Pasandida Aurat Season 2 – 14
अवनि किचन में जाकर दोपहर के खाने की तैयारी करने लगी। पृथ्वी बाहर ख़ुशी से यहाँ वह घूम रहा था कि तभी उसका फोन बजा। पृथ्वी ने देखा फोन जयदीप का है तो उसकी ख़ुशी गायब हो गयी और उसका मुँह बन गया। उसने फोन उठाया और कान से लगाकर कहा,”हेलो,,,,,,,,,!!”
“पृथ्वी ! क्या तुमने मैरिज रजिस्ट्रार के ऑफिस जाकर अपना मैरिज सर्टिफिकेट लिया ?”,जयदीप ने कहा
“नहीं नकुल ने कहा है उसे आने में एक हफ्ता लग जाएगा,,,,,,,,और वैसे आपको मेरे मैरिज सर्टिफिकेट की इतना चिंता क्यों है ? वो मैंने नहीं लिया तब भी अवनि मेरे साथ रहेगी,,,,,!!”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
“हाँ जानता हूँ मैंने बस तुम्हे याद दिलाने के लिए फोन किया,,,,,,,,,वैसे तुम्हारी शादी हो गयी है लेकिन तुम्हारे बात करने के तरिके में सुधार नहीं है”,जयदीप ने शिकायती लहजे में कहा
“तो आप क्या चाहते है मैं आपको बाबू शोना कहू ?”,पृथ्वी फिर चिढ गया
“मुझे रहने दो ये सब जाकर अवनि से कहो,,,,,,,!!!”,जयदीप ने कहा
“हाह ! उसे ये सब नाम पसंद नहीं है,,,,,,,,बहुत पहले एक बार कहा था तब कितना सुनाया उसने मुझे,,,,,,,,कभी कभी तो लगता है वो इस ज़माने की लड़की है ही नहीं,,,,,,,,क्या होगा मेरा ?”,पृथ्वी खुद में ही बड़बड़ाये जा रहा था उसने ये भी ध्यान नहीं दिया कि फोन के उस तरफ जयदीप है लेकिन जयदीप को पृथ्वी की ये प्यारी प्यारी बाते सुनने में बड़ा मजा आ रहा था उसने पृथ्वी को छेड़ते हुए कहा,”हाँ तो तुम कौनसा इस ज़माने हो , इस ज़माने के होते तो अब तक अवनि के साथ गोआ मनाली या फिर कश्मीर में होते,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो उदास हो गया गोआ मनाली तो दूर की बात थी वह तो अवनि के साथ एक कमरे में भी नहीं रह पा रहा था उसने हताश होकर कहा,”मैं रखता हूँ सर,,,,,,,,,!!”
“अरे पृथ्वी , ए सुनो , पृथ्वी,,,,,,,,,,,!!”,जयदीप कहता ही रह गया और फोन कट गया। पृथ्वी ने फोन टेबल पर रखा और बालकनी की तरफ चला आया।
बगल वाली बालकनी में उसका पडोसी अंकल और उसकी पत्नी खड़ी थी जैसे ही उन्होंने पृथ्वी को देखा आंटी ने कहा,”अरे पृथ्वी, मी ऐकलंय तुझं लग्न झालंय ? ( ए पृथ्वी मैंने सुना तुमने शादी कर ली ? )”
“इन्हे कैसे पता चला ? अहह लगता है सामने रहने वाली रीना भाभी ने इन्हे बताया होगा” पृथ्वी ने मन ही मन खुद से कहा उसे चुप देखकर आंटी ने फिर कहा,”तुमची बायको कुठे आहे ? तिची ओळख करून द्या ( कहा है तुम्हारी पत्नी ? हम से भी मिलवाओ )”
“हाँ , हाँ बुलाता हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“अवनि , अवनि ज़रा यहाँ आना”,पृथ्वी ने अवनि को आवाज दी
पृथ्वी की आवाज सुनकर अवनि बालकनी में चली आयी और कहा,”क्या हुआ ? तुमने मुझे आवाज दी”
पृथ्वी ने बगल वाली बालकनी में खड़े अंकल आंटी की तरफ इशारा करके कहा,”ये विनय अंकल है और ये इनकी पत्नी”
“नमस्ते,,,,,,,!!”,अवनि ने अपने हाथ जोड़कर दोनों को नमस्ते किया।
“तुमची बायको खूप सुंदर आहे. ( तुम्हारी पत्नी तो बहुत खूबसूरत है पृथ्वी )”,आंटी ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखा और फिर अंकल आंटी की तरफ देखकर मुस्कुरा दिया। अवनि को बस बायको शब्द का मतलब समझ आया बाकि सब बाकि सब उसके सर के ऊपर से गया।
वह शरमाई सी संकुचाई सी वही खड़ी थी तभी आंटी ने आस पास के लोगो को जोर से आवाज लगाकर कहा,”अरे सुनो मैथिलि , जया , मिसेज गौड़ , मिसेज देसाई , पृथ्वीचे लग्न झाले, त्याच्या पत्नीला भेटा ( पृथ्वी ने शादी कर ली इसकी पत्नी से मिलो )”
पृथ्वी ने सुना तो उनकी तरफ आकर कहा,”अरे काकू, तुम्ही काय करत आहात ? ( अरे आंटी ये आप क्या कर रही है ? )
“अरे, बाजूला हो, मला तुझ्या बायकोला नीट पाहू दे” ( ए तू साइड हट , मुझे तेरी पत्नी को अच्छे से देखने तो दे”,आंटी ने पृथ्वी को साइड कर अवनि को अपने पास आने का इशारा किया। पृथ्वी और आंटी आपस में क्या बात कर रहे थे अवनि को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह संकुचाई सी आंटी के पास चली आयी तो उन्होंने अंकल से कुछ पैसे लिए और अवनि के हाथ में थमाकर उसका गाल छूकर कहा,”लाकूड स्पर्श करा ( नजर ना लगे )”
अवनि को कुछ समझ नहीं आया उसने पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने पलकें झपकाकर पैसे रखने का इशारा किया।
अवनि को देखने के बाद आंटी ने सबको जो आवाज लगायी तो सभी अपनी अपनी बालकनी में चली आयी। पृथ्वी भले ही इस अपार्टमेंट में रहने वाले लोगो से भले ज्यादा बात-चीत ना करता हो लेकिन उसकी शादी के बारे में सुनकर सब कोई उसकी पत्नी को देखने चले आये। सब कोई मराठी बोल रहे अवनि को कुछ समझ नहीं आ रहा लेकिन पृथ्वी तो सब सुन समझ रहा था इसलिए उसने अवनि का हाथ पकड़ा और कहा,”अंदर चलिए”
पृथ्वी ने बालकनी का शीशा बंद किया और अवनि को सोफे की तरफ लाकर कहा,”बैठिये मैं अभी आया”
अवनि को कुछ समझ नहीं आ रहा था पृथ्वी क्या कर रहा है ? वह सोफे पर आ बैठी , पृथ्वी किचन में गया बाहर आया उसकी मुट्ठी में कुछ था। वह अवनि के सामने चला आया उसने अवनि के सर से 7 बार मुट्ठी में बंद चीज को वारकर मुट्ठी अवनि के सामने की और कहा,”थुकिये,,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखने लगी तो पृथ्वी ने फिर कहा,”अरे थुकिये ना”
“थू थू”,अवनि ने धीरे से किया। पृथ्वी वाशबेसिन की तरफ गया और अपनी मुट्ठी में बंद चीज को बहा दिया। अवनि ने देखा उसकी मुट्ठी में नमक था।
पृथ्वी अवनि की तरफ आया तो अवनि ने कहा,”ये क्या था और तुम ये सब में भी विश्वास करते हो ?”
“विश्वास तो नहीं करता लेकिन आपको लेकर रिस्क नहीं ले सकता ,, बाहर वो सब कैसे आपको घूर रही थी ? हाह ! मैं नहीं चाहता आपको उनकी नजर लगे,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“ओह्ह्ह पृथ्वी ऐसा कुछ भी नहीं होता,,,,,,,वैसे आंटी ने क्या कहा मुझे कुछ समझ नहीं आया और उन्होंने ये पैसे क्यों दिए ? इन्हे तुम रख लो”,अवनि ने हाथ में पकडे पैसे पृथ्वी की तरफ बढ़ाकर कहा
“अरे ये आपको मिले है आप रखिये और आंटी ने क्या कहा वो मैं आपको बता सकता हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“नो थैंक्यू ! मैं गूगल कर लुंगी”,अवनि ने पृथ्वी को साइड करके कहा और किचन की तरफ चली गयी।
“लेकिन गूगल पर आपको वो कैसे मिलेगा मैडम जी , जो मैं आपको सिखाना चाहता हूँ,,,,,,,,!!”,पृथ्वी धीरे से बड़बड़ाया जिसे अवनि नहीं सुन पायी।
हॉल में खड़े पृथ्वी की नजर किचन में खड़ी अवनि पर पड़ी जो कि ऊपर से कुछ सामान उतारने की कोशिश कर रही थी लेकिन अवनि का हाथ वहा तक जा नहीं रहा था। पृथ्वी ने देखा तो किचन में चला आया और अवनि के बगल में खड़े होकर बड़ी आसानी से डिब्बा उतारकर अवनि की तरफ बढ़ाते हुए कहा,”बेटा ! अगर हेल्प चाहिए तो मुझसे कह सकती हो मैं हु यहाँ”
“बेटा ?”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर पूछा
“अह्ह्ह्ह ऐसे ही प्यार से,,,,,!!”,पृथ्वी ने अवनि से नजरे चुराकर कहा
“मैं तुम से बड़ी हूँ”,अवनि ने पृथ्वी को घूरकर देखा
“सिर्फ उम्र में ना हाइट में तो मैं बड़ा हूँ आपसे”,पृथ्वी ने मुँह बनाकर कहा
अवनि समझ गयी कि वह पृथ्वी से बहस में नहीं जीत सकती इसलिए कहा,”ठीक है तुम बड़े हो,,,,,अब खुश अब जाओ यहाँ से मुझे काम करने दो”
“मैं यहाँ खड़े होकर खाना बनते क्यों नहीं देख सकता ?”,पृथ्वी ने कहा
“मैं जानती हूँ तुम्हे खाना बनते देखने में कोई इंट्रेस्ट नहीं है,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने पलटकर कहा
“मुझे तो आपमें इंट्रेस्ट है”,पृथ्वी ने कहा
“देखो ! तुम मेरे साथ फ्लर्ट मत करो समझे”,अवनि ने हाथ में पकड़ा चम्मच पृथ्वी को दिखाकर कहा उसके बालों की लटें चेहरे पर झूल रही थी इस वक्त वह कुछ ज्यादा ही प्यारी लग रही थी। पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और कहा,”पता है इस वक्त आप कैसी लग रही है ?”
“कैसी ?”,अवनि ने पूछा
पृथ्वी अवनि के सामने उसके थोड़ा करीब आया और उसकी आँखों में देखते हुए बड़े प्यार से कहा,”सिर्फ़ मेरी”
अवनि ने सुना तो उसका दिल धड़कने लगा , चेहरा लाल हो उठा और वह एकटक पृथ्वी को देखती रही। पृथ्वी शुरू से उसके साथ फ्लर्ट करता आ रहा था लेकिन कभी कभी ऐसी बाते बोल जाता कि अवनि खामोश हो जाती उसके पास कहने को शब्द नहीं होते थे।
अवनि को खामोश और घबराया देखकर पृथ्वी मुस्कुराते हुए वहा बाहर चला गया। अवनि उस जगह से हटी , उसने गिलास में पानी लिया और एक साँस में उसे पी लिया। पृथ्वी के शब्द अभी भी उसके कानो में गूँज रहे थे , उसने किचन से बाहर हॉल की तरफ देखा तो पाया पृथ्वी फोन पर किसी से बात कर रहा है। अवनि उसे देखती रही , हँसते हुए पृथ्वी कितना प्यारा लग रहा था और जैसे ही पृथ्वी बात करते हुए अवनि की तरफ पलटा अवनि भी जल्दी से पलट गयी और अपना ध्यान खाना बनाने में लगा लिया हालाँकि पृथ्वी ने अवनि को नहीं देखा था वह फोन पर बिजी था।
अवनि ने खाना बनाया तब तक पृथ्वी हॉल में बैठकर अपने लेपटॉप में कोई फिल्म देखता रहा
अवनि ने खाना टेबल पर लगाया , पृथ्वी तो इस बात से ही खुश था कि आज अवनि ने कुछ स्पेशल बनाया है। अवनि ने उसे हाथ मुँह धोकर आने को कहा और खुद उसके लिए खाना लगाने लगी। पृथ्वी ख़ुशी खुशी हाथ धोकर आया और सोफे पर आ बैठा लेकिन जैसे ही उसने खाने की थाली देखी उसकी ख़ुशी गम में बदल गयी उसने अवनि की तरफ देखा और कहा,”करेला , आपने मेरे लिए ये बनाया है , स्पेशल”
“तुमने कहा ना मैं जो सजा दू तुम्हे मंजूर है तो तुम्हारी सजा ये है मिस्टर पृथ्वी उपाध्याय आज तुम्हे लंच में यही खाना होगा,,,,!!!”,अवनि ने बहुत ही प्यार से कहा
पृथ्वी ने सुना तो सांसे हलक में अटक गयी , करेला जिसे पृथ्वी देखना तक पसंद नहीं करता था आज वो उसकी खाने की थाली में रखा था और बचने का कोई मौका नहीं था क्योकि इसे अवनि ने बनाया था। अवनि जिसके लिए पृथ्वी बाबू जहर तक खाने को तैयार थे लेकिन करेला देखकर ऐसे मुँह बना जैसे पता नहीं क्या देख लिया हो ?
“मुझे देने के लिए आपको कोई और सजा नहीं मिली मैडम जी,,,,,,,,,,करेला , ये मैंने अपनी जिंदगी में आज तक नहीं खाया है”,पृथ्वी ने कहा
“तो अब खा लो,,,,,,और आज तो तुम्हे खाना पडेगा क्योकि दो साल पहले किसी ने मुझसे बहुत ही विश्वास के साथ कहा था कि अगर मैं अपने हाथो से बनाकर खिलाऊ तो वह खा लेगा,,,,,,,,,,आज मैंने ये अपने हाथो से बनाया है”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा
पृथ्वी को अपनी कही बड़ी बड़ी बातें याद आने लगी जो उसने अवनि को मैसेज में कही थी पर उसने थोड़ा सोचा था अवनि सच में उसके साथ ऐसा कुछ करेगी , अभी रात वाली गंवार फली का स्वाद जबान से गया भी नहीं था कि अवनि ने पृथ्वी के सामने करेला परोस दिया। मरता क्या ना करता पृथ्वी ने एक गहरी साँस ली , अपना दिल मजबूत किया और एक निवाला तोड़कर बुरा सा मुँह बनाते हुए उस निवाले को अपने मुँह में रख लिया। अवनि ने देखा तो मुस्कुराई और कहा,”आइंदा जब भी तुम्हारा मुझसे झूठ बोलने का दिल करे तो इसे याद कर लेना”
पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखने लगा। अवनि बड़े चाव से करेला खा रही थी ये देखकर पृथ्वी ने भी मुँह बनाना बंद किया और चुपचाप खाने लगा। अभी अवनि और पृथ्वी खाना खा ही रहे थे कि तभी डोरबेल बजी
“मैं देखता हूँ”,पृथ्वी ने उठते हुए कहा
पृथ्वी ने आकर दरवाजा खोला सामने एक बार फिर नीलम भुआ खड़ी थी जिन्हे देखकर पृथ्वी के चेहरे के भाव बदल गए। नीलम भुआ ने पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी साइड हो गया और वे अंदर चली आयी।
पृथ्वी को नहीं पता था वे क्यों आयी है और अवनि ने जब उन्हें देखा तो खाना छोड़कर उठ खड़ी हुई। नीलम भुआ हॉल में चली आयी उनकी नजर टेबल पर रखे खाने पर गयी और उन्होंने टेबल पर पड़े भरवा करेले देखे तो उनके मुँह में पानी आ गया लेकिन अगले ही पल नजर पड़ी पृथ्वी के खाने की थाली पर जिसमे करेला परोसा हुआ था और ये देखकर नीलम भुआ ने पृथ्वी को ताना मारकर कहा,”क्या बात है पृथ्वी ? इस लड़की के प्यार में अब तुमने ये सब भी खाना शुरू कर दिया,,,,,,,,वहा बेचारी मेरी वहिनी तुम्हारे खाने के नखरे झेलती रहती थी और यहाँ तुम मैडम के प्यार में करेला भी खा रहे हो”
आप फिर से यहाँ क्यों आयी है ?”,पृथ्वी ने खुद को मुश्किल से काबू में रखकर कहा
“मुझे कोई शौक नहीं है बार बार यहाँ आने का , तुम्हारे नाम से ये कुछ पेपर्स आये थे घर पर,,,,,, घर से कोई भी तुम्हारे यहाँ आने को तैयार नहीं था और तुम्हे वो अपने घर में आने नहीं देंगे तो सोचा क्यों ना मैं ही तुम्हे ये देने चली आउ , इसी बहाने तुम्हारे हाल चाल भी ले लुंगी,,,,,,,,,तुम्हे हम सबकी परवाह नहीं है लेकिन हमे तो है”,नीलम ने पेपर्स पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिए और एवं और अवनि की तरफ देखा तो अवनि ने नजरे झुका ली
अवनि को पता ही नहीं था कि नीलम की नजर तो टेबल पर रखे करेलो पर है।
नीलम को अवनि की ओर देखते पाकर पृथ्वी ने कहा,”उसे घूरना बंद कीजिये”
“हाह ! तुम्हे लगता है मैं उसे देखूंगी , वो इतनी सुंदर भी नहीं है”,निकल भुआ ने टेबल से नजरे हटाकर कहा
“मेरे लिए है,,,,,,,,मेरे लिए वो दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की है,,,,,,,,अब आप यहाँ से जाईये”,पृथ्वी ने कहा
“रुकना चाहता भी कौन है ? वैसे मैं देख रही हूँ पृथ्वी तुम दिन ब दिन कुछ ज्यादा ही बद्तमीज होते जा रहे हो,,,,,,,,!!!”,नीलम ने कहा और वहा से चली गयी
पृथ्वी ने जाकर दरवाजा बंद किया और वापस आकर अपना खाना खाने लगा तो अवनि ने कहा,”तुम्हे उन्हें ऐसे बात नहीं करनी चाहिए पृथ्वी वो तुम्हारी भुआ है”
“अगर कोई आपसे बदतमीजी करेगा तो फिर मुझे जवाब देना पडेगा अवनि,,,,,,,,आप मेरी जिम्मेदारी है और मैं बस अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूँ,,,,,,,करेला अच्छा बना है”,पृथ्वी ने कहा और मुस्कुरा उठा
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और अपना खाना खाने लगी
रवि जी का घर
“आपने पृथ्वी को वो पेपर्स दिए ना दीदी”,लता ने पूछा
“हाँ वहिनी ! मैंने वो पेपर्स पृथ्वी को दे दिए और वो लड़की भी उसके साथ ही थी ,,, देखना वो पेपर्स देखने के बाद वो लड़की खुद पृथ्वी को उन पर साईन करने से मना कर देगी,,,,,,,!!!”,नीलम भुआ ने मुस्कुरा कर कहा
“अच्छा वो वही थी ! और क्या देखा आपने ?”,लता ने पूछा
“भरवा करेला ! वहिनी उसने खाने में आज करेला बनाया था , देखने में बहुत ही जायकेदार लग रहा था ,, लगता है उसने कुछ स्पेशल मसाले डाले है वरना वो इतना लजीज नहीं दिखता”,नीलम भुआ ने अवनि के बनाये करेलो को याद करके कहा
“पृथ्वी करेला खा रहा है , पक्का उस लड़की ने उस पर कोई जादू किया है,,,,,,!!”,लता बड़बड़ायी और जब उन्होंने नीलम को करेले की तारीफ करते सुना तो उन्हें झिड़ककर कहा,”ताई ! मैंने आपको वहा पृथ्वी को देखने भेजा था और आप यहाँ आकर उसके बनाये करेलो की तारीफ कर रही है”
लता खीजकर चली गयी और नीलम पीछे से बड़बड़ायी,”लेकिन वो सच में अच्छे दिख रहे थे,,,,,,!!
( क्या पृथ्वी बचा पायेगा अवनि को सोसायटी वालो की नजर से ? क्या पृथ्वी की शरारते बदल देगी अवनि का मन और अवनि हो जाएगी मजबूर उसके करीब आने के लिए ? आखिर लता ने नीलम के हाथ कौनसे पेपर भिजवाए पृथ्वी को ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
