोटे छोटे एफर्ट्स ? क्या साथ रहते रहते फिर से होगी इन दोनों को एक दूसरे से मोहब्बत ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत Season 2” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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